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Friday, 10 October 2025

भारतीय हॉरर फिल्में : आधुनिक तकनीक से संवरा भयावना संसार





महेश भट्ट, आनंद पंडित और विक्रम भट्ट की तिकड़ी भयावनी फिल्मों के दर्शकों को अतीत के भूतों का दर्शन कराने जा रहे है। हॉन्टेड 3डी: घोस्ट्स ऑफ़ द पास्ट शीर्षक वाली फिल्म २०११ में प्रदर्शित भयावनी फिल्म हॉन्टेड 3डी की सीक्वल फिल्म है। महाक्षय चक्रवर्ती  उर्फ़ मिमोह की मुख्य भूमिका वाली सुपरनैचरल थ्रिलर हॉरर फिल्म हॉन्टेड ३डी घोस्ट्स ऑफ़ डी पास्ट २१ नवंबर २०२५ को प्रदर्शित होने जा रही है।  चेतना पांडे को इस सीक्वल में सम्मिलित किया गया हैं।





मूल भयावनी फिल्म हॉन्टेड ३डी भी मिमोह की भयावनी फिल्म थी। इस फिल्म को भारत की पहली 3डी स्टीरियोस्कोपिक हॉरर फिल्म होने का गौरव प्राप्त हुआ था । इस फिल्म में विक्रम भट्ट की प्रिय अभिनेत्री टिया बाजपेई मिमोह की नायिका थी। फिल्म ने 13 करोड़ के बजट में दुनिया भर में 37 करोड़ की कमाई करके बॉक्स ऑफिस पर उल्लेखनीय सफलता हासिल की थी। यद्यपि, समीक्षकों ने महाक्षय के अभिनय की आलोचना की थी और उनकी कमियां गिनाई थी। 





हॉन्टेड ३डी घोस्ट्स ऑफ़ द पास्ट, हॉरर फ्रैंचाइज़ी की निरन्तरता बनाये रखने का प्रयास लगती है। क्योंकि, विक्रम भट्ट ने घोस्ट (२०१९) की असफलता के बाद, हॉरर फिल्मों से किनारा कर लिया था। इसीलिए १९२० होर्रोर्स ऑफ़ द हार्ट का निर्देशन उन्होंने स्वयं नहीं किया। किन्तु, २०२३ की इस फिल्म की सफलता के बाद, वह महेश भट्ट और आनंद पंडित की हॉन्टेड टीम के साथ हॉंटेड ३डी की सफलता को भुनाना चाहते है।  





देखा जाये तो सुपरनैचुरल हॉरर थ्रिलर फिल्मों का सिलसिला तो बना हुआ है। यह सिलसिला भारतीय लोककथाओं और मिथकों भूत चुड़ैल और शापित वस्तुओं को कहानी में समेटे हुए दिखाई देता है।२०१८ में प्रदर्शित तुम्बाड और स्त्री जैसी फ़िल्मों में पारंपरिक भारतीय लोककथाओं को आधुनिक कथानक के साथ सफलतापूर्वक मिश्रित किया है। इसका परिणाम हुआ है कि हॉरर फ़िल्में अधिक प्रासंगिक और सांस्कृति से जुड़ी बन गई हैं।





भारतीय फिल्मों में हॉरर कॉमेडी लोककथा और भूत चुड़ैलों का मिथ अन्य भाषाओँ में बानी फिल्मों में भी दिखाई देता है। विगत दिनों प्रदर्शित गुजराती फिल्म वश और इसकी सीक्वल भारतीय मान्यताओं में निहित भूत-प्रेत और भूत-प्रेत के विषयों पर आधारित है। मलयालम फिल्म लोका चैप्टर १ चंद्रा भी एक अन्य उदाहरण है।  रोचक तथ्य यह है कि ऎसी सभी फिल्मों को दूसरी भाषाओँ का दर्शक भी अपनी भाषा में देखना पसंद कर रहा है। 





