Showing posts with label Dev Anand. Show all posts
Showing posts with label Dev Anand. Show all posts

Sunday, 10 August 2025

देवानंद के बेटे सुनील आनंद की फ्लॉप फिल्म आनंद और आनंद !



फिल्म निर्माता, निर्देशक और अभिनेता देव आनंद निर्मित और निर्देशित फिल्म आनंद और आनद १० अगस्त १९८४ को प्रदर्शित हुई थी।  सामान्य रूप से, देव आनद अपनी फिल्मों की कहानियों के सह लेखक अवश्य हुआ करते थे।  किन्तु, आनंद और आनंद पहली ऐसी फिल्म थी, जिसके सह लेखक देवानंद नहीं थे।  फिल्म आनंद और आनंद को लेखक सूरज सनीम ही थे।





फिल्म आनंद और आनद कई कारणों से विशिष्ट बन गई थी।  इस फिल्म से, देवानंद अपने पुत्र सुनील आनंद का हिंदी दर्शकों से परिचय कराना चाह रहे थे।  अपनी निर्मित फिल्मों के द्वारा नई अभिनेत्रियों का बॉलीवुड से परिचय करवाने वाले देवानंद ने अपने पुत्र का परिचय एक नए चहरे के साथ ही किया था। यह चेहरा था नताशा सिन्हा का।





नताशा सिन्हा कलकत्ता में १९८० में हुई एक प्रतिभा खोज प्रतियोगिता का परिणाम थी।  उन्होंने अभिनेता इन्दर ठाकुर के साथ इस प्रतियोगिता को जीता था।  इंदिरा ठाकुर कोई फिल्म नदिया के पार से पहले मौका मिल गया।  वह एक विमान दुर्घटना में ३२ साल की आयु में स्वर्ग सिधार गए थे। नताशा सिन्हा को १९८४ में देवानंद ने अवसर दिया। किन्तु, वह और इन्दर ठाकुर बॉलीवुड में सफल न हो सके। 





आनंद और आनंद की मूल कथा भाई बहनों के प्यार की थी। यद्यपि इसी फिल्म से सुनील आनंद का दर्शकों से परिचय कराना था।  फिल्म में देवानंद का साथ उनकी खोज टीना मुनीम थी। किन्तु, बाद में देवानंद ने फिल्म का कथानक रोमांटिक बना दिया।





इसका नुकसान फिल्म को झेलना पड़ा। दर्शक फिल्म को दर्शक देश परदेश, लूटमार और मनपसंद की टीना मुनीम और देवानंद की रोमांटिक जोड़ी के कारण देखना चाहते थे। किन्तु, सुनील आनंद और नताशा सिन्हा की नई जोड़ी के कारण दर्शकों को बहुत निराशा हुई।  फिल्म बुरी तरह से असफल हुई।





आनंद और आनंद नवोदित सुनील आनंद के लिए वॉटरलू फिल्म साबित हुई।  इस फिल्म के आबाद सुनील ने दो फिल्मे कार थीफ और मैं तेरे लिए भी की। किन्तु, यह दोनों फिल्मे भी  असफल हुई।सुनील ने फिल्म मास्टर से निर्देशन के क्षेत्र में भाग्य आजमाया।  किन्तु, असफल रहे।





आनंद और आनंद से, सुनील आनंद और नताशा सिन्हा के साथ गायक अभिजीत भट्टाचार्य की आवाज का भी दर्शकों से परिचय कराया जाना था।  अभिजीत को देवानंद जैसे निर्माता और आर डी बर्मन जैसे संगीत निर्देशक के साथ अवसर मिल रहा था। इसलिए, उनके साथ शर्त रखी गई थी कि आनंद और आनंद के रिलीज़ होने से पहले वह किसी दूसरी फिल्म में नहीं जाएंगे।  किन्तु, अभिजीत ने दूसरी फिल्म के लिए गया ही, फिल्म आनंद और आनंद कसे पहले ही रिलीज़ भी हो गई।  इसके बाद, बॉलीवुड ने अभिनीत पर सात साल का प्रतिबन्ध लगा दिया।





आनंद और आनंद में पहली बार देवानंद और बिस्वजीत एक साथ आये थे।  यह राजबब्बर की देवानंद के साथ पहली फिल्म थी। जबकि, यह फिल्म राखी गुलजार की देवानंद के साथ अंतिम फिल्म बन गई। बताते हैं कि इस फिल्म में स्मिता पाटिल ने पहली बार पाश्चात्य वस्त्र पहने थे। 





फिल्म की एक अन्य विशेषता यह थी कि साठ और सत्तर के दर्शक के रोमांटिक नायक बिस्वजीत फिल्म में खल भूमिका कर रहे थे।  इस फिल्म में राजबब्बर ने एक अभिनेत्री के साथ काफी बोल्ड दृश्य किये थे। इस फिल्म में, किशोर कुमार और अभिजीत ने अपने गायक जीवन का इकलौता गाना साथ गया था।