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Saturday, 15 November 2025

कभी #Dharmendra की नायिका नहीं थी #KaminiKaushal !


 

१९४० और १९५० के दशक की, सबसे अधिक पारिश्रमिक लेने वाली बॉलीवुड फिल्म अभिनेत्री कामिनी कौशल का १४ नवंबर २०२५ को निधन हो गया।  वह ९८ वर्ष की आयु में अपनी स्मृतियाँ छोड़ कर चली गई।  इसके साथ ही, कामिनी कौशल को श्रद्धांजलि संदेशों और लेखों की बाढ़ आ गई। 





इधर, बॉलीवुड के ही-मैन धर्मेंद्र का स्वस्थ्य भी अच्छा नहीं चल रहा है।  कुछ समय पूर्व वह मुंबई के अस्पताल में भर्ती भी रहे थे।  उनके अस्पताल में भर्ती होने और उनका स्वास्थ्य अच्छा न होने के समाचार ने, मुम्बइया प्रेस में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया।  धर्मेंद्र को एक ही दिन में दो दो बार स्वर्गवासी घोषित कर दिया गया। कथित राष्ट्रीय चैनलों ने उन्हें भावभीनी श्रृद्धांजलि क्लिप्स भी चला दी।  





रोचक और मूर्खापूर्ण स्थिति बनी कामिनी कौशल के निधन पर।  लगभग सभी श्रद्धांजलियों में, धर्मेंद्र की इंस्टाग्राम पर २०२१ में लिख गई एक पोस्ट का उल्लेख था, जिसमे लगाए गए एक चित्र में धर्मेंद्र और  कामिनी कौशल  मुस्कुराते हुए उत्साह दिखते हुए एक दूसरे का स्वागत कर रहे थे, परिचय लेते लग रहे थे। इस पोस्ट में धर्मेंद्र ने लिखा था - मेरी जिंदगी की, पहली फिल्म शहीद की नायिका कामिनी कौशल के साथ पहली मुलाकात की पहली तस्वीर... दोनों के चेहरे पर प्यार... इक्क प्यार भारी परिचय...।





विद्वान लेखकों ने, इसे कामिनी कौशल के सा थ पहली फिल्म बताते हुए कामिनी कौशल को धर्मेंद्र की  पहली फिल्म शहीद की नायिका बता दिया। जबकि, वास्तविकता यह थी कि धर्मेंद्र ने कभी भी किसी शहीद शीर्षक वाली फिल्म में अभिनय नहीं किया।  कदाचित धर्मेंद्र उस शहीद का उल्लेख कर रहे थे, जिसे उन्होंने पहली बार देखा था।





कामिनी कौशल की फिल्म शहीद १९४८ में प्रदर्शित हुई थी। इस फिल्म में कामिनी कौशल के नायक दिलीप कुमार थे। यह कामिनी कौशल के फिल्म जीवन की पांचवी फिल्म थी।  उस समय उस समय धर्मेंद्र की आयु १३ साल थी। उस समय धर्मेंद्र पंजाब के साहनेवाल में आठवी की पढ़ाई कर रहे थे। उन्होंने १९५२ में दसवी की परीक्षा दे रहे थे।  १९५४ में, उनका प्रकाश कौर के साथ विवाह हुआ।





धर्मेंद्र ने, १९६० में फिल्मफेयर की प्रतिभा खोज प्रतियोगिता जीत कर फिल्मी दुनिया में प्रवेश किया था।  उनकी नायक के रूप में पहली फिल्म दिल भी तेरा हम भी तेरे (१९६०) थी। इस फिल्म में उनके साथ बलराज साहनी थे तथा उनकी नायिका कुमकुम थी। इस फिल्म के प्रदर्शन के समय, कामिनी कौशल ने फिल्म बैंक मैनेजर के बाद फिल्मों से अवकाश ले लिया था।  उनकी वापसी, राजकुमार के साथ फिल्म गोदान (१९६३) से हुई थी।  किन्तु, अगली फिल्म, १९६५ में प्रदर्शित मनोज कुमार अभिनीत फिल्म शहीद में मनोज कुमार के भगत सिंह की माँ के रूप में हुई।  इस फिल्म के बाद, कामिनी कौशल अधिकतर चरित्र भूमिकाओं में ही दिखाई दी। 





