Monday, 6 July 2026

#ZEE5 से बाहर #DiljitDosanjh की #Satluj



ओटीटी प्लेटफार्म जी५ ने दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज (पहले पंजाब ९५) को सिर्फ़ ४८ घंटे बाद अपने इंडियन प्लेटफॉर्म से हटा दिया है। ज़ी५ के इस फैसले की निंदा की जा रही  है। इसे फिल्म की बिना कट वाली ओटीटी रिलीज़ के बावजूद क्रिएटिव फ्रीडम के लिए एक झटका बताया गया है।





सतलुज, जसवंत सिंह खालरा की बायोग्राफिकल ड्रामा है, जो एक ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट थे, जिन्होंने 1990 के दशक में पंजाब में खालिस्तानी आतंकवाद के दौरान कथित एक्स्ट्राज्यूडिशियल हत्याओं को डॉक्यूमेंट किया था। उन्हें एक दिन पंजाब पुलिस ने घर के बाहर से उठा लिया। उसके बाद जसवंत को कोई पता नहीं चला।





उन पर इस फिल्म सतलज को, तीन साल तक भारतीय सेंसर बोर्ड से लड़ाई झेलनी पड़ी। सेंसर ने १२० से ज़्यादा कट्स की मांग की थी। इसी कारण से फिल्म के शीर्षक को बदलना पड़ा।  इसके बावजूद फिल्म थिएटर में रिलीज़ नहीं हो पाई ।





इस तेज़ी से हटाए जाने से ऑनलाइन अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं आई हैं, जिसमें सपोर्टर्स ने सरकार के कामों को ईमानदारी से दिखाने की तारीफ़ की है और क्रिटिक्स का कहना है कि यह उस समय की हिंसा की एकतरफ़ा कहानी पेश करती है, जिसमें आम लोगों की मिलिटेंट हत्याओं पर बात नहीं की गई है।






जसवंत सिंह खालरा एक सिख ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट और पंजाब के अमृतसर के खालरा गाँव के पूर्व बैंक कर्मचारी थे। पंजाब में सिख आतंकवाद के दौरान गायब हुए हजारों लोगों की घटनाओं से प्रेरित होकर, उन्होंने म्युनिसिपल रिकॉर्ड का इस्तेमाल करके पंजाब पुलिस द्वारा हज़ारों कथित एक्स्ट्राज्यूडिशियल हत्याओं और गुप्त दाह संस्कारों को डॉक्यूमेंट किया, जिसका अनुमान है कि ज़िलों में २५ हजार से ज़्यादा अज्ञात शवों का दाह संस्कार किया गया।






उनकी रिसर्च, जिसे इंटरनेशनल लेवल पर शेयर किया गया, ने १९८४ की घटनाओं के बाद ज़बरदस्ती गायब किए गए लोगों और पुलिस की ज़्यादतियों को हाईलाइट किया। सुप्रीम कोर्ट की एक पिटीशन के कारण सीबीआई और ह्यूमन राइट कमीशन ने जांच शुरू की। इस जांच में सीबीआई ने अकेले एक ज़िले में २०९७ गैर-कानूनी दाह संस्कारों की पुष्टि की। खालरा को धमकियाँ मिलीं लेकिन उन्होंने अपना काम जारी रखा।





जसवंत सिंह को, सितंबर १९९५ पंजाब पुलिस ने उनके घर के बाहर से किडनैप कर लिया, टॉर्चर किया और मार डाला। उनका मृत शरीर कभी नहीं मिला । २००५ में उनकी हत्या के लिए छह अधिकारियों को दोषी ठहराया गया तथा उन्हें उम्रकैद या उससे कम की सज़ा दी गई। उनकी विधवा परमजीत कौर वकालत करती रहती हैं। 

#ShahidKapoor के करियर के लिए महत्वपूर्ण है #JanhviKapoor के साथ #AdalBadal !



बॉलीवुड फिल्म अभिनेता शाहिद कपूर के लिए, निर्माणाधीन फिल्म अदल बदल उनके फिल्म जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।  उनकी विगत कुछ फिल्मे जर्सी, ब्लडी डैडी, देवा और ओ रोमियो बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुँह गिरी थी। उनकी फिल्म तेरी बातों में ऐसा उलझा और कॉकटेल २ बॉक्स ऑफिस पर औसत गई थी। शाहिद कपूर के लिए यह बहुत जरुरी है कि वह कोई एकल नायक हिट फिल्म दें। अदल बदल, उनके करियर के लिए ऐसा प्रोजेक्ट साबित हो सकती है।





 

कागज पर पढ़े तो अदल बदल का कथानक पर्याप्त रोचक और मनोरंजक प्रतीत होता है। धुआंधार हास्य से भरपूर इस फिल्म को आत्माओं की अदला बदली बताया जा रहा है। इस अदल बदल का परिणाम पहचान बदलना तो है ही, वही इस स्थिति में उथल पुथल मच जाती है।  इस अदल बदल से उपजी भ्रान्ति हास्य से भरपूर घटनाक्रम भी ले आते है।




   

विगत दिनों, फिल्म अदल बदल के पोस्ट को अमेज़न एमजीएम स्टूडियोज और सुनीर खेतरपाल ने जारी किया है। इस पोस्टर में शाहिद कपूर और जान्हवी कपूर एक दूसरे से सटे हुए हास्य मुद्रा में दिखाए गए है। इस पोस्टर में एक गोल तीर के माध्यम से दोनों के शरीर के अदल बदल का संकेत दिया गया है। इससे साफ है कि अमित शर्मा की यह फिल्म दो शरीरो की नहीं, बल्कि दोनों शरीरों की आत्माओं की अदल बदल का कथानक है। 





यद्यपि, फिल्म का कथानक रोचक लगता है। लेकिन, इसे घिसापिटा समझने वालों की भी कोई कमी नहीं है। उनके लिए यह चालबाज़, जुड़वाँ, आदि जैसी फिल्म प्रतीत होती है। इस भ्रान्ति से अमित रविन्दरनाथ शर्मा के लिए परीक्षा की स्थति बन गई है। वह इस फिल्म के लेखक और निर्देशक है। उन्होंने बधाई हो जैसी राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता फिल्म को लिखा और निर्देशित किया है। उनमे सामर्थ्य और प्रतिभा है। बस उन्हें अदल बदल में एक बार फिर दिखाना है। क्या वह एक बार फिर इसे दोहरा पाएंगे ? 





