Friday, 20 March 2026

#BoxOffice पर #Dhurandhar2 का धुरंधर कारोबार !



धुरंधर २  ने, बॉक्स ऑफिस पर बम फोड़ने प्रारम्भ कर दिए है। प्रीमियर शो में, ४३ करोड़ का नेट करने वाली धुरंधर २ के बॉक्स ऑफिस पर धमाल महचाने की आशा सबको थी। बस देखना यह था कि यह कितना और किसका रिकॉर्ड तोड़ पाती है। 





धुरंधर २ ने, पहले दिन १०२.५५ करोड़ का विशुद्ध कारोबार कर, किसी हिंदी फिल्म द्वारा १०० करोड़ का कारोबार करने का कीर्तिमान स्थापित कर दिया। यद्यपि २०० करोड़ के ग्रॉस के मामले में यह अल्लू अर्जुन  की तेलुगु फिल्म पुष्पा २ से पीछे है। धुरंधर २ ने प्रीव्यू शो के साथ कुल १४५ करोड़ ५५ लाख का विशुद्ध व्यवसाय किया है।  





दूसरे दिन, इस फिल्म ने दोपहर बाद के शो तक ३७.७२ करोड़ का नेट करते हुए दो दिनों में १५० करोड़ का व्यवसाय करने वाली फिल्म होने का श्रेय प्राप्त कर लिया है।  यह फिल्म अब तक १८३.२७ करोड़ का विशुद्ध व्यवसाय कर चुकी है।  आशा यह की जा रही है कि फिल्म आज ही दोहरा शतक जमा लेगी। 





धुरंधर २ के यह आँकड़े इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि जहाँ कल इस फिल्म को २१ हजार ७२८ शो में देखा गया था, आज यह फिल्म १५ हजार ९७४ शो में ही दिखाई जा रही है। इस फिल्म के तेलुगु और तमिल संस्करण तकनीकी खराबी के कारण रद्द कर देने पड़े थे। अन्यथा, यह आंकड़े काफी अधिक होते।





लेख  प्रकाशित होने तक धुरंधर २ ने, आज बॉक्स ऑफिस पर ४७.५२ करोड़ का विशुद्ध कर लिया था तथा फिल्म १९३.०७ करोड़ की विशुद्ध कमाई कर चुकी थी।इसके शो भी बढ़ा दिए गए है।  

#Dhurandhar2 की #SaraArjun बनाम #Pathan की #DeepikaPadukone


 

इस समय सोशल मीडिया पर, सारा अर्जुन बनाम दीपिका पादुकोण चल रहा है।  फिल्म धुरंधर २ में सारा अर्जुन के चरित्र की तुलना पठान की दीपिका पादुकोण से की जा रही है। क्या है यह तुलना ?





धुरंधर २ को पठान के सामने रखना या सारा अर्जुन की दीपिका पादुकोण से तुलना करना, उन का काम है, जो यह समझते हैं कि धुरंधर २ एक प्रोपगैंडा अर्थात प्रचारात्मक फिल्म है।  ऐसे लोगों का मानना है कि धुरंधर २ में मुसलमानों की नकरात्मक छवि प्रस्तुत की है।





इसी कारण से, सारा अर्जुन का दीपिका पादुकोण से मुकाबला हो जाता है।  फिल्म पठान में दीपिका पादुकोण एक पाकिस्तानी थी तथा फिल्म  धुरंधर २ में सारा अर्जुन भी पाकिस्तानी है। यह दोनों ही, भारतीय जासूस की सहायता कर आतंकवादी मन्सूबों को नाकाम करती है।





धुरंधर २ को प्रचारात्मक फिल्म मानने वालों का कहना है कि फिल्म पठान में एक पाकिस्तानी रुबीना भारतीय एजेंट की मदद करती है।  धुरंधर २ में भी एक पाकिस्तानी एलिना जमाली रॉ एजेंट की मदद करती है। किन्तु, पठान को प्रचारात्मक फिल्म बताया गया तथा धुरंधर २ को गहराई वाला सिनेमा बताया जा रहा है।





