दिग्गज अभिनेता असरानी की आखिरी फिल्म को लेकर जहां एक भावुक और यादगार
रिलीज़ की उम्मीद की जा रही थी, वहीं अब मामला
अचानक कानूनी विवाद में घिरता नजर आ रहा है। फिल्म ‘हम अंग्रेजों के जमाने के जेलर
हैं’ के मेकर्स को शोले से जुड़े कथित इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी अधिकारों को लेकर एक कानूनी नोटिस मिलने के बाद
अब मामला कानूनी पचड़े में फँस गया है। खबरों के मुताबिक, मेकर्स अब लगभग 5 करोड़ रुपये के हर्जाने की
मांग करने की तैयारी में हैं।
पूरा विवाद उस वक्त शुरू हुआ जब शोले मीडिया एंड एंटरटेनमेंट प्राइवेट
लिमिटेड की ओर से कथित तौर पर फिल्म ‘हम अंग्रेजों के जमाने के जेलर हैं’ के टाइटल
पर आपत्ति जताई गई। गौरतलब है कि यह वही मशहूर डायलॉग है जिसे असरानी ने 1975 की
क्लासिक फिल्म शोले में अपने अनोखे अंदाज़ में निभाए गए जेलर किरदार के जरिए
यादगार बना दिया था। नोटिस में कथित रूप से दावा किया गया कि शोले से जुड़े कुछ
किरदार, डायलॉग और अन्य रचनात्मक
तत्वों पर विशेष अधिकार मौजूद हैं।
हालांकि निर्माता भंवर सिंह पुंडीर और फिल्ममेकर राकेश सावंत ने इन आरोपों
को पूरी तरह खारिज करते हुए विस्तृत कानूनी जवाब दाखिल किया है।
मेकर्स की तरफ से दिए गए जवाब में आरोपों को “निराधार”, “तथ्यहीन” और “बिना किसी आधार के” बताया गया है।
साथ ही यह भी कहा गया कि फिल्म का टाइटल पूरी कानूनी प्रक्रिया के तहत IMPPA से लिया गया है और फिल्म को केंद्रीय फिल्म
प्रमाणन बोर्ड (CBFC) से वैध
सर्टिफिकेट भी प्राप्त है।
जवाब में यह भी दावा किया गया कि रिलीज़ से ठीक पहले थिएटर चेन, डिस्ट्रीब्यूटर्स, एक्जीबिटर्स और ट्रेड पार्टनर्स को नोटिस भेजे जाने से फिल्म के बिजनेस और
रिलीज़ प्लान पर असर पड़ा है। मेकर्स ने इसे कथित तौर पर दबाव बनाने की रणनीति
बताया है और इसी वजह से कानूनी विकल्पों पर विचार करते हुए करीब 5 करोड़ रुपये के
हर्जाने की मांग की तैयारी की बात सामने आ रही है।
इस पूरे मामले में मेकर्स ने एक भावनात्मक पहलू का भी जिक्र किया है। उनके
मुताबिक, फिल्म का टाइटल किसी
अधिकार का उल्लंघन करने के लिए नहीं बल्कि असरानी को श्रद्धांजलि देने के उद्देश्य
से चुना गया था। कानूनी जवाब में कहा गया है कि इंडस्ट्री के सबसे सम्मानित
कलाकारों में गिने जाने वाले असरानी की यह आखिरी फिल्म मानी जा रही है और इसी वजह
से इस शीर्षक को उनके प्रति सम्मान के तौर पर रखा गया।

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