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Thursday, 16 July 2026

#Vijay का #JanaNayagan, हिन्दी मे #JanaNeta



 

सेंसर से एडल्ट वाला टैग पाने के बाद, विजय जोसफ की फिल्म जन नायगन की छविगृहों में प्रदर्शित किये जाने की तयारी बड़े जोरशोर से हो रही है । यह फिल्म २३ जुलाई २०२६ को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म को हिंदी में भी जन नेता शीर्षक के साथ प्रदर्शित किया जायेगा ।




फिल्म 'जन नायकन' (Jana Nayagan) के बॉक्स ऑफिस पर सफल होने की पूरी उम्मीद है। यह सुपरस्टार थलपति विजय के अभिनय जीवन की अंतिम फिल्म बताई जा रही है। इसलिए, दर्शकों में, विशेषकर तमिल फिल्म दर्शकों में  इसे लेकर भारी उत्साह है । अनुमान है कि फिल्म दुनिया भर में १०० करोड़ तक की ओपनिंग कर सकती है।





फिल्म की सफलता के प्रमुख कारणों में से एक तो यह है कि यह तमिलनाडु का मुख्य मंत्री बनने के बाद, चंद्रशेखर जोसफ विजय की अंतिम फिल्म  है । प्रशंसक अपने जन नायगन विजय को अंतिम बार पर्दे पर देखने के लिए बहुत उत्सुक हैं।




फिल्म में तेलुगु तमिल फिल्मों की स्थापित अभिनेत्री पूजा हेगड़े और बॉलीवुड अभिनेता बॉबी देओल जैसे बड़े कलाकार भी हैं। 




फिल्म को  'A' सर्टिफिकेट के बावजूद, एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह विदेशी बॉक्स ऑफिस पर नया इतिहास बना सकती है।




विगत दिनों, १४ जुलाई को, फिल्म को पूनः सेंसर के लिए भेजा गया था । क्योंकि, फिल्म से ४१ सेकंड के फुटेज जोड़े गए है । इस प्रकार से यह फिल्म कुल ३ घंटा ३ मिनट और ५२ सेकंड की हो गई है ।





फिल्म को मूल रूप से जनवरी २०२६ (पोंगल) में रिलीज होना था । क्योंकि, विजय ने राजनीति में कदम रखने का मन बना लिया था । वह जन नायगन बन कर तमिल जनता के सामने जाना चाहते थे । किन्तु, सेंसर बोर्ड में यह मामला लगभग सात महीनों तक अटका रहा। इस फिल्म पर बोर्ड के एक सदस्य की गंभीर आपत्ति की थी । दिसंबर २०२५ में स्क्रीनिंग के दौरान बोर्ड के ५ में से ४ सदस्य फिल्म को पास करने के लिए तैयार थे, लेकिन एक सदस्य ने फिल्म के कंटेंट पर कड़ी आपत्ति जताई।




बोर्ड सदस्य का आरोप था कि फिल्म में कुछ ऐसे सैन्य संदर्भ और धार्मिक/सांप्रदायिक लाइनें थीं, जिससे सार्वजनिक भावनाएं आहत हो सकती थीं। फिल्म में थलपति विजय (जो अब तमिलनाडु के मुख्यमंत्री हैं) की राजनीतिक पार्टी टीवीके  के सीधे संदर्भ थे । प्रारंभ में निर्माता केवीएन प्रोडक्शनस बोर्ड द्वारा सुझाए गए कट्स से पूरी तरह सहमत नहीं थे। उन्हें लगा कि बोर्ड बेवजह देरी कर रहा है, इसलिए उन्होंने मद्रास हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। निर्माता अपनी फिल्म की मूल कहानी और राजनीतिक संदेशों को बचाना चाहते थे।





किन्तु, अप्रैल २०२६ में बिना सेंसर हुई पूरी फिल्म की एक एचडी कॉपी इंटरनेट पर लीक हो गई, जिसे करीब 1.2 करोड़ लोगों ने देख लिया। इस भारी पायरेसी के कारण फिल्म को रिलीज से पहले ही बड़ा आर्थिक नुकसान होने लगा। इस संकट से बचने और कोर्ट केस को लंबा खींचने के बजाय निर्माताओं ने फरवरी में अपनी याचिका वापस ले ली और बोर्ड की बात मानकर फिल्म रिलीज करना ही बेहतर समझा।