धर्मेंद्र की कामनी कौशल के साथ पहली फिल्म, ८ अगस्त १९६९ को प्रदर्शित फिल्म आदमी और इंसान थी।  इस फिल्म में कामिनी कौशल ने श्रीमती खन्ना की भूमिका की थी तथा वह परदे पर धर्मेंद्र की रोमांस  मीना खन्ना यानि सायरा बानू की माँ की भूमिका की थी।  स्पष्ट रूप से, आदमी और इंसान में, कामिनी कौशल धर्मेंद्र की रोमांस नहीं, बल्कि, सास थी।





इस फिल्म के बाद, कामिनी कौशल ने धर्मेंद्र के साथ यकीन (शर्मीला टैगोर), इश्क पर जोर नहीं (साधना) में ही अभिनय किया। इन सभी फिल्मों में कामिनी कौशल चरित्र अभिनेत्री थी। स्पष्ट है कि कामिनी कौशल कभी भी धर्मेंद्र की किसी फिल्म की नायिका नहीं बनी। 






कदाचित, धर्मेंद्र ने अपनी उपरोक्त पोस्ट में, अपने द्वारा देखी गई पहली फिल्म शहीद का उल्लेख किया था, जिसकी नायिका कामिनी कौशल थी।  धर्मेंद्र ने, इंस्टाग्राम पर जो चित्र लगाया है, वह फिल्म आदमी और इंसान के सेट पर पहली भेंट का था।  

Tuesday, 4 November 2025

#Ikkis में ९० के #Dharmendra !



व्यतीत की हिंदी फिल्मो के अभिनेता और हीमैन धर्मेंद्र अस्वस्थ है। वह अस्पताल में भर्ती है।  उनके प्रशंसकों में चिंता है। यद्यपि, अस्पताल और घर के सदस्यों ने बताया कि घबराने की कोई बात नहीं है। यह रूटीन चेकअप के लिए है।  किन्तु, प्रशंसकों में बेचैनी है। 





ऐसा स्वभाविक भी है। धर्मेंद्र हिंदी फिल्मों में आज भी सक्रिय है।  उनकी एक फिल्म इक्कीस इस साल २५ दिसंबर  २०२५ को प्रदर्शित  होने जा रही है। इससे १७ दिन पूर्व, धर्मेंद्र ९० साल के हो गए होंगे।
निर्देशक श्रीराम राघवन की फिल्म इक्कीस, १९७१ के भारत- पाकिस्तान युद्ध में असीम वीरता दिखाते हुए, मात्र इक्कीस साल की आयु में अपने जीवन का बलिदान कर देने वाले सेकंड लेफ्टिनेनेट अरुण खेतरपाल पर केंद्रित फिल्म है।






इस फिल्म में अरुण खेतरपाल के पिता सेवा निवृत ब्रिगेडियर एमएल खेतरपाल की भूमिका धर्मेंद्र ने की है। अरुण खेतरपाल की भूमिका में अगस्त्य नंदा है। फिल्म की अन्य भूमिकाएं जयदीप अहलावत, सिकंदर खेर, सुहासिनी मुले, राहुल देव, आदि ने की है।  





बुधवार को फिल्म 'इक्कीस' का ट्रेलर सोशल मीडिया पर रिलीज़ किया गया। धर्मेंद्र के बड़े बेटे, बॉलीवुड स्टार सनी देओल, जो अपने पिता को इतनी उम्र में काम करते देखकर बेहद रोमांचित लग रहे थे, ने भी इसे अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किया। वह अपने पिता की सक्रियता पर स्वयं को गौरवान्वित अनुभव कर रहे थे।




 
धर्मेंद्र की विगत फिल्म २०२४ में प्रदर्शित फिल्म 'तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया' में नजर आए थे। इस फिल्म में अभिनेता शाहिद कपूर और कृति सेनन ने अभिनय किया था।

Wednesday, 13 August 2025

घिसे पिटे कथानक की असफलता पत्थर और पायल !



