Tuesday, 28 October 2025

फुल-ऑन कॉमेडी का धमाका #Masti4 का एनसेंबल पोस्टर

 



 

बॉलीवुड की कल्ट कॉमेडी फ्रेंचाइज़ी 'मस्ती' की वापसी को लेकर दर्शकों में उत्साह चरम पर है! विशेष रूप से जैसे ही 28 अक्टूबर यानी कल रिलीज़ होने जा रही 'मस्ती 4' की ट्रेलर रिलीज़ की डेट सामने आई है, दर्शक और ज़्यादा उत्साहित हो गए हैं और इसी उत्साह को देखते हुए वेवबाउंड प्रोडक्शन ने कलरफुल और एनर्जी से भरपूर एनसेंबल पोस्टर रिलीज़ कर उनके उत्साह को और भी हाई कर दिया है। यह पोस्टर फिल्म के मस्त, मज़ेदार और ओवर-द-टॉप अंदाज़ को पूरी तरह दर्शाता है।

 




मिलाप मिलन ज़वेरी द्वारा लिखित और निर्देशित 'मस्ती 4' में वापसी कर रही है, रितेश देशमुख, विवेक ओबेरॉय और आफताब शिवदासानी की वही आइकॉनिक तिकड़ी, जो दोबारा अमर, मीत और प्रेम के अपने पॉपुलर किरदारों में नज़र आएंगे।

 




गौरतलब है कि इस नए और जबरदस्त एनर्जी से भरपूर पोस्टर में रितेश देशमुख, विवेक ओबेरॉय और आफताब शिवदासानी के साथ फिल्म की ग्लैमरस लीडिंग लेडीज़ श्रेया शर्मा, रुही सिंह और एलनाज़ नोरोज़ी भी दिखाई दे रही हैं। यही नहीं, हंसी के इस बवंडर में तुषार कपूर, शाद रंधावा और निशांत मलकानी भी शामिल हैं, जो फिल्म को मस्ती, अफरा-तफरी और शरारती मिज़ाज के एक मज़ेदार रोलरकोस्टर में बदलने का वादा कर रहे हैं।

 




पोस्टर की टैगलाइन  “भारत की नंबर 1 सबसे शरारती फ्रेंचाइजी एक बार फिर लौट आई है" इस बात की तरफ साफ इशारा करती है कि यह फिल्म दर्शकों को अनलिमिटेड हंसी, पागलपंती और फुलटू एंटरटेनमेंट का डोज़ देने वाली है।

 





21 नवंबर को भारत के सभी सिनेमाघरों में रिलीज़ होने जा रही वेवबाउंड प्रोडक्शन और ज़ी स्टूडियोज़ द्वारा प्रस्तुत यह फिल्म, मारुती इंटरनेशनल और बालाजी टेलीफिल्म्स के सहयोग से बनी है। इसे ए. झुनझुनवाला और शिखा करण अहलूवालिया (वेवबाउंड प्रोडक्शन) के साथ इंद्र कुमार और अशोक ठाकेरिया (मारुती इंटरनेशनल), शोभा कपूर और एकता कपूर (बालाजी मोशन पिक्चर्स), तथा उमेश बंसल ने प्रोड्यूस किया है।

 





इन सभी को देखते हुए यह बात आसानी से कही जा सकती है कि मिलाप मिलन ज़वेरी के सिग्नेचर ह्यूमर, दर्शकों की पसंदीदा तिकड़ी की वापसी और नए स्टारकास्ट के धमाकेदार जुड़ाव के साथ, 'मस्ती 4' अब तक की सबसे मज़ेदार और एंटरटेनिंग बॉलीवुड कमबैक साबित होगी!

द ताज स्टोरी में कैलाश खेर का धम धड़ाक गीत



 

तुषार अमरीश गोयल द्वारा लिखित और निर्देशित तथा स्वर्णिम ग्लोबल सर्विसेज प्रा. लि. और सीए सुरेश झा द्वारा प्रस्तुत ‘द ताज स्टोरी’, हर नए अपडेट के साथ दर्शकों के बीच ज़बरदस्त चर्चा का विषय बनती जा रही है। दमदार, विस्फोटक और सोचने पर मजबूर कर देने वाले ट्रेलर के बाद अब मेकर्स ने फिल्म के शक्तिशाली डायलॉग प्रोमो के बाद इस चर्चित माहौल को एक कदम और आगे ले जाते हुए फिल्म का पहला गीत ‘धम धड़क’ जारी कर दिया है, जो कैलाश खेर की शक्तिशाली आवाज़ में फिल्म की कहानी से गहराई से जुड़ता है।

 

यह गीत फिल्म की भावनात्मक और दार्शनिक आत्मा को खूबसूरती से दर्शाता है। इसकी धुन जहां ऊर्जा से भरपूर है, वहीं इसके बोल आध्यात्मिक गहराई से ओतप्रोत हैं। गीत के विज़ुअल्स दर्शकों को फिल्म की कथा के केंद्र में ले जाते हैं। दिव्य नृत्य के साथ फिल्माए गए इस गीत में पवित्रता, समर्पण और सत्य बनाम धारणा के शाश्वत संघर्ष को बखूबी दर्शाया गया है। गौरतलब है कि राहुल देव नाथ द्वारा संगीतबद्ध इस गीत के बोल विक्रम चौधरी ने लिखे हैं। यह गीत कहानी में ऐसे पिरोया गया है कि यह फिल्म की मूल भावना को और मजबूत बनाता है।

 

परेश रावल के साथ जाकिर हुसैन, अमृता खानविलकर, स्नेहा वाघ और नामित दास जैसे दमदार कलाकारों से सजी 'द ताज स्टोरी'  सिर्फ एक पीरियड या ऐतिहासिक फिल्म नहीं, बल्कि एक सिनेमा आधारित बहस है, जो सामाजिक टिप्पणी के साथ इतिहास की पुनः समीक्षा प्रस्तुत करती है।

संगीत रोहित शर्मा और राहुल देव नाथ के संगीत निर्देशन में बनी फिल्म 'द ताज स्टोरी' कथानक की तीव्रता के साथ भावनात्मक प्रभाव को भी गहरा करता है।  31 अक्टूबर 2025 को देशभर के सिनेमाघरों में भव्य रूप से रिलीज़ हो रही ‘द ताज स्टोरी’ दर्शकों को सोचने, सवाल पूछने और शायद इतिहास व आज़ादी की परिभाषा को नए सिरे से समझने के लिए प्रेरित करेगी।

रंगीला की रि-रिलीज २८ नवंबर को



कुछ समय पहले ही 90 के दशक की मशहूर रोमांटिक म्यूज़िकल फिल्म ‘रंगीला’ की शानदार 30 साल पूरे होने के मौके पर री रिलीज की खबर आई थी अब इस फिल्म की सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने की तारीख तय हो गई हैं आमिर खान, उर्मिला मातोंडकर और जैकी श्रॉफ अभिनीत यह सदाबहार फिल्म 28 नवंबर को पूरे देश के सिनेमाघरों में फिर से 4K रिस्टोर्ड वर्ज़न में रिलीज की जाएगी।

 




इस नए रिस्टोर्ड वर्ज़न में बेहतरीन रिज़ॉल्यूशन, ज्यादा शार्पनेस, और अद्भुत इमेज क्वालिटी के साथ इमर्सिव साउंड का अनुभव मिलेगा। अल्ट्रा मीडिया द्वारा उनके विशेष “अल्ट्रा रिवाइंड ” इनिशिएटिव के तहत फ़िल्म को पुनः रिस्टोर कर सिनेमाघरों में रिलीज़ किया जा रहा है।

 




