Monday, 18 March 2019

ड्रीमज़ प्रीमियर लीग में समीर अंजान, डीजे शेजवुड और शांतिप्रिया


ड्रीमज़ प्रीमियर लीग (डीपीएल) एक अंडर आर्म क्रिकेट टूर्नामेंट उन लोगों के लिए जीवन भर का अवसर है, जिनके पास अपने कौशल का प्रदर्शन करने और पूरे भारत में पहचान हासिल करने के लिए अंडरआर्म क्रिकेट के लिए झुकाव है। यह आगामी क्रिकेटरों के लिए एक अंतरराष्ट्रीय मानक विरोध का सामना करने का मौका है। अपने कौशल को प्रदर्शित करने और पुनर्गठन हासिल करने के लिए अंडरआर्म क्रिकेट के प्रति झुकाव रखने वालों के लिए एक अवसर है।

दिग्गज गीतकार  समीर अंजान, डीजे शेजवुड अभिनेत्री शांतिप्रिया, अभिनेत्री रानी अग्रवाल, कांग्रेस विधायक कृष्णा हेगड़े, भाजपा विधायक राहुल बुंजऔर संजय पोटनिस को देखा गया जो खिलाड़ीयों के साथ बल्लेबाजी में भी अपना हाथ आजमा रहे थे।


श्री  वासिब पेशिमाम  डीपीएल के संस्थापक हैं, कहते हैं डीपीएल हर हफ्ते बढ़ रहा है। हमारे पास कुछ शीर्ष श्रेणी के खिलाड़ी हैं जो असाधारण रूप से अच्छा कर रहे हैं। मैं इसे अंडर आर्म क्रिकेट चैंपियंस लीगके रूप में आगे जोड़ता हूं जैसे मैंने कहा, हम चाहते हैं। रोमांचक और आकर्षक घटनाओं को अंजाम देकर, नए और विविध प्रशंसकों को आकर्षित करके और दीर्घकालिक सफल साझेदारी बनाकर आर्म क्रिकेट के तहत बढ़ावा देने के लिए है.


घर मोरे परदेसिया - फिल्म कलंक - क्लिक करें 

घर मोरे परदेसिया - फिल्म कलंक

मेरे साईं में चंदन मदान


टेलीविजन अभिनेता चंदन मदान सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन पर मेरे साईं का हिस्सा बनने के लिए तैयार हैं। उन्हें श्रीकांत के चरित्र को दिखाया जाएगा जो पेशे से शिक्षक हैं और पढ़ाने के लिए शिरडी के स्कूल में आते हैं। कुलकर्णी की बहन, चीयू ताई एक विधवा हैं और उन्हें अपनी स्थिति के कारण चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। श्रीकांत, एक विद्वान व्यक्ति है, जो उनकी कठिनाइयों के प्रति सहानुभूति रखता है, उनके साथ एक विशेष बंधन बनाएगा और उन्हें इस स्थिति से उबरने में मदद करेगा। मेरे साईं, शो ने हमेशा उन मुद्दों को संबोधित किया है जो समाज में बहुत आम हैं और इस ट्रैक के माध्यम से, शो इस तथ्य को संबोधित करेगा कि किसी के भी बीच रिश्ता बन सकता है और सांई बाबा समाज में समाहित वर्जित मान्यताओं के बावजूद एक परिवार बनाने में मदद करेंगे।



चंदन मदन जो मेरे साईं में श्रीकांत की भूमिका निभाते नजर आएंगे, उन्होंने कहा, “मैं श्रीकांत का किरदार निभा रहा हूं, जो एक शिक्षक के रूप में शिरडी आता है। लोग कुलकर्णी की विधवा बहन चीउ ताई के साथ जिस तरह से व्यवहार कर रहे हैं, वह उसे पसंद नहीं है। लेकिन मेरे किरदार को चीउ ताई के साथ एक विशेष रिश्ता बनाते हुए देखा जाएगा और इससे सामाजिक दबावों को दूर करने में मदद मिलेगी। मेरा परिवार और मैं असल जीवन में साईं बाबा के अनुयायी हैं और जब मुझे मेरे साईं में इस भूमिका का प्रस्ताव मिला, तो मैंने तुरंत यह भूमिका स्वीकार कर ली। मेरे साईं के बारे में अच्छी बात यह है कि यह बहुत वास्तविक लगता है और जब पोशाक और भाषा की बात आती है, तो यहां कुछ भी समझौता नहीं किया जाता है।


