Wednesday, 20 May 2026

#RukminiVasanth Brings the Emotional Core to #PrashanthNeel’s #Dragon First Glimpse



As anticipation for Dragon reaches fever pitch, the much-awaited first glimpse of the NTR–Neel collaboration has finally dropped—unleashing chaos and an unexpected emotional pulse. Among the standout highlights is actress Rukmini Vasanth, who appears in a striking avatar. Adding an eerie emotional depth to the high-octane visuals, the glimpse also features Rukmini’s haunting voice-over.





Fresh off a career-defining phase following her soul-stirring, award-winning performance in Sapta Saagaradaache Ello and her growing pan-Indian momentum with Kantara: Chapter 1, Rukmini now steps into yet another compelling cinematic space.





In director Prashanth Neel’s brutal and gritty world, chaos reigns supreme. Amid the destruction, Rukmini is seen emoting fear and vulnerability as she recites verses from Genesis about creation—her voice echoing against a backdrop of violence and devastation, creating one of the glimpse’s most intriguing moments.





Yet, beneath that seemingly gentle exterior lies a character layered with psychological intrigue and mystery. In a film built on brute force, aggression, and survival, Rukmini appears poised to emerge as the emotional anchor of the story.







Helmed by Prashanth Neel and jointly produced by Mythri Movie Makers and NTR Arts, Dragon is mounted as a massive pan-Indian action spectacle. The film reportedly explores dark themes of immigration, survival, oppression, and violent heroism, with NTR Jr. essaying a rugged saviour battling systemic brutality. Amid the scale, bloodshed, and intensity, Rukmini appears ready to leave a lasting impact.





Further cementing her position as one of Indian cinema’s most exciting emerging talents, Rukmini will next be seen in the pan-Indian epic Toxic alongside Yash.

Saturday, 11 April 2026

चुनाव से पहले #JanaNayagan नहीं बन सके #ThalapathyVijay



२०२६ के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के पूर्व प्रदर्शित करने के लिए बनाई गई, दलपति विजय की तमिल फिल्म जन नायकन, प्रदर्शन से पूर्व ही लफड़े में फंस गई . तमिलनाडु की राजनीति में सक्रीय भूमिका करने के इच्छुक विजय की इस फिल्म को केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड की गंभीर आपत्तियों का ऐसा सामना पड़ा कि फिल्म अभी तक प्रदर्शित नहीं हो पा रही है। 




सेंसर बोर्ड के सदस्यों तथा अन्य की आपत्ति फिल्म की सामग्री पर है, जो राष्ट्रीय और धार्मिक हितों के विरुद्ध होने के कारण अति सवेदनशील है।  फ़िल्म में आपत्तिजनक माने गए मुख्य तत्व निम्न प्रकार थे - 




सशस्त्र बलों का चित्रण: सेंसर ने फ़िल्म पर भारतीय सशस्त्र बलों को गलत रोशनी में या अनुचित तरीके से दिखाने का आरोप लगा। कुछ विशिष्ट प्रसंगो में बिना 'उचित अनुमति' या 'विशेषज्ञता' के सैन्य प्रतीकों के गलत उपयोग किया गया।  फ़िल्म में एक विशिष्ट रक्षा प्रतीक का इस्तेमाल किया गया था, जिसके लिए न तो किसी विशेषज्ञ की समीक्षा ली गई थी और न ही कोई आधिकारिक अनुमति ली गई थी। इससे फ़िल्म में गलत जानकारी या गलत चित्रण को लेकर चिंताएँ पैदा हो गईं।





धार्मिक भावनाएँ: बोर्ड की जाँच समिति के एक सदस्य ने औपचारिक शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि फ़िल्म के कुछ दृश्य 'धार्मिक रूप से आपत्तिजनक' हैं और इनसे जनता की भावनाएँ आहत हो सकती हैं। कुछ खास संवादों का ज़िक्र किया गया, जिनके बारे में माना गया कि वे किसी अल्पसंख्यक समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचा सकते हैं। फिल्म में ब्राह्मण समुदाय को लगातार अपमानजनक तरीके से दिखाए जाने का आरोप भी लगा। 




 

विदेशी हस्तक्षेप: मद्रास हाई कोर्ट ने उन दृश्यों से जुड़ी शिकायतों पर गौर किया, जिनमें विदेशी ताकतों को भारत के भीतर अशांति फैलाते हुए दिखाया गया था। उन दृश्यों पर आपत्तियां उठाई गईं जिनमें कथित तौर पर यह दिखाया गया था कि विदेशी ताकतें भारत के भीतर धार्मिक अशांति फैलाकर आंतरिक अराजकता पैदा कर रही हैं। 





राजनीतिक संकेत: विजय के अपनी पार्टी 'तमिलगा वेट्री कज़गम' के साथ पूर्णकालिक राजनीति में उतरने को देखते हुए, फ़िल्म के शीर्षक (जिसका अर्थ है "जनता का नेता") और फिल्म में भ्रष्ट राजनेताओं की आलोचना ने इस आरोप को जन्म दिया कि यह महज़ मनोरंजन का साधन न होकर एक राजनीतिक हथियार है।




कटौती की माँग: फ़िल्म निर्माताओं द्वारा समिति द्वारा सुझाए गए शुरुआती २७ कटों पर सहमति जताने के बावजूद, आंतरिक शिकायत के चलते मामला और उलझ गया और इसे एक 'रिविज़िंग कमेटी' (पुनरीक्षण समिति) के पास भेज दिया गया।




सेंसर बोर्ड द्वारा फिल्म पर आपत्ति लगाने और उसके बाद, उस यूए प्रमाणपत्र देने से प्रकरण और जटिल हो गया।  परिणामस्वरुप यह मामला मद्रास उच्चन्यायालय तक गया। न्यायलय ने समस्त तर्कों को सुनने के पश्चात् फिल्म के प्रमाणपत्र को निरस्त कर दिया।  कोर्ट ने इन गंभीर आरोपों और फ़िल्म के कंटेंट की गहन समीक्षा की आवश्यकता पर बल दिया। ध्यान रहे कि फिल्म को यूए प्रमाणपत्र भी मद्रास उच्च न्यायलय की एकल पीठ के आदेश के बाद सेंसर बोर्ड द्वारा दिया गया था। 




कुछ अन्य आपत्तियां: फिल्म में बार-बार और लगातार हिंसा दिखाई गई है, जिसमें गोलीबारी, धमाके और हथौड़े व कुल्हाड़ी जैसे हथियारों से वार करना शामिल है। इन दृश्यों को अक्सर स्लो मोशन में और बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए प्रभावों के साथ पेश किया गया है।  कुछ खौफनाक दृश्यों, जैसे सिर काटना और शरीर के अंगों को काटना, को १६ साल से कम उम्र के दर्शकों के लिए अनुपयुक्त माना गया। ध्यान रहे कि इस फिल्म को अपने अभिभावकों के साथ बच्चे देख सकते हैं, का प्रमाण पत्र दिया गया है। इसके अतरिक्त संवेदनशील सामाजिक मुद्दे भी आपत्ति में आये। फिल्म तेलुगू फिल्म 'भगवंत केसरी' की रीमेक होने के नाते, इसमें बाल शोषण और यौन शोषण से जुड़े कुछ गंभीर दृश्य शामिल हैं; इन दृश्यों को प्रभावशाली तो माना गया, लेकिन इनके चित्रण में बेहद सावधानी बरतने की ज़रूरत थी।





फिलहाल के लिए तो जन नायकन फिल्म लटक गई लगती है। किन्तु, फिल्म को एक बड़ा झटका १० अप्रैल २०२६ को लगा, जब फिल्म का पूरा संस्करण सोशल मीडिया और अवैध प्लेटफॉर्म के ज़रिए ऑनलाइन लीक हो गया है। निर्माताओं ने इस मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से इन लिंक्स को हटाने का अनुरोध किया है। 





एच. विनोद द्वारा निर्देशित और केवीएन प्रोडक्शंस द्वारा निर्मित यह फिल्म, दलपति विजय की अंतिम फिल्म मानी जा रही है; इसके बाद वह अपने राजनीतिक दल तमिलगा वेट्री कज़गम के  साथ पूरी तरह से राजनीति में कदम रखेंगे। इस फिल्म में, विजय ने भारतीय पुलिस सेवा के एक अधिकारी वेत्री कोंडन की है। बॉलीवुड अभिनेता बॉबी देओल मुख्य दुष्ट चरित्र है।  अन्य भूमिकाओं में पूजा हेगड़े, ममिता बैजू, प्रकाश राज, गौतम वासुदेव मेनन और प्रियमणि है। एक अफवाह यह भी है कि फिल्म दक्षिण के तीन बड़े निर्देशक एटली, लोकेश कनगराज और नेल्सन दिलीपकुमार विशिष्ट भूमिकाओं में दिखाई देंगे।  यह तीनों ही विजय की फिल्में निर्देशित कर चुके है।






जन नायकन के प्रति दर्शकों में उत्सुकता है। इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि ३ जनवरी २०२६ को अनावृत फिल्म के ट्रेलर को २४ घंटों में ८ करोड़ ३० लाख दर्शकों ने देख लिया था। फिल्म में दर्शकों को आकर्षित करने वाले ज़बरदस्त एक्शन और गहरे राजनीतिक रंग देखने को मिलते हैं। 

Friday, 10 April 2026

#VickyKaushal के #Mahavtar में #ShraddhaKapoor का धरनी अवतार !



