Monday, 17 November 2025

#MaheshBabu के भतीजे #JayaKrishnaGhattamaneni के साथ #RashaThadani

 


अभिनेत्री रवीना टंडन की बेटी राशा थडानी के सन्दर्भ में दक्षिण से अच्छा समाचार है।  वह निर्देशक अजय भूपति के निर्देशन में बनाई जाने वाली फिल्म एबी४ में, महेश बाबू के भतीजे जया कृष्ण घट्टामनेनी के साथ तेलुगु फिल्म उद्योग को अपना पहला परिचय देने जा रही है। यह एक वास्तविक यथार्थवाद पर आधारित गहन प्रेम कहानी है। इसका निर्माण चंदामामा कथालू पिक्चर्स के तहत जेमिनी किरण द्वारा किया जा रहा है और अश्विनी दत्त द्वारा प्रस्तुत है। इसकी शूटिंग इसी महीने के अंत में प्राकृतिक परिवेश में शुरू होगी।






राशा थडानी का, इसी साल सेलुलॉइड की दुनिया में पहला प्रवेश, अजय देवगन के भांजे के साथ फिल्म आज़ाद से हुआ था। इस फिल्म का निर्देशन अभिषेक कपूर ने किया था। अपने भांजे को सहारा देने के लिए अजय देवगन ने भी फिल्म में अभिनय किया था। फिल्म में, राशा थडानी के गर्मागर्म उई अम्मा गीत के बाद भी दर्शक छविगृहों के ओर नहीं आये। इस फिल्म के निर्माण में ८० करोड़ व्यय हुए थे। किन्तु, फिल्म कुल ८ करोड़ का ग्रॉस ही कर सकी। 





आज़ाद की बुरी असफलता का परिणाम था कि फिल्म के नायक अमन देवगन गाँधी को दूसरी फिल्म तो नहीं मिल सकी, किन्तु फिल्म की उई अम्मा गर्ल राशा थडानी को, सौरभ गुप्ता के निर्देशन में मुँज्या अभिनेता अभय वर्मा के साथ फिल्म लइके लइका अवश्य मिल गयी।  इस फिल्म की शूटिंग जारी है। इस प्रकार से, राशा की तेलुगु फिल्म उनके फिल्म जीवन की तीसरी फिल्म है।   






सोशल मीडिया पर, फिल्म की घोषणा से संलग्न पोस्टर में राशा एक विशाल परिदृश्य के सामने मोटरसाइकिल की आकर्षक मुद्रा में दिखाई दे रही हैं, जो फिल्म की भावनात्मक गहराई और वैजयंती फिल्म्स जैसे बैनरों के उच्च निर्माण मूल्यों को उजागर करता है।





फिल्म के निर्देशक अजय भूपति की यह चौथी तेलुगु फिल्म होगी। इस लिए फिल्म का कार्यकारी शीर्षक एबी ४ रखा गया है। वह इससे पूर्व आरएक्स १००, महासमुद्रम और मंगलावरम जैसी फिल्मों में अपनी सशक्त और भावनात्मक रूप से आवेशित कहानियों के लिए जाने जाते हैं। एबी ४ इसी कड़ी में रुक्ष, संभवतः ग्रामीण पृष्ठभूमि पर आधारित एक नाटकीय रोमांस फिल्म प्रतीत होती है, जिसमें गहरे भावनात्मक पहलू और यथार्थवादी चरित्र चित्रण हैं।





फ़िल्म की शूटिंग इसी महीने नवंबर के अंत में शुरू होने वाली है। फिल्म २०२६ में प्रदर्शित होगी। 

  

Sunday, 16 November 2025

५ दिसम्बर को #3D में रिलीज़ होगी #NandamuriBalakrishna की #Akhanda2Thaandavam



नंदामुरी बालकृष्ण की फिल्म अखंड २: ताण्डवं के निर्माताओं ने हैदराबाद के प्रसाद मल्टीप्लेक्स में आयोजित एक कार्यक्रम में फिल्म के एक आश्चर्यजनक त्रिआयामी प्रारूप में रिलीज़ करने की घोषणा की।





इसके साथ ही यह भी पुष्टि की गई कि फिल्म ५ दिसंबर, २०२५ को २डी और ३डी दोनों ही प्रारूपों में दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी।






अखंड २, निर्देशक बोयापति श्रीनु और अभिनेता बालकृष्ण के साथ उनका चौथा सहयोग है। इस सीक्वल में बालकृष्ण दिव्य योद्धा अघोरा की भूमिका में हैं, जो प्रतिपक्षी आदि पिनिशेट्टी का सामना करते हैं।





थमन एस ने हिट सिंगल द थांडवम सॉन्ग सहित अन्य गीतों का संगीत दिया है। मूल फिल्म अखंड की दो सौ करोड़ की सफलता के बाद,  सीक्वल फिल्म के प्रमुख एक्शन दृश्यों के लिए बेहतर त्रिआयामी दृश्यों के अतिरिक्त निर्माता विशाखापत्तनम, कर्नाटक, चेन्नई, काशी और अमेरिका में फिल्म के प्रचार की योजना बना रहे हैं।

अद्भुत है राजामौली की #Varanasi !