राम गोपाल वर्मा द्वारा निर्देशित ‘रंगीला’ अपने ताज़गी भरी कहानी, ए.आर. रहमान के यादगार संगीत और शहरी सपनों व महत्वाकांक्षाओं के स्टाइलिश फिल्मांकन  के लिए आज भी एक मील का पत्थर मानी जाती है। संगीत, ग्लैमर और भावनाओं के इस संगम ने 1990 के दशक में बॉलीवुड के एक नए युग की शुरुआत की थी।

 





फ़िल्म के निर्देशक राम गोपाल वर्मा ने कहा “रंगीला ने उस दौर की आकांक्षाओं को दिखाया आम लोग भी बड़े सपने देख सकते हैं। इसकी सफलता ने साबित किया कि नियम तोड़ने वाला सिनेमा ही अक्सर सबसे यादगार बन जाता है।”

 





अल्ट्रा मीडिया  के सीईओ सुशीलकुमार अग्रवाल ने कहा “‘रंगीला’ बॉलीवुड के गोल्डन इरा  की यादें ताज़ा कर देती है। अल्ट्रा रिवाइंड  के तहत हम इस प्रिय क्लासिक को 4K फॉर्मेट में आधुनिक दर्शकों तक पहुंचा रहे हैं, ताकि इसकी जादुई चमक आने वाले सालों तक बरकरार रहे।”

 





शानदार  विज़ुअल्स, सुपरहिट संगीत  के साथ, ‘रंगीला’ एक बार फिर बड़े पर्दे पर वही जादू बिखेरने आ रही है — 28 नवंबर 2025 को, बिल्कुल तीन दशक बाद जब इसने पहली बार पूरे देश का दिल जीता था।

 





अल्ट्रा रिवाइंड  — अल्ट्रा मीडिया ग्रुप की नई पहल है, जिसके अंतर्गत ‘रंगीला’ का थियेट्रिकल री-रिलीज़ दूसरा प्रोजेक्ट है। इससे पहले इस वर्ष 8 जुलाई को, अभिनेता व फिल्मकार गुरु दत्त की शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में अल्ट्रा  ने उनकी क्लासिक फिल्मों — प्यासा, साहिब बीवी और गुलाम, कागज़ के फूल, आर-पार, चौदहवीं का चाँद, मिस्टर एंड मिसेज 55 और बाज़ — को 4K रिस्टोर्ड फॉर्मेट में सिनेमाघरों में प्रदर्शित किया था।

 





आगे भी, अल्ट्रा रिवाइंड के माध्यम से विभिन्न भाषाओं की प्रसिद्ध फिल्मों को, रिस्टोर्ड और ओरिजिनल दोनों फॉर्मैट्स में, भारत के सिनेमाघरों में फिर से रिलीज किया जाएगा।

वरुण धवन की रणभूमि बन कर भी बंद कर दी गई हृथिक रोशन, सलमान खान की शुद्धि !

बंद कर दी गई शुद्धि 



निर्माता- निर्देशक करण जोहर ने, मार्च २०१३ में फिल्म शुद्धि की घोषणा की थी।  उनकी इच्छा, २६ जनवरी २०१२ को प्रदर्शित सुपरहिट फिल्म अग्निपथ की सफलता का लाभ उठाना था। वह इस फिल्म को दिवाली २०१३ में  प्रदर्शित करना चाहते थे।  शुद्धि, उनकी दिवाली में प्रदर्शित होने वाली, कुछ कुछ होता है के बाद दूसरी फिल्म होती। 






अग्निपथ की सफलता को ध्यान में रख कर, उन्होंने शुद्धि में अग्निपथ के नायक  हृथिक रोशन को लेने का विचार किया था।  स्पष्ट रूप से फिल्म के निर्देशक अग्निपथ के करण मल्होत्रा ही होते।  किन्तु, फिल्म में हृथिक रोशन की नायिका के रूप में प्रियंका चोपड़ा को नहीं बल्कि करीना कपूर को लिया गया था।  प्रियंका चोपड़ा के साथ करण जोहर के सम्बन्ध शाहरुख़ खान के साथ प्रियंका चोपड़ा के कथित रोमांस को लेकर खराब हो गए थे। करण जोहर, शाहरुख़ खान और उनकी पत्नी गौरी खान के भी अच्छे  मित्र है।  वह नहीं चाहते थे कि गौरी खान का घर टूटे। 





इस विवाद और शुद्धि को लेकर कोई विशेष  प्रगति न होने के कारण हृथिक रोशन ने शुद्धि को  छोड़ दिया।  इसके बाद, फिल्म शुद्धि में किसी खान अभिनेता अर्थात शाहरुख़ खान या सलमान खान को लिए जाने की चर्चा हुई।  यह चर्चा, सलमान खान के नाम पर आ कर रुकी।  ऐसा प्रतीत होता था कि करण जोहर को अपना नायक मिल गया था। अब यह बात  दूसरी है कि शुद्धि की चर्चा  पुनः रुक गई। 





मई २०१५ में, करण जौहर ने यह घोषणा की कि उनकी २०१२ की हिट फिल्म स्टूडेंट ऑफ़ द ईयर की जोड़ी वरुण धवन और आलिया भट्ट  शुद्धि प्रोजेक्ट का भाग होंगे।  यद्यपि, उस समय भी वरुण  धवन ने  यह स्पष्ट किया था कि शुद्धि शीघ्र निर्मित होने  नहीं जा रही। उस समय फिल्म को रोक दिए जाने के  समाचार भी आये। किन्तु,तब फिल्म के निर्देशक चुने गए करण मल्होत्रा ने ट्विटर पर बताया कि शुद्धि को रोका नहीं गया है। फिल्म सही समय पर बन कर प्रदर्शित होगी।





  

करण मल्होत्रा ​​के निर्देशन में बनाई जाने वाली फिल्म शुद्धि के भाग्य में उतार चढ़ाव ही लिखे थे। शुद्धि  परियोजना से, ऋतिक रोशन और करीना कपूर जुड़े। फिर संजय दत्त भी जुड़े।  किन्तु,  शीघ्र ही इन अभिनेताओं ने फिल्म भिन्न भिन्न कारणों से छोड़ दी। तब सलमान खान इस प्रोजेक्ट से कुछ समय के लिए जुड़े और शीघ्र ही अलग भी हो गए। इस बीच, शुद्धि के करण मल्होत्रा के स्थान पर करण जोहर के निर्देशित करने का समाचार भी आया। 






अंततः, सलमान खान के शुद्धि से निकल जाने के बाद, करण जोहर ने शुध्दि को नए नाम और  नए निर्देशक के साथ बनाए जाने की  घोषणा की। अब शुद्धि को, वरुण धवन और आलिया भट्ट के साथ, नए शीर्षक रणभूमि के साथ बनाया जाना था।  फिल्म का निर्देशन दुल्हनिया निर्देशक शशांक खेतान  करने वाले थे।  लगा कि अब 'शुद्धि' 'रणभूमि' बन कर बॉक्स ऑफिस के मैदान में उतरेगी।  किन्तु, अब कुछ अफवाहों के बाद रणभूमि भी खेत रही। 






शुद्धि चाहे रणभूमि बन गई हो। किन्तु, उसके योद्धा कभी भी तय नहीं हो पाए। फिल्म समाचारों  में प्रमुख स्थान पाती और अगले दिन ही बासी पड़ जाती। २०२३ में इस बंद कर दिए गए  प्रोजेक्ट को लेकर यह समाचार आया कि रणभूमि नहीं, शुद्धि बनाई जाएगी। किन्तु, नायक कोई हृथिक रोशन, सलमान खान या  वरुण धवन नहीं होंगे। बल्कि, उरी अभिनेता विक्की कौशल होंगे। 






आपको कोई नई खबर !