बॉलीवुड में शुद्ध बॉडी/आत्माओं की अदल बदल वाली फिल्में नाम मंत्र की बनी  हैं।बॉलीवुड फिल्म दर्शको ने अदल बदल के नाम पर जुड़वां चरित्रों की अदल बदल वाली चालबाज़, सीता और गीता, जुड़वां,  आदि फिल्मो को ही स्वैप फिल्म या रोल रिवर्सल फिल्म बता कर परदे पर उतारा है। 




    

बॉलीवुड में बॉडी स्वैप फिल्मेंबॉलीवुड में शुद्ध बॉडी स्वैप कम हैं। चालबाज़ (१९८९) और जुड़वा सीरीज जुड़वाँ शरीर की अदला बदली पर आधारित कॉमेडी ऑफ़ एरर फ़िल्में थी। राजेंद्र कुमार और सायरा बानू की फिल्म झुक गया आसमान (१९६८) में एक मृत व्यक्ति की आत्मा को दूसरे हमशक्ल मृत व्यक्ति के शरीर में डाल देते हैं।  वह २०१६ की फिल्म की एंड का में लिंग की अदला बदली का कथानक था। शाहिद कपूर और जाह्नवी कपूर की आगामी फिल्म अदला बदली को भी इसी कड़ी में सम्मिलित किया जा सकता है।   






हॉलीवुड बॉडी स्वैप (अदल बदल) के उत्कृष्ट उदाहरण  

फ्रीकी फ्राइडे (१९७६ और २००३)- १९७२ में प्रकाशित एक उपन्यास पर, १९७६ में फिल्म का निर्माण हुआ।  इसके बाद २००३ में इस फिल्म को रीमेक किया गया। यह फिल्म एक दुर्घटना के बाद, माँ बेटी की अपने शरीर की अदला बदली की उत्कृष्ट कॉमेडी फिल्म मानी जाती है। 





बिग (१९८८)- टॉम हैंक्स अभिनीत इस फिल्म में एक बच्चा जल्दी ही वयस्क बनने की इच्छा रखता है। वह एक मशीन की सहायता से बड़ा हो जाता है। इस फिल्म को अच्छी सफलता मिली थी। 





वाईस वर्सा (१९८८)- इस फिल्म में एक तिब्बत्ती की खोपड़ी पकड़ने के बाद बाप बेटा अपने शरीर बदल लेते है।



  

आल ऑफ़ मी (१९८४)- इस हास्य फिल्म में आत्माओं की अदला बदली होती है। 





द चेंज-अप (२०११)- यह फिल्म दो मित्रों के द्वारा अपने शरीर की अदला बदली की हास्य कथा थी।  

Sunday, 5 July 2026

#Priyadarshan के #WickedSunny होंगे #AkshayKumar !



कोई २२ साल पहले,  ३० जुलाई २००४ को प्रदर्शित फिल्म मुझसे शादी करोगी का अतीत एक बार फिर आँखों के सामने घूम गया है।  इसका कारण है, निर्देशक प्रियदर्शन द्वारा घोषित फिल्म विकेड सनी।  प्रियदर्शन ने अपनी इस कॉमेडी फिल्म का नायक अक्षय कुमार को भी बनाया है।  मुझसे शादी करोगी की याद आने का कारण यही है। 





डेविड धवन निर्देशित और अनीस बज्मी की लिखी फिल्म मुझसे शादी करोगी में प्रियंका चोपड़ा के दो नायक सलमान खान और अक्षय कुमार थे।  सलमान खान ने  जल्द ही अत्यंत क्रोध में आ जाने वाले युवा समीर की भूमिका की थी।  इस फिल्म में अक्षय कुमार भी सलमान खान की तरह प्रियंका चोपड़ा से प्रेम करते है।  फिल्म में अक्षय कुमार के चरित्र का नाम सनी था।  





दरअसल, अक्षय कुमार ही समीर यानि सलमान खान के बचपन के दोस्त अरुण थे, जो समीर के क्रोध के कारण उसे छोड़ कर चला गया था।  लम्बे समय बाद, अरुण ही चालाक सनी बन कर वापस आता है और समीर के गुस्से को नियंत्रित कर  उसको उसका प्यार दिलवाता है।  





सनी, फिल्म मुझसे शादी करोगी का कल्ट कैरेक्टर था।  इस चरित्र को स्टैंडअलोन फिल्म का नायक बनाना, प्रियदर्शन का एक चतुर निर्णय है।  इस प्रकार से वह, २२ साल पहले रिलीज़ फिल्म की याद तो ताजा  करवाते ही है, इस फिल्म में अक्षय कुमार के सनी की याद भी ताजा करवा देते है। यही कारण है कि फिल्म को इसकी घोषणा के साथ ही हाथों हाथ लिया गया है।  





जो भी हो, विकेड सनी में अक्षय कुमार, ठेठ मुझसे शादी करोगी के अरुण उर्फ़ सनी के चोले में नहीं होंगे।  बताते हैं कि२फ़िल्म में वह विचित्र हास्य अवतार में होंगे। इस चरित्र को भूत बंगला और वेलकम टू द जंगल जैसी हालिया प्रदर्शित हास्य फिल्मों में उनके निभाए गए चरित्रों से बिल्कुल अलग होगा।





विकेड सनी, अक्षय कुमार और प्रियदर्शन की, टिप्स फिल्म्स  द्वारा समर्थित हास्य थ्रिलर फिल्म होगी। इस फिल्म को रोहन शंकर के साथ प्रियदर्शन ने लिखा है। टिप्स फिल्म्स ने कभी एक से बढ़ कर एक मनोरंजक संगीतमय रोमांस फिल्मों का निर्माण किया था।  यह परियोजना, अक्षय कुमार-प्रियदर्शन जोड़ी का नौंवा सहकार है। इस फिल्म में बढ़िया हास्य व्यंग्य और रहस्य का तड़का भी होगा। इस फिल्म की शूटिंग इस साल दिसंबर से प्रारम्भ हो जाएगी। 

इमरान हाशमी की #ROOH, हॉरर जॉनर में वापसी ?

 


क्या इमरान हाशमी हॉरर जॉनर में वापसी कर रहे हैं? उनकी विगत दिनों घोषित फिल्म रूह का निर्देशन प्राइम वीडियो की  प्रसिद्ध ब्रीद फ्रैंचाइज़ी के क्रिएटर डायरेक्टर मयंक शर्मा करेंगे।  इस फिल्म को मयंक शर्मा ने विशाल कपूर के साथ लिखा है। विशाल कपूर की लिखी लपाछपी और चोरनी सफल रही थी।  फिल्म का निर्माण विक्रम खाखर और सनी खन्ना कर रहे है। यह फिल्म हिंदी, तमिल और तेलुगु भाषा में निर्मित होगी।  फिल्म २०२७ में प्रदर्शित होगी।




 

इमरान हाशमी ने राज़ सीरीज़ और डायबुक जैसी फिल्मों के ज़रिए इंडियन हॉरर में एक मज़बूत पहचान बनाई है, जिससे यह एक खास जॉनर वापसी है। 





