लायंसगेट प्ले पर
उपलब्ध संजय दत्त की 'आखिरी सवाल' कोई वेब सीरीज़ या
शो नहीं, बल्कि एक सोशियो-पॉलिटिकल ड्रामा फिल्म है। यह फिल्म एक प्रोफेसर (संजय
दत्त) और उनके छात्र के बीच वैचारिक टकराव और इतिहास के संवेदनशील राजनीतिक
मुद्दों पर आधारित है. यह फिल्म 14 अगस्त 2026 को ओटीटी प्लेटफॉर्म लायंसगेट
प्ले पर रिलीज हुई है।
फिल्म 'आखिरी सवाल’ एक
गुरु (संजय दत्त द्वारा निभाए गए प्रोफेसर गोपाल नाडकर्णी) और उनके छात्र विक्की
(नमाशी चक्रवर्ती) के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसने राष्ट्रीय
स्वयंसेवक संघ (RSS) पर एक थीसिस लिखी है।
छात्र अपने
प्रोफेसर से इतिहास की विभिन्न घटनाओं (फिल्म मुख्य रूप से महात्मा गांधी की हत्या, 1975 का आपातकाल, बाबरी मस्जिद
विध्वंस, स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका और 'हिंदू राष्ट्र' की अवधारणा से
संबंधित तीखे सवालों व बहसों को चित्रित करती है।) को लेकर तीखे सवाल पूछता है और
एक सार्वजनिक टीवी डिबेट का माहौल बनता है।
'आखिरी सवाल' में संजय दत्त के अलावा नमाशी चक्रवर्ती, अमित साध, समीरा रेड्डी और
नीतू चंद्रा जैसे कलाकार शामिल हैं। इस फिल्म के निर्देशक अभिजीत मोहन वारंग हैं। फिल्म
'आखिरी सवाल' 15 मई 2026 को भारत सहित दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई थी। लेकिन
बॉक्स ऑफिस पर इसे बड़ी असफलता का सामना करना पड़ा.
फिल्म का निर्माण
लगभग ₹30 से ₹33 करोड़ के भारी-भरकम बजट में किया गया था। फिल्म
की शुरुआत बेहद धीमी रही और इसने पहले दिन केवल ₹35 से ₹40 लाख की कमाई की।
अपने पूरे थिएट्रिकल रन के दौरान यह फिल्म भारत में केवल ₹2.94 करोड़ नेट
(लगभग ₹3.15 करोड़ ग्रॉस) ही कमा सकी। ओवरसीज (विदेशों) को मिलाकर इसका कुल
वर्ल्डवाइड कलेक्शन केवल ₹3.96 करोड़ ग्रॉस के आसपास रहा।
भारी बजट और संजय
दत्त जैसे बड़े नाम के बावजूद, लागत का 15% हिस्सा भी न निकाल पाने के
कारण इसे बॉक्स ऑफिस पर एक बड़ी फ्लॉप घोषित किया गया।
फिल्म को समीक्षकों
और दर्शकों से मिले-जुले (Mixed) रिव्यू मिले थे. द टाइम्स ऑफ इंडिया और
कुछ समीक्षकों ने संजय दत्त और नमाशी चक्रवर्ती के बीच वैचारिक बहस और उनके अभिनय
की तारीफ की, और इसे इतिहास व विचारधारा पर एक साहसिक फिल्म बताया। वही हिंदुस्तान
टाइम्स और इंडिया टुडे जैसे कई बड़े मीडिया पोर्टल्स ने इसकी आलोचना करते हुए कहा
कि फिल्म एक गहरी राजनीतिक बहस बनने के बजाय उपदेशात्मक (Preachy) और शोर-शराबे से
भरपूर लगती है, जिसके कारण यह आम दर्शकों को जोड़ने में पूरी तरह असफल रही।
फिल्म 'आखिरी सवाल' वैचारिक रूप से
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के पक्ष (Pro-RSS) में झुकी हुई है और
इसे संघ के समर्थन में एक रक्षात्मक (Defensive)
फिल्म के रूप में
देखा जाता है। फिल्म के निर्माता निखिल नंदा ने खुद मीडिया साक्षात्कारों में
स्पष्ट किया है कि यह फिल्म संघ के प्रति उनके गुरु-दक्षिणा के रूप में है, जिसका मुख्य
उद्देश्य पिछले 100 वर्षों से RSS पर उठ रहे विवादित सवालों और भ्रांतियों
को दूर करना है.
फिल्म 'आखिरी सवाल' राष्ट्रीय
स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रति शंकाओं का समाधान करती है या नहीं, यह पूरी तरह से
दर्शक के अपने व्यक्तिगत नजरिए और वैचारिक झुकाव पर निर्भर करता है। फिल्म किसी
निष्पक्ष जांच की तरह काम नहीं करती है। इसके बजाय, यह दो अलग-अलग
दृष्टिकोणों को जन्म देती है: संघ के समर्थकों के नजरिए से (शंकाओं का समाधान) तथ्यों
का प्रस्तुतीकरण: फिल्म में प्रोफेसर (संजय दत्त) ऐतिहासिक संदर्भों और अदालती
फैसलों का उपयोग करते हैं। छवि सुधारने का प्रयास: महात्मा गांधी की हत्या के बाद
संघ पर लगे प्रतिबंधों के हटने पर दिए गए कानूनी तर्क छवि सुधारने का प्रयास हैं।
राष्ट्रवादी
दृष्टिकोण संघ के सामाजिक कार्यों और
राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका को मजबूती से उभारा गया है। जो लोग संघ की
विचारधारा के करीब हैं, उन्हें इन तर्कों से अपनी शंकाओं का
समाधान मिलता है। आलोचकों और निष्पक्ष दर्शकों के नजरिए से फिल्म में छात्र के
सवालों और प्रतिवादों को जानबूझकर कमजोर दिखाया गया है। यह एक निष्पक्ष
और स्वस्थ डिबेट के बजाय केवल एकतरफा उपदेश जैसी लगती है।
विरोधी या न्यूट्रल
दर्शकों के लिए फिल्म कोई नया ठोस या ऐतिहासिक प्रमाण प्रस्तुत नहीं करती है। नाटकीय
संवादों और कमजोर पटकथा के कारण यह फिल्म वैचारिक रूप से किसी को प्रभावित करने
में असफल रहती है।