Monday, 27 October 2025

हॉलीवुड फिल्म घोस्ट की रीमेक थी सफल माँ और असफल प्यार का साया !

हॉलीवुड फिल्म घोस्ट की रीमेक माँ और प्यार का साया 
 

वर्ष १९९१ में, दो रीमेक फिल्मे लगातार दो हफ़्तों में प्रदर्शित हुई थी।  यह फिल्मे हॉलीवुड की १३ जुलाई १९९० को प्रदर्शित पैट्रिक स्वेज़ और डेमी मूर अभिनीत सुपरनेचुरल रोमांस फिल्म घोस्ट के कथानक पर आधारित फ़िल्में थी।  घोस्ट, पति की ह्त्या हो जाने के बाद, पत्नी को बचाने के लिए पति की आत्मा के जतन की रोचक कथा थी। 





इसी कथानक पर १९९१ में दो फ़िल्में बॉलीवुड द्बवारा भी बनाई गई थी। निर्माता बी सुभाष ने, घोस्ट की नक़ल में फिल्म प्यार का साया का निर्माण किया था। इस फिल्म के निर्देशक विनोद के वर्मा थे। प्यार का साया, घोस्ट की कार्बन कॉपी थी। ठीक घोस्ट के कथानक की तरह प्यार का साया का भी पति राहुल रॉय अपनी  हत्या के बाद , पत्नी शीबा को बचाने के लिए आत्मा बन कर उसके चारो ओर घूमता रहता है।  इस फिल्म का प्रत्येक फ्रेम घोस्ट की नक़ल पर था।  यह फिल्म ६ दिसंबर १९९१ को प्रदर्शित हुई थी। 






वही, निर्माता अनिल शर्मा ने होशियारी से काम लिया था। उन्होंने अपनी फिल्म में घोस्ट की नक़ल तो की। किन्तु, कथानक को बड़ी चतुराई से पति के स्थान पर माँ का बना दिया। लेखक श्याम गोयल ने माँ के कथानक में बच्चे को जन्म देने के बाद माँ की हत्या हो जाती है।  उसके बच्चे को भी दुश्मनों से संकट है। इसलिए माँ आत्मा बन कर अपने बेटे को दुश्मनों से बचाती है। इस फिल्म में जयाप्रदा ने माँ की भूमिका की थी। फिल्म में पति की भूमिका में जीतेन्द्र थे। यह फिल्म १३ दिसंबर १९९१ को प्रदर्शित हुई थी। 






माँ को बड़ी चतुराई से प्रस्तुत किया गया था।  बच्चे को बचाने के लिए एक कुत्ते का उपयोग किया गया था।  प्रेतात्मा की सहायता एक मंदिर का पुजारी और बाबा करते है।  इस फिल्म में अनु मलिक ने कर्णप्रिय धुनें बनाई थी। आईने के सौ टुकड़े, बरसात में जब आएगा सावन का महीना चंदा ने दी चाँदनी, आदि गीत बहुत लोकप्रिय हुए थे। 





जहाँ तक अभिनय की बात है प्यार का साया के राहुल रॉय और शीबा फिल्म की कमजोर कड़ी थे। जहाँ हॉलीवुड फिल्म घोस्ट में पति की आत्मा की तड़प देखने लायक थी, वही प्यार का साया में सब कुछ कमजोर था। न राहुल रॉय को अभिनय आता था, न शीबा में प्रेमिका के तत्व थे।  वहीँ, फिल्म माँ में माँ की भूमिका में जयाप्रदा ने दर्शको के आंसू बहा दिए थे।  पूरी फिल्म उनके अभिनय से बंधी हुई  मार्मिक थी।  दर्शक अब क्या होगा कि उलझन में फंसा फिल्म देखता रहता था।  





प्यार का साया, उस समय बनाई गई तमाम नक़ल फिल्मों की श्रंखला में थी। फिल्म के निर्माता बी सुभाष  ने इस फिल्म को बड़ी हड़बड़ी में बनाया था। क्योंकि, उन्हें ज्ञात हो गया था कि अनिल शर्मा की माँ भी घोस्ट से प्रेरित फिल्म थी वह चाहते थे कि उनकी फिल्म माँ से पहले प्रदर्शित हो जाए।  इसी जल्दी में प्यार का साया विवादों में फंसने लगी। फिल्म की शूटिंग के लिए राहुल रॉय ने तारीखे देना बंद कर दिया था। उनकी शिकायत थी कि बी सुभाष फिल्म के शूट हुए ७० प्रतिशत भाग को रीशूट कर रहे थे। इसी हड़बड़ी में उन्होंने फिल्म में राहुल के संवाद डब करवाए थे।





फिल्म प्यार का साया में अमृता सिंह ने एक भविष्यवक्ता की भूमिका की थी। इस भूमिका में उन्हें हूपी गोल्डबर्ग के गेटअप दिया गया था। वह को भविष्यवक्ता नहीं जोकर जैसी लग रही थी। उनका चरित्र भी फिल्म को कमजोर कर रहा था।






जहाँ, घोस्ट की रे की रीमेक प्यार का साया फ्लॉप हुई थी। वही दूसरी रीमेक माँ अपने कथानक के भारतीयकरण के कारण बॉक्स ऑफिस पर सफल हुई थी। जयाप्रदा ने भी फिल्म को चुनने में समझदारी दिखाई थी। वह, निर्माता अनिल शर्मा की दो फिल्मों तहलका और माँ में अभिनय कर रही थी। पारिश्रमिक  के विवाद में, उन्होंने अनिल शर्मा की केवल एक फिल्म करने का निर्णय लिया था। यह फिल्म माँ थी।




  

माँ शीर्षक से निर्मित कुछ अन्य फिल्मे भी  उल्लेखनीय है। जयाप्रदा की फिल्म से १६ साल पहले धर्मेंद्र, हेमा मालिनी और निरुपा रॉय अभिनीत फिल्म माँ प्रदर्शित हुई थी।  इस फिल्म का कथानक सर्कस के लिए जानवर पकड़ने वाले धर्मेंद्र पर केंद्रित था। धर्मेंद्र अपनी माँ के मना करने के बाद भी हाथी और शेर के बच्चो को पकड़ कर सर्कस को बेच देते है। अपनी माँ की मृत्यु के बाद ही धर्मेंद्र का ह्रदय परिवर्तन होता है। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल हुई थी। बाद में इसका तमिल रीमेक रजनीकांत के साथ बनाया गया। 






निर्देशक विशाल फुरिआ की काजोल, रोनित रॉय, इंद्रनील वर्मा अभिनीत फिल्म माँ २७ जून २०२५ को प्रदर्शित हुई थी।  इस फिल्म की कहानी पति की मृत्यु के बाद, पति के पैतृक भवन को बेचने के लिए गई माँ को अपनी बेटी को बचाने के लिए एक सुपरनैचरल शक्ति से संघर्ष करना पड़ता है। पैंसठ करोड़ के बजट से बनी यह फिल्म कठिनाई से ५२ करोड़ का ग्रॉस कर सकी थी। 

Sunday, 26 October 2025

#Netflix पर सुपरनैचुरल थ्रिलर #Baramulla



नेटफ्लिक्स पर एक नई हिंदी सुपरनैचुरल थ्रिलर बारामूला प्रसारित होने जा रही है। इस फिल्म का निर्देशन आदित्य सुहास जम्भाले ने किया है।  फिल्म में मानव कौल कश्मीर के बारामूला शहर में भयावह घटनाओं के बीच बच्चों के अपहरण की जाँच करने वाले एक पुलिस अधिकारी की भूमिका निभा रहे हैं। इस फिल्म  का प्रीमियर नेटफ्लिक्स इंडिया पर ७ नवंबर २०२५ को होगा।