बॉलीवुड से आज का नवीनतम समाचार बॉलीवुड की एक नई स्टार जोड़ी के बनने का है। समाचार है कि स्त्री अभिनेत्री  श्रद्धा कपूर अब फिल्म महावतार में विक्की कौशल के साथ काम करने जा रही हैं। विक्की कौशल और श्रद्धा कपूर ने पहले किसी फिल्म मे साथ अभिनय नहीं किया  है, इसलिए  जोड़ी को बॉलीवुड फिल्मों की बिलकुल नई जोड़ी माना जा रहा है। 





मैडॉक फ़िल्म्स की अमर कौशिक द्वारा निर्देशित फिल्म महावतार पौराणिक ड्रामा फ़िल्म है।  यह फिल्म अपने बड़े पैमाने के लिए पहले से ही सुर्ख़ियों में है। श्रद्धा के इस फ़िल्म में शामिल होने की संभावना से फ़िल्म को एक मज़बूत व्यावसायिक चमक मिलेगी, क्योंकि यह फ़िल्म बैनर की सबसे महत्वाकांक्षी फ़िल्मों में से एक के तौर पर अपनी पहचान बना रही है।





यह घटनाक्रम इसलिए भी विशिष्ट है क्योंकि इसमें तीन ऐसे नाम एक साथ आ रहे हैं जिनकी सफलता साबित हो चुकी है। श्रद्धा कपूर स्त्री २ की ज़बरदस्त सफलता के बाद, स्त्री, भेड़िया और स्त्री २ जैसी सफल फिल्मों के निर्देशक अमर कौशिक ने दर्शकों को पसंद आने वाली मनोरंजक फ़िल्में देने वाले निर्देशक के तौर पर अपनी साख मज़बूत की है और विक्की कौशल अब परशुराम की शक्तिशाली भूमिका निभाने जा रहे हैं। यदि, श्रद्धा इस फ़िल्म से जुड़ती हैं, तो 'महावतार' विक्की के साथ उनकी पहली पूरी फ़िल्म होगी, जो दर्शकों को अपनी ओर खींचने की पूरी क्षमता रखती है।






महावतार में मुख्य अभिनेत्री की भूमिका निभाने के लिए श्रद्धा कपूर से पहले, दीपिका पादुकोण का नाम इस फ़िल्म से जोड़ा जा रहा था। स्त्री २ के बाद श्रद्धा कपूर का मैडॉक फिल्म्स, दिनेश विजनऔर अमर कौशिक के साथ पहले से ही एक सफल तालमेल बना हुआ है। विक्की के साथ उनकी जोड़ी देखने की संभावना महावतार को एक ऐसी आधुनिक स्टार जोड़ी प्रदान करती है, जो दर्शकों की उत्सुकता और फ़िल्म की पहुँच, दोनों को बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो सकती है।




फ़िल्म महावतार अपने आप में एक भव्य पौराणिक गाथा के रूप में तैयार की जा रही है। इस फिल्म में विक्की कौशल भगवान परशुराम की भूमिका निभाने जा रहे है। फिल्म में, श्रद्धा कपूर की भूमिका भगवान परशुराम की पत्नी धरणी की बताई जा रही है। यहाँ बताते चलें कि परशुराम भगवान विष्णु  के अवतार थे।  जिस प्रकार से, माता लक्ष्मी ने, विष्णु के राम अवतार में सीता अवतार लिया था, उसी  प्रकार से धरणी भी परशुराम की संगिनी लक्ष्मी अवतार थी।  





अमर कौशिक के लिए, यह एक ऐसे बड़े कहानी कहने के मंच की ओर बढ़ाया गया कदम है, जहाँ वे अपनी शैली-आधारित सफल फ़िल्मों के माध्यम से पहले ही मुख्यधारा में अपनी एक मज़बूत पहचान बना चुके हैं। मैडॉक फ़िल्म्स के लिए, यह अपनी फ़िल्मों के दायरे को और अधिक विस्तृत करने की दिशा में उठाया गया एक और स्पष्ट कदम है, जिसमें फ़िल्म की सफलता के केंद्र में स्टार पावर को ही रखा गया है।




इस फिल्म के लिए विक्की कौशल को भगवान परशुराम के व्यक्तित्व् के अनुरूप भारी-भरकम और गठीला शरीर बनाने के लिए एक बड़े शारीरिक बदलाव करने के लिए प्रयास करना होगा। यह उस एथलेटिक लुक से बिल्कुल अलग होगा जिसे वह संजय लीला भंसाली की फिल्म लव एंड वॉर के लिए बनाए हुए हैं। उनकी भूमिका में एक खुरदुरा और बीहड़ रूप देखने को मिलेगा, जिसमें लंबे और उलझे हुए बाल भी शामिल होंगे। इस दिव्य भूमिका की तैयारी के लिए, समाचारों के अनुसार विक्की ने सात्विक जीवनशैली अपनाने का संकल्प लिया है, जिसके अंतर्गत उन्होंने शराब और मांसाहारी भोजन का त्याग कर दिया है।





इस फ़िल्म का बजट लगभग पांच सौ करोड़ तक हो सकता है, जो मैडॉक फ़िल्म्स का अब तक का सबसे महंगा प्रोजेक्ट कहा जा सकता है ।  प्रोडक्शन टीम महीनों से फिल्म की प्रारंभिक तैयारियों में जुटी है, जिसमें हथियारों के डिज़ाइन, सेट डिज़ाइन और एक खास दुनिया बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है, ताकि वीएफएक्स प्रभाव अंतरराष्ट्रीय मानकों के समान हो सकें।





महावतार अमर कौशिक का पैशन प्रोजेक्ट है। निर्देशक अमर कौशिक अरुणाचल प्रदेश में परशुराम कुंड के पास पले-बढ़े हैं। उन्होंने इस फ़िल्म को एक 'आध्यात्मिक यात्रा' और एक 'बड़ी ज़िम्मेदारी' बताया है, जिसे वह बचपन से महसूस करते आ रहे हैं।





आशा है कि फ़िल्म की शूटिंग जुलाई २०२६ (या अधिक से अधिक अक्टूबर २०२६ तक) में शुरू होगी, जब विक्की अपनी फ़िल्म लव एंड वॉर की शूटिंग पूरी कर लेंगे। जहाँ तक इस फिल्म की रिलीज़ की संभावना है, प्रारम्भ में क्रिसमस २०२६ पर रिलीज़ का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब इंडस्ट्री की रिपोर्टों के अनुसार, फ़िल्म २०२७ या २०२८ में रिलीज़ हो सकती है, ताकि ६ से ८ महीने के लम्बे शूटिंग शिड्यूल और भारी पोस्ट-प्रोडक्शन का काम ठीक से पूरा हो सके।

@warnerbros द्वारा रिलीज़ होगी #MortalKombatMovie



लोकप्रिय वीडियो गेम सीरीज मोर्टल कॉम्बैट पर, आधारित चौथी फिल्म की  पहली रिबूट फिल्म मोर्टल कॉम्बैट १, २०२१ में प्रदर्शित हुई थी।  इस कॉम्बैट सीरीज में चौथी फिल्म मोर्टल कॉम्बैट २ आगामी ८ मई २०२६ को प्रदर्शित होने जा रही है।  






अमेरिका की मार्शल आर्ट्स फंतासी फिल्म मोर्टल कॉम्बैट २ में, अभिनेता कार्ल अर्बन, दूसरी बार जोहनी केज की  भूमिका कर रहे है।  उन्होंने, २०२१ में प्रदर्शित पहली रिबूट फिल्म में भी यही भूमिका की थी।  फिल्म की  अन्य भूमिकाओं  में,एडेलीन रुडोल्फ, जेसिका मैकनामी, जोश लॉसन, आदि प्रमुख चरित्र कर रहे है।  इस फिल्म का निर्देशन सिमोन मैक्वॉयड ने किया है।  २०२१ में प्रदर्शित कॉम्बैट फिल्म से सिमोन ने फिल्म डेब्यू किया था। 





इस सीरीज पहली तीन फिल्मों में सबसे अधिक कारोबार १९९५ में प्रदर्शित फिल्म मोर्टल कॉम्बैट ने किया था।  पहले मोर्टल कॉम्बैट  वर्ल्ड वाइड बॉक्स ऑफिस पर १२२.२  डॉलर का ग्रॉस किया था।  बाद की रिलीज़ फ़िल्में मोर्टल कॉम्बैट अन्निहिलेशन (१९९७) ने ५१.४ मिलियन डॉलर और मोर्टल कॉम्बैट (२०२१) ने ८४,४ मिलियन डॉलर का कारोबार किया था। 

#SoorajBarjatya की #YehPremMohMayaHai में #AyushmannKhurrana और #Sharvari का प्रेम



 नवीनतम समाचार के अनुसार,  फिल्म निर्माता निर्देशक सूरज बड़जात्या ने, अपनी यह प्रेम मोल लिया शीर्षक वाली फिल्म का शीर्षक बदल कर यह प्रेम मोह माया है, कर दिया है।  जैसा कि सूरज बड़जात्या की फिल्मों के शीर्षक की शैली होती है, दोनों ही शीर्षकों में प्रेम सम्मिलित था। किन्तु, इनमे सूरज के पहले प्रेम सलमान खान नहीं है। 





२०२३ से, यह  समाचार आ रहे थे कि सूरज बड़जात्या और सलमान खान अगली फिल्म में काम करने  जा रहे है। उस समय इस फिल्म का नामा प्रेम की शादी होना था। यह फिल्म सूरज बड़जात्या की पारिवारिक फिल्मों की परंपरा में होने के बाद भी पर्याप्त भिन्न थी। यह एक जोड़े के प्रेम की, एकल परिवार, के कथानक से गुंथी प्रेम कथा थी।





२०१५ में, सलमान खान ने सूरज बड़जात्या के निर्देशन में, सोनम कपूर के साथ फिल्म प्रेम रतन धन पायो की थी।  इसके बाद से, यह दोनों ही, साथ काम करने के लिए उपयुक्त पटकथा की तलाश में थे।





२०२४ में फिर यह खबर आई कि सलमान खान और सूरज बड़जात्या एक फिल्म के लिए फिर से साथ आने वाले हैं। किन्तु, जहाँ पहले कहा जा रहा था कि फिल्म का नाम ‘प्रेम की शादी’ होगा, वहीं फिल्म का यह शीर्षक नहीं होना था । बॉलीवुड फिल्मों पर एक वेब पोर्टल की रिपोर्ट के अनुसार, सलमान और सूरज ने आखिरकार अपनी आने वाली फिल्म की स्क्रिप्ट फाइनल कर ली है, लेकिन अभी तक उसका नाम तय नहीं किया है।किन्तु, इसके मार्च २०२६ में पता चला कि अभी ऐसा कुछ भी नहीं है। सूरज ‘प्रेम की शादी’ नाम से कोई फिल्म नहीं बना रहे हैं। बात ख़त्म !