सोनी मैक्स २ से प्रसारित कार्यक्रमों की झलकियाँ (१९ मार्च से ३१ मार्च) - क्लिक करें 

सोनी मैक्स २ से प्रसारित कार्यक्रमों की झलकियाँ (१९ मार्च से ३१ मार्च)


TUE
19/Mar/19
19:00:00
AAKHIR KYON?
WED
20/Mar/19
19:00:00
Jaani Dushman (1979)
THU
21/Mar/19
19:00:00
ALIBABA AUR 40 CHOR (DHARMENDRA)
FRI
22/Mar/19
19:00:00
HAATIM TAI
SAT
23/Mar/19
19:00:00
YAARANA
SUN
24/Mar/19
19:00:00
SOORYAVANSHAM (RENEWED) - TBC
MON
25/Mar/19
19:00:00
TAHALKA
TUE
26/Mar/19
19:00:00
CHANDNI
WED
27/Mar/19
19:00:00
SWARAG SE SUNDER
THU
28/Mar/19
19:00:00
PARVARISH
FRI
29/Mar/19
19:00:00
GHAYAL
SAT
30/Mar/19
19:00:00
PHOOL AUR ANGAAR
SUN
31/Mar/19
10:00:00
SAINIK

ऋतिक रोशन ने की अपने हकलाने की समस्या पर बात - क्लिक करें 

ऋतिक रोशन ने की अपने हकलाने की समस्या पर बात


ऋतिक रोशन जो अब स्क्रीन पर अपनी पंचलाइन बोलते हैं उसमे बहुत ही दम होता है , उन्होंने बड़ी बहादुरी के साथ अपने संघर्षों को बयां किया है, और यह स्वीकार किया है कि वह केवल स्पीच थेरेपी के जरिये ही अपने अभिनय आकांक्षाओं को पूरा कर सकते थे।

एक अखबार में छपी में खबर के अनुसार, द इंडियन स्टैमरिंग एसोसिएशन (TISA)" का ब्रांड एंबेसडर बनने के लिए संपर्क किया गया था इसी सिलसिले में एसोसिएशन के नौ सदस्यों ने ऋतिक के साथ 15 मार्च को उनके निवास स्थान पर चर्चा की  ।

जहाँ यह  चर्चा 20 मिनट की होनी थीवह लगभग एक घंटे तक चली जहाँ अभिनेता ने खुलासा किया कि वह कैसे शीशे के सामने खड़े हो कर बात करने की प्रैक्टिस किया करते थे, अपनी आवाज रिकॉर्ड करते थे और गाना भी सीखते थे।


 ऋतिक ने साझा करते हुए कहा ,"मैं हर दिन स्पीच पर काबू पाने के लिए अभ्यास करता हूं, मैं अभी भी कम से कम एक घंटे के लिए अभ्यासकरता हूं ताकि मैं माध्यमिक क्रियाएं जैसे कि झटके के साथ बोलने को नियंत्रित कर सकूं।" अभिनेता ने आगे कहा,"हकलाने की अस्वीकार्यता मेरे बचपन में न केवल परेशान करने वाली थी, बल्कि 2012 तक बनी रही, जब तक कि मैं फिल्म स्टार नहीं बन गया।"

अपने करियर के शुरुआती वर्षों में, उन्हें कई स्क्रिप्ट को ना कहना पड़ा, जिनमें लंबे मोनोलॉग थे क्योंकि वे इसे बोलने में आश्वस्त नहीं थे। इस मुलाकात के दौरान, ऋतिक को एक वाक्य याद आया जब एक पुरस्कार प्राप्त करने के लिए वह दुबई जाने वाले थे। उस समय वह "दुबई" शब्द कहने के लिए संघर्ष कर रहे थे, और अपनी स्वीकृति भाषण को बोलने से पहले बार-बार अभ्यास किया था।