इस फिल्म की टैगलाइन—उस शहर में आपका स्वागत है, जहाँ सच्चाई एक मिथक है और मिथकों में सच्चाई होती है - इस फिल्म के रहस्य और लोककथाओं के मिश्रण को प्रतिध्वनित करती है। इस फिल्म के प्रचार के साथ जोड़े गए पोस्टर में तूफानी पहाड़, एक प्रेतवाधित आँख की आकृति, और वातावरण में भय पैदा करने वाला एक तनावपूर्ण सैन्य आकृति दिखाई गई है। इससे यह फिल्म पर्याप्त उत्सुकतापूर्ण और रहस्यपूर्ण लगने लगी है। 





अनुमान लगाया जा रहा है कि बारामुल्ला भी नेटफ्लिक्स पर फिल्म भूल भुलैया ३ को जैसी सफलता के बाद भारतीय हॉरर स्ट्रीमिंग सामग्री में बढ़ती रुचि इंगित करती है। इस दृष्टि से अनुमान है कि बारामुल्ला को नेटफ्लिक्स इंडिया पर वर्ल्डवाइड एक करोड़ से डेढ़ करोड़ तक दर्शकों द्वारा देखा जा सकता है।





सुपरनैचुरल ड्रामा-मिस्ट्री सीरीज़ बारामूला की कहानी डीएसपी रिदवान सैय्यद (मानव कौल) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो कश्मीर के बर्फ से ढके बारामूला शहर में बच्चों के रहस्यमय ढंग से गायब होने की जाँच करने वाला पुलिस अधिकारी है। जैसे ही रिदवान और उसका परिवार शहर के एक खंडहर घर में रहने आता है, वह अपने अतीत के बोझ से जूझता है और साथ ही उन परेशान करने वाली सच्चाइयों को उजागर करता है जो वास्तविकता को अलौकिकता से जोड़ती हैं।






कहानी कश्मीर घाटी की बेहद खूबसूरत लेकिन अशांत पृष्ठभूमि में शुरू होती है, जहाँ अफवाहें, किंवदंतियाँ और शहर की नाज़ुक शांति इन भयानक घटनाओं से हिल जाती है। यह कहानी व्यक्तिगत हिसाब-किताब, पारिवारिक तनाव और वास्तविक व रहस्यमय के टकराव की एक शैली-मिश्रित यात्रा कराने वाली प्रतीत होती है, जिसमें कश्मीर खुद इस खुलते रहस्य में एक जीवंत, साँस लेने वाले पात्र की तरह काम करता है।





विगत कुछ वर्षों में बारामुल्ला से मिलते-जुलते कथानक वाली भारतीय थ्रिलर फ़िल्में  भिन्न ओवर द टॉप प्लेटफॉर्मों पर स्ट्रीम होती रही है। अमेज़न प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम  परी का कथानक अनुष्का शर्मा अभिनीत रुखसाना पर केंद्रित हैं, जो इस्लामी लोककथाओं और राक्षसी पंथों से जुड़ी एक अंधकारमय, अलौकिक उत्पत्ति वाली महिला है। उसे बचाने वाला एक आदमी जल्द ही यह महसूस करता है कि वह एक भयावह भविष्यवाणी का हिस्सा है, जिससे बुराई के साथ एक खौफनाक टकराव होता है।





 

इसी प्लेटफार्म से प्रसारित फिल्म तुम्बाड स्वतंत्रता-पूर्व भारत पर आधारित एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जो एक शापित गाँव में दुष्ट शक्ति द्वारा संरक्षित एक पौराणिक खजाने के प्रति आसक्त है। लालच और अलौकिक प्रतिशोध की यह कहानी देखने में अद्भुत और विचलित करने वाली है। 






एनिमेटेड थ्रिलर छोटा भीम और दमन का अभिशाप में, छोटा भीम एक तीन सौ साल पुराने जादूगर, दमन से लड़ता है, जो तबाही मचाने के लिए लौटता है। रोमांच और अलौकिक दांव का यह मिश्रण  नेटफ्लिक्स के सभी उम्र के लोगों को पसंद आ रहा है। 






जी ५ पर कबाड़ द कॉइन का कथानक एक मनोवैज्ञानिक थ्रिलर है, जिसमें एक आदमी को एक प्राचीन सिक्का मिलता है जो काली शक्तियों को मुक्त करता है, जिससे हत्याओं की एक श्रृंखला शुरू होती है और इसकी उत्पत्ति का पता लगाने की होड़ मच जाती है। धीमी गति से चलने वाला सस्पेंस तनाव पैदा करता है।  






सोनी लिव से प्रसारित रात बाकी है का  कथानक में एक रात में एक हत्या का रहस्य उजागर होता है जब एक वकील एक राजनेता के परिवार से जुड़ी हत्या की जाँच करता है, जिसमें अलौकिक गतिविधि के संकेत रहस्य को और भी गहरा करते हैं।  






जिओ सिनेमा से प्रसारित मुंज्या का कथानक मराठी लोककथाओं पर आधारित एक युवक की  हॉरर-कॉमेडी है, जिसका सामना एक शरारती आत्मा, मुंज्या, से होता है, जो एक पारिवारिक श्राप से बंधी है। यह डर और हास्य का संतुलन बनाए रखती है।  





उपरोक्त सभी थ्रिलर फ़िल्में बारामुल्ला की तरह भारत की विविध कथा-शैली को दर्शाने वाली हैं, जिसमें अलौकिक तत्वों को क्षेत्रीय मिथकों और रहस्य के साथ मिलाया गया है।   




मानव कौल की मुख्य भूमिका के साथ भाषा सुंबली की गुलनार भूमिका वाली बारामुल्ला का निर्देशन और लेखन आदित्य सुहास जम्भाले ने किया है, जिन्हें आर्टिकल ३७०  के लिए जाना जाता है। इसकी कहानी आदित्य धर ने लिखी है और सह-निर्माता बी६२ स्टूडियो के लोकेश धर हैं। यह फिल्म जियो स्टूडियो के सहयोग से निर्मित की गई है, जो नेटफ्लिक्स और बी६२ स्टूडियो के बीच दूसरी साझेदारी है।

#AneesBazmi की फिल्म 'नाम' डुबो गई #AjayDevgn का नाम!



रोहित शेट्टी की फिल्म सिंघम अगेन के प्रदर्शित होने के पश्चात्, नायक अभिनेता अजय देवगन की फिल्म नाम प्रदर्शित हुई थी। जहाँ, सिंघम अगेन ने, अजय देवगन के प्रशंसक दर्शकों में हलचल मचा दी थी, वहीं फिल्म नाम का कोई नामलेवा तक नहीं था। यहाँ तक कि अजय देवगन ने भी इस फिल्म का कोई प्रचार नहीं किया।  फिल्म के निर्देशक अनीस बज़्मी ने भी फिल्म को अपना कहने से मना कर दिया।




  

 नाम की विडम्बना ही थी कि  दीवानगी, प्यार तो होना ही था और हलचल के बाद, अभिनेता अजय देवगन  और निर्देशक अनीस बज्मी की जोड़ी की चौथी फिल्म नाम २२ नवंबर २०२४ को प्रदर्शित हुई और पहले शो से ही धड़ाम हो गई । इस फिल्म का निर्माण २० करोड़ के बजट में हुआ था। किन्तु, अजय देवगन के साथ समीरा रेड्डी, भूमिका चावला, श्रिया सरन, राहुल देव, यशपाल शर्मा, मुकेश तिवारी, राजपाल यादव, विजय राज, विद्या मलवाडे, माहि गिल, आदि की भूमिकाओं वाली यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर मात्र एक करोड़ दो लाख का ग्रॉस ही कर पाई।





