Tuesday, 30 June 2026

#AliaBhatt की #Alpha से टकराती #HumaQureshi की #BabyDoDieDo



इस शुक्रवार दो महिला हत्यारिनो का टकराव होने जा रहा है। यह महिलाएं, अपने कारण से या किसी के कहने से पैसा लेकर या फ्रीलांसिंग कर हत्याएं करती है। इन विदेशी सिनेमा से प्रेरित इन चरित्रों के माध्यम से यह टकराव आलिया भट्ट की फिल्म  'अल्फा' और हुमा कुरैशी की फिल्म 'बेबी डू डाई डू' के बीच होगा।  बॉक्स ऑफिस पर दो फिल्मों की यह भिड़ंत ३ जुलाई २०२६ को होने जा रही है। दोनों ही फिल्मों में महिला हत्यारों (फीमेल हिटवुमन) की कहानी दिखाई गई है। इन फिल्मों से सिनेमाघरों में एक्शन का जबरदस्त मुकाबला देखने को मिलेगा। 






अल्फा, वाईआरएफ के स्पाई यूनिवर्स की बहुप्रतीक्षित फिल्म है। यशराज फिल्म्स इस फिल्म से पहली बार महिला स्पाई लेकर आ रहा है। इस फिल्म में आलिया भट्ट के साथ शरवरी लीड रोल में नजर आएंगी। बॉबी देओल की विशिष्ट केंद्रीय भूमिका है। बेबी डू डाई डू फिल्म में हुमा कुरैशी ने एक मूक-बधिर हिटवुमन का किरदार निभाया है जो अपनी दिवंगत बहन की आवाज सुनकर खूंखार मिशन को अंजाम देती है।  उनके साथ फिल्म में सिकंदर खेर और चंकी पांडे भी प्रमुख भूमिकाओं में है। 





बॉक्स ऑफिस पर दो महिला फिल्मों की टक्कर दर्शकों के लिए काफी रोमांचक है। क्योंकि एक तरफ बड़े बजट और जासूसी फ्रेंचाइजी फिल्म 'अल्फा' है तो दूसरी तरफ हुमा कुरैशी की सस्पेंस-थ्रिलर 'बेबी डू डाई डू' है।  'बेबी डू डाई डू' को लेकर सोशल मीडिया पर भी जबरदस्त  माहौल बना हुआ है।  हॉलीवुड निर्देशक जैक स्नाइडर द्वारा इसके एक्शन की तारीफ किए जाने के बाद दर्शकों में फिल्म के प्रति उत्सुकता और बढ़ गई है। 






बजट, प्री-रिलीज बिजनेस और मौजूदा मौजूदा माहौल के गणित को देखते हुए हुमा कुरैशी की 'बेबी डू डाई डू'  के बॉक्स ऑफिस पर 'हिट' का टैग हासिल करने की संभावना काफी अधिक है। फिल्मों का व्यापारिक विश्लेषण के अनुसार बेबी डू डाई डू  के  हिट होने की सबसे  सशक्त कारण कम बजट, सुरक्षित दांव है। फिल्म की अनुमानित लागत मात्र २२ करोड़ है। कम लागत होने के कारण फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर क्लीन 'हिट' होने के लिए केवल ४० से ५० करोड़ का लाइफटाइम कलेक्शन करना होगा, जो इसके अनोखे 'मूक-बधिर हिटवुमन' कांसेप्ट के चलते काफी आसान लग रहा है।






बेबी डू डाई डू  के  पक्ष में सबसे महत्वपूर्ण बात इसका प्रभावशाली प्रदर्शन पूर्व बना माहौल है।  हॉलीवुड डायरेक्टर द्वारा इसके एक्शन की तारीफ करने के बाद से सोशल मीडिया पर इसका वर्ड-ऑफ-माउथ बेहद सशक्त है।







अल्फा की अधिक जोखिम और बड़ी चुनौती, इसका भारी-भरकम बजट माथे पर सिलवटें लाने वाला है। वाईआरएफ  की इस एक्शन थ्रिलर का बजट अस्सी करोड़ से १२० करोड़ के बीच आंका जा रहा है। इस बजट के मद्देनजर फिल्म को केवल 'हिट' का दर्जा पाने के लिए  ही भारत में कम से कम १४०-१६० करोड़ का नेट बिजनेस करना होगा।







किन्तु, अल्फा की प्रदर्शन से पूर्व की हाइप काफी कमजोर है। ट्रेड एनालिस्ट्स के अनुसार, रिलीज के ठीक पहले 'अल्फा' का सोशल मीडिया पर माहौल काफी ठंडा पड़ा है। अगर फिल्म को पहले दिन सिंगल-डिजिट (१० करोड़ से कम) की ओपनिंग मिलती है, तो इतने बड़े बजट की रिकवरी करना बेहद मुश्किल हो जाएगा।







इस तुलना से स्पष्ट है कि अनुमानित बजट के प्रकाश में इन फिल्मों को हिट होने के लिए  जरूरी कमाई का कर लेना आवश्यक हो जाता है। वर्तमान प्री-रिलीज स्थिति में बेबी डू डाई डू अपने बजट २२ करोड़ के बदले में ४०-४५ करोड़ की उम्मीद कर सकती है। जबकि, अल्फा  ८०-१२० करोड़ के बजट को ध्यान में रखे तो फिल्म को अपनी ओपनिंग के दृष्टिगत ही १४०-१६० उम्मीद कर सकती है। 






बॉक्स ऑफिस के अर्थशास्त्र के नियम के अनुसार, जो फिल्म अपनी लागत कम रखती है, उसके मुनाफे में जाने के  अवसर अधिक होते हैं। इसलिए निवेश पर प्रतिफल के मामले में 'बेबी डू डाई डू' बाजी मार सकती है। जबकि, 'अल्फा' को हिट होने के लिए सिनेमाघरों में असाधारण  प्रदर्शन करना होगा।






यहाँ बताते चलें कि यशराज फिल्म्स ने आलिया भट्ट की 'अल्फा' को अब ३ जुलाई के स्थान पर एक दिन पहले २ जुलाई को प्रदर्शित करने का निर्णय लिया है। जबकि, हुमा कुरैशी की 'बेबी डू डाई डू'  ३ जुलाई को ही प्रदर्शित हो रही है।






इन दोनों फिल्मों को मिली एडवांस बुकिंग ट्रेंड्स के अनुसार अल्फा वाईआरएफ स्पाई यूनिवर्स की फिल्म होने के बावजूद इसकी एडवांस बुकिंग उम्मीद से काफी धीमी और ठंडी शुरू हुई है। नेशनल मल्टीप्लेक्स चेन्स में भी टिकटों की बिक्री की रफ्तार सुस्त है, जो मेकर्स के लिए चिंता का विषय है।







वहीँ, बेबी डू डाई डू, छोटे बजट की फिल्म होने के कारण फिल्म की एडवांस बुकिंग इसके पैमाने के हिसाब से काफी संतोषजनक और मजबूत है। फिल्म का 'कल्ट/डार्क-कॉमेडी' एक्शन प्रोमो दर्शकों को आकर्षित कर रहा है, जिससे लिमिटेड स्क्रीन्स पर भी इसकी टिकटें अच्छी गति से बिक रही हैं।