हिंदी फिल्म दर्शकों का, १९८६ में  फिल्म नगीना से इच्छाधारी नागिन का परिचय करवाने निर्देशक हरमेश मल्होत्रा ने १९६९ में प्रदर्शित फिल्म बेटी का निर्माण कर बॉलीवुड को अपनी शैली से परिचित कराया था।  नंदा और संजय खान अभिनीत फिल्म बेटी एक पारिवारिक ड्रामा फिल्म थी।  फिर विनोद खन्ना, योगिता बाली और प्राण के साथ अपराध फिल्म निर्देशित की। आज के दिन १३ अगस्त १९७४ को डाकू फिल्म पत्थर और पायल प्रदर्शित हुई थी।





इस फिल्म के कलाकारों में धर्मेंद्र, हेमा मालिनी, विनोद खन्ना, अजित, राजेंद्रनाथ, जयश्री टी, इफ़्तेख़ार, शेट्टी और सप्रू थे। फिल्म के चार गीतों का संगीत कल्याणजी आनंदजी ने दिया था। गीत इंदीवर, गुलशन बावरा और वर्मा मलिक ने लिखे थे। इन गीतों को आशा भोसले और लता मंगेशकर ने गाया था। इनमे से लता मंगेशकर का गाया और हेमा मालिनी पर फिल्माया गया गीत काफी लोकप्रिय हुआ था।





स्वप्न सुंदरी हेमा मालिनी और हीमैन धर्मेंद्र ने भप्पी सोनी निर्देशित फिल्म तुम हसीं मैं जवान (१९७०) से पहली बार जोड़ी बनाई थी। अगली फिल्म शराफत ने इस जोड़ी कोई सुपरडुपर हिट बना दिया। इस जोड़ी की बाद में प्रदर्शित फिल्मे नया ज़माना, सीता और गीता, राजा जानी और जुगनू बड़ी हिट साबित हुई।





किन्तु, दोस्त के बाद, पत्थर और पायल ही ऎसी फ़िल्में थी, जो लगातार बढ़िया कारोबार नहीं कर सकी। पत्थर और पायल के निर्माण में एक करोड़ खर्च हुए थे। किन्तु, यह फिल्म बॉक्स ऑफिस अपर मात्र तीन करोड़ ५० लाख का कारोबार ही जुटा सकी।





पत्थर और पायल, धर्मेंद्र और विनोद खन्ना की दूसरी फिल्म थी।  इस फिल्म में मेरा गांव मेरा देश के बाद, दूसरी बार विनोद खन्ना डाकू की भूमिका कर रहे थे। इस फिल्म के दौरान इन दोनों में गहरी दोस्ती हो गई। किन्तु, जल्द ही इस दोस्ती में दरार आ गई, जब दोनों में अमृता सिंह को लेकर तकरार हो गई। 





पत्थर और पायल शीर्षक से तीन फिल्मे बन जाती।  यह तीनों फिल्मे देओल पिता पुत्र की होती।  १९७४ की हरमेश मल्होत्रा की फिल्म पत्थर और पायल के बाद, सन २००० में केबी तिलक के निर्देशन में दूसरी पत्थर और पायल प्रदर्शित हुई।  यह दोनों फिल्मे डाकू फिल्मे थी।  तीसरी पत्थर और पायल धर्मेंद्र के बेटे सनी देओल को लेकर बनाई जानी थी। किन्तु, धर्मेंद्र की दूसरी पत्थर और पायल प्रदर्शित हो जाने के बाद, सनी देओल की फिल्म को कसम शीर्षक से बनाया गया। शिबू मित्रा निर्देशित कसम के केंद्र में भी डाकू कथानक ही था।

Sunday, 20 August 2023

क्यों नहीं हुई Sunny Deol की Indian2 की घोषणा ?


ग़दर २  की सफलता के साथ ही, सनी देओल की पुरानी फिल्मों के सीक्वल बनाये जाने का प्रारंभ हो चुका है.

 



कल ही निर्माता निर्देशक जेपी दत्ता और उनकी पुत्री निधि दत्ता ने, १९९७ की हिट फिल्म बॉर्डर के सीक्वल बॉर्डर २ के निर्माण की घोषणा की थी।  इस फिल्म की स्टारकास्ट क्या होगी, अभी यह सपष्ट नहीं है. परन्तु, सनी देओल को लिया जाना सुनिश्चित है।  कुछ का कहना है कि बॉर्डर २ में बॉर्डर की स्टारकास्ट ही होगी।  कहानी वही १९७१ के भारत -पाकिस्तान युद्ध की होगी।  फिल्म बॉर्डर में सनी देओल ने एक सिख मेजर की रील लाइफ को साकार किया था। कुल १० करोड़ के बजट में बनी  बॉर्डर ने अब तक की सूचना के अनुसार ६५,५७ करोड़ का ग्रॉस कर रखा है। 

 



