गुरुवार ६ नवंबर २०२५ को, गायिका अभिनेत्री सुलक्षणा पंडित के निधन के साथ ही हिंदी फिल्मों की अंतिम गायिका अभिनेत्री के युग का अवसान हो गया। निधन के समय वह ७१ साल की थी। उनके निधन की तिथि के साथ एक बड़ा संयोग यह भी है कि उनका निधन भी ठीक उसी तिथि को हुआ, जिसमे ४० साल पहले अभिनेता संजीव कुमार का हुआ था। यह भी बड़ा संयोग था कि सुलक्षणा पंडित (१२ जुलाई) और संजीव कुमार (९ जुलाई) का जन्म भी एक ही माह में हुआ था।
सुलक्षणा पंडित, अभिनेता संजीव कुमार से अत्यधिक प्रेम करती थी। वह उनसे विवाह करना चाहती थी। किन्तु, संजीव कुमार ने मना कर दिया। वह सुलक्षणा की उपेक्षा भी करने लगे। इससे सुलक्षणा का दिल टूट गया। वह फिल्मों से दूर होती चली गई। यद्यपि, हिंदी फिल्मों में उनकी बड़ी मांग थी। उन्हें फिल्मों का भाग्यशाली चेहरा माना जाता था।
सुलक्षणा पंडित पार्श्व गायिका बनना चाहती थी। उन्होंने गायिका के रूप में, लता मंगेशकर के साथ फिल्म तकदीर में सात समंदर पर से गीत गा कर अपने गायिका जीवन का प्रारम्भ किया। उन्होंने १९७१ में, किशोर कुमार के साथ फिल्म दूर का रही का गीत बेकरार दिल गया था। इस गीत को पहले अंतरे के बाद, सुलक्षणा पंडित ने अकेले ही गाया था। इससे सुलक्षणा पंडित की संगीत की समझ और सुरों की समझ का अनुमान लगाया जा सकता है।
सुलक्षणा पंडित अत्यंत सुन्दर थी। फिल्म निर्माताओं की दृष्टि उन पर पड़ी। उन्होंने सुलक्षणा पंडित से अभिनय करने का प्रस्ताव किया। जिसे सुलक्षणा पंडित ने स्वीकार कर लिया। उनकी नायिका के रूप में पहली फिल्म उलझन थी। इस रहस्य रोमांच से भरपूर इस फिल्म में सुलक्षणा पंडित के नायक संजीव कुमार थे। इस फिल्म को बड़ी सफलता मिली।
उलझन का संगीत कल्याणजी आनंदजी ने दिया था। इसके गीत बहुत लोकप्रिय हुए। किन्तु, उलझन का मात्र के गीत किशोर कुमार के साथ आज प्यारे प्यारे से लगते हैं आप ही सुलक्षणा पंडित ने गाया था। सुलक्षणा पर फिल्माए गए शेष गीत लता मंगेशकर ने गाये थे। इन मे अपने जीवन की उलझन को, सुबह और शाम काम ही काम लता मंगेशकर ने गाये थे।
सुलक्षणा पंडित की अभिनय प्रतिभा का अनुमान इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि उनकी अगली फिल्म संकल्प उन्ही पर केंद्रित थी। फिल्म में उनके नायक सुखदेव थे। संकल्प का संगीत खय्याम ने दिया था। इस फिल्म में सुलक्षणा पंडित ने केवल एक गीत तू ही सागर है तू ही किनारा ही गया था। शेष गीत मुकेश और महेंद्र कपूर ने गाये थे। इस गीत के लिए सुलक्षणा पंडित को, उनकी गायिका जीवन का इकलौता फिल्मफेयर पुरस्कार मिला था।
उलझन के पश्चात्, सुलक्षणा पंडित के अभिनय जीवन को पंख लग गए। उन्होंने अपने समय के सभी बड़े अभिनेताओं ऋषि कपूर, शशि कपूर, विनोद खन्ना, राजेश खन्ना, फ़िरोज़ खान, जीतेन्द्र, शत्रुघ्न सिन्हा, राज बब्बर, नवीन निश्चल के साथ फ़िल्में की। यहाँ तक कि उन्होंने बांगला फिल्मों के सुपरस्टार उत्तम कुमार के साथ भी एक फिल्म बंदी की। इस फिल्म के लिए हेमा मालिनी के स्थान पर सुलक्षणा पंडित को लिया गया था। सुलक्षणा पंडित की अंतिम फिल्म दो वक़्त की रोटी भी संजीव कुमार के साथ ही थी।
सुलक्षणा पंडित ने संजीव कुमार के साथ चार फिल्मों में उलझन, वक़्त की दीवार, चेहरे पर चेहरा और दो वक़्त की रोटी ही की। बताते हैं कि संजीव कुमार भी, सुलक्षणा पंडित से प्रेम करते थे। किन्तु, वह विवाह करना नहीं चाहते थे। इसका कारण यह था कि उनके परिवार के सदस्य कम उम्र में ही स्वर्गवासी हो जाते थे। वह नहीं चाहते थे कि सुलक्षणा पंडित भी वैधव्य के दुःख को झेले। ऐसा हुआ भी। संजीव कुमार भी मात्र ४७ साल की आयु में ही स्वर्गवासी हो गए। उनकी असामयिक मृत्यु के पश्चात् निराश सुलक्षणा पंडित ने भी आजीवन विवाह न करने का निर्णय ले लिया।
आइये, सुलक्षणा पंडित को उनके गीतों और फिल्मों के लिए स्मरण करे। उनके लोकप्रिय गानों में जिसके लिए सबको छोड़ा, जब आती होगी याद मेरी, पप्पा जल्दी आजाना, सोमवार को हम मिले, आंखों में तुम, मन तेरी नजर में, परदेसिया तेरे देस में और अन्य शामिल हैं। उन्होंने धरम कांटा, चेहरे पे चेहरा, संकल्प, उलझन, हेरा फेरी, अपनापन, फांसी, खानदान, गरम खून, वक्त की दीवार आदि, २५ फिल्मों में अभिनय किया।
सुलक्षणा पंडित, हिसार (अब फतेहाबाद) के एक संगीत परिवार से थीं। महान संगीतकार पंडित जसराज उनके चाचा थे। उन्होंने नौ साल की उम्र से ही गाना शुरू कर दिया था। मुंबई में उनके निरंतर साथी उनके बड़े भाई मंधीर पंडित थे, जो स्वयं भी एक संगीतकार थे। उनके तीन भाई हैं, मंधीर, जतिन और ललित पंडित और तीन बहनें स्वर्गीय माया एंडरसन, स्वर्गीय संध्या सिंह और विजयता पंडित थी। उनके पिता, प्रताप नारायण पंडित भी एक प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक थे।
वास्तविकता यह है कि पंडित बहनें आजीवन दुख में जीवित रही । उनकी बहन राशि पंडित (उर्फ संध्या पंडित सिंह) की हत्या कर दी गई थी। गहनों के लिए उनकी ह्त्या का आरोप बेटे पर आरोप लगा था। किन्तु, वह बाद में उसे बरी कर दिया गया। विजयता पंडित के पति आदेश श्रीवास्तव का कैंसर से जूझने के बाद, मात्र ५१ साल की आयु में ही निधन हो गया। सुलक्षणा पंडित ने संजीव कुमार के प्रति अपने एकतरफा प्यार को बहुत गंभीरता से लिया और कई वर्षों तक मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझती रहीं। वह अवसाद में जी रही थी। उनकी बहन विजयेता ने एक बार बताया था कि बड़ी बहन राशि की हत्या का समाचार सुलक्षणा को नहीं दिया गया था।

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