अब समाचार है कि सूरज  बड़जात्या के निर्देशन में बनाई जा रही फिल्म यह प्रेम मोल लिया की शूटिंग लगभग पूरी हो चुकी है।  इस फिल्म के नायक प्रेम आयुष्मान खुराना है।  उनकी प्रेमिका शरवरी वाघ होंगी।  कहा जा रहा है कि फिल्म यह प्रेम मोल लिया की शूटिंग इस महीने या आगामी माह मई तक अवश्य पूरी हो जाएगी।




  

फिल्मों की सूरज शैली वाली फिल्म यह प्रेम मोल लिया बनी मधुर संगीत से भरपूर प्रेम कहानी होगी।  इस फिल्म के रोमांटिक संगीत के लिए हिमेश रेशमिया यह प्रेम मोल लिया की टोली में शामिल किये गए है। राजश्री फिल्म्स की फिल्मों के नियमित संगीतकार रविंद्र जैन की असामयिक मृत्यु के पश्चात्, फिल्म प्रेम रतन धन पायो में हिमेश रेशमिया ने उनकी जगह ले ली थी।  इस प्रकार से, यह प्रेम  मोल लिया, सूरज बड़जात्या के लिए हिमेश की दूसरी फिल्म है। 





अब प्रश्न यह है कि क्या संगीत से सनी सूरज  बड़जात्या की प्रेम कहानी फिल्म दर्शक स्वीकार करेंगे। इसमें कोई संदेह नहीं कि सूरज बड़जात्या की शैली की फ़िल्में विशुद्ध, भावुक, परिवार-केंद्रित रोमांस, जिसमें सरल प्रेम, संस्कार, संगीत, परिवार की एकता और प्रेम  जैसे ग्रीन फ्लैग फ़िल्में बनाई है। इस शैली की फ़िल्में आज के दर्शकों के बीच मिश्रित प्रतिक्रिया पाती है। दर्शकों का एक वर्ग, जो अतीत के विशुद्ध पारिवारिक रोमांस को पसंद करता है, ऎसी फिल्म स्वीकार करते हैं, किन्तु, आज का कथित जेन जेड और मिलेनियल युवा दर्शक अक्सर इसे पुराना या 'सांस्कारिक' मानते हैं।





सूरज बड़जात्या की फिल्में १९९० और २००० के दशक में खूब चलीं।  क्योंकि तब पारिवारिक मूल्यों और भावुक कहानियों से जुड़ने वाला दर्शक पर्याप्त था। अमिताभ बच्चन का क्रुद्ध युवा का नशा युवाओं पर नहीं चढ़ा था। इसी लहर में बहते हुए सूरज बड़जात्या मैंने प्यार किया, हम आपके हैं कौन, हम साथ साथ हैं, विवाह, एक विवाह ऐसा भी और प्रेम रतन धन पायो हिट हो गई। किन्तु, प्रेम रतन धन पायो ने एक संकेत दे दिया था। हिट संगीत तथा सलमान खान और सोनम की फिल्म प्रेम रतन धन पायो, राजश्री की प्रेम फिल्मों में सबसे कम १९४ करोड़ का विशुद्ध व्यवसाय करने वाली फिल्म थी। इस कम दर्शकों  ने भी देखा। स्वयं सूरज बड़जात्या भी इसे स्वीकार करते  हुए कहते हैं कि आज का दर्शक कबीर सिंह जैसी इंटेंस फिल्में पसंद करता है।





ऎसी दशा में, क्या आयुष्मान खुराना और शरवरी का एकल परिवार रोमांस दर्शक स्वीकार करेंगे ? सफल हो सकता है तभी यदि दर्शक आयुष्मान-शरवरी में शुद्ध रोमांस अनुभव करे।  क्या ऐसा संभव है ? आयुष्मान खुराना की इमेज विशिष्ट रोमांस फिल्में नहीं की है। उनकी हालिया प्रदर्शित फिल्मों थम्मा, ड्रीम गर्ल, एन एक्शन हीरो, आर्टिकल १५, अंधाधुन, आदि ने उनकी रोमांटिक इमेज नहीं बनने दी है। स्वयं खुराना ने भी ऐसी फिल्में चुनी हैं, जो पारम्परिक बम्बईया नहीं थी।




 

कुछ यही दशा शरवरी वाघ की है। कॉन फिल्म बंटी और बबली २ से हिंदी फिल्मों में  पदार्पण करने वाली शरवरी की आगामी फिल्म अल्फा की बड़ी चर्चा है। किन्तु, यह प्रेम मोह माया है की कोई विशेष चर्चा नहीं हो रही। क्योंकि, शरवरी  की मुँज्या और महराज जैसी फिल्मे उनकी रोमांटिक इमेज में सहायक नहीं है। प्रदर्शित फिल्म वेदा और आगामी दो तीन फ़िल्में उनके एक्शन के प्रति रुझान का संकेत है। 





क्या इतने विपरीत के बाद भी यह प्रेम मोह माया है सफल हो सकेगी ? फिल्म की सफलता के बड़े कारण है। विगत कुछ महीनों में प्रदर्शित रोमांस फिल्मों सैयारा, एक दीवाने की दीवानीयत, तेरे इश्क़ में, आदि को मिली सफलता दर्शकों द्वारा रोमांस को संरक्षण देने की ओर इशारा करने वाली है। दर्शको की नब्ज पहचाने वाले फिल्म दर्शक पुष्टि करते हैं कि दर्शक रोमांस का दीवाना है। विशेष रूप से त्योहारों में, दर्शक सपरिवार पारिवारिक रोमांस फिल्में देखने निकलता है।




राजश्री फिल्म्स, अपनी फ़िल्में बड़े योजनाबद्ध ढंग से करता है। उनका झुकाव वर्ड ऑफ़ माउथ अर्थात दर्शकों की प्रतिक्रिया पर निर्भर करती है। वह बैनर अपनी फिल्मो के प्रति दर्शकों में उत्सुकता जगाता है। इसलिए, फिल्मों को कम प्रिंट में रिलीज़ करता है। दर्शकों के रुझान के साथ फिल्म के प्रिंट भी बढ़ते चले जाते हैं। सूरज बड़जात्या की पहली फिल्म मैंने प्यार किया मात्र २९ प्रिंट में प्रदर्शित की गई थी। हम आपके हैं कौन के तो केवल २६ प्रिंट रिलीज़ किये गए थे। जबकि, हम साथ साथ हैं के ६० प्रिंट बाहर आये थे। इस व्यूह रचना से, यह फिल्म कंपनी अच्छे दर्शक पाने में सफल होती है। 





फिल्म यह प्रेम मोह माया है को भी फिल्म प्रदर्शन के बाद दर्शकों की प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा होगी। आज के समय में ओपनिंग वीकेंड तो स्टार पावरट्रेलर और मार्केटिंग से तय हो जाता हैलेकिन लॉन्ग रन और मल्टीप्लेक्स/सिंगल स्क्रीन्स में ग्रोथ दर्शकों की प्रतिक्रिया से ही तय होती है। सैयारा, एक दीवाने की दिवानीयत, तेरे इश्क़ में, आदि रोमांस फिल्मे दर्शकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया के बल पर सफल हो सकी। अब देखने की बात होगी कि यह प्रेम मोह माया है  दर्शकों में अपने प्रति मोह जगा कर, उनसे माया (पैसा) वसूल पाएगी ?  

