बॉलीवुड चढ़ते सूरज को नमस्कार करता है। इंडस्ट्री का यह सुर्य नमस्कार नज़र आता था, इन सेलिब्रिटीज की जन्मदिन की पार्टियों में। जितना बड़ा एक्टर या फिल्म निर्माता- निर्देशक उतना ही बड़ा सेलिब्रेशन और उतने ही ज़्यादा सलामी बजाते गेस्ट। इन बर्थडे पार्टियों से पता चलता था स्टार स्टेटस। लेकिन, आज जब यह सितारे गुमनामी में हैं या मृत हो चुके हैं, तो किसी को याद नहीं कि यह सितारे आज की तारिख में पैदा भी हुए थे। कुछ ऐसे स्टार भी थे, जिन्हे उनके जीवन काल में ही भुला दिया गया। अपनी शोहरत की गुमनामी में खो कर अपना जन्मदिन तो बहुत से कलाकारों ने भुला दिया था।
कितनों को याद है कि १ फरवरी को एक्टर ए के हंगल का जन्मदिन मनाया जाता था। अरे नहीं, हंगल को तो उनके जीवनकाल में ही बॉलीवुड ने भुला दिया गया । पचास साल की उम्र में बासु भट्टाचार्य की फिल्म तीसरी कसम से राजकपूर और वहीदा रहमान के साथ थिएटर एक्टर अवतार कृष्ण हंगल ने बॉलीवुड डेब्यू किया था। चार दशक लम्बे अपने फिल्म करियर में हंगल ने २५५ फ़िल्में की। ७०, ८० और ९० के दशक की लगभग हर फिल्म में ए के हंगल मुख्य किरदारों के पिता,चचा या दादा बने नज़र आते। दबे कुचले बूढ़े की भूमिका के लिए वह फिट थे। कश्मीरी पंडित अवतार कृष्ण हंगल को आज भी शोले के इमाम साहब के किरदार से याद किया जाता है। लेकिन, बॉलीवुड अंत समय में उन्हें बिलकुल भूल गया था। उनके पास अपने इलाज़ के पैसे तक नहीं थे।
बॉलीवुड की धूमकेतु
कुछ ऎसी फिल्म अभिनेत्रियां थी, जो धूमकेतु की तरह उभरी और जल्द ही अस्त हो गई। शमिता शेट्टी, उदिता गोस्वामी, सोनू वालिया, जिया खान, भाग्यश्री पटवर्धन (२३) और दिव्या भारती ऎसी भी अभिनेत्रियां थी। आदित्य चोपड़ा निर्देशित फिल्म मोहब्बतें ऐसी रोमांस फिल्म थी, जिसकी तीन युवा रोमांटिक जोड़े में से एक भी बहुत सफल नहीं हुआ। इनमे २ फरवरी को जन्मी शिल्पा शेट्टी की छोटी बहन शमिता शेट्टी भी थी। शमिता शेट्टी इस फिल्म में जिम्मी शेरगिल, उदय चोपड़ा, जुगल हंसराज, प्रीती झंगियानी और किम शर्मा के साथ रोमांटिक तिगड़ी बना रही थी। फिल्म सुपर हिट हुई। पर यह तिकड़ी फ्लॉप ही रही। नौ फरवरी को उदित गोस्वामी और१९ फरवरी को सोनू वालिया का जन्म हुआ था। १९८५ की मिस इंडिया सोनू वालिया ने बॉलीवुड में ज़माने के लिए हर पैंतरे अपनाये। उन्होंने आकर्षण में अकबर खान के साथ ज़बरदस्त चुम्बन आलिंगन किया। फिल्म फ्लॉप हुई। लेकिन, सोनू वालिया की तूती बोलने लगी। वह खून भरी मांग में कबीर बेदी के साथ वैम्प की भूमिका में थी। उन्होंने अपने समय के लगभग सभी बड़े सितारों के साथ फ़िल्में