पहले दिन के बॉक्स ऑफिस प्रेडिक्शन  के अनुसार अल्फा को अनुमानित ओपनिंग ८ से १० करोड़ नेट की मिल रही है। जबकि, फिल्म का भारी-भरकम बजट देखते हुए इसे कम से कम  १५ -१८ करोड़ की ओपनिंग चाहिए । धीमी शुरुआत के कारण अब यह फिल्म पूरी तरह से स्पॉट बुकिंग और शाम के शोज में जनता के  वर्ड-ऑफ-माउथ (सकारात्मक समीक्षा) पर निर्भर करेगी। 






बेबी डू डाई डू की अनुमानित ओपनिंग २-३ करोड़ नेट मिलती दिखाई दे रही है। फिल्म के २२ करोड़ के दृष्टिगत फिल्म के लिए २-३ करोड़ की ओपनिंग को बेहतरीन शुरुआत माना जाएगा। यदि दर्शकों को इसका अनूठा एक्शन पसंद आता है, तो वीकेंड (शनिवार और रविवार) को इसकी कमाई में जबरदस्त उछाल देखने को मिल सकता है।






जहाँ तक कमाई के आंकड़ों की बात है, 'अल्फा' नंबर १ रहेगी, लेकिन अपनी भारी लागत के कारण उस पर पहले ही दिन से दबाव रहेगा। वहीं, 'बेबी डू डाई डू' अपने सीमित बजट और अच्छे एडवांस बुकिंग रिस्पॉन्स के कारण पहले दिन से ही मुनाफे की तरफ सुरक्षित कदम बढ़ाती दिख सकती है। 






दोनों फिल्मों के स्क्रीन काउंट अर्थात सिनेमाघरों की संख्या पर दृष्टि डालें तो अल्फा वाईआरएफ के बड़े बैनर की फिल्म होने के कारण भारत में बड़े पैमाने पर रिलीज की जा रहा है। 'अल्फा' को भारत में लगभग ३५०० से ४०००  स्क्रीन्स मिलने का अनुमान है। फिल्म को सभी प्रमुख मल्टिप्लेक्स और सिंगल स्क्रीन्स पर मुख्य प्राइम-टाइम शोज दिए गए हैं। वही बेबी डू डाई डू एक सीमित और कल्ट-ऑडियंस अर्थात लक्षित दर्शकों वाली फिल्म है। इसे भारत में लगभग ८०० से १२००  स्क्रीन्स मिलने की उम्मीद है। इसे मुख्य रूप से बड़े शहरों और चुनिंदा मल्टिप्लेक्स चेन में ज्यादा जगह दी जा रही है।







इन दोनों फिल्मों के ट्रेलर को मिले  रिस्पॉन्स के अनुसार अल्फा के ऑफिशियल ट्रेलर को दर्शकों से मिला-जुला लेकिन चर्चा से भरपूर  रिस्पॉन्स मिला है। आलिया भट्ट और शरवरी के 'नेवर-सीन-बिफोर' एक्शन अवतार, बैकग्राउंड म्यूजिक और विजुअल्स की काफी तारीफ हो रही है। सबसे बड़ा सरप्राइज इंटरनेट पर वाईआरएफ स्पाई यूनिवर्स के 'कबीर' यानी ऋतिक रोशन  के कैमियो की झलक को लेकर है, जिससे फैन्स के बीच जबरदस्त क्रेज बन गया है। कुछ दर्शकों को फिल्म के शुरुआती डायलॉग्स और बॉबी देओल का हरियाणवी लहजा  थोड़ा कमजोर लगा।






बेबी डू डाई डू के ट्रेलर को लेकर सोशल मीडिया और समीक्षकों की राय काफी बंटी हुई  नजर आ रही है। हुमा कुरैशी के मूक-बधिर सीरियल किलर के अनोखे कांसेप्ट और सस्पेंस से भरे बैकग्राउंड टोन को काफी पसंद किया जा रहा है। इसके शुरुआती टीज़र ने दर्शकों में कहानी को लेकर अच्छी उत्सुकता जगाई थी। किन्तु, फिल्म समीक्षकों का मानना है कि ट्रेलर थोड़ा फीका है और इसमें थिएटर्स जैसी बड़ी अपील की कमी दिखती है। कुछ जगहों पर एक्शन सीन्स की एडिटिंग थोड़ी कमजोर बताई गई है।






स्क्रीन काउंट और स्टार पावर के मामले में 'अल्फा' का पलड़ा भारी है, लेकिन 'ऋतिक रोशन' के कैमियो हाइप के बावजूद इसके खुद के कंटेंट को लेकर दर्शकों में थोड़ा संशय है। वहीं 'बेबी डू डाई डू' अपने अनूठे कांसेप्ट के दम पर सीमित स्क्रीन्स में भी अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही है।

Monday, 29 June 2026

बॉक्स ऑफिस पर #EmraanHashmi का #Awarapan2 और #SunnyDeol का #Batwara1947 ?



उन्यासी साल पहले, १४ अगस्त १९४७ को भारत का बंटवारा कर, पाकिस्तान बनवाया गया था।  इस बार, स्वतंत्रता दिवस से ठीक एक दिन पहले १४ अगस्त, २०२६ को भारत के बॉक्स ऑफिस पर दर्शकों,  फिल्म के पर्दों, शोज और सीटों का बंटवारा होगा।  यह बटवारा बॉलीवुड की दो फिल्मों के माध्यम से  होगा।





१४ अगस्त २०२६ को बॉक्स ऑफिस पर दो फिल्मों का टकराव होने जा रहा है।  यह दोनों फ़िल्में अपनी घोषणा से ही फिल्म प्रेमियों के मध्य चर्चा में है।  यह दो फ़िल्में है इमरान हाशमी की रोमांस फिल्म आवारापन २ और सनी देओल की देश  के बंटवारे की पृष्ठभूमि पर बटवारा १९४७। 





आवारापन २, २००७ में प्रदर्शित इमरान हाशमी की थ्रिलर फिल्म आवारापन की सीक्वल फिल्म है।  इस फिल्म का निर्देशन नितिन कक्कड़ ने किया है।  फिल्म में, इमरान हाश्मी अपने १९ साल पहले के आवारापन के चरित्र शिवम् पंडित को दोहरा रहे है। इसमें उनका साथ दिशा पटानी, रणदीप हूडाऔर शबाना आज़मी दे रहे है।



 


वहीँ बटवारा १९४७, जिसे लाहौर १९४७ शीर्षक के साथ पूरा किया गया था, राजकुमार संतोषी की पीरियड ड्रामा फिल्म है। इस फिल्म को आमिर खान ने निर्मित किया है। फिल्म सनी देओल, प्रीति ज़िंटा और शबाना आज़मी ने अभिनय किया है। यह दोनों ही फ़िल्में दर्शकों का ध्यान आकृष्ट कर पाने में सफल होती है।  इसलिए उम्मीद तो यही की जाती है कि यह फ़िल्में अपने लक्षित दर्शकों को छविगृहों ला पाने में समर्थ होंगी। इसीलिए, उत्सुकता से देखा जा रहा है कि कौन फिल्म किस पर भारी पड़ती है अर्थात अधिक कारोबार कर पाती है।   





बटवारा १९४७  ज़्यादा मास अपील और सनी देओल के हालिया ट्रैक रिकॉर्ड और देशभक्ति थीम्स की वजह से अधिक ओपनिंग ले सकती है। अनुमानित है कि अपनी थीम और सनी देओल की छवि के कारण बटवारा १९४७ बॉक्स ऑफिस पर २० से ३० करोड़ का लक्ष्य पा सकती है। यह भी संभव है कि यह फिल्म स्वत्नत्रता दिवस सप्ताहांत का अपने विषय और सनी देओल की देशभक्ति से सरोबार एक्शन छवि तथा आमिर खान प्रोडक्टिविन की प्रतिष्ठा के प्रभाव से अधिक कारोबार भी कर सकती है। किन्तु, इसके बावजूद सनी देओल की फिल्म बटवारा १९४७ अपनी पूर्व की देशभक्तिपूर्ण फिल्मों बॉर्डर २ के प्रथम दिन ३२ करोड़ और ग़दर २ के ४० के लक्ष्य को नहीं पा सकेगी।