निर्देशक एस.एस. राजामौली ने १५ नवंबर को हैदराबाद के रामोजी फिल्म सिटी में अपनी ऐतिहासिक फिल्म वाराणसी का पहला लुक और टीज़र पचास हजार प्रशंसकों की उपस्थिति में जारी किया।





इस फिल्म में महेश बाबू रुद्र के रूप में, प्रियंका चोपड़ा जोनास मंदाकिनी के रूप में, और पृथ्वीराज सुकुमारन खलनायक कुंभा के रूप में हैं। फिल्म वाराणसी की कहानी प्राचीन काल से लेकर वर्तमान तक फैली हुई है और रामायण से प्रेरित है।





यद्यपि, इस कार्यक्रम में एक भाषण के दौरान राजामौली द्वारा अपने नास्तिक होने पर की गई टिप्पणियों ने फिल्म के पौराणिक विषयों के बीच ऑनलाइन तीखी प्रतिक्रिया को जन्म दे  दिया है ।  किन्तु,वाराणसी में रुद्र के रूप में तेलुगु फिल्म अभिनेता महेश बाबू का पहला लुक वाकई धमाकेदार है! फिल्म से विशेषकर वह दृश्य जहाँ वानर सेना भगवान राम को उठाती है, रोंगटे खड़े कर देने वाला है... वाकई अद्भुत है। 






वाराणसी का कोई आधिकारिक कथानक स्पष्ट नहीं किया गया है। किन्तु, छन  छन कर आती जानकारियां और सूत्र बताते हैं कि वाराणसी राजामौली के पिछले महाकाव्यों जैसे बाहुबली और आरआरआर के समान एक बहुस्तरीय कथा  है। इस फिल्म का आधार रुद्र (महेश बाबू), एक पौराणिक युग का योद्धा, राम का पुनर्जन्म या समय से विस्थापित संस्करण हो सकता है, जिसे एक दिव्य मिशन सौंपा गया है। एक समय-यात्रा उपकरण या रहस्यमय घटना उसे एक आधुनिक या वैकल्पिक समयरेखा में धकेल सकती है, जहाँ उसका सामना  मंदाकिनी (प्रियंका चोपड़ा) से होता है, जो अपने स्वयं की चुनौतियों से जूझने वाली एक समकालीन चरित्र है और कुंभा (पृथ्वीराज) एक कालातीत विरोधी है।





संघर्ष: कथानक रुद्र की एक भविष्यवाणी को पूरा करने या कुंभा को हराने की खोज के इर्द-गिर्द घूम सकता है भावनात्मक सार: जैसा कि श्रीनु वैतला ने कहा है, यह फिल्म दिवंगत सुपरस्टार कृष्णा के अपने बेटे महेश बाबू को श्री राम के रूप में देखने के सपने को पूरा करती है, जो एक बड़े महाकाव्य में बुने गए व्यक्तिगत या पारिवारिक मोचन चाप का सुझाव देती है।





संक्षेप में, वाराणसी समय-यात्रा और रामायण से प्रेरित पौराणिक कथाओं के एक अभूतपूर्व मिश्रण का प्रदर्शन करने वाली फिल्म लगती है, जिसके केंद्र में महेश बाबू का रुद्रा है, जिसे गतिशील कलाकारों और राजामौली की दूरदर्शी कहानी का साथ मिला है। आशा है कि भविष्य में फिल्म की शूटिंग के साथ साथ फिल्म सम्बन्धी बहुत सी अन्य जानकारियां मिलेगी।

#MaheshBabu #PriyankaChopra #Prithviraj #SSRajamouli की #VARANASI

#SSRajamouli की #MaheshBabu के साथ फ़िल्म #Varanasi

 





















































 






































बनते ही बंद हो गया धर्मेन्द्र, तनूजा और दुलाल गुहा का प्रोडक्शन हाउस !



निर्देशक दुलाल गुहा ने,  कुल  फिल्मों का निर्देशन किया था।  इसमें से छह फिल्मे धर्मेंद्र  के साथ थी।  इन फिल्मों में मेरा करम मेरा धरम, दो दिशाएं, दिल का हीरा, प्रतिज्ञा, दोस्त, चांद और सूरज के नाम उल्लेखनीय है। दुलाल ने,धर्मेंद्र की फिल्म इज्जत की कहानी भी लिखी थी। उन्हें धर्मेंद्र की फिल्म चांद और सूरज की कथा और पटकथा भी लिखी थी। 