की। पूजा भट्ट निर्देशित फिल्म पाप में जॉन अब्राहम के साथ गर्मागर्म रोमांस सीन करके उदित गोस्वामी सुर्ख तो हो गई, लेकिन अपना करियर लम्बा नहीं कर पाई। आजकल वह डायरेक्टर मोहित सूरी की पत्नी के किरदार में सुखी जीवन जी रही हैं। कहा जा सकता है कि २३ फरवरी को जन्मी भाग्यश्री पटवर्द्धन ने अपने भाग्य को खुद लिखा। वह सूरज बड़जात्या की फिल्म मैंने प्यार किया में सलमान खान की नायिका थी। उनका करियर टॉप पर होता। लेकिन,भाग्यश्री ने अपने बचपन के दोस्त हिमालय से शादी कर ली। फिर वह अपने पति के साथ काम करने की शर्त पर वापस आई। लेकिन, ऎसी सभी फ़िल्में फ्लॉप हुई। भाग्यश्री का करियर बनने से पहले ही ख़त्म हो गया। इसके साथ ही इन अभिनेत्रियों का बर्थडे सेलिब्रेशन इनके परिवार तक सीमित हो गया। बॉलीवुड तो भूल ही गया उन्हें।
नहीं मना सकी बीसवां जन्मदिन
सबसे दुखांत फरवरी में जन्मी दो अभिनेत्रियों जिया खान और दिव्या भारती का करियर है। जिया खान ने २००७ में अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म निःशब्द से अपना करियर शुरू किया था। वह फिल्म गजिनी में आमिर खान और हाउसफुल में अक्षय कुमार के साथ थी। लेकिन, फिल्मों में उनको सफलता नहीं मिली। पिछले साल रिलीज़ फिल्म हीरो के हीरो सूरज पंचोली के साथ प्रेम में निराश हो कर २० फरवरी १९८८ को जन्मी जिया खान ने ०३ जून २०१३ को कथित रूप से आत्महत्या कर ली। २३ फरवरी को जन्मी दिव्या भारती ने विश्वात्मा फिल्म से अपने करियर की शुरुआत की थी। वह गोविंदा, शाहरुख़ खान, ऋषि कपूर, आदि की फिल्मों की नायिका बनी । जब वह करियर के टॉप पर थी, तभी ५ अप्रैल १९९३ को अपने घर की बालकनी से गिर कर उनकी मौत हो गई। इसके साथ ही इन एक्टर्स के ग्रैंड बर्थडे सेलिब्रेशन का सिलसिला भी ख़त्म हो गया।
सुर और गीतों के जन्मदाता
फरवरी में हिंदी फिल्मों को सार्थक और देश भक्ति वाले गीत देने वाले कवियों-गीतकारों का जन्म हुआ। कवि प्रदीप (६ फरवरी) ने हिंदी फिल्मो को देश भक्ति के दूर हटो ऐ दुनिया वालों, चल चल रे नौजवान, आओ बच्चो तुम्हे दिखाए झांकी हिंदुस्तान की, आदि जैसे देशभक्ति पूर्ण और जय संतोषी माँ फिल्म के तमाम भक्ति पूर्ण गीतों के अलावा भारत के लिए भगवान का वरदान हैं गंगा, कोई लाख करे चतुराई, काहे को बिसारे हरि नाम, आदि जैसे ढेरों भक्ति गीत लिखे थे। उनका ऐ मेरे वतन के लोगों गीत उन्हें हिंदुस्तान का कवि सम्राट साबित करता है। मोहम्मद ज़हूर ख़य्याम (१८ फरवरी) फिल्म संगीतकार होने के बावजूद शास्त्रीय संगीत की हस्तियों में शुमार किये जाते थे। इसी लिए उन्हें संगीत नाटक अकादमी अवार्ड