Thursday, 9 April 2026

कपूर खानदान के दूसरे राम हैं #Ramayan के #RanbirKapoor

 


हनुमान जयंती के अवसर पर रणबीर कपूर की फिल्म ‘रामायण’ का टीजर रिलीज हुआ था। इस फिल्म में मर्यादापुरुषोत्तम राम की भूमिका में उनकी पहली झलक दर्शकों को पसंद आई है। दर्शकों को लगता है कि रणबीर कपूर बड़े परदे पर राम को सजीव और स्वाभाविक कर पाएंगे और फिल्म रामायण एक बड़ी हिट फिल्म बनेगी।





यहाँ एक दिलचस्प तथ्य । परदे पर राम की भूमिका कर रहे रणबीर कपूर, कपूर खानदान में अकेले और पहले अभिनेता नहीं है, जिन्होंने भगवान राम का चरित्र बड़े पर्दे पर निभाया है। आज से लगभग ९३ साल पहले कपूर खानदान के एक दिग्गज अभिनेता ने भी श्रीराम की भूमिका बड़े पर्दे पर निभाई थी। साथ ही उनकी फिल्म ने एक खास रिकॉर्ड भी अपने नाम दर्ज किया था।





 

यह फिल्म थी १९३३ में प्रदर्शित फिल्म सीता में, रणबीर कपूर के पितामह पृथ्वीराज कपूर ने राम की भूमिका की थी । यह पृथ्वीराज की, सवाक युग की  एक और बड़ी हिट फिल्म थी । पहली सवाक फिल्म आलमआरा पृथ्वीराज की पहली हिट फिल्म थी । सीता की सफलता ने पृथ्वीराज के फिल्म जीवन को सशक्त बना दिया । पृथ्वीराज ने इस चरित्र को कुछ इतना सहज बनाया था कि फिल्म सीता दर्शकों द्वारा पसंद की ही गई, फिल्म बॉक्स ऑफिस पर भी बड़ा व्यवसाय कर पाने में सफल भी रही।





सीता, बांगला में बनाई गई थी, जो बाद में हिंदी में भी प्रदर्शित हुई । यह फिल्म रामायण के उत्तरकाण्ड पर आधारित थी । इस फिल्म के निर्देशक देबकी बोस थे। यह फिल्म वेनिस फिल्म फेस्टिवल में दिखाई जाने वाली पहली  भारतीय फिल्म थी । इस फेस्टिवल में फिल्म के निर्देशक देबकी बोस को डिप्लोमा अवार्ड दिया गया था ।





फिल्म में सीता की भूमिका युवा दुर्गा खोटे ने निबाही थी । यह उनकी मराठी के अतिरिक्त किसी भाषा की पहली फिल्म थी । दुर्गा खोटे बाद में, फिल्म मुगले आजम में, पृथ्वीराज कपूर के अकबर की जोधा बाई भी बनी थी । यहाँ एक दिलचस्प तथ्य और । दुर्गा खोटे, रणबीर कपूर के पितामह पृथ्वीराज कपूर की सीता और जोधा बाई बनी थी थी, वह रणबीर कपूर के पिता ऋषि कपूर की नायक के रूप में पहली फिल्म बॉबी में उनकी आया मिसेज ब्रगेंजा की भूमिका कर रही थी । वह ऋषि कपूर की फिल्म कर्ज में भी थी ।

Wednesday, 8 April 2026

#RAAKA है #AlluArjun की फिल्म का टाइटल



आज, एटली के निर्देशन में बन रही अल्लू अर्जुन की कार्यकारी शीर्षक #AA22XA6 वाली फिल्म का शीर्षक का अनावरण हुआ।  आज अल्लू अर्जुन का जन्मदिन है। इस अवसर पर अल्लू अर्जुन की फिल्म राका (#RAAKA) के पोस्टरों के साथ फिल्म का टाइटल बताया गया। 





फिल्म के निर्माताओं (#SunPictures) ने राका शीर्षक और फर्स्ट-लुक पोस्टर ९  भाषाओं में जारी किया हैजिसमें हिंदीइंग्लिश और कई रीजनल भाषाएं शामिल हैं। इससे फिल्म की पैन-इंडिया और ग्लोबल अपील का संकेत मिलता है। फिल्म रिलीज़ की रिपोर्ट्स में बीच सात भाषाएँ का उल्लेख है, जिनमे अल्लू अर्जुन की मातृ भाषा तेलुगु के अतिरिक्त हिंदी, तमिल, कन्नड़, मलायलम, बांगला और अंतर्राष्ट्रीय पहुँच के लिए अरबी भाषा का उल्लेख है। कहीं कहीं आठ भाषाओँ और बहुभाषी फिल्म का भी उल्लेख है। अर्थात यह फिल्म भारत की भाषाओँ के अतिरिक्त अरबी भाषा में प्रदर्शित होगी।  





जहाँ, राका की प्रदर्शन की तिथि का प्रश्न है, यह फिल्म अभी शूटिंग/प्रोडक्शन स्टेज पर है। इसके २०२७ की गर्मियों में ही प्रदर्शित किये जाने की सम्भावना की जा सकती है। सूचनाओं के अनुसार अल्लू अर्जुन की यह फिल्म एक बड़े बजट की फैंटसी-एक्शन फिल्म है, जिसमें दीपिका पादुकोण भी मुख्य भूमिका में हैं।





राका (RAAKA) की कहानी के बारे में अभी आधिकारिक रूप से बहुत कम जानकारी जारी की गई है। फिल्म अभी प्रोडक्शन स्टेज पर है, इसलिए पूरा प्लॉट सीक्रेट रखा जा रहा है।उपलब्ध हिन्ट्स और अफवाहें (रिपोर्ट्स के आधार पर) यह एक बड़े स्केल की साइंस-फिक्शन (Sci-Fi) एक्शन-फैंटसी फिल्म प्रतीत है, जिसमें भारी VFX और विजुअल इफेक्ट्स का इस्तेमाल होगा। इसमें दीपिका पादुकोण बनी तलवार भाँज रही होंगी। कुछ संभावनाएं फिल्म के पुनर्जन्म पर आधारित होने या मल्टीपल टाइमलाइन्स/पैरेलल यूनिवर्स का कॉन्सेप्ट शामिल होने की हैं। 





सूचनाओं के अनुसार फिल्म में अल्लू अर्जुन चार (या कम से कम तीन) भूमिकाएं निभा रहे हैं। एक पारिवारिक कुल में दादा, पिता और दो  बेटों की शायद । कुछ रिपोर्ट्स में इन भूमिकाओं को  भेड़िया मानव, वैज्ञानिक और पुलिस अधिकारी जैसे अलग-अलग अवतारों का जिक्र है। पोस्टर में भी अल्लू अर्जुन का गंजा, खूंखार, जानवर जैसा लुक  बीस्ट मोड का संकेत देता है। यह कोई डार्क ट्रांसफॉर्मेशन या मिस्टिरियस पावरफुल कैरेक्टर हो सकता है। इसी प्रकार, दीपिका पादुकोण की भूमिका भी रानी जैसी शक्तिशाली होगी। यह भूमिका फ्लैशबैक में हो सकती है। 





इस फिल्म के बारे निर्देशक लेखक एटली ने खुद कहा है कि स्क्रिप्ट अविश्वसनीय और व्यसनी है, जो १८ साल से उनके पास थी। आयरन मैन और ट्रांसफार्मर्स जैसी फिल्मों की वीएफएक्स टीम ने स्क्रिप्ट पढ़कर कहा कि उनका दिमाग घूम गया।  

#ZakirKhan की #Dhurandhar टिप्पणी पर धुंआ धुंआ क्यों #SiddharthAnand ?



एक फिल्म समारोह का सञ्चालन करते समय, स्टैंडप कॉमेडियन ज़ाकिर खान ने, मज़ाक में कहा कि  धुरंधर २ की सफलता से बांद्रा से जुहू तक के स्टार्स मन ही मन जल रहे हैं। उन्होंने कराची की लयारी बस्ती में बम फटने और मुंबई के पॉश इलाकों में धुआँ उठने का ज़िक्र करते हुए यह बात कही। 





ज़ाकिर खान के इस व्यंग्य पर, सोशल मीडिया पर फिल्म धुरंधर २ पर पहले दिन से ही  नकारात्मक टिप्पणियां करने वाले ट्विटरेटियों ने ज़ाकिर खान की तीखी आलोचना शुरू कर दी। इन टिप्पणीकारों का मानना है कि धुरंधर २ फ्लॉप है। इसे सरकार के पैसों से चमचो और भक्तों द्वारा देखा जा रहा है। फिल्म की प्रशंसा करने वाला हर सेलिब्रिटी इनके निशाने पर रहता है।  सो ज़ाकिर खान भी आ गए। 




इस विवाद में बॉलीवुड पेंच उस समय गहरा गया, जब शाहरुख़ खान की फिल्म पठान और हृथिक रोशन की फिल्म फाइटर के निर्देशक सिद्धार्थ आनंद भी इसमें कूद पड़े। उन्होंने ज़ाकिर खान का नाम लिए बिना, एक्स पर लिखा कि  जुहू-बांद्रा के लोगों ने पचास सालों से लगातार ऑल-टाइम ब्लॉकबस्टर फ़िल्में दी हैं, और जो कोई भी इस बात को कम करके आँकता है, उसे उन्होंने 'असली बेवकूफ़' कहा।





स्पष्ट रूप से, सिद्धार्थ आनंद की टिपण्णी ध्रुवीकरण कर गई।  बहस, जुहू बांद्रा अभिनेताओं के समर्थकों और धुरंधर फिल्म के समर्थकों के बीच बंट गई। पहले गुट का कहना था कि सिद्धार्थ आनंद ने सही लिखा है।  बांद्रा और जुहू में रहने वाले अमिताभ बच्चन, खान अभिनेताओं, देओल बंधुओं, आदि ने कई बड़ी हिट फ़िल्में दी है। सिद्धार्थ का कहने का तात्पर्य यह था कि बॉलीवुड इन्ही चंद अभिनेताओं के बलबूते पर जीवित है। 