अभिनेता ने स्वीकार करते हुए कहा,“मैंने अब अपने आप को एक स्लो स्पीकर के रूप में स्वीकार कर लिया था, कोई भी वाक्य जोर से बोलने से पहले मुझे अपने दिमाग में उसका अभ्यास करना पड़ता था। लंबे वक्त के लिए, मेरे लिए यह स्वीकार करना संघर्षपूर्ण था, लेकिन अब मैं ठीक हूं।" आगे कहते हुए कि सफलता 2012 में न्यूरो-लिंगुइस्तिक प्रोग्रामिंग (एनएलपी) के साथ आई, जिसने उन्हें इस समस्या से मुक्त कर दिया।

अभिनेता के निवास स्थान से जाने से पहले, TISA के सदस्यों ने उन्हें बैज और हैंड बैंड दिए, जबकि ऋतिक ने कहा कि वह सभी गतिविधियों के लिए अपना समर्थन देंगे, और कहा कि वह इस तरह की अन्य बातचीत के लिए समर्थन करेंगे।


"हकलाना एक नाचीज समझे जाने वाली चुनौती है क्योंकि इसकी गंभीरता पर ज्यादा चर्चा नहीं की जाती है, यह गंभीर है क्योंकि यह एक इंसान के रूप में आपके आत्मविश्वास से संबंधित है,"  ऋतिक ने कहा।  


कौन बनेगी तीजन बाई : रानी, प्रियंका या विद्या - क्लिक करें 

Sunday, 17 March 2019

कौन बनेगी तीजन बाई : रानी, प्रियंका या विद्या !


बीस साल की छोटी उम्र में वो अपनी कुर्सी पर अक्सर खड़े हो जाया करते थे ताक़ि उन्हें उनकी परफॉर्मेंस की एक झलक दिख जाए. वो नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी थे जो तीजन बाई की गायिकी के दिवाने थे. आज नवाज़ इस बात को लेकर काफ़ी उत्साहित हैं कि उनकी पत्नी आलिया सिद्दीकी और मंजू गढ़वाल वाय. एस. एंटरटेनमेंट के बैनर तले मशहूर लोक गायिका तीजन बाई की ज़िंदगी पर एक फ़िल्म बनाने का आइडिया लेकर आए हैं. और वो भी ऐसे समय में जब तीजन बाई को कई अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाज़ा गया है जिसमें से एक है 2018 में उन्हें दिया गया द फ़ुकुओका प्राइज़. इसके अलावा उन्हें इस साल‌ पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया है.

छत्तीसगढ़ के गनियारी गांव में 1956 में जन्मी तीजन बाई के पिता का नाम चुनुक लाल पारधी और मां का नाम सुखवती था. छत्तीसगढ़ के अनुसूचित जाति पारधी समाज से ताल्लुक रखनेवाली तीजन बाई को 1988 में पद्मश्री, 1995 में श्री संगीत कला अकादमी पुरस्कार, 2003 में डॉक्टरेट की डिग्री, 2003 में पद्म भूषण, 2016 में एम. एस. सुब्बालक्ष्मी शताब्दी पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है.

तीजन बाई की शादी 12 साल की बेहद नाज़ुक उम्र में कर दी गई थी. उन्हें अपने पारधी समाज से निष्काषित भी कर दिया गया था. और उनका कसूर बस इतना था कि वो एक महिला होकर पंडवानी नामक गायिकी की विधा में बेहद रुचि रखती थीं. इस तरह से बचपन से ही उनका संघर्ष शुरू हो गया था. उन्होंने ख़ुद ही एक झोपड़ी बनाकर स्वतंत्र रूप से वहां रहना शुरू कर दिया था. आलिया सिद्दीकी कहती हैं, "उन्होंने कभी भी गायिकी का दामन नहीं छोड़ा और इसी गायिकी के चलते उन्हें ख़ासी लोकप्रियता मिली. तीजन बाई की ज़िंदगी के कई पहलू हैं जिसके बारे में लिखा जा सकता है. मुझे शिद्दत से लगा कि उनकी ज़िंदगी पर एक फ़िल्म बनाई जानी चाहिए."