परिणामस्वरूप, सेंसर बोर्ड की १२ बड़ी शर्तों और कट्स को निर्माताओं ने मान लिया है, जिनमें ऑडियो और विजुअल्स से थलपति विजय की पार्टी टीवीके  और न्यू इंडिया शब्दों को म्यूट कर दिया गया है । राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा) के जमीन पर गिरने वाले एक दृश्य को फिल्म से हटा दिया गया है । बी.आर. अंबेडकर की किताब वाले कवर और उनसे जुड़े कुछ संवादों को बदलना पड़ा है। गाली-गलौज वाले शब्द और एक बच्चे को जलाने वाले दर्दनाक दृश्य को भी हटाना पड़ा है ।





फिल्म के क्लाइमेक्स और कुछ अन्य दृश्यों में भारतीय सेना (Military) से जुड़ी कुछ विवादित लाइनों को बदला गया है। डॉ. बी.आर. अंबेडकर की किताब के कवर पेज को बदला गया है और उनसे जुड़े कुछ संवादों में संशोधन किया गया है। फिल्म के अलग-अलग दृश्यों में इस्तेमाल की गई गालियों और आपत्तिजनक शब्दों को म्यूट किया गया है। लड़ाई  के कुछ दृश्यों में अत्यधिक खून-खराबा और क्रूरता दिखाई गई थी, जिसे छोटा किया गया है। फिल्म के शुरुआती टाइटल कार्ड्स और कुछ संवादों में बदलाव किए गए हैं ताकि किसी वास्तविक राजनीतिक हस्ती से इसकी तुलना न हो। विदेशी लोकेशन के कुछ दृश्यों में दिखाए गए झंडों और प्रतीकों को बदला गया है ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई विवाद न हो।





फिल्म में धूम्रपान और शराब के दृश्यों के दौरान वैधानिक चेतावनी को अधिक स्पष्ट रूप से दिखाने को कहा गया। इन सभी बदलावों को मानने के बाद, निर्माताओं ने हाल ही में 41 सेकंड का एक नया फुटेज जोड़ा है, जिसे बोर्ड ने फिर से पास कर दिया है।





 यहाँ बताते चलें कि 'जन नायकन' मौलिक फिल्म नहीं है । यह साल 2023 में आई सुपरहिट तेलुगु फिल्म 'भगवंत केसरी' की, बड़े बदलाव के साथ आधिकारिक रीमेक है। मूल तेलुगु फिल्म में सुपरस्टार नंदामुरी बालकृष्ण, श्रीलीला और अर्जुन रामपाल मुख्य भूमिकाओं में थे। यद्यपि, फिल्म के निर्देशक एच. विनोद ने ऑडियो लॉन्च के दौरान कहा था कि यह पूरी तरह से एक थलपति विजय की फिल्म है। फिल्म की मूल आत्मा और कुछ खास इमोशनल दृश्यों को 'भगवंत केसरी' से लिया गया है, लेकिन थलपति विजय की राजनीतिक छवि को ध्यान में रखते हुए कहानी में भारी राजनीतिक बदलाव और नए सीन जोड़े गए हैं।





मूल फिल्म में जो भूमिका नंदामुरी बालकृष्ण ने निभाई थी, उसे 'जन नायकन' में थलपति विजय निभा रहे हैं। वहीं, विलेन के रूप में अर्जुन रामपाल की जगह इस फिल्म में बॉबी देओल नजर आएंगे।