दोनों ही तथ्यों में सच्चाई है। पठान और धुरंधर २ में पाकिस्तानी लड़की भारतीय एजेंट की मदद करती है। किन्तु, एक बड़ा फर्क है।  पठान को इसलिए प्रोपेगंडा फिल्म बताया गया कि यह फिल्म पाकिस्तानियों के भारत प्रेमी होने का प्रचार किया गया।  जो आईएस भारत में आतंकवाद फैलाती है, उसकी एक एजेंट को मददगार बता कर, आईएस की छवि निर्मल बनाए का प्रयास किया गया था। इसलिए इस फिल्म को प्रचारात्मक बताया गया।  इस फिल्म में आतंकवादी एक हिन्दू और पूर्व रॉ एजेंट था।  इस प्रकार से यह फिल्म हिन्दुओं  की छवि धूमिल कर मुसलमानों की छवि चमकाने का भद्दा प्रयास करने के कारण प्रचारात्मक बताई गई।  





इस दृष्टि से, धुरंधर २ की एलिना एक सामान्य मुस्लिम महिला है, जो एक बलोच युवक से प्रेम करती है। यह युवक, भारत में आतंक फैलाने वाले स्थानीय गैंग को मारता है।  एलिना नहीं जानती कि जिस युवक हमजा से वह  प्रेम करती है, वह कोई भारतीय एजेंट जसकीरत सिंह रंगी है। 





स्पष्ट है  कि मुस्लिम होते हुए भी पठान और धुरंधर २ के मुस्लिम चरित्रों में अंतर है।  पठान की रुबीना एक आईएस एजेंट है।  वह पहले से जानती है कि पठान भी रॉ एजेंट है। उसका जानते बूझते मदद करना आईएस की छवि निखारने का प्रयास ही है।  जबकि, एलिना अनजाने में उसकी मदद करती है।  यह स्वाभाविक है। शायद इसीलिए धुरंधर २ को प्रोपेगंडा फिल्म बताया जा रहा है।





यही कारण है कि सारा अर्जुन छोटी अभिनेत्री होते हुए भी दीपिका पादुकोण के बराबर खड़ी दिखाई देती है।  

पहले भी जारी हुए हैं फतवे !



बॉलीवुड में पिछले कुछ सालों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जब मुस्लिम मौलवियों या धार्मिक संस्थाओं ने अभिनेताओं, संगीतकारों, फिल्मों या उनकी  सामग्री  के विरुद्ध फतवे (गैर-बाध्यकारी धार्मिक आदेश) जारी किए हैं।





ये फतवे अक्सर इस्लामी शिक्षाओं के कथित उल्लंघन के कारण जारी किए जाते हैं, जैसे अश्लीलता को बढ़ावा देना, मूर्ति पूजा करना, समुदाय की नकारात्मक छवि दिखाना, या ऐसी गतिविधियों में शामिल होना जिन्हें 'हराम' (वर्जित) माना जाता है।






यहाँ कुछ ऐसे ही या मिलते-जुलते खास मामले दिए गए हैं प्यार  का पंचनामा और ड्रीम गर्ल की अभिनेत्री नुसरत भरूचा  के विरुद्ध ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन राजवी बालेवी ने एक फतवा जारी किया। इसमें उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर की यात्रा के दौरान उनके द्वारा हिंदू रीति-रिवाजों में शामिल होने को एक गंभीर पाप बताया गया और उनसे नमाज़ पढ़ने तथा अल्लाह से माफी मांगने की अपील की गई। इस घटना ने व्यक्तिगत आस्था, स्वतंत्रता और धार्मिक सीमाओं को लेकर नई बहस छेड़ दी।





२००७ में  एक फतवे में सलमान खान और उनके परिवार को गैर-मुस्लिम घोषित कर दिया गया था। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उन्हें घर पर एक हिंदू देवता (गणेश) की पूजा करते हुए दिखाया गया था।  इसके बाद उन्हें अपनी आस्था की पुष्टि करने के लिए 'शहादा' पढ़ने का आदेश दिया गया।