तीजन बाई को लोक गायन की मशहूर कला पंडवानी की गायिकी में महारत हासिल है. पंडवानी छत्तीसगढ़ में सुनाई जानेवाली महाभारत से जुड़े किस्सों से संबंधित गायिकी की विधा है. तीजन बाई की इसी कला ने आलिया सिद्दीकी को बेहद प्रभावित किया. ऐसे में उन्हें लगा कि उनपर आधारित एक बायोपिक उनकी ज़िंदगी के साथ न्याय कर पाएगी. ऐसे में उनपर बन रही फ़िल्म की स्क्रिप्ट लिखने का ज़िम्मा भी आलिया ने ख़ुद ही उठाया. मगर वो चाहती हैं कि फ़िल्म के लिए तमाम गाने एक ऐसा कद्दवार शख़्स लिखे जिसे कलम का जादूगर माना जाता है. आलिया कहती हैं, "मेरी दिली ख़्वाहिश है कि गुलज़ार साहब तीजन बाई पर बन रही फ़िल्म के गाने लिखकर उनकी ज़िंदगी को अपने लिखे शब्दों से हमेशा के लिए अमर कर दें."

जब आलिया सिद्धिकी से पूछा गया की तीजन बाई का किरदार कौन निभाएगा ? आलिया सिद्धिकी कहती है ‘’हम चाहते है रानी मुखर्जी, विद्या बालन या प्रियंका चोपड़ा इनमे से एक हो.


इस फ़िल्म के निर्माण के लिए आलिया सिद्दीकी और मंजू गढ़वाल की मदद कर रहे नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी कहते हैं, "तीजन बाई अपने आप में एक किवदंती हैं. मुझे आलिया पर‌ पूरा यकीन है कि वो इस फ़िल्म को महज़ फ़िल्म फ़ेस्टिवल के लिए नहीं, बल्कि आज के आम‌ दर्शकों को ध्यान में रखकर इसे बेहद प्रासंगिकता के साथ बनाएंगी."

मंजू गढ़वाल कहती हैं, "आज भी वो अपनी जादुई और प्रभावशाली आवाज़ से दुनिया भर के श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर रही हैं. वो अपनी गायिकी को आज की पीढ़ी तक पहुंचा रही हैं."




 रॉ एजेंट रविन्द्र कौशिक पर राजकुमार गुप्ता की फिल्म- क्लिक करें 

रॉ एजेंट रविन्द्र कौशिक पर राजकुमार गुप्ता की फिल्म


आमिर, नो वन किल्ड जेसिका और रेड जैसी फिल्मों के निर्देशक राजकुमार गुप्ता (Raj Kumar Gupta), फिल्म रेड पूरी हो जाने के बाद दो स्क्रिप्ट पर काम कर रहे थे।  एक फिल्म की स्क्रिप्ट डिटेक्टिव क्राइम थ्रिलर थी।  इस कहानी पर, राजकुमार गुप्ता ने अभिनेता अर्जुन कपूर (Arjun Kapoor) के साथ फिल्म इंडियाज मोस्ट वांटेड पूरी कर ली है।  यह फिल्म २४ मई को रिलीज़ होने जा रही है।

अब वह, अपनी दूसरी स्क्रिप्ट पर काम कर रहे हैं।  यह स्क्रिप्ट भारत के लिए काम करने वाले अंडरकवर एजेंट रविंद्र कौशिक (Ravindra Kaushik) की है।  वह रॉ एजेंट बनने से पहले ही देश के लिए सूचनाएं इकठ्ठा कर भेजा करते थे।  तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदिरा गाँधी (Indira Gandhi) ने, उनकी इस जांबाज़ी के लिए ब्लैक टाइगर का खिताब दिया था।

रविंद्र कौशिक की कहानी बड़ी थ्रिलिंग और रोचक है।  उन्हें किस प्रकार से एजेंसी में शामिल किया गया।  उन्हें भेजने के लीये क्या क्या तैयारियां की, उन्होंने किस प्रकार की सूचनाएं एजेंसी को भेजी। वह पकड़े गए।  उन्हें यातनाएं मिली।  मृत्युदंड मिला और अंत मे जेल में १३ साल तक रहने के बाद टीबी की बीमारी से उनका निधन हो गया।


यह खुलासा दिलचस्प होगा कि उस समय की सरकार ने उनकी कोई भी मदद नहीं नही की। फिल्म मे इन सब चीजों का खुलासा आम दर्शक के लिए ज़बरदस्त जानकारी और प्रशंसा का कारण बनेगा। कहा जाता है कि सलमान खान (Salman Khan) की फिल्म एक था टाइगर की कहानी रविंद्र कौशिक की कहानी से प्रेरित थी।