अजय देवगन के प्रशंसकों को भी चिंता होगी कि कैसे नाम अजय देवगन का नाम डुबो गई! वास्तविकता क्या थी, इसे  इसी तथ्य से समझा जा सकता है कि अजय देवगन ने तक इस फिल्म का प्रचार बिलकुल नहीं किया। फिल्म के निर्देशक अनीस बज़्मी ने भी खुद को  फिल्म से दूर कर लिया। उन्होंने उस समय दिए गए साक्षात्कारों में स्पष्ट किया कि यदि निर्माता इस पुरानी फिल्म को प्रदर्शित ही करना चाहते हैं तो मैं क्या कर सकता हूँ। मैं तो इस फिल्म को भूल चुका है। 





अजय देवगन द्वारा नाम का बिलकुल प्रचार न किये जाने और अनीस बज़्मी द्वारा भूल जाने का कारण क्या है ? यदि आप में से किसी ने यह फिल्म देखी होगी तो फिल्म का नरेशन अभिनेता राजकुमार राव ने किया था। इससे फिल्म पुरानी जैसी नहीं लगती थी। स्वयं निर्माता भी इस फिल्म को केवल दस साल पहले बनी फिल्म बता रहे थे। जबकि, यह सभी बाते बिलकुल झूठी थी, दर्शको को बहकाने का प्रयास थी।





फिल्म को हुमायूँ मिर्ज़ा ने लिखा था। हुमायूँ को १९६९ में प्रदर्शित सुपर फ्लॉप फिल्म दिल ए बेताब के लिया जाना जाता है।  वही नाम के कथाकार, पटकथाकार और संवाद लेखक थे।  इस फिल्म की  नायिका समीरा रेड्डी को तो अब दर्शक भूल चुके हैं। भूमिका चावला भी हिंदी फिल्मों से दूर हो चुकी है।  विद्या मलवाडे और माहि गिल अब हिंदी फिल्मों में नहीं दिखाई देती।  इससे आप इस फिल्म के पुरानेपन का अनुमान लगा सकते है।





वास्तविकता भी यही है।  नाम द मिसिंग आइडेंटिटी का निर्माण २००३ में प्रारम्भ हुआ था।  प्रारम्भ में इस फिल्म का शीर्षक बेनाम रखा गया था।  २००४ से इस फिल्म की नियमित शूटिंग प्रारम्भ हो गई थी। इस समय अजय देवगन अपने फिल्म जीवन के शिखर पर थे।  इस फिल्म को २००५ में प्रदर्शित किया जाना था। किन्तु,  इस फिल्म की रिलीज़ २००५ के बाद २००६, २००८ और २०१४ में टलती रही।  अंततः  यह फिल्म बीस साल बाद २०२४ में प्रदर्शित हो सकी। 





स्पष्ट है कि दो दशक बाद फिल्मों और फिल्म दर्शकों की पसंद में काफी परिवर्तन हो चुका था।  हिंदी दर्शक काफी  चतुर है। वह फिल्म के पोस्ट देख कर ही काफी कुछ भांप लेता है।  ट्रेलर या टीज़र तो फिल्म की पूरी पोल खोल देते है।  नाम के साथ भी ऐसा ही हुआ। यह फिल्म बेनाम से नाम तो बन गई, किन्तु, दर्शकों में नाम नहीं बना सकी।





नाम, अजय देवगन और निर्देशक रोहित शेट्टी की एक्शन फिल्म सिंघम अगेन और निर्देशक अनीस बज़्मी की हॉरर कॉमेडी फिल्म भूल भुलैया ३ के २१ दिनों बाद प्रदर्शित हुई थी। सिंघम अगेन ने ३८९ करोड़ का ग्रॉस किया था और भूल भुलैया ३ का ग्रॉस ४२४ करोड़ हुआ था।  किन्तु, नाम एक करोड़ चार लाख के ग्रॉस में सिमट कर, अजय देवगन का नाम डुबो गई।  

#RashmikaMandanna की #Girlfriend ७ नवम्बर से



थम्मा में पिशाचों की अंधेरी, खून से लथपथ दुनिया में उलझने   के बाद, रश्मिका मंदाना एक बिल्कुल अलग दुनिया में कदम रखने जा रही हैं। यह एक ऐसी दुनिया जहाँ प्यार, उलझन और भावनात्मक उथल-पुथल का बोलबाला है।




रश्मिका मन्दाना की ७ नवंबर २०२५ से प्रदर्शित होने जा रही फिल्म द गर्लफ्रेंड का विगत दिनों प्रदर्शित ट्रेलर एक उलझी हुई प्रेम कहानी की झलक देता है जहाँ रश्मिका का किरदार एक परेशान करने वाले सवाल से जूझता है – क्या वह सचमुच अपने प्रेमी से प्यार करती है, या सिर्फ़ उसके बारे में सोचती है?




शनिवार को, फिल्म द गर्लफ्रेंड के निर्माताओं ने फिल्म की रिलीज़ की तारीख की घोषणा के साथ ही इसका ट्रेलर भी जारी किया। इस ट्रेलर ने लोगों को फिल्म के ज़बरदस्त भावनात्मक कंटेंट का एहसास कराया। वीडियो में, रश्मिका का किरदार अपने प्रेमी के साथ डिनर पर इस बारे में बात करती है कि लोग किस वजह से रिश्ते में रहना चाहते हैं और क्या दो लोग वाकई एक-दूसरे के लिए सही हो सकते हैं।




राहुल रवींद्रन द्वारा निर्देशित फिल्म द गर्लफ्रेंड में रश्मिका के साथ दीक्षित शेट्टी मुख्य भूमिका में हैं। फिल्म का लेखन और निर्देशन राहुल ने किया है। इसका निर्माण धीरज मोगिलिनेनी और विद्या कोप्पिनीदी ने किया है। संगीत हेशम अब्दुल वहाब ने दिया है और छायांकन कृष्णन वसंत ने किया है।





इस फिल्म का टीज़र पिछले साल रिलीज़ हुआ था। इसकी शुरुआत विजय देवरकोंडा की आवाज़ में मुख्य अभिनेत्री की खूबसूरती की तारीफ़ के साथ हुई, जिसमें रश्मिका अपने सामान के साथ कॉलेज में प्रवेश करती दिखाई दे रही थीं।




रश्मिका अभी भी बड़े नाम वाले अभिनेताओं और दमदार कहानियों वाली फिल्मों के बीच संतुलन बनाने में सक्षम हैं। द गर्लफ्रेंड उनके करियर का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है। रश्मिका मंदाना, जहाँ  अल्लू अर्जुन की एक्शन फिल्म पुष्पा सीरीज की श्रीवल्ली के रूप में दर्शकों को मुग्ध कर पाई है, ठीक वैसे ही वह रोमांटिक फिल्मों में भी अपनी प्रतिभा का परिचय दे चुकी है। गीता गोविन्दम, चलो, किरिक पार्टी, भीष्म, गुड बाय, सीता रामम और देवदास में नायक के रोमांस में वह अपनी उपयोगिता स्थापित कर चुकी है।





आशा है कि कुबेर और थामा की सफलता के बाद, रश्मिका मंदाना द गर्लफ्रेंड से अपनी अभिनय प्रतिभा के अधिक परिपक्व और विचारशील पक्ष को दिखा पाने सफल होंगी ।  

परदे पर इंदिरा गाँधी न बन सकी विद्या बालन, मनीषा कोइराला, माधुरी दीक्षित !