सलमान खान के विरुद्ध २००८ में, एक अन्य फतवा उनके  द्वारा मैडम तुसाद संग्रहालय में अपनी मोम की प्रतिमा (वैक्स स्टैच्यू) लगाने की अनुमति देने के लिए निशाना बनाया गया।  फतवे में शरीयत के उन नियमों का हवाला दिया गया था, जिनके तहत जीवित प्राणियों की प्रतिमा बनाना वर्जित है।





शाहरुख खान के विरुद्ध भी अतीत में कई फतवे जारी किए जा चुके हैं। इनमें २०१३ का एक मामला भी शामिल है, जब मेरठ के एक मौलवी ने बच्चों का नाम उनके (और सलमान खान के) नाम पर रखने पर आपत्ति जताई थी। मौलवी का मानना ​​था कि यह गैर-धार्मिक हस्तियों की अनुचित नकल करने जैसा है।





 मुंबई स्थित रज़ा अकादमी  ने. २०१५ में ऑस्कर विजेता संगीतकार ए.आर. रहमान के खिलाफ एक फतवा जारी किया। यह फतवा ईरानी फिल्म 'मुहम्मद: मैसेंजर ऑफ गॉड' (निर्देशक: माजिद मजीदी) के लिए संगीत तैयार करने के कारण जारी किया गया था। अकादमी का तर्क था कि इस फिल्म में ऐसे दृश्यों को दिखाया गया है, जिन्हें इस्लाम की कुछ व्याख्याओं के अनुसार वर्जित माना जाता है।





विभिन्न मौलवियों ने ऐसी फिल्मों को भी निशाना बनाया है, जिन पर मुसलमानों की नकारात्मक छवि दिखाने का आरोप लगा है। उदाहरण के लिए, कुछ दक्षिण भारतीय फिल्में यथा  कमल हासन की फिल्म विश्वरूपम उल्लेखनीय है।  हालाँकि, विश्वरूपम पर औपचारिक फतवों की तुलना में समुदाय के विरोध प्रदर्शनों के कारण ज़्यादा प्रतिबंध लगे थे।





२०१९ में, मध्य प्रदेश के धर्मगुरुओं ने फतवे जारी कर मुसलमानों से फ़िल्म 'राम जन्मभूमि' का बहिष्कार करने और उसकी मुख्य अभिनेत्री से दूर रहने की अपील की थी, क्योंकि इस फ़िल्म में अयोध्या से जुड़े विषयों को फिर से उठाया गया था।






ये फतवे आम तौर पर स्थानीय या किसी खास संस्थाओं (जैसे उत्तर प्रदेश या मध्य प्रदेश जैसी जगहों पर दारुल इफ़्ता या जमातों) द्वारा जारी किए जाते हैं। भारत में इन फतवों की कोई कानूनी मान्यता नहीं होती, लेकिन ये सामाजिक दबाव, बहिष्कार या सार्वजनिक चर्चा को प्रभावित कर सकते हैं।





ये फतवे अक्सर तब सामने आते हैं जब कोई बड़ा विवाद चल रहा हो, जिसमें सांस्कृतिक संवेदनशीलता, कलात्मक स्वतंत्रता बनाम धार्मिक भावनाएं, या मनोरंजन में अश्लीलता/अभद्रता का आरोप शामिल हो। नोरा फतेही का मामला भी इसी तरह की आपत्तियों के दायरे में आता है, जिसमें गानों या डांस सीक्वेंस में अश्लील या कामुक सामग्री पर एतराज़ जताया गया है। यह बॉलीवुड में 'आइटम नंबर' या 'आइटम सॉन्ग' की समय-समय पर होने वाली आलोचनाओं जैसा ही है। हालांकि, इतिहास में मूर्ति पूजा, किसी समुदाय के चित्रण या धार्मिक दृश्यों पर जारी होने वाले फतवों की तुलना में, इस तरह की सामग्री पर सीधे फतवे जारी होना कम ही देखने को मिलता है।





पटकथा लेखक सलीम खान ने सार्वजनिक रूप से ऐसे फतवों के चुनिंदा (selective) रवैये पर सवाल उठाया है। उन्होंने पूछा है कि ये फतवे सिर्फ़ फ़िल्म बनाने वालों या अभिनेताओं को ही निशाना क्यों बनाते हैं, दर्शकों को क्यों नहीं?