यहाँ उल्लेखनीय है हॉरर में हास्य।  यद्यपि, यह मिश्रण प्रियदर्शन ने अपनी अक्षय कुमार के साथ फिल्म भूल भुलैया में १८ वर्ष पहले ही कर दिया था। किन्तु, यह मिश्रण अब विगत कुछ वर्षों से सफल होता प्रतीत होता है। क्योंकि, भूल भुलैया की सीक्वल फिल्म भूल भुलैया २ को बनने में १५ साल लग गए।  इसी मिश्रित शैली  में निर्देशक अमर कौशिक ने फिल्म स्त्री भी बनाई थी। स्त्री की सफलता के पश्चात् इस फिल्म का सीक्वल स्त्री २, २०२४ में प्रदर्शित हुई तथा सफल भी हुई।  इस सफलता से उत्साहित हो कर निर्माता ने मैडॉक सुपरनैचुरल यूनिवर्स की स्थापना कर भेड़िया, मुँज्या और स्त्री २ जैसी फिल्मों का निर्माण किया।  यह सभी फिल्में सफल भी हुई।  





 

हॉरर शैली की फिल्मों को नया आयाम तकनीकी प्रगति और उत्कृष्ट दृश्य प्रभाव के कारण भी मिला। आधुनिक  सीजीआई, ध्वनि डिज़ाइन और छायांकन तकनीक का प्रयोग  करने से भारतीय हॉरर फ़िल्में अधिक प्रभावशाली और दृश्यात्मक रूप से आकर्षक बन गई हैं। उदाहरण के लिए हॉन्टेड 3डी में  3डी स्टीरियोफोनिक तकनीक का उपयोग कर दिखाया था।  इसकी सीक्वल हॉन्टेड 3डी: घोस्ट्स ऑफ़ द पास्ट भी इस तकनीक को  स्थापित करने वाली है। 





यहाँ २०२४ में प्रदर्शित अजय देवगन और माधवन की हॉरर फिल्म शैतान भी भय के अनुभव को बेहतर और परिष्कृत दृश्य प्रभावों का उपयोग करते हुए दर्शकों को आकर्षित कर पाने में सफल होती थी ।  





भारतीय हॉरर फ़िल्में मनोवैज्ञानिक और सामाजिक टिप्पणियां करती भी प्रतीत होती है। ऎसी हॉरर फिल्मों में सामान्य रूप से मनोवैज्ञानिक तत्व और सामाजिक टिप्पणियाँ शामिल होती हैं, जो लिंग, जाति और सामाजिक मानदंडों जैसे मुद्दों को संबोधित करती हैं। निर्देशक और लेखक अन्विता दत्ता की २०२० में प्रदर्शित पीरियड  हॉरर फिल्म बुलबुल अलौकिक कथानक के अंतर्गत पितृसत्ता और दुर्व्यवहार के विषयों की पड़ताल करती थी । इसी क्रम में निर्देशक विशाल फुरिआ की नुसरत भरुचा अभिनीत हॉरर फिल्म छोरी सरोगेसी और महिला अधिकारों के मुद्दों को प्रस्तुत करती थी । 





भारत की भयावनी फिल्मों ज़ॉम्बी और विनाश ने भी अपना स्थान बनाना प्रारम्भ कर दिया है। यद्यपि,  हॉलीवुड की फिल्मों में यह तत्व प्रारम्भ से ही है।  गो गोवा गॉन भारत की पहली ज़ोम्बी फिल्म थी। यह फिल्म इस दृष्टि से मौलिक थी कि ज़ॉम्बी के भय में हास्य का बढ़िया मिश्रण किया गया था। किन्तु, ज़ॉम्बी फिल्मों की निरंतरता नहीं बन सकी। गो गोवा गॉन १२ साल पहले प्रदर्शित हुई थी। इसके सीक्वल की घोषणा अब जा कर हुई है। इस कड़ी में कार्तिक आर्यन की ज़ॉम्बी फिल्म उल्लेखनीय है। इस फिल्म को कार्तिक के लिए शेरशाह के निर्देशक विष्णुवर्द्धन बना रहे है।  



   

यह कहा जा सकता है कि वर्त्तमान में भारतीय हॉरर फ़िल्में पारंपरिक और आधुनिक तत्वों, तकनीकी प्रगति और विविध कथानक पर केंद्रित होगी, जो स्थानीय और वैश्विक दोनों दर्शकों को आकर्षित करती है। सांस्कृतिक समृद्धि, तकनीकी नवाचार और अंतर्राष्ट्रीय रुझानों के प्रभाव से प्रेरित होकर यह शैली निरंतर विकसित हो रही है। 

Sunday, 31 March 2019

विक्रम भट्ट की फिल्म में हिना खान !