उपरोक्त चित्र, निर्देशक दुलाल गुहा की धर्मेंद्र के साथ पहली फिल्म चाँद और सूरज के सेट से है। चाँद और सूरज (१९६५) में बनी फ़िल्म है, जिसका निर्माण गंगा चित्रा के अंतर्गत    हुआ था। इस फ़िल्म में धर्मेंद्र, अशोक कुमार, तनुजा, निरूपा रॉय और असित सेन ने अभिनय किया था। फ़िल्म का संगीत सलिल चौधरी ने दिया था। इस फ़िल्म का तमिल में अन्नाविन आसई (१८६६) नाम से पुनर्निर्माण किया गया था।





उपरोक्त चित्र दुलाल गुहा की दूसरी निर्देशित फिल्म चाँद और सूरज का है।  इस फिल्म से पहले दुलाल गुहा ने, गायक तलत महमूद के साथ उनकी एकमात्र अभिनय वाली फिल्म एक गाँव की कहानी थी। इस फिल्म में माला सिन्हा और आईएस जोहर ने भी अभिनय किया था। चाँद और सूरज दुलाल गुहा की दूसरी निर्देशित फिल्म थी। इस फिल्म की शूटिंग के समय दोनों में अच्छी दोस्ती हो गई।  इस चित्र को इंस्टाग्राम पर लगाते हुए धर्मेंद्र यादें साझा करते हुए लिखते है - 





दुलाल गुहा, एक प्यारे भाई। एक प्रतिभाशाली निर्देशक। ….मैं ….तनु (तनूजा) और दुलाल दा हमेशा एक खुशमिजाज कंपनी थे। एक दिन, अचानक हमने एक साथ फिल्म निर्माण की योजना बनाई… अपनी कंपनी का नाम तय करते समय…हमने सोचा…डी दुलाल दा के लिए…डी धर्मेंद्र के लिए और टी तनुजा के लिए…इतना सुंदर लिखा हुआ नाम…निकला…डीडीटी प्रोडक्शन।  फिर अचानक हमें एहसास हुआ… डीडीटी तो जर्म्स को मारने के लिए कुछ है। इसलिए हम हंसते रहे और हंसते रहे और फिल्म निर्माण का विचार ठंडे बस्ते में चला गया…हा हा…।

#Mayasabha का विश्व प्रीमियर जागरण फिल्म फेस्टिवल में !



निर्देशक राही अनिल बर्वे की नई हिंदी फीचर फिल्म मायासभा (#Mayasabha – The Hall of Illusion) दर्शकों के समक्ष आने को है। इस बहुप्रतीक्षित फिल्म का भव्य वर्ल्ड प्रीमियर १६ नवंबर को प्रतिष्ठित जागरण फिल्म फेस्टिवल के समापन समारोह में आयोजित होगा। इस फेस्टिवल का समापन “मायासभा” के विशेष प्रीमियर के साथ होना पूरी टीम के लिए सम्मान का विषय है।  

 

मायासभा केवल एक थ्रिलर फिल्म नहीं, बल्कि मुंबई के अंधेरों में छिपी मनुष्यता की परतों का गहन अन्वेषण है। कहानी में एक पूर्व-कैदी रावराना, उसकी बहन जीनत, अद्भुत बुद्धिमत्ता वाला रहस्यमय बच्चा वासु और उसके पिता, तथा पतन के कगार पर खड़ा उद्योगपति परमेश्वर खन्ना के भिन्न दुनिया के चरित्र एक पुरानी, आकर्षक लेकिन खतरनाक दंतकथा की वजह से एक ही रास्ते पर आ मिलते हैं।

छिपे हुए सोने की तलाश उन्हें ऐसे भ्रमजाल में खींच लेती है, जहां लालच, अपराध, अंधकार और पाप की गहराइयों में अंत में बस इंसानियत की एक मासूम किरण ही टिकती है। निर्देशक राही अनिल बर्वे की कल्पनाशील दृष्टि इस पूरी कहानी को प्रतीकात्मकता, रहस्य और वातावरणीय तीव्रता से और अधिक प्रभावी बनाती है।


फिल्म का निर्माण गिरीश पटेल और अंकुर जे. सिंह (Zirkon Films Productions) द्वारा किया गया है, जबकि Astonia Media Entertainment और Third Eye Kreative Films ने सहयोग दिया है। शामराव यादव, चंदा भगवान यादव, केवल हांडा और मनीष हांडा सह-निर्माता हैं। प्रस्तुति और वितरण का कार्य Pickle Entertainment ने संभाला है, जबकि वैश्विक स्तर पर फिल्म को Zeus Films India रिलीज़ करेगी। 

 

जावेद जाफरी, वीणा जामकर, दीपक दामले और मोहम्मद समद के सशक्त अभिनय ने फिल्म में गहरा भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव डाला है।

 