कांग्रेस की नेता और पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी, भारतीय राजनीति का सबसे विवादित और सम्मानित नाम रही है। वह भारत राष्ट्र पर, संविधान के विरुद्ध आपातकाल  लगा कर काफी कुख्यात हुई।  एक सिख गार्ड द्वारा उनकी हत्या भी, उनके द्वारा खालिस्तानियों का राजनीतिक प्रयोग करने के परिणामस्वरुप हुई।  






ऎसे विवादित व्यक्तित्व पर बॉलीवुड में फिल्म न बने, ऐसा हो ही नहीं सकता।  इंदिरा गाँधी के नाम पर भी फिल्मे बनाने की घोषणा हुई।  किन्तु, अधिकतर फ़िल्में घोषणा से आगे नहीं बढ़ पाई। किन्तु, इमरजेंसी जैसी फिल्म बनी भी, प्रदर्शित भी हुई और दर्शकों द्वारा बिलकुल नकार भी दी गई। 






भारतीय फिल्म उद्योग ने, इंदिरा गाँधी के जीवन पर चाहे फ़िल्में न के बराबर बनाई हो, किन्तु, अपनी फिल्मों में उनके  नाम का प्रयोग बहुत किया।  गुलजार की फिल्म आँधी, अमृतलाल नाहटा की फिल्म किस्सा कुर्सी का और आईएस जोहर की फिल्म नसबंदी तो इंदिरा गाँधी के जीवन काल में प्रदर्शित भी हुई।  यह सभी फिल्मे बायोपिक नहीं, उनका किसी न किसी सन्दर्भ में नाम प्रयोग करने वाली फ़िल्में थी। 







कंगना रनौत की निर्माता, निर्देशक और अभिनेत्री के रूप में बनाई गई फिल्म इमरजेंसी एक ऐसी फिल्म थी, जो प्रदर्शित भी हुई।  इस फिल्म में देश में लगाए गए आपातकाल में इंदिरा गाँधी की भूमिका का विस्तार से उल्लेख किया गया था। किन्तु, अचरज की बात है कि हिंदी फिल्म दर्शकों ने उनकी इस फिल्म को पूरी तरह से ठुकरा दिया। साठ करोड़ की लागत से बनी इमरजेंसी बॉक्स ऑफिस पर कठिनाई से २२ करोड़ का ग्रॉस कर पाई।





इसी कड़ी में, विद्या बालन और उनके पति सिद्धार्थ रॉय कपूर का नाम भी जुड़ जाता है, जो इंदिरा गाँधी के चरित्र को सेलुलॉइड पर उतारना चाहते थे, किन्तु, असफल रहे। इस प्रोजेक्ट के बारे में जानने से पूर्व बता दें कि यह कोई फिल्म नहीं, बल्कि एक वेब सीरीज थी।  







टीएमसी की वर्तमान राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने  इंदिरा गाँधी के जीवन पर एक पुस्तक लिखी थी। निर्माता सिद्धार्थ रॉय कपूर ने इस पुस्तक पर फिल्म बनाने के अधिकार खरीद लिए थे।  इस पुस्तक पर सीरीज बनाने की घोषणा २०१९ में की गई। इस सीरीज में श्रीमती इंदिरा गाँधी की भूमिका सिद्धार्थ की पत्नी अभिनेत्री विद्या बालन करने वाली थी।  







विद्या बालन ने, रुपहले परदे पर विवादित तमिल फिल्म अभिनेत्री सिल्क स्मिता पर फिल्म द डर्टी पिक्चर करके राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार जीता था। उन्होंने, ह्यूमन कंप्यूटर शकुंतला देवी पर इसी शीर्षक वाली फिल्म में, शकुंतला देवी को जीवंत कर दिया था। विद्या बालन को, तमिलनाडु की मुख्य मंत्री जे जयललिता पर फिल्म थलेवि का प्रस्ताव भी किया गया था। किन्तु, उन्होंने इसे ठुकरा दिया। बाद में इस भूमिका को, फिल्म इमरजेंसी में इंदिरा गाँधी की भूमिका करने वाली कंगना रनौत ने जीवंत किया। 







इंदिरा गाँधी की भूमिका में विद्या बालन के उत्साह का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने जगन शक्ति की फिल्म मिशन मंगल के बाद, अपनी सभी फिल्मों को होल्ड पर डाल दिया था। ताकि वह स्वयं को इंदिरा गाँधी के चरित्र में ढाल सकें। अब यह बात दूसरी है कि सीरीज की घोषणा के तीन साल और इमरजेंसी के प्रदर्शित होने के बाद इंदिरा गाँधी बायोपिक को ठन्डे बस्ते में डाल दिया गया। 







निस्संदेह, इंदिरा गाँधी के आपातकाल के दौरान, देवानंद, आईएस जोहर, आदि फ़िल्मकारो के नेतृत्व में आपातकाल का विरोध करने वाला हिंदी फिल्म उद्योग, उनके कारनामों पर फिल्म बनाने से बचता रहा है। कदाचित यही कारण था कि इंदिरा गाँधी, आपातकाल और स्वर्णमंदिर काण्ड में इंदिरा गाँधी की भूमिका की पड़ताल करने वाले हिंदी फिल्मों का टोटा रहा। 








इसके बाद भी, कुछ प्रोजेक्ट प्रारम्भ किये गये। यह प्रोजेक्ट स्थापित करते है कि  विद्या बालन का प्रोजेक्ट पहली इंदिरा गांधी बायोपिक नहीं थी, जिसे बंद किया गया । नेपाल के प्रधानमंत्री रहे बीपी कोइराला की पोती मनीषा कोइराला भी इंदिरा गांधी का किरदार निभाने वाली थीं। इस प्रोजेक्ट की शुरुआत इंदिरा गांधी की ८५वीं जयंती  पर हुई थी। इंदिरा गांधी: अ ट्रिस्ट विद डेस्टिनी शीर्षक से बनाई जाने वाली इस फिल्म का निर्माण नितिन केनी और निर्देशन एन चंद्रा करने वाले थे। आंधी के पटकथा लेखक कमलेश्वर, ने इस प्रोजेक्ट की परिकल्पना की थी और हृदयनाथ मंगेशकर को संगीत देना था।  यह फिल्म न केवल इंदिरा के राजनीतिक करियर पर बल्कि उनके निजी जीवन पर भी केंद्रित होने वाली थी। मनीषा कोइराला प्रतिष्ठित श्रीमती जी का किरदार निभाने को लेकर इतनी उत्साहित थीं कि उन्होंने अपनी नाक का आकार भी बदलवाने का फैसला कर लिया था।






  

शालीमार और सिनेमा सिनेमा जैसे प्रोजेक्ट के प्रसिद्द फिल्म निर्माता कृष्णा शाह  ने भी श्रीमती गांधी फिल्म बनाने के लिए, इंदिरा गाँधी की भूमिका निभाने के लिए माधुरी दीक्षित से संपर्क किया था। उन्होंने २००९ में माधुरी दीक्षित को उनके कोलोराडो स्थित घर पर माधुरी से मुलाकात कर उन्हें अपने द्वारा किया गया व्यापक शोध दिखाया। किन्तु, उसके बाद फिल्म के बारे में कुछ जानकारी नहीं दी गई । कृष्णा शाह के निधन के बाद, यह प्रोजेक्ट ख़त्म हो गया।  

Friday, 24 October 2025

#Akhanda2Thaandavam का टीज़र

क्यों एक थी अमीषा पटेल !



