नितेश तिवारी की 8 नवम्बर को
प्रदर्शित होने जा रही रामायण और 2023 मे प्रदर्शित प्रभाष की फिल्म आदिपुरुष
से पहले, बॉलीवुड ने इस महा-गाथा को एक बार नहीं, दो बार नहीं, बल्कि तीन बार बड़े
पर्दे पर लाने की घोषणा की। हर परियोजना बड़े सितारों, भारीभरकम बजट, उत्साह और बड़ी
उम्मीदों के साथ प्रारम्भ की गई थी। कुछ की शूटिंग भी शुरू हुई। कुछ घोषणा तक
सीमित रह गई। कोई भी, किन्ही न किन्ही कारणों के चलते दर्शकों तक नहीं
पहुंच सकीं।
पहली बड़ी कोशिश 1990 के दशक की शुरुआत
में हुई जब सोहेल खान ने सलमान खान को भगवान राम और सोनाली बेंद्रे को सीता की
भूमिका में लेकर रामायण निर्देशित करने की योजना बनाई। रिपोर्ट्स बताती हैं कि इस
अति महात्वाकांक्षी फिल्म की 40 प्रतिशत शूटिंग भी हुई. किन्तु, अंततः यह फिल्म
डिब्बा बंद कर दी गई।
उस समय की कतरनो के
अनुसार उस दौरान फिल्म में पूजा भट्ट भी सह निर्देशक के रूप में फिल्म से जुड़ी
जुड़ी हुई थीं. सोहेल खान के साथ उनके व्यक्तिगत संबंधों (लव अफ़ेयर) की चर्चाएं
थीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, खान परिवार इस रिश्ते के पक्ष में नहीं था, जिसके चलते सेट पर
और व्यक्तिगत जीवन में काफी तनाव पैदा हो गया। पूजा भट्ट ने बीच में ही फिल्म छोड़
दी. अंदरूनी विवाद और क्रिएटिव मतभेदों के कारण करीब 40% शूटिंग पूरी होने
के बावजूद फिल्म को हमेशा के लिए ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
सालों बाद, राजकुमार संतोषी ने
अजय देवगन को भगवान राम, काजोल को सीता, रितेश देशमुख को
लक्ष्मण और प्रकाश राज को रावण के रोल में लेकर एक अन्य भव्य पटकथा रूपांतरण की
कल्पना की। फिल्म के प्रति अत्यंत उत्सुकता और उत्साह के बावजूद, फिल्म को उसके बड़े
बजट और शेड्यूलिंग इशू की वजह से रोक दिया गया।
मुख्य कलाकार अजय
देवगन (राम) और काजोल (सीता) के पास पहले से ही कई अन्य बड़ी फिल्में थीं।
राजकुमार संतोषी के बार-बार प्रोजेक्ट्स की घोषणा करने और फिर उन्हें आगे बढ़ाने
की आदत (जैसे बाद में 'पावर' जैसी फिल्मों के
साथ हुआ) के चलते कलाकारों के साथ तालमेल नहीं बैठ पाया। आखिरकार, बजट की तंगी और
तारीखों के टकराव के चलते फिल्म को डिब्बाबंद करना पड़ा।
ऐसी ही एक तीसरी
रामायण की घोषणा 2008 में, संजय खान ने 'द लेजेंड ऑफ़ रामा' शीर्षक के साथ
घोषित की. इस फिल्म को 50 करोड़ की लागत से
बनाया जाना था। इसमें ऋतिक रोशन भगवान राम, ज़ायद खान लक्ष्मण
और अमिताभ बच्चन राजा दशरथ बने थे। यह फ़िल्म भी कभी प्लानिंग स्टेज से आगे नहीं
बढ़ पाई।
ऋतिक रोशन उस समय 'क्रिश' और 'धूम 2' की ब्लॉकबस्टर
सफलता के बाद बॉलीवुड के टॉप स्टार बन चुके थे। इस फिल्म के लिए उन्हें कम से कम 6 से 8 महीने का लगातार
शेड्यूल देना था। ऋतिक ने अपने ससुर के प्रोजेक्ट में रुचि तो दिखाई, लेकिन उनके पास
पहले से ही अन्य निर्देशकों की बड़ी फिल्में कतार में थीं, जिससे वह तारीखें
नहीं निकाल पा रहे थे।
संजय खान को उम्मीद
थी कि ऋतिक के नाम पर कॉर्पोरेट स्टूडियोज तुरंत पैसा लगा देंगे। लेकिन उस दौर में
पौराणिक फिल्मों का बॉक्स ऑफिस ट्रैक रिकॉर्ड बहुत अच्छा नहीं था। बिना किसी पक्के
स्टूडियो पार्टनर और ऋतिक की कन्फर्म डेट्स के, फिल्म का
प्री-प्रोडक्शन कभी खत्म ही नहीं हो सका और स्क्रिप्ट केवल कागजों पर रह गई।
अब, दशकों तक तीन असफल
प्रयासों के बाद, नितेश तिवारी के कल्पना वाली रामायण पर्दे पर आने
वाली है। नमित मल्होत्रा निर्मित इस महादशा में रणबीर कपूर भगवान राम, साईं पल्लवी सीता, यश रावण और सनी
देओल हनुमान बने हैं. इस समय यह फिल्म अब तक की सबसे बड़ी और सबसे ज़्यादा इंतज़ार
की जा रही भारतीय फ़िल्मों में से एक बन गई है।
यह सोचना दिलचस्प
है कि अगर उन पुराने वर्शन में से कोई भी थिएटर में आया होता तो बॉलीवुड का इतिहास
कितना अलग होता।

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