आवारापन २ प्रदर्शन पूर्व की सुगबुगाहट में सबसे आगे है। इसकी रोमांटिक शैली रोमांस फिल्मों के कीर्तिमानों को लक्ष्य में रखती है।  ऐसा प्रतीत होता है कि आवारापन २ का लक्ष्य  शायद रोमांस शैली में कीर्तिमान प्रारम्भ लेने वाली फिल्म सैयारा के २२ करोड़ नेट को तोड़ना चाहेगी। आवारापन कल्ट फिल्म मानी गई थी। आवारापन की कल्ट इमेज ज़बरदस्त नॉस्टैल्जिया लिए हुए है। इमरान हाशमी लम्बे समय बाद रोमांटिक मुद्रा में दिखाई देंगे।  इसी कारण से फिल्म को २२ से २५ करोड़ का नेट कारोबार करने की आशा है। 






दर्शकों के बंटवारे की दृष्टि से दोनों फिल्मों को उनके अलग-अलग जॉनर थोड़ा अलग बनाते हैं। इसलिए आवारापन २ शहरी युवाओं, जोड़ो और इमरान हाशमी के परंपरागत दर्शकों  को रोमांस-थ्रिलर नॉस्टैल्जिया के साथ टारगेट करती है, जबकि बटवारा १९४७ सनी देओल की एक्शन-हीरो इमेज और पार्टीशन ड्रामा के ज़रिए आम/ग्रामीण दर्शकों, परिवारों और देशभक्ति की भावना को अपील करती है। इस कारण से  इन फिल्मों के कलेक्शन में सीधे कमी नहीं हो सकती है, किन्तु, छविगृहों के पर्दों का बटवारा अवश्य कर जाती हैं। 






यद्यपि, स्वतंत्र दिवस सप्ताहांत की लंबी छुट्टियों और दर्शकों में फिल्मों के प्रति जोश बॉक्स ऑफिस पर उत्साह पैदा करते है। यह स्थिति बटवारा १९४७ के कथानक को सहयोग करती है। किन्तु, यदि सलमान खान की फिल्म मातृभूमि की संभावित प्रविष्टि इसे प्रभावित कर सकती है।  यह टकराव पर्दों को साझा करने का तनाव और खास सर्किट में एडवांस बुकिंग की लड़ाई को बढ़ाता हैं। 






सनी देओल की फिल्मों की खासियत होती है कि वह अपने कथानक और सन्देश के कारण अन्य फिल्मों पर भरी पड़ जाती है। यही कारण है कि फिल्म व्यापार के जानकारों का अनुमान है कि सनी देओल की फिल्म को ५५ से ६५ प्रतिशत परदे मिल सकते हैं। वही  आवारापन २ को रोमांस-थ्रिलर नॉस्टैल्जिया और युवा आबादी की पसंदगी के अनुरूप शहरी और मल्टीप्लेक्स छविगृहों में ४० से ६० प्रतिशत सीटें मिल सकती है।





यहाँ, १९ साल पूर्व के अतीत में विचारना होगा। इमरान हाशमी की म्यूजिकल रोमांस फिल्म आवारापन २९ जून २००७ को प्रदर्शित हुई थी। इसी दिन सनी देओल की पारिवारिक फिल्म अपने भी प्रदर्शित हुई थी। जून २००७ में, सनी देओल की फिल्म 'अपने' ने बॉक्स ऑफिस पर इमरान हाशमी की 'आवारापन' से अधिक व्यवसाय किया था। 'अपने' ने औसत प्रारम्भ किया था, जबकि 'आवारापन' की शुरुआत खराब रही थी।  यह दूसरी है कि बाद में फिल्म को कल्ट स्टेटस मिल गया। 




   

किन्तु, १९ साल बाद, आज स्थिति काफी कुछ बदली हुई है। २००७ में आवारापन २ और अपने छुट्टियों के सप्ताहांत के बिना प्रदर्शित हुई थी। जबकि २०२६ स्वतंत्रता दिवस सप्ताहांत के अतिरिक्त लम्बी छुट्टियों का सिलसिला है। इंडिपेंडेंस डे वीकेंड बटवारा १९४७ की देश विभाजन की पृष्ठभूमि के कथानक को पसंद प्राथमिकता देने वाला है, जिसमें पिछली देशभक्ति फिल्मों की सफलताओं की तरह लंबे समय तक चलने की संभावना है, जबकि आवारापन २ को सीक्वल की याद और शहरी मल्टीप्लेक्स वृद्धि का लाभ मिलता है। यह संकेत २००७ में दिखाई नहीं देता था

क्या #King का #Doomsday लायेंगे #Avengers और #Dune3 ?



शाहरुख खान की आगामी २४ दिसंबर २०२६ को प्रदर्शित होने जा रही एक्शन-थ्रिलर फिल्म 'किंग' का छह दिनों बाद, बॉक्स ऑफिस पर सीधा टकराव हॉलीवुड की दो बहुप्रतीक्षित फिल्मों 'एवेंजर्स: डूम्सडे' और  'ड्यून पार्ट 3'  तथा  बॉलीवुड की हॉरर-कॉमेडी फिल्म 'शक्ति शालिनी' से है। फिल्म किंग के प्रदर्शन पर इन टकरावों का क्या प्रभाव पड़ेगा ?  





'एवेंजर्स: डूम्सडे' और 'ड्यून पार्ट 3' जैसी बड़ी फ्रेंचाइजी फिल्मे एक सप्ताह पूर्व १८ दिसंबर को प्रदर्शित हो रही है।  जबकि, किंग ६ दिन बाद २४ दिसंबर को प्रदर्शित हो रही है। यह दोनों फिल्मे वीएफएक्स प्रभाव वाली तकनीकी रूप से समृद्ध फ़िल्में हैं।  दोनों ही फिल्मों को मल्टीप्लेक्स छविगृहों और आईमैक्स पर्दों की आवश्यकता है।  इन दोनों फिल्मों को यह परदे मिले भी है।  चूंकि, शाहरुख़ खान की फिल्मों का दर्शक भी मल्टीप्लेक्स वाला है, इसलिए किंग को कुछ पर्दों का टोटा पड़ भी सकता है। किन्तु, इतना नहीं कि किंग का व्यवसाय प्रभावित हो।





यद्यपि, क्रिसमस की छुट्टियों का लंबा सप्ताहांत, बॉलीवुड और हॉलीवुड, दोनों को फूलने-फलने का अवसर देता है। इसलिए, शाहरुख़ खान की फिल्म को पर्याप्त परदे तो मिलेंगे ही। शाहरुख़ खान की फिल्मों का दर्शक एकल पर्दों वाले छविगृहों वाला भी है।  डूम्सडे और ड्यून ३ को इनमें से कुछ परदे मिल जाएंगे।  किंग को, बॉलीवुड फिल्म शक्ति शालिनी से टक्कर मिल सकती है।  इसके स्पष्ट कारण भी है। यह फिल्म मैडॉक फिल्म्स की हॉरर कॉमेडी यूनिवर्स की फिल्मों में से है।  यह एक महिला चरित्र प्रधान फिल्म है।  फिल्म में सैयारा से प्रसिद्ध अभिनेत्री अनीत पड्डा शक्ति और शालिनी की दोहरी भूमिका कर रही है ।  शक्ति एक सामान्य महिला है, जबकि शालिनी बुरी आत्मा से ग्रसित है। शक्ति, शालिनी के विरुद्ध लोगों को बचाने का काम करती है। फिल्म के निर्देशक आदित्य सरपोतदार हैं।  आदित्य ने मुँज्या और थम्मा जैसी सफल फिल्मों का निर्देशन किया था। 