केवल शीर्षक पढ़ कर, किसी अनहोनी की आशंका ठीक नहीं। बॉलीवुड अभिनेत्री अमीषा पटेल बिलकुल ठीक ठाक और तंदरुस्त है।  यद्यपि, उनका फिल्म जीवन ठीक ठाक नहीं चल रहा।  विगत दो वर्षों से उनकी कोई फिल्म प्रदर्शित नहीं हो सकी है। इसके बाद भी कि उन्होंने २०२३ में ब्लॉकबस्टर फिल्म ग़दर २ दी थी। यही कारण है शीर्षक एक थी अमीषा पटेल लिखने का।  





अमीषा पटेल का फिल्म जीवन राकेश रोशन निर्देशित फिल्म कहो न प्यार है से।  इस फिल्म को राकेश रोशन अपने पुत्र हृथिक रोशन को फिल्मों में लांच करने की दृष्टि से बना रहे थे। फिल्म बड़ी हिट हुई। हृथिक रोशन और अमीषा पटेल जोड़ी चल निकली।  





अगले ही साल, अमीषा पटेल ने, सनी देओल के साथ आल टाइम ब्लॉक बस्टर फिल्म गदर एक प्रेम कथा दी।  यह, अमीषा पटेल की निरंतर दूसरी हिट फिल्म थी।  स्पष्ट रूप से, अमीषा पटेल बड़ी अभिनेत्री बननी की राह पर थी।






कहो न प्यार है और ग़दर के प्रेम कथा क्रमशः वर्ष २००० और २००१ प्रदर्शित हुई थी।  उनकी तीसरी बड़ी सफल फिल्म हमराज २००३ में प्रदर्शित हुई थी। यह एक प्रकार से उनकी सफलता की हैटट्रिक थी।  निश्चित रूप से ऎसी सफल फिल्मों वाली अभिनेत्री को शीर्ष पर ही होना चाहिए था। 





अमीषा पटेल ने, अपनी सफल फिल्मों को भुनाते हुए हृथिक रोशन, सलमान खान, अजय देवगन और आमिर खान के साथ फिल्मे भी स्वीकार कर ली। उनकी बॉबी देओल के साथ क्रांति, हृथिक रोशन के साथ आप मुझे अच्छे लगाने लगे, सलमान खान के साथ यह है जलवा और अजय देवगन के साथ परवाना और जमीर द फायर वीथिन जैसी फिल्मे प्रदर्शित हुई। 





निःसंदेह,  अमीषा पटेल ने बॉलीवुड के बड़े अभिनेताओं के साथ फ़िल्में अनुबंधित की थी। किन्तु, इसके साथ ही वह जिमी शेरगिल के साथ यह जिंदगी का सफर, आफताब शिवदासानी के साथ क्या यही प्यार है और सुनो ससुरजी, अर्जुन रामपाल के साथ वादा और एलान जैसी फ़िल्में भी अनुबंधित की।  





अमीषा पटेल के फिल्मों के सन्दर्भ में रोचक तथ्य यह था कि अमीषा पटेल ने सफल फिल्मों की तुलना में असफल फिल्मे अधिक दी।  उन्होंने जिमी शेरगिल, आफताब शिवदासानी, अर्जुन रामपाल आदि के साथ असफल फिल्मे दी ही, उनकी बड़े अभिनेताओं के साथ बड़ी फिल्मे भी कुछ ख़ास न कर पाई।  हृथिक रोशन और अजय देवगन के साथ उनकी फिल्मे तो बॉक्स ऑफिस पर पानी तक नहीं मांग सकी।





अमीषा पटेल ने अपने फिल्म जीवन के साफ अगम्भीरता से काम लिया।  वह विक्रम भट्ट की कठपुतली जैसी बन गई।  विक्रम भट्ट एक दिलफेंक निर्देशक थे। वह अपनी नायिका के साथ राजकपूर की शैली में रोमांस किया करते थे।   विक्रम भट्ट के चक्कर में फंस कर, अमीषा पटेल ने ऐसी ऐसी फिल्मे अनुबंधित कर ली, जो उनके फिल्म जीवन के लिए हानिकारक साबित हुई।  





कोई भी अभिनेत्री, यदि किसी अभिनेता के साथ बड़ी हिट फिल्मे देती है तो वह उस के साथ जोड़ी बनाना पसंद करती है। अमीषा पटेल की हृथिक रोशन के साथ दूसरी फिल्म आप मुझे अच्छे लगने लगे फ्लॉप हुई। किन्तु, सनी देओल के साथ उनकी दूसरी फिल्म तीसरी आँख पांच साल बाद ही प्रदर्शित हुई। यह फिल्म भी बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह से ध्वस्त हुई।




उधर उनकी छोटे अभिनेताओं के साथ फ़िल्में भी फ्लॉप हो रही थी। आमिर खान के साथ मंगल पांडेय द राइजिंग के ध्वस्त होने का सबसे अधिक  नुकसान अमीषा पटेल को ही हुआ। क्योंकि, आमिर खान और रानी मुख़र्जी ने मंगल पांडेय के बाद बाद भी बड़ी सफल फ़िल्में दी। किन्तु, अमीषा पटेल के फिल्म जीवन का पतन होता चला गया।  





अमीषा पटेल के फिल्म जीवन पर बड़ा परिवर्तन आया फिल्म हनीमून ट्रेवल्स प्राइवेट लिमिटेड के बाद।  इस फिल्म में, अमीषा पटेल ने मिनिषा लाम्बा, शबाना आज़मी, राइमा सेन, संध्या मृदुल और दिया मिर्ज़ा की सह नायिका की भूमिका की। रीमा कागटी की यह फिल्म सफल हुई।  किन्तु, यह सफलता नायिकाओं के अतिरिक्त अभय देओल, बोमन ईरानी, केके मेनन और विक्रम चटवाल में भी बँट गई।




 

अमीषा पटेल ने, २००७ में हनीमून ट्रेवल्स के अतिरिक्त हे बेबी और भूल भुलैया जैसी हिट फिल्मे की थी।  किन्तु, इसके बाद वह अगले चार साल में केवल एक फिल्म  मैजिक में दिखाई दी। पर इस फिल्म के नायक नायिका सैफ अली खान और रानी मुख़र्जी थे। अमीषा पटेल तो लज़ी लम्हे जैसे कामुक गीत में अपनी विटामिन दिखा रही थी, स्विमिंग पूल में आग लगा रही थी। 




थोड़ा प्यार थोड़ा मैजिक के बाद, १५ सालों में, अमीषा पटेल ने मात्र चार हिंदी फिल्मे ही की। इनमे से अधिकतर फ़िल्में संजय दत्त के साथ चतुर सिंह टू स्टार, नील नितिन मुकेश के साथ शार्ट कट रोमियो और सनी देओल के साथ भैयाजी सुपरहिट बॉक्स ऑफिस पर असफल हुई। 





अमीषा पटेल को, जिस्म में बिपाशा बासु, चमेली में करीना कपूर, तेरे नाम में भूमिका चावला वाली भूमिकाओं के प्रस्ताव प्राप्त हुए थे। किन्तु, इन फिल्मों को या तो अमीषा ने अस्वीकार किए या उन्हें निकाल दिया गया।  





बॉलीवुड की चार बड़ी हिट फिल्मों की नायिका होने और बॉलीवुड के बड़े अभिनेताओं के साथ फिल्मे करने के बावजूद एक थी बन जाने वाली अभिनेत्री केवल अमीषा पटेल ही हो सकती है।  इसीलिए शीर्षक एक थी अमीषा पटेल दिया गया है। 

लन्दन ड्रीम्स के साथ ध्वस्त हो गए थे सलमान खान और अजय देवगन के ड्रीम !