आज सोशल मीडिया पर  सनी देओल की, २००२ में प्रदर्शित फिल्म माँ तुझे सलाम के सीक्वल की सूचना एक पोस्टर के साथ दी गई है।  इस पोस्टर में, फिल्म का एक संवाद तुम दूध मांगोगे तो खीर देंगे, तुम कश्मीर मांगोगे तो  चीर देंगे बहुत प्रसिद्द हुआ था।  सूचना पोस्टर में यह संवाद तिरंगे के साथ दिखाई देता है। यद्यपि सनी देओल के साथ तब्बू और अरबाज खान की भूमिका वाली टीनू वर्मा निर्देशित इस फिल्म का उपरोक्त संवाद हिट अवश्य हुआ था, परन्तु यह संवाद फिल्म निर्माताओं ने पूरी धर्मनिरपेक्षता दिखाते हुए अरबाज खान के कश्मीरी मुस्लिम चरित्र अलबख्श के मुंह से बुलवाया है। अरबाज खान ने इस संवाद को बेहद सपाट तरीके से बोला था।  इस बदलाव का परिणाम था कि सात महीने बाद प्रदर्शित १३ करोड़ की माँ तुझे सलाम केवल २२,८४ करोड़ का कारोबार ही कर सकी।

 



इस लिए, स्पष्ट रुप से माँ तुझे सलाम का सीक्वल बनाये जाने की घोषणा का उद्देश्य ग़दर २ की सफलता को ही भुनाना है।  परन्तु, ध्यान दें कि सनी देओल की ग़दर एक प्रेमकथा के पूर्व और  पश्चात्  प्रदर्शित एक्शन फिल्मों के सीक्वल बनाये जाने की इस होड़ में सनी देओल की, ग़दर की सफलता के ठीक चार महीने बाद प्रदर्शित फिल्म इंडियन के सीक्वल बनाये जाने की घोषणा नहीं की गई है। जबकि, यह फिल्म बड़ी हिट हुई थी। फिल्म का बजट १५ करोड़ था।  फिल्म ने १५.६० करोड़ का कारोबार किया था।

 



वास्तव में, इंडियन का निर्माण निर्माता धर्मेंद्र ने किया था।  इस फिल्म  के निर्देशक  निर्देशक  एन महाराजन थे।  महाराजन मूल रूप में तमिल फिल्म निर्देशक थे।  इंडियन की सफलता के १६ साल बाद, २०१८ में इंडियन २ बनाये जाने की घोषणा हुई थी।  पर सनी देओल की २००२ के पश्चात् प्रदर्शित हुई फिल्मों को एक के बाद एक मिल रही असफलता ने उनके पिता को पैर पीछे खींच लेने को विवश कर दिया। 

 



हो सकता है कि विजयता फिल्म शीघ्र ही इंडियन २ को पुनर्जीवित कर दे। परन्तु, यहाँ बताते चलें कि कमल हासन अभिनीत फिल्म इंडियन २ शीघ्र ही प्रदर्शित होने वाले है .


Monday, 24 June 2019

Dharmendra की पहली हॉरर कॉमेडी फिल्म


साठ के दशक के ही-मैन धर्मेन्द्र, अभी तक अपनी बहुमुखी प्रतिभा से दर्शकों को हंसाते और रुलाते रहे थे। अब, ८३ साल के धर्मेन्द्र का नया अवतार होने जा रहा है। वह, लेखक-निर्देशक मनोज शर्मा की हॉरर कॉमेडी फिल्म 'खली बली' में डरने या डराने आ रहे हैं । यह धर्मेंद्र की पहली हॉरर कॉमेडी फिल्म होगी।

धर्मेन्द्र ने, अपने साठ साल लम्बे फिल्म करियर में ३०० से ज्यादा फ़िल्में की हैं। उन्होंने अपने समय की तमाम टॉप की अभिनेत्रियों के साथ फ़िल्में की। उन्होंने रोमांटिक, रोमांटिक पारिवारिक, एक्शन, एक्शन कॉमेडी और खालिस कॉमेडी फ़िल्में भी की। लेकिन, कभी भी उन्हें हॉरर कॉमेडी या हॉरर फिल्मों में नहीं लिया गया। उनकी १९९६ में प्रदर्शित फिल्म आतंक को इस लिहाज़ से हॉरर फिल्म कहा जा सकता है, क्योंकि इस फिल्म से शार्क के हमले का कथानक भी जुड़ा था, जो हॉलीवुड फिल्म जाज से प्रेरित था।