भी मिला। उनकी उल्लेखनीय फिल्मों में फूटपाथ, फिर सुबह होगी, आखिरी खत, शगुन, कभी कभी, आदि के नाम शामिल हैं। उन्हें उमराव जान के लिए नेशनल फिल्म अवार्ड मिला। जां निसार अख्तर (१४ फरवरी) भी ख़य्याम की तरह फिल्म से जुड़े होने के बावजूद साहित्य के क्षेत्र में सम्मानीय थे। उन्होंने बाप रे बाप, यास्मीन, सीआईडी, रुस्तम सोहराब, नूरी, प्रेम पर्वत, शंकर हुसैन, रज़िया सुल्तान, आदि फिल्मों के गीत लिखे। उन्हें १९७६ में साहित्य अकादेमी अवार्ड दिया गया। संगीतकार रविन्द्र जैन को टीवी सीरियल रामायण ने अमर कर दिया। उन्होंने राजश्री की फिल्मों को गीत संगीत दिया। वह राजकपूर की फिल्म राम तेरी गंगा मैली के संगीतकार भी थे। लखनऊ में जन्मे तलत महमूद हिंदी फिल्मों के हीरो बनना चाहते थे। उन्होंने कानन बाला, कानन देवी, सुरैया, माला सिन्हा, नादिरा, नूतन, आदि बड़ी अभिनेत्रियों के साथ फ़िल्में भी की। लेकिन, बड़ी सफलता मिली बतौर ग़ज़ल गायक। वह एक समय दिलीप कुमार की आवाज़ हुआ करते थे।
हिंदी फिल्मों को मनोरंजन और रोमांस देने वाले
२६ फरवरी को जन्मे मनमोहन देसाई ने हिंदी फिल्मों को खोया मिला का हिट फार्मूला दिया। अमिताभ बच्चन को सुपर स्टार का दर्ज़ा दिलवाने वालों में देसाई की फ़िल्में शुमार होती हैं। उन्होंने राजकपूर, राजेश खन्ना, जीतेन्द्र, शशि कपूर, शत्रुघ्न सिन्हा, आदि के साथ एक से एक हिट फ़िल्में बनाई। नासिर हुसैन (०३ फरवरी) ने हिंदी फिल्मों को रोमांस दिया, संगीत से भरपूर मनोरंजन दिया, थ्रिलर फ़िल्में दी। उनका हाथ हमेशा दर्शकों की नब्ज़ पर रहा करता था। उन्होंने तुमसा नहीं देखा, फिर वही दिल लाया हूँ, जब प्यार किसी से होता है, कारवां, यादों की बरात, आदि उनकी हिट फ़िल्में थी। बम्बईया फिल्म उद्योग का बॉलीवुड नामकरण उन्ही का किया हुआ है। हिंदी फिल्मों में रोमांस की अलख जगाये रखने वाले जॉय मुख़र्जी २४ फरवरी, विनोद मेहरा १३ फरवरी और राहुल रॉय ९ फरवरी को जन्मे थे। राहुल रॉय आशिक़ी से सुपर हिट हुए थे। लेकिन, उनकी यह सफलता ज़्यादा फिल्मों तक नहीं चल सकी। विनोद मेहरा ने एक्शन और रोमांस से भरपूर थ्रिलर फ़िल्में की। उनकी रेखा के साथ जोड़ी ज़्यादा गर्म हुई। जॉय मुख़र्जी तो रोमांस के मसीहा थे। उनके करियर की शुरुआत साधना के साथ फिल्म लव इन शिमला से हुई। साधना के साथ फिल्म एक मुसाफिर एक हसीना भी की। आशा पारेख के साथ फिल्म फिर वही दिल लाया हूँ, लव इन टोक्यो और ज़िद्दी तथा सायरा बानो के साथ दूर की आवाज़, शागिर्द और यह ज़िन्दगी कितनी हसीं है में उनकी जोड़ी खूब जमी। आज इनके प्रशंसकों तक को इनका जन्मदिन याद नहीं होगा।
