2 अक्टूबर 2026 को रिलीज होने वाली फिल्म 'वाल्मीकि रामायण' कोई एनिमेशन फिल्म नहीं है, बल्कि यह एक लाइव-एक्शन भव्य सिनेमाई फिल्म है। अक्सर दर्शक इसे 1992 की मशहूर भारत-जापान को-प्रोडक्शन वाली एनिमेशन फिल्म 'रामायण: द लीजेंड ऑफ प्रिंस राम' समझ लेते हैं, जिसे हाल ही में 4K विजुअल्स के साथ दोबारा थिएटर्स में रिलीज करने की चर्चा रही है। लेकिन 2026 में आने वाली 'वाल्मीकि रामायण' वास्तविक कलाकारों और भव्य सेट्स के साथ बनाई गई एक लाइव-एक्शन फिल्म है।
इस फिल्म का निर्देशन भावना तलवार ने किया है। फिल्म की भव्यता को बड़े
पर्दे पर उतारने के लिए इंडस्ट्री के दिग्गज शामिल हैं, जैसे 'बाहुबली' के सेट डिजाइन करने वाले
साबू सिरिल (प्रोडक्शन डिजाइनर), प्रसिद्ध
सिनेमैटोग्राफर विनोद प्रधान, और ऑस्कर विजेता
रेसुल पुकुट्टी (साउंड डिजाइनर)।
इसकी कहानी को मशहूर लेखक आनंद नीलकंठन और चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने इस प्रकार से लिखा है, ताकि रामायण को बेहद सरल और सांस्कृतिक गहराई के साथ प्रस्तुत किया जा सके। यह फिल्म 2 अक्टूबर 2026 (गांधी जयंती) को सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए निर्धारित है।
जहां तक फिल्म की स्टार कास्ट का प्रश्न है मेकर्स ने इस फिल्म के मुख्य अभिनेताओं
(राम, सीता, रावण) के नामों को अभी पूरी तरह से गोपनीय रखा है। इसकी आधिकारिक घोषणा जल्द ही होने की उम्मीद है। यद्यपि, फ़िल्म के
कलाकारों के नाम सामने नहीं आए हैं, लेकिन इसके बैक-स्टेज दिग्गजों की सूची बहुत बड़ी है। फिल्म का स्क्रीनप्ले
'बाहुबली' सीरीज के लेखक आनंद नीलकंठन ने लिखा है और संवाद
डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने तैयार किए हैं। संगीत के बेताज बादशाह इलियाराजा इसका
म्यूजिक दे रहे हैं।
रणबीर कपूर की 'रामायण' दिवाली में 8 नवम्बर को प्रदर्शित हो रही है. इसलिए दोनों फ़िल्मों के सीधे टकराव की स्थितियां नहीं बन रही हैं. क्यों कि भावना
तलवार की 'वाल्मीकि रामायण' 2 अक्टूबर 2026 (गांधी जयंती) को सिनेमाघरों में
आएगी। वहीं, नितेश तिवारी के निर्देशन
वाली रणबीर कपूर स्टारर 'रामायण: पार्ट 1' दिवाली के मौके पर 8 नवंबर 2026 को रिलीज होने
वाली है।
इस प्रकार से दोनों फ़िल्मों का बॉक्स ऑफिस पर सीधा टकराव नहीं होने जा
रहा. क्यों कि तकनीकी रूप से दोनों फिल्मों के प्रदर्शन मे लगभग एक महीने का अंतर
है। किन्तु वाल्मीकि रामायण' को पहले रिलीज
होने का फायदा अवश्य मिलेगा।
दर्शक एक ही कहानी को दो बेहद अलग सिनेमाई शैलियों और दृष्टिकोणों (एक अत्यधिक
वीएफएक्स-ओरिएंटेड और दूसरी पारंपरिक लाइव-एक्शन) में देख पाने का लोभ नहीं छोड़
पाएंगे।
फिल्म के आधिकारिक पोस्टर पर दर्शकों का रिस्पॉन्स बहुत उत्साहजनक रहा है। फिल्म का पहला लुक पोस्टर बेहद सादगी भरा और आध्यात्मिक था। पोस्टर में केवल भगवान
श्री राम के पूजनीय चरण कमलों को दर्शाया गया था, जो विनम्रता, आस्था और यात्रा की शुरुआत से पहले आशीर्वाद
लेने की रीत का प्रतीक है।
'आदिपुरुष' जैसी फिल्मों के भारी-भरकम और आधुनिक वीएफएक्स
से थके दर्शकों ने इस शांत और पारंपरिक पोस्टर की काफी सराहना की है। सोशल मीडिया
पर लोगों ने इसे रामायण की मूल आत्मा के करीब बताया है और फिल्म को लेकर एक
सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलनी शुरू हो गई
है।
फिल्म की निर्देशक भावना तलवार अवार्ड-विनिंग फिल्ममेकर हैं। 'वाल्मीकि रामायण' उनके करियर की चौथी बड़ी निर्देशित फिल्म है। उनकी निर्देशित उल्लेखनीय
