इसमें कोई संदेह नहीं आज के सॅटॅलाइट युग में, भारत में बनी अधिकांश फ़िल्में छविगृहों में प्रदर्शन से पहले ही अपने बजट की काफी हद तक वसूली कर लेती है। अधिकांश फिल्मे अपने बजट का ६० से ८० प्रतिशत तक थिएटर्स में रिलीज होने से पहले ही डिजिटल और नॉन-थिएट्रिकल
राइट्स बेचकर वसूल कर लेती है। यद्यपि, पूरी तरह से मुनाफे में आने और बॉक्स ऑफिस पर 'हिट' का टैग पाने के लिए उन्हें सिनेमाघरों में भी अच्छा प्रदर्शन करना पड़ता है।
इस दृष्टि से, इस ३ जुलाई को प्रदर्शित होने जा रही दोनों फ़िल्में, क्या अपनी लागत का बड़ा हिस्सा अपने निर्माताओं को वापस दिलवा चुकी है ? इसके लिए इन दोनों फिल्मों का बजट और प्रदर्शन से पूर्व के विभिन्न प्रकार के अधिकारों को बेचने का गणित समझना होगा।
इस दृष्टि से बेबी डू डाई डू सुरक्षित लगती है। बेबी डू डाई डू की निर्माण लागत मात्र २२ करोड़ रुपये है । निर्देशक के रूप में स्त्री २ के निर्देशक अमर कौशिक का नाम जुड़ा होने के कारण इस फिल्म के ओटीटी अधिकार, सैटेलाइट अधिकार और म्यूजिक अधिकार बहुत अच्छे दामों में बिके हैं। इस प्रकार से फिल्म ने रिलीज से पहले ही अपने २२ करोड़ के बजट का लगभग ७५ से ८० प्रतिशत अर्थात १६ से १८ करोड़ इन अधिकारों को बेच कर आसानी से सुरक्षित कर लिया है।
अब बेबी डू डाई डू अपनी बाकी बची लागत और डिस्ट्रीब्यूशन कमीशन निकालने के लिए बॉक्स ऑफिस पर केवल १० से १५ करोड़ का शेयर अर्थात ३० से ३५ करोड़ का ग्रॉस कलेक्शन ही करना है। सप्ताहांत के १० करोड़ अनुमानित कारोबार को देखते हुए यह बहुत जल्द मुनाफा कमाने लगेगी।
वहीँ दूसरी ओर अल्फा भारी बजट, बड़ा जोखिम लागत वाली फिल्म लगती है। इस फिल्म की लागत ८० से १२० करोड़ के बीच की बताई जा रही है। चूंकि यह वाईआरएफ स्पाई यूनिवर्स की बड़ी फिल्म है, इसके ओटीटी और डिजिटल राइट्स की वैल्यू बहुत ज्यादा है। मार्केट रिपोर्ट्स के अनुसार, यशराज फिल्म्स ने इसके डिजिटल प्रीमियर के लिए एक लीडिंग प्लेटफॉर्म के साथ भारी-भरकम डील की है, जिससे बजट का ६५ से ७० प्रतिशत अर्थात लगभग ६० से ८० करोड़ पहले ही कमा लिए है।
इतनी बड़ी वसूली के बावजूद, फिल्म का बजट इतना विशाल है कि डिजिटल रिकवरी के बाद भी इसे टेबल-प्रॉफिट में आने के लिए सिनेमाघरों से कम से कम ८० से १०० करोड़ का शुद्ध डिस्ट्रीब्यूटर शेयर कमाना होगा। इसके लिए फिल्म को भारत में कम से कम १५०-१६० करोड़ का नेट कलेक्शन करना होगा । फिल्म के प्रति सुस्त माहौल और 'नागबंधम' के टकराव के कारण इस थिएटर शेयर को निकालना फिल्म के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
फिल्म निर्माताओं के नजरिए से देखें तो दोनों ही फिल्में सुरक्षित हैं और डिजिटल डील्स की वजह से उन्हें कोई भारी नुकसान नहीं होगा। लेकिन जहाँ 'बेबी डू डाई डू' अपने छोटे बजट की वजह से आसानी से नेट प्रॉफिट कमाकर सुपरहिट की तरफ बढ़ेगी, वहीं 'अल्फा' अपनी भारी लागत के कारण सिर्फ ओटीटी के भरोसे नहीं रह सकती और उसे खुद को फ्लॉप होने से बचाने के लिए थिएटर्स में बहुत लंबी लड़ाई लड़नी होगी।
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