एकता कपूर (Ekta Kapoor) के शो कसौटी ज़िन्दगी की २की कोमोलिका हिना खान (Hina Khan) ने ऐलान किया है कि उन्हें दूसरी फिल्म भी मिल गई है। इसके साथ ही, हिना खान के कसौटी ज़िन्दगी की २ से बाहर होने और उनकी जगह किसी दूसरी अभिनेत्री के आने की खबरें भी गर्म हो गई है।

पिछले साल ही, हिना खान के बॉलीवुड डेब्यू की खबरें आई थी। उस समय हिना खान, इस शो से यकायक गायब हो गई थी। बाद में पता चला कि वह, निर्देशक हुसैन खान (Hussain Khan) की कारगिल युद्ध की पृष्ठभूमि पर फिल्म लाइन्स (Lines) की शूटिंग कर रही हैं।

अब खबर पुख्ता है कि हिना खान को विक्रम भट्ट (Vikram Bhatt) की फिल्म भी मिल गई है। ख़ास बात यह है कि यह फिल्म नायिका प्रधान फिल्म है। यानि पूरी फिल्म का कथानक हिना खान (Hina Khan) के चरित्र के इर्दगिर्द घूमता नज़र आएगा। यह फिल्म म्यूजिकल रोमांस फिल्म होगी 

फिल्म लाइन्स में ऋषि बुटानी (Rishi Butani) से रोमांस करने के बाद, विक्रम भट्ट (Vikram Bhatt) की फिल्म में वह किससे रोमांस करेंगी, इसका खुलासा होना बाकी है।

फिलहाल तो खुलासा यह हुआ है कि हिना खान मार्च के बाद कसौटी ज़िन्दगी से २ से नदारद रहेंगी। वह पूरी तरह से शो छोड़ रही है और उनकी जगह कोई दूसरी अभिनेत्री ले रही है, अभी साफ़ नहीं है।


बॉक्स ऑफिस पर चौकोणीय होगा मुक़ाबला ?- क्लिक करें 

Saturday, 5 May 2018

लेस्बियन चरित्रों वाली माया २ में चुम्बनों की बौछार !

माया २ 
पोर्न की दुनिया में बीडीएसएम का मतलब बाँडेज, डिसिप्लिन, डोमिनांस और सबमिशन होता है।

इस प्रकार की पोर्न फिल्मों में मॉडल सेक्स स्लेव होती है। ज़ंजीरों में बंधी, गले में ख़ास प्रकार का पट्टा बांधे। उसके साथ सेक्स किया जाता है तो पूरी प्रताड़ना के साथ।

विक्रम भट्ट ने इसी विषय पर वेब सीरीज माया का निर्माण किया था।

इसका प्रसारण विक्रम भट्ट के ओटीटी प्लेटफार्म से हुआ था।

इस सीरीज में पूर्व टीवी एक्ट्रेस शमा सिकंदर और अभिनेत्री शर्मा ने ऐसी ही सेक्स स्लेव्स औरतों की भूमिका की थी। चूंकि, यूट्यूब जैसे प्लेटफार्म पर कोई सेंसर नहीं होता, इसलिए कैसे भी दृश्य फिल्माए और दिखाए जा सकते हैं।

वेब सीरीज के दर्शकों को, विक्रम भट्ट की माया ने अपने जाल मे जकड लिया था। माया का प्रवाह २०१७ में हुआ था।

अब इस सीरीज का दूसरा हिस्सा स्ट्रीम यानि प्रवाहित होने वाला है।

पहली माया से इतर माया २ की कहानी एलजीबीटी यानि लेस्बियन, गे, बाइसेक्सुअल और ट्रांसजेंडर समुदाय की है।

माया २ का निर्माण विक्रम भट्ट के साथ लोन रेंजर और जिओ सिनेमा कर रहे हैं।

इस सीरीज का निर्देशन विक्रम भट्ट की बिटिया कृष्णा भट्ट कर रही हैं।

इस सीरीज में निया शर्मा के अलावा लीना जुमानी और प्रियल गौर समलैंगिक सम्बन्ध स्थापित करती मतलब लिपटती-चिपटती, चुम्बन लेती, उसाँसे भरती और बिस्तर पर ऊपर नीचे होती नज़र आएंगी।

इस वेब सीरीज में और क्या क्या होगा, इसका अंदाज़ा इस सीरीज के चित्र दे सकते हैं। (ऊपर देखें)