फ़िल्मों में-
धर्म (Dharm - 2007)- भावना
तलवार की बतौर निर्देशक पहली फिल्म थी, जिसमें पंकज कपूर ने मुख्य भूमिका निभाई थी। राष्ट्रीय एकता और धार्मिक
सद्भाव पर बनी इस फिल्म को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर काफी सराहना मिली
और इसने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी जीता।
हैप्पी (Happi - 2019) - महान
अभिनेता चार्ली चैपलिन को श्रद्धांजलि देने वाली एक ब्लैक एंड व्हाइट
कॉमेडी-ड्रामा फिल्म थी, जिसमें एक बार फिर पंकज
कपूर मुख्य भूमिका में नजर आए थे।
हाइडी: क्वीन ऑफ द माउंटेन (Heidi: Queen of the Mountain - 2017)- बच्चों के एक मशहूर क्लासिक उपन्यास पर
आधारित अंतर्राष्ट्रीय स्तर का प्रोजेक्ट था।
वाल्मीकि रामायण' के पर्दे पर दिखाई देने वाले चेहरे गुप्त हैं। किन्तु, इसके तकनीक से जुड़ी हस्तियां फिल्म को चर्चा मे लाने में सफल हो है। फिल्म के संगीतकार इलियाराजा और इसके स्क्रीनप्ले लेखक आनंद नीलकंठन दोनों ही अपने-अपने क्षेत्रों के दिग्गज हैं।
दिग्गज संगीतकार इलियाराजा का इस फिल्म से जुड़ना इसके सबसे मजबूत पक्षों में से एक माना जा रहा है। मेकर्स ने फिल्म में उनके संगीत को केवल 'साउंडट्रैक' न कहकर एक "संगीतमय आह्वान" का नाम दिया है। इलियाराजा पिछले पांच दशकों से भारतीय सिनेमा को अपने संगीत से समृद्ध कर रहे हैं। वे इस महाकाव्य के लिए एक ऐसा बैकग्राउंड स्कोर और संगीत तैयार कर रहे हैं जो पूरी तरह से शास्त्रीय भारतीय संगीत और आध्यात्मिक धुनों पर आधारित होगा। इलियाराजा को भारतीय संगीत में पश्चिमी ऑर्केस्ट्रा के साथ पारंपरिक लोक धुनों के बेहतरीन फ्यूजन के लिए जाना जाता है। उन्होंने 'अन्नाकिली', 'थलपति' (राक्काम्मा कैया थट्टू गाना), और 'नायकन' जैसी कालजयी फिल्मों में संगीत दिया है। 'वाल्मीकि रामायण' में उनका संगीत दर्शकों को सीधे त्रेतायुग के माहौल का अहसास कराने का काम करेगा।
पटकथाकार आनंद नीलकंठन ने
वाल्मीकि रामायण के मूल पाठ को आधार बनाकर इस फिल्म की पटकथा को रूपांतरित किया है. आनंद नीलकंठन को भारत में पौराणिक
कथाओं को एक नए, तार्किक और सिनेमाई
दृष्टिकोणों से प्रस्तुत करने के लिए जाना जाता है. उन्होंने महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित 24,000
श्लोकों के विशाल महाकाव्य में से मुख्य घटनाओं (जैसे राम का वनवास, सीता हरण और लंका विजय) को चुनकर एक बेहद कसी
हुई स्क्रिप्ट तैयार की है। आनंद नीलकंठन को सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्म 'बाहुबली: द बिगिनिंग' और 'बाहुबली 2: द कन्क्लूजन' के प्रीक्वल
उपन्यासों (जैसे 'द राइज ऑफ शिवगामी') के लेखन के लिए जाना जाता है, जिस पर नेटफ्लिक्स सीरीज भी बन चुकी है। इसके
अलावा उन्होंने टीवी के मशहूर पौराणिक शोज़ जैसे 'सिया के राम' और 'महाबली हनुमान' के लिए भी लेखन किया है।
इसके अतिरिक्त इस फिल्म में आनंद नीलकंठन की सशक्त पटकथा को दूरदर्शन
के क्लासिक सीरियल 'चाणक्य' से प्रसिद्ध डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी के लिखे संवादों का साथ मिला है। यह
जुगलबंदी फिल्म को भाषाई और वैचारिक रूप से बेहद समृद्ध बनाती है।
फिल्म 'वाल्मीकि रामायण' के अन्य प्रमुख
तकनीशियनों मे साबू सिरिल और रसूल पूकुट्टी का तकनीकी योगदान भी उल्लेखनीय है. इस
लाइव-एक्शन फिल्म को तकनीकी रूप से विश्वस्तरीय बनाने के लिए भारत के दो सबसे बड़े