क्या बुरी फंसी #NoraFatehi ?



नोरा फतेही के खिलाफ विवादित गाने सरके चुनर तेरी सरके को लेकर एक फतवा जारी किया गया है। इस गाने में संजय दत्त भी नज़र आ रहे हैं। यह आगामी कन्नड़ फिल्म केडी द डेविल का हिस्सा है। इसी गीत पर अलीगढ़ की धार्मिक संस्था, मुस्लिम पर्सनल दारुल इफ्ता ने नोरा के खिलाफ यह फतवा तब जारी किया, जब गाने के बोल को लेकर ऑनलाइन इसकी आलोचना होने लगी। धार्मिक संस्था के अनुसार, इस गाने में ऐसी सामग्री है जिसे वे आपत्तिजनक और इस्लामी शिक्षाओं के खिलाफ मानते हैं।






इस विवाद की वजह से केंद्र सरकार ने इस ट्रैक पर बैन लगा दिया है। सोशल मीडिया पर प्रारंभिक आक्रोश अब रेगुलेटरी एक्शन में बदल गया है।  भारतीय सिनेमा में कलाकार की अभिव्यक्ति के नाम पर बड़ी बहस के कारण फिल्म की रिलीज़ में देरी हो सकती है।





इस गीत को लेकर राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी अपना क्रोध व्यक्त करते हुए, इससे जुड़े लोगों के विरुद्ध सम्मान जारी कर उन्हें आयोग के सामने २४ मार्च को उपस्थित होने के आदेश दिया है। 





नोरा फतेही ने कन्नड़ फिल्म केडी: द डेविल के सरके चुनर तेरी सरके को लेकर हुए विवाद पर अपना पक्ष इंस्टाग्राम पर विस्तृत वीडियो के माध्यम से आम जन से शेयर किया है, जिसमे मुख्य रूप से गाने के बोल और विज़ुअल्स को अश्लील या आपत्तिजनक माने जाने पर हो रहे बड़े विरोध अपना पक्ष रखा है। चूंकि, यह वीडियो पूर्व में जारी किया गया है, इसलिए इसे अलीगढ़ में मुस्लिम पर्सनल दारुल इफ्ता द्वारा जारी किए गए खास फतवे को लेकर जारी नहीं कहा जा सकता। अपने वीडियो मैसेज में उन्होंने बताया कि उन्होंने यह गाना लगभग तीन साल पहले शूट किया था, और इसके लिए इसलिए राज़ी हुईं क्योंकि यह एक बड़े प्रोजेक्ट का हिस्सा था और इसमें संजय दत्त के साथ काम करना शामिल था, जिन्हें उन्होंने एक आइकॉन बताया था। उस समय, उन्हें लगा कि यह एक आइकॉनिक ट्रैक (नायक नहीं खलनायक हूँ मैं) से प्रेरित रीमेक है। मेकर्स ने उन्हें इसका मतलब समझाया, और उस ट्रांसलेशन के आधार पर कुछ भी गलत या अश्लील नहीं लगा।





चूंकि, वह कन्नड़ (फिल्म की मूल भाषा) नहीं समझतीं, इसलिए उन्होंने टीम के बताये अर्थ पर भरोसा किया। हिंदी वर्शन ("सरके चुनर तेरी सरके") देखने के बाद, उन्हें एहसास हुआ कि इसकी बुराई होगी, उन्होंने डायरेक्टर को चेतावनी दी कि यह ठीक नहीं है, और खुद को प्रोजेक्ट और हिंदी अडैप्टेशन से दूर कर लिया। वह, यह भी दावा करती हैं कि मेकर्स ने हिंदी लिरिक्स के लिए उनकी इजाज़त नहीं ली और शायद बिना इजाज़त के AI या दूसरे बदलाव किए)।उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि वह अश्लीलता का समर्थन नहीं करतीं और फिल्ममेकर्स/प्रोड्यूसर्स से कहा कि वे ऐसे कंटेंट के लिए ज़िम्मेदार हों, न कि सिर्फ़ कलाकारों के नाम का इस्तेमाल करें। उन्होंने प्रशंसकों सहित अन्य से अपील की कि वे ट्रैक को शेयर या सर्कुलेट करना बंद कर दें ताकि इसे और ज़्यादा प्लेटफ़ॉर्म न मिले। 