तकनीकी रूप से भी मायासभा बेहद सशक्त है — कुलदीप ममानिया की सिनेमैटोग्राफी, सोहेल सनवारी की साउंड डिज़ाइन, सागर देसाई का बैकग्राउंड म्यूज़िक, प्रीतम राय का प्रोडक्शन डिज़ाइन, श्रुति बनर्जी की कॉस्ट्यूम डिज़ाइन, धनंजय प्रजापति का मेकअप, सुरेंद्र प्रजापति का आर्ट डायरेक्शन, युसूफ खान का यथार्थवादी एक्शन और एडिटर आसिफ पठान का बेहतरीन संपादन — यह सब फिल्म को उच्च सिनेमाई स्तर पर ले जाते हैं। चिराग घमांडे एसोसिएट प्रोड्यूसर और आशिष निनगुरकर क्रिएटिव कंसल्टेंट के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कहानी, पटकथा और संवाद स्वयं राही अनिल बर्वे ने लिखे हैं। 

Saturday, 15 November 2025

#SSRajamouli की फिल्म में #MaheshBabu की मन्दाकिनी #PriyankaChopra !



एसएस राजामौली, आज १५ नवंबर, २०२५ को हैदराबाद के रामोजी फिल्म सिटी में आयोजित ग्लोबट्रॉटर कार्यक्रम का आयोजन कर रहे हैं। इस आयोजन में महेश बाबू, प्रियंका चोपड़ा जोनास और पृथ्वीराज सुकुमारन भी भाग लेंगे।  इस कार्यक्रम में, राजामौली निर्देशित फिल्म एसएसएमबी२९ के आधिकारिक शीर्षक की घोषणा के साथ पहली झलक भी दिखाई जाएगी।





इससे पूर्व, राजामौली ने इस फिल्म में, महेश बाबू के साथ विश्व भ्रमण करने वाली नायिका की भूमिका कर रही बॉलीवुड और हॉलीवुड की अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा जोनास के चरित्र का परिचय देते हुए, एक पहला परिचय चित्र जारी किया।





इस फिल्म में प्रियंका चोपड़ा मन्दाकिनी की भूमिका कर रही है।  इस चरित्र के परिचय में जारी आकर्षक तस्वीर में प्रियंका चोपड़ा हवा में लहराती हुई पीली साड़ी में एक ऊबड़-खाबड़, विस्फोटक पृष्ठभूमि के सामने बंदूक थामे हुए दिखाई दे रही हैं। यह चित्र प्रियंका चोपड़ा के चरित्र के बहुस्तरीय, सशक्त होने का परिचय देने वाला है। यह चित्र सोशल मीडिया पर पोस्ट होते ही वायरल चर्चा का विषय बन चुका है। 





इस फिल्म का कथानक एक पौराणिक नायक (संभवतः भगवान् हनुमान या किसी अन्य महाकाव्य से प्रेरित नायक) की यात्रा से प्रेरित है। इस भूमिका को तेलुगु सुपरस्टार महेश बाबू अपनी २९वीं फिल्म  में कर रहे है। इस कहानी में महेश बाबू के चैरता के विरुद्ध एक शक्तिशाली प्रतिद्वंदी (पृथ्वीराज सुकुमारन) है। इस साहसिक और रोमांचक कथा में मंदाकिनी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती लगती है। कदाचित एक सहयोगी, एक प्रभावशाली प्रेमिका या एक सिद्ध प्रतिपक्षी ! विदेशी हथियारों और भू-भाग-आधारित चुनौतियों से युक्त एक्शन दृश्य, जैसा कि पोस्टर की विस्फोटक पृष्ठभूमि और प्रियंका के बंदूकधारी रुख से संकेत मिलता है।





प्रियंका चोपड़ा, हाल ही में उड़ीसा की शूटिंग में शामिल हुईं थी। बतातें हैं कि इस फिल्म की कहानी को अभी भी गढ़ा जा रहा है। यो भी राजामौली फिल्मांकन के दौरान अपनी कहानियों को और भी निखारने के लिए जाने जाते हैं।





 फिल्म के आकार को देखते हुए, यह भारतीय सिनेमा में एक मील का पत्थर साबित होने वाली है, जिसमें राजामौली की विशिष्ट दृश्य कथा-कथन को एक ऐसे कथानक के साथ जोड़ा गया है जो पौराणिक रूपांतरणों को नई परिभाषा दे सकता है।

कभी #Dharmendra की नायिका नहीं थी #KaminiKaushal !


