विक्रमोत्सव
2025 के अंतर्गत पहली बार उज्जैन में एक अनूठी अंताक्षरी
प्रतियोगिता का आयोजन किया गया,
जिसमें
पारंपरिक फिल्मी गीतों के साथ-साथ संस्कृत के श्लोक और हिंदी दोहे भी शामिल किए
गए। इस ऐतिहासिक आयोजन को प्रसिद्ध अभिनेता डॉ. अन्नू कपूर ने संचालित किया।
पहली बार श्लोक और दोहे - उज्जैन की सांस्कृतिक धरोहर को नया मंच देने वाले इस आयोजन में प्रतियोगियों ने न केवल बॉलीवुड गीत गाए, बल्कि संस्कृत श्लोकों और हिंदी कविताओं का भी शानदार प्रस्तुतीकरण किया। इस आयोजन को देखने के लिए लगभग 7000 दर्शक उपस्थित थे।
कार्यक्रम
के मुख्य आकर्षणों में से एक था अन्नू कपूर का लाइव परफॉर्मेंस। उन्होंने अपने
पसंदीदा गीत "दीवाना हुआ बादल,
सावन
की घटा छाई" को गाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद उन्होंने
श्रोताओं से गीत का स्थायी गाने के लिए कहा, और पूरा टावर चौक इस गीत की गूंज से भर गया।
रोचक राउंड्स और ऐतिहासिक सवाल- अंताक्षरी के एक विशेष राउंड में प्रतिभागियों को दो फिल्मी हस्तियों के नाम दिए गए और उनसे उन कलाकारों की फिल्मों के गीत गाने के साथ-साथ उनके पारिवारिक रिश्ते बताने को कहा गया। इस राउंड में- शत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी पूनम और विजयता पंडित का आपसी रिश्ता क्या है ? राजेंद्र कुमार और संजय दत्त के बीच क्या संबंध है? मुमताज और ऋतिक रोशन का पारिवारिक रिश्ता क्या है? जैसे प्रश्न सम्मिलित थे. इस दौर में आजतक के अमित त्यागी ने सही उत्तर देकर सबको चौंका दिया।
"हवन करेंगे" पर झूम उठा उज्जैन - कार्यक्रम में एक और दिलचस्प राउंड तब आया जब पर्दे पर फिल्म का एक सीन दिखाया गया और श्रोताओं को उससे जुड़ा गाना गाने के लिए कहा गया। जैसे ही "हवन करेंगे" गाना बजा, दर्शक झूम उठे और देर रात तक इस माहौल का आनंद लेते रहे।
छह टीमों के बीच कड़ी टक्कर - प्रतियोगिता में कुल छह टीमों – दीवाने, मस्ताने, परवाने, अफसाने, याराने और तराने के 24 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। उन्होंने फिल्मी गीतों के साथ-साथ मुक्तक, कविताएं और श्लोक भी गाए। यह पहली बार था जब उज्जयिनी अंताक्षरी में पारंपरिक साहित्य को भी शामिल किया गया।
सांस्कृतिक विरासत को मिला नया मंच - विक्रमोत्सव 2025 के अंतर्गत आयोजित इस अंताक्षरी प्रतियोगिता ने उज्जैन की सांस्कृतिक विरासत और संगीत प्रेम को एक नई पहचान दी है। फिल्मी गीतों के साथ श्लोक और दोहों का समावेश इसे एक अनोखा आयाम देता है। आयोजन समिति ने संकेत दिया है कि इसे हर साल विक्रमोत्सव का हिस्सा बनाया जा सकता है।