इमरान हाशमी की हॉरर लेगेसी ने पिछले कुछ सालों में इंडियन हॉरर/सुपरनैचुरल थ्रिलर में एक मज़बूत पहचान बनाई है। उनकी फिल्मों में, रोंगटे खड़े कर देने वाली परफॉर्मेंस, रोमांस, सस्पेंस और डर का मिक्स होता था । उन्होंने अपने करियर की शुरुआत में ओरिजिनल राज़ में असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर भी काम किया, इससे पहले कि वे इस जॉनर के नायक बन गए। उनकी अभिनीत हॉरर फिल्मों में राज़: द मिस्ट्री  कंटिन्यूज़,  राज़ ३, एक थी डायन, राज़ रीबूट, डायबुक, उल्लेखनीय है।    





 

फैंस और इंडस्ट्री की आवाज़ें अक्सर इस बात पर ज़ोर देती हैं कि "जब हॉरर फिल्मों की बात आती है तो कोई भी इमरान हाशमी का मुकाबला नहीं कर सकता" क्योंकि वह ऐसे प्रोजेक्ट्स में एक इंटेंस, डरावना वाइब लाते हैं।





रूह को इस लेगेसी में एक नए एडिशन के तौर पर रखा गया है, जो इमोशनल गहराई, ओरिजिनल म्यूजिक (हॉटिंग चार्ट-टॉपर्स की उम्मीदों के साथ), और इनोवेटिव डरावने सीन का वादा करती है। यह पैन-इंडियन म्यूजिकल हॉरर अप्रोच इस जॉनर में हाशमी के लिए एक रोमांचक बदलाव ला सकता है। उनके फैंस के लिए रोमांचक समय! 





भारत में भयावनी फिल्मों का चलन १९४० के दशक से ही प्रारम्भ हो गया था।  ऎसी पहली गीत संगीत से युक्त भयावनी फिल्म कमाल अमरोही की अशोक कुमार और मधुबाला अभिनीत फिल्म महल थी। इस फिल्म के आएगा आने वाला आएगा गीत भूतिया रोमांस को उत्साहित करने वाला था। बिमल रॉय निर्देशित फिल्म मधुमती भी इसी परंपरा में फिल्म थी। १९६२ प्रदर्शित, हेमंत कुमार द्वारा निर्मित और बिरेन नाग निर्देशित फिल्म बीस साल बाद ने इस प्रकार की संगीतमय भूतिया फिल्मो का प्रचलन ला दिया।   





१९७०- १९९० के दशक में  रैमसे ब्रदर्स की कम बजट की हॉरर फिल्मों में अक्सर गानों के साथ सेक्स अपील की ठंडक भी होती थी। राजकुमार कोहली की नागिन और जानी दुश्मन जैसी सितारा बहुल फिल्मों ने म्यूज़िकल नंबर्स के साथ बॉक्स-ऑफिस पर हिट फिल्में दे कर हॉरर को ए ग्रेड सितारों वाली फिल्मों  की शैली बना दिया।  





यद्यपि, इमरान हाशमी राज फ्रैंचाइज़ी की पहली फिल्म राज के नायक नहीं थे। किन्तु,  उन्होंने राज़ फ्रैंचाइज़ का दौर प्रारम्भ कर दिया। राज़ सीरीज़ फिल्मों ने शानदार निर्माण, सुपरनैचुरल रोमांस और चार्ट-टॉपिंग साउंडट्रैक के साथ हॉरर को फिर से ज़िंदा किया। इमरान हाशमी की एंट्रीज़ यादगार गानों के साथ इंटेंस वाइब्स के लिए जानी गईं। यहाँ हॉरर फ़िल्मों में अक्सर रोमांस, इरॉटिकिज़्म और डर का मिक्स होता है, और टेंशन बढ़ने से पहले इमोशनल हाई के लिए गानों का इस्तेमाल किया जाता है।





हॉरर-कॉमेडी फ्यूज़न वाली भूल भुलैया सीरीज़ जैसी फ़िल्मों में डांस नंबर और गाने बहुत ज़्यादा होते हैं जो कहानी को आगे बढ़ाते हैं या डराते हुए कॉमिक रिलीफ देते हैं। म्यूज़िक वीडियो-स्टाइल सीक्वेंस कहानी के एलिमेंट्स दिखाते हैं या सस्पेंस बनाते हैं। 




 

हाल ही में मलयालम फिल्म करक्कम को पहली म्यूज़िकल हॉरर कॉमेडी  के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। इस फिल्म में हॉरर, कॉमेडी, फैंटेसी, म्यूज़िक और इमोशन को मिलाकर एक ताजा सिनेमाई अनुभव दिया गया है। 

 




ऐसा प्रतीत होता है कि इमरान हाशमी की हिंदी के अतरिक्त तेलुग और तमिल भाषा में प्रदर्शित की जाने वाली फिल्म रूह हाइब्रिड एंटरटेनमेंट वाली फिल्म होगी।  इस फिल्म में न केवल डरवाने दृश्य और घटनाएं होंगी, बल्कि कर्ण  प्रिय संगीत होगा और भावनाओं का ज्वार भी होगा। यह मिश्रण पैन इंडिया फिल्मों के अनुरूप है।  ऐसी फ़िल्में इमरान हाशमी की फिल्मों की परंपरा में ही है। तो क्या यह इमरान हाशमी की भय और संगीत शैली की फिल्मों में वापसी कही जाएगी? 

#HombaleFilms और #Parasuram की फिल्म में #HrithikRoshan

 


अपुष्ट समाचार हैं कि बॉक्स ऑफिस पर धमाका होने जा रहा है। यह धमाका एक अखिल भारतीय फिल्म के माध्यम से होगा, जिसकी शीघ्र ही घोषणा हो सकती है। 





सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में दावा किया गया है कि बॉक्स ऑफिस पर ज़बरदस्त धमाका सुनने के लिए तैयार हो जाइए! ऋतिक रोशन एक बड़े पैन-इंडिया प्रोजेक्ट के लिए ब्लॉकबस्टर डायरेक्टर परशुराम के साथ काम करने की तैयारी कर रहे हैं। 





अभी तक बॉलीवुड फिल्मों तक ही सीमित हृथिक रोशन, पहले बार किसी दक्षिण के किसी बैनर की फिल्म में काम करने जा रहे है।  बड़ी बात यह है कि इस अखिल भारतीय बहु भाषीय फिल्म के निर्माता केजीएफ, सालार और कांतारा फिल्मों के निर्माता होम्बले फिल्म्स है।  यदि बात बानी तो हृथिक की फिल्म का निर्देशन गीता गोविन्दम, सरकारू वारी पाटा के निर्देशक परशुराम करेंगे।





बताते चलें कि  होम्बले फिल्म्स ने इस फिल्म के बारे में मई २०२५ में ही संकेत दिया था। उन्होंने बताया था कि वह हृथिक रोशन के साथ अगली फिल्म करने जा रहे है। अब की घोषणा से स्पष्ट है कि फिल्म का निर्देशन तेलुगु फिल्म निर्देशक परशुराम करेंगे।





