Tuesday, 7 July 2026

#NetflixIndia पर #Ikka और ओटीटी पर अन्य कोर्ट रूम ड्रामा फ़िल्में !



नेटफ्लिक्स इंडिया, १० जुलाई से, सनी देओल और अक्षय खन्ना की फिल्म इक्का की स्ट्रीमिंग प्रारम्भ कर रहा है।  यह फिल्म कोर्ट  रूम ड्रामा फिल्म है। सनी देओल, दामिनी के बाद, एक बार फिर वकील का चरित्र कर रहे है।  वकील अर्जुन उर्फ़ इक्का एक ईमानदार और प्रतिष्ठित वकील है, जो कभी कोई केस नहीं हारा। किन्तु, वह उस समय बेबस हो जाता है, जब उसे एक अपराधी शौर्यमान को बचाना पड़ता है।  




इस शुक्रवार, जब ओटीटी के दर्शक फिल्म इक्का को देखेंगे तो उन्हें ऎसी ही अन्य कोर्ट रूम ड्रामा फिल्मों की याद आएगी।  वह ऐसी ही फिल्मों को घर बैठे देखना चाहेंगे।  तो ऎसी कुछ फिल्में ओटीटी प्लेटफार्म पर भी उपलब्ध है। ऎसी ही कुछ कोर्ट रूम ड्रामा फ़िल्में और वेब सीरीज पर एक दृष्टि। 






दामिनी (१९९३): यह बॉलीवुड की सबसे आइकॉनिक कानूनी ड्रामा फिल्म है। इसमें सनी देओल का तारीख पर तारीख वाला डायलॉग आज भी बेहद लोकप्रिय है।




पिंक (२०१६): अमिताभ बच्चन और तापसी पन्नू अभिनीत यह फिल्म लड़की की सहमति या असहमति  जैसे गंभीर मुद्दे को कोर्ट में बेहद मजबूती से उठाती है।





जॉली एलएलबी १ और २: अरशद वारसी और अक्षय कुमार की यह सीरीज भारतीय न्यायिक व्यवस्था पर एक बेहतरीन व्यंग्य करने वाली मनोरंजक ड्रामा फिल्म है।





जय भीम (२०२१): यह फिल्म तमिल एक वकील के संघर्ष और आदिवासियों के अधिकारों की सच्ची घटना पर आधारित एक बेहद संवेदनशील और झकझोर देने वाला कोर्ट ड्रामा फिल्म है।




ओएमजी २ (२०२३): पंकज त्रिपाठी और यामी गौतम स्टारर इस फिल्म में सेक्स एजुकेशन जैसे सामाजिक विषय को अदालत के जरिए बेहद अनोखे अंदाज में पेश किया गया है।





सेक्शन ३७५ (२०१९): अक्षय खन्ना और ऋचा चड्ढा की यह फिल्म कानून की बारीकियों और उसके दोनों पक्षों को गहराई से दिखाती है।





वेब सीरीज़  क्रिमिनल जस्टिस  जिओ हॉटस्टार पर उपलब्ध। इस सीरीज में पंकज त्रिपाठी वकील 'माधव मिश्रा' के किरदार में हैं। इसके अब तक चार सीजन आ चुके हैं और यह भारत की सबसे बेहतरीन लीगल थ्रिलर मानी जाती है।





मामला लीगल है: रवि किशन अभिनीत यह सीरीज  नेटफ्लिक्स  पर उपलब्ध है। पटपड़गंज जिला अदालत के कामकाज को कॉमेडी और हल्के-फुल्के अंदाज में दिखाती है।




गिल्टी माइंड्स: अमेज़न प्राइम वीडियो की यह सीरीज दो अलग-अलग विचारधाराओं वाले वकीलों के इर्द-गिर्द घूमती है और हर एपिसोड में एक नया व दिलचस्प केस देखने को मिलता है।





योर ऑनर: जिमी शेरगिल की सोनी लाइव पर उपलब्ध वेब सीरीज एक ऐसे ईमानदार जज की कहानी है, जिसका बेटा एक एक्सीडेंट केस में फंस जाता है।





द वर्डिक्ट: स्टेट वर्सेस नानावटी: ज़ी ५ की यह सीरीज भारत के मशहूर के.एम. नानावटी वाले ऐतिहासिक अदालती मामले पर आधारित है।