धर्मेन्द्र पिछले कुछ सालों से अपनी घरेलु फिल्मों में व्यस्त हो गए थे। उन्होंने अपने बेटों और पत्नी हेमा मालिनी की फिल्मों मे ही अभिनय किया। वह सनी देओल के साथ यमला पगला दीवाना १ और २ तथा यमला पगला दीवाना फिर से तथा सिंह साहब दी ग्रेट में एक्शन और एक्शन कॉमेडी कर रहे थे। पत्नी हेमा मालिनी की फिल्म टेल मी ओ खुदा में उनकी भूमिका बेटी एषा देओल और पत्नी हेमा मालिनी के साथ थी। इस फिल्म की निर्देशक हेमा मालिनी ही थी।
धर्मेन्द्र की नई फिल्म खली बली की शूटिंग मुंबई के अलावा लखनऊ में ही होगी। इस फिल्म में धर्मेन्द्र ने एक मनोचिकित्सक की भूमिका की है। इस फिल्म में उनके साथ, रोजा से मशहूर एक्ट्रेस मधु की वापसी हो रही है। वैसे रिश्ते में धर्मेन्द्र. मधु के फूफा हैं। 

Monday, 1 April 2019

पल पल दिल के पास करण देओल


बॉलीवुड के देओल परिवार की तीसरी पीढ़ी का हिंदी फिल्मों में डेब्यू होने जा रहा है। बॉलीवुड के मौलिक ही-मैन धर्मेन्द्र (Dharmendra) के पोते और ढाई किलो का हाथ वाले सनी देओल (Sunny Deol) के बेटे करण देओल (Karan Deol) भी अब हीरो बनने जा रहे हैं।


करण का डेब्यू पल पल दिल के पास 
विजयता फिल्म्स के बैनर तले बनाई जा रहीफिल्म पल पल दिल के पास के निर्माता धर्मेन्द्र है और फिल्म का निर्देशन खुद सनी देओल कर रहे हैं। फिल्म का टाइटल धर्मेन्द्र की पुरानी फिल्म ब्लैकमेल (१९७३) के धर्मेन्द्रराखी (Rakhi) और शत्रुघ्न सिन्हा (Shatrughn Sinha) पर फिल्माए गए एक गीत पल पल दिल के पास तुम रहती हो के मुखड़े पर रखा गया है। सूत्र बताते हैं कि इस गीत को रिक्रिएट कर भी फिल्म में शामिल किया जा रहा है।


खालिस मसाला फिल्म 
खबर है कि पल पल दिल के पास, खालिस  मसाला है। इस फिल्म में सब कुछ है यानि रोमांस का त्रिकोणएक्शन की ओवरडोज़ और थ्रिलसब कुछ। फिल्म मेंकरण की नायिका सहर बामबा (Sahher Bambba) की भी यह पहली फिल्म है।


कॉलेज का रोमांस 
फिल्म कॉलेज के छात्रों से शुरू हो करट्रेकिंग पर मनाली पहुंचती है। जहाँ, करण देओल के चरित्र के ज़रिये फिल्म का तीसरा कोण बनता है। यही फिल्म की नायिका से नायक मिलता है। दोनों में लव एट फर्स्ट साईट हो जाता है। वह लड़काजो कॉलेज में नायिका के साथ पढ़ता है और उससे एकतरफा प्रेम करता हैइससे जलभुन जाता है।


मनाली में एक्शन और रोमांस 
इस फिल्म मेंकरण देओल (Karan Deol) पर मनाली की क्लिफ हेंगर पर रोमांचक एक्शन दृश्य फिल्माए गए हैं। मनाली की खूबसूरत वादियों में करण और सहर का प्रेम दिखा गया है। ज़बरदस्त कार रेस भी है। पिछले साल इस दृश्य की शूटिंगएनसीआर में बुद्धा इंटरनेशनल सर्किट पर हुई थी।


धर्मेंद्र और सनी देओल का ओरिजिनल मिश्रण 
जिन लोगों नेकरण की शूटिंग देखी हैउनका मानना है कि करणअपने दादा धर्मेन्द्र और पिता सनी देओल की प्रतिभा का मिश्रण है। लेकिनसब कुछ मौलिक है। क्या देओल खानदान की इस पीढ़ी को धर्मेन्द्र और सनी देओल की तरह दर्शकों की स्वीकार्यता मिलेगी ?

आँखें २, करैक्टर ५, बिग बी के साथ सैफ- क्लिक करें 

Saturday, 8 December 2018

अनुपमा से अधूरी देवदास तक धर्मेंद्र और शर्मीला टैगोर !