हिंदी फिल्मों के रोमांस के चेहरे
हिंदी फिल्मों की वीनस मधुबाला १४ फरवरी को जन्मी थी। केदार शर्मा की फिल्म नील कमल से डेब्यू करने वाली मधुबाला को कमाल अमरोही की फिल्म महल ने रहस्यमय सौंदर्य की नायिका बना दिया। उनकी यादगार फिल्मों में दुलारी, तराना, संगदिल, अमर, मिस्टर एंड मिसेज़ ५५, बरसात की रात, फागुन, काला पानी, चलती का नाम गाडी, मुग़ल ए आज़म, आदि थी। पचास के दशक में निम्मी गाँव की गोरी के बतौर मशहूर थी। लेकिन, उन्होंने हर प्रकार की फ़िल्में की। वह दीदार, दाग, आँधियाँ, उड़न खटोला, अमर, आदि सामजिक फिल्मों की नायिका बनी, तो उन्होंने अलिफ लैला और अंगुलिमाल जैसी धार्मिक और फंतासी और लव एंड गॉड जैसी फ़िल्में भी की। महबूब खान की फिल्म बहन में बहन के किरदार से अपने करियर का आगाज़ करने वाली नलिनी जयवंत अशोक कुमार के साथ फिल्म संग्राम करके टॉप पर पहुँच गई। अशोक कुमार और नलिनी जयवंत की जोड़ी ने जलपरी, काफिला, नौबहार, सलोनी, लकीरें, नाज़, शेरू, मिस्टर एक्स, आदि फ़िल्में की। वह शिकस्त, रेलवे प्लेटफार्म, फूटपाथ, नास्तिक, मुनीमजी, हम सब चोर हैं, काला पानी, आदि फिल्मों की लीड एक्ट्रेस थी। २१ फरवरी को जन्मी जयश्री गाड़कर को धार्मिक फिल्मों की नायिका के बतौर शोहरत मिली। टीना मुनीम ने कभी देवानंद के साथ फिल्म देश परदेस फिल्म में शराब के प्याले में नहा कर अपनी सेक्स अपील का कायल कर दिया। बिज़नेस टाइकून अनिल अम्बानी से शादी करने से पहले तक वह क़र्ज़, मनपसंद, यह वादा रहा, फिफ्टी फिफ्टी,रॉकी, सौतन, आदि फिल्मों की सेक्सी नायिका बनी। अमृता सिंह (९ फरवरी) ने भी अपने ग्लैमर की बदौलत अमिताभ बच्चन की मर्द जैसी फिल्मों की नायिका बनने का रुतबा हासिल किया।
कभी प्राण का जलवा हुआ करता था। उनकी जन्म दिन (१२ फरवरी) की पार्टी में बड़े हीरो और हीरोइन भी पहुंचते और टॉप के फिल्म निर्माता और निर्देशक भी। आई एस जौहर जीनियस एक्टर थे। उन्होंने कॉमेडी फ़िल्में की। लेकिन उनकी कॉमेडी में क्लास होता था। उनकी स्पूफ फ़िल्में लाजवाब थी। वह एक फिल्म मैगज़ीन में उसके पाठकों के सवालों के जवाब दिया करते थे। पहाड़ी सान्याल (२२ फरवरी) और मनमोहन कृष्ण (२६ फरवरी) सह भूमिकाओं में कमाल किया करते थे। सुजीत कुमार (७ फरवरी) ने सपोर्टिंग रोल किये। उन्होंने कई भोजपुरी फिल्मों में नायक की भूमिका की।