हिंदी दर्शकों को हॉरर की हास्य से भरपूर कथा आकर्षित करती है। विशेष रूप से, एकल पर्दों के दर्शक छविगृहों के अंधेरों में भयभीत होना चाहते है। 'शक्ति शालिनी' जैसी घरेलू फिल्मों के साथ क्लैश होने के कारण सिंगल स्क्रीन और मास पॉकेट में स्क्रीन्स का बंटवारा हो सकता है। किन्तु, सम्भव है कि मैडॉक फिल्म्स शाहरुख़ खान की फिल्म के समक्ष अपनी फ़िल्में लाने से विरत रहे।






इन चुनौतियों के बावजूद, फिल्म के थिएट्रिकल राइट्स और प्री-रिलीज बिज़नेस ने एक नया रिकॉर्ड बनाया है, जो फिल्म के प्रति दर्शकों के अपार उत्साह को दर्शाता है। फिल्म में सिद्धार्थ आनंद का निर्देशन और शाहरुख खान का डार्क या नेगेटिव अवतार दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए काफी है, जो बड़े अंतरराष्ट्रीय बजट वाले क्लैश के सामने भी टिकने का दम रखता है।






फिल्म में शाहरुख खान के साथ उनकी बेटी सुहाना खान, दीपिका पादुकोण और अभिषेक बच्चन की उपस्थिति इसे एक पारिवारिक और मनोरंजक फिल्म बनाती है। यह फिल्म १९९४ की क्लासिक फ्रांसीसी फिल्म 'लियोन: द प्रोफेशनल  से प्रेरित बताई जा रही है।  'किंग' को भारतीय सिनेमा की सबसे महंगी एक्शन फिल्मों में से एक माना जा रहा है। रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट और मार्फ्लिक्स पिक्चर्स के बैनर तले बन रही इस फिल्म पर निर्माता पानी की तरह पैसा बहा रहे हैं।





निर्देशक सिद्धार्थ आनंद इस फिल्म को वैश्विक स्तर  पर तैयार कर रहे हैं। इसके लिए पश्चिम के मशहूर स्टंट कोरियोग्राफरों को शामिल किया गया है। फिल्म में बड़े पैमाने के ६ हाई-ऑक्टेन एक्शन सीक्वेंस रखे गए हैं, जिन्हें 'रियल एक्शन' और एडवांस वीएफएक्स के हाइब्रिड कॉम्बिनेशन से तैयार किया जा रहा है।





फिल्म में विदेशी लोकेशन का तड़का भी है। फिल्म की शूटिंग मुंबई के महबूब स्टूडियो और विले पार्ले जैसी जगहों पर प्रारम्भ हुई थी।  यहाँ दो सौ से अधिक स्टंट आर्टिस्ट्स के साथ एक विशाल जेल एक्शन सीक्वेंस फिल्माया गया। इसके अतिरिक्त फिल्म के प्रमुख और महत्वपूर्ण भागों को पोलैंड (वारसा), प्राग, बुडापेस्ट और बर्लिन जैसे यूरोपीय शहरों में शूट किया जा रहा है।






रिपोर्टों के अनुसार, 'किंग' की कहानी लुक बेसन द्वारा निर्देशित लियोन: द प्रोफेशनल के कथानक से गहराई से प्रेरित है। मूल फिल्म एक अकेले रहने वाले प्रोफेशनल हिटमैन (जीन रेनो) और एक छोटी लड़की (नताली पोर्टमैन) के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसके परिवार की हत्या के बाद वह हिटमैन से ट्रेनिंग लेती है। भारतीय रूपांतरण 'किंग' में शाहरुख खान एक खूंखार हत्यारे/गुरु की भूमिका में होंगे, जबकि उनकी असल जिंदगी की बेटी सुहाना खान उस शिष्या का किरदार निभाएंगी जिसे वह दुश्मनों से बचाते हैं और ट्रेनिंग देते हैं। हालाँकि, मेकर्स ने भारतीय दर्शकों के स्वाद के अनुसार इसके स्केल, ड्रामा और गानों को काफी बढ़ा दिया है।






यहाँ बताते चलें कि लियोन: द प्रोफेशनल से प्रेरित हो कर निर्देशक गुड्डू धनोआ ने, साल २००० में बॉबी देओल और रानी मुखर्जी को मुख्य भूमिका  में लेकर  फिल्म 'बिच्छू' का निर्माण किया था । इस फिल्म में बॉबी देओल हिट मैन थे और वह रानी मुख़र्जी को बदला लेने के लिए प्रशिक्षित करते है।  इस फिल्म का बजट साढ़े सात करोड़ था।  फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर १९ करोड़ ७५ लाख का ग्रॉस किया था। लेकिन 'किंग' का कैनवास और मेकिंग स्टाइल उससे कई गुना बड़ा और आधुनिक है। 





बॉक्स ऑफिस २४ दिसंबर से होने वाली महा-टक्कर को लेकर दर्शकों में भारी उत्सुकता है। हॉलीवुड की दोनों फिल्मों में कुछ ख़ास है। मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स की फिल्म अवेंजर्स डूम्सडे में रॉबर्ट डाउनी जूनियर विलेन 'डॉक्टर डूम' की मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। इसे रूसो ब्रदर्स द्वारा निर्देशित किया जा रहा है। भारत में यह अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी, तमिल और तेलुगु भाषाओं में रिलीज होगी।  ड्यून ३, डेनिस विलन्यूव द्वारा निर्देशित इस ट्रिलॉजी की अंतिम फिल्म है। इस फिल्म में तिमोथी शालामे और जेंडया मुख्य भूमिकाओं में हैं। भारत में यह फिल्म अंग्रेजी और हिंदी भाषाओं के साथ आईमैक्स फॉर्मेट में भी रिलीज होगी।हॉलीवुड के इन दोनों बड़े प्रोजेक्ट्स की रिलीज डेट एक ही दिन होने के कारण, दिसंबर २०२६  का यह हफ्ता सिने प्रेमियों के लिए बेहद खास होने वाला है।





हॉलीवुड की इन दोनों ही फिल्मों का सबसे मजबूत पक्ष आईमैक्स और ३डी स्क्रीन्स हैं। 'ड्यून 3' ने एडवांस बुकिंग के जरिए कई प्रीमियम स्क्रीन्स पहले ही ब्लॉक कर रखी हैं। इस वजह से 'किंग' को बड़े महानगरों के मल्टीप्लेक्स और विशेष रूप से आईमैक्स थिएटर्स में शत-प्रतिशत स्क्रीन्स मिलने में थोड़ी कठिनाई हो सकती है।  बॉलीवुड फिल्म के लिए हॉलीवुड फिल्म अवेंजर्स डूम्सडे चुनौती साबित हो सकती है। अवेंजर्स श्रृंखला की विगत फिल्म अवेंजर्स एन्डगेम ने भारतीय बॉक्स ऑफिस पर ३७३ की ठोस कमाई की थी।  इस प्रदर्शन के दृष्टिगत डूम्सडे आईमैक्स छविगृहों में किंग की डूम्सडे साबित हो सकती है। 