रविंद्र कौशिक पर फिल्म की स्क्रिप्ट खुद राजकुमार गुप्ता लिख रहे हैं।  उन्हें इस फिल्म को बनाने के अधिआर, रविंद्र कौशिक के परिवार से मिल गए हैं। अभी इस फिल्म की स्टारकास्ट की जानकारी नहीं है।  लेकिन, जल्द ही इसका खुलासा भी हो जाएगा।  


राष्ट्रीय सहारा १७ मार्च २०१९  - क्लिक करें 

राष्ट्रीय सहारा १७ मार्च २०१९






क्यों रिलीज़ होती हैं शुक्रवार को फ़िल्में ? - क्लिक करें 

क्यों रिलीज़ होती हैं शुक्रवार को फ़िल्में ?


इस साल रिलीज़ होने वाली फिल्मों की तारीखों और उस तारीख़ में पड़ने वाले दिनों की पड़ताल कीजिये ! ज़्यादातर तारीख़ को शुक्रवार यानि फ्राइडे नज़र आता है।  मतलब यह कि छोटे, मंझोले और बड़े बजट की नई फिल्म शुक्रवार को रिलीज़ हो रही है। कभी शुक्रवार को या वीकेंड पर फिल्म देखने का कार्यक्रम बनाते समय आपने कभी सोचा कि हिंदी फ़िल्में शुक्रवार को ही क्यों रिलीज़ होती हैं ? किसी दूसरे दिन में क्यों नहीं रिलीज़ होती फ़िल्में ? 

हॉलीवुड का ट्रेंड ! 
हिंदी फिल्म इंडस्ट्री का नामकरण हॉलीवुड से प्रेरित होकर बॉलीवुड किया गया है। साफ़ तौर पर हिंदी फिल्म इंडस्ट्री, दुनिया के बॉक्स ऑफिस पर राज करने वाले हॉलीवुड से प्रभावित नज़र आती हैं। क्या हमारे देश में हिंदी फ़िल्में शुक्रवार को इसीलिए रिलीज़ होती है कि हॉलीवुड की फ़िल्में शुक्रवार को रिलीज़ होती है। क्योंकि, बाद के दो दिन यानि शनिवार और रविवार छुट्टियों के होते हैं।  फिल्म को देखने का प्रोग्राम बनाया जा सकता है। हॉलीवुड की फिल्म गॉन विथ द विंड पहली बार शुक्रवार  १५ दिसंबर को रिलीज़ हुई थी।  क्या इस कारण से हिंदी फिल्मे भी शुक्रवार को रिलीज़ होती हैं ? लेकिन, पचास के दशक एक उत्तरार्ध तक हिंदी फ़िल्में शुक्रवार को रिलीज़ नहीं हुआ करती थी।  नील कमल प्रमाण है कि यह फिल्म सोमवार २४ मार्च १९४७ को रिलीज़ हुई थी।  अलबत्ता, बॉलीवुड में फिल्मों के शुक्रवार को रिलीज़ होने का सिलसिला मुग़ल ए आज़म से शुरू हुआ।  यह फिल्म ५ अगस्त १९६० को रिलीज़ हुई थी।  इस दिन शुक्रवार था।

कुछ घरेलु कारण
हिंदी फिल्मों के शुक्रवार को रिलीज़ होने के घरेलु कारण ज़्यादा मज़बूत हैं।  यह देश की आर्थिक व्यवस्था पर आधारित हैं और धार्मिक आस्था की क़द्र करने वाले हैं। इस लिहाज़ से यह कारण ज़्यादा पुख्ता लगते हैं। 

शुक्रवार के बाद दो दिन छुट्टियों के 
आम तौर पर, शुक्रवार के बाद के दो दिन यानि शनिवार और रविवार छुट्टियों के होते हैं।  किसी फिल्म के शुक्रवार को रिलीज़ होने की दशा में, इसे शनिवार और रविवार को ज़्यादा दर्शक मिल सकते हैं।  दर्शकों को भी छुट्टियों में नई फ़िल्में देखने का मौक़ा मिल सकता था। 