परशुराम ने अब तक आठ फिल्मों का निर्देशन किया है। इन फिल्मों में वह रवि तेजा, नयनतारा, काजल अग्रवाल, अल्लू शिरीष, लावण्या त्रिपाठी, विजय देवराकोण्डा, रश्मिका मंदना,  महेश बाबू, कीर्ति सुरेश और मृणाल ठाकुर को निर्देशित कर चुके है। यह फ़िल्में एक्शन, रोमांस, हास्य और थ्रिलर शैली की फिल्मे थी। 






हृथिक रोशन की कथित फिल्म की घोषणा अभी नहीं हुई है।  किन्तु, बताया जा रहा है कि   पावरहाउस प्रोडक्शन हाउस होम्बले फिल्म्स  की इस फिल्म स्केल बड़ा भारी होगा तथा इसमें भव्यता होगी। यह केवल  एक  फिल्म नहीं, एक घटना होगी । ऋतिक रोशन का बेजोड़ स्टारडम और स्क्रीन प्रेजेंस, परशुराम की जनता की नब्ज पहचानने की क्षमता और सफल  फिल्मे दे चुके निर्माता  का पारस स्पर्श एक ऐसा सहकार बनाएगा, जो सारे कीर्तिमान तोड़ देगा।  

#SheenaChohan : #PankajParashar की वेब सीरीज की खलनायिका !


 

नसीरुद्दीन शाह के साथ, अर्चना पूरन सिंह को नायिका बना कर जलवा जैसी विचित्र हास्य फिल्म का निर्माण करने वाले निर्देशक पंकज पराशर ने, रजनीकांत और सनी देओल के साथ श्रीदेवी की दोहरी भूमिका वाली चालबाज़ का निर्माण कर अनोखा सफल प्रयोग किया था। उन्होंने फिल्म हिमालय पुत्र से विनोद खन्ना पुत्र अक्षय खन्ना का पहला परिचय दर्शकों से कराया था। बनारस (२००६) उनकी अंतिम प्रदर्शित फिल्म थी। 





अब २० साल बाद, पंकज पराशर वापसी कर रहे हैं।  उनकी यह वापसी ओटीटी सीरीज से हो रही है।  यह सीरीज, विश्व के प्रमुख सीक्रेट एजेंट्स पर केंद्रित है।  इस सीरीज की शूटिंग सितम्बर से प्रारम्भ होगी। अभी यह ज्ञात नहीं हुआ है कि यह सीरीज की ओटीटी प्लेटफार्म पर स्ट्रीम होगी। 





किन्तु, यहाँ बात हो रही है इस सीरीज की खलनायिका की। पंकज पराशर की खलनायिका शीना चौहान है।  बॉलीवुड के फिल्म दर्शकों के लिए यह नाम बहुत परिचित नहीं। क्योंकि, उनकी एक ही फिल्म संत तुकाराम २०२५ प्रदर्शित हुई थी। इस फिल्म को हिंदी पेटी के बॉक्स ऑफिस पर सफलता नहीं मिली थी। किन्तु, समीक्षकों ने, अवली की भूमिका में शीना के अभिनय की सराहना की थी। 





शीना, ने बांग्ला, तमिल, तेलुगु और मलयालम फ़िल्में की है।  हिंदी दर्शक, उन्हें फिल्मों से नहीं, किन्तु वेब सीरीज के माध्यम से पहचानते होंगे। वह जन्नत, वन मोर, अमर प्रेम, रब्बिश और छोटू जैसी वेब सीरीज में मुख्य भूमिकाएं कर चुकी है। 




कई पुरस्कार जीत चुकी शीना को अपने गहन अभिनय, स्वयं को चरित्र के अनुरूप ढाल लेने की क्षमता, गहरी संवेदनशीलता के लिए पहचाने जाती है। उनका फिल्म डेब्यू मलयालम फिल्म द ट्रेन (२०११) से हुआ था। ११ जुलाई २००६ को मुंबई ट्रेन ब्लास्ट पर आधारित जयराज निर्देशित इस फिल्म में वह मम्मूट्टि की पत्नी की भूमिका में थी।  





शीना ने सात फीचर फिल्मों में मुख्य भूमिकाएं की हैं। इन फिल्मों में उन्हें भारत के पुरस्कार विजेता निर्देशकों के साथ काम करने का अवसर मिला।  वह ओटीटी पर सीरीज द फेम गेम में माधुरी दीक्षित और द ट्रायल में काजोल जैसी अभिनेत्रियों के अपोजिट कैमरा फेस कर चुकी है।  

Saturday, 4 July 2026

दूसरी छमाही में क्या युवा होंगे बॉलीवुड सितारे !

 



साल २०१६ के प्रथमार्ध में दर्शकों को कई दमदार कहानियां और यादगार अभिनय वाली फिल्में देखने को मिली। वहीं अब साल का दूसरा हिस्सा भी उतना ही रोमांचक होने वाला है। नई पीढ़ी के कई कलाकार अपनी अलग पहचान बना रहे हैं और कमर्शियल फिल्मों के साथ-साथ कंटेंट आधारित सिनेमा में भी बेहतरीन काम कर रहे हैं। बड़े पर्दे पर रिलीज़ होने वाली फिल्मों से लेकर महत्वाकांक्षी ओटीटी प्रोजेक्ट्स तक, ये युवा कलाकार अपने करियर के सबसे अहम दौर में प्रवेश कर रहे हैं।




 

चाहे बड़े कमर्शियल एंटरटेनर हों, भावनात्मक ड्रामा या अलग तरह की कहानियां, इन कलाकारों की आने वाली फिल्मों की लाइनअप इंडस्ट्री के बदलते दौर की झलक दिखाती है। नई प्रतिभाएं लगातार अपनी जगह बना रही हैं और दर्शकों को नए किरदार, नई कहानियां और भविष्य के बड़े सितारे देखने को मिलने वाले हैं।




 

आइए जानते हैं 2026 के दूसरे हाफ में किन युवा बॉलीवुड सितारों पर सबकी नजर रहने वाली है।

 





सुहाना खान – किंग - द आर्चिस से अपने अभिनय करियर की शुरुआत करने वाली सुहाना खान अब साल की सबसे बड़ी फिल्मों में से एक किंग में नज़र आएंगी। इस फिल्म में वह अपने पिता शाहरुख खान के साथ स्क्रीन शेयर करेंगी। एक्शन से भरपूर यह फिल्म 2026 की सबसे बहुप्रतीक्षित फिल्मों में शामिल है। इस फिल्म के ज़रिए सुहाना बड़े और मुख्यधारा के सिनेमा में अपनी नई पहचान बनाने के लिए तैयार हैं।

 






मिहिर आहूजा - ऑपरेशन सफेद सागर - मिहिर आहूजा ने द आर्चिस, विजय 69, मा का सम और हिंदी विन्दी जैसी फिल्मों में अपने शानदार अभिनय से दर्शकों का दिल जीता है। अब वह ऑपरेशन सफेद सागर में नज़र आएंगे। यह फिल्म उन्हें अपनी अभिनय क्षमता का एक और नया पहलू दिखाने का मौका देगी और बॉलीवुड के उभरते हुए प्रतिभाशाली कलाकारों में उनकी जगह को और मजबूत करेगी।