 

१९४० और १९५० के दशक की, सबसे अधिक पारिश्रमिक लेने वाली बॉलीवुड फिल्म अभिनेत्री कामिनी कौशल का १४ नवंबर २०२५ को निधन हो गया।  वह ९८ वर्ष की आयु में अपनी स्मृतियाँ छोड़ कर चली गई।  इसके साथ ही, कामिनी कौशल को श्रद्धांजलि संदेशों और लेखों की बाढ़ आ गई। 





इधर, बॉलीवुड के ही-मैन धर्मेंद्र का स्वस्थ्य भी अच्छा नहीं चल रहा है।  कुछ समय पूर्व वह मुंबई के अस्पताल में भर्ती भी रहे थे।  उनके अस्पताल में भर्ती होने और उनका स्वास्थ्य अच्छा न होने के समाचार ने, मुम्बइया प्रेस में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया।  धर्मेंद्र को एक ही दिन में दो दो बार स्वर्गवासी घोषित कर दिया गया। कथित राष्ट्रीय चैनलों ने उन्हें भावभीनी श्रृद्धांजलि क्लिप्स भी चला दी।  





रोचक और मूर्खापूर्ण स्थिति बनी कामिनी कौशल के निधन पर।  लगभग सभी श्रद्धांजलियों में, धर्मेंद्र की इंस्टाग्राम पर २०२१ में लिख गई एक पोस्ट का उल्लेख था, जिसमे लगाए गए एक चित्र में धर्मेंद्र और  कामिनी कौशल  मुस्कुराते हुए उत्साह दिखते हुए एक दूसरे का स्वागत कर रहे थे, परिचय लेते लग रहे थे। इस पोस्ट में धर्मेंद्र ने लिखा था - मेरी जिंदगी की, पहली फिल्म शहीद की नायिका कामिनी कौशल के साथ पहली मुलाकात की पहली तस्वीर... दोनों के चेहरे पर प्यार... इक्क प्यार भारी परिचय...।





विद्वान लेखकों ने, इसे कामिनी कौशल के सा थ पहली फिल्म बताते हुए कामिनी कौशल को धर्मेंद्र की  पहली फिल्म शहीद की नायिका बता दिया। जबकि, वास्तविकता यह थी कि धर्मेंद्र ने कभी भी किसी शहीद शीर्षक वाली फिल्म में अभिनय नहीं किया।  कदाचित धर्मेंद्र उस शहीद का उल्लेख कर रहे थे, जिसे उन्होंने पहली बार देखा था।





कामिनी कौशल की फिल्म शहीद १९४८ में प्रदर्शित हुई थी। इस फिल्म में कामिनी कौशल के नायक दिलीप कुमार थे। यह कामिनी कौशल के फिल्म जीवन की पांचवी फिल्म थी।  उस समय उस समय धर्मेंद्र की आयु १३ साल थी। उस समय धर्मेंद्र पंजाब के साहनेवाल में आठवी की पढ़ाई कर रहे थे। उन्होंने १९५२ में दसवी की परीक्षा दे रहे थे।  १९५४ में, उनका प्रकाश कौर के साथ विवाह हुआ।





धर्मेंद्र ने, १९६० में फिल्मफेयर की प्रतिभा खोज प्रतियोगिता जीत कर फिल्मी दुनिया में प्रवेश किया था।  उनकी नायक के रूप में पहली फिल्म दिल भी तेरा हम भी तेरे (१९६०) थी। इस फिल्म में उनके साथ बलराज साहनी थे तथा उनकी नायिका कुमकुम थी। इस फिल्म के प्रदर्शन के समय, कामिनी कौशल ने फिल्म बैंक मैनेजर के बाद फिल्मों से अवकाश ले लिया था।  उनकी वापसी, राजकुमार के साथ फिल्म गोदान (१९६३) से हुई थी।  किन्तु, अगली फिल्म, १९६५ में प्रदर्शित मनोज कुमार अभिनीत फिल्म शहीद में मनोज कुमार के भगत सिंह की माँ के रूप में हुई।  इस फिल्म के बाद, कामिनी कौशल अधिकतर चरित्र भूमिकाओं में ही दिखाई दी। 





धर्मेंद्र की कामनी कौशल के साथ पहली फिल्म, ८ अगस्त १९६९ को प्रदर्शित फिल्म आदमी और इंसान थी।  इस फिल्म में कामिनी कौशल ने श्रीमती खन्ना की भूमिका की थी तथा वह परदे पर धर्मेंद्र की रोमांस  मीना खन्ना यानि सायरा बानू की माँ की भूमिका की थी।  स्पष्ट रूप से, आदमी और इंसान में, कामिनी कौशल धर्मेंद्र की रोमांस नहीं, बल्कि, सास थी।





इस फिल्म के बाद, कामिनी कौशल ने धर्मेंद्र के साथ यकीन (शर्मीला टैगोर), इश्क पर जोर नहीं (साधना) में ही अभिनय किया। इन सभी फिल्मों में कामिनी कौशल चरित्र अभिनेत्री थी। स्पष्ट है कि कामिनी कौशल कभी भी धर्मेंद्र की किसी फिल्म की नायिका नहीं बनी। 






कदाचित, धर्मेंद्र ने अपनी उपरोक्त पोस्ट में, अपने द्वारा देखी गई पहली फिल्म शहीद का उल्लेख किया था, जिसकी नायिका कामिनी कौशल थी।  धर्मेंद्र ने, इंस्टाग्राम पर जो चित्र लगाया है, वह फिल्म आदमी और इंसान के सेट पर पहली भेंट का था।  

Thursday, 13 November 2025

प्रधान मंत्री से प्रधान मंत्री की माँ तक #RaveenaTandon !