वही, कुछ का कहना था कि ज़ाकिर खान ने मजाक में बात कही थी। यह बांद्रा जुहू बॉयज पर हलकीफुलकी टिपण्णी थी। क्योंकि,  धुरंधर फिल्मों की सफलता पर बॉलीवुड के किसी बड़े स्टार ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। यहाँ तक कि खान अभिनेताओं के चहेतों ने तो धुरंधर फिल्मों की, अनावश्यक आलोचना करते हुए शाहरुख़ खान और उनकी पठान जवान फिल्मों को श्रेष्ठ बताना शुरू कर दिया। 




सभी जानते हैं कि कोई स्टैंड-अप कॉमेडियन फिल्म इंडस्ट्री अथवा अन्य किसी संस्था या व्यक्ति के बारे में एक हल्का-फुल्का मज़ाक करता है। ज़ाकिर खान ने भी किसी अभिनेता या फिल्मकार का नाम नहीं लिया था।  उन्होंने बिना किसी का अपमान किये, बेचैनी की और इशारा भर किया था। सिद्धार्थ आनंद को बीच इसे मजाक ही समझ कर भड़कना नहीं चाहिए थे। उनके इस प्रकार भड़कने से ज़ाकिर खान की धुंआ निकल रहा है वाली टिपण्णी सही साबित हो जाती है। क्योंकि, धुरंधर की सफलता ने कुछ लोगों को बेचैन कर दिया है। कहा गया कि यदि एक साधारण सा मज़ाक इतना ज़्यादा चुभता है, तो शायद यह असुरक्षा की भावना सचमुच मौजूद है। इस तरह प्रतिक्रिया देने के बजाय, शायद इसे उसी भावना से लेना चाहिए जिस भावना से इसे कहा गया था।




यहाँ बताते चलें कि सिद्धार्थ आनंद भी नेपो किड्ज़ में से हैं। उनके पिता बिट्टू आनंद ने अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म शहंशाह का निर्माण किया था। गीतकार और लेखक इन्दर राज आनंद उनके दादा है। मुकुल आनंद और टीनू आनंद उनके चाचा है। उन्होंने, अब तक आठ फ़िल्में निर्देशित की है।  इनमे से पांच फिल्में यशराज फिल्म्स की है। उन्होंने अब तक सैफ अली खान, रणबीर कपूर, हृथिक रोशन, शाहरुख़ खान, रानी मुख़र्जी, प्रियंका चोपड़ा, कटरीना कैफ, आदि बड़े सितारों वाली फ़िल्में ही निर्देशित की है। उनकी आगामी फिल्म किंग शाहरुख़ खान के साथ है। 




धुरंधर फिल्मों की सफलता से अप्रभावित लगने वाले सिद्धार्थ आनंद ने हृथिक रोशन और अनिल कपूर जैसे सितारों वाली युद्ध फिल्म फाइटर एक निर्माण और निर्देशन किया है। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास नहीं कर पाई थी। धुरंधर की सफलता को भाव न देने वाले सिद्धार्थ आनंद अपनी फिल्म हवाई युद्ध का प्रदर्शन करने वाली भारत की पहली एरियल फिल्म फाइटर की असफलता के लिए दर्शकों को दोषी बताते हुए विचित्र तर्क देते थे। उन्होंने कहा था कि अगर आप गौर करें, तो हमारे देश की एक बहुत बड़ी आबादी... मैं कहूंगा ९०% लोग ऐसे हैं जिन्होंने कभी प्लेन में सफर नहीं किया! जो कभी एयरपोर्ट गए ही नहीं! तो फिर आप उनसे यह उम्मीद कैसे कर सकते हैं कि उन्हें पता हो कि हवा में क्या हो रहा है? 





उनके इस अजीबोगरीब तर्क की सोशल मीडिया एक्स पर धुर्रे उड़ा दिए गए। उनकी पोस्ट पर एक कमेंट था कि पठान इसलिए हिट हो गई कि ९०% भारतीय रॉ एजेंट है। दूसरे यूजर ने लिखा कि इस तर्क से तो विधु विनोद चोपड़ा की फिल्म ट्वेल्थ फेल इस लिए हिट हो गई कि ९० प्रतिशत भारतीय बारहवीं फेल है। तीसरे यूजर ने लिखा कि दंगल इसलिए हिट हो गई कि ९० प्रतिशत भारतीय पहलवान है। 





स्पष्ट रूप से, सिद्धार्थ आनंद और बॉलीवुड का जुहू बांद्रा गैंग चिंतित है।  अब हवा हवाई फ़िल्में नहीं चलने वाली। अभी किसी स्पाई यूनिवर्स का रॉ एजेंट वीएफएक्स पर उडता हुआ बॉक्स ऑफिस पर बमबारी नहीं कर सकता। अब बॉलीवुड के इस स्पाई को रियल होना पड़ेगा। खान अभिनेताओं की प्लास्टिक बॉडी पर निर्भर बॉलीवुड ऎसी फ़िल्में नहीं बना सकता।  इसलिए ज़ाकिर खान की टिपण्णी ने बॉलीवुड की सुलगा दी है। 

Tuesday, 7 April 2026

#MrX के मिशन पर एजेंट #Arya और #GauthamKarthik

 

आर्य की लंबे समय से अटकी फ़िल्म मिस्टर एक्स को आखिरकार रिलीज़ की तारीख मिल ही गई। इस फ़िल्म, की शूटिंग ३०२३ में शुरू हुई थी। फिल्म जून २०२४ में पूरी हो गई। तब से, फ़िल्म को कई विवादों के कारण देरी का सामना करना पड़ा। अब फ़िल्म को सपोर्ट करने वाले बैनर प्रिंस पिक्चर्स ने शुक्रवार को पुष्टि की कि यह फ़िल्म इसी महीने सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी। यद्यपि, फ़िल्म निर्माताओं ने अभी तक रिलीज़ की पक्की तारीख नहीं बताई है।





मनु आनंद के निर्देशन में बनी इस फ़िल्म की कहानी के बारे में अभी ज़्यादा जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन २०२५ में रिलीज़ फिल्म के टीज़र में दिखाया गया था कि भारत से एक न्यूक्लियर डिवाइस गायब होने के बाद, कुछ सीक्रेट एजेंट एक्टिव हो जाते हैं और एक्शन में आ जाते हैं। फ़िल्म की कहानी इस बात के इर्द-गिर्द घूमेगी कि इस ऑपरेशन के लिए इन एजेंटों पर कितना भरोसा किया जा सकता है।




मनु की पिछली फ़िल्म एफआईआर भी एक जासूसी थ्रिलर थी, जिसमें इस्लामोफ़ोबिया के संदर्भ में धोखे और भरोसे जैसे विषयों पर बात की गई थी। इस फ़िल्म में मंजू वारियर, सरथ कुमार और गौतम राम कार्तिक भी अहम किरदारों में नज़र आएंगे, जबकि बाकी कलाकारों में अतुल्या रवि, रायज़ा विल्सन, जयप्रकाश, काली वेंकट और अनघा शामिल हैं।





कुछ समय पहले हुई बातचीत में, निर्देशक मनु ने बताया था कि मिस्टर एक्स एक एक्शन ड्रामा फ़िल्म होगी। उन्होंने कहा, "कहानी दो प्रमुख चरित्रों के इर्द-गिर्द घूमती है, जिन्हें आर्य और गौतम ने निभाया है। ये दोनों एक ही मिशन को पूरा करने के लिए निकलते हैं। फ़िल्म में दिखाया गया है कि कैसे उनके फ़ैसलों की वजह से वे एक मुश्किल हालात में फँस जाते हैं और फिर कैसे उससे बाहर निकलते हैं।" उन्होंने यह भी बताया कि मिस्टर एक्स में पिता-बेटे के रिश्तों और भावनाओं को भी दिखाया गया है।


 



इस फ़िल्म की शूटिंग १०० से ज़्यादा दिनों तक भारत के कई अलग-अलग हिस्सों में हुई, जिनमें राजस्थान, होसुर, चेन्नई, मैसूर और तूतीकोरिन शामिल हैं। फ़िल्म के कुछ हिस्सों की शूटिंग विदेश में भी हुई है; पहले युगांडा में शूटिंग करने पर विचार किया गया था, लेकिन बाद में अज़रबैजान को इंटरनेशनल शूटिंग लोकेशन के तौर पर चुना गया।




 

तकनीकी स्तर पर, फ़िल्म मिस्टर एक्स की टीम काफ़ी मज़बूत है। फ़िल्म का म्यूज़िक धिबू निनन थॉमस ने तैयार किया है, जबकि सिनेमैटोग्राफ़ी अरुल विंसेंट ने संभाल रखी  है। इसकी एडिटिंग प्रसन्ना जीके ने की है। एक्शन सीक्वेंस स्टंट सिल्वा ने कोरियोग्राफ किए हैं। फिल्म का आर्ट डायरेक्शन इंदुलाल कवीद ने संभाला है।




 

विनीत जैन और एस लक्ष्मण कुमार द्वारा निर्मित और ए वेंकटेश के सह-निर्माता की फिल्म मिस्टर एक्स जब सिनेमाघरों में आएगी, तो यह असल दुनिया की घटनाओं पर आधारित एक ज़बरदस्त जासूसी ड्रामा पेश करती लगती है।

#Jailer2 में #Rajanikant के मेहमान #ShahrukhKhan #Mohanlal



निर्देशक नेल्सन दिलीपकुमार की, २०२३ में प्रदर्शित फिल्म जेलर की सीक्वल फिल्म जेलर २ की शूटिंग पूरी हो गई है।  विगत ४ अप्रैल को, फिल्म के  जेलर नायक रजनीकांत ने एक ट्वीट के माध्यम से सूचना दी थी कि जेलर २ की शूटिंग अपने अंतिम चरण में है। 