 





प्रगति श्रीवास्तव - जनादेश - प्रगति श्रीवास्तव भी इस साल की उभरती हुई प्रतिभाओं में शामिल हैं। उनकी आने वाली फिल्म जनादेश एक ऐसी कहानी है जिसमें अभिनय सबसे अहम भूमिका निभाता है। यह फिल्म उनके करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकती है।

 





बाबिल खान - दार्जिलिंग- बाबिल खान इस समय सबसे व्यस्त युवा कलाकारों में से एक हैं। एक नई वेब सीरीज़ के अलावा उनके पास एक मलयालम फिल्म और निर्देशक शूजीत सरकार की फिल्म दार्जिलिंग भी है। कला और लॉगआउट जैसे अलग तरह के किरदारों के ज़रिए बाबिल ने हमेशा नए प्रयोग किए हैं और लगातार अपनी अलग पहचान बनाई है।

 





वेदांग रैना - मैडॉक की अगली फिल्म - जिगरा और मैं वापस आऊंगा जैसी फिल्मों के बाद वेदांग रैना अब मैडॉक फिल्म्स की अगली फिल्म में मुख्य भूमिका निभाएंगे। मैडॉक लगातार सफल और मनोरंजक फिल्में बना रहा है, ऐसे में वेदांग की इस नई फिल्म से भी काफी उम्मीदें हैं।

 






अभय वर्मा - दिलकशी - अपनी बढ़ती लोकप्रियता के बीच अभय वर्मा अब दिलकशी लेकर आ रहे हैं। मुंज्या और ए वतन मेरे वतन जैसी फिल्मों में अपनी दमदार स्क्रीन प्रेजेंस से प्रभावित करने वाले अभय की यह नई फिल्म उनके करियर को नई ऊंचाई दे सकती है।

 





शनाया कपूर - जॉम्बी रेड्डी 2 - शनाया कपूर अब जॉम्बी रेड्डी 2 के जरिए एक नए जॉनर में कदम रखने जा रही हैं। आँखों की गुस्ताखियां और तू या मैं के बाद यह हॉरर-कॉमेडी फिल्म उन्हें एक अलग तरह का किरदार निभाने का मौका देगी और उनके अभिनय के दायरे को और बढ़ाएगी।

 





खुशी कपूर - मॉम 2 - द आर्चिस और लवयापा में अपने अभिनय से प्रभावित करने के बाद खुशी कपूर अब मॉम 2 में नज़र आएंगी। एक लोकप्रिय फिल्म के सीक्वल होने के कारण इस प्रोजेक्ट से दर्शकों की उम्मीदें काफी ज़्यादा हैं। अब सभी की नज़र इस बात पर होगी कि खुशी इस भावनात्मक और प्रतिष्ठित कहानी को किस तरह पर्दे पर पेश करती हैं।

Friday, 3 July 2026

क्या दर्शक स्वीकार करेगा #EmraanHashmi का #Awarapan 2 ?




इमरान हाशमी की, दिशा पाटनी के साथ रोमांटिक गैंगस्टर फिल्म आवारापन २ का टीज़र, २९ जून को जारी हुआ है।  इस टीज़र को आज तक १६ लाख से अधिक दर्शक देख  चुके है। किन्तु, फिल्म के प्रति दर्शकों में वह उत्साह नहीं है।  इसी उत्साह की कमी को देखते हुए यह पूछा जा रहा है कि क्या दर्शक इमरान हाश्मी के आवारापन को स्वीकार करेंगे ?





 

आवारापन २, २००७ में प्रदर्शित, इमरान हाश्मी की मोहित सूरी के निर्देशन में प्रदर्शित फिल्म आवारापन की सीक्वल फिल्म है। आवारापन को अपनी रिलीज़ के समय औसत या फ्लॉप फिल्म मना गया था।  किन्तु, बाद में इसे कल्ट फिल्म में सम्मिलित किया गया। फिल्म को कल्ट स्टेटस दिलाने वाले मुख्य तत्व प्रीतम का हिट संगीत था, जिन्हे लम्बे समय तक याद रखा गया था।






इसके अतिरिक्त इस फिल्म में, इमरान हाशमी अपनी चॉकलेटी इमेज से हटकर ब्रूडिंग, गॉडलेस गैंगस्टर शिवम पंडित की भूमिका कर रहे थे । उनकी आँखों में दर्द, खालीपन और ट्रांसफॉर्मेशन को दर्शकों ने बहुत पसंद किया ।  इसे उनके श्रेष्ठ अभिनय वाली फिल्मों में से एक मानते हैं।






इस फिल्म के चरित्रों में प्यार, मुक्ति, विश्वास, नास्तिकता, बलिदान और पराजय का मिश्रण था। इस फिल्म में हिंसक गैंगस्टर ड्रामा को भावुकता और आध्यात्मिकता का सहारा मिला था, जो इसे बॉलीवुड की गैंगस्टर फिल्मों से बिलकुल  भिन्न बनाता था। मोहित सूरी के  निर्देशन,हांगकांग की पृष्ठभूमि और मार्मिक संवादों ने फिल्म को अविस्मरणीय बना दिया। क्या आवारापन २ मे ऐसा प्रभावशाली मिश्रण होगा?






 

आवारापन २ का बजट ८० से १२० करोड़ के मध्य बताया जा रहा है। जबकि, २००७ में प्रदर्शित आवारापन का बजट १८ करोड़ के आसपास था। यो, विशेष फिल्म्स की फिल्में अपने नियंत्रित बजट के लिए प्रसिद्द है। किन्तु, आवारापन २ को बड़े पैमाने पर बनाया जा रहा है। मूल आवारापन के समय इमरान हाश्मी छोटे बजट की फिल्मों के अभिनेता थे। इस फिल्म में उनकी नायिका श्रिया सरन थी। इसके बावजूद फिल्म औसत/फ्लॉप मानी गई, लेकिन बाद में म्यूज़िक और कहानी की वजह से कल्ट क्लासिक बन गई।





 

 जबकि, आवारापन २ में भव्यता है। फिल्म में दिशा पाटनी उनकी नायिका है। दिशा पाटनी को एक विलेन रिटर्न्स और योद्धा के लिए ५ करोड़ मिले थे।  तमिल फिल्म कंगूवा में उन्हें छह करोड़ का साइनिंग अमाउंट मिला था। इमरान हाश्मी कल टाइगर ३ में विलेन की भूमिका के लिए १० करोड़ दिए गए थे। इस समय वह ७ से १५ करोड़ की फीस लेते है। स्पष्ट रूप से अन्य कलाकारों की फीस को सम्मिलित करें तो आवारापन का पूरा बजट दिशा पाटनी और इमरान हाश्मी की फीस में ही ख़त्म हो जाता है।





 

यद्यपि, आवारापन २ की शूटिंग राजस्थान में हुई है। किन्तु, इस फिल्म का ५० प्रतिशत हिस्सा बैंकाक में  शूट हुआ है। यहाँ पर फिल्म की शूटिंग पूरे एक महीने तक चलती रही थी। बाद में फिल्म को कुआलालम्पुर में फिल्माया गया था। इस प्रकार से फिल्म को अंतर्राष्ट्रीय स्तर देने का प्रयास किया गया ? 





