अल्फा के, १७ जून को अनावृत ट्रेलर को मिली जुली प्रतिक्रिया प्राप्त हुई है। यह प्रतिक्रियाएं उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव की तरह है। इससे फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर मिल सकने वाले प्रतिसाद को स्थापित नहीं किया जा सकता। किन्तु, महिला प्रधान एक्शन फिल्म अल्फा को, पूर्व में प्रदर्शित महिला प्रधान एक्शन फिल्मों के प्रकाश में अल्फा की सफलता पर कोई टिप्पणी तो की ही जा सकती है।
शिव रवैल द्वारा निर्देशित फिल्म अल्फा को, फ्रेंच फिल्म ला फेम्मे निकिता की रीमेक बताया जा रहा है। फ्रेंच फिल्म, एक पोलिसवाले की ह्त्या के लिए सजायाफ्ता छोटी बच्ची की कहानी थी, जिसे एक सरकारी व्यक्ति अपने लिए भाड़े की हत्यारी बना कर ट्रेनिंग देता है। फिल्म के ट्रेलर में बॉबी देओल ऐसा करते दिखाई देते है। इस दृष्टि से, एक्शन फिल्म कहा जा सकता है।
किन्तु, जहाँ मूल फिल्म सरकार के लिए ह्त्या करने वाली लड़की की कहानी थी, वहीँ रीमेक फिल्म अल्फा, निर्माता अदित्य चोपड़ा के स्पाई यूनिवर्स के अंतर्गत बनाई गई फिल्म है। इससे स्पष्ट है कि अल्फा किसी सरकार की एजेंट है। इससे इसे, सीक्रेट एजेंट एक्शन फिल्म कहा जा सकता है।
ऐसे में, हिंदी फिल्मों के इतिहास पर दृष्टिपात करते हुए, यह जानना उपयुक्त होगा कि बॉलीवुड ने कितनी महिला प्रधान एक्शन स्पाई फिल्म बनाई हैं और इनमे से कितनी फ़िल्में बॉक्स ऑफिस पर सफल हुई है या दर्शकों द्वारा मान्यता प्राप्त है।
भारतीय सिनेमा में महिला जासूस या रॉ एजेंट की भूमिकाओं वाली फिल्मों की बात करें तो आलिया भट्ट की फिल्म राज़ी (रॉ एजेंट) की नायिका भारत के लिए जासूसी करने के लिये एक पाकिस्तानी सैन्य अधिकारी से निकाह करती है। इससे काफी पहले, विद्या बालन की फिल्म कहानी पूरी फिल्म तक एक गर्भवती महिला की कोलकत्ता में अपने पति की खोज का कथानक प्रतीत होती थी, किन्तु, क्लाइमेक्स में आ आकर पता चलता था कि वह अंडरकवर थी।
तापसी पन्नू ने फिल्म बेबी में अंडरकवर एजेंट की छोटी भूमिका की थी। इस फिल्म के बाद, वह फिल्म नाम शबाना में अंडरकवर नायिका बन गई। फाॅर्स २ में सोनाक्षी सिन्हा, जॉन अब्राहम के साथ एक मिशन पर जाने वाली रॉ एजेंट बनी थी। फिल्म धूम २ में ऐश्वर्या राय का चरित्र सुनहरी भी अंडरकवर थी।
इन सभी फिल्मों को ध्यान में रखें तो पता चलता है कि महिला अंडरकवर वाली अधिकतर फ़िल्में पूरी तरह से महिला चरित्र पर निर्भर नहीं थी। बेबी के कथानक के केंद्र में अक्षय कुमार थे। नाम शबाना, तापसी पन्नू की शबाना पर केंद्रित थी। किन्तु, फिल्म फ्लॉप हुई थी। फाॅर्स २ की सोनाक्षी सिन्हा भी, जॉन अब्राहम की जोड़ीदार एजेंट थी। यही बात धूम २ की सुनहरी उर्फ़ ऐश्वर्या राय के लिए कही जा सकती है।
स्पष्ट रूप से, बॉलीवुड ने, विशेष रूप से महिला एजेंट पर फिल्म नहीं बनाई है। केवल राज़ी और कहानी अपवाद स्वरुप हैं। आलिया भट्ट और विद्या बालन अभिनीत यह दोनों फ़िल्में बॉक्स ऑफिस पर सफल भी हुई थी।
यह सोचना कि आलिया भट्ट अभिनीत रॉ एजेंट फिल्म राज़ी सफल हुई थी तो अल्फा भी सफल होगी, ठीक नहीं होगा। राज़ी में आलिया रॉ एजेंट थी। किन्तु, एक्शन नहीं थे। अल्फा में एक्शन को महत्त्व दिया जा रहा है। किन्तु, आलिया भट्ट एजेंट की तरह रफ़ टफ नहीं लगती। वह नाज़ुक बदन बॉलीवुड की फिल्म नायिका जैसी लगती है। इसलिए, अल्फा के यशराज फिल्म्स की स्पाई यूनिवर्स की फिल्म होने के नाते सफल होने की उम्मीद लगाना उपयुक्त नहीं होगा।
यशराज फिल्म्स द्वारा, अल्फा की अल्फा पर बॉबी देओल के चरित्र पर अधिक जोर दिया जा रहा है। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि बैनर भी सशंकित है। या फिर वह देखना चाहता है कि टाइगर ३ की मद्धम सफलता और वॉर २ की असफलता के बाद, अल्फा को दर्शक किस प्रकार का रिस्पांस देता है। क्योंकि, इस फिल्म पर यशराज बैनर के स्पाई यूनिवर्स का भविष्य टिका हुआ है। यदि अल्फा गिरी तो स्पाई यूनिवर्स भी ध्वस्त हो जायेगा।
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