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Friday, 14 August 2026

क्या बॉलीवुड की फिल्म #Vibe औऱ #LoveLottrry का #Daayra खींचेगी हॉलीवुड की #ResidentEvil

 


क्या बॉलीवुड की तीन फ़िल्मों दायरावाइब और लव लाटरी पर हॉलीवुड की इकलौती फिल्म रेजिडेंट ईविल  भारी पड़ेगी ? 





देखा जाए तो एकाधिक फ़िल्मों  की तुलना फिल्म इंडस्ट्री  या शैली के आधर पर की जा सकती है. हॉलीवुड की 'रेजिडेंट ईविल' (Resident Evil)  कोई इकलौती फिल्म नहीं बल्कि एक पूरी बड़ी फ्रेंचाइजी है, जिसमें कई फिल्में शामिल हैं। वहीं बॉलीवुड की 'दायरा' (Daayra), 'वाइब' (Vibe) और 'लव लॉटरी' (Love Lottery) बिल्कुल अलग जॉनर की फिल्में हैं. रेजिडेंट ईविल हॉरर एक्शन फिल्म  हैं, जबकि दायरा क्राइम ड्रामा,  वाइब कॉमेडी ड्रामा और लव लॉटरी सस्पेंस थ्रिलर शैली की फ़िल्में है. इसलिए शैली के आधर पर इनकी सीधी तुलना नहीं की जा सकती। 





रेजिडेंट ईविल, एक्शन, हॉरर और ज़ॉम्बी थ्रिलर पर आधारित हॉलीवुड फ्रेंचाइजी है, जो वीएफएक्स और ग्लोबल अपील के लिए जानी जाती है।






दायरा: मेघना गुलज़ार के निर्देशन में बनी एक क्राइम ड्रामा/थ्रिलर फिल्म है जिसमें करीना कपूर खान और पृथ्वीराज सुकुमारन मुख्य भूमिकाओं में हैं।






वाइब: कुणाल खेमू के निर्देशन में बनी कॉमेडी-ड्रामा फिल्म है। दो समान्य मित्र संयोगवश एक आतंकवादी से टकरा जाते हैं.  परिणामस्वरुप अपने देश को बचाने का दायित्व भी उनका बन जाता हूँ. 






लव लॉटरी: यह एक कोर्टरूम ड्रामा और मर्डर मिस्ट्री फिल्म है। फिल्म में अक्षय ओबेरॉय, हेली दारूवाला और कबीर दुहान सिंह के केंद्रीय भूमिकाएँ है.  एक कॉर्पोरेट प्रोफेशनल को अपनी पत्नी की हत्या के अपराध ने गिरफतार कर लिया जाता है.







रेजिडेंट ईविल' का एक्शन और वीएफएक्स का दायरा बहुत बड़ा है। अगर बड़े पैमाने के वीएफएक्स और एक्शन की बात हो, तो 'रेजिडेंट ईविल' इन भारतीय फिल्मों के कंटेंट-ड्रिवन और ड्रामा जॉनर से काफी आगे नजर आती है। कंटेंट और अभिनय स्तर पर 'दायरा' या 'लव लॉटरी' जैसी फिल्में थ्रिलर या गंभीर सामाजिक-कानूनी मुद्दों पर केंद्रित हैं, जिनका मुकाबला बॉक्स ऑफिस के एक्शन मानकों से नहीं बल्कि कहानी और अभिनय से होता है. 





नई 'रेजिडेंट ईविल' franchise फ़िल्मों के विपरीत  नए चेहरों और एक नई स्टार कास्ट के साथ बनाई गई है। सोनी पिक्चर्स और निर्देशक ज़ैक क्रेगर इस फ्रैंचाइज़ी का एक नया रीबूट लेकर आ रहे हैं.




इस फिल्म में पुरानी फिल्मों की मशहूर अभिनेत्री मिला जोवोविच या अन्य पुराने मुख्य किरदार नजर नहीं आएंगे। फिल्म की कहानी 'ब्रायन' नाम के एक मेडिकल कूरियर के इर्द-गिर्द घूमती है, जो रैकून सिटी में वायरस के प्रकोप के बीच फंस जाता है. इस रीबूट में हॉलीवुड के उभरते हुए और मशहूर चरित्र अभिनेताओं को मौका दिया गया है. ऑस्टिन अब्राम्स, 'ब्रायन' की मुख्य भूमिका निभा रहे हैं.पॉल वाल्टर हाउसर, एक वैज्ञानिक की भूमिका में हैं.ज़ैक चेरी और काली रीस भी महत्वपूर्ण किरदारों में नज़र आएंगे.






