यह युग हिंदी फिल्मपत्रकारिता का चाटुकार युग था। इस काल खंड की पत्र पत्रिकाएं बॉलीवुड के अभिनेता अभिनेत्रियों की झूठी प्रशंसा, उनका महिमा मंडन करने वाली और चाटुकारिता से भरपूर पीआर पत्रकारिता वाली थी। सितारों के पीआर मैनेजर, फिल्म पत्रकारों को निर्माता के खर्च से शूटिंग लोकेशन पर ले जाते, सितारों के साक्षात्कार करवाते और कीमती उपहारों के साथ एक लेख भी दे देते थे। यह युग सितारों के रंगीन और श्वेत श्याम चित्रों और ट्रांस्पेरेन्सी का था।
ऐसे समय में, न्यू यॉर्क की पत्रकारिता पर गहरी दृष्टि रखने वाले और भारत में इस पत्रकारिता को लाने की सोच रखने वाले गुजराती नरेंद्र हीरानंदानी उर्फ़ नारी हिरा का आगमन हुआ। वह खैबर रेस्टोरेंट के पास, कालाघोड़ा में स्थित एक विज्ञापन एजेंसी की क्रिएटिव यूनिट के मालिक थे। उन्होंने, बॉलीवुड की तत्कालीन पत्रकारिता को चुनौती देने और बॉलीवुड के सितारों के एफिल टावर से ऊंचा अहंकार को चूर चूर करने के लिए एक पत्रिका प्रारम्भ करने का निर्णय लिया।
१ जनवरी १९७१ का दिन, हिंदी फिल्म पत्रकरिता के इतिहास में मील का पत्थर बन गया। इस दिन एक अंग्रेजी पत्रिका स्टारडस्ट का पहला अंक बाजार में आया। नारी हीरा ने, इस पत्रिका की संस्थापक संपादक एक अनुभवहीन पत्रकार को, जो उनकी विज्ञापन एजेंसी में कॉपी राइटर थी और मॉडलिंग कर चुकी थी, बनाया। इस पत्रकार का नाम था शोभा किलाचंद, जिन्हे आज लोग शोभा डे के नाम से जानते है।
नारी हिरा चतुर व्यवसाई भी थे। उस समय, नई पत्रिकाएं, बाजार में टिके रहने के लिए कम मूल्य पर बेचीं जाती थी। किन्तु, नारी हिरा ने, अपनी पत्रिका को श्रेष्ठ जताने के लिए इसका मूल्य अन्य पत्रिकाओं से दोगुना रखा। इस तरकीब ने अपना काम भी किया।
स्टारडस्ट के जनवरी १९७१ अंक ने स्टाल पर आते ही तहलका मचा दिया। इस पत्रिका के कवर पर राजेश खन्ना की तस्वीर थी। राजेश खन्ना का उस समय अभिनेत्री अंजू महेन्द्रू से रोमांस चल रहा था। राजेश खन्ना सुपर स्टार बन चुके थे। स्टारडस्ट की पहली कवर स्टोरी में राजेश खन्ना ही थे। उन पर स्टोरी का शीर्षक था- क्या राजेश खन्ना ने गुप्त विवाह कर लिया है। यह शीर्षक नारी हिरा का दिया हुआ था। इस स्टोरी में राजेश खन्ना के बंधन की शूटिंग के दौरान अंजू महेन्द्रू से विवाह कर लेने का दावा किया गया था।
इस दो रुपये मूल्य की स्टारडस्ट के पहले तीन दिनों में २५ हजार अंक बिक गए। बॉलीवुड पत्रकारिता को स्टारडस्ट ने झिंझोड़ दिया था। यह पत्रकरिता में नए प्रारम्भ का सन्देश था। सितारों का सिंहासन हिलने लगा था। स्टारडस्ट के प्रत्येक आगामी अंक की, जितनी उत्सुकता से प्रतीक्षा पाठकों को रहती, उससे कहीं अधिक धुकधुकी बॉलीवुड के सितारों को रहती कि आगामी अंक में कौन मुखपृष्ठ में होगा। मुखपृष्ठ में होने का अर्थ किसी सितारे का काला सच बाहर आना। इस पत्रिका पर, मान हानि के बहुत से मामले चले। किन्तु, अंततः जीत स्टारडस्ट की ही हुई। स्टार धूल में मिल गए।
नारी हिरा ने, फ़िल्मी हस्तियों को उनके नाम के स्थान पर अपने चुटीले और व्यंग्यात्मक नाम दिए। उदाहरण के लिए, स्टारडस्ट के लिए धर्मेंद्र गरम धरम थे। शत्रुघ्न सिन्हा को शॉटगन सिन्हा नाम स्टारडस्ट ने ही दिया। हेमा मालिनी को इडली मालिनी का नया नामकरण हुआ। इन जैसे बहुत से नामों को पाठकों ने तो काफी पसंद किया। सितारों में भी कुछ को यह पसंद आये, कुछ ने नापसंदगी जाहिर की। किन्तु, इससे नारी हिरा और शोभा किलाचंदानी की टीम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा।
१९७५ में अमिताभ बच्चन ने बॉलीवुड की फिल्म पत्र पत्रिकाओं का बहिष्कार किया था। वह किसी पत्रकार से नहीं मिलते, कोई इंटरव्यू नहीं देते। यह अपने आप में अनोखा था। किन्तु, यह बहिष्कार स्टारडस्ट की देन थी। उन दिनों अमिताभ बच्चन घर में चल रहे वैवाहिक कलह से तंग आ चुके थे और उन्होंने कई सह-अभिनेत्रियों से रिश्ते बनाने और सांत्वना पाने के लिए मिलना शुरू कर दिया, जिनमें ज़ीनत अमान और रेखा भी शामिल थीं। इसी बीच, उनका एक ईरानी लड़की के साथ भी अफेयर चला। इसका खुलासा स्टारडस्ट ने अपनी कवरस्टोरी में कर दिया। इससे अमिताभ बच्चन बहुत रुष्ट हुए और उन्होंने सभी पत्रिकों को प्रतिबंधित कर दिया।
नारी हिरा ने, लाना पब्लिशिंग ( बाद में मैग्ना) के अंतर्गत स्टारडस्ट का प्रकाशन प्रारम्भ किया था। इस प्रकाशन ने बाद में, सैवी, शोटाइम, सोसाइटी और हेल्थ का भी प्रकाशन किया। यह सभी पत्रिकाएं खूब बिकी। स्टारडस्ट ने जब फिल्म पुरस्कार प्रारम्भ किये तो बॉलीवुड के सितारे इस पुरस्कार समारोह में सम्मिलित होने के उत्सुक दिखाई दिए।
नारी की पब्लिशिंग कंपनी मैग्ना के वित्त निदेशक एक जैन गुजराती चार्टर्ड अकाउंटेंट नरेंद्र शाह थे। नरेंद्र शाह ने १९८१ में चित्रलेखा से प्रतिस्पर्धा करने के लिए एक साप्ताहिक पत्रिका स्टार वीक प्रारम्भ की। उन्होंने सौरभ शाह को संस्थापक संपादक नियुक्त किया, जिन्हें पत्रकारिता में लगभग कोई अनुभव नहीं था और वे मात्र ढाई साल पहले ही पत्रकारिता में आए थे। उस समय चित्रलेखा की हर हफ्ते एक लाख २५ हजार प्रतियां बिकती थीं। स्टार वीक की तीन महीने के भीतर ५५ हजार प्रतियां बिकने लगीं।