किन्तु, यह विवाद लगातार बढ़ता ही जा रहा लगता है। कथित अश्लीलता को लेकर राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा नोरा फतेही, इस गीत में नोरा के सह कलाकार संजय दत्त, गीतकार रकीब आलम, निर्माता वेंकट के नारायण, निर्देशक किरण कुमार को समन भेजा गया है ।  उन्हें २४ मार्च २०२६ को अपरान्ह १२.३० पर उपस्थित होने को कहा है। 

Wednesday, 4 March 2026

क्या अब भी भारत छोड़ कर जायेंगी ईरानी अभिनेत्री #MandanaKarimi ?



आजकल, ईरान से आई दो अभिनेत्रियां मंदना करीमी और नोरा फतेही चर्चा में है। उनकी यह चर्चा, उनके ईरान में ख़ामेनई की मृत्यु और सत्ता परिवर्तन के बाद की है।  इससे वह सोशल मीडिया पर आलोचना का  शिकार भी हो रही है और समर्थन भी पा रही है।  आज हम चर्चा करते हैं मंदना करीमी की।  





२०२५ में, जब भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तानी मिलिट्री बेस पर बमबारी की थी,  तब भारत में काम कर रही ईरानी मॉडल मंदाना करीमी ने भारत सरकार की आलोचना की थी।  उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा था कि दुनिया जल रही है। कुछ देर पहले भारत ने पाकिस्तानी कश्मीर पर बमबारी की, जिसमें आम लोगों और बच्चों की मौत हो गई। कुछ देर पहले ही इज़राइल ने खान यूनिस में एक परिवार की हत्या कर दी। अमेरिका ने कल ही यमन पर बमबारी की, जिसमें आम लोगों की मौत हो गई। ये सभी मौतें नरसंहार करने वाली ताकतों का सीधा जवाब हैं, जिन्होंने एक-दूसरे से सीखा है कि आप बिना किसी सज़ा के युद्ध अपराध कर सकते हैं, जबकि दुनिया चुप रहती है। चाहे वह ज़ायोनिज़्म हो, हिंदुत्व फासीवाद हो या अमेरिकी अपवादवाद हो, साम्राज्यवाद लगातार बढ़ता जा रहा है और अपने रास्ते में आने वाली हर चीज़ को जला रहा है।





इस प्रकार से आजकल, बेकार बैठी फिल्म क्या कूल हैं हम २ में उदार अंग प्रदर्शन और अश्लील अंग सचांलन करने वाली ईरानी अभिनेत्री ने ऑपरेशन सिंदूर की तुलना हिंदुत्व फासीवाद से कर दी थी और भारत को नरसंहार करने वाली ताकत बताया था।  इस पोस्ट से सोशल मीडिया पर उन्हें देश से निकालने की मांग उठने लगी।





लेकिन बॉलीवुड में उन्हें कोई विरोध नहीं मिला क्योंकि बॉलीवुड खुद पाकिस्तान समर्थक, इस्लाम समर्थक और भारत विरोधी है। यही  कारण है कि देश के नेतृत्व को फासिस्ट कहने वाली अभिनेत्री के विरुद्ध बॉलीवुड ने सांस तक नहीं ली।  किन्तु, बॉलीवुड को ५० हजार से अधिक निर्दोष लोगों का क़त्ल करने वाले खूनी अयातुल्ला और ईरान के इस्लामिक शासन की बुराई पसंद नहीं आई । पता चला है कि ईरानी शासन की बुराई करने के कारण मंदना को इस साल जनवरी से बॉलीवुड ने कोई काम नहीं दिए है। बताते हैं कि इससे तंग का कर मंदना ने अपना बोरिया बिस्तर भारत से बाँध लेने की तयारी कर ली है। वह जल्द ही भारत छोड़ देंगी।