इसके बाद, मलयालम  फिल्म  सुपरस्टार मोहनलाल ने, फिल्म में अपने हिस्से के दृश्य पूरे कर दिए. वह फिल्म में मैथ्यू की भूमिका कर रहे है। उनका यह चरित्र पहली जेलर में भी था।  यह चरित्र एक स्मगलर का है, जो रजनीकांत की सहायता करता है।  





बताते हैं कि जेलर २ के अंतिम चरण मे, रजनीकांत के साथ मोहनलाल, शिवराजकुमार, विद्या बालन, एसजे सूर्य और शाहरुख़ खान के संयुक्त दृश्य फिल्माए गए।  फिल्म में शाहरुख़ खान की पुलिस भूमिका बताई जा रही है।  इन सितारों के साथ फिल्माए गए दृश्य बड़े दमदार बताये जा रहे है। इस दृश्य में, मोहनलाल अपने चरित्र मैथ्यू और शिवराजकुमार मूल जेलर के नरसिम्हा की भूमिका में दिखाई देंगे। शाहरुख़ खान ने, अपने दृश्यों को पूरा करने के लिए पांच दिन आवंटित किये थे। 




जेलर २ के मुख्य खलचरित्र को तमिल फिल्म अभिनेता एसजे सूर्या ने किया है।  उनके साथी अपराधियों में मिथुन चक्रवर्ती का नाम उल्लेखनीय है।  फिल्म की अन्य भूमिकाओं में विजय सेतुपति, राम्या कृष्णन, सर्वानन, योगी बाबू, मिरना, आदि भी है। बताते हैं कि फिल्म में, विद्या बालन ने मिथुन चक्रवर्ती की बेटी की भूमिका की है। यह फिल्म विद्या बालन की पहली पूरी भूमिका वाली पहली तमिल फिल्म बताई जा रही है।  १९९५ में प्रदर्शित बँगला फिल्म भाग्य देबता में, मिथुन चक्रवर्ती और रजनीकांत ने एक साथ अभिनय किया था। यह रजनीकांत की इकलौती बंगला फिल्म थी। इस प्रकार से, मिथुन चक्रवर्ती और रजनीकांत ३१ साल बाद, एक साथ दिखाई देंगे। 




फिल्म की शूटिंग पूरी हो जाने के बाद, पोस्ट प्रोडक्शन का काम शीघ्र शुरू हो जायेगा।  फिल्म जेलर ने, २०२३ में विश्व के बॉक्स ऑफिस पर ६०० करोड़ का कीर्तिमान ग्रॉस किया था। इस से आशा की जा रही है कि सीक्वल फिल्म भी बढ़िया व्यवसाय करेगी। इस फिल्म के १४ अगस्त २०२६ को प्रदर्शित किये जाने की संभावना है। 




हिंदी का विरोध करने वाले मारन परिवार की फिल्म जेलर २ का निर्माण तमिल भाषा में किया जा रहा है।  किन्तु, फिल्म के निर्माता कलानिधि मारन की अपनी इस फिल्म को तमिल और तेलुगु के अतिरिक्त हिंदी में भी प्रदर्शित करेंगे।  

Monday, 6 April 2026

चौदह साल बाद, #AkshayKumar और #Priyadarshan की आठवी फिल्म #BhoothBangla



अभी थोड़ी देर पहले, अभिनेता अक्षय कुमार की, प्रियदर्शन के निर्देशन में फिल्म भूत बंगला का आधिकारिक ट्रेलर  अनावृत हुआ है।  अनावरण के साथ ही यह ट्रेलर फिल्म प्रेमियों के बीच चर्चा में आ गया है।  यह एक हॉरर-कॉमेडी फ़िल्म है जिसे प्रियदर्शन ने अक्षय कुमार के लिए १४ साल बाद निर्देशित किया है।





इस फ़िल्म में अक्षय कुमार मुख्य हास्य भूमिका में नज़र आ रहे है। फिल्म में, उनके साथ तब्बू, परेश रावल, वामिका गब्बी, मिथिला पालकर और राजपाल यादव भी हँसी का फव्वारा छोड़ रहे हैं। फ़िल्म की कहानी एक भूतिया हवेली पर आधारित है। इस के ट्रेलर में बढ़िया साफ़ सुथरा हास्य भयावने तत्वों  के साथ सम्मिलित है। अक्षय कुमार एक बार फिर अपनी पुरानी फ़िल्मों हेरा फेरी और भूल भुलैया वाली क्लासिक कॉमिक टाइमिंग दिखाते हुए देखा जा सकता है। भूत बंगला का पेड प्रीव्यू १६ अप्रैल को रात ९ बजे से शुरू होगा।  इसके बाद, यह फिल्म १७ अप्रैल से दर्शकों को नियमित शो में देखने को मिलेगी। 





 विशेष बात है कि अक्षय कुमार चौदह से अधिक सालों के बाद प्रियदर्शन के साथ फिर से काम कर रहे हैं। प्रियदर्शन अक्षय कुमार को अपना लकी चार्म और निर्देशक की खुशी बताते है। वह वादा करते है कि इस फ़िल्म में अक्षय की क्लासिक कॉमिक टाइमिंग एक बार फिर देखने को मिलेगी, जिसमें डरावने और मज़ेदार (स्लैपस्टिक) एलिमेंट्स भी शामिल होंगे। अक्षय इस फ़िल्म के प्रोड्यूसर भी हैं।





प्रियदर्शन और अक्षय कुमार की जोड़ी बॉलीवुड की सबसे सफल डायरेक्टर-एक्टर जोड़ियों में से एक है, विशेष रूप से २००० के दशक की कॉमेडी फिल्मों में। उनकी पार्टनरशिप की पहचान है बड़ी स्टारकास्ट, गलत पहचान, स्लैपस्टिक ह्यूमर और अफरा-तफरी वाले हालात। इस फिल्मों में सामान्य रूप से परेश रावल और राजपाल यादव जैसे कलाकार बार-बार नज़र आते हैं।





अक्षय कुमार और प्रियदर्शन ने एक सात  फिल्में की हैं। इनमे से अधिकतर कॉमेडी और हॉरर-कॉमेडी फ़िल्में सम्मिलित  है। भूत बंगला इन दोनों की आठवीं फिल्म है। इन दोनों की एक साथ विगत फिल्म २०१० में प्रदर्शित खट्टा मीठा थी।  खट्टा मीठा के १४ साल बाद, इस जोड़ी के काम को परदे पर देखना  दर्शकों में फिल्म के प्रति उत्सुकता बढ़ाने के लिए पर्याप्त है।





अक्षय कुमार ने प्रियदर्शन के निर्देशन में पहली बाद फिल्म हेरा फेरी (२०००) में काम किया था। इस फिल्म में, अक्षय ने राजू का किरदार निभाया था, जिसे अपने दोस्तों परेश रावल और सुनील शेट्टी के साथ टोली में एक तेज़-तर्रार और जुगाड़ू लडके के रूप में दिखाया गया था । ये तीनों जल्दी पैसा कमाने का सपना देखते हैं, लेकिन मज़ेदार मुश्किलों में फंस जाते हैं। इसके यादगार डायलॉग, फिजिकल कॉमेडी और फोन कॉल वाला सीन इसे एक कल्ट क्लासिक बनाते हैं और इसने बॉलीवुड कॉमेडी को एक नई पहचान दी।





गरम मसाला, इस जोड़ी की दूसरी फिल्म थी।  किन्तु, इस फिल्म में जॉन अब्राहम भी उनके मित्र की भूमिका कर रहे थे। अक्षय ने इसमें एक फ्लर्ट करने वाले फोटोग्राफर मैक की भूमिका की थी , जो अपने दोस्त (जॉन अब्राहम) की मदद से एक साथ कई गर्ल फ्रेंड्स को संभालता है। बढ़ा-चढ़ाकर बोले गए झूठ, बेडरूम की कॉमेडी और अक्षय की ज़बरदस्त परफॉर्मेंस के लिए उन्हें फिल्मफेयर का 'बेस्ट कॉमेडियन' अवॉर्ड मिला। यह अपने आप में एक बेहतरीन 'सिचुएशनल कॉमेडी' का बेजोड़ उदाहरण है।





भागम भाग, इस जोड़ी की तीसरी फिल्म थी। इस फिल्म में अक्षय कुमार ने गोविंदा और परेश रावल के साथ मिलकर एक ऐसी मज़ेदार दौड़-भाग वाली कहानी पेश की, जिसमें एक गायब लाश, थिएटर ग्रुप की अफरा-तफरी और लगातार होने वाली गलतफहमियां दर्शकों को दिलचस्प मसाला देती थी । यह एक हाई-एनर्जी वाली कॉमेडी फिल्म है, जिसमें थ्रिलर का भी हल्का-फुल्का पुट देखने को मिलता है। 





प्रियदर्शन की २००७ में प्रदर्शित फिल्म भूल भुलैया में अक्षय कुमार ने एक विचित्र मनोचिकित्सक डॉ. आदित्य की भूमिका की थी, जो एक भुतहा हवेली में हो रही अलौकिक घटनाओं की जांच करता है। इस फिल्म में साइकोलॉजिकल थ्रिल, भूतों का डर और प्रियदर्शन की खास कॉमेडी का ज़बरदस्त मेल देखने को मिलता है। फिल्म विद्या बालन के सशक्त अभिनय  के कारण दर्शनीय बन गई थी । यह फिल्म अक्षय कुमार की सबसे ज़्यादा पसंद की जाने वाली और बार-बार देखी जाने वाली फिल्मों में से एक है। 