साफ़ है कि फरवरी में जन्मी फिल्म हस्तियों ने एक मुकाम बनाया, मील का पत्थर रखा, हिंदी सिनेमा को मज़बूती दी और अपना दबदबा कायम रखा। सोचा जा सकता है कि इन हस्तियों की बुलंदी के दौर में इनके जन्मदिन पर क्या जलवा रहता होगा। लेकिन, जैसे ही यह सितारे डूबने को हुए या इनका निधन हुआ, इनकी यादें भी इनके साथ चली गई। टीना मुनीम तो अम्बानी बन कर अपना जन्मदिन शान से मना लेती हैं। पर बाकी हस्तियां तो शायद अपनी पैदाइश की तारिख भी भूल गई होंगी। फिल्म इंडस्ट्री तो भूल ही गई।
कितनों को याद है कि १ फरवरी को एक्टर ए के हंगल का जन्मदिन मनाया जाता था। अरे नहीं, हंगल को तो उनके जीवनकाल में ही बॉलीवुड ने भुला दिया गया । पचास साल की उम्र में बासु भट्टाचार्य की फिल्म तीसरी कसम से राजकपूर और वहीदा रहमान के साथ थिएटर एक्टर अवतार कृष्ण हंगल ने बॉलीवुड डेब्यू किया था। चार दशक लम्बे अपने फिल्म करियर में हंगल ने २५५ फ़िल्में की। ७०, ८० और ९० के दशक की लगभग हर फिल्म में ए के हंगल मुख्य किरदारों के पिता,चचा या दादा बने नज़र आते। दबे कुचले बूढ़े की भूमिका के लिए वह फिट थे। कश्मीरी पंडित अवतार कृष्ण हंगल को आज भी शोले के इमाम साहब के किरदार से याद किया जाता है। लेकिन, बॉलीवुड अंत समय में उन्हें बिलकुल भूल गया था। उनके पास अपने इलाज़ के पैसे तक नहीं थे।
बॉलीवुड की धूमकेतु
कुछ ऎसी फिल्म अभिनेत्रियां थी, जो धूमकेतु की तरह उभरी और जल्द ही अस्त हो गई। शमिता शेट्टी, उदिता गोस्वामी, सोनू वालिया, जिया खान, भाग्यश्री पटवर्धन (२३) और दिव्या भारती ऎसी भी अभिनेत्रियां थी। आदित्य चोपड़ा निर्देशित फिल्म मोहब्बतें ऐसी रोमांस फिल्म थी, जिसकी तीन युवा रोमांटिक जोड़े में से एक भी बहुत सफल नहीं हुआ। इनमे २ फरवरी को जन्मी शिल्पा शेट्टी की छोटी बहन शमिता शेट्टी भी थी। शमिता शेट्टी इस फिल्म में जिम्मी शेरगिल, उदय चोपड़ा, जुगल हंसराज, प्रीती झंगियानी और किम शर्मा के साथ रोमांटिक तिगड़ी बना रही थी। फिल्म सुपर हिट हुई। पर यह तिकड़ी फ्लॉप ही रही। नौ फरवरी को उदित गोस्वामी और१९ फरवरी को सोनू वालिया का जन्म हुआ था। १९८५ की मिस इंडिया सोनू वालिया ने बॉलीवुड में ज़माने के लिए हर पैंतरे अपनाये। उन्होंने आकर्षण में अकबर खान के साथ ज़बरदस्त चुम्बन आलिंगन किया। फिल्म फ्लॉप हुई। लेकिन, सोनू वालिया की तूती बोलने लगी। वह खून भरी मांग में कबीर बेदी के साथ वैम्प की भूमिका में थी। उन्होंने अपने समय के लगभग सभी बड़े सितारों के साथ फ़िल्में की। पूजा भट्ट निर्देशित फिल्म पाप में जॉन अब्राहम के साथ गर्मागर्म रोमांस सीन करके उदित गोस्वामी सुर्ख तो हो गई, लेकिन अपना करियर लम्बा नहीं कर पाई। आजकल वह डायरेक्टर मोहित सूरी की पत्नी के किरदार में सुखी जीवन जी रही हैं। कहा जा सकता है कि २३ फरवरी को जन्मी भाग्यश्री पटवर्द्धन ने अपने भाग्य को खुद