पता चला है कि युद्ध के चौथे दिन, जब अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा को नया नेता चुना गया, तो करीमी ने इसकी कड़ी आलोचना की । ईरान टुडे उर्फ़ इंडिया टुडे को इंटरव्यू में ईरान के नेतृत्व की कड़ी आलोचना करने पर टीवी की एंकर मरिया शकील और गीता मोहन ने उनकी बातों को बीच में ही काट कर खबरे दिखाना प्रारम्भ कर दिया। ऐसा लगता है कि इंडिया टुडे मुस्लिम देशों से घबराता है। क्योंकि इस टीवी ने करीमी ने पश्चिम विरोधी शिक्षाओं और हिजाब न तोड़ने पर कोड़े मारने जैसी सरकार की क्रूरता की निंदा करनी प्रारंभ कर दी थी ।





 फिलहाल, मंदना करीमी बुरी फंसी  है। वह ऑपरेशन सिन्दूर और सीएए की विरोधी होने के कारण भारत छोड़ कर ईरान जाने की तैयारी करने लगी थी। किन्तु अब जब ईरान का सुप्रीम लीडर अयातुल्ला का बीटा चुन लिया गया है, उनके लिए ईरान  भी बंद लगते हैं। क्या वह भारत रहेंगी या किसी दूसरे देश का रुख करेंगी ?

#Toxic ४ जून को क्यों ! युद्ध या #Dhurandhar2 का भय ?

 


१९ मार्च २०२६ को होने वाला टॉक्सिक और धुरंधर का टकराव टल गया है. पहले, ईद २०२६ को रणवीर सिंह की सीक्वल फिल्म धुरंधर पार्ट २ से टकराने वाली यश की फिल्म टॉक्सिक अ फेयरी टेल फॉर ग्रोन अप्स की रिलीज़ टाल दी गई है. अब यह फिल्म ४ जून २०२६ को प्रदर्शित होगी.





 

इसके साथ ही, सोशल मीडिया पर अपने अपने एक्सपर्ट कॉमेंट्स दर्ज करने का सिलसिला प्रारंभ हो गया है. कहा जा रहा है कि यश की मूल रूप में तेलुगु और इंग्लिश भाषा में शूट फिल्म टॉक्सिक, धुरंधर २ की संभावित धुरंधर सफलता से भयभीत हो कर कूच कर गई है. जिस प्रकार से, रणवीर सिंह की फिल्म को टॉक्सिक के मुकाबले बड़ी ओपनिंग मिली है. उससे इसका अनुमान लगाया जाना स्वभाविक है. किन्तु, यह अर्ध सत्य या २५ प्रतिशत सत्य ही है.





 

 

फिल्म निर्माता कंपनी केवीएन प्रोडक्शनस और मॉन्स्टर मिरो क्रिएशन्स ने एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से कहा- फिल्म A Fairy Tale for Grown-ups एक ऐसी फ़िल्म है, जिसे हमने दुनिया भर के दर्शकों के सिनेमा के रूप में बनाने के लिए बनाया है। कन्नड़ और इंग्लिश में बनी यह फ़िल्म देश और दुनिया भर के दर्शकों से जुड़ने के इरादे से बनाई गई है। सालों की मेहनत के बाद, हम 19 मार्च को आप सभी के साथ अपनी फ़िल्म शेयर करने के लिए उत्साहित थे। हालाँकि, अभी की अनिश्चितता, खासकर मिडिल ईस्ट में युद्ध की स्थिति, ने ऐसी स्थिति पैदा कर दी है, जो हमारे ज़्यादा से ज़्यादा दर्शकों तक पहुँचने और उनसे जुड़ने के हमारे लक्ष्य पर असर डाल रही है। इसलिए, अपने पार्टनर और दर्शकों के हित में, हमने अपनी रिलीज़ को रीशेड्यूल करने का मुश्किल लेकिन सोच-समझकर फ़ैसला लिया है। हम आपकी समझ और सब्र के लिए धन्यवाद करते हैं और आपके लगातार प्यार और सपोर्ट की उम्मीद करते हैं। Toxic: A Fairy Tale for Grown-ups अब 4 जून 2026 को दुनिया भर के सिनेमाघरों में इंग्लिश और भारतीय भाषाओं में रिलीज़ होगी। मिलते हैं फ़िल्मों में।