'किंग' प्रदर्शन से पूर्व ही निर्माताओं को फायदा पहुंचा चुकी है। इस फिल्म  का बजट लगभग ३६० से ४०० करोड़ का है। लेकिन फिल्म ने अपने थिएट्रीकल, डिजिटल, सैटेलाइट और म्यूजिक राइट्स बेचकर ७५० करोड़ से अधिक का प्री-रिलीज बिजनेस कर लिया है। इसका मतलब है कि फिल्म रिलीज होने से पहले ही टेबल-प्रॉफिट (मुनाफे) में है। फिल्म के केवल भारतीय थिएट्रीकल राइट्स ही २५० करोड़ में पेन मरुधर को बेचे गए हैं, जो शाहरुख खान के करियर की सबसे बड़ी थिएट्रिकल डील है।





बताते हैं कि  नेटफ्लिक्स  ने इसके डिजिटल स्ट्रीमिंग राइट्स करीब २७५ करोड़ में खरीदे हैं, जबकि सैटेलाइट राइट्स ९० करोड़ से अधिक में बिके हैं। इसके ओवरसीज डिस्ट्रीब्यूशन की जिम्मेदारी खुद वाईआरएफ संभाल रही है। शाहरुख़ खान की विगत दो फिल्मों 'जवान' और 'पठान' ने बॉक्स ऑफिस पर एक हजार करोड़ का जादुई आंकड़ा पार किया था। 'किंग' के पास क्रिसमस वीकेंड का फायदा और शाहरुख खान का डार्क 'एंटी-हीरो' अवतार है, जिससे ट्रेड एक्सपर्ट्स उम्मीद कर रहे हैं कि यह फिल्म आसानी से एक हजार करोड़ से १५०० करोड़ का वर्ल्डवाइड कारोबार कर सकती है। 

Sunday, 28 June 2026

#Pathan को ललकार रहा #AjayDevgn का #Chauhan !



अजय देवगन की आगामी एक्शन ड्रामा फिल्म चौहान की घोषणा उनके पिता और दिग्गज एक्शन डायरेक्टर वीरू देवगन की जयंती पर की गई है। यह फिल्म कश्मीर की पृष्ठभूमि है। इस फिल्म में अजय एक फौजी के अवतार में दिखाई देंगे। फिल्म १ अक्टूबर २०२७ को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।




  

फिल्म चौहान का टीज़र अनावृत होते ही इंटरनेट पर छा गया है। इसमें अजय देवगन का एक दमदार डायलॉग काफी वायरल हो रहा है, "पठानों से कहना, चौहान आ रहा है।" 
फिल्म की घोषणा के वीडियो में कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाओं और भारतीय सैनिकों की चुनौतियों को दिखाया गया है।  






अजय देवगन का बोला गया यह संवाद पठानों से अधिक शाहरुख़ खान के पठान को मिर्ची लगाने वाला प्रतीत होता है। कुछ ने यहाँ तक समाचार रेल दिया कि शाहरुख़ खान इस संवाद से बेहद झल्लाए हुए है। उन्हें यह अपने लिए चुनौतीपूर्ण संवाद लग रहा है। इसके कारण भी है। 





अजय देवगन और शाहरुख़ खान की प्रतिद्वंद्विता का प्रारम्भ १९९५ में, राकेश रोशन की फिल्म करण अर्जुन की कास्टिंग के समय जन्मा था।  उस समय, प्रारम्भ में इस फिल्म में शाहरुख़ खान के साथ अजय देवगन को लिया जाना तय हुआ था। कहा जाता है कि शाहरुख़ खान और अजय देवगन, दोनों को ही फिल्म की स्क्रिप्ट पसंद नहीं आई थी। इसलिए दोनों ने ही यह तय किया कि वह फिल्म से निकल जाए। किन्तु, बताते हैं कि शाहरुख़ खान ने अजय देवगन को धोखा दिया और बाद में वापस आ कर राकेश रोशन से सौदेबाजी कर फिल्म में वापस आ गए और अजय देवगन की जगह सलमान खान को ले लिया गया। 





इन दोनों का दूसरा टकराव २०१२ की दिवाली में हुआ।  उस दिवाली शाहरुख़ खान की फिल्म जब तक है जान और अजय देवगन की फिल्म सन ऑफ़ सरदार प्रदर्शित हो रही थी।  जब तक है जान यशराज फिल्म्स की थी। जैसी की इस बैनर की तिकड़म होती है, इस बैनर ने वितरको पर दबाव बना कर अपनी फिल्म के लिए सिनेमाघर हथियाने शुरू कर दिए।  इसे लेकर अजय देवगन कम्पटीशन कमीशन ऑफ़ इंडिया भी गए थे। यद्यपि, अजय देवगन को दिवाली का हीरो माना जाता था। किन्तु, यशराज फिल्म्स की तिकड़मों के कारण अजय देवगन की फिल्म दिवाली का पूरा फायदा नहीं उठा पाई।






इस फिल्म का निर्देशन नीरज यादव कर रहे है। किन्तु, जिओ स्टूडियोज के साथ एक अन्य निर्माता आनंद एल राय का कलर येलो प्रोडक्शंस भी है।   बताते चले कि आनंद एल राय ने  शाहरुख़ खान के साथ फिल्म जीरो बनाई थी। यह फिल्म २०१८ की विनाशकारी फिल्म साबित हुई थी। 





कुछ भी हो शाहरुख़ खान को मिर्च लगना स्वभाविक है। वैसे वह भी इस प्रकार के खेल खेलते रहते हैं। उनकी फिल्म जवान के 'बेटे को हाथ लगाने से पहले बाप से बात कर' को सरकार के विरोध में तक उपयोग किया गया था।  इसलिए वह अच्छी तरह से समझ रहे हैं कि आनंद एल राय और अजय देवगन ने इस बार खेला कर दिया है।  फिल्म चौहान का 'पठानो से यह कहना, चौहान आ रहा है' फिल्म को हिट बना चुका है।  अजय देवगन के प्रशंसक 'पठानों से कहना' शब्द को 'पठान से कहना' बना कर शाहरुख़ खान और उनकी फिल्म पठान के लिए चुनौती की तरह पेश कर रहे है। इस तरकीब से अजय देवगन की १ अक्टूबर २०२७ के प्रदर्शन के लिए तय फिल्म भारी प्रचार बटोर चुकी है।  






फिल्म के संवादों का इस तरह का प्रयोग निश्चित रूप से सामाजिक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील है।  कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह आज के समय में फिल्मों के विपणन और प्रचार की एक सोची-समझी रणनीति का भाग है। बॉलीवुड और भारतीय सिनेमा में ऐतिहासिक या सीमा-पार के संघर्षों पर आधारित फिल्मों के लिए ऐसे भारी-भरकम और आक्रामक संवादों का उपयोग सामान्य रहा है। फिल्म निर्माता जानते हैं कि ऐसे बयानों से सोशल मीडिया पर तुरंत चर्चा मिलती है और बहस शुरू हो जाती है। इससे फिल्म को मुफ्त का प्रचार मिल जाता है।