लिखा। वह सूरज बड़जात्या की फिल्म मैंने प्यार किया में सलमान खान की नायिका थी। उनका करियर टॉप पर होता। लेकिन,भाग्यश्री ने अपने बचपन के दोस्त हिमालय से शादी कर ली। फिर वह अपने पति के साथ काम करने की शर्त पर वापस आई। लेकिन, ऎसी सभी फ़िल्में फ्लॉप हुई। भाग्यश्री का करियर बनने से पहले ही ख़त्म हो गया। इसके साथ ही इन अभिनेत्रियों का बर्थडे सेलिब्रेशन इनके परिवार तक सीमित हो गया। बॉलीवुड तो भूल ही गया उन्हें।
नहीं मना सकी बीसवां जन्मदिन
सबसे दुखांत फरवरी में जन्मी दो अभिनेत्रियों जिया खान और दिव्या भारती का करियर है। जिया खान ने २००७ में अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म निःशब्द से अपना करियर शुरू किया था। वह फिल्म गजिनी में आमिर खान और हाउसफुल में अक्षय कुमार के साथ थी। लेकिन, फिल्मों में उनको सफलता नहीं मिली। पिछले साल रिलीज़ फिल्म हीरो के हीरो सूरज पंचोली के साथ प्रेम में निराश हो कर २० फरवरी १९८८ को जन्मी जिया खान ने ०३ जून २०१३ को कथित रूप से आत्महत्या कर ली। २३ फरवरी को जन्मी दिव्या भारती ने विश्वात्मा फिल्म से अपने करियर की शुरुआत की थी। वह गोविंदा, शाहरुख़ खान, ऋषि कपूर, आदि की फिल्मों की नायिका बनी । जब वह करियर के टॉप पर थी, तभी ५ अप्रैल १९९३ को अपने घर की बालकनी से गिर कर उनकी मौत हो गई। इसके साथ ही इन एक्टर्स के ग्रैंड बर्थडे सेलिब्रेशन का सिलसिला भी ख़त्म हो गया।
सुर और गीतों के जन्मदाता
फरवरी में हिंदी फिल्मों को सार्थक और देश भक्ति वाले गीत देने वाले कवियों-गीतकारों का जन्म हुआ। कवि प्रदीप (६ फरवरी) ने हिंदी फिल्मो को देश भक्ति के दूर हटो ऐ दुनिया वालों, चल चल रे नौजवान, आओ बच्चो तुम्हे दिखाए झांकी हिंदुस्तान की, आदि जैसे देशभक्ति पूर्ण और जय संतोषी माँ फिल्म के तमाम भक्ति पूर्ण गीतों के अलावा भारत के लिए भगवान का वरदान हैं गंगा, कोई लाख करे चतुराई, काहे को बिसारे हरि नाम, आदि जैसे ढेरों भक्ति गीत लिखे थे। उनका ऐ मेरे वतन के लोगों गीत उन्हें हिंदुस्तान का कवि सम्राट साबित करता है। मोहम्मद ज़हूर ख़य्याम (१८ फरवरी) फिल्म संगीतकार होने के बावजूद शास्त्रीय संगीत की हस्तियों में शुमार किये जाते थे। इसी लिए उन्हें संगीत नाटक अकादमी अवार्ड भी मिला। उनकी उल्लेखनीय फिल्मों में फूटपाथ, फिर सुबह होगी, आखिरी खत, शगुन, कभी कभी, आदि के नाम शामिल हैं। उन्हें उमराव जान के लिए नेशनल फिल्म अवार्ड मिला। जां निसार अख्तर (१४ फरवरी) भी ख़य्याम की तरह फिल्म से जुड़े होने के बावजूद साहित्य के क्षेत्र में सम्मानीय थे। उन्होंने बाप रे बाप, यास्मीन, सीआईडी, रुस्तम