फिल्म पिछली सभी फिल्मों से पूरी तरह अलग है। इसे बड़े पैमाने की एक्शन फिल्म बनाने के बजाय वीडियो गेम की तरह डार्क, सस्पेंस और 'सर्वाइवल हॉररथीम पर बनाया गया है, ताकि दर्शकों को एकदम नया और डरावना अनुभव मिल सके।





यह फिल्म वीडियो गेम 'Resident Evil 2' (1998) के कालखंड के समानांतर चलती है, लेकिन इसे आज के आधुनिक युग में सेट किया गया है. 'रेजिडेंट ईविलभारत में इंग्लिश के साथ-साथ हिन्दी, तमिल और तेलुगु भाषाओं में भी रिलीज होगी। सोनी पिक्चर्स इंडिया ने पुष्टि की है कि इसे बड़े पैमाने पर भारतीय दर्शकों के लिए डब किया जा रहा है।

Wednesday, 28 May 2025

#L2EMPURAAN : महँगी दुकान के बेस्वाद पकवान

 


निर्माता एंटोनी पेरुम्बवूर, सुभास्करण अल्लीराजा और गोकुलम गोपालन तथा निर्देशक पृथ्वीराज सुकुमारन की चौकड़ी ने वामपंथी सोच वाले मुरली गोपी से वामपंथी सोच वाली कथा तो लिखवा ली।  निर्माताओं ने कथित रूप से १७५ करोड़ भी झोंक दिए। फिल्म की लोकेशन यूनाइटेड किंगडम, अमेरिका और यूनाइटेड अरब अमीरात भी ले गए।  कहने का तात्पर्य यह कि कैनवास बड़ा कर दिया गया।  किन्तु, महँगी दूकान में फीके पकवान बेच बैठे। 




फिल्म की सबसे बड़ी कमी है सशक्त कथानक। जब दिमाग में राजनीति घुस जाए, धार्मिक विद्वेष भर जाए तो सब कुछ लूसिफर का दूसरा हिस्सा बन जाता है। फिल्म में कोई कथानक नहीं है। यद्यपि निर्माताओं ने अपने वामपंथी सोच वाले निर्देशक और लेखक से हिन्दुओं को निशाना बनाने वाला गुजरात दंगों का घटनाक्रम ले लिया।  इस फिराक में उन्होंने केरल के हिन्दू सगठनों का भारी विरोध मोल ले लिया।  उपयुक्त होता यदि वह गुजरात दंगे के पीछे के गोधरा कांड को दिखाने की  हिम्मत भी करते।  किन्तु, यदि नीयत खराब हो तो एल २ का एमपुराण प्रभाव खो बैठता है।

 

 

फिल्म पहली रील से ही भटकती लगती है। फिल्म का प्रारम्भ अरब के दो गुटों में संघर्ष का चित्रण कराती है।  फिर तत्काल बिना उल्लेख किये गुजरात दंगों में एक मुस्लिम परिवार का हिन्दुओं द्वारा क़त्ल करना दिखा देती है।  जबकि इस दंगे में २५४ हिन्दू भी मारे गए थे।

 

 

बहरहाल, गोपी इस दृश्य के द्वारा एक मुस्लिम चरित्र के मन में बदले की भावना भर देते है।  रातों रात यह मुस्लिम चरित्र भागता हुआ केरल आ जाता है।  उसके बाद हिन्दू भी केरल में दिखाया जाता है।

 

 

इसके बाद कहानी भटकती हुई कभी अरब, कभी अमेरिका और कभी ब्रिटेन में भटकती रहती है।  कहानी में राजनीति, अपराध और नशीली दवाओं का जिक्र आ जाता है।  और अंत मुस्लिम चरित्र एक ईसाई लूसिफर की सहायता से हिन्दू को मार देता है।

 

 

 

इतनी पूर्वाग्रह से ग्रसित फिल्म बनाने वाले पृथ्वीराज सुकुमारन एक भी दृश्य ऐसा नहीं बना सके, जो लूसिफर के पहले भाग को पीछे छोड़ पाता। फिल्म का अधिकतर काम फिल्म में बारूद और बंदूकों का प्रयोग कर एक्शन पार्टी ने किया है।  मोहनलाल और टॉविनो थॉमस जैसे प्रतिभाशाली अभिनेता भी बारूद के धुवें में घिरे छुप जाते है।

 

 

अभिनय की बात की जाए तो पहले हिस्से के लूसिफर से अधिक टॉविनो के जतिन रामदास के सामने फीके दिखाई देते है।  लेखक ने यदि जतिन के चरित्र को थोड़ा ठोस बनाया होता तो टॉविनो छा जाते।  निर्देशक पृथ्वीराज सुकुमारन का ज़ायेद मसूद अप्रभावी है।  प्रभास की फिल्म सालार पार्ट १ में सुकुमारन ने उनके मित्र वरदराज की भूमिका की थी।  लूसिफर २ में मसूद के बचपन की भूमिका करने वाले अभिनेता कार्तिकेय देव सालार १ में भी उनके बचपन की भूमिका कर रहे थे।दोनों ने ही प्रभावशाली अभिनय किया था।  किन्तु, लूसिफर २ में यह दोनों फीके रहे।

 

 

फिल्म में, जतिन की बहन प्रियदर्शिनी की भूमिका में अभिनेत्री मंजू वर्रियर संयत अभिनय कर प्रभावित करती है। खल चरित्र बलराज करने वाले बॉलीवुड अभिनेता अभिमन्यु सिंह बिलकुल प्रभावित नहीं कर पाते। बाकी कलाकारों के बारे में क्या ही कहा जाये!

 

 

यह फिल्म जिओ हॉटस्टार पर हिंदी में देखी जा सकती है।  मोहनलाल और टॉविनो थॉमस के प्रशंसक दर्शक इस फिल्म को यहाँ देख सकते है।