एक बड़ा कारण यह भी है कि आवारापन २ में शिवम् पंडित की वापसी हो रही है।  यह वही गैंगस्टर शिवम् पंडित है, जो आवारापन में मार दिया जाता है।  आवारापन २ के  टीज़र में इमरान हाश्मी कहते सुनाई पड़ते हैं कि मौत भी  बड़ी अजीब चीज है। उसने मुझे छुआ जरूर पर अपनाया नहीं। क्या दर्शक १९ साल पहले मारे जा चुके शिवम् पंडित को इस तरह जीवित देखना स्वीकार करेगा ?




 

कहानी का पुरानापन और कमजोरी फिल्म को कमजोर कर सकती है।  पुरानी कहानी को दर्शक स्वीकार करेगा, कहा नहीं जा सकता है। इसके अतिरिक्त दिशा पाटनी कुछ प्रभाव छोड़ती नहीं दिखाई देती।  फिल्म का संगीत भी कमजोर है।   इमरान हाश्मी भी, विगत १९ सालों में शिवम् से काफी आगे निकल चुके है।  वह एक्शन भूमिकाएं कर रहे है। टाइगर ३ जैसी फिल्म में खलनायक भी बन चुके है।  अब उनके रोमांस में वह बात नहीं, जो आवारापन के समय थी। 

क्या #Pralay के #Zombie हैं #Dhurandhar एक्टर #RanveerSingh ?



समाचार है कि धुरंधर अभिनेता रणवीर सिंह, सितंबर से, निर्देशक जय मेहता की ज़ॉम्बी फ़िल्म 'प्रलय' शुरू करेंगे। इस समय, जय मेहता अपनी फिल्म की शूटिंग प्रारम्भ  करने की तैयारी में जुटे हुए है।  वह अपनी इस ज़ोंबी फिल्म की शूटिंग ऑस्ट्रेलिया से प्रारम्भ करेंगे। 






भारतीय सिनेमा के इतिहास की सबसे अधिक कारोबार करने वाली जासूसी एक्शन फ़िल्म धुरंधर के बाद, रणवीर सिंह पाकिस्तान के बाद, इस नई  दुनिया में क्या करने जा रहे हैं? क्या फिल्म प्रलय में,  फिल्म धुरंधर में भीषण रक्पात करने वाले हमजा की तरह मानव रक्त के प्यासे ज़ोम्बी बने हैं ? निसंदेह यह फिल्म ज़ोंबी जंतुओं की कयामत दिखाने वाली फिल्म है। किन्तु, रणवीर सिंह इस फिल्म में ज़ोंबी नहीं बने हैं।




  

यद्यपि, फिल्म प्रलय की शूटिंग ऑस्ट्रेलिया से शुरू हो रही है।  किन्तु, फिल्म का कथानक बर्बाद मुंबई की पृष्ठभूमि पर ज़ोंबी आतंक पर  फिल्म है।  पूरी फिल्म, ज़ोंबी के आतंक से वीरान पड़ी मुंबई पर केन्द्रित है। प्रलय एक कयामत के बाद की दुनिया में सेट है। इसमें एक डायस्टोपियन मुंबई की कल्पना की गई है जो ज़ॉम्बी से भरी हुई है और एक शादीशुदा जोड़ा उसमें ज़िंदा रहने के लिए संघर्ष कर रहा है। तीन सौ करोड़ के बजट के साथ, यह फ़िल्म रणवीर सिंह के फिल्म जीवन की सबसे महँगी एकल हीरो फिल्म है।






  

रणवीर सिंह, इसी दम्पति का पुरुष चरित्र कर रहे हैं।  बताते हैं कि फिल्म में रणवीर सिंह की पत्नी की भूमिका सुपरहिट मलयालम फिल्म लोक पार्ट १ चंद्रा की नायिका कल्याणी प्रियदर्शन कर रही है।  मलयालम फिल्मों और  विगत दिनों सुपरहिट हुई हिंदी फिल्म भूत बंगला के सुप्रसिद्ध निर्देशक प्रियदर्शन की इकलौती बेटी है कल्याणी प्रियदर्शन। वह अब  तक डेढ़ दर्जन मलयालम, तमिल और तेलुगु फ़िल्में कर चुकी है।  प्रलय उन की पहली बॉलीवुड फिल्म होगी। 






जय मेहता, अपनी फिल्म को स्वाभाविक और रोमांचक बनाने के लिए कुछ छोड़ना नहीं चाहते।  इस फिल्म की ऑस्ट्रेलिया में शूटिंग अनुभवी तकनीशियनों की देखरेख में होगी। यह फिल्म वीएफएक्स पर भी बहुत अधिक निर्भर करेगी। फिल्म के लिए द हंगर गेम्स की शैली में मुंबई की कल्पना की गई है। इसके लिए तबाह मुंबई सेट्स बनाए जायेंगे।  शहर के बड़े हिस्से को डिजिटल रूप से पुराना किया जाएगा ताकि इसे परित्यक्त रूप दिया जा सके।






भारतीय दर्शकों को, विदेशी ज़ोंबी चरित्र आकर्षित करता है।  अब तक संख्या में कम बनी फिल्म शैली वाली ज़ोम्बी फिल्मों को बॉक्स ऑफिस पर सफलता मिली है। इस  प्रकार की कुछ फिल्मों का विवरण निम्न प्रकार है -   





गो गोवा गॉन (२०१३) हिन्दी में निर्मित इस फिल्म के मुख्य कलाकार सैफ अली खान, कुणाल खेमू, वीर दास, आदि थे। यह भारत की पहली मुख्यधारा की एक्शन ज़ॉम्बी फ़िल्म मानी जाती है। यह एक हॉरर-कॉमेडी फिल्म  है, जिसमें गोवा की एक रेव पार्टी के दौरान एक नए ड्रग के कारण लोग ज़ॉम्बी बन जाते हैं।






ज़ॉम्बी रेड्डी (२०२१) तेलुगू में निर्मित और हिंदी में भी डब  फिल्म है।  इसके मुख्य कलाकार  तेजा सज्जा, आनंदी, दक्षा नगरकर हैं। प्रशांत वर्मा द्वारा निर्देशित यह तेलुगू सिनेमा की पहली ज़ॉम्बी फ़िल्म है। इसमें रायलसीमा क्षेत्र के गुटीय संघर्ष  को ज़ॉम्बी महामारी के साथ बेहद अनोखे और मनोरंजक तरीकों से जोड़ा गया है।