 


पीटर शेफर के नाटक एमॅड्यूस १९७९ पर फ़िल्में बनाने का प्रयास हॉलीवुड और बॉलीवुड में समान रूप से प्रारम्भ हो चुका था। यद्यपि, एलेग्जेंडर पुश्किन के १८३० में खेले गए नाटक से प्रेरित एमॅड्यूस पर पहली फिल्म हॉलीवुड ने १९८४ में बनाई थी।  इसी नाटक और फिल्म  पर निर्माता- निर्देशक विपुल अमृतलाल शाह ने फिल्म लंदन ड्रीम्स का निर्माण और निर्देशन किया था। 




लंदन ड्रीम्स के विषय में कुछ रोचक तथ्य जानने से पूर्व एक  विशेष बात।  हॉलीवुड की १९८४ में बनी फिल्म एमॅड्यूस से पूर्व १९८१ ने, राजकपूर के बाद हिंदी फिल्मों के दूसरे शोमैन सुभाष घई रंगमंचीय नाटक एमॅड्यूस पर आधारित एक फिल्म बनाना चाहते थे। इस फिल्म के लिए, उन्होंने संजय दत्त को एक संगीतकार की भूमिका के लिए अनुबंधित कर लिया था। वह, दूसरे संगीतकार की भूमिका के लिए कुमार गौरव को लेना चाहते थे । किन्तु,  कुमार गौरव के पिता राजेंद्र कुमार ने इसके लिए बहुत ज़्यादा कीमत बताई। इस वजह से सुभाष घई ने यह प्रोजेक्ट रद्द कर दिया।  




इसके बाद, निर्देशक राजकुमार संतोषी ने एमॅड्यूस पर फिल्म बनाने की कल्पना  लंदन ड्रीम्स से एक दशक पहले ही कर ली थी। उनकी इस फिल्म में आमिर खान और शाहरुख खान दो संगीतकारों की भूमिका करते। फिल्म की नायिका के रूप में करीना कपूर को वर्ष २००० में साइन कर लिया गया था। फिल्म का शीर्षक 'रश्क़' था। अनुराग कश्यप, राजकुमार संतोषी की फिल्म 'रश्क' में आमिर खान और शाहरुख खान को लेकर काम करने वाले थे। लेकिन यह फिल्म रद्द कर दी गई। 





बताते है कि एक समय राजकुमार संतोषी मुख्य भूमिकाओं के लिए ऋतिक रोशन और अभिषेक बच्चन को लेना चाहते थे। उन्होंने उन्हें साइन भी कर लिया था। लेकिन फिल्म अटक गई और दोनों सितारों ने फिल्म छोड़ दी।





इसके बाद, सुनील  दर्शन ने २००७ में बॉबी देओल और उपेन पटेल के साथ फिल्म शाका लाका बूम बूम का निर्माण किया था। इस फिल्म में सेलिना जेटली और कंगना रनौत दो नायिकाएं थी। शाका लका बूम बूम ६ अप्रैल २००७ को प्रदर्शित हुई।  सुनील दर्शन निर्देशित यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरी।  





विपुल शाह की फिल्म लंदन ड्रीम्स के दो मित्र सलमान खान और अजय देवगन थे।  शाह इस फिल्म को हम दिल दे चुके सनम की सफलता के दृष्टिगत निर्मित कर रहे थे। हम दिल दे चुके सनम के बाद अजय देवगन और सलमान खान दूसरी बार प्रेम त्रिकोण फिल्म में दिखाई दिए थे।  हम दिल दे चुके सनम में यह त्रिकोण ऐश्वर्या राय बना रही थी, जबकि लंदन ड्रीम्स में असिन को लिए गया था ।  उस समय समाचार था कि प्रियंका चोपड़ा २००६ में इस फिल्म के लिए अनुबंधित की गई थी, किन्तु,  तारीखों की समस्या के कारण उन्होंने यह फिल्म छोड़ दी थी।  





लंदन ड्रीम्स बजट का निर्माण ६३ करोड़ के बजट में किया गया था।  यह फिल्म पूरे देश में, १४५० पर्दो पर रिलीज़ हुई थी। फिल्म ने पहले दिन ४ करोड़ ९५ लाख का ग्रॉस किया था।  सप्ताहांत  १५ करोड़ ४ लाख का हुआ था।  किन्तु,इसके बाद फिल्म मुंह के बल गिरी।  इस फिल्म का विशुद्ध व्यवसाय २५ करोड़ ६९ लाख २५ हजार का हुआ था।  भारत में ग्रॉस ३४ करोड़ ९६ लाख का हुआ था।  फिल्म का वर्ल्डवाइड ग्रॉस ४१ करोड़ ३१ लाख ८० हजार का था।  इस  प्रकार से फिल्म बॉक्स ऑफिस पर विनाशक साबित हुई थी। 





 लंदन ड्रीम्स की असफलता का कारण फिल्म के नायक  अजय देवगन और सलमान खान ही थे। वह किसी कोण से गायक संगीतकार नहीं लगते थे।  फिल्म का कथानक भी बड़ा अस्वाभाविक था।  दर्शकों ने इस फिल्म के क्लाइमेक्स के कारण फिल्म को  सिरे से ख़ारिज कर दिया ।  

#Mohanlal की ब्लॉकबस्टर फिल्म #Hridayapoorvam में #Madhushree की टुक टुक



युवा’ फिल्म के “कभी नीम नीम, कभी शहद शहद” और ‘बाहुबली 2’ के “कान्हा सो जा ज़रा” जैसे सुपरहिट गीतों को अपनी मधुर आवाज़ देने वाली मशहूर गायिका मधुश्री ने अब मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में भी अपना जलवा बिखेर दिया है। सुपरस्टार मोहनलाल अभिनीत मलयालम ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘हृदयपूर्वक’ का उनका गाया हुआ हिंदी गीत “टुक टुक” रिलीज़ होते ही धमाल मचा रहा है और दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हो गया है।





निर्देशक सत्यन अंथीकड के निर्देशन में बनी इस फिल्म का यह भव्य शादी का गीत खास इसलिए भी है क्योंकि यह पहली बार किसी मलयालम फिल्म में हिंदी गीत शामिल किया गया है। गाने का शानदार फिल्मांकन और मधुश्री की सुरीली आवाज़ ने दर्शकों का दिल जीत लिया है।

 




मधुश्री ने अपनी खुशी जताते हुए कहा, “मुझे बेहद प्रतिभाशाली संगीतकार जस्टिन प्रभाकरण का फोन आया। जब मैंने गाना सुना तो पूछा कि यह तो हिंदी गीत है जबकि फिल्म मलयालम है। उन्होंने बताया कि यह एक सिचुएशनल सॉन्ग है। जब मैंने इसे रिकॉर्ड किया तो एक अलग ही अनुभव रहा। इसके बोल राज शेखर ने बहुत खूबसूरती से लिखे हैं। जब मैंने इसका पिक्चराइजेशन देखा तो बहुत अच्छा लगा। मैं निर्देशक का आभार व्यक्त करती हूं कि उन्होंने मुझे यह मौका दिया।”

 




संगीतकार जस्टिन प्रभाकरण ने कहा, “मैंने फिल्म के लिए एक शादी का गीत ‘टुक टुक’ तैयार किया है जिसे राज शेखर ने लिखा है। जब मैं यह गीत कंपोज कर रहा था तो महसूस हुआ कि इसे सिर्फ मधुश्री जी ही गा सकती हैं। मैं उनकी आवाज़ का बहुत बड़ा प्रशंसक हूं। उन्होंने गीत की भावनाओं को बखूबी समझकर इसे बेहद सुंदरता से गाया और इसमें जान डाल दी।”



 

निर्देशक सत्यन अंथीकड ने कहा, “मैं मधुश्री का दिल से शुक्रिया अदा करता हूं कि उन्होंने इस खूबसूरत गीत को अपनी आवाज़ दी और इसे यादगार बना दिया।”

 

टुक टुक’ के सुपरहिट होने के साथ ही मधुश्री ने एक बार फिर साबित किया है कि वह न सिर्फ बॉलीवुड बल्कि दक्षिण भारतीय सिनेमा में भी अपनी सुरमयी आवाज़ से दर्शकों का दिल जीतने की क्षमता रखती हैं।