आज बॉलीवुड की दो बड़ी फिल्म हस्तियों धर्मेंद्र और शर्मीला टैगोर का जन्मदिन है। आज ही के दिन, १९३५ में जन्मे थे धर्मेंद्र और १९४४ में जन्मी थी शर्मीला टैगोर। इस लिहाज़ से, धर्मेंद्र आज ८३ साल के हो गए। शर्मीला टैगोर ने ७५वां जन्मदिन मनाया। दिलचस्प तथ्य यह हैं कि ८ दिसंबर को जन्मी इन दोनों हस्तियों ने, अपने स्टारडम के दौर में ८ हिंदी फिल्मों में काम किया। इनकी दो फ़िल्में पूरी नहीं हो सकी।


धर्मेंद्र को हिंदी फिल्मों का ओरिजिनल ही-मैन कहा जाता है।  उन्हें यह खिताब मिला, १९६५ में रिलीज़, ओपी रल्हन निर्देशित फिल्म फूल और पत्थर में शाका की भूमिका से। इस फिल्म में, पहली बार बॉलीवुड के किसी नायक ने अपनी शर्ट उतार कर, अपने गठीले सौंदर्य का प्रदर्शन किया था।  हालाँकि, उन्होंने ऐसा अपने शरीर को दिखाने के लिए नहीं, बल्कि फिल्म के एक सीन में ठण्ड में ठिठुर रही एक भिखारिन को ठण्ड से बचाने के लिए किया था।  बाद में, सलमान खान जैसे सितारे महिला दर्शकों को आकर्षित करने के लिए अपने कपडे उतारने लगे।  धर्मेंद्र की बॉलीवुड में एंटी, उनके रिश्तेदार अर्जुन हिंगोरानी निर्देशित फिल्म दिल भी तेरा हम भी तेरे (१९५८) से हुई थी।  धर्मेंद्र की पहली हिट फिल्म माला सिन्हा के साथ अनपढ़ (१९६२) थी।


धर्मेंद्र के बॉलीवुड डेब्यू के छह साल बाद, बांगला फिल्मों की अभिनेत्री शर्मीला टैगोर का, शक्ति सामंत की फिल्म कश्मीर की कली से डेब्यू हुआ।  पहली ही फिल्म ने, शर्मीला टैगोर को टॉप पर पहुंचा दिया। एन इवनिंग इन पेरिस में टू-पीस बिकिनी पहन कर, उन्होंने खुद के बोल्ड अभिनेत्री होने ऐलान कर दिया। शर्मीला टैगोर के करियर की खासियत यह रही कि उन्हें अपने समय के सबसे सफल डायरेक्टर शक्ति सामंत का वरदहस्त प्राप्त रहा। शर्मीला टैगोर के हिंदी फिल्म डेब्यू के बाद, शक्ति सामंत ने लगभग दो दर्जन हिंदी फ़िल्में बनाई।  इनमे से १० शर्मीला टैगोर के साथ थी। 


धर्मेंद्र और शर्मीला टैगोर की एक साथ पहली फिल्म अनुपमा (१९६६) की थी।  इसी साल, इस जोड़ी की फिल्म देवर भी रिलीज़ हुई। इस जोड़ी ने बाद में, सत्यकाम, यकीन, मेरे हमदम मेरे दोस्त, चपके चुपके, एक महल हो सपनों का और सनी जैसी फ़िल्में दी।  इस जोड़ी की दो फ़िल्में चैताली और देवदास भी शुरू हुई।  चैताली को का निर्देशन बिमल रॉय कर रहे थे।  बिमल रॉय के अकस्मात देहांत के बाद, चैताली की कमान उनके चेले हृषिकेश मुख़र्जी के हाथों में आ गई। फिल्म की लॉन्चिंग इसी जोड़ी के साथ हुई।


लेकिन, जब तक चैताली पूरी हुई, फिल्म में शर्मीला टैगोर की जगह सायरा बानू आ गई।  इसी प्रकार से, गुलज़ार का इरादा, शरतचंद्र चट्टोपाध्याय के देवदास को परदे पर उतारने का था।  वह धर्मेंद्र को देवदास, शर्मीला टैगोर को पारो और हेमा मालिनी को चंद्रमुखी बना कर पेश करना चाहते थे। फिल्म का महूरत भी हुआ।  कुछ का कहना है कि फिल्म की १० दिनों की शूटिंग हुई भी।  लेकिन, फिर यकायक फिल्म के निर्माताओं ने फिल्म बंद कर दी। इस प्रकार से, धर्मेंद्र और शर्मीला टैगोर की, ८ दिसंबर को जन्मी जोड़ी, ८ फिल्मों में काम करने तक सीमित रह गई।   