फिल्म 'जन नायकन' में बॉबी देओल और पूजा हेगड़े के किरदार मूल फिल्म 'भगवंत केसरी' के किरदारों पर ही आधारित हैं, लेकिन इन्हें हूबहू नकल करने के बजाय तमिल सिनेमा के स्वाद और थलपति विजय की राजनीतिक छवि के अनुसार बड़े बदलावों के साथ पेश किया गया है। किन्तु, दोनों किरदारों में भारी बदलाव किया गया है । भगवंत केसरी' में अर्जुन रामपाल ने 'राहुल संघवी' नाम के एक चालाक कॉर्पोरेट बिजनेस टायकून का किरदार निभाया था, जो पैसे और व्यापार के दम पर अपना वर्चस्व चलाता है। जबकि, 'जन नायकन' में बॉबी देओल का किरदार 'फीनिक्स'  मूल फिल्म से बहुत अलग है। यहाँ उन्हें सिर्फ एक बिजनेस विलेन नहीं, बल्कि एक मिलिट्री/आर्मी बैकड्रॉप और राजनीतिक ताकत से लैस बेहद खूंखार और क्रूर विलेन के रूप में दिखाया गया है। उनका किरदार ज्यादा हिंसक और डरावना है।





'भगवंत केसरी' में: काजल अग्रवाल ने 'डॉ. कात्यायनी' का किरदार निभाया था, जो पेशे से एक मनोवैज्ञानिक थीं। उनका काम नायक (बालकृष्ण) की मदद करना और फिल्म में हल्के-फुल्के रोमांटिक पल जोड़ना था। 'जन नायकन' में अंतर: पूजा हेगड़े के किरदार का नाम 'कयाल' है। फिल्म में उनके पेशे को पूरी तरह बदल दिया गया है । वह डॉक्टर नहीं बल्कि एक पत्रकार की भूमिका में हैं। यह बदलाव फिल्म के राजनीतिक और सामाजिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए किया गया है ताकि उनका किरदार कहानी में ज्यादा सक्रिय और मजबूत दिखे।




निर्देशक एच. विनोथ ने फिल्म के कोर इमोशन (पिता-पुत्री/अभिभावक जैसा रिश्ता) को वही रखा है, लेकिन थलपति विजय के बड़े स्टारडम के लिए इंट्रोडक्शन सीन, इंटरवल ब्लॉक, प्री-क्लाइमेक्स और एक्शन सीक्वेंस को पूरी तरह से बदल दिया है। मूल फिल्म के मुकाबले 'जन नायकन' में 7 एक्शन सीन्स हैं जो बेहद हिंसक और प्रभावशाली हैं।





फिल्म 'जन नायकन' में मामिता बैजू का किरदार मूल फिल्म 'भगवंत केसरी' में श्रीलीला द्वारा निभाए गए किरदार पर ही आधारित है। दोनों ही फिल्मों में यह पात्र पूरी कहानी का भावनात्मक केंद्र है । लेकिन निर्देशक एच. विनोथ ने दोनों के बैकग्राउंड और उनके एक्शन सफर में कुछ महत्वपूर्ण अंतर रखे हैं ।  मूल फिल्म में श्रीलीला के पिता (आर. सरथकुमार) एक जेलर होते हैं, जिनकी एक एक्सीडेंट में मौत हो जाती है। इसके बाद उनके पिता के दोस्त भगवंत केसरी (नंदामुरी बालकृष्ण) विजी के गार्जियन (अभिभावक) बनते हैं। चरित्र का स्वभाव: विजी स्वभाव से थोड़ी डरी-सहमी लड़की है, जिसे सेना में जाने का कोई शौक नहीं है, लेकिन बालकृष्ण का किरदार उसे मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाने के लिए जबरन ट्रेनिंग देता है। श्रीलीला के किरदार के जरिए समाज को यह संदेश दिया गया था कि लड़कियों को 'कमजोर' नहीं, बल्कि 'शेरनी' की तरह मजबूत बनना चाहिए।





'जन नायकन' में इस बैकग्राउंड को तमिल सिनेमा के अनुसार बदला गया है। यहाँ विजी के असली पिता के रूप में गौतम वासुदेव मेनन नजर आएंगे, जो एक ईमानदार पुलिस अधिकारी और नायक (थलपति विजय) के मेंटर होते हैं। उनकी मौत के बाद विजय उनके सम्मान में मामिता बैजू को गोद लेते हैं और पाल-पोसकर बड़ा करते हैं।




