नवीनतम समाचार के अनुसार, फिल्म निर्माता निर्देशक सूरज बड़जात्या ने, अपनी यह प्रेम मोल लिया शीर्षक वाली फिल्म का शीर्षक बदल कर यह प्रेम मोह माया है, कर दिया है। जैसा कि सूरज बड़जात्या की फिल्मों के शीर्षक की शैली होती है, दोनों ही शीर्षकों में प्रेम सम्मिलित था। किन्तु, इनमे सूरज के पहले प्रेम सलमान खान नहीं है।
२०२३ से, यह समाचार आ रहे थे कि सूरज बड़जात्या और सलमान खान अगली फिल्म में काम करने जा रहे है। उस समय इस फिल्म का नामा प्रेम की शादी होना था। यह फिल्म सूरज बड़जात्या की पारिवारिक फिल्मों की परंपरा में होने के बाद भी पर्याप्त भिन्न थी। यह एक जोड़े के प्रेम की, एकल परिवार, के कथानक से गुंथी प्रेम कथा थी।
२०१५ में, सलमान खान ने सूरज बड़जात्या के निर्देशन में, सोनम कपूर के साथ फिल्म प्रेम रतन धन पायो की थी। इसके बाद से, यह दोनों ही, साथ काम करने के लिए उपयुक्त पटकथा की तलाश में थे।
२०२४ में फिर यह खबर आई कि सलमान खान और सूरज बड़जात्या एक फिल्म के लिए फिर से साथ आने वाले हैं। किन्तु, जहाँ पहले कहा जा रहा था कि फिल्म का नाम ‘प्रेम की शादी’ होगा, वहीं फिल्म का यह शीर्षक नहीं होना था । बॉलीवुड फिल्मों पर एक वेब पोर्टल की रिपोर्ट के अनुसार, सलमान और सूरज ने आखिरकार अपनी आने वाली फिल्म की स्क्रिप्ट फाइनल कर ली है, लेकिन अभी तक उसका नाम तय नहीं किया है।किन्तु, इसके मार्च २०२६ में पता चला कि अभी ऐसा कुछ भी नहीं है। सूरज ‘प्रेम की शादी’ नाम से कोई फिल्म नहीं बना रहे हैं। बात ख़त्म !
अब समाचार है कि सूरज बड़जात्या के निर्देशन में बनाई जा रही फिल्म यह प्रेम मोल लिया की शूटिंग लगभग पूरी हो चुकी है। इस फिल्म के नायक प्रेम आयुष्मान खुराना है। उनकी प्रेमिका शरवरी वाघ होंगी। कहा जा रहा है कि फिल्म यह प्रेम मोल लिया की शूटिंग इस महीने या आगामी माह मई तक अवश्य पूरी हो जाएगी।
फिल्मों की सूरज शैली वाली फिल्म यह प्रेम मोल लिया बनी मधुर संगीत से भरपूर प्रेम कहानी होगी। इस फिल्म के रोमांटिक संगीत के लिए हिमेश रेशमिया यह प्रेम मोल लिया की टोली में शामिल किये गए है। राजश्री फिल्म्स की फिल्मों के नियमित संगीतकार रविंद्र जैन की असामयिक मृत्यु के पश्चात्, फिल्म प्रेम रतन धन पायो में हिमेश रेशमिया ने उनकी जगह ले ली थी। इस प्रकार से, यह प्रेम मोल लिया, सूरज बड़जात्या के लिए हिमेश की दूसरी फिल्म है।
अब प्रश्न यह है कि क्या संगीत से सनी सूरज बड़जात्या की प्रेम कहानी फिल्म दर्शक स्वीकार करेंगे। इसमें कोई संदेह नहीं कि सूरज बड़जात्या की शैली की फ़िल्में विशुद्ध, भावुक, परिवार-केंद्रित रोमांस, जिसमें सरल प्रेम, संस्कार, संगीत, परिवार की एकता और प्रेम जैसे ग्रीन फ्लैग फ़िल्में बनाई है। इस शैली की फ़िल्में आज के दर्शकों के बीच मिश्रित प्रतिक्रिया पाती है। दर्शकों का एक वर्ग, जो अतीत के विशुद्ध पारिवारिक रोमांस को पसंद करता है, ऎसी फिल्म स्वीकार करते हैं, किन्तु, आज का कथित जेन जेड और मिलेनियल युवा दर्शक अक्सर इसे पुराना या 'सांस्कारिक' मानते हैं।