कश्मीर या पाकिस्तान के साथ संघर्ष की पृष्ठभूमि पर बनी फिल्मों  का एक लक्षित दर्शक होता है।  ऐसे संवाद फिल्म के मुख्य नायक (चौहान) के साहसी और कड़े चरित्र को स्थापित करने के लिए इस्तेमाल किया गया है, जो राष्ट्रवाद और एक्शन फिल्मों के शौकीन दर्शकों को सिनेमाघरों तक आकर्षित करने का प्रयास है। 






यद्यपि, आलोचकों और समाजशास्त्रियों का मानना है कि किसी विशिष्ट समुदाय (जैसे पठान या कोई अन्य जातीय समूह) को सीधे तौर पर एक विलेन या चुनौती के रूप में पेश करने वाले संवाद सामाजिक विभाजन या रूढ़िवादिता को बढ़ावा दे सकते हैं। किन्तु, कल्पना के घोड़े पर सवार बॉलीवुड फिल्मे ऐसा विभाजन करने में विशेष समर्थ नहीं होती। 






इतना कहा जा सकता है कि इस प्रकार के संवाद केवल मनोरंजन और कहानी के विलेन-हीरो के टकराव के रूप में ही देखे जाने चाहिए। इसे समकालीन सामाजिक-राजनीतिक वातावरण का लाभ उठाने के प्रयास के रूप में भी देखा जा सकता है। यह दर्शको में फिल्म के  प्रदर्शन से पर्याप्त पूर्व ही भावनात्मक प्रतिक्रिया देने वाली कोशिश साबित होती है।  






अब कुछ हल्का हो जाये। फिल्म चौहान के टीज़र में जुम्मा चुम्मा दे दे गाने का प्रयोग फिल्म निर्माताओं की एक गहरी और दोहरी रणनीति को दर्शाता है। इसका अमिताभ बच्चन से कोई सीधा मिलान (Crossover) नहीं है, लेकिन इसके पीछे कुछ खास रचनात्मक और सामाजिक कारण अवश्य है 1 फिल्म में इस गीत का उपयोग कर विरोधाभास और प्रभाव पैदा करना।







टीज़र में कश्मीर (पुलवामा) के तनावपूर्ण माहौल, शुक्रवार की नमाज़ (जुम्मा) के बाद होने वाली पत्थरबाजी और लाउडस्पीकर पर होने वाले ऐलानों को दिखाया गया है।  इसी गंभीर बैकग्राउंड के बीच में अचानक से यह एनर्जेटिक और मस्ती भरा गाना बजता है, जो दर्शकों को चौंकाने और अजय देवगन की दमदार एंट्री को धमाकेदार बनाने के लिए पर्याप्त है।




निर्माताओं ने कश्मीर में जुम्मे (शुक्रवार) के दिन होने वाली पत्थरबाजी और पठान (स्थानीय चुनौती) को काउंटर करने के लिए फिल्मी अंदाज़ में इस गाने के शब्दों का सहारा लिया है।






'जुम्मा चुम्मा' एक बेहद लोकप्रिय रेट्रो गाना है। एक्शन फिल्मों में पुराने गानों को मॉडर्न बीट्स के साथ रीमिक्स या बैकग्राउंड में यूज़ करना आज की तारीख में दर्शकों को आकर्षित करने का एक लोकप्रिय ट्रेंड बन चुका  है।






पर इसका अमिताभ बच्चन से कोई सीधा मिलान नहीं है। टीज़र में अपने गाने के इस नए वर्जन के इस्तेमाल पर अमिताभ बच्चन ने सोशल मीडिया पर खुद इस वीडियो को शेयर किया।  उन्होंने अजय देवगन और मेकर्स की सराहना करते हुए लिखा, "अजय की सराहना, चौहान आ रहा है।"







अब यह बात दूसरी है कि सोशल मीडिया पर शाहरुख खान और अजय देवगन के प्रशंसकों के बीच युद्ध सा छिड़ गया है। कई इसे शाहरुख खान की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'पठान' पर सीधा कटाक्ष या ओपन चैलेंज मान रहे हैं।






ऎसी फिल्मों में राजनीतिक एंगल  (फिल्म में २०१८ के पुलवामा विस्फोट की पृष्ठभूमि और बड़े पैमाने पर पत्थरबाजी को दिखाए जाने के कारण) इंटरनेट पर एक वर्ग इसे प्रोपेगैंडा फिल्म कह रहा है। सोशल मीडिया यूजर्स इसकी तुलना 'द कश्मीर फाइल्स', 'द केरल स्टोरी' और हालिया राजनीतिक थ्रिलर फिल्मों से कर रहे हैं। वहीं कुछ आलोचकों का आरोप है कि फिल्म में एक खास 'हिंदू-मुस्लिम' और ध्रुवीकरण का एंगल देने की कोशिश की गई है।






विवाद चाहे जो भी खड़े किये जाएँ फिल्म चौहान पर चर्चाओं का बाजार गर्म है। फिल्म के १५ महीने बाद प्रदर्शित होने तक हवा और बनेगी।  यह हवा निम्न कारणों से बनेगी -  






फिल्म चौहान  की कहानी की पृष्ठभूमि पुलवामा और कश्मीर का यथार्थ है। यह फिल्म की कहानी २०१८ के पुलवामा विस्फोट के बाद अपने तनाव की पृष्ठभूमि पर है।   





 
फिल्म में पत्थरबाजी का मुद्दा उठाया गया है। घटनाक्रम कश्मीर में होने वाली लोकल पत्थरबाजी और दंगों के इर्द-गिर्द है। टीज़र में दिखाया गया है कि कैसे स्थानीय युवाओं को गुमराह करके उनके हाथों में पत्थर थमाए जाते हैं।  






फिल्म भारतीय सुरक्षाबलों को चुनौतियां भी दिखाने वाली है कि  कैसे भारतीय सेना और सुरक्षाबल इन विषम परिस्थितियों और उपद्रवियों का सामना करते हैं। अजय देवगन इसमें एक निडर आर्मी ऑफिसर (चौहान) की भूमिका में हैं, जो आतंकवाद और हिंसा के खिलाफ एक बड़ी ताकत बनकर खड़ा होता हैं। 





   
यह फिल्म एक खास जुड़ाव का परिणाम है। यह पहली बार है जब अजय देवगन और फिल्म निर्माता आनंद एल राय किसी प्रोजेक्ट के लिए एक साथ आए हैं।  

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आज, जिस फिल्म ब्लास्ट की बात की जा रही है, यह २०२६  में प्रदर्शित तमिल भाषा की मार्शल आर्ट्स एक्शन-थ्रिलर है। इस फिल्म को सुभाष के. राज ने निर्देशित किया है और निर्माता एजीएस एंटरटेनमेंट है।





फिल्म में एक्शन किंग अर्जुन एक कराटे मास्टर के रोल में हैं, जो अपने कॉम्बैट-ट्रेंड परिवार के साथ मिलकर एक बेरहम कॉर्पोरेट सिंडिकेट से लड़ता है। यह फिल्म २८ मई २०२६ को छविगृहों में प्रदर्शित हुई। अब यह फिल्म नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हो रही है ।




फिल्म में तमिल फिल्मों के एक्शन किंग अर्जुन सरजा राजारमन (कराटे टीचर और समर्पित पिता) प्रीति मुकुंदन नीला (राजरमन की मार्शल-आर्टिस्ट बेटी) अभिरामी नीलावेनी (राजरमन की पत्नी), जॉन कोकेन वरुण दयालन (मुख्य विलेन और कॉर्पोरेट सिंडिकेट हेड) के रोल में।