मिलों में साप्ताहिक वेतन का दिन 
एक दूसरा कारण आर्थिक है।  मुंबई में कपड़ा मिलों तथा दूसरी मिलों की बहुतायत थी।  इन मिलों में मज़दूरों को साप्ताहिक वेतन दिया जाता था।  इसके बाद दो दिन छुट्टियों के होते थे।  चूंकि, बॉम्बे हिंदी फिल्मों का गढ़ है, इसलिए भी शुक्रवार को फिल्मे रिलीज़ होने का सिलसिला शुरू हो गया। 

धार्मिक कारण 
शुक्रवार को भाग्य लक्ष्मी का दिन माना जाता है। बॉलीवुड चाहे कितने ही धर्म मानने वालों का जमावड़ा क्यों न हो, लक्ष्मी को हर कोई मानता है।  पूजा पाठ करता और मनौतियां मानता है। फिल्मों के ज़्यादातर महूरत शुक्रवार को किये जाते हैं।  ऐसा माना जाता था कि शुक्रवार को लक्ष्मी की कृपा बरसती है।  यह पवित्र दिन माना गया है।  एक धार्मिक कारण मुस्लिम समुदाय से जुड़ा है।  मिलों में काम करने वाले अधिसंख्य मुस्लिम कर्मचारी शुक्रवार को नमाज़ के लिए आधी छुट्टी पर रहते थे।  नमाज़ पढ़ने के बाद और खीसे में पगार होने के कारण, स्वाभाविक था जनता का सिनेमाघरों की ओर रुख करना और अपने चहेते एक्टर की नई फिल्म देखना। 

पीवीआर ने भी बदला ट्रेंड 
क्या कभी आपने सोचा कि फिल्मे शुक्रवार को ही क्यों रिलीज़ होती है ? किसी दूसरे दिन क्यों नहीं ? ट्रेड से जुड़े लोग खुलासा करते हैं कि इसका कारण पीवीआर की टिकट दरें हैं।  आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि पीवीआर सिनेमाज में शुक्रवार को कम भाड़े में फिल्मे रिलीज़ की जाती हैं।यदि कोई नई फिल्म शुक्रवार के अलावा किसी दूसरे दिन रिलीज़ हो तो भाड़ा ज़्यादा काउंट किया जाता है।  इस लिहाज़ से, पहले दिन भारी कलेक्शन करने के ख्याल से भी शुक्रवार मुफीद बैठता है।


बढ़िया वीकेंड कलेक्शन 
इससे साफ़ होता है कि नई फिल्म की रिलीज़ के लिहाज़ से, शुक्रवार की स्थापित परंपरा पुख्ता है।  क्योंकि, वीकेंड के दो दिन छुट्टियों के होने के कारण दर्शकों की संख्या में वृद्धि करते हैं।  नई फिल्मों के वीकेंड के कलेक्शन बार बार इसकी पुष्टि करते भी हैं। फिल्मे चाहे हिंदी हो या तमिल, तेलुगु या कन्नड़ या फिर हॉलीवुड फ़िल्में, शुक्रवार को ही रिलीज़ होती है।  माउथ पब्लिसिटी इन फिल्मों का वीकेंड का कारोबार बढ़िया कर देते हैं। अगर फ़िल्में शुक्रवार के अलावा किसी दूसरे दिन रिलीज़ हो तो दर्शक बहुत कम मिलेंगे।  कितने ऐसे दर्शक होंगे जो ऑफिस या स्कूल कॉलेज छोड़ कर नई फिल्म देखने जाए।  उस पर माउथ पब्लिसिटी सकारात्मक प्रभाव डालती हैं तो नकारात्मक प्रभाव भी उतनी ही शिद्दत से डाल सकती है।  इसलिए वीकेंड का महत्व कुछ ज़्यादा हो चला है। इसके बावजूद वीकेंड के अलावा यानि शुक्रवार के अलावा दिनों में भी फ़िल्में रिलीज़ होती हैं। 