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बचपन से लेकर राष्ट्र के नेता के रूप में उनके उदय तक के प्रेरक सफ़र को दर्शाने वाली एक नई और प्रभावशाली बायोपिक माँ वंदे की घोषणा की गई है। क्रांति कुमार सीएच द्वारा निर्देशित इस फ़िल्म का शीर्षक द एंथम ऑफ़ अ मदर है।  यह मोदी और उनकी माँ हीराबेन के बीच गहरे और भावनात्मक बंधन पर केंद्रित है। यह फ़िल्म इस बात पर प्रकाश डालती है कि कैसे हीराबेन के मूल्यों, दृढ़ता और सादगी ने उनके बेटे के चरित्र को गढ़ने और जीवन की चुनौतियों से पार पाने में, खासकर उनके पिता के निधन के बाद, उनका मार्गदर्शन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 






निर्देशक क्रांति कुमार सीएच इस फिल्म में मलयालम अभिनेता उन्नी मुकुंदन को नरेंद्र मोदी की भूमिका निभाने के लिए चुना गया है, जो इस भूमिका में प्रामाणिकता और भावनात्मक गहराई दोनों लाएंगे। उन्होंने बताया कि मोदी के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान अहमदाबाद में पले-बढ़े होने के कारण यह अवसर और भी सार्थक हो गया।






इस फिल्म में,  कन्नड़ फिल्म अभिनेता यश की सफलतम फिल्म केजीएफ चैप्टर २ में प्रधान मंत्री की भूमिका कर चुकी बॉलीवुड फिल्म अभिनेत्री रवीना टंडन ने प्रधान मंत्री मोदी की माँ हीराबेन मोदी की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह उनके अब तक के सबसे भावनात्मक रूप से प्रभावशाली प्रदर्शनों में से एक है। उम्मीद है कि उनका किरदार कहानी में शक्ति और गर्मजोशी लाएगा, और भारत के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक को आकार देने वाले मातृ प्रेम के सार को दर्शाएगा।






रवीना टंडन ?


 फिल्म लेखक और निर्देशक रवि टंडन की बेटी रवीना टंडन ने, अपने फिल्म जीवन का प्रारम्भ सलमान खान के साथ एक्शन फिल्म पत्थर के फूल से किया था। उन्हें २००१ में प्रदर्शित कल्पना लाजमी निर्देशित फिल्म दमन में दुर्गा के भूमिका के लिए श्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था। अब तक १२० से अधिक फ़िल्में और शो कर चुकी रवीना टंडन ने यश की २०२२ में प्रदर्शित कन्नड़ फिल्म केजीएफ चैप्टर १ में भारत की प्रधान मंत्री का रील लाइफ चरित्र रामिका सेन भूमिका की थी। उनकी दस फिल्मे प्रदर्शित होने वाली है। 







उन्नी कृष्णन 


फिल्म माँ वन्दे में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका करने वाले अभिनेता उन्नी मुकुन्दन मलयालम फिल्म अभिनेता है।  उनकी पहली फिल्म तमिल भाषा में सीडान थी। वैशाख की एक्शन कॉमेडी फिल्म मल्लू सिंह से वह स्थापित हो गए।  उन्हें अपनी निर्माता के रूप में पहली फिल्म मेप्पड्ययन के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिल चुका है। अब तक पचास फिल्मों में अभिनय कर चुके उन्नी मुकुन्दन १५ फिल्मे प्रदर्शित होने वाली है।  

#SanjayMishra के दुर्लभ प्रसाद की दूसरी शादी #MahimaChaudhary के साथ



विगत दिनों, सोशल मीडिया और ग्लॉसी पत्र पत्रिकाओं में एक शादी का चित्र प्रकाशित हुआ था।  यह चित्र अभिनेत्री महिमा चौधरी और अभिनेता संजय मिश्रा का था।  इसमें महिमा चौधरी दुल्हन की वेशभूषा में थी, जबकि संजय मिश्रा बूढ़े दूल्हा बने दिखाई दे रहे थे। 






अटकलें लगाई जाने लगी कि क्या संजय मिश्रा ने इस उम्र में आ कर शादी कर ली है ? क्या महिमा चौधरी ने सचमुच संजय मिश्रा से विवाह कर लिया है ? अंततः यह अटकलें असत्य साबित हुई। 





वास्तव में यह चित्र फिल्म के प्रचार के लिए था।  निर्देशन सिद्धांत राज सिंह की फिल्म दुर्लभ प्रसाद की दूसरी शादी के एक प्रसंग से लिया गया था। इसे फिल्म निर्माता ने बड़ी चतुराई से वास्तविक विवाह की तरह प्रसारित कर दिया था।  इस हास्य फिल्म को  रिश्तों, उम्र, समाज और एक अधूरेपन की भावनात्मक बेचैनी को बहुत सरल और संवेदनशील तरीके से दर्शाने वाली फिल्म बताया जा रहा है।





