Tuesday, 15 July 2025

रातों का राजा के नायक थे धीरज कुमार !





हिंदी फिल्मों के असफल किन्तु पंजाबी फिल्मों में सफल अभिनेता धीरज कुमार का ८० साल की उम्र में निधन हो गया। वह कुछ दिनों से निमोनिया से पीड़ित थे और मुंबई के एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। वह वेंटीलेटर पर थे।  मंगलवार को उन्हें दिल का दौरा पड़ा और उनका निधन हो गया। 





हिंदी फिल्म रातों का राजा (१९७०) के नायक के रूप में हिंदी फिल्म दर्शकों से  अपना पहला परिचय कराने वाले धीरज कुमार ने दीदार , खोज, बहरूपिया, बहारों फूल बरसाओ, आदि फिल्मों में नायक के रूप में अभिनय किया। किन्तु, इन फिल्मों को बॉक्स ऑफिस पर बहुत सफलता नहीं मिली। तब वह सह भूमिकाओं में अपनी भूमिका खोजने लगे। 





धीरज कुमार ने हीरा पन्ना, रोटी कपड़ा और मकान, अंगारे, दो ठग, लड़की भोली भली, शराफत छोड़ दी मैंने, अमानत, पंडित और पठान, डार्लिंग डार्लिंग, आदि कुल जमा ७३ फिल्मों में अभिनय किया।  उनकी अंतिम फिल्म फैसला मैं करूंगी १९९५ में प्रदर्शित हुई थी। 





धीरज कुमार, उस समय हिंदी फिल्मों के लिए  कलाकार खोजने के लिए प्रतिस्पर्द्धा करने वाली संस्था की १९६५ की प्रतिस्पर्द्धा के अंतिम तीन प्रतिभागियों में थे।  इस प्रतिस्पर्द्धा के शेष दो प्रतिभागी राजेश  खन्ना और सुभाष घई थे।  राजेश खन्ना हिंदी फिल्मों के सुपरस्टार बने। धीरज कुमार और सुभाष घई ने अभिनय में नाम जमाने का प्रयास किया।  सुभाष घई ने अभिनय के क्षेत्र में असफलता के बाद निर्देशन में हाथ आजमाया और कालीचरण, विश्वनाथ, गौतम गोविंदा, क़र्ज़, क्रोधी, विधाता, हीरो, मेरी जंग, कर्मा, रामलखन, सौदागर, खलनायक, परदेस, ताल, आदि सुपरडुपर हिट फिल्मों का निर्देशन किया।  उन्होंने मुक्ता आर्ट्स की स्थापना कर लगभग ३० फिल्मों का निर्माण किया। 





सुभाष घई की तरह धीरज कुमार ने भीअपने प्रोडक्शन हाउस क्रिएटिव आईज की स्थापना की और इसके अंतर्गत के अनाम शहीदों की कथाएं कहाँ गए वह लोग और भारत के शहीद का निर्माण कर दूरदर्शन के दर्शकों को मोह लिया। धीरज कुमार ने फिल्म टीवी सीरियल  निर्माण को व्यवसाय बनाने के बाद भी स्वयं को व्यवसाई नहीं बनाया।





उन्होंने अपने प्रोडक्शन में धार्मिक सीरियल गणेश लीला का निर्माण किया। धीरज कुमार ने ॐ नमो नारायण, जय संतोषी माँ, जब तप व्रत, जैसे लोकप्रिय श्रृंखलाओं का निर्देशन किया।  टेलेविज़न दर्शकों को अदालत और अपराध से परिचित करने वाले धीरज कुमार ही थे।  उन्होंने टीवी दर्शको को बेताल और सिंहासन बत्तीसी से दर्शकों को बेताल की कहानियों को दिखाया। 





धीरज कुमार की निर्माण संस्था ने रिश्तों के भंवर में उलझी नियति, नादानियाँ, उफ़ ये नादानियाँ, तुझ संग प्रीत लगाई सजना, सवारे सबके सपने प्रीतो, नीम नीम शहद शहद, घर की लक्ष्मी बेटियां, मायका साथ जिंदगी भर का, वक़्त बताएगा कौन अपना कौन पराया, मन में है विश्वास, आदि साफ़ सुथरे परिवार के देखने वाली श्रृंखलाओं का निर्माण किया।






धीरज कुमार की इकलौती वेब सीरीज ज़ी ५ के लिए इश्क़ आजकल थी, जो उनकी श्रंखला  इश्क़ सुभान अल्ला की स्पिन ऑफ थी । 

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