जहाँ मूल फिल्म में श्रीलीला का किरदार शुरुआत में बहुत रोता है और ट्रेनिंग से भागता है, वहीं 'जन नायकन' में मामिता बैजू के किरदार को शुरुआत से ही थोड़ा ज्यादा आक्रामक और 'एक्शन मोड' में दिखाया गया है। थलपति विजय का किरदार उन्हें समाज के भ्रष्ट सिस्टम से लड़ने के लिए एक योद्धा की तरह तैयार करता है। 'प्रेमलू' फेम मामिता बैजू की मासूमियत और थलपति विजय के साथ उनकी स्क्रीन बॉन्डिंग फिल्म का सबसे बड़ा इमोशनल यूएसपी है।





मूल रूप से दोनों किरदारों का उद्देश्य एक ही है—एक लड़की को सशक्त बनाना। अंतर सिर्फ इतना है कि 'भगवंत केसरी' में श्रीलीला का सफर पूरी तरह से आर्मी में भर्ती होने और व्यक्तिगत डर पर काबू पाने के इर्द-गिविर्द घूमता है, जबकि 'जन नायकन' में मामिता बैजू का किरदार थलपति विजय के राजनीतिक और सामाजिक मिशन (भ्रष्ट सिस्टम के खिलाफ लड़ाई) में सीधे तौर पर उनका साथ देता नजर आता है।





मूल तेलुगु फिल्म 'भगवंत केसरी' में सुपरस्टार नंदामुरी बालकृष्ण ने 'नेलाकोंडा भगवंत केसरी' का किरदार निभाया था। इसके विपरीत, फिल्म 'जन नायकनमें थलपति विजय के किरदार को पूरी तरह से उनकी असली राजनीतिक छवि और स्टारडम के अनुरूप ढाला गया है।




इस फिल्म में विजय के किरदार का नाम 'थलपति वेत्री कोंडान' है । फिल्म के ट्रेलर के अनुसार, वेत्री कोंडान को शुरुआत में "क्रिमिनल्स का किंग" कहा गया है, जिससे लोग थर-थर कांपते हैं। उनका एक बहुत ही आक्रामक और डार्क अतीत दिखाया गया है।





चूंकि विजय असल जिंदगी में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री  बन चुके हैं, इसलिए उनके इस किरदार को एक पॉलिटिकल एक्शन हीरो के रूप में पेश किया गया है, जो सीधे सरकार और भ्रष्ट राजनीतिक व्यवस्था से लोहा लेता है।





वेत्री कोंडान के किरदार को ज्यादा 'लार्जर दैन लाइफबनाया गया है, जिसमें बहुत सारे स्टाइल और भारी एक्शन सीन्स जोड़े गए हैं। नंदामुरी बालकृष्ण का किरदार 'नेलाकोंडा भगवंत केसरी' का स्वभाव: एक बेहद अनुशासित, ठेठ तेलंगाना की बोली बोलने वाला और जमीन से जुड़ा हुआ व्यक्ति है।





वह अपनी गोद ली हुई बेटी (श्रीलीला) को सेना में भेजने के लिए एक सख्त गुरु या पिता की भूमिका निभाते हैं। उनका मुख्य ध्यान केवल अपनी बेटी के डर को भगाकर उसे सशक्त बनाने पर होता है।





इसलिए मूल फिल्म मुख्य रूप से एक पारिवारिक भावना और महिला सशक्तिकरण के एजेंडे पर आधारित थी, उसमें कोई बड़ा राजनीतिक या सिस्टम-विरोधी एजेंडा नहीं था।





जहाँ बालकृष्ण का 'भगवंत केसरी' किरदार मुख्य रूप से एक सुरक्षात्मक पिता और मेंटर के रूप में सीमित था, वहीं थलपति विजय का 'वेत्री कोंडान' एक क्रूर योद्धा और जनता का मसीहा है। निर्देशक एच. विनोथ ने विजय के किरदार को एक ऐसा राजनीतिक रंग दिया है जो सीधे तौर पर समाज के बड़े विलेन (बॉबी देओल) और भ्रष्ट सिस्टम को उखाड़ फेंकने के मिशन पर निकलता है।