अवॉर्ड विनिंग दिग्गजों में शामिल किया गया है. साबू सिरिल, भारतीय सिनेमा के
सबसे प्रतिष्ठित प्रोडक्शन डिजाइनरों में से एक हैं, जिन्होंने 'बाहुबली' 1 और 2, 'RRR', और 'रोबोट' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों के भव्य और अविश्वसनीय
सेट्स डिजाइन किए हैं। 'वाल्मीकि रामायण' में वे त्रेतायुग के वैभव को बिना किसी
कृत्रिमता के, वास्तविक और दिव्य सेट्स
के जरिए बड़े पर्दे पर जीवंत कर रहे हैं। उनके साथ फिल्म 'स्लमडॉग मिलेनियर' के लिए ऑस्कर पुरस्कार जीत चुके रसूल पूकुट्टी इस फिल्म के साउंड डिजाइन की
कमान संभाल रहे हैं। उनका मुख्य ध्यान फिल्म में उपयोग किए जा रहे मंत्रों, चौपाइयों, प्रकृति की ध्वनियों और युद्ध के दृश्यों के दौरान दर्शकों को एक गहरा और
ध्यानमयी आध्यात्मिक अनुभव
देने पर है।
वाल्मीकि रामायण' के छायाकार बिनोद
प्रधान भारतीय सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित और अनुभवी सिनेमैटोग्राफर्स में से एक हैं। उन्हें
फिल्मों में शानदार लाइटिंग, रंगों के बेहतरीन
संयोजन और दृश्यों को बेहद सजीव व आकर्षक रूप में कैमरे में कैद करने के लिए जाना
जाता है। 'वाल्मीकि रामायण' में उनका विजुअल स्टाइल इस प्रकार रहने वाला है.
बिनोद प्रधान ने इससे पहले 'देवदास', 'रंग दे बसंती', 'भाग मिल्खा भाग', और '२ स्टेट्स' जैसी फिल्मों में अपनी बेहतरीन सिनेमैटोग्राफी का हुनर दिखाया है। 'वाल्मीकि रामायण' में उनका मुख्य फोकस कृत्रिम या बनावटी लाइटिंग के बजाय वास्तविक सूर्य की
रोशनी, सुबह की लालिमा, और जंगलों के प्राकृतिक दृश्यों का उपयोग करना
है। प्रधान त्रेतायुग के आश्रमों, राजमहलों और
जंगलों के दृश्यों को साबु सिरिल के सेट्स के साथ इस तरह फ्रेम कर रहे हैं कि वह
अत्यधिक चमकदार या कंप्यूटर-जनित (VFX) न लगकर पूरी तरह वास्तविक और दिव्य प्रतीत हो।
यद्यपि, फिल्म के निर्माताओं ने 'वाल्मीकि रामायण' के सटीक बजट का कोई आधिकारिक आंकड़ा साझा नहीं किया है, लेकिन फिल्म से जुड़े बड़े राष्ट्रीय पुरस्कार
विजेता क्रू (जैसे साबू सिरिल, रसूल पूकुट्टी, और बिनोद प्रधान) को देखते हुए इसे एक बड़ी और
भव्य स्तर की फिल्म माना जा रहा है।
यह फिल्म रणबीर कपूर की मेगा-बजट 'रामायण' (जिसका बजट लगभग ₹4000
करोड़ बताया जा रहा है) जितनी अत्यधिक महंगी नहीं है。 इसका कारण यह है कि इस फिल्म में हॉलीवुड स्तर के भारी-भरकम और महंगे
डिजिटल वीएफएक्स पर पैसे पानी की तरह
बहाने के बजाय, पारंपरिक लाइव-एक्शन, वास्तविक अभिनय और कलात्मक भव्यता पर ज्यादा
ध्यान दिया गया है। इस लिहाज से इसका बजट भारतीय सिनेमा के मानकों के अनुसार काफी
संतुलित पर बड़ा है।
वाल्मीकि रामायण को सोलो रिलीज का फायदा मिल सकता है. यह फिल्म 2 अक्टूबर 2026 (गांधी जयंती) के
बड़े नेशनल हॉलिडे पर रिलीज हो रही है। इस दिन कोई अन्य बड़ी हिंदी फिल्म
निर्धारित नहीं होने के कारण, इसे देश भर के
मल्टीप्लेक्सों और सिंगल-स्क्रीन थिएटरों में अधिकतम स्क्रीन्स मिलने की पूरी
उम्मीद है। नितेश तिवारी और रणबीर कपूर की 'रामायण: पार्ट 1' इसके ठीक एक महीने बाद
दिवाली (8 नवंबर 2026) को आएगी। इस प्रकार, 'वाल्मीकि रामायण' के पास सिनेमाघरों में
दर्शकों को आकर्षित करने और मजबूत कमाई करने के लिए पूरे 4 हफ्तों का एक लंबा और
बिना किसी रुकावट वाला समय (Free
Run) उपलब्ध रहेगा। अगर माउथ-पब्लिसिटी बेहतरीन रही, तो यह फिल्म दिवाली के बाद भी स्क्रीन्स पर टिकी
रह सकती है।
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