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Monday, 18 August 2025

बॉक्स ऑफिस पर शोले को मात देने वाली जय संतोषी माँ !



शीर्षक चौंकाने वाला हो सकता है, किन्तु सत्य है।  १९७५ में आमने सामने १५ अगस्त को प्रदर्शित फिल्म शोले को आल टाइम ब्लॉकबस्टर फिल्म माना जाता है। फिल्म में उस समय के शीर्ष के सितारे धर्मेंद्र, अमिताभ बच्चन, हेमा मालिनी, संजीव कुमार और जया भादुड़ी बच्चन प्रमुख भूमिका में थे।  इस फिल्म से चरित्र अभिनेता जयंत के पुत्र अमजद खान का डेब्यू हुआ था।





  

इसमें को संदेह नहीं कि प्रारंभिक सप्ताह में फ्लॉप हो गई शोले ने बाद में बॉक्स ऑफिस पर डंका बजा दिया।  किन्तु, शोले की इस सफलता को थोड़ा फीका कर दिया जय संतोषी माँ ने।  निर्माता सतराम रोहरा और निर्देशक विजय शर्मा की माँ संतोषी माँ की अपनी भक्त पर कृपा का बखान करने वाली इस धार्मिक फिल्म में पुराने समय के धार्मिक फिल्मों से प्रसिद्द महिपाल, अनीता गुहा, बीएम व्यास, त्रिलोक कपूर, मनहर देसाई के साथ भारत भूषण,  कानन कौशल, आशीष कुमार, लीला मिश्रा, बेला बोस, आदि अपेक्षाकृत छोटे सितारे भिन्न भूमिकाये कर रहे थे। यद्यपि कभी इन कलाकारों का डंका बजा करता था। किन्तु,बदलते युग के साथ यह नैपथ्य में चले गए। 





एक अनुमान के अनुसार, जय संतोषी माँ के निर्माण में सतराम रोहरा ने, शोले के १५ करोड़ की तुलना में मात्रा ४ करोड़ ७५ लाख व्यय किये थे। किन्तु, फिल्म ने दर्शकों की अटूट भक्ति और श्रद्धा के बल पर बॉक्स ऑफिस पर ६७  करोड़ ८१ लाख का व्यवसाय किया था। यह व्यवसाय लागत की दृष्टि से शोले की तुलना में कही अधिक व्यवसाय करने वाला था।





जय संतोषी माँ का कथानक महर्षि नारद द्वारा संतोषी माँ की भक्त सत्यवती की देवी के प्रति श्रद्धा की परीक्षा लेने की थी। इस फिल्म ने तत्कालीन दर्शकों में संतोषी माँ के प्रति श्रद्धा और विश्वास को जन्म दिया।  देश के कोने कोने में संतोषी माँ के मंदिर खड़े हो गए।  महिलाएं उन्हें प्रसन्न करने के लिए व्रत रखने लगी। फिल्म में संतोषी माँ के प्रति दर्शको की श्रद्धा का अनुमान इससे लगाया जा सकता है कि जिस छविगृह में फिल्म लगी होती थी, वहां जाने वाला दर्शक सिनेमाघर की सीढ़ियों को प्रणाम कर अंदर जाता था। सिनेमाघरों के मालिकों ने छविगृह के बाहर हॉउसफुल के बोर्ड पर माला टांगनी शुरू कर दी थी। कुछ ने तो अस्थाई मंदिर भी बनवा दिए थे।




 

जय संतोषी माँ में, रामायण पर बनी फिल्मों की सीता के रूप में प्रसिद्द अनीता गुहा ने, संतोषी माँ की भूमिका की थी।  इस फिल्म के दर्शकों पर प्रभाव का अनुमान इससे लगाया जा सकता है कि दर्शक अनीता गुहा को सचमुच की संतोषी माँ मानने लगे थे। वह यदि कही बआहर दिख आजाती तो लोगों में उनके पैर छूने की होड़ लग जाती। 





फिल्म का संगीत सी अर्जुन ने दिया था। फिल्म के सभी गीत कवि प्रदीप ने लिखे थे। इन गीतों को  लता मंगेशकर की बहन उषा मंगेशकर के साथ साथ कवि प्रदीप, मन्ना डे और महेंद्र कपूर ने गाया था। उषा मंगेशकर के गाये दो गीत मैं तो आरती उतारूँ रे संतोषी माँ की और मदद करो संतोषी माँ बड़े हिट हुए थे। महेंद्र कपूर और कवि प्रदीप के गाये यहां वहां जहाँ तहाँ मत पूछो कहाँ कहाँ गीत भी खूब पसंद किया गया था। संतोषी माँ की आरती वाला गीत तो मंदिरों में बजा करता था।





जय संतोषी माँ की सफलता से फिल्म से जुड़े सभी लोगों को बड़ा लाभ हुआ। उषा मंगेशकर आज भी इस फिल्म के गीतों के कारण याद की जाती है। फिल्म के संगीत ने फिल्म के निर्माता के अतिरिक्त इसे जारी करने वाली कंपनी, गायक गायिकाओं, फिल्म वितरकों और प्रदर्शकों को मालामाल कर दिया। लखनऊ के छविगृह जयहिंद में जय संतोषी माँ प्रदर्शित हुई थी। इस फिल्म से उन्हें इतना लाभ हुआ कि उन्होंने निकट में ही एक नया छविगृह जय भारत बना डाला। इस छविगृह के टॉप पर संतोषी माँ की मूर्ति उकेरी गई थी।





जय संतोषी माँ का रीमेक २००६ में किया गया था। १९७५ की जय संतोषी माँ के निर्माता सतराम रोहरा से परसेप्ट पिक्चर कंपनी ने पुनर्निर्माण के अधिकार खरीद लिए थे। २००६ की संतोषी माँ में १९७५ की फिल्म के मूल गीत मैं तो आरती उतारूँ रे,  मदद करो संतोषी माँ और यहाँ वहां कहाँ कहाँ भी पुनः शामिल किये गए थे।