Vivek living his superhero dream - पढ़ने के लिए क्लिक करें 

Sunday, 26 August 2018

मैंने कभी अभिनय नहीं सीखा- धर्मेंद्र

बॉलीवुड के ही-मैन से बात करना यादों का खज़ाना खोलने जैसा होता है।  वह, ८२ साल के हैं, इसके बावजूद दिल भी तेरा हम भी तेरे (१९५८) के २३ साल के अशोक लगते हैं।  उनसे यमला पगला दीवाना के सेट पर बात हुई। लेकिन, वह अपनी यादों में ले गये तो फिल्म की बात काफी पीछे रह गई।  पेश है उनसे आज के और कल के दौर की फिल्म इंडस्ट्री के सम्बन्ध में उनके विचार - 

फिल्म इंडस्ट्री का बदलाव कैसे देखते हैं  
हर दौर अच्छा है। मुझे फिल्म शब्द से मोहब्बत है। हरेक दौर बढ़िया रहा है। आज के दौर की भी खूबियां हैं, इसका अपना ही एक कलर है, जज्बात भरे हुए हैं। ऑडिएंस के हिसाब से फिल्में बनती हैं। मुझे तो लगता है की अभी बहुत कुछ करना है। 

कुछ मिस करते हैं
उस समय, शूटिंग के बाद सब साथ में बैठकर भजिये, खाना खाते थे। उस समय फेस्टिवल का माहौल हो जाता था। मिडिल क्लास का होने की वजह से मुझे वैसा ही माहौल पसंद था। मैं आज तक नहीं बदला। मैं आज भी गाँव वाला धर्मेंद्र हूँ। मुझे मेहबूब साहब के साथ काम ना कर पाने का दुःख है। एक बार मैंने उनसे बात की थी, लेकिन उनके साथ काम नहीं कर पाया। वैसे ही के आसिफ साहब के साथ महंगा खून, सस्ता पानी फिल्म बनने वाली थी, लेकिन बन नहीं पायी। 

गुजरात में शराब बंद है
इसीलिए हम फिल्म यमला पगला दीवाना फिर से में दमन जाकर शराब पीते हैं। फिल्म में बॉबी मुझे बॉर्डर पर, दमन ले जाकर शराब पिलाता है। वैसे मेरी पहली फिल्म में तरला दलाल भी गुजरात से थी। हम दोनों एक दूसरे को दिलासा देते थे। उन्हें मिस करता हूँ। 

अभिनय क्या है
एक्टिंग एक रिएक्शन होता है। मैं कभी अभिनय नहीं सीखा। किरदार को बस अपने हिसाब से ही जी लेता था। 

आजकल के एक्टर्स को कैसे देखते हैं ?
रणवीर सिंह, रणबीर कपूर, के साथ साथ आमिर खान की दंगल भी देखी। क्या अभिनेता हैं, ग़जब के हैं। मैं उनको सैल्यूट करता हूँ। 

आपका फिल्मों का चयन कैसे रहा
मुझे समय समय पर स्टोरी, स्क्रीनप्ले और अच्छे डायरेक्टर मिले, जिसकी वजह से मैंने बढ़िया काम किया। 

सनी और बॉबी देओल के करियर के बारे में बताएं
मैंने सनी की पहली फिल्म बेताब के एक एक हिस्से को देखा है। वह बहुत ही इमोशनल लड़का है।बोलता नहीं है। मैं हमेशा उससे कहता हूँ कि मुझे बता दिया कर। बॉबी की सारी फिल्में रोमांटिक थी। बॉबी हैंडसम लगता है। रोमांस के दौरान एक्शन गायब हो जाता है। ग़दर में भी सनी रोमांस के पल में ज्यादा है। 

रेखा जी और शत्रुघ्न के साथ काम कर रहे हैं     
ऐसा लगा उस दिन की शूटिंग में लाइफ आ गयी थी। सनी ने मुझसे कहा कि पापा हमें शत्रुघ्न जी के साथ काम करना चाहिए। वह दिन अलग ही हुआ करते थे। 