आमिर की ईज़ाद - एक्सटेंडेड वीकेंड ?
शुक्रवार के अलावा दूसरे किसी दिन फिल्म की रिलीज़ होने पर इसे एक्सटेनडेड वीकेंड कहा जाता है। आमिर खान की फिल्म गजिनी २५ दिसंबर २००८ को रिलीज़ हुई थी। इस दिन, पारम्परिक शुक्रवार नहीं गुरुवार (थर्सडे) था।  लेकिन, २५ दिसंबर को क्रिसमस हॉलिडे भी था। आमिर खान ने सोचा कि फिल्म थर्सडे रिलीज़ होगी तो उसे क्रिसमस हॉलिडे का फ़ायदा मिलेगा ही, वीकेंड का भी फायदा हो जाएगा। ऐसा हुआ भी। गजिनी, बॉलीवुड की १०० करोड़ क्लब बनाने वाली पहली फिल्म साबित हुई।क्या एक्सटेंडेड वीकेंड का फंडा आमिर खान की ईज़ाद है ? ऐसा कहना गलत होगा।  अलबत्ता, आमिर खान ने एक्सटेनडेड वीकेंड को १०० करोड़ की आसान दौड़ लगाने वाला ज़रूर बना दिया।  हालाँकि, २००८ में ही, संजय दत्त के साथ आमिर के भांजे इमरान खान की फिल्म किडनैप गुरुवॉर २ अक्टूबर गाँधी जयंती के दिन रिलीज़ हुई थी।  लेकिन, फिल्म बुरी तरह से असफल हुई। 

एक्सटेंडेड वीकेंड की बदौलत हिट 
आमिर खान की फिल्म रंग दे बसंती २६ जनवरी २००६ (गुरुवार) को रिलीज़ हुई थी। सलमान खान की फिल्म बॉडीगार्ड ३१ अगस्त २०११ (बुद्धवार) को रिलीज़ हुई थी। उस दिन ईद उल फ़ित्र भी थी।सलमान खान की ही फिल्म एक था टाइगर १५ अगस्त २०१२ (बुद्धवार) को स्वतंत्र दिवस के दिन  रिलीज़ हुई थी। इसके बाद ईद पड़ रही थी। नतीजे के तौर पर एक था टाइगर ने धुआँधार  कारोबार किया।  इसी प्रकार से, शाहरुख़ खान और दीपिका पादुकोण की एक्शन कॉमेडी फिल्म चेन्नई एक्सप्रेस ८ अगस्त गुरुवार को, रणबीर कपूर की फिल्म बेशर्म २ अक्टूबर २०१३ बुद्धवार को रिलीज़ हुई थी। बेशर्म को असफलता हाथ लगी। सलमान खान की फिल्म सुल्तान, ईद वीकेंड का फायदा उठाने के लिए दो दिन पहले यानि बुद्धवार ६ जुलाई २०१६ को रिलीज़ हुई। पिछले साल ही, सत्यमेव जयते और गोल्ड १५ अगस्त २०१८ (बुद्धवार) को रिलीज़ हुई थी। इससे पहले, पद्मावत भी २५ जनवरी २०१८ गुरुवार को रिलीज़ हुई। आमिर खान और अमिताभ बच्चन की फिल्म ठग्स ऑफ़ हिंदुस्तान ८ नवंबर गुरुवार को, बधाई हो १८ अक्टूबर २०१८ गुरुवार को रिलीज़ हुई थी। रजनीकांत, अक्षय कुमार और एमी जैक्सन की शंकर निर्देशित विज्ञान फंतासी फिल्म २.० गुरुवार २९ नवंबर २०१८ को रिलीज़ हुई थी। इससे पहले, २०१७ में गुरुवार १९ अक्टूबर २०१७ को दो फ़िल्में सीक्रेट सुपरस्टार और गोलमाल अगेन रिलीज़ हुई थी। आमिर खान की कुश्ती पर फिल्म दंगल २१ दिसंबर २०१६ को रिलीज़ हुई।  इस दिन बुद्धवार था। प्रेम रतन धन पायो भी गुरुवार १२ नवंबर २०१५ को रिलीज़ हुई थी। अगर हिंदुस्तान की टॉप ग्रॉसर १० फिल्मों पर एक नज़र डालें तो इस लिस्ट में शुक्रवार के अलावा रिलीज़ हुई दंगल, सीक्रेट सुपरस्टार, सुल्तान और पद्मावत के नाम दर्ज नज़र आते हैं । यह सभी फ़िल्में अपने अपने साल की टॉप १० ग्रॉसर फ़िल्में हैं।  

