Sunday, 16 November 2025

#Mayasabha का विश्व प्रीमियर जागरण फिल्म फेस्टिवल में !



निर्देशक राही अनिल बर्वे की नई हिंदी फीचर फिल्म मायासभा (#Mayasabha – The Hall of Illusion) दर्शकों के समक्ष आने को है। इस बहुप्रतीक्षित फिल्म का भव्य वर्ल्ड प्रीमियर १६ नवंबर को प्रतिष्ठित जागरण फिल्म फेस्टिवल के समापन समारोह में आयोजित होगा। इस फेस्टिवल का समापन “मायासभा” के विशेष प्रीमियर के साथ होना पूरी टीम के लिए सम्मान का विषय है।  

 

मायासभा केवल एक थ्रिलर फिल्म नहीं, बल्कि मुंबई के अंधेरों में छिपी मनुष्यता की परतों का गहन अन्वेषण है। कहानी में एक पूर्व-कैदी रावराना, उसकी बहन जीनत, अद्भुत बुद्धिमत्ता वाला रहस्यमय बच्चा वासु और उसके पिता, तथा पतन के कगार पर खड़ा उद्योगपति परमेश्वर खन्ना के भिन्न दुनिया के चरित्र एक पुरानी, आकर्षक लेकिन खतरनाक दंतकथा की वजह से एक ही रास्ते पर आ मिलते हैं।

छिपे हुए सोने की तलाश उन्हें ऐसे भ्रमजाल में खींच लेती है, जहां लालच, अपराध, अंधकार और पाप की गहराइयों में अंत में बस इंसानियत की एक मासूम किरण ही टिकती है। निर्देशक राही अनिल बर्वे की कल्पनाशील दृष्टि इस पूरी कहानी को प्रतीकात्मकता, रहस्य और वातावरणीय तीव्रता से और अधिक प्रभावी बनाती है।


फिल्म का निर्माण गिरीश पटेल और अंकुर जे. सिंह (Zirkon Films Productions) द्वारा किया गया है, जबकि Astonia Media Entertainment और Third Eye Kreative Films ने सहयोग दिया है। शामराव यादव, चंदा भगवान यादव, केवल हांडा और मनीष हांडा सह-निर्माता हैं। प्रस्तुति और वितरण का कार्य Pickle Entertainment ने संभाला है, जबकि वैश्विक स्तर पर फिल्म को Zeus Films India रिलीज़ करेगी। 

 

जावेद जाफरी, वीणा जामकर, दीपक दामले और मोहम्मद समद के सशक्त अभिनय ने फिल्म में गहरा भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव डाला है।

 

तकनीकी रूप से भी मायासभा बेहद सशक्त है — कुलदीप ममानिया की सिनेमैटोग्राफी, सोहेल सनवारी की साउंड डिज़ाइन, सागर देसाई का बैकग्राउंड म्यूज़िक, प्रीतम राय का प्रोडक्शन डिज़ाइन, श्रुति बनर्जी की कॉस्ट्यूम डिज़ाइन, धनंजय प्रजापति का मेकअप, सुरेंद्र प्रजापति का आर्ट डायरेक्शन, युसूफ खान का यथार्थवादी एक्शन और एडिटर आसिफ पठान का बेहतरीन संपादन — यह सब फिल्म को उच्च सिनेमाई स्तर पर ले जाते हैं। चिराग घमांडे एसोसिएट प्रोड्यूसर और आशिष निनगुरकर क्रिएटिव कंसल्टेंट के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कहानी, पटकथा और संवाद स्वयं राही अनिल बर्वे ने लिखे हैं। 

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