कोर्ट रूम ड्रामा फिल्म की बात करें तो १९८६ में प्रदर्शित फिल्म एक रुका हुआ फैसला का उल्लेख न करना उपयुक्त नहीं होगा।  यह फिल्म विशुद्ध कोर्ट रूम ड्रामा नहीं, बल्कि एक कमरे में जूरी के १२ सदस्यों की एक केस पर आपस में विचार विमर्श और कानूनी दावपेंच प्रस्तुत करने वाली फिल्म थी। बासु चटर्जी निर्देशित इस फिल्म के अतिरिक्त अन्य कोई ऎसी फिल्म नहीं बनाई गई। यह फिल्म हॉलीवुड की १९५७ में प्रदर्शित फिल्म १२ एंग्री मैन का आधिकारिक रूपांतरण थी।  इस फिल्म में सामान्य बॉलीवुड फिल्मों की तरह कोई गाना, डांस या बाहरी ड्रामा नहीं था। पूरी फिल्म सिर्फ एक बंद कमरे के अंदर १२ जूरी सदस्यों की बहस, इंसानी पूर्वाग्रहों और मनोविज्ञान पर आधारित थी।




चूंकि भारत में १९५९ के मशहूर के.एम. नानावटी मामले के बाद जूरी सिस्टम को समाप्त कर दिया गया था, इसलिए इसके बाद हिंदी सिनेमा में इस तरह की 'जूरी रूम' ड्रामा फिल्में बनना पूरी तरह बंद हो गईं।हालांकि, अगर आप बिना किसी व्यावसायिक तड़क-भड़क के, शुद्ध रूप से यथार्थवादी (Realistic) और गंभीर कानूनी दांव-पेंच वाली फिल्में देखना चाहते हैं, तो हिन्दी में कुछ ऐसी फिल्में जरूर बनी हैं जो 'एक रुका हुआ फ़ैसला' के स्तर की गंभीरता को छूती हैं। 







कोर्ट (२०१४) : यह भारतीय सिनेमा के इतिहास की सबसे वास्तविक कानूनी ड्रामा फिल्म मानी जाती है। इसमें किसी भी तरह का मेलोड्रामा या चिल्लाने वाले डायलॉग नहीं हैं। यह फिल्म बहुत ही शांति से भारतीय निचली अदालतों की जमीनी हकीकत, वहां की सुस्ती और व्यवस्था की कमियों को दिखाती है।






सेक्शन ३७५: अक्षय खन्ना और ऋचा चड्ढा की यह फिल्म पूरी तरह से अदालत के कमरे के भीतर चलती है। यह फिल्म 'एक रुका हुआ फ़ैसला' की तरह ही दर्शकों के दिमाग में यह द्वंद्व पैदा करती है कि आरोपी सच बोल रहा है या झूठ। इसमें कानून के तकनीकी पहलुओं को बिना किसी फालतू ड्रामे के बेहद संजीदगी से दिखाया गया है।





शाहिद (२०१२)मानवाधिकार वकील शाहिद आज़मी के जीवन पर आधारित राजकुमार राव की यह फिल्म बेहद यथार्थवादी ढंग से बनाई गई है। इसमें अदालतों के चक्कर, तारीखों का इंतजार और वकीलों के बीच की बहस को बिना किसी फिल्मी तड़के के असली रूप में पेश किया गया है।





कानून (१९६०) : बी.आर. चोपड़ा द्वारा निर्देशित यह अपने समय की एक अनूठी फिल्म थी। उस दौर में भी इस फिल्म में एक भी गाना नहीं था, जो कि तत्कालीन बॉलीवुड के लिए एक बहुत बड़ा प्रयोग था। यह फिल्म मृत्युदंड की प्रासंगिकता पर एक गंभीर अदालती बहस पेश करती है।






यहाँ बताते चलें कि निर्देशक दर्शन आश्विन त्रिवेदी, एक रुका हुआ फैसला का आधिकारिक आधुनिक रीमेक बनाने जा रहे है।  इस फिल्म में अतुल कुलकर्णी, नीरज काबी और दिव्या दत्ता जैसे बेहतरीन कलाकार सम्मिलित किये गए हैं।

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