सोहराब, नूरी, प्रेम पर्वत, शंकर हुसैन, रज़िया सुल्तान, आदि फिल्मों के गीत लिखे। उन्हें १९७६ में साहित्य अकादेमी अवार्ड दिया गया। संगीतकार रविन्द्र जैन को टीवी सीरियल रामायण ने अमर कर दिया। उन्होंने राजश्री की फिल्मों को गीत संगीत दिया। वह राजकपूर की फिल्म राम तेरी गंगा मैली के संगीतकार भी थे। लखनऊ में जन्मे तलत महमूद हिंदी फिल्मों के हीरो बनना चाहते थे। उन्होंने कानन बाला, कानन देवी, सुरैया, माला सिन्हा, नादिरा, नूतन, आदि बड़ी अभिनेत्रियों के साथ फ़िल्में भी की। लेकिन, बड़ी सफलता मिली बतौर ग़ज़ल गायक। वह एक समय दिलीप कुमार की आवाज़ हुआ करते थे।
हिंदी फिल्मों को मनोरंजन और रोमांस देने वाले
२६ फरवरी को जन्मे मनमोहन देसाई ने हिंदी फिल्मों को खोया मिला का हिट फार्मूला दिया। अमिताभ बच्चन को सुपर स्टार का दर्ज़ा दिलवाने वालों में देसाई की फ़िल्में शुमार होती हैं। उन्होंने राजकपूर, राजेश खन्ना, जीतेन्द्र, शशि कपूर, शत्रुघ्न सिन्हा, आदि के साथ एक से एक हिट फ़िल्में बनाई। नासिर हुसैन (०३ फरवरी) ने हिंदी फिल्मों को रोमांस दिया, संगीत से भरपूर मनोरंजन दिया, थ्रिलर फ़िल्में दी। उनका हाथ हमेशा दर्शकों की नब्ज़ पर रहा करता था। उन्होंने तुमसा नहीं देखा, फिर वही दिल लाया हूँ, जब प्यार किसी से होता है, कारवां, यादों की बरात, आदि उनकी हिट फ़िल्में थी। बम्बईया फिल्म उद्योग का बॉलीवुड नामकरण उन्ही का किया हुआ है। हिंदी फिल्मों में रोमांस की अलख जगाये रखने वाले जॉय मुख़र्जी २४ फरवरी, विनोद मेहरा १३ फरवरी और राहुल रॉय ९ फरवरी को जन्मे थे। राहुल रॉय आशिक़ी से सुपर हिट हुए थे। लेकिन, उनकी यह सफलता ज़्यादा फिल्मों तक नहीं चल सकी। विनोद मेहरा ने एक्शन और रोमांस से भरपूर थ्रिलर फ़िल्में की। उनकी रेखा के साथ जोड़ी ज़्यादा गर्म हुई। जॉय मुख़र्जी तो रोमांस के मसीहा थे। उनके करियर की शुरुआत साधना के साथ फिल्म लव इन शिमला से हुई। साधना के साथ फिल्म एक मुसाफिर एक हसीना भी की। आशा पारेख के साथ फिल्म फिर वही दिल लाया हूँ, लव इन टोक्यो और ज़िद्दी तथा सायरा बानो के साथ दूर की आवाज़, शागिर्द और यह ज़िन्दगी कितनी हसीं है में उनकी जोड़ी खूब जमी। आज इनके प्रशंसकों तक को इनका जन्मदिन याद नहीं होगा।
हिंदी फिल्मों के रोमांस के चेहरे