 

फिल्म 'जन नायकन' का क्लाइमेक्स मूल फिल्म से बिल्कुल अलग और बेहद खास बनाया गया है, क्योंकि यह थलपति विजय के अभिनय करियर का आखिरी सीन है‌।





मूल तेलुगु फिल्म 'भगवंत केसरी' का अंत मुख्य विलेन के खात्मे और बेटी के सशक्तिकरण के साथ एक पारंपरिक तरीके से होता है। लेकिन जन नायकन के क्लाइमेक्स को थलपति विजय की इच्छा पर बदला गया है ताकि यह उनके फैंस के लिए एक यादगार विदाई  बन सके । क्लाइमेक्स में विजय के साथ काम कर चुके मशहूर निर्देशकों—एटली, लोकेश कनकराज और नेल्सन दिलीपकुमार  का एक खास कैमियो दृश्य है। इस सीन में विजय प्रतीकात्मक रूप से सिनेमाई स्टारडम की कमान नई पीढ़ी के निर्देशकों और अभिनेताओं को सौंपते हुए दिखाई देंगे।





फिल्म का अंत 'थलपति कचेरी' गाने के बैकग्राउंड म्यूजिक, विजय के 1 मिनट के हाई-एनर्जी डांस और फैंस को उनके सिग्नेचर स्टाइल में झुककर आखिरी सलाम करने के साथ होगा।

Saturday, 11 April 2026

चुनाव से पहले #JanaNayagan नहीं बन सके #ThalapathyVijay



२०२६ के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के पूर्व प्रदर्शित करने के लिए बनाई गई, दलपति विजय की तमिल फिल्म जन नायकन, प्रदर्शन से पूर्व ही लफड़े में फंस गई . तमिलनाडु की राजनीति में सक्रीय भूमिका करने के इच्छुक विजय की इस फिल्म को केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड की गंभीर आपत्तियों का ऐसा सामना पड़ा कि फिल्म अभी तक प्रदर्शित नहीं हो पा रही है। 




सेंसर बोर्ड के सदस्यों तथा अन्य की आपत्ति फिल्म की सामग्री पर है, जो राष्ट्रीय और धार्मिक हितों के विरुद्ध होने के कारण अति सवेदनशील है।  फ़िल्म में आपत्तिजनक माने गए मुख्य तत्व निम्न प्रकार थे - 




सशस्त्र बलों का चित्रण: सेंसर ने फ़िल्म पर भारतीय सशस्त्र बलों को गलत रोशनी में या अनुचित तरीके से दिखाने का आरोप लगा। कुछ विशिष्ट प्रसंगो में बिना 'उचित अनुमति' या 'विशेषज्ञता' के सैन्य प्रतीकों के गलत उपयोग किया गया।  फ़िल्म में एक विशिष्ट रक्षा प्रतीक का इस्तेमाल किया गया था, जिसके लिए न तो किसी विशेषज्ञ की समीक्षा ली गई थी और न ही कोई आधिकारिक अनुमति ली गई थी। इससे फ़िल्म में गलत जानकारी या गलत चित्रण को लेकर चिंताएँ पैदा हो गईं।





धार्मिक भावनाएँ: बोर्ड की जाँच समिति के एक सदस्य ने औपचारिक शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि फ़िल्म के कुछ दृश्य 'धार्मिक रूप से आपत्तिजनक' हैं और इनसे जनता की भावनाएँ आहत हो सकती हैं। कुछ खास संवादों का ज़िक्र किया गया, जिनके बारे में माना गया कि वे किसी अल्पसंख्यक समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचा सकते हैं। फिल्म में ब्राह्मण समुदाय को लगातार अपमानजनक तरीके से दिखाए जाने का आरोप भी लगा। 




 