 

इससे फिल्म टॉक्सिक के निर्माताओं के इरादे स्पष्ट होते है. उन्होंने टॉक्सिक को १९ मार्च को न रिलीज़ करने का फैसला इसलिए नहीं किया कि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर के कारोबार से घबराई हुई थी. क्योंकि, यश की फिल्म टॉक्सिक मूल रूप में कन्नड़ फिल्म है तथा अंग्रेजी भाषा में भी शूट हुई है. यह फिल्म हिंदी में डब हो कर प्रदर्शित होगी. यश की विगत प्रदर्शित फिल्म केजीएफ़ २ ने भारतीय बॉक्स ऑफिस पर ८५९.७९ करोड़ का कारोबार किया था. इसमें कन्नड़ भाषा में १५४.६९ करोड़ का कारोबार सम्मिलित था. फिल्म ने हिंदी में ४५३.३३ करोड़ का कारोबार कर गई थी. कन्नड़ भषा में इतने बड़े कलेक्शन की रणवीर सिंह कल्पना भी नहीं कर सकते. क्योंकि, शाहरुख़ खान की फिल्म जवान का दक्षिण में, तेलुगु और तमिल भाषा में बॉक्स ऑफिस कलेक्शन ५८ करोड़ के लगभग था. उस प्रकार से धुरंधर २, यश की फिल्म का कारोबार हिंदी पेटी में प्रभावित कर सकती थी. विशेष रूप से प्रारंभिक दिनों में. किन्तु, दक्षिण का बॉक्स ऑफिस टॉक्सिक के लिए बिलकुल खुला था.




 

स्पष्ट रूप से, देशों में युद्ध के कारण उपजी अस्थिरता के कारण लिया है. धुरंधर २ के लिए खाड़ी देशो के बॉक्स ऑफिस का महत्त्व नहीं, क्योंकि, अपनी मूल फिल्म धुरंधर की तरह धुरंधर २ भी पाकिस्तान विरोधी होने के कारण खाड़ी देशो में प्रदर्शित नहीं होगी. किन्तु, यश की फिल्म के विरुद्ध ऐसा कोई फतवा नहीं है. यह फिल्म खाड़ी देशो में प्रदर्शित होने जा रही थी. जिस प्रकार से युद्ध की स्थिति में अमेरिका और मलयेशिया जैसे देश शामिल है, दक्षिण की फिल्मे सबसे अधिक प्रभावित होंगी. क्योंकि, इन देशों में दक्षिण के अभिनेताओं को भारी समर्थन प्राप्त है. यद्यपि युद्ध की स्थिति बनी रहने पर धुरंधर २ का कलेक्शन भी प्रभावित होगा . किन्तु, आदित्य धर की फिल्म को भारत के दर्शकों पर भरोसा है.




 

पूरे मार्च महीने में दक्षिण की चार फ़िल्में प्रदर्शित होनी थी. इनमे से, अदिवी शेष की १९ मार्च को प्रदर्शित होने जा रही फिल्म डकैत अ लव स्टोरी अब १० अप्रैल को, नानी की तेलुगु फिल्म द पैराडाइस अब २६ मार्च के बजाय २६ अगस्त को तथा रामचरण की फिल्म पेड्डी अब २७ मार्च के स्थान पर १० अगस्त को प्रदर्शित होगी. इन सभी फिल्मों को युद्ध के टलने की प्रतीक्षा है.