०२ अगस्त १९९० को इराक ने कुवैत पर आक्रमण किया था। उस हमले के बाद की घटनाओं पर है यह फिल्म। इस फिल्म में रंजीत कत्याल की पत्नी उससे युद्धग्रस्त कुवैत से निकलने के लिए कहती है। तब रंजीत उसे समझाता है कि वह तभी जायेगा, जब यहाँ सब ठीक कर लेगा । यहाँ याद आते हैं आमिर खान, जो अपनी हिन्दू पत्नी किरण के कहने के बाद देश में घुटन महसूस करने लगते हैं । जबकि, एक कुवैती भारतीय इसे ठीक नहीं समझता। इस फिल्म का ट्रेलर गणतंत्र दिवस वीकेंड के लिए बेहद मौजू फिल्म साबित हो सकती है। अक्षय कुमार के संवाद तालियां बजवा लेंगे। लेकिन, ख़ास बात यह है कि इसी दिन एकता कपूर की पोर्न कॉमेडी फिल्म 'क्या कूल हैं हम ३' भी रिलीज़ हो रही है। सेक्स के पीछे पगलाए देश के युवाओं से उम्मीद कम है कि वह सेक्स कॉमेडी के बजाय एक देशभक्ति से भरपूर थ्रिलर देखने जायेंगे। बहरहाल, २२ जनवरी को यह साफ़ हो जायेगा कि देश में मैले में मुंह डालने वाले कितने सूअर हैं। फिलहाल देखिये ट्रेलर -
भारतीय भाषाओँ हिंदी, तेलुगु, तमिल, कन्नड़, मलयालम, पंजाबी, आदि की फिल्मो के बारे में जानकारी आवश्यक क्यों है ? हॉलीवुड की फिल्मों का भी बड़ा प्रभाव है. उस पर डिजिटल माध्यम ने मनोरंजन की दुनिया में क्रांति ला दी है. इसलिए इन सब के बारे में जानना आवश्यक है. फिल्म ही फिल्म इन सब की जानकारी देने का ऐसा ही एक प्रयास है.
Saturday, 2 January 2016
गणतंत्र दिवस वीकेंड पर 'एयरलिफ्ट'
मैं हिंदी भाषा में लिखता हूँ. मुझे लिखना बहुत पसंद है. विशेष रूप से हिंदी तथा भारतीय भाषाओँ की तथा हॉलीवुड की फिल्मों पर. टेलीविज़न पर, यदि कुछ विशेष हो. कविता कहानी कहना भी पसंद है.
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