विदेशी हस्तक्षेप: मद्रास हाई कोर्ट ने उन दृश्यों से जुड़ी शिकायतों पर गौर किया, जिनमें विदेशी ताकतों को भारत के भीतर अशांति फैलाते हुए दिखाया गया था। उन दृश्यों पर आपत्तियां उठाई गईं जिनमें कथित तौर पर यह दिखाया गया था कि विदेशी ताकतें भारत के भीतर धार्मिक अशांति फैलाकर आंतरिक अराजकता पैदा कर रही हैं। 





राजनीतिक संकेत: विजय के अपनी पार्टी 'तमिलगा वेट्री कज़गम' के साथ पूर्णकालिक राजनीति में उतरने को देखते हुए, फ़िल्म के शीर्षक (जिसका अर्थ है "जनता का नेता") और फिल्म में भ्रष्ट राजनेताओं की आलोचना ने इस आरोप को जन्म दिया कि यह महज़ मनोरंजन का साधन न होकर एक राजनीतिक हथियार है।




कटौती की माँग: फ़िल्म निर्माताओं द्वारा समिति द्वारा सुझाए गए शुरुआती २७ कटों पर सहमति जताने के बावजूद, आंतरिक शिकायत के चलते मामला और उलझ गया और इसे एक 'रिविज़िंग कमेटी' (पुनरीक्षण समिति) के पास भेज दिया गया।




सेंसर बोर्ड द्वारा फिल्म पर आपत्ति लगाने और उसके बाद, उस यूए प्रमाणपत्र देने से प्रकरण और जटिल हो गया।  परिणामस्वरुप यह मामला मद्रास उच्चन्यायालय तक गया। न्यायलय ने समस्त तर्कों को सुनने के पश्चात् फिल्म के प्रमाणपत्र को निरस्त कर दिया।  कोर्ट ने इन गंभीर आरोपों और फ़िल्म के कंटेंट की गहन समीक्षा की आवश्यकता पर बल दिया। ध्यान रहे कि फिल्म को यूए प्रमाणपत्र भी मद्रास उच्च न्यायलय की एकल पीठ के आदेश के बाद सेंसर बोर्ड द्वारा दिया गया था। 




कुछ अन्य आपत्तियां: फिल्म में बार-बार और लगातार हिंसा दिखाई गई है, जिसमें गोलीबारी, धमाके और हथौड़े व कुल्हाड़ी जैसे हथियारों से वार करना शामिल है। इन दृश्यों को अक्सर स्लो मोशन में और बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए प्रभावों के साथ पेश किया गया है।  कुछ खौफनाक दृश्यों, जैसे सिर काटना और शरीर के अंगों को काटना, को १६ साल से कम उम्र के दर्शकों के लिए अनुपयुक्त माना गया। ध्यान रहे कि इस फिल्म को अपने अभिभावकों के साथ बच्चे देख सकते हैं, का प्रमाण पत्र दिया गया है। इसके अतरिक्त संवेदनशील सामाजिक मुद्दे भी आपत्ति में आये। फिल्म तेलुगू फिल्म 'भगवंत केसरी' की रीमेक होने के नाते, इसमें बाल शोषण और यौन शोषण से जुड़े कुछ गंभीर दृश्य शामिल हैं; इन दृश्यों को प्रभावशाली तो माना गया, लेकिन इनके चित्रण में बेहद सावधानी बरतने की ज़रूरत थी।





फिलहाल के लिए तो जन नायकन फिल्म लटक गई लगती है। किन्तु, फिल्म को एक बड़ा झटका १० अप्रैल २०२६ को लगा, जब फिल्म का पूरा संस्करण सोशल मीडिया और अवैध प्लेटफॉर्म के ज़रिए ऑनलाइन लीक हो गया है। निर्माताओं ने इस मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से इन लिंक्स को हटाने का अनुरोध किया है। 