इस सीरीज का प्रवाह, ३० मई से ओटीटी प्लेटफार्म पर होगा।  

क्या नया टर्मिनेटर (टी- ८००) हैं ब्रेट अज़र ? - पढ़ने के लिए क्लिक करें 

Wednesday, 25 April 2018

विक्रम भट्ट के शो ट्विस्टेड २ का ट्रेलर

विक्रम भट्ट की ओरिजिनल वेब सीरीज़ ट्विस्टेड २ का ट्रेलर आज सबर्बन थियेटर में रिलीज़ कर दिया गया।

ट्रेलर लाँच के समय इस शो के लीड स्टार निया शर्मा, राहुल सिंह, दिलनाज़ ईरानी और विक्रम भट्ट के साथ शो के डायरेक्टर अनुपम संतोष सरोज भी उपस्थित थे।

इस शो के ट्रेलर के बाद दो गाने दिखाए गए हैं, जिनमे- अर्नब दत्ता ने गाया हुआ घाव है घाव परऔर रवि मिश्रा द्वारा गाया हुआ प्यार ना हो जाए कहींशामिल थे। 

ट्विस्टेड 2 विक्रम भट्ट का हाल ही में लाँच हुआ ओटीटी प्लेटफार्म वीबी का दूसरा भाग है, जो वेब के मूल शो, ट्विस्टेड पर आधारित है।

ट्विस्टेड जब पहली बार डिजिटल प्लेटफार्म पर प्रसारित किया गया था तो दर्शकों द्वारा इस शो को बहुत अच्छा रिस्पांस मिला था।

निया शर्मा का रोल शो में दोहराया गया है और वे फिर एक बार अलिया मुखर्जी के किरदार में दिखेंगी।

राहुल सिंह, निया शर्मा के विरुद्ध रिटायर्ड पुलिस आर्यन माथुर का रोल प्ले कर रहे हैं।

इस सीरीज़ में दिलजीत ईरानी एक नया चेहरा है। दिलजीत इस शो में पुलिस आँफिसर अरुणिमा का रोल प्ले कर रही हैं ।


ट्विस्टेड २ को २५ अप्रैल, २०१८ को ओटीटी प्लेटफार्म पर रिलीज़ करने की योजना है, जिसे विक्रम भट्ट के साथ जिओ सिनेमा ने प्रोड्यूस किया है।


अब क्रिअर्ज के साथ रिलीज़ होगी जॉन अब्राहम की परमाण- पढ़ने के लिए क्लिक करें 

Saturday, 16 December 2017

विक्रम भट्ट का प्रोडक्शन हाउस फोन पर खुद का मल्टीप्लेक्स

फिल्म, टीवी और डिजिटल जगत में अपने शानदार काम के लिए मशहूर व माहिर निर्देशक और फिल्म निर्माता विक्रम भट्ट जल्द ही अपने मुकुट में नया हीरा जड़ने जा रहे हैं। विक्रम भट्ट खुद का वीडियो ऑन डिमांड एप लाँच करने की तैयारी कर चुके हैं और इस मोबाइल प्लेटफॉर्म के लिए उनका प्रोडक्शन हाउस लोनरैंजरकंटेंट तैयार करेगा। एक यूट्यूब प्लेटफॉर्म- वीबी ऑन द वेबजनवरी, २०१७ में लाँच किया गया था। अब अपने डिजिटल प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए विक्रम भट्ट २७ जनवरी, २०१८ को खुद का वीबी-थिएटर ऑन द वेबएप लाँच करने के लिए कमर कस चुके है।संयोग से २७ जनवरी उनका जन्मदिन भी है। एप का लाँच एक ओरिजिनल सीरीज अनटचेबल्सकी शुरुआत का साक्षी बनेगा, जिसका निर्माण पहले से जारी है। कृष्णा भट्ट द्वारा निर्देशित और स्वयं विक्रम भट्ट द्वारा अभिनीत शो अनटचेबल्सका प्रीमियर ओटीटी प्लेटफॉर्म पर होगा। इस बारे में बात करते हुए विक्रम ने कहा- “हम जो एप लाँच करने जा रहे हैं, वह बिलकुल अलग तरह का काँसेप्ट है। दरअसल यह आपके फोन में मौजूद एक मल्टीप्लेक्स जैसा है। इसीलिए जब आप एप को डाउनलोड करेंगे तो आपको इसे सब्सक्राइब करने की जरूरत नहीं होगी। आपको विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम मिलेंगे और ठीक मल्टीप्लेक्स थिएटर की तरह ही हर कार्यक्रम की एक अलग टिकट कीमत होगी। आप अपनी पसंद का कार्यक्रम देखिए और सिर्फ उसी कार्यक्रम के लिए भुगतान कीजिए। इससे उस कार्यक्रम तक आपकी पहुंच और आसान हो जाएगी।