फिल्म में संजय मिश्रा दुर्लभ प्रसाद की शीर्षक भूमिका कर रहे है। महिमा चौधरी की बबिता की भूमिका रोमांटिक कोण लाने वाली बताई जा रही है। फिल्म में, इनके अतिरिक्त व्योम, पलक लालवानी, प्रवीण सिंह सिसोदिया और श्रीकांत वर्मा भी प्रमुख भूमिकाओं में नजर आएँगे। 





बनारस की गलियों में फिल्माई गई फिल्म दुर्लभ प्रसाद की दूसरी शादी के निर्माता एकांश बच्चन और हर्षा बच्चन ने प्रोड्यूस किया है, जबकि रमित ठाकुर सह-निर्माता हैं। कहानी और स्क्रीनप्ले प्रशांत सिंह ने लिखे हैं। दुर्लभ प्रसाद की दूसरी शादी १९ दिसंबर २०२५ को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है।





महिमा चौधरी ?


महिमा चौधरी की फिल्म यात्रा १९९७ में, प्रदर्शित निर्देशक सुभाष घई की शाहरुख़ खान के साथ फिल्म परदेस से।  फिल्म में महिमा ने एक भारतीय लड़की कुसुम गंगा की भूमिका की थी। फिल्म बड़ी सफल हुई थी।  किन्तु, आगे चल कर महिमा चौधरी अपनी इस प्रारंभिक सफलता को भुना नहीं पाई।  उन्होंने अपनी करियर को बेहद अगम्भीरता से लिया। नतीजे के तौर पर महिमा चौधरी, बयालीस बड़ी छोटी फ़िल्में करने के बाद भी दुर्लभ प्रसाद की दूसरी दुल्हन बनने कोई विवश है। 






संजय मिश्रा ?


इसे संयोग ही कहेंगे कि टीवी सीरियल कहानी एक कन्या की, चाणक्य, हम बम्बई नहीं जायेंगे और सॉरी मेरी लारी से अपने कैमरा जीवन का प्रारम्भ करने वाले संजय मिश्रा का फिल्म जीवन भी शाहरुख़ खान के साथ फिल्म ओह डार्लिंग यह है इंडिया से हुआ था। संजय मिश्रा विशिष्ट शैली की फिल्मों के प्रतिष्ठित हस्ताक्षर है।  वह अब तक दो सौ से अधिक फ़िल्में कर चुके है।  उनकी २६ अन्य फिल्मे निकट भविष्य में प्रदर्शित होंगी।  

#BawejaStudios की एनिमेटेड फिल्म #HindDiChadar – GuruLadhoRe



 

चार साहिबजादे की भारी सफलता के बाद, बावेजा परिवार एक और शक्तिशाली एनिमेटेड फीचर "हिंद दी चादर - गुरु लाधो रे" के साथ लौट आया है। बावेजा स्टूडियो और इरोस इंटरनेशनल द्वारा निर्मित, रोवेना बावेजा द्वारा निर्देशित, यह फिल्म नौवें सिख गुरु, गुरु तेग बहादुर जी की प्रेरक और भावनात्मक कहानी को जीवंत करती है।

 




चार साहिबजादे की अपार सफलता के बाद, बावेजा परिवार एक और शक्तिशाली एनिमेटेड फीचर के साथ वापस आ गया है, जो श्री गुरु तेग बहादुर जी के एक भावनात्मक साका, "हिंद दी चादर - गुरु लाधो रे" का एक पवित्र पुनर्कथन है। यह फिल्म इसकी प्रीक्वल और चार साहिबजादे श्रृंखला की आखिरी फिल्म है।

 




हरमन बावेजा के जन्मदिन से ठीक पहले जारी किया गया यह टीजर, इतिहास के एक प्रभावशाली और गहरे मार्मिक पुनर्कथन की झलक प्रस्तुत करता है, जो साहस, विश्वास, स्वतंत्रता और सर्वोच्च बलिदान का जश्न मनाता है।

 




17वीं शताब्दी की पृष्ठभूमि पर आधारित, "हिंद दी चादर - गुरु लाधो रे" गुरु तेग बहादुर जी की बकाला से, जहाँ उन्हें सच्चे गुरु के रूप में प्रकट किया गया था, सम्राट औरंगज़ेब के अत्याचार के विरुद्ध उनके निडर संघर्ष की कहानी है। ऐसे समय में जब देश भर में उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण का बोलबाला था, गुरु तेग बहादुर जी प्रतिरोध की आवाज़ बन गए - आस्था, स्वतंत्रता और मानवता के अधिकार की रक्षा करते हुए। चांदनी चौक में उनका सर्वोच्च बलिदान भारतीय इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण मोड़ों में से एक है और एक ऐसा क्षण जिसने आने वाली पीढ़ियों के लिए साहस और करुणा को नई परिभाषा दी।