मिरुथन (२०१६) तमिल भाषा में निर्मित और हिंदी में डैरिंग रखवाला नाम से डब फिल्म है।  इस फिल्म के मुख्य कलाकार जयम रवि, लक्ष्मी , जैसे प्रतिष्ठित नाम है। यह तमिल सिनेमा की पहली ज़ॉम्बी फ़िल्म है। ओट में एक केमिकल लीक के कारण वायरस फैलता है, जिससे लोग ज़ोंबी बनने लगते है।






बेताल (२०२०) हिंदी भाषा में निर्मित नेटफ्लिक्स की वेब सीरीज़ है। इसके मुख्य कलाकार विनीत कुमार सिंह, अहाना कुमार हैं। तथापि यह फ़िल्म नहीं बल्कि सीरीज़ है, लेकिन भारतीय ज़ॉम्बी जॉनर में इसका बड़ा नाम है। इसमें ब्रिटिश काल के मरे हुए अनडेड सैनिक और उनके अधिकारी आधुनिक सैनिकों पर हमला करते हैं।






घोस्ट स्टोरीज़ (२०२०) हिंदी भाषा में निर्मित नेटफ्लिक्स सीरीज है। इस एंथोलॉजी फ़िल्म की दिवाकर बनर्जी द्वारा निर्देशित तीसरी कहानी पूरी तरह से ज़ॉम्बी विषय पर आधारित थी, जिसमें एक व्यक्ति ऐसे गाँव में पहुँचता है जहाँ लोग इंसानों को खा रहे होते हैं।





जी - ज़ॉम्बी (२०२१) तेलुगु भाषा में बनाई गई आर्यन गौरा, दिव्या पांडे की मुख्य भूमिका वाली फिल्म है। यह फिल्म मेडिकल थ्रिलर फिल्म है, जहाँ युवा डॉक्टरों की एक टीम इम्युनिटी वैक्सीन विकसित करने की कोशिश करती है, लेकिन वायरस की वजह से लोग ज़ॉम्बी बनने लगते हैं।

क्या कामुक हैं #ToxicTheMovie की #LadiesAndLadies ?



कन्नड़ सुपरस्टार यश की अखिल विश्व फिल्म टॉक्सिक, अपनी घोषणा के साथ ही चर्चा में आ गई थी।  दर्शकों को, केजीएफ फिल्मों के नायक यश की इस फिल्म की उत्सुकता से प्रतीक्षा थी।  किन्तु, १ जुलाई को फिल्म की महिला चरित्रों का  परिचय कराने वाला टीज़र जारी हुआ, यह फिल्म विवादित रूप से चर्चा में आ गई।  







टॉक्सिक अ फेयरी टेल फॉर ग्रोन अप्स को पावर और ग्लैमर का जबरदस्त जश्न बताया जा रहा है।  गीतू मोहनदास निर्देशित फिल्म टॉक्सिक में पांच महिला चरित्र है।  १ जुलाई को अनावृत टीज़र इन चरित्रों का परिचय करने वाला है।  समीक्षक इस टीज़र को महिला चरित्रों का विषैला परिचय बता रहे है।   






इसमें कोई संदेह नहीं कि इस टीज़र में शक्ति और सेक्सी  सौंदर्य का प्रभावशाली परिचय हुआ है।  यश का मरदाना जिस्म उनकी शक्ति और क्षमता का परिचय देता है।  उनको देखते हुए आप भयभीत भी हो सकते है।  यद्यपि, वह ऐसा कुछ करते दिखाई नहीं देते।  क्योंकि, वह फिल्म के गैंगस्टर तो हैं ही।  






कुछ समीक्षकों का मानना है कि फिल्म बताती है कि महिला चरित्रों को किस प्रकार से प्रस्तुत किया जाना चाहिए।  ऐसा, कदाचित इसलिए कहा जा रहा है कि फिल्म कोई निर्देशक गीतू मोहनदास स्वयं एक महिला है।  एक महिला दूसरी महिला की सेक्स अपील और कामुकता को भली भांति प्रस्तुत कर सकती है।  गीतू मोहनदास से पहले भी कई महिला फिल्म निर्देशक ऐसा दावा करती रही है। 






अखिल भारतीय और अखिल विश्व आकर्षण  वाली फिल्म टॉक्सिक अ फेयरी टेल फॉर ग्रोन अप्स में बॉलीवुड की किआरा अडवाणी, तारा सुतरिया और हुमा कुरैशी जैसी सेक्सी अभिनेत्रियां हैं तो दक्षिण से नयनतारा और रुक्मिणी वसंत का ग्लैमर भी है। फिल्म की इन महिला चरित्रों को, टीज़र में कुछ इस प्रकार से प्रस्तुत किया गया है कि वह कामुक भी दिखती है और यश जैसे गैंगस्टर से भिड़ जाने वाली शक्तिशालिनी सुंदरियाँ भी। 






क्या टॉक्सिक टीज़र सचमुच महिला चरित्रों की इतनी टॉक्सिक झलक दिखा जाता है कि होहल्ला मचा हुआ है ! टॉक्सिक का लेडीज एंड लेडीज प्रोमो ग्लैमरस, डार्क  विज़ुअल्स पर केंद्रित है। इससे फिल्म की पांच महिलाओं की सेक्सुअलिटी चित्रण पर शंका पैदा हो सकती है। किन्तु, ध्यान रहे कि टीज़र में कहीं भी नग्न या उकसाने वाले अंग प्रदर्शन नहीं है। 






आरोप लगाया जा रहा है कि टीज़र से, महिला  चरित्रों का ऑब्जेक्टिफिकेशन होता लगता है। जिस प्रकार से, यश पांच महिलाओं को युद्ध मुद्रा में अपने सामने देखते हैं, वह कहते हैं लेडीज एंड लेडीज ! क्या एक एक कर आओगी या पांचों एक साथ होगी।  लोग इसे द्विअर्थी बता रहे है। महिला चरित्रों को वस्तु की भांति प्रस्तुत करना बता रहे है। 






इस फिल्म के प्रारंभिक एक टीज़र में एक कार के दृश्य की आलोचना हुई थी। इसे मेल गेज़ बताया गया था।  मेल गेज़ का अर्थ फिल्मों में नारी चरित्र का पुरुष दृष्टि से कामुक चित्रण किया जाना।  इसमें नारी शरीर को वस्तु की तरह, पुरुष दर्शको की कामवासना उभाड़ने का प्रयास किया जाता है। 







जहाँ तक, महिला चरित्र का वस्तुकरण करने की बात है, इस प्रकार के चित्रण वाली कई फ़िल्में पहले भी बन चुकी है।  महेश भट्ट और उनकी कंपनी महिला चरित्र को मेल गेज़ की तरह ही प्रस्तुत करती थी।  जिस्म, मर्डर, आदि भट्ट कैंप की फ़िल्में ऐसा ही वस्तुकरण करने वाली होती थी। रामगोपाल वर्मा की फिल्म रंगीला मेल गेज़ का श्रेष्ठ उदाहरण है।  इस फिल्म की नायिका उर्मिला मातोंडकर अपने कामुक अंग प्रदर्शन और हाव भाव के कारण चर्चित हो गई थी। 






किन्तु, टॉक्सिक अ फेयरी टेल फॉर ग्रोन अप्स की गीतू मोहनदास मेल गेज़ के आरोपों को नकारते हुए इस फिल्म को फीमेल गेज़ फिल्म बताती है।  फीमेल गाजे की अवधारण स्थापित करती है कि किसी भी नारी में कामुकता होती है।  वह अपनी इस कामुकता को कैसे मिटाती है, वह उस  चरित्र पर निर्भर है।  गीतू मोहनदास अपनी फिल्म की नारी चरित्र के चित्रण को फीमेल प्लेज़र बताती है। यदि, कोई महिला अपनी कामुकता के चलते किसी पुरुष से सम्बन्ध बनाना चाहती है तो वह उसका अपना सुख है।  गीतू मोहनदास कहती है, "यह नारी सुख, सहमति और तंत्र का अपने अनुसार उपयोग करना है। फिल्म की महिलाएं सशक्त हैं और आत्मनिभर है।" 






गीतू मोहनदास की माने तो टॉक्सिक के महिला चरित्र यश के चरित्र के सेक्स गुलाम नहीं।  वह अपनी सहमति से सेक्स कर सकती है और सुख प्राप्त कर सकती है। वह तंत्र को अपने अनुसार उपयोग कर सकती है।  वह गहराई से भावुक है।  किन्तु, वास्तविकता क्या है, यह तो फिल्म प्रदर्शित होने के पश्चात् ही पता चलेगा।  इस समय तो टॉक्सिक विवादित हो चुकी है।  इससे फिल्म को भारी प्रचार मिला है और बड़ी ओपनिंग सुनिश्चित है। कदाचित फिल्मकार का उद्देश्य यही था।  इससे फिल्म वयस्कों के लिए प्रमाणपत्र प्राप्त करेगी। किन्तु, इससे क्या ? एनिमल भी तो वयवस्कों के लिए थी और कबीर सिंह भी। 

Wednesday, 1 July 2026

रिलीज़ से पहले पैसा वसूल हैं #Alpha और #BabyDoDie Do ?

इसमें कोई संदेह नहीं आज के सॅटॅलाइट युग में, भारत में बनी अधिकांश फ़िल्में छविगृहों में प्रदर्शन से पहले ही अपने बजट की काफी हद तक वसूली कर लेती है।  अधिकांश फिल्मे अपने बजट का ६० से ८० प्रतिशत तक  थिएटर्स में रिलीज होने से पहले ही डिजिटल और नॉन-थिएट्रिकल


 राइट्स बेचकर वसूल कर लेती है। यद्यपि, पूरी तरह से मुनाफे में आने और बॉक्स ऑफिस पर 'हिट' का टैग पाने के लिए उन्हें सिनेमाघरों में भी अच्छा प्रदर्शन करना पड़ता है।





इस  दृष्टि से, इस ३ जुलाई को प्रदर्शित होने जा रही दोनों फ़िल्में, क्या अपनी लागत का बड़ा हिस्सा अपने निर्माताओं को वापस दिलवा चुकी है ? इसके लिए इन दोनों फिल्मों का बजट और प्रदर्शन से पूर्व के विभिन्न प्रकार के अधिकारों को बेचने का गणित समझना होगा।





इस दृष्टि से बेबी डू डाई डू सुरक्षित लगती है। बेबी डू डाई डू  की निर्माण लागत मात्र २२ करोड़ रुपये है । निर्देशक के रूप में स्त्री २ के निर्देशक अमर कौशिक  का नाम जुड़ा होने के कारण इस फिल्म के ओटीटी अधिकार, सैटेलाइट अधिकार और म्यूजिक अधिकार  बहुत अच्छे दामों में बिके हैं। इस प्रकार से फिल्म ने रिलीज से पहले ही अपने २२ करोड़ के बजट का लगभग ७५ से ८० प्रतिशत अर्थात  १६ से १८ करोड़ इन अधिकारों को बेच कर आसानी से सुरक्षित कर लिया है।





अब बेबी डू डाई डू अपनी बाकी बची लागत और डिस्ट्रीब्यूशन कमीशन निकालने के लिए बॉक्स ऑफिस पर केवल १० से १५ करोड़ का शेयर अर्थात ३० से ३५ करोड़ का ग्रॉस कलेक्शन ही करना है। सप्ताहांत के १० करोड़ अनुमानित कारोबार को देखते हुए यह बहुत जल्द मुनाफा कमाने लगेगी।





वहीँ दूसरी ओर अल्फा भारी बजट, बड़ा जोखिम लागत वाली फिल्म लगती है। इस फिल्म की लागत ८० से १२० करोड़ के बीच की बताई जा रही है। चूंकि यह वाईआरएफ स्पाई यूनिवर्स की बड़ी फिल्म है, इसके ओटीटी और डिजिटल राइट्स की वैल्यू बहुत ज्यादा है। मार्केट रिपोर्ट्स के अनुसार, यशराज फिल्म्स ने इसके डिजिटल प्रीमियर के लिए एक लीडिंग प्लेटफॉर्म के साथ भारी-भरकम डील की है, जिससे बजट का ६५ से ७० प्रतिशत अर्थात लगभग ६० से ८० करोड़ पहले ही कमा लिए है।




इतनी बड़ी वसूली के बावजूद, फिल्म का बजट इतना विशाल है कि डिजिटल रिकवरी के बाद भी इसे टेबल-प्रॉफिट में आने के लिए सिनेमाघरों से कम से कम ८० से १०० करोड़ का शुद्ध डिस्ट्रीब्यूटर शेयर कमाना होगा। इसके लिए फिल्म को भारत में कम से कम १५०-१६० करोड़ का नेट कलेक्शन करना होगा । फिल्म के प्रति सुस्त माहौल और 'नागबंधम' के टकराव के कारण इस थिएटर शेयर को निकालना फिल्म के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।





फिल्म निर्माताओं  के नजरिए से देखें तो दोनों ही फिल्में सुरक्षित हैं और डिजिटल डील्स की वजह से उन्हें कोई भारी नुकसान नहीं होगा। लेकिन जहाँ 'बेबी डू डाई डू' अपने छोटे बजट की वजह से आसानी से नेट प्रॉफिट कमाकर सुपरहिट की तरफ बढ़ेगी, वहीं 'अल्फा' अपनी भारी लागत के कारण सिर्फ ओटीटी के भरोसे नहीं रह सकती और उसे खुद को फ्लॉप होने से बचाने के लिए थिएटर्स में बहुत लंबी लड़ाई लड़नी होगी।