Saturday, 2 January 2016

बॉलीवुड के लिए प्रतिभाओं की जनवरी

प्रतिभा के लिहाज़ से, बॉलीवुड के लिए जनवरी का महीना फलदार पेड़ की तरह है।  इस महीने प्रतिभाशाली अभिनेता, अभिनेत्रियां और डायरेक्टर मिले।  इनमे से बॉलीवुड के इम्तिहान में कुछ फेल भी हुए और कुछ फर्स्ट क्लास निकले ।  इस महीने पैदा निर्देशकों ने भारतीय सिनेमा को नयापन दिया।  कॉमेडी को नई दिशा दी।  एक्टर्स ने अपने सजीव अभिनय से चरित्रों को अविस्मरणीय बना दिया।
अभिनेत्रियां सेक्सी भी और इमोशनल भी
जनवरी में पैदा अभिनेत्रियां अभिनय  कला के  लिहाज़ से बेजोड़ हैं।  वह ग्लैमरस भी हैं और सेक्सी भी। इन अभिनेत्रीयों ने हिंदी फिल्मों की नायिका को नायक की परछाई से अलग अपनी पहचान दी।  इन अभिनेत्रियों के कारण फ़िल्में बिकती भी हैं और देखी भी जाती हैं।
विद्या बालन- साल के पहले दिन, १ जनवरी १९७९ को पैदा विद्या बालन की पहचान अभिनय सक्षम अभिनेत्री के बतौर हैं। उनका केरल से मुंबई तक का सफर टेलीविज़न से हो कर जाता है। सीरियल  हम पांच की यह नायिका आज परिणीता, डर्टी पिक्चर, कहानी, आदि फिल्मों में अपने कुशल अभिनय से पहचानी जाती हैं। उनको ध्यान में रख कर फ़िल्में लिखी जाने लगी है।
दीपिका पादुकोण- ५ जनवरी १९८६ को जन्मी दीपिका पादुकोण अभिनय और ग्लैमर का संगम हैं।  वह २००७ से लगातार हर साल कम से कम एक हिट फिल्म दे रही हैं। इस साल रिलीज़ फिल्म पीकू और तमाशा में उनके अभिनय की भी प्रशंसा हुई।
बिपाशा बासु- ७ जनवरी १९७९ को जन्मी बिपाशा बासु ने अपनी सेक्स अपील के बल पर ही ए ग्रेड फिल्मों को फतह किया।  उन्होंने इरोटिक थ्रिलर फिल्म जिस्म (२००३) से अपने करियर की शुरुआत की।  ऎसी फिल्मों की अभिनेत्रियां एक ख़ास खांचे वाली फिल्मों के लिए ही उपयुक्त मानी जाती हैं।  लेकिन, बिपाशा बासु ने खुद को इस ठप्पे से बचाते हुए नो एंट्री, फिर हेरा फेरी, रेस, धूम २, कॉर्पोरेट, अपहरण और बचना ऐ हसीनों जैसी बड़े बजट की भिन्न कथानकों वाली फ़िल्में की।
जनवरी  में जन्मी कुछ अन्य अभिनेत्रियो में से एक प्रीटी जिंटा की कभी तूती बोला करती थी।  उन्होंने लगभग हर बड़े सितारे के साथ फ़िल्में की। दक्षिण में अपनी अभिनय प्रतिभा का परचम लहराने के बाद श्रुति हासन और एमी जैक्सन हिंदी फिल्मों को जीतने आ गई हैं।  प्रीटी जिंटा और एमी जैक्सन ३१ जनवरी को पैदा हुई।  श्रुति  हासन ने २८ जनवरी को दुनिया में पहली सांस ली।  इनके अलावा कल्कि कोएच्लिन और पल्लवी शारदा १० जनवरी को, मिनिषा लाम्बा २८ जनवरी और रिया सेन २४ जनवरी को पैदा हुई अभिनेत्रियां हैं।
लाजवाब अभिनय वाले अभिनेता !
क्या यह इत्तेफ़ाक़ है कि अभिनेत्रियों की तरह  जनवरी में बहुमुखी प्रतिभा के अभिनेताओं ने जन्म लिया।  इन अभिनेताओं को अपने अभिनय के बूते हिंदी फिल्मों को नए प्रकार का नायक दिया।  बॉक्स ऑफिस को एक्टर-स्टार दिया। गायक मुकेश के पोते नील नितिन मुकेश ने जॉनी गद्दार से दर्शकों को आकर्षित किया था। उन पर नेगेटिव किरदार ख़ास फबते हैं।  ७ खून माफ़ और डेविड से दर्शकों को अपनी अभिनय प्रतिभा का लोहा मनवाने वाले नील नितिन मुकेश को दक्षिण के दर्शक सुपर हिट फिल्म कठ्ठी के विलेन के बतौर जानते हैं।  श्रेयस तलपडे (२७ जनवरी) और चन्दन रॉय सान्याल (३० जनवरी) लीक से हट कर भूमिकाओं से अपनी पहचान बना चुके हैं।  इनके अलावा आदित्य पंचोली (४ जनवरी), उदय चोपड़ा (५ जनवरी), इमरान खान, अध्ययन सुमन और अश्मित पटेल (१३ जनवरी), सिद्धार्थ मल्होत्रा (१६ जनवरी), सुशांत सिंह राजपूत (२१ जनवरी) और बॉबी देओल (२७ जनवरी) इसी महीने पैदा हुए।
नाना पाटेकर- १ जनवरी १९५१ को जन्मे नाना पाटेकर ने  खुद की पहचान बीआर चोपड़ा की फिल्म 'आज की आवाज़' के विलेन के रूप में बनाई।  अंकुश, तृषाग्नि, सलाम बॉम्बे, आदि कुछ फिल्मों में खुद को हरफनमौला अभिनेता साबित करने वाले नाना पाटेकर ने विधु विनोद चोपड़ा की फिल्म परिंदा के अन्ना सेठ की भूमिका में दर्शकों की रीढ़ में सिहरन पैदा कर दी। वह प्रहार के नायक और निर्देशक थे।  तिरंगा, क्रांतिवीर, अग्निसाक्षी, टैक्सी नंबर ९२११, ब्लफ मास्टर, वेलकम, आदि उनकी अभिनय प्रतिभा और बॉक्स ऑफिस पर पकड़ को साबित करने वाली फ़िल्में थी।
इरफ़ान खान - नाना  पाटेकर जैसी प्रतिभा ७ जनवरी १९६७ को पैदा इरफ़ान खान में भी नज़र आई। उन्होंने सलाम बॉम्बे से  पीकू और जज़्बा तक खुद की प्रतिभा बार बार साबित की।  इसी का नतीज़ा है कि वह हॉलीवुड फिल्मों में स्वीकार किये गए।  इसी साल उन्हें जुरैसिक वर्ल्ड में देखा गया।
ह्रितिक रोशन- १० जनवरी १९७४ को जन्मे ह्रितिक रोशन सुन्दर सूरत और गठीले शरीर के कारण बॉक्स ऑफिस के पसंदीदा हैं।  वह अपनी अभिनय प्रतिभा से भी फिल्म मिशन कश्मीर, फ़िज़ा, लक्ष्य, गुज़ारिश, ज़िन्दगी न मिलेगी दुबारा और अग्निपथ के दर्शकों को प्रभावित कर चुके हैं। उनकी सिंधु सभ्यता की पृष्ठभूमि पर फिल्म 'मोहन जोदड़ो' की दर्शकों को प्रतीक्षा है।
अलग तरह की फ़िल्में बनाने वाले निर्देशक
जनवरी में ऐसे निर्देशक जन्मे, जिन्होंने बॉलीवुड में मील का पत्थर साबित होने वाली फ़िल्में बनाई।   फिल्मों को उत्कृष्ट तकनीक और गुणवत्ता प्रदान की।  ख़ास बात यह थी कि हर डायरेक्टर की अपनी अलग दृष्टि थी।  इससे हिंदी फिल्म दर्शकों को भिन्न शैली वाली फिल्में देखने को मिली।
फराह खान और फरहान अख्तर- इन दोनों हस्तियों की जन्म की तरीख बेशक ९  जनवरी है।  लेकिन, दोनों की फ़िल्में बनाने की शैली काफी भिन्न है।  फराह खान हलकी फुलकी कॉमेडी, कमोबेश स्पूफ फ़िल्में बनाती हैं। उन्होंने 'मैं हूँ न' और 'हैप्पी न्यू ईयर' जैसी सुपर हिट फ़िल्में बनाई हैं।  वहीँ, फरहान अख्तर दिल चाहता है, लक्ष्य, डॉन और डॉन २ जैसी फिल्मों के निर्देशक हैं।  यह सभी फ़िल्में भिन्न शैली की हैं।  फराह खान ने फिल्म 'शीरीं  फरहाद की तो निकल पड़ी' में नायिका की भूमिका की थी।  फरहान अख्तर के खाते में दर्जन भर दूसरी फिल्मों के अलावा ' भाग मिल्खा भाग' जैसी यादगार फिल्म दर्ज़ है।
रमेश सिपप्पी - २३ जनवरी १९४७ को जन्मे रमेश सिप्पी ने जब 'अंदाज़' और 'सीता और गीता'  जैसी सुपर हिट फिल्मों के ज़रिये बॉक्स ऑफिस पर अपनी पहचान बनाई उस समय वह मात्र २४ साल के थे। दर्शकों की नब्ज़ पहचानने वाल रमेश सिप्पी ने उस दौर में 'शोले' जैसी हिंसक फिल्म का निर्माण किया, जब रोमांटिक फिल्मों का दौर ख़त्म नहीं हुआ था।  लेकिन, शोले जैसी उत्कृष्ट तकनीक वाली फिल्म बना कर, रमेश सिप्पी ने हिंदी फिल्मों को एक्शन धारा की ओर मोड़ा ही, उच्च तकनीक अपनाने के लिए भी प्रेरित किया।
सुभाष घई- २४ जनवरी ९४५ को जन्मे सुभाष घई को राजकपूर के बाद दूसरा शोमैन कहा गया। सुभाष घई की कालीचरण, विश्वनाथ और गौतम गोविंदा से लेकर क़र्ज़ और ताल तक फ़िल्में अपने मधुर संगीत और स्वप्निल भव्य सेट्स के कारण भी जानी जाती हैं। उन्होंने एक्शन फिल्मों के युग में भी हीरो, सौदागर, परदेस और ताल जैसी संगीतमय रोमांस फ़िल्में बनाई।  यह फ़िल्में बॉक्स ऑफिस पर सफल भी हुई।
विक्रम भट्ट- २७ जनवरी १९६९ को जन्मे विक्रम भट्ट ने जनम और गुलाम जैसी हिट फिल्मों से अपने करियर शुरू किया।  लेकिन, उन्हें हॉरर फिल्मों को जीवन देने वाला निर्देशक माना गया हॉरर फिल्म राज़ (२००२)  के बाद।  इस फिल्म ने भट्ट कैंप के लिए फ्रैंचाइज़ी फिल्मों का दरवाज़ा खोल दिया।  फिल्म १९२० के बाद विक्रम भट्ट हॉरर फिल्मों के मसीहा बन गए।  उन्होंने हॉन्टेड फिल्म को ३डी में बना कर हॉरर फिल्मों के लिए भी उत्कृष्ट तकनीक के रास्ते खोल दिए।
प्रियदर्शन- ३० जनवरी १९५७ को जन्मे प्रियदर्शन ने मलयालम फिल्मों से अपने करियर की शुरुआत की।  दो दर्जन से ज़्यादा मलयालम फ़िल्में बनाने के बाद प्रियदर्शन फिल्म 'मुस्कराहट'  से हिंदी फिल्मों में आये।  इस फिल्म ने प्रियदर्शन को हिंदी दर्शको का प्रिय बना दिया।  गर्दिश और विरासत जैसी भिन्न शैली वाली फिल्मों के बाद फिल्म 'हेरा फेरी' (२०००) ने प्रियदर्शन को अलग तरह  की कॉमेडी फ़िल्में बनाने वाले निर्देशक के रूप में स्थापित कर दिया,  जिसकी फ़िल्में संदेसा भी देती थी।  'भूल भुलैया' में प्रियदर्शन कॉमेडी और सुपर नेचुरल पावर का अनोखा मिश्रण कर रहे थे।