प्रियदर्शन की हेरा फेरी के बाद, अक्षय कुमार और सुनील शेट्टी की जोड़ी, प्रियदर्शन की क्लासिक मल्टी-कैरेक्टर कॉमेडी फिल्म दे दना दन में दो हताश दोस्तों के रूप में आती हैं, जो पैसे की समस्या सुलझाने के लिए एक नकली अपहरण की साजिश रचते हैं, जिससे होटल में अफरा-तफरी मच जाती है। इस फिल्म में अन्य कई कलाकारो के साथ परेश रावल भी अपनी कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को हँसाने में शामिल हो जाते हैं। 





प्रियदर्शन निर्देशित और २०१० में प्रदर्शित फिल्म खट्टा मीठा, व्यवस्था पर एक व्यंग्यात्मक फिल्म थी। इस फिल्म में, अक्षय एक भ्रष्ट लेकिन ईमानदार सड़क निर्माण करने वाले ठेकेदार के रूप में परिवार, राजनीति और छोटे शहर के व्यंग्य से जूझते हैं। उनकी विशुद्ध प्रहसन फिल्मों की तुलना में यह अधिक परिस्थितिजन्य और सामाजिक कॉमेडी है जिसमें भावनात्मक परतें भी हैं। यह प्रियदर्शन और अक्षय कुमार की जोड़ी की विगत प्रदर्शित फिल्म थी। 





अक्षय कुमार और प्रियदर्शन की जोड़ी इतनी सफल क्यों है ?  प्रियदर्शन अपनी साफ़-सुथरी, तेज़ रफ़्तार वाली ग्रुप कॉमेडी फिल्मों, जो सामान्य रूप से उनकी मलयालम हिट फ़िल्मों की रीमेक या उनसे प्रेरित फिल्मे थी,  में अपनी महारत दिखाते हैं, जबकि अक्षय विचित्र परिस्थितियों में फंसे एक सामान्य युवक के रूप में, अपने शारीरिक हाव-भाव और सटीक टाइमिंग से दर्शकों को हँसाते हैं। इन फ़िल्मों में, सामान्य रूप से परेश रावल और राजपाल यादव हास्य बिखेरते दिखाई देते है। इन फिल्मों में अश्लीलता बिल्कुल नहीं होती, जिसकी वजह से ये फ़िल्में पूरे परिवार के साथ बैठकर हँसने-हँसाने के लिए बेहतरीन होती हैं।    





अक्षय की कॉमेडी का सुनहरा दौर २००४ से २०१० के मध्य का रहा है, जब उन्होंने लगातार हिट फ़िल्में देकर अपना दबदबा बनाया था। बाद में, उन्होंने एक्शन, ड्रामा (एयरलिफ़्ट, स्पेशल 26) और सामाजिक फ़िल्मों की ओर रुख कर लिया, किन्तु, उनके प्रशंसक दर्शक उन्हें आज भी उन्हें उसी हल्के-फुल्के, हँसी-मज़ाक वाले अंदाज़ में वापस देखना चाहते हैं। उनकी इस उम्मीद को भूत बंगला पूरी कर सकती है।  

Saturday, 4 April 2026

#NamitMalhotra की #Ramayan को पश्चिमी मान्यता की जरुरत क्यों ?



दो भागों में बनाई जा रही हिन्दू धार्मिक महाकाव्य रामायण पर आधारित फिल्म रामायण के निर्माता नमित मल्होत्रा, रामायण के कल ३ अप्रैल को अनावृत टीज़र पर भारतीय दर्शकों की प्रतिक्रिया से क्षुब्ध लगते हैं।   उन्होंने इसे लेकर अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा- मैं इसे (रामायण को) भारत में रहने वाले भारतीयों को खुश करने के लिए नहीं बना रहा हूँ। मेरी दृष्टि  में, यदि पश्चिम के लोगों को यह (टीज़र) पसंद नहीं आता, तो मैं इसे अपनी असफलता मानता। यह पूरी दुनिया के लिए है।





प्रोड्यूसर नमित मल्होत्रा ​​के वक्तव्य से इस तथ्य की पुष्टि होती है कि बॉलीवुड अभिनेता रणबीर कपूर, कन्नड़ सुपरस्टार यश और बॉलीवुड अभिनेता सनी देओल अभिनीत यह फ़िल्म रामायण प्रारम्भ से ही एक ग्लोबल प्रोजेक्ट है। वह इसकी सफलता को मुख्य रूप से भारतीय दर्शकों की पसंद के बजाय पश्चिमी दर्शकों की स्वीकृति से मापते हैं।





नितेश तिवारी द्वारा निर्देशित, निर्माता नामित तिवारी की फिल्म रामायण का निर्माण भी पूरी विश्वस्तरीय भव्यता के साथ किया है। इस फ़िल्म में अवतार जैसी भव्यता के लिए अवतार के बजट से कहीं अधिक व्यय किया है। भारतीय संगीतकार एआर रहमान के साथ फिल्म का संगीत हॉलीवुड की डयन, द लायन किंग, ग्लैडिएटर, पाइरेट्स ऑफ़ द कॅरीबीयन, द डार्क नाइट त्रयी के संगीत निर्देशक हैंस ज़िमर  है। यह दो हिस्सों वाली महागाथा की पहली गाथा फ़िल्म दिवाली २०२६ पर रिलीज़ प्रदर्शित होने वाली है।




नामित मल्होत्रा का यह ट्वीट थोड़ा आक्रामक लगता है।  जैसे वह अति आत्मविश्वास दिखा रहे हों। इससे, टीज़र को देखने  के बाद कड़ी प्रतिक्रिया देने वाले दर्शक उत्तेजित हो सकते है।  क्या नामित यह वक्तव्य भारतीय दर्शकों की मानसिकता पर कोई बुरा  प्रभाव डाल सकता है ?

यदि, नामित के वक्तव्य को सकरात्मक सोंच के साथ पढ़ा जाये तो उनका यह बयान का स्वतः ही भारतीय दर्शकों की मानसिकता पर कोई दुष्प्रभाव पड़ता नहीं लगता। निःसंदेह कुछ लोगों को यह वक्तव्य भारतीय दर्शकों की उपेक्षा करने वाला या अभिजात्यवर्गीय लग सकता है, जिससे उनमें निराशा या अपनी संस्कृति को दरकिनार किए जाने अनुभूति हो सकती है। किन्तु, यह अनुभूति  गहरी मनोवैज्ञानिक क्षति के बजाय, ज़्यादातर लोगों की सोच, बयान के तरीके और संदर्भ पर निर्भर करती है।

नमित मल्होत्रा ​​ने प्रारम्भ से ही 'रामायण' को एक वैश्विक परियोजना के रूप में प्रस्तुत किया है।  उन्होंने रामायण फ़िल्म 'केवल भारत में रहने वाले भारतीयों के लिए'  नहीं है, बल्कि एक ऐसी सार्वभौमिक महागाथा है जिसमें अवतार जैसी वीएफएक्स भव्यता के लिए डेंग का सहयोग, आईमैक्स प्रभाव और ऐसे कथानक को लिया गया है, जो दुनिया भर के लोगों को पसंद आए। उस समय उन्होंने कहा था कि वह चाहते हैं कि यह फ़िल्म एक उच्च-गुणवत्ता वाली सिनेमाई कृति के रूप में उभरे, जिसे किसी भी तरह की सांस्कृतिक  पहरेदारी की आवश्यकता न पड़े। पहले हॉलीवुड भारतीय कहानियों को 'गरीब और पीड़ित' लोगों की कहानियों के रूप में देखता था। इस फ़िल्म का उद्देश्य भारत की सभ्यतागत शक्ति को दुनिया के सामने लाना है।





उनके वक्तव्य के इस अंश कि 'यदि यह फिल्म पश्चिमी लोगों को पसंद नहीं आती है, तभी मैं इसे अपनी असफलता मानूंगा' मार्केटिंग की एक साहसी शैली है। दूसरे देशों के प्रोड्यूसर/निर्देशक (जैसे चीन की ब्लॉकबस्टर फ़िल्में या कोरियाई कंटेंट) भी अपनी घरेलू दर्शकों की उपेक्षा किए बिना अपनी फ़िल्मों की ग्लोबल पहुँच के बारे में बात करते हैं। मल्होत्रा ​​ने यह साफ़ किया है कि दुनिया के लिए 'एक ही रामायण' है। इसमें पूरब और पश्चिम का कोई बँटवारा नहीं है, और भारतीय लोग दुनिया भर में हर जगह रहते हैं।





कुछ भारतीय दर्शकों को यह बात क्यों चुभ सकती है।क्योंकि, रामायण केवल मनोरंजन नहीं है, यह एक पवित्र महाकाव्य है जो करोड़ों लोगों की हिंदू पहचान, मूल्यों (धर्म, मर्यादा, आदि) और राष्ट्रीय गौरव से गहराई से जुड़ा है। सफलता को मुख्य रूप से पश्चिमी मान्यता के इर्द-गिर्द गढ़ना ऐसा महसूस करा सकता है कि 'हमें अपनी ही कहानी के लिए बाहरी लोगों की मंज़ूरी चाहिए' यह औपनिवेशिक काल के बाद की उन पुरानी  संवेदनशीलताओं को जगाता है कि भारतीय संस्कृति को योग्य बनने के लिए 'तराशने' या उसे सार्वभौमिक बनाने की ज़रूरत है।