फिल्म की कहानी राजारमन की है, जो एक मिडिल-क्लास मार्शल आर्ट्स टीचर है, और अपनी पत्नी और बेटी के साथ शांति से ज़िंदगी जी रहा है। उनका शांत रूटीन तब बिखर जाता है जब वरुण दयालन की लीडरशिप में एक बेरहम कॉर्पोरेट सिंडिकेट पास के पहाड़ में एक खास चीज़ के लिए ड्रिल करने की कोशिश करता है, एक ऐसा प्रोजेक्ट जिससे एक लोकल गांव के खत्म होने का खतरा है।






सिंडिकेट के शैतानी योजना की सबसे बड़ी बाधा राजारमन परिवार बनता है, जिससे लड़ाई की ट्रेनिंग पाए परिवार और कॉर्पोरेट हत्यारों के बीच एक बड़ा, स्टंट वाला टकराव शुरू हो जाता है।





फिल्म को इसके पुराने ज़माने के, जैकी चैन-स्टाइल एक्शन कोरियोग्राफी और हाई-एनर्जी थ्रिल के लिए आम तौर पर पॉजिटिव रिव्यू मिले। कई क्रिटिक्स ने खास तौर पर प्रीति मुखुनधन की परफॉर्मेंस और मार्शल आर्ट्स एक्शन के पीछे के मजबूत इमोशनल सपोर्ट को हाईलाइट किया।





यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर व्यावसायिक दृष्टि से सफल रही है।  फिल्म ने अपने पहले कुछ दिनों में ही अपना १८  करोड़ का बजट वसूल कर लिया था। यह फिल्म अब तक पूरी दुनिया में ७०  करोड़ से अधिक की कमाई कर चुकी है ।






ब्लास्ट को देखते समय आप अपनी जगह से हिलना नहीं चाहेंगे।  फिल्म इतनी दिलचस्प है कि अगला सीन छोड़ने का मन नहीं करेगा।  यद्यपि, फिल्म देखते समय, दर्शकों को मोहनलाल की मलयालम फिल्म दृश्यम की याद आ सकती है। किन्तु, इस फिल्म का ट्रीटमेंट, मोहनलाल की फिल्म से बिलकुल इतर है।





ब्लास्ट का कथानक भावनात्मक संवेगों के साथ साथ मार्शल आर्ट्स की कलाबाजियों के साथ आगे बढ़ता जाता है। कराटे में माहिर राजाराम का परिवार हार मानना नहीं सीखा है।  वह टूटता नहीं। प्रत्येक घटना उन्हें सशक्त बनाती जाती है। यद्यपि, आपको कथानक में अतिरेक और अस्वाभाविकता लग सकती है। किन्तु, यही तो फिल्मों का संसार है। 




अर्जुन सरजा 

 

खेती में कीटनाशकों के उपयोग का खतरा दर्शाती #TheIndiaStory

 


बहुप्रतीक्षित फिल्म द इंडिया स्टोरी: स्लो पॉइज़न इन प्रोग्रेस का टीज़र रिलीज़ कर दिया गया है, जो देश में बढ़ती कीटनाशक खेती (पेस्टिसाइड फार्मिंग) और उसके समाज पर पड़ रहे गंभीर प्रभावों को उजागर करती है। अभिनेत्री काजल अग्रवाल और अभिनेता श्रेयस तलपड़े अभिनीत यह फिल्म एक ऐसे बढ़ते खतरे पर प्रकाश डालती है, जो हर दिन करोड़ों लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है।




 

ज़ी स्टूडियोज़ और एमआईजी प्रोडक्शन एंड स्टूडियोज़ के सहयोग से प्रस्तुत इस फिल्म का निर्देशन चेतन डीके ने किया है, जबकि इसकी कहानी, पट लेखन और निर्माण सागर बी. शिंदे ने किया है। यह फिल्म 24 जुलाई 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में हिंदी, तेलुगु तथा तमिल भाषाओं में दर्शकों के सामने आएगी।



 

गौरतलब है कि फिल्म के प्रभावशाली टीज़र में काजल अग्रवाल और श्रेयस तलपड़े के संघर्ष को बेहद मार्मिकता से दर्शाया गया है, जो न्याय की लड़ाई लड़ते हुए कीटनाशक खेती की भयावह सच्चाई को उजागर करने का प्रयास करते हैं। टीज़र यह दिखाता है कि किस तरह जहरीले रसायन धीरे-धीरे हमारी रोज़मर्रा की खाद्य सामग्री में शामिल हो रहे हैं और विशेष रूप से युवा पीढ़ी के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं।





 

भावनात्मक और सामाजिक रूप से प्रासंगिक कहानी के माध्यम से फिल्म एक ऐसे मुद्दे पर लोगों का ध्यान आकर्षित करती है, जो अपनी व्यापकता के बावजूद अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।





 

फिल्म के बारे में बात करते हुए निर्देशक चेतन डीके ने कहा, "द इंडिया स्टोरी सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक ऐसी बातचीत है, जिसे समाज में हमें शुरू करने की जरूरत है। इस कहानी के माध्यम से हम कीटनाशक खेती की चिंताजनक वास्तविकता और उससे पैदा हो रहे मौन स्वास्थ्य संकट को सामने लाना चाहते थे। टीज़र केवल उस बड़े मुद्दे की एक झलक है, जो हर दिन लाखों परिवारों को प्रभावित कर रही है। हमारा उद्देश्य जागरूकता पैदा करना, लोगों को सोचने पर मजबूर करना और उन्हें यह सवाल पूछने के लिए प्रेरित करना है कि आखिर उनकी थाली में क्या परोसा जा रहा है।"





 

इस विषय में श्रेयस तलपड़े कहते हैं, "द इंडिया स्टोरी की सबसे बड़ी खासियत इसका प्रासंगिक विषय है। आज कीटनाशक खेती ऐसा मुद्दा बन चुका है, जो हर घर से जुड़ा हुआ है, लेकिन हम अक्सर इसके लंबे परिणामों पर ध्यान नहीं देते। मेरे किरदार की यात्रा एक आम पिता के संघर्ष को दर्शाती है, जो खुद से कहीं ज़्यादा बड़े व्यवस्था के खिलाफ एक लड़ाई लड़ता है। यह फिल्म मनोरंजन के साथ-साथ एक बेहद जरूरी चर्चा की शुरुआत भी करती है।"





 

वहीं काजल अग्रवाल ने कहा, "द इंडिया स्टोरी एक मजबूत सामाजिक संदेश वाली फिल्म है। एक मां होने के नाते यह कहानी मुझे व्यक्तिगत स्तर पर बेहद करीब लगी, क्योंकि यह उन चिंताओं और डर को दर्शाती है जिनका सामना आज कई माता-पिता कर रहे हैं। इस टीज़र के माध्यम से ऐसी वास्तविकता दिखाई गई है, जो अक्सर लोगों की नजरों से ओझल रहती है। मुझे उम्मीद है कि यह फिल्म जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ लोगों को अपने भोजन तथा आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य के प्रति अधिक सजग बनाएगी।"




 

फिल्म के सह-निर्माताओं में स्वाति विनायक सैंदाने, अनीता जाधव, विनायक सैंदाने, कल्पेश शाह, देवयानी खोराटे और प्रेम जोशी शामिल हैं। फिल्म की तकनीकी टीम में सिनेमैटोग्राफर निशांत भागवत, संगीतकार मंगेश धाकड़े, संपादक आशीष म्हात्रे, गीतकार शकील आज़मी और साउंड डिज़ाइनर अनमोल भावे शामिल हैं।





 

हालांकि 'द इंडिया स्टोरी: स्लो पॉइज़न इन प्रोग्रेस' एक ऐसी फिल्म है, जो मनोरंजन के साथ-साथ समाज को एक गंभीर और महत्वपूर्ण मुद्दे पर सोचने के लिए भी प्रेरित करेगी।

दर्शक पसंद कर रहे है #MaaIntiBangaaram की हत्यारिन #SamanthaRuthPrabhu को !



