Friday, 21 November 2025

वहीदा रहमान ने फिर क्यों नहीं की राज खोसला के साथ फिल्म ?



देवानंद और गीताबाली की साथ फिल्म मिलाप (१९५५) का निर्देशन करने वाले निर्देशक राज खोसला हिंदी दर्शकों की रूचि समझते थे।  वह जानते थे कि किसी भी युग के दर्शकों को सबसे अधिक रूचि हत्या रहस्य और रोमांच से मिलती है।  इस शैली में बनी फिल्मे, दर्शकों को अवश्य पसंद आएंगी।

 

 

 

 

 

यही कारण था कि उन्होंने कॉमेडी ड्रामा फिल्म मिलाप के बाद, क्राइम थ्रिलर एक्शन फिल्मों का निर्माण प्रारम्भ किया। उन्होंने समय के अनुरूप भिन्न शैली की फिल्म का निर्माण भी किया।

 

 

 

 

 

 

राज खोसला के निर्देशन में सीआईडी क्राइम थ्रिलर शैली में बनी, अगली फिल्म थी। इस फिल्म की सफलता के बाद, उन्होंने थ्रिलर फिल्मों को अधिक महत्त्व दिया।  राज खोसला की इसी समझ का परिणाम था कि वह हर अगली फिल्म दर्शकों की पसंद के अनुरूप सुपरहिट बना देते।

 

 

 

 

 

 

 

उनके नाम के पारस पत्थर ने काला पानी, सोलहवा साल, बम्बई का बाबू, एक मुसाफिर एक हसीना, वह कौन थी, मेरा साया, दो बदन, अनीता, चिराग, दो रास्ते, मेरा गांव मेरा देश, शरीफ बदमाश, कच्चे धागे, आदि फिल्मे हिट करा डाली।

 

 

 

 

 

 

उन्होंने अपनी फिल्मों का ट्रैक भी बदला। पारिवारिक प्रेम कथानक वाली फ़िल्में प्रेम कहानी, मैं तुलसी तेरे आँगन की, दो प्रेमी, दोस्ताना, दो रास्ते, आदि फ़िल्में उनकी भिन्न शैली और दर्शकों की रूचि के अनुरूप फिल्मे बना सकने की क्षमता का प्रमाण है।

 

 

 

 

 

 

हर अभिनेता या अभिनेत्री उनकी निर्देशित फिल्मों की स्टारकास्ट में सम्मिलित होना चाहती। किन्तु, वहीदा रहमान ही, कदाचित ऎसी अभिनेत्री थी, जिन्होंने, राज खोसला के साथ दो हिट फिल्मे करने के बावजूद फिर २६ साल तक कोई फिल्म नहीं की।

 

 

 

 

 

 

 

ऐसा क्या हो गया था कि वहीदा रहमान ने, सोने के हाथ वाले निर्देशक की बाद की फिल्मों में अभिनय नहीं किया, जबकि वह उनके साथ सीआईडी और सोलहवा साल जैसी हिट फिल्मो में अभिनय कर चुकी थी? इसका कारण भी इन्ही फिल्मों  के शूटिंग के समय हुए घटनाक्रम में छुपा है।

 

 

 

 

 

 

 

वहीदा रहमान को हिंदी फिल्मों में अवसर दिया, स्वर्गीय गुरुदत्त ने। उन्होंने, वहीदा रहमान की तमिल और तेलुगु फिल्मों को देखा था। वह वहीदा रहमान से प्रभावित हुए। उन्होंने, वहीदा रहमान को, राज खोसला द्वारा निर्देशित की जाने वाली फिल्म सीआईडी में देवानंद और शकीला के साथ सह-भूमिका में ले लिया। राज खोसला के साथ मनमुटाव का प्रारम्भ इसी फिल्म से हुआ।

 

 

 

 

 

 

 

सीआईडी की कामिनी एक क्लब डांसर थी। राज खोसला के साथ मनमुटाव का प्रारम्भ इसी फिल्म के गीत कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना की शूटिंग दौरान से हुआ था। इस गीत के लिए, राज खोसला क्लब डांसर के अनुरूप वहीदा रहमान को थोड़ा लो कट कुर्ता पहनाना चाहते थे। किन्तु, अपने परिधान के लिए सचेत वहीदा रहमान ने ऎसी कोई पोशाक पहनने से साफ मना कर दिया।

 

 

 

 

 

 

दोनों के बीच तीखी बहस हुई।  शूटिंग में व्यवधान भी पड़ा। अंत में, फिल्म के नायक देवानंद के बीच में पड़ने के बाद, वहीदा रहमान ने एक दुपट्टा डाल कर ही फिल्म का गीत किया। इसी फिल्म में, वहीदा रहमान ने, एक सीन में अपना दुपट्टा गिराने से मना कर दिया।

 

 

 

 

 

 

दूसरा टकराव हुआ, देवानंद के साथ वहीदा रहमान की राज खोसला निर्देशित फिल्म सोलहवