Sunday, 9 November 2025

ਕੇਬਲਵਨ ਅਤੇ ਸਾਗਾ ਸਟੂਡੀਓਜ਼ ਪੇਸ਼ ਕਰਦੇ ਹਨ – “ਲੱਕੜਬੱਗੇ”


 

ਯੰਗ ਅਤੇ ਦੂਰਦਰਸ਼ੀ ਨਿਰਦੇਸ਼ਕ ਪਰਮ ਰਿਆਰ ਅਤੇ ਹ੍ਰਿਸ਼ਭ ਸ਼ਰਮਾ ਵੱਲੋਂ ਨਿਰਦੇਸ਼ਤ, ਲੱਕੜਬੱਗੇ ਪੇਪਰ ਲੀਕ ਸਕੈਂਡਲਾਂ, ਭ੍ਰਿਸ਼ਟਾਚਾਰ ਅਤੇ ਹਜ਼ਾਰਾਂ ਵਿਦਿਆਰਥੀਆਂ ਦੇ ਟੁੱਟੇ ਸੁਪਨਿਆਂ ਦੀ ਡਰਾਉਣੀ ਦੁਨੀਆ ਨੂੰ ਉਜਾਗਰ ਕਰਦੀ ਹੈ। ਸੱਚੀਆਂ ਘਟਨਾਵਾਂ ਤੇ ਆਧਾਰਿਤ ਇਹ ਸੀਰੀਜ਼ ਦਿਖਾਉਂਦੀ ਹੈ ਕਿ ਕਿਵੇਂ ਇੱਕ ਲੀਕ ਹੋਇਆ ਪੇਪਰ ਕਈ ਜ਼ਿੰਦਗੀਆਂ ਬਰਬਾਦ ਕਰ ਸਕਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਸਿਸਟਮ ਦਾ ਕਾਲਾ ਸੱਚ ਸਾਹਮਣੇ ਲਿਆਉਂਦਾ ਹੈ।




 

ਪੰਜਾਬ ਬਣੀ ਕਿਸੇ ਵੀ ਹੋਰ ਸੀਰੀਜ਼ ਤੋਂ ਬਿਲਕੁਲ ਵੱਖਰੀ, ਲੱਕੜਬੱਗੇ ਬੇਝਿਜਕ ਪੂਰੀ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਨੂੰ ਵਿਖਾਂਦੀ ਹੈ ਕਿਵੇਂ ਪੇਪਰ ਲੀਕ ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਰਿਸ਼ਵਤਾਂ ਦਿੱਤੀਆਂ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਮਾਸੂਮ ਭਵਿੱਖ ਤਬਾਹ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ। ਇਹ ਇੱਕ ਬੋਲਡ, ਸੱਚੀ ਅਤੇ ਸੋਚਣ ਤੇ ਮਜਬੂਰ ਕਰਨ ਵਾਲੀ ਕਹਾਣੀ ਹੈ, ਜੋ ਦੇਸ਼ ਭਰ ਦੇ ਹਜ਼ਾਰਾਂ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਪ੍ਰਭਾਵਿਤ ਕਰਨ ਵਾਲੇ ਅਸਲ ਮਸਲੇ ਤੇ ਬਣੀ ਹੈ।




 

ਸੀਰੀਜ਼ ਵਿੱਚ ਗੁਰਪ੍ਰੀਤ ਰਟੌਲ, ਰੀਤ ਕੌਰ, ਅਵਰ ਬਰਾੜ, ਜੋਧ ਅੰਟਲ, ਅਜੀਤ ਸਿੰਘ, ਗੁਰਜੀਤ ਸੋਹੀ, ਪਰਨਯ, ਜੀਤੂ ਸਾਰਨ, ਪਰਮ ਰਿਆਰ ਅਤੇ ਹ੍ਰਿਸ਼ਭ ਸ਼ਰਮਾ ਵਰਗੇ ਸ਼ਾਨਦਾਰ ਕਲਾਕਾਰ ਹਨ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਆਪਣੇ ਦਮਦਾਰ ਅਭਿਨਯ ਨਾਲ ਕਹਾਣੀ ਨੂੰ ਜੀਵੰਤ ਕੀਤਾ ਹੈ।




 

ਲੱਕੜਬੱਗੇ ਦਾ ਨਿਰਦੇਸ਼ਨ ਪਰਮ ਰਿਆਰ ਅਤੇ ਹ੍ਰਿਸ਼ਭ ਸ਼ਰਮਾ ਨੇ ਕੀਤਾ ਹੈ, ਲੇਖ ਹ੍ਰਿਸ਼ਭ ਸ਼ਰਮਾ ਨੇ ਲਿਖਿਆ ਹੈ ਅਤੇ ਨਿਰਮਾਣ ਸੁਮੀਤ ਸਿੰਘ ਅਤੇ ਅਰਮਾਨ ਸਿੱਧੂ ਨੇ ਕੀਤਾ ਹੈ।




 

ਇਸ ਰਿਲੀਜ਼ ਨੂੰ ਹੋਰ ਵੀ ਖ਼ਾਸ ਬਣਾਉਂਦਾ ਹੈ ਇਹ ਤੱਥ ਕਿ ਲੱਕੜਬੱਗੇ ਹੁਣ ਛੇ ਭਾਸ਼ਾਵਾਂ ਪੰਜਾਬੀ, ਹਿੰਦੀ, ਅੰਗਰੇਜ਼ੀ, ਤਮਿਲ, ਤੇਲਗੂ ਅਤੇ ਮਲਿਆਲਮ ਵਿੱਚ ਉਪਲਬਧ ਹੈ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਇਹ ਇੱਕ ਪੈਨ-ਇੰਡੀਆ ਅਨੁਭਵ ਬਣਦਾ ਹੈ।




 

ਕੇਬਲਵਨ ਮਨੋਰੰਜਨ ਦੀ ਦੁਨੀਆ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਨਵੀਂ ਲਹਿਰ ਲਿਆ ਰਿਹਾ ਹੈ, ਜਿੱਥੇ ਗੁਣਵੱਤਾ ਅਤੇ ਮਾਤਰਾ ਦੋਹਾਂ ਤੇ ਇੱਕੋ ਜਿਹਾ ਧਿਆਨ ਦਿੱਤਾ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ ਸਾਰਥਕ ਕਹਾਣੀਆਂ ਪੇਸ਼ ਕਰਨ ਦੇ ਨਾਲ-ਨਾਲ ਨਵੇਂ ਟੈਲੈਂਟ ਅਤੇ

पेपर लीक स्कैम्स के लक्कड़बग्घे केबलवन पर !

 


 

युवा और दूरदर्शी निर्देशकों परम रियार और हृषभ शर्मा द्वारा निर्देशित, लक्कड़बग्गे पेपर लीक स्कैम्स, भ्रष्टाचार और अनगिनत छात्रों के टूटे सपनों की डरावनी दुनिया को उजागर करती है। सच्ची घटनाओं पर आधारित यह सीरीज़ दिखाती है कि कैसे एक लीक हुआ पेपर कई ज़िंदगियाँ बर्बाद कर देता है। यह सीरीज  सिस्टम का काला सच सामने लाती है।




 

पंजाब में बनी किसी भी अन्य सीरीज़ से बिल्कुल अलग, लक्कड़बग्गे बेखौफ़ होकर पूरी प्रक्रिया को दिखाती है कि कैसे पेपर लीक होते हैं, रिश्वतें दी जाती हैं और मासूम भविष्य तबाह हो जाते हैं। यह एक बोल्ड, सच्ची और सोचने पर मजबूर करने वाली कहानी है, जो देशभर में हज़ारों लोगों को प्रभावित करने वाले असली मुद्दे पर बनी है।




 

सीरीज़ में गुरप्रीत रटौल, रीत कौर, अवर बरार, जोध अंट्टल, अजीत सिंह, गुरजीत सोही, प्रणय, जीतू सारन, परम रियार और हृषभ शर्मा जैसे बेहतरीन कलाकार हैं, जिन्होंने दमदार अभिनय से कहानी को जीवंत किया है।




 

लक्कड़बग्गे का निर्देशन परम रियार और हृषभ शर्मा ने किया है, इसे लिखा है हृषभ शर्मा ने, और इसका निर्माण सुमीत सिंह व अरमान सिद्धू ने किया है।




 

इस रिलीज़ को और भी ख़ास बनाता है यह तथ्य कि लक्कड़बग्गे अब छह भाषाओं — पंजाबी, हिंदी, अंग्रेज़ी, तमिल, तेलुगू और मलयालम — में उपलब्ध है, जो इसे एक पैन-इंडियन अनुभव  बन जाता है।




 

केबलवन मनोरंजन की दुनिया में एक नई लहर ला रहा है, जहाँ गुणवत्ता और मात्रा दोनों पर समान ध्यान दिया जा रहा है सार्थक कहानियाँ पेश करने के साथ-साथ नए टैलेंट और थिएटर कलाकारों को बढ़ावा दिया जा रहा है। लक्कड़बग्गे के साथ, यह प्लेटफॉर्म  पॉलीवुड में एक नया मापदंड तय कर रहा है, जहाँ सिनेमा की कहानी कहने की कला को सामाजिक संदेश से जोड़ा गया है।




 

वहीं, संगीत जगत में अपनी शानदार विरासत के लिए प्रसिद्ध सागा स्टूडियोज़, इस सशक्त कहानी को ज़बरदस्त विज़ुअल्स और गहरी भावनाओं के साथ जीवन देने के लिए साझेदार बना है।

स्टारडस्ट से चाटुकार हिंदी फिल्म पत्रकारिता में क्रन्तिकारी परिवर्तन लाने वाले (नारी) हीरा !


 

यह युग हिंदी फिल्मपत्रकारिता का चाटुकार युग था। इस काल खंड की पत्र पत्रिकाएं बॉलीवुड के अभिनेता अभिनेत्रियों की झूठी प्रशंसा, उनका महिमा मंडन करने वाली और चाटुकारिता से भरपूर पीआर पत्रकारिता  वाली थी। सितारों के पीआर मैनेजर, फिल्म पत्रकारों को निर्माता के खर्च से शूटिंग लोकेशन पर ले जाते, सितारों के साक्षात्कार करवाते और कीमती उपहारों के साथ एक लेख भी दे देते थे।  यह युग सितारों के रंगीन और श्वेत श्याम चित्रों और ट्रांस्पेरेन्सी का था।





 

ऐसे समय में, न्यू यॉर्क की पत्रकारिता पर गहरी दृष्टि रखने वाले  और भारत में इस पत्रकारिता को लाने की सोच रखने वाले गुजराती नरेंद्र हीरानंदानी  उर्फ़ नारी हिरा का आगमन हुआ। वह खैबर रेस्टोरेंट के पास, कालाघोड़ा में स्थित एक विज्ञापन एजेंसी की  क्रिएटिव यूनिट के मालिक थे। उन्होंने, बॉलीवुड की तत्कालीन पत्रकारिता को चुनौती देने और  बॉलीवुड के सितारों के एफिल टावर से ऊंचा अहंकार को चूर चूर करने के लिए एक पत्रिका प्रारम्भ करने का निर्णय लिया। 





१ जनवरी १९७१ का दिन, हिंदी फिल्म पत्रकरिता के इतिहास में मील का पत्थर बन गया।  इस दिन एक अंग्रेजी पत्रिका स्टारडस्ट का पहला अंक बाजार में आया।  नारी हीरा ने, इस पत्रिका की  संस्थापक संपादक एक अनुभवहीन पत्रकार को, जो उनकी विज्ञापन एजेंसी में कॉपी राइटर थी और मॉडलिंग कर चुकी थी, बनाया।  इस पत्रकार का नाम था शोभा किलाचंद, जिन्हे आज लोग शोभा डे के नाम से जानते है। 





नारी हिरा चतुर व्यवसाई भी थे। उस समय, नई पत्रिकाएं, बाजार में टिके रहने के लिए कम मूल्य पर बेचीं जाती थी। किन्तु, नारी हिरा ने, अपनी पत्रिका को श्रेष्ठ जताने के लिए इसका मूल्य अन्य पत्रिकाओं से दोगुना रखा। इस तरकीब ने अपना काम भी किया।  





स्टारडस्ट के जनवरी १९७१ अंक ने स्टाल पर आते ही तहलका मचा दिया।  इस पत्रिका के कवर पर राजेश खन्ना की तस्वीर थी।  राजेश खन्ना का उस समय अभिनेत्री अंजू महेन्द्रू से रोमांस चल रहा था। राजेश  खन्ना सुपर स्टार बन चुके थे।  स्टारडस्ट की पहली कवर स्टोरी में राजेश खन्ना ही थे।  उन पर स्टोरी का शीर्षक था- क्या राजेश खन्ना ने गुप्त विवाह कर लिया है। यह शीर्षक नारी हिरा का दिया हुआ था। इस स्टोरी में राजेश खन्ना के बंधन की शूटिंग के दौरान अंजू महेन्द्रू से विवाह कर लेने का  दावा किया गया था।  





इस दो रुपये मूल्य की स्टारडस्ट के पहले तीन दिनों में २५ हजार अंक बिक गए। बॉलीवुड  पत्रकारिता को स्टारडस्ट ने झिंझोड़ दिया था। यह पत्रकरिता में नए प्रारम्भ का सन्देश था। सितारों का सिंहासन हिलने लगा था।  स्टारडस्ट के प्रत्येक आगामी अंक की, जितनी उत्सुकता से प्रतीक्षा पाठकों  को रहती, उससे कहीं अधिक धुकधुकी बॉलीवुड के सितारों को रहती कि आगामी अंक में कौन मुखपृष्ठ में होगा। मुखपृष्ठ में होने का अर्थ किसी सितारे का काला सच बाहर आना।  इस पत्रिका पर, मान हानि के बहुत से मामले चले।  किन्तु, अंततः जीत स्टारडस्ट की ही हुई। स्टार धूल में मिल गए।  






नारी हिरा ने, फ़िल्मी हस्तियों को उनके नाम के स्थान पर अपने चुटीले और व्यंग्यात्मक नाम दिए।  उदाहरण के लिए, स्टारडस्ट के लिए धर्मेंद्र गरम धरम थे।  शत्रुघ्न सिन्हा को शॉटगन सिन्हा नाम स्टारडस्ट ने ही दिया।  हेमा मालिनी को इडली मालिनी का नया नामकरण हुआ। इन जैसे बहुत से नामों को पाठकों ने तो काफी पसंद किया। सितारों में भी कुछ को यह पसंद आये, कुछ ने नापसंदगी जाहिर की। किन्तु, इससे नारी हिरा और शोभा किलाचंदानी की टीम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। 






 

१९७५ में अमिताभ बच्चन ने बॉलीवुड की फिल्म पत्र पत्रिकाओं का बहिष्कार किया था।  वह किसी पत्रकार से नहीं मिलते, कोई इंटरव्यू नहीं देते।  यह अपने आप में अनोखा था। किन्तु, यह बहिष्कार स्टारडस्ट की देन थी। उन दिनों अमिताभ बच्चन घर में चल रहे वैवाहिक कलह से तंग आ चुके थे और उन्होंने कई सह-अभिनेत्रियों से रिश्ते बनाने और सांत्वना पाने के लिए मिलना शुरू कर दिया, जिनमें ज़ीनत अमान और रेखा भी शामिल थीं। इसी बीच, उनका एक ईरानी लड़की के साथ भी अफेयर चला। इसका खुलासा स्टारडस्ट ने अपनी  कवरस्टोरी  में कर दिया।  इससे अमिताभ बच्चन बहुत रुष्ट हुए और उन्होंने सभी पत्रिकों को प्रतिबंधित कर दिया।   






नारी हिरा ने, लाना पब्लिशिंग ( बाद में मैग्ना) के अंतर्गत स्टारडस्ट का प्रकाशन प्रारम्भ किया था।  इस प्रकाशन ने बाद में, सैवी, शोटाइम, सोसाइटी और हेल्थ का भी प्रकाशन किया।  यह सभी पत्रिकाएं खूब बिकी।  स्टारडस्ट ने जब फिल्म पुरस्कार प्रारम्भ किये तो बॉलीवुड के सितारे इस पुरस्कार समारोह में सम्मिलित होने के उत्सुक दिखाई दिए।  






नारी की पब्लिशिंग कंपनी  मैग्ना के वित्त निदेशक एक जैन गुजराती चार्टर्ड अकाउंटेंट नरेंद्र शाह थे।  नरेंद्र शाह ने १९८१ में चित्रलेखा से प्रतिस्पर्धा करने के लिए एक साप्ताहिक पत्रिका  स्टार वीक  प्रारम्भ की। उन्होंने सौरभ शाह को संस्थापक संपादक नियुक्त किया, जिन्हें पत्रकारिता में लगभग कोई अनुभव नहीं था और वे मात्र ढाई साल पहले ही पत्रकारिता में आए थे। उस समय चित्रलेखा की हर हफ्ते एक लाख २५ हजार प्रतियां बिकती थीं। स्टार वीक की तीन महीने के भीतर ५५ हजार प्रतियां बिकने लगीं।   

फिल्मों की अंतिम गायिका-अभिनेत्री थी सुलक्षणा पंडित



गुरुवार ६ नवंबर २०२५ को, गायिका अभिनेत्री सुलक्षणा पंडित के निधन के साथ ही हिंदी फिल्मों की अंतिम गायिका अभिनेत्री के युग का अवसान हो गया। निधन के समय वह ७१ साल की थी।  उनके निधन की तिथि के साथ एक बड़ा संयोग यह भी है कि उनका निधन भी ठीक उसी तिथि को हुआ, जिसमे ४० साल पहले अभिनेता संजीव कुमार का हुआ था। यह भी  बड़ा संयोग था कि सुलक्षणा पंडित (१२ जुलाई) और संजीव कुमार (९ जुलाई) का जन्म भी एक ही माह में हुआ था। 





सुलक्षणा पंडित, अभिनेता संजीव कुमार से अत्यधिक प्रेम करती थी।  वह उनसे विवाह करना चाहती थी। किन्तु, संजीव कुमार ने मना कर दिया।  वह सुलक्षणा की उपेक्षा भी करने लगे।  इससे सुलक्षणा का दिल टूट गया।  वह फिल्मों से दूर होती चली गई। यद्यपि, हिंदी फिल्मों में उनकी बड़ी मांग थी।  उन्हें फिल्मों का भाग्यशाली चेहरा माना जाता था। 





सुलक्षणा पंडित पार्श्व गायिका बनना चाहती थी।  उन्होंने गायिका के रूप में, लता मंगेशकर के साथ फिल्म तकदीर में सात समंदर पर से गीत गा कर अपने गायिका जीवन का प्रारम्भ किया।  उन्होंने १९७१ में, किशोर कुमार के साथ फिल्म दूर का रही का गीत बेकरार दिल गया था। इस गीत को पहले अंतरे के बाद, सुलक्षणा पंडित ने अकेले ही गाया था। इससे सुलक्षणा पंडित की संगीत की समझ और सुरों की समझ का अनुमान लगाया जा सकता है।





सुलक्षणा पंडित अत्यंत सुन्दर थी। फिल्म निर्माताओं की दृष्टि उन पर पड़ी। उन्होंने सुलक्षणा पंडित से अभिनय करने का प्रस्ताव किया।  जिसे सुलक्षणा पंडित ने स्वीकार कर लिया। उनकी नायिका के रूप में पहली फिल्म उलझन थी। इस रहस्य रोमांच से भरपूर इस फिल्म में सुलक्षणा पंडित के नायक संजीव कुमार थे।  इस फिल्म को बड़ी सफलता मिली।





उलझन का संगीत कल्याणजी आनंदजी ने दिया था।  इसके गीत बहुत लोकप्रिय हुए। किन्तु, उलझन का मात्र के गीत किशोर कुमार के साथ आज प्यारे प्यारे  से लगते हैं आप ही सुलक्षणा पंडित ने गाया था। सुलक्षणा पर फिल्माए गए शेष गीत लता मंगेशकर ने गाये थे।  इन मे अपने जीवन की उलझन को, सुबह और शाम काम ही काम लता मंगेशकर ने गाये थे। 





सुलक्षणा पंडित की अभिनय प्रतिभा का अनुमान इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि उनकी अगली फिल्म संकल्प उन्ही पर केंद्रित थी।  फिल्म में उनके नायक सुखदेव थे। संकल्प का संगीत खय्याम ने दिया था।  इस फिल्म में सुलक्षणा पंडित ने केवल एक गीत तू ही सागर है तू ही किनारा ही गया था।  शेष गीत मुकेश और महेंद्र कपूर ने गाये थे। इस गीत के लिए सुलक्षणा पंडित को, उनकी गायिका जीवन का इकलौता फिल्मफेयर पुरस्कार मिला था।  





उलझन के पश्चात्, सुलक्षणा पंडित के अभिनय जीवन को पंख लग गए।  उन्होंने अपने समय के सभी बड़े अभिनेताओं ऋषि कपूर, शशि कपूर, विनोद खन्ना, राजेश खन्ना, फ़िरोज़ खान, जीतेन्द्र, शत्रुघ्न सिन्हा, राज बब्बर, नवीन निश्चल के साथ फ़िल्में की। यहाँ तक कि उन्होंने बांगला फिल्मों के सुपरस्टार उत्तम कुमार के साथ भी एक फिल्म बंदी की। इस फिल्म के लिए हेमा मालिनी के स्थान पर सुलक्षणा पंडित को लिया गया था। सुलक्षणा पंडित की अंतिम फिल्म दो वक़्त की रोटी भी संजीव कुमार के साथ ही थी। 





सुलक्षणा पंडित ने संजीव कुमार के साथ चार फिल्मों में उलझन, वक़्त की दीवार, चेहरे पर चेहरा और दो वक़्त की रोटी ही की। बताते हैं कि संजीव कुमार भी, सुलक्षणा पंडित से प्रेम करते थे। किन्तु, वह विवाह करना नहीं चाहते थे। इसका कारण यह था कि उनके परिवार के सदस्य कम उम्र में ही स्वर्गवासी हो जाते थे। वह नहीं चाहते थे कि सुलक्षणा पंडित भी वैधव्य के दुःख को झेले।  ऐसा हुआ भी।  संजीव कुमार भी मात्र ४७ साल की आयु में ही स्वर्गवासी हो गए।  उनकी असामयिक मृत्यु के पश्चात् निराश सुलक्षणा पंडित ने भी आजीवन विवाह न करने का निर्णय ले लिया। 





आइये, सुलक्षणा पंडित को उनके गीतों और फिल्मों के लिए स्मरण करे।  उनके लोकप्रिय  गानों में जिसके लिए सबको छोड़ा, जब आती होगी याद मेरी, पप्पा जल्दी आजाना, सोमवार को हम मिले, आंखों में तुम, मन तेरी नजर में, परदेसिया तेरे देस में और अन्य शामिल हैं।  उन्होंने धरम कांटा, चेहरे पे चेहरा, संकल्प, उलझन, हेरा फेरी, अपनापन, फांसी, खानदान, गरम खून, वक्त की दीवार आदि, २५ फिल्मों में अभिनय किया।  





सुलक्षणा पंडित, हिसार (अब फतेहाबाद) के एक संगीत परिवार से थीं। महान संगीतकार पंडित जसराज उनके चाचा थे। उन्होंने नौ साल की उम्र से ही गाना शुरू कर दिया था। मुंबई में उनके निरंतर साथी उनके बड़े भाई मंधीर पंडित थे, जो स्वयं भी एक संगीतकार थे। उनके तीन भाई हैं, मंधीर, जतिन और ललित पंडित और तीन बहनें स्वर्गीय माया एंडरसन, स्वर्गीय संध्या सिंह और विजयता पंडित  थी। उनके पिता, प्रताप नारायण पंडित भी एक प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक थे।




वास्तविकता यह है कि पंडित बहनें आजीवन दुख में जीवित रही । उनकी बहन राशि पंडित (उर्फ संध्या पंडित सिंह) की हत्या कर दी गई थी। गहनों के लिए उनकी ह्त्या का आरोप  बेटे पर आरोप लगा था। किन्तु, वह बाद में उसे बरी कर दिया गया। विजयता पंडित के पति आदेश श्रीवास्तव का कैंसर से जूझने के बाद, मात्र ५१ साल की आयु में ही निधन हो गया। सुलक्षणा पंडित ने संजीव कुमार के प्रति अपने एकतरफा प्यार को बहुत गंभीरता से लिया और कई वर्षों तक मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझती रहीं। वह अवसाद में जी रही थी। उनकी बहन विजयेता ने एक बार बताया था कि बड़ी बहन राशि की हत्या का समाचार सुलक्षणा को नहीं दिया गया था।   

Friday, 7 November 2025

फिल्म रिलीज़ से पहले बिकिनी से चर्चित हुई थी मुनमुन सेन !








१९८४ में एक एक्शन फिल्म अंदर बाहर की बहुत चर्चा थी।  यह चर्चा फिल्म के दो नायकों अनिल कपूर और जैकी श्रॉफ के कारण नहीं, बल्कि इस फिल्म की नायिका के कारण थी।  फिल्म प्रदर्शित होने से पहले ही चर्चित हो चुकी यह अभिनेत्री मुनमुन सेन थी।  





मुनमुन से की दो कारणों से चर्चा थी।  निर्माता रोमू सिप्पी और निर्देशक राज एन सिप्पी की, हॉलीवुड फिल्म ४८ ऑवरस की हिंदी रीमेक फिल्म की नायिका टू पीस  बिकिनी में चित्र बॉम्बे की बड़ी अंग्रेजी हिंदी पत्र पत्रिकाओं में पसरे हुए थे। ऐसा प्रतीत होता था कि बॉलीवुड को नई सेक्स बम मिल गई।  





उस समय कई ऎसी ऎसी अभिनेत्रियां थी,  जो बिंदास अंग प्रदर्शन कर रही थी।  मुनमुन सेन के उरोजों और पतली कमर में ऐसा क्या था कि हर जगह एक नाम था मुनमुन सेन? इसका कारण था मुनमुन सेन की माँ और उनका राजघराने से सम्बंधित होना।  





मुनमुन सेन की माँ, बॉलीवुड की प्रख्यात फिल्म अभिनेत्री सुचित्रा सेन थी।  सुचित्रा सेन हिंदी फिल्मों की रोमांटिक नायिका नहीं थी। वह एक ऎसी अभिनेत्री थी, जिनके अभिनय का लोहा सभी मानते थे। वह एक ऎसी अभिनेत्री थी, जिनके शरीर से पल्लू हटता नहीं था। ऎसी प्रतिष्ठा वाली अभिनेत्री की बेटी बिकिनी में ! यह हिंदी दर्शकों का आठवां आश्चर्य था। दूसरा यह कि वह त्रिपुरा के राजघराने के दीवान की पड़पोती थी। उनकी सास, कूच बिहार के राजघराने की थी। 





कुछ भी हो, अंदर बाहर २८ सितम्बर १९८४ को प्रदर्शित हुई।  अनिल कपूर और जैकी श्रॉफ की सुपरहिट जोड़ी वाली अंदर बाहर को मुनमुन सेन की बिकिनी नहीं बचा सकी।  फिल्म बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरी।  मुनमुन सेन की बिकिनी का जादू समुद्र के ज्वार की तरह पीछे उतर गया। 





सुचित्रा सेन ने असफल प्रवेश फिल्म के बाद भी हिंदी और बांगला सही लगभग ६० फिल्मों और चालीस टीवी में शो में अभिनय किया।  किन्तु, एक भी ऐसी फिल्म नहीं है, जिसकी सफलता का श्रेय मुनमुन सेन के अभिनय को मिले।





हाँ, शादीशुदा होने के बावजूद उनके रोमांस के चर्चे खूब हुए।  उनका यह रोमांस, पहली फिल्म अंदर बाहर के निर्माता रोमू सिप्पी के साथ शुरू हो गया था।  बाद में, उनका नाम सैफ अली खान और विक्टर बनर्जी के साथ भी जुड़ा।  अब यह बात दूसरी है कि उनकी बिकिनी की तरह उनके रोमांस भी ठन्डे साबित हुए। 





मुनमुन सेन की फिल्म तनाव, फूलों के जख्म, सन्देश द डाउट, लेडीज जेल, एक और एक  ग्यारह जैसी फ़िल्में बनने से पहले ही बंद हो गई। फिल्म बारूद द फायर (२०१०) के बाद, उनकी कोई भी हिंदी फिल्म प्रदर्शित नहीं हुई।  

@ssrajamouli और @urstrulyMahesh की #GlobeTrotter फिल्म के विलेन कुम्भा @PrithviOfficial



निर्देशक एस.एस. राजामौली और ग्लोबट्रॉटर टीम ने, १५ नवंबर से पूर्व ही, आज ७ नवंबर २०२५ को फिल्म के क्रूर खलनायक कुंभा के स्वरुप वाला फर्स्ट लुक पोस्टर जारी कर दिया है। मलयालम फिल्मों से विलेन पृथ्वीराज सुकुमारन फिल्म में दुष्ट कुम्भा की भूमिका कर रहे है।  





फिल्म के नायक महेश बाबू ने, इस लुक के चित्र को पोस्ट करते हुए एक्स पर लिखा-मैं दूसरी तरफ खड़ा हूँ। अब आपसे भिड़ने का समय आ गया है कुम्भा!





 पृथ्वीराज सुकुमारन का कुम्भा रूप जारी होते ही, महेश बाबू और एसएस राजामौली के प्रशंसकों में फिल्म के १५ नवंबर को होने वाले भव्य आयोजन के प्रति उत्सुकता बढ़ गई है । उन्हें इस सात सौ करोड़ के बजट वाली मारधाड़ से युक्त फिल्म में सुकुमारन का जटिल का चरित्र महेश बाबू के नायक को चुनौती देता हुआ दिखाई दे रहा है।





फिल्म की नायिका प्रियंका चोपड़ा जोनास है। अब दर्शकों में इस फिल्म में प्रियंका चोपड़ा जोनास की मुख्य भूमिका के पोस्टर को देखने की उत्सुकता पैदा हो गई हैं।





उच्च-स्तरीय एक्शन और वैश्विक विषयों का मिश्रण करने वाली यह फिल्म श्री दुर्गा आर्ट्स के बैनर तले २०२६ में प्रदर्शित होगी।





यहाँ बताते चलें कि आज प्रभावशाली खलनायक के रूप में परिचित हिंदी दर्शकों से पृथ्वीराज का पहला परिचय रानी मुख़र्जी के नायक के रूप में फिल्म अइय्या से हुआ था।  इसके बाद वह औरंगजेब, नाम शबाना और बड़े मिया छोटे मिया के अतरिक्त विगत दिनों ही सीरीज सरजमीं में दिखाई दिए।  उन्होंने अक्षय कुमार और इमरान हाशमी की फिल्म सेल्फी का निर्माण और रणवीर सिंह की क्रिकेट पर फिल्म ८३ का वितरण किया था।  

Thursday, 6 November 2025

#ShanayaKapoor की फिल्म तू या मैं की शूटिंग पूरी!



शनाया कपूर ने बिजॉय नांबियार द्वारा निर्देशित अपनी आगामी रोमांटिक ड्रामा "तू या मैं" की शूटिंग पूरी कर ली है। इस युवा स्टार ने अपने सह-कलाकार आदर्श गौरव और टीम के साथ शूटिंग खत्म होने के जश्न की कुछ झलकियाँ साझा कीं, जिसमें एक मज़ेदार मगरमच्छ थीम वाला केक भी शामिल था जिसने सबका ध्यान खींचा। शनाया की यह तस्वीरें उनके अब तक के सबसे बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट्स में से एक के पूरा होने पर उनके उत्साह को दर्शाती हैं।





फिल्म की घोषणा वीडियो ने पहले ही ऑनलाइन काफी चर्चा बटोरी थी, जिसमें प्रशंसकों ने शनाया और आदर्श की ताज़ा जोड़ी, स्टाइलिश टोन और बेजॉय नांबियार के विशिष्ट दृश्य स्वभाव की प्रशंसा की थी. 
तू या मैं, शनाया की आँखों की गुस्ताखियाँ के बाद दूसरी और आनंद एल. राय द्वारा निर्मित बेजॉय नांबियार के साथ उनकी पहली फिल्म है।
यह फिल्म दो प्रभावशाली लोगों की कहानी है जो व्यक्तित्व में बिल्कुल अलग हैं, फिर भी घटनाओं की एक अप्रत्याशित श्रृंखला में फँस जाते हैं।





तू या मैं आधुनिक रिश्तों की एक गहन पड़ताल है, जिसमें उनकी विशिष्ट दृश्य कथावाचन शैली को शनाया और आदर्श के भावनात्मक रूप से प्रखर अभिनय के साथ मिश्रित किया गया है।शनाया कपूर के लिए, यह फिल्म एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। 




फिल्मांकन पूरा होने के साथ, टीम पोस्ट-प्रोडक्शन में जुट गई है और 2026 के वैलेंटाइन वीक में रिलीज़ की तैयारी कर रही है। इसके बाद, शनाया शुजात सौदागर द्वारा निर्देशित और अभय वर्मा के साथ जेसी में नज़र आएंगी। 

Wednesday, 5 November 2025

#SSRajamouli की #SSMB29 के #GlobeTrotter #MaheshBabu



विगत दिनों, ट्रेंड कर रहे  हैशटैग noveMBerwillbehiSStoRic में नवंबर के एम और बी अक्षर तथा हिस्टॉरिक के एस एस और आर अक्षर बड़े अक्षरों में है। 'नवंबर' का 'एमबी' अभिनेता महेश बाबू और हिस्टोरिक का 'एस एस' और 'आर/ एसएस राजामौली को इंगित करने वाला है। अक्षरों की इसी  रोचकता के कारण यह हैशटैग शीर्ष पर ट्रेंड कर रहा था।

 

 

 

 

 

 

 

राजामौली द्वारा निर्देशित महेश बाबू की उच्च-बजट वाली एक्शन-एडवेंचर फिल्म ग्लोबट्रॉटर फिल्म एसएसबी २९ की इस पोस्ट के अतिरिक्त एक स्टाइलिस्ट पोस्टर में महेश बाबू ग्लोब-एम्बेलिश्ड खोजकर्ता के रूप में दिखाई दे रहे हैं। कदाचित १५ नवंबर २०२५ को इस तथ्य पर अधिक प्रकाश डाला जायेगा।

 

 

 

 

 

 

 

भारतीय जड़ों और वैश्विक स्तर को देखते हुए फिल्म का कथानक भारतीय लोककथाओं को अंतर्राष्ट्रीय षडयंत्रो के साथ बुना हो सकता है। ऐसा कथानक घरेलू और विदेशी दोनों दर्शकों को आकर्षित करेगा। राजामौली की पूर्व की बाहुबली और आरआरआर जैसी फिल्मों ने भारतीय इतिहास को सार्वभौमिक विषयों के साथ मिश्रित किया था।

 

 

 

 

 

 

 

 

राजामौली की फ़िल्में बड़े लक्ष्य को लेकर होती है।  की फिल्मों में अक्सर बड़े दांव होते हैं। उदाहरण के रूप में बाहुबली सीरीज  की दो फ़िल्में प्रजा कल्याण और राज्य को बचाने के कथानक पर थी। आर आर आर के दो मुख्य चरित्र क्रन्तिकारी थे। इस दृष्टि से ग्लोबट्रॉटर में एक सभ्यता को बचाना, एक तबाही को रोकना, या एक दिव्य भविष्यवाणी को पूरा करना सम्मिलित हो सकता है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 फिल्मकार  राजामौली की विशिष्ट शैली है। महेश बाबू  के साथ फिल्म के सन्दर्भ में उपलब्ध संकेतों के आधार पर, यह समझा जा सकता है कि एक खोज कथा है। फिल्म का नायक  पुरातत्वविद् है, जो किसी प्राचीन रहस्य या कलाकृति (शायद हनुमान या भारतीय पौराणिक कथाओं से जुड़ी) को उजागर कर सकता है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

यही खोज उसकी विश्वव्यापी यात्रा का कारण बनती है। इसमें किसी खोए हुए अवशेष को पुनः प्राप्त करना, किसी वैश्विक खतरे को विफल करना, या किसी ऐतिहासिक षड्यंत्र का पर्दाफाश करना भी शामिल हो सकता है। इसी यात्रा के अंतर्गत वह अमेज़न और अफ्रीका जंगलों में भटकता रहता है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

एक्शन और उत्तरजीविता: जंगल की पृष्ठभूमि में तीव्र एक्शन दृश्य, उत्तरजीविता की चुनौतियाँ और संभवतः वन्यजीवों या शत्रु शक्तियों से मुठभेड़ें दिखाई देंगी, जो राजामौली की शैली के अनुरूप बड़े स्तर पर एक्शन और संकटपूर्ण दृश्यों से भरपूर होंगी ।

 

 

 

 

 

 

 

फिल्म में, महेश बाबू जहाँ पुरातत्वविद बने हैं। वही उनकी नायिका प्रियंका चोपड़ा की भूमिका स्पष्ट नहीं है। किन्तु, जिस प्रकार का फिल्म का कैनवास है और प्रियंका चोपड़ा की अंतर्राष्ट्रीय स्वीकार्यता  है, उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि उनकी भूमिका महेश बाबू की ग्लैमरस नायिका की तरह नही होगी। बल्कि वह उनके पुरातत्व अभियान की सक्रिय सहयोगिनी हो सकती है।

 

 

 

 

 

 

 

राजामौली  कुशल फिल्मकार हैं।  उनकी फ़िल्में दीर्घ निर्माण प्रक्रिया का परिणाम होती ह एसएसएमबी २९ भी इसी निर्माण प्रक्रिया के अंतर्गत निर्मित है। इस फिल्म की निर्माण प्रक्रिया के अंतर्गत बनाई जा रही फिल्म है। राजामौली अपनी इस फिल्म की शूटिंग वाराणसी में करना चाहते थे। किन्तु, तकनीकि जटिलता और असुविधा के फलस्वरूप इस फिल्म के लिए हैदराबाद के रामोजी फिल्म सिटी में वाराणसी के सेट्स निर्मित किये गए। इस निर्माण में ५० करोड़ व्यय हुए।  यह फिल्म एक बहुभाषी परियोजना है, जिसका लक्ष्य २५ मार्च, २०२७ को विश्व के १२० से अधिक देशों में  रिलीज़ होना है। फिल्म की सार्वभौमिक अपील वाली कहानी का संकेत देता है ।