कई भारतीयों ने इसके दृश्यों को लेकर कुछ ने जीवों के डिज़ाइन को सामान्य/ओर्क जैसा या पीएस ४ के स्तर का कहा, अति वीएफएक्स प्रभाव, भक्ति-भाव की कमी की आलोचना की। जब निर्माता भारतीय दर्शकों की मुख्य उम्मीदों के स्थान पर वैश्विक (जिसे अक्सर पश्चिमी समझा जाता है) पसंद को प्राथमिकता देता हुआ लगता है, तो निराशा और बढ़ जाती है और लोग कहते हैं कि वे हमारी विरासत को बेच रहे हैं।





होता यह है कि हमारा मनोविज्ञान है कि भारतीय चीज़ें तभी सफल होती हैं जब पश्चिम उनकी तारीफ़ करता है। इससे  औपनिवेशिक हीन भावना वाली मानसिकता मज़बूत हो सकती है। बॉलीवुड में लंबे समय से दर्शकों को लेकर एक दोहरा तनाव रहा है 'आम भारतीय दर्शक बनाम वैश्विक अपील वाला। यदि कोई फ़िल्म घरेलू स्तर पर अच्छा प्रदर्शन नहीं करती, लेकिन ऑस्कर/पश्चिमी तारीफ़ महत्वपूर्ण लगती  है, तो कुछ लोगों को लग सकता है कि उनके भावनात्मक/सांस्कृतिक जुड़ाव को कम करके आंका जा रहा है।





दर्शक बहुत समझदार होते हैं। वह टिकट खरीद कर, फिल्म देखने के बाद दूसरे लोगों को बताकर अपना फ़ैसला सुनाते हैं। मज़बूत सांस्कृतिक जुड़ाव, अच्छा निष्पादन आमतौर पर निर्माता के बयानों की परवाह किए बिना स्थानीय स्तर पर जीत दिलाता है। संभावित सकारात्मक पहलू, यथा गरीब भारत और पीड़ित महिला वाली वैश्विक रूढ़ि को तोड़ने की महत्वाकांक्षा, अगर सफल होती है, तो वास्तव में सामूहिक गौरव को बढ़ा सकती है। रामायण को भारतीय मूल सामग्री को हॉलीवुड-स्तर की तकनीक के साथ दिखाना, सशक्त अनुभव करा सकता है कि हमारी कहानियाँ सबसे बड़े मंच की हक़दार हैं।





ज़्यादातर भारतीय दर्शक मनोवैज्ञानिक रूप से कमज़ोर नहीं होते। वे हॉलीवुड, के-ड्रामा, एनीमे, आदि का आनंद बिना किसी पहचान के संकट के लेते हैं। वे तभी आलोचना करते हैं जब कोई फ़िल्म उन्हें असली नहीं लगती, इसलिए नहीं कि किसी निर्माता ने 'वैश्विक' शब्द का इस्तेमाल किया है।




निष्कर्ष के रूप में यह बयान रामायण जैसे भावनात्मक रूप से संवेदनशील विषय के लिए भड़काऊ और खराब शब्दों में कहा गया है, जैसी यह तीखी प्रतिक्रिया को न्योता देने वाला है और घरेलू भावनाओं के प्रति असंवेदनशील लगता है । इससे उन मुख्य दर्शकों के नाराज़ होने का खतरा है, जिन्हें लगता है कि 'हमारे महाकाव्य को पश्चिमी मान्यता की आवश्यकता अनुभव नहीं होनी चाहिए। लेकिन इसे मानसिकता के लिए हानिकारक कहना बात को बढ़ा-चढ़ाकर कहना होगा। असली नुकसान तो तब होगा, जब फ़िल्म खुद कहानी की आत्मा को कमज़ोर कर दे, जैसे, सबको पसंद आने लायक बनाने के लिए बहुत ज़्यादा बदलाव करना या तकनीकी रूप से कमज़ोर बनना । दर्शकों की अपनी मर्ज़ी होती है। वह २०२६ की दिवाली पर परदे पर जो देखेंगे, उसके आधार पर फ़िल्म को पसंद या नापसंद कर सकते हैं, न कि किसी एक इंटरव्यू की किसी एक लाइन के आधार पर। अगर फ़िल्म भावनात्मक रूप से दिल को छू लेने वाले राम, मज़बूत मूल्यों और भव्यता को बिना कहानी के मूल तत्व से समझौता किए पेश करती है, तो भारतीय दर्शक इसे दिल खोलकर अपनाएँगे। अब चाहे पश्चिमी मान्यता मिले या न मिले।   

Friday, 3 April 2026

#Jawan से ३०० करोड़ आगे #RanveerSingh की #Dhurandhar2



बॉक्स ऑफिस पर, रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर २ की धुरंधर सफलता को देखते हुए, एक्स और दूसरे सोशल मीडिया पर पेड पीआर सक्रिय हो गए हैं।  वह धुरंधर के रणवीर सिंह को अस्वीकार करते हुए, शाहरुख़ खान को ही बड़ा स्टार मानते हैं।





इसमें कोई संदेह नहीं कि शारुख खान, १९९२ से अर्थात लगभग ३४ साल से फिल्मों में सक्रिय हैं। उन्होंने अपने फिल्म जीवन में जहाँ बड़ी सफल फ़िल्में दी हैं, वही कई बुरी तरह से असफल फ़िल्में भी दी है।  २०२३ से पहले,  शाहरुख़ खान, दिलवाले, फैन, रईस, जब हैरी मेट सेजल, जैसी बड़ी फ्लॉप फिल्में दे रहे थे।





किन्तु, २०२३ में बॉक्स ऑफिस ने पलटा खाया। पहले शाहरुख़ खान अभिनीत फिल्मं पठान हजार करोडिया फिल्म बनी।  यद्यपि इस फिल्म को गणतंत्र दिवस सप्ताहांत का खूब लाभ मिला।  फिल्म का वर्ल्डवाइड ग्रॉस १०५० करोड़ का रहा। इसी साल उनकी दूसरी हजार करोडिया फिल्म जवान जन्माष्टमी के विस्तारित सप्ताहांत में प्रदर्शित हुई।  इस फिल्म का वर्ल्डवाइड ग्रॉस ११४८ करोड़ रहा। इस प्रकार से, जवान शाहरुख़ खान के फिल्म जीवन की सबसे बड़ी सफल फिल्म कही जा सकती है।





शाहरुख़ खान की फिल्म जवान की सफलता के गुणगान गाने वाले पीआर लोगों के सामने कुछ आंकड़े प्रस्तुत करने है।  यह आंकड़े जवान और धुरंधर २ के है।  इन आंकड़ों से पता चलेगा कि शाहरुख़ खान की फिल्म जवान, रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर २ की तुलना में कहाँ खड़ी है। 





एंटरटेनमेंट उद्योग की खोजखबर रखने वाले चैनल सक्निलक के आंकड़ों पर भरोसा करे तो जवान ने ७ सप्ताहों अर्थात ६३ दिनों में ११६० करोड़ था।  फिल्म का भारत में ग्रॉस ७६० करोड़ का था।  फिल्म जवान ने भारत में ६४० करोड़ का विशुद्ध व्यवसाय किया था। उस समय शाहरुख़ खान को दुनिया का सबसे बड़ा अभिनेता का  झुनझुना बजाया गया था। यद्यपि, यह कीर्तिमान जल्द ही तोड़ दिया गया। जवान ने, विदेशी छविगृहों में ४०० करोड़ का ग्रॉस किया था।





जवान के ६३ दिनों की आंकड़ों की धुरंधर २ के आंकड़ों की तुलना से पता चलता है कि धुरंधर २ ने, १५ दिनों में धुआंधार आंकड़ों के कीर्तिमान भंग कर दिए है। यह फिल्म अभी तक वर्ल्डवाइड १४९२ करोड़ से अधिक का ग्रॉस कर लिया है। यह फिल्म ११२२ करोड़ से अधिक का ग्रॉस कर चुकी है।  धुरंधर २ ने, शाहरुख़ खान की फिल्म जवान के वर्ल्डवाइड ४०० करोड़ के ग्रॉस की तुलना में १५ दिनों में ही ३७० करोड़ का ग्रॉस कर लिया है। विशुद्ध कारोबार की तुलना करे तो धुरंधर २ का ९३७ करोड से अधिक का विशुद्ध कारोबार जवान के तुलान में ३०० करोड़ अधिक है।





इस प्रकार से, रणवीर सिंह की फिल्म ने, शाहरुख़ खान की फिल्म के भारत में ग्रॉस से ३६२ करोड़, वर्ल्ड वाइड ग्रॉस से ३३२ करोड़ अधिक का ग्रॉस कर लिया है। भारत में विशुद्ध कारोबार भी जवान की तुलना में धुरंधर २ का २९७ करोड़ अधिक है।





धुरंधर २ के, हिंदी पेटी में अब तक, ,६७,८१६ शो हो चुके है।  फिल्म ने १०५५ करोड़ १५ लाख का ग्रॉस कर लिया है।  इस फिल्म ने अब तक ८७९ करोड़ २९ लाख से अधिक का विशुद्ध व्यवसाय कर चुकी है।  सक्निलक के अनुसार, फिल्म ने १६वे दिन दोपहर तक पूरे विश्व के छविगृहों में १५०० करोड़ का ग्रॉस कर, एक सशक्त कीर्तिमान बना दिया है।