सूरज बड़जात्या की फिल्में १९९० और २००० के दशक में खूब चलीं। क्योंकि तब पारिवारिक मूल्यों और भावुक कहानियों से जुड़ने वाला दर्शक पर्याप्त था। अमिताभ बच्चन का क्रुद्ध युवा का नशा युवाओं पर नहीं चढ़ा था। इसी लहर में बहते हुए सूरज बड़जात्या मैंने प्यार किया, हम आपके हैं कौन, हम साथ साथ हैं, विवाह, एक विवाह ऐसा भी और प्रेम रतन धन पायो हिट हो गई। किन्तु, प्रेम रतन धन पायो ने एक संकेत दे दिया था। हिट संगीत तथा सलमान खान और सोनम की फिल्म प्रेम रतन धन पायो, राजश्री की प्रेम फिल्मों में सबसे कम १९४ करोड़ का विशुद्ध व्यवसाय करने वाली फिल्म थी। इस कम दर्शकों ने भी देखा। स्वयं सूरज बड़जात्या भी इसे स्वीकार करते हुए कहते हैं कि आज का दर्शक कबीर सिंह जैसी इंटेंस फिल्में पसंद करता है।
ऎसी दशा में, क्या आयुष्मान खुराना और शरवरी का एकल परिवार रोमांस दर्शक स्वीकार करेंगे ? सफल हो सकता है तभी यदि दर्शक आयुष्मान-शरवरी में शुद्ध रोमांस अनुभव करे। क्या ऐसा संभव है ? आयुष्मान खुराना की इमेज विशिष्ट रोमांस फिल्में नहीं की है। उनकी हालिया प्रदर्शित फिल्मों थम्मा, ड्रीम गर्ल, एन एक्शन हीरो, आर्टिकल १५, अंधाधुन, आदि ने उनकी रोमांटिक इमेज नहीं बनने दी है। स्वयं खुराना ने भी ऐसी फिल्में चुनी हैं, जो पारम्परिक बम्बईया नहीं थी।
कुछ यही दशा शरवरी वाघ की है। कॉन फिल्म बंटी और बबली २ से हिंदी फिल्मों में पदार्पण करने वाली शरवरी की आगामी फिल्म अल्फा की बड़ी चर्चा है। किन्तु, यह प्रेम मोह माया है की कोई विशेष चर्चा नहीं हो रही। क्योंकि, शरवरी की मुँज्या और महराज जैसी फिल्मे उनकी रोमांटिक इमेज में सहायक नहीं है। प्रदर्शित फिल्म वेदा और आगामी दो तीन फ़िल्में उनके एक्शन के प्रति रुझान का संकेत है।
क्या इतने विपरीत के बाद भी यह प्रेम मोह माया है सफल हो सकेगी ? फिल्म की सफलता के बड़े कारण है। विगत कुछ महीनों में प्रदर्शित रोमांस फिल्मों सैयारा, एक दीवाने की दीवानीयत, तेरे इश्क़ में, आदि को मिली सफलता दर्शकों द्वारा रोमांस को संरक्षण देने की ओर इशारा करने वाली है। दर्शको की नब्ज पहचाने वाले फिल्म दर्शक पुष्टि करते हैं कि दर्शक रोमांस का दीवाना है। विशेष रूप से त्योहारों में, दर्शक सपरिवार पारिवारिक रोमांस फिल्में देखने निकलता है।
राजश्री फिल्म्स, अपनी फ़िल्में बड़े योजनाबद्ध ढंग से करता है। उनका झुकाव वर्ड ऑफ़ माउथ अर्थात दर्शकों की प्रतिक्रिया पर निर्भर करती है। वह बैनर अपनी फिल्मो के प्रति दर्शकों में उत्सुकता जगाता है। इसलिए, फिल्मों को कम प्रिंट में रिलीज़ करता है। दर्शकों के रुझान के साथ फिल्म के प्रिंट भी बढ़ते चले जाते हैं। सूरज बड़जात्या की पहली फिल्म मैंने प्यार किया मात्र २९ प्रिंट में प्रदर्शित की गई थी। हम आपके हैं कौन के तो केवल २६ प्रिंट रिलीज़ किये गए थे। जबकि, हम साथ साथ हैं के ६० प्रिंट बाहर आये थे। इस व्यूह रचना से, यह फिल्म कंपनी अच्छे दर्शक पाने में सफल होती है।
फिल्म यह प्रेम मोह माया है को भी फिल्म प्रदर्शन के बाद दर्शकों की प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा होगी। आज के समय में ओपनिंग वीकेंड तो स्टार पावर, ट्रेलर और मार्केटिंग से तय हो जाता है, लेकिन लॉन्ग रन और मल्टीप्लेक्स/सिंगल स्क्रीन्स में ग्रोथ दर्शकों की प्रतिक्रिया से ही तय होती है। सैयारा, एक दीवाने की दिवानीयत, तेरे इश्क़ में, आदि रोमांस फिल्मे दर्शकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया के बल पर सफल हो सकी। अब देखने की बात होगी कि यह प्रेम मोह माया है दर्शकों में अपने प्रति मोह जगा कर, उनसे माया (पैसा) वसूल पाएगी ?

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