इसलिए रिलीज़ हुई बुद्धवार को रईस और काबिल 
परंपरा है कि हर नई हिंदी फिल्म शुक्रवार को रिलीज़ हो। लेकिन, इसके अपवाद भी हैं कि हॉलिडे वीकेंड का फायदा उठाने के लिए वीकेंड को एक्सटेंडेड कर लिया गया। लेकिन, इसका एक अपवाद दो फ़िल्में हैं। शाहरुख़ खान और माहिरा खान की फिल्म रईस और हृथिक रोशन और यामी गौतम की फिल्म काबिल २५ जनवरी  २०१७ को बुधवार रिलीज़ हुई। यह दोनों फ़िल्में २५ जून २०१७ को क्यों रिलीज़ हुई, जबकि गणतंत्र दिवस गुरुवार को पड़ रहा था। दरअसल, राकेश रोशन ने काबिल की रिलीज़ २६ जनवरी २०१७ तय की थी। ऐसा लगता था कि कोई टकराव नहीं होगा।  लेकिन, शाहरुख़ खान उसी दिन, अपनी फिल्म रईस ले कर आ गए। इसे देख कर राकेश रोशन ने काबिल को २६ जनवरी के बजाय एक दिन पहले रिलीज़ करने का ऐलान कर दिया। ताकि शाहरुख़ खान की फिल्म से पहले दिन ही टकराव न हो। लेकिन, शाहरुख़ खान ने यह देख कर कि काबिल की ओपनिंग बढ़िया हो सकती है, रईस को भी बुद्धवार २५ जनवरी को रिलीज़ करने का फैसला कर लिया।  इस प्रकार से रईस और काबिल हॉलिडे वीकेंड से एक दिन पहले ही  रिलीज़ हो गई। 

शुक्रवार को रिलीज़ नहीं हुई थी हॉलीवुड की मिलियन डॉलर फ़िल्में 
ट्रांसफॉर्मर्स रिवेंज ऑफ़ द फालेन ने १०८.९६ मिलियन डॉलर की ओपनिंग लेते हुए ४०२.११ मिलियन डॉलर का लाइफटाइम बनाया था।  इस फिल्म ने वर्ल्डवाइड ८३६.३ मिलियन डॉलर का कारोबार किया।  यह फिल्म २४ जून २००९ को रिलीज़ हुई थी।  उस दिन बुधवार था। स्टारवार्स एपिसोड ३ रिवेंज ऑफ़ सीथ १०८.४३ मिलियन की ओपनिंग लेते हुए ३८०.२७ मिलियन डॉलर का कारोबार किया।  इस फिल्म ने वर्ल्डवाइड ८४८.७५ मिलियन डॉलर का  कारोबार किया।  यह फिल्म गुरुवार १९ मई २००५ को रिलीज़ हुई थी। श्रेक २ को १०८ मिलियन डॉलर की ओपनिंग मिली थी।  फिल्म ने लाइफटाइम ४४१.२२ मिलियन डॉलर का करबोआर किया।  फिल्म ने वर्ल्डवाइड ९१९.८३ मिलियन डॉलर का कारोबार किया।  यह फिल्म बुद्धवार १९ मई २००४  को रिलीज़ हुई थी। इंडिआना जोंस एंड किंगडम ऑफ़ द क्रिस्टल स्कल ने १०० मिलियन डॉलर की ओपनिंग लेते हुए ३१७.११ मिलियन डॉलर का लाइफटाइम कारोबार किया।  फिल्म ने वर्ल्डवाइड ७८६.६ मिलियन डॉलर का कारोबार किया।  यह फिल्म २२ मई २००८ को रिलीज़ हुई थी।  इस दिन गुरुवार था। ट्रांसफार्मर्स डार्क ऑफ़ द मून २९ जून २०११ को रिलीज़ हुई थी। इस दिन बुद्धवार था।  फिल्म ने ९७.८ मिलियन डॉलर की ओपनिंग ली थी। फिल्म ने लाइफटाइम ३५२.३ मिलियन का कारोबार किया।  फिल्म ने वर्ल्डवाइड ११२३.७ मिलियन डॉलर का कारोबार किया।

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