आपकी बायोपिक बनेगी तो आप करने देंगे ?
मैं सोचा नहीं ज्यादा। मुझे कमर्शियल चीज़ें कम समझ आती है। अभी कोई प्लान नहीं है। वक्त आएगा तो पता चलेगा। मेरे जैसा पवित्र रोमांस किसी और का रहा ही नहीं। मैं दिल वाला इंसान हूँ, मैंने सबसे वफ़ा की है। 

हेमा जी के साथ काम करना चाहेंगे ?
अभी कहानियां ढूंढना मुश्किल है। उस समय २५ फिल्में एक साथ गोल्डन जुबली हो गयी थी। 

हृषिकेश मुखर्जी के बारे में क्या कहेंगे ?
दोस्त, भाई, मास्टर सब कुछ थे। उनके जैसा इंसान हैं देखा, जब वो बीमार पड़े थे तो उन्होंने कहा की मेरी हाथ की नदी निकाल दो धरम .. ( ये कहते हुए धरम जी इमोशनल हो गए)

स्ट्रगल कैसे देखते हैं
मैं पैदल चलता था, खाड़ी क्रॉस करके आया जाया करता था। जुहू में एक झोपडी में बैठा रहता था और सोचता था कि कुछ खरीदूंगा। साल १९५९ का ये जिक्र है, तब पाली हिल, खार सब कुछ खाड़ी हुआ करती थी। ऊपर वाले ने शायद यह सब कुछ देखा होगा। मेरा स्ट्रगल और मेरी ग़ुरबत ही मेरा फक्र है। जिंदगी अपने आप में स्ट्रगल है। ये एक जंग जैसी ही है।

आपके लिए रोमांस क्या है ?
एक नेक रूह का एक नेक रूह से मिलना होता है। दोनों जुड़ जाती है। उसी को मोहब्बत कहते हैं।

बनेगा सत्यमेव जयते का सीक्वल - पढ़ने के लिए क्लिक करें 

Friday, 24 August 2018

यमला पगला दीवाना फिर से का रफ्ता रफ्ता मेडले




होटल मिलन का स्टेपनी नंबर - देखने के लिए क्लिक करें 

Sunday, 12 August 2018

यमला पगला दीवाना फिर से का ट्रेलर हुआ रिलीज़







घनचक्कर बना देंगे यह पटाखा किरदार !-   पढ़ने के लिए क्लिक करें 

Friday, 10 August 2018

फिल्म तो फिर फिर से देखने को मांगता यमला पगला दीवाना !

यमला पगला दीवाना फिर से का ट्रेलर थोड़ी ही देर पहले जारी हुआ है।

इस फिल्म ट्रेलर देख कर ऐसा लगता है कि इस बार बाप के साथ बेटों की केमिस्ट्री गजब की जमी है। सब कुछ बढ़िया बढ़िया बरोबर बरोबर।

धर्मेंद्र शराबी वकील बने हैं। उन्हें एक मुकदमे के सिलसिले में गुजरात जाने को  कहा जाता है।

उनके हिसाब से गुजरात का क्लाइमेट ड्राई है। उन्हें क्लाइमेट गीला करने का भरोसा दे कर गुजरात भेज दिया जाता है।

फिल्म में बॉबी देओल का रोमांस कृति खरबंदा हैं।  कृति क्या खूब एक्टिंग कर रही हैं।

सनी देओल तो सनी देओल है। आज भी उनका मुक्का ढाई किलो का ही नज़र आ रहा है।

फिल्म की पटकथा धीरज रतन ने इन तीन मुख्य किरदारों को ध्यान में रख कर लिखी लगती है। इन तीनों की अभिनय शैली के अनुकूल दृश्य लिखे गए हैं।

बंटी राठौर के संवाद तो हंसा हंसा कर मार ही डालेंगे लगता है।

फिल्म में सलमान खान का कैमिया दिलचस्प है। ख़ास तौर पर बॉलीवुड के तमाम नए पुराने कलाकारों पर फिल्माया गया मेडले धमाल मचाने वाला है।

यमला पगला दीवाना फिल्म सीरीज की दूसरी फिल्म यमला पगला दीवाना २ को बॉक्स ऑफिस पर ख़ास सफलता नहीं मिली थी।

लेकिन, यमला पगला दीवाना फिर से के ३१ अगस्त को रंग जमा देने की पूरी उम्मीद की जा सकती है।

क्योंकि, फिल्म के निर्देशक पंजाबी फिल्मों के मशहूर नवनियत सिंह की नीयत बॉक्स ऑफिस पर नज़र बड़ी खराब लग रही है।  


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