तेलुगु फिल्म माँ इंति बंगाराम का बॉक्स ऑफिस पर दूसरा वीकेंड बहुत अच्छा चल रहा है। बॉक्स ऑफिस पर इसके  कलेक्शन में ज़बरदस्त उछाल देखा गया है। फिल्म के प्रदर्शन के नवें दिन का कुल व्यवसाय, पहले दिन के बराबर है। इससे पता चलता है कि फिल्म की दर्शकों पर पकड़ कितनी मजबूत है। 





पूरे भारत में फिल्म का कुल ग्रॉस ४९.७१ करोड़ का हो गया है। ओवरसीज़ ग्रॉस मिलाकर फिल्म ने ९ दिनों में कुल ७० करोड़ का अखिल विश्व व्यवसाय पर कर लिया है। इस प्रकार से यह फिल्म एक बहुत बड़ी ब्लॉकबस्टर बनने जा रही है। 





जहाँ तक भारत की बात है, माँ इंति बंगाराम ने ९ वें दिन  (शनिवार, २७ जून २०२६) ३५० शहरों में २७६०  शो से रूपया ५.५३ करोड़ का व्यवसाय किया है, जो शुक्रवार के ४.७८ करोड़ के व्यवसाय से  अधिक है।





इस प्रकार का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन चर्चा में आने के दो  स्पष्ट कारण है। पहला यह कि यह फिल्म एक महिला प्रधान फिल्म है। फिल्म कहानी है भाड़े में हत्या करने वाली एक पूर्व हत्यारिन की, जिसे अपने नए परिवार को पुराने लोगों से खतरा होने के बाद अपने रास्ते पर लौटने के लिए मजबूर होना पड़ता है। यह फिल्म बताती है कि अपने डर और बहादुरी, दोनों पलों में, एक औरत को पता चलता है कि अपनी कमज़ोरियों को अपनाना उसकी अंदर की ताकत के लिए उतना ही ज़रूरी है जितना कि चुनौतियों का सीधे सामना करना। 





दूसरा और सबसे बड़ा कारण यह है कि माँ इंति बंगाराम की हिंदी दर्शकों में फिल्म पुष्पा के अपने आइटम गीत ऊ बोलेगा साला ऊ ऊ बोलेगा की नर्तकी सामंथा रुथ प्रभु। इस फिल्म की ज़बरदस्त सफलता के बाद, फिल्म की नायिका के रूप में सामंथा रूथ प्रभु की सफल वापसी हो रही है।





फिल्म अभिनेता नाग चैतन्य से, २०२१ शादी टूटने के बाद, सामंता बिलकुल टूट चुकी थी। वह फिल्मों से संन्यास लेने का मन बना चुकी थी।  क्योंकि, पुष्पा के आइटम गीत के बावजूद सामंता की प्रदर्शित फिल्मों यशोदा, शाकुंतलम और ख़ुशी को दर्शकों ने  बॉक्स ऑफिस पर अस्वीकार कर दिया था। 





तब उनके जीवन में, फिल्म निर्देशक राज निदिमोरू आये। इन दोनों ने, २०२५ में विवाह कर लिया।  उस समय राज ने उन्हें समझाया कि वह फ़िल्में न छोड़े।  राज के बहुत समझने पर सामंता ने, तेलुगु फिल्म माँ इंति बंगाराम में  अभिनय करना स्वीकार कर लिया।  इस फिल्म की निर्माता, राज के साथ सामंता भी थी।  फिल्म की निर्देशक बी वी नंदिनी रेड्डी है।  




फिल्म की सफलता का उत्सव मनाते हुए फिल्म के निर्माता राज निदिमोरू ने बताया कि इस फिल्म का सीक्वल भी बनाया जायेगा।  सीक्वल फिल्म में भी सामंता होंगी। इस तरह से सामंता रुथ प्रभु की रुपहले परदे पर सफल वापसी होने जा रही है। 




यहां बताते चले कि बी वी नंदिनी रेड्डी के डायरेक्शन में बनी, माँ इंति बंगाराम सामंथा की सबसे बड़ी सोलो बॉक्स ऑफिस सफलताओं में से एक है । इस एक्शन-कॉमेडी को दर्शकों और समीक्षकों द्वारा समान रूप पसंद किया जा रहा है।  इस प्रकार से  सामंथा की तेलुगु सिनेमा के लीडिंग स्टार्स में जगह बनती दिख रही है । इस फिल्म के ओटीटी प्लेटफार्म जिओ हॉट स्टार पर जुलाई या अगस्त में प्रदर्शित होने की भी संभावना है।  

तमिल फिल्मो के0 #Bhagyaraj का निधन



तमिल और हिंदी फिल्मों के प्रसिद्ध निर्देशक के भाग्यराज का निधन हो गया है।  वह  ७३ वर्ष के थे। कृष्णास्वामी भाग्यराज का जन्म, वेलोंकोइल, जिला कोइम्बटूर में ७ जनवरी १९५३ को हुआ था। उनका निधन हृदयाघात से हुआ।  उन्होंने अभिनेत्री पत्नी प्रवीण की १९८३ में मृत्यु के पश्चात् १९८४ में, फिल्म डार्लिंग डार्लिंग डार्लिंग में अपनी सह नायिका पूर्णिमा जयराम से विवाह किया था। उनके एक बेटी और बेटा शरण्या और शांतनु भी फिल्मों में अभिनय करते है।



 

भाग्यराज का फिल्म जीवन जी रामकृष्ण और भारतीराजा के सह निर्देशक के रूप में प्रारम्भ हुआ।  उन्होंने तमिल फिल्म के माध्यम से १९७९ में फिल्म निर्देशक के रूप में अपना परिचय तमिल दर्शकों से कराया। 





भाग्यराजा ने अमिताभ बच्चन की फिल्म आखिरी रास्ता और राजेश खन्ना की फिल्म मास्टरजी का लेखन किया था।  मास्टरजी, राजेश खन्ना के फिल्म जीवन की बड़ी हिट फिल्मों में एक है। वह अनिल कपूर की फिल्म मिस्टर बेचारा के अतिरिक्त कृष्ण कुमार की फिल्म पापा द ग्रेट के भी निर्देशक थे। 





अनिल कपूर के फिल्म जीवन को नया मोड़ देने वाली बापू निर्देशित फिल्म वो सात दिन, के भाग्यराज निर्देशित तमिल फिल्म का हिंदी रूपांतरण थी। मोहब्बत की कहानी, स्क्रीनप्ले और डायलॉग भाग्यराज ने लिखे थे। उन्होंने अनिल कपूर की फिल्म बेटा के तमिल संस्करण के लेखक निर्देशक भाग्यराज ही थे।  भाग्यराज, डेविड धवन द्वारा निर्देशित सलमान खान, अक्षय कुमार और प्रियंका चोपड़ा अभिनीत फिल्म मुझसे शादी करोगी  के कथा और पटकथा लेखक भाग्यराज थे । यह फिल्म अक्षय कुमार के फिल्म जीवन के लिए महत्वपूर्ण  थी ।