एच. विनोद द्वारा निर्देशित और केवीएन प्रोडक्शंस द्वारा निर्मित यह फिल्म, दलपति विजय की अंतिम फिल्म मानी जा रही है; इसके बाद वह अपने राजनीतिक दल तमिलगा वेट्री कज़गम के  साथ पूरी तरह से राजनीति में कदम रखेंगे। इस फिल्म में, विजय ने भारतीय पुलिस सेवा के एक अधिकारी वेत्री कोंडन की है। बॉलीवुड अभिनेता बॉबी देओल मुख्य दुष्ट चरित्र है।  अन्य भूमिकाओं में पूजा हेगड़े, ममिता बैजू, प्रकाश राज, गौतम वासुदेव मेनन और प्रियमणि है। एक अफवाह यह भी है कि फिल्म दक्षिण के तीन बड़े निर्देशक एटली, लोकेश कनगराज और नेल्सन दिलीपकुमार विशिष्ट भूमिकाओं में दिखाई देंगे।  यह तीनों ही विजय की फिल्में निर्देशित कर चुके है।






जन नायकन के प्रति दर्शकों में उत्सुकता है। इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि ३ जनवरी २०२६ को अनावृत फिल्म के ट्रेलर को २४ घंटों में ८ करोड़ ३० लाख दर्शकों ने देख लिया था। फिल्म में दर्शकों को आकर्षित करने वाले ज़बरदस्त एक्शन और गहरे राजनीतिक रंग देखने को मिलते हैं। 

Wednesday, 29 January 2025

दुसरे पोस्टर से #JanaNayagan बनने की ओर #ThalapathyVijay

 


तमिल फिल्म अभिनेता दलपति विजय की अंतिम बताई जा रही फिल्म जन नायकन के, गणतंत्र दिवस पर सेल्फी लेते पोस्टर ने, विजय के प्रशंसकों में जो उत्साह पैदा किया था, दूसरे दिन वह दोगुना हो गया । क्योंकि,  २७ जनवरी को विजय की फिल्म के दूसरे  पोस्टर का भी अनावरण किया गया ।




नवीनतम पोस्टर में, आत्मविश्वास से भरे विजय दर्शकों का ध्यान सहज रूप से आकर्षित करते हैं । इस ऊर्जावान और गतिशील मुद्रा में वह हंटर फटकारते दिखाई दे रहे  हैं। आकर्षक लाल पृष्ठभूमि में फिल्म जन नायकन की टैगलाइन ‘नान आनाई इत्तल…’ अर्थात जब मैं आदेश देता हूँ संकेत है कि फिल्म में विजय एक साहसी और आधिकारिक चरित्र का संकेत देते है ।  




एच. विनोद द्वारा निर्देशित और केवीएन प्रोडक्शंस के अंतर्गत वेंकट के नारायण द्वारा निर्मित, यह फिल्म एक्शन से भरपूर सिनेमाई दृश्य प्रस्तुत करने वाले सशक्त मनोरंजन करने वाली फिल्म प्रतीत होती है।


क्या #JanNayak (#JanaNayagan) बन पाएंगे #ActorVijay ?


स्पष्ट रूप से, जन नायक के निरंतर दो दिन अनावृत हुए पोस्टरों ने फिल्म के प्रति दर्शकों का रुझान स्पष्ट कर दिया है । किन्तु, फिल्म के वास्तविक प्रभाव को फिल्म का टीज़र ट्रेलर ही कोई दिशा देगा।




इस फिल्म के पश्चात्, विजय अपनी राजनीतिक पारी का प्रारंभ करने जा रहे है । उन्होंने विगत वर्ष ही अपनी राजनीतिक पार्टी तमिलागा वेट्री कज़गम (टीवीके) की घोषणा दल के झंडे के साथ की है । उनकी पार्टी को उनके प्रशंसकों ने हाथोहाथ लिया है ।




इसे देखते हुए, विजय बहुत सावधानी बरत रहे है । वह अपनी इस फिल्म को तमिलनाडु के २०२६ में होने वाले विधान सभा चुनाव से पहले प्रदर्शित करना चाहेंगे । समाचार है कि यह फिल्म पोंगल २०२६ पर प्रदर्शित होगी । यदि फिल्म जन नायक बॉक्स ऑफिस पर बड़ी हिट हो गई तो निश्चित ही, इस सफलता का प्रभाव उनके जन नायक की छवि को भी मिलेगा ।