हिंदी फिल्मों की वीनस मधुबाला १४ फरवरी को जन्मी थी। केदार शर्मा की फिल्म नील कमल से डेब्यू करने वाली मधुबाला को कमाल अमरोही की फिल्म महल ने रहस्यमय सौंदर्य की नायिका बना दिया। उनकी यादगार फिल्मों में दुलारी, तराना, संगदिल, अमर, मिस्टर एंड मिसेज़ ५५, बरसात की रात, फागुन, काला पानी, चलती का नाम गाडी, मुग़ल ए आज़म, आदि थी। पचास के दशक में निम्मी गाँव की गोरी के बतौर मशहूर थी। लेकिन, उन्होंने हर प्रकार की फ़िल्में की। वह दीदार, दाग, आँधियाँ, उड़न खटोला, अमर, आदि सामजिक फिल्मों की नायिका बनी, तो उन्होंने अलिफ लैला और अंगुलिमाल जैसी धार्मिक और फंतासी और लव एंड गॉड जैसी फ़िल्में भी की। महबूब खान की फिल्म बहन में बहन के किरदार से अपने करियर का आगाज़ करने वाली नलिनी जयवंत अशोक कुमार के साथ फिल्म संग्राम करके टॉप पर पहुँच गई। अशोक कुमार और नलिनी जयवंत की जोड़ी ने जलपरी, काफिला, नौबहार, सलोनी, लकीरें, नाज़, शेरू, मिस्टर एक्स, आदि फ़िल्में की। वह शिकस्त, रेलवे प्लेटफार्म, फूटपाथ, नास्तिक, मुनीमजी, हम सब चोर हैं, काला पानी, आदि फिल्मों की लीड एक्ट्रेस थी। २१ फरवरी को जन्मी जयश्री गाड़कर को धार्मिक फिल्मों की नायिका के बतौर शोहरत मिली। टीना मुनीम ने कभी देवानंद के साथ फिल्म देश परदेस फिल्म में शराब के प्याले में नहा कर अपनी सेक्स अपील का कायल कर दिया। बिज़नेस टाइकून अनिल अम्बानी से शादी करने से पहले तक वह क़र्ज़, मनपसंद, यह वादा रहा, फिफ्टी फिफ्टी,रॉकी, सौतन, आदि फिल्मों की सेक्सी नायिका बनी। अमृता सिंह (९ फरवरी) ने भी अपने ग्लैमर की बदौलत अमिताभ बच्चन की मर्द जैसी फिल्मों की नायिका बनने का रुतबा हासिल किया।
कभी प्राण का जलवा हुआ करता था। उनकी जन्म दिन (१२ फरवरी) की पार्टी में बड़े हीरो और हीरोइन भी पहुंचते और टॉप के फिल्म निर्माता और निर्देशक भी। आई एस जौहर जीनियस एक्टर थे। उन्होंने कॉमेडी फ़िल्में की। लेकिन उनकी कॉमेडी में क्लास होता था। उनकी स्पूफ फ़िल्में लाजवाब थी। वह एक फिल्म मैगज़ीन में उसके पाठकों के सवालों के जवाब दिया करते थे। पहाड़ी सान्याल (२२ फरवरी) और मनमोहन कृष्ण (२६ फरवरी) सह भूमिकाओं में कमाल किया करते थे। सुजीत कुमार (७ फरवरी) ने सपोर्टिंग रोल किये। उन्होंने कई भोजपुरी फिल्मों में नायक की भूमिका की।
साफ़ है कि फरवरी में जन्मी फिल्म हस्तियों ने एक मुकाम बनाया, मील का पत्थर रखा, हिंदी सिनेमा को मज़बूती दी और अपना दबदबा कायम रखा। सोचा जा सकता है कि इन हस्तियों की बुलंदी के दौर में इनके जन्मदिन पर क्या जलवा रहता होगा। लेकिन, जैसे ही यह सितारे डूबने को हुए या इनका निधन हुआ, इनकी यादें भी इनके साथ चली गई। टीना मुनीम तो अम्बानी बन कर अपना जन्मदिन शान से मना लेती हैं। पर बाकी हस्तियां तो शायद अपनी पैदाइश की तारिख भी भूल गई होंगी। फिल्म इंडस्ट्री तो भूल ही गई।
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