 





"हक़" की सफलता के बाद, हरमन बावेजा इस दिल को छू लेने वाले प्रोजेक्ट के साथ अपनी रचनात्मकता को आगे बढ़ा रहे हैं। फिल्म के बारे में बात करते हुए, हरमन कहते हैं, "मेरे लिए, ऐसी कहानियाँ बताना ज़रूरी है जो हमारी जड़ों, साहस, बलिदान और मानवता की कहानियों को दर्शाती हों। हिंद दी चादर - गुरु लाधो रे सिर्फ़ एक फिल्म नहीं है; यह हमारे इतिहास की उस भावना को श्रद्धांजलि है, जिसके बारे में दुनिया को ज़्यादा जानकारी नहीं है।"

 




निर्देशक रोवेना बावेजा कहती हैं, "यह कहानी हमारे लिए गहरे अर्थ रखती है। श्री गुरु तेग बहादुर जी का बलिदान सच्ची शक्ति और करुणा की शाश्वत याद दिलाता है। हमने एनीमेशन के माध्यम से उनकी यात्रा को जीवंत करने में अपना पूरा दिल लगा दिया है, और हमें उम्मीद है कि यह हर पीढ़ी के दर्शकों को प्रभावित करेगी।"

 



 

हिंद दी चादर - गुरु लाधो रे के साथ, बावेजा स्टूडियोज़ रचनात्मक सीमाओं को आगे बढ़ा रहा है। बैनर के पास आगे भी कई रोमांचक फ़िल्में हैं जिनमें बॉय फ्रॉम अंडमान, कैप्टन इंडिया, दिल का दरवाज़ा और कश्मीर के पहले अशोक चक्र विजेता की बायोपिक इखवान शामिल हैं।

राही अनिल बर्वे की फ़िल्म #Matasabha शीघ्र सिनेमाघरों में



तुम्बाड (२०१८) के साथ भारतीय सिनेमा की शैली को नई परिभाषा देने वाले  फिल्मकार  राही अनिल बर्वे की दूसरी निर्देशित फ़िल्म मायासभा के प्रदर्शन की तैयारी कर रहे है।  यह फिल्म शीघ्र ही छविगृहों में होगी। 





 राही अनिल बर्वे, ऐसे  निर्देशक है, जो स्वयं द्वारा निर्देशित फिल्मों को स्वयं लिखा जाना पसंद करते है।  उनकी पहली फिल्म फोक हॉरर ड्रामा थ्रिलर फंतासी फिल्म तुम्बाद सात साल पहले १२ अक्टूबर २०१८ को प्रदर्शित हुई थी।  इस फिल्म का बजट १५ करोड़ था।  प्रारम्भ में इस फिल्म को सफलता नहीं मिली।  किन्तु, बाद में पुनः प्रदर्शन पर फिल्म ने ३८ करोड़ का ग्रॉस किया।  





यद्यपि, प्रारम्भ में तुम्बाद को सफलता नहीं  मिली थी। किन्तु, उसी साल तुम्बाद २ के निर्माण की घोषणा कर दी गई थी। सीक्वल फिल्म वही से प्रारम्भ होनी थी, जहाँ तुम्बाद का समापन हुआ था। इस घोषित फिल्म का टीज़र, तुम्बाद के पुनर्प्रदर्शन की तिथि १४ सितम्बर २०२४ को दर्शकों के सामने आया।





माया सभा मूल तुम्बाद से जुडी हुई है अथवा नहीं, अभी कहना कठिन है।  ऐसा प्रतीत होता है कि माया सभा एक नितांत भिन्न कथानक वाली फिल्म है, जो एक पुराने थिएटर मालिक के चारों ओर घूमती है.  जो अपने पुराने थिएटर में ही रह रहा है। 




इस फिल्म से जुडी प्रेस रिलीज़ बताती है कि यह परियोजना वर्षों से रहस्य में डूबी हुई थी और सिनेप्रेमी इसके भविष्य को लेकर अटकलें लगा रहे थे। बर्वे की विशिष्ट विश्व-निर्माण और दृश्य कथा-कथन तुम्बाड के वेनिस प्रीमियर और भारत में पंथ-प्रशंसा के बाद विश्व स्तर पर प्रशंसा ने मायासभा के लिए आशाये और अपेक्षाएं बढ़ा दी हैं।





 अब सिनेमाघरों में इसकी रिलीज़ की पुष्टि हो गई हैमायासभा न केवल बर्वे की दूसरी फ़िल्म के रूप मेंबल्कि उद्योग के अंदरूनी सूत्रों और दर्शकों द्वारा वर्षों से पूछे जा रहे उस प्रश्न का लंबे समय से प्रतीक्षित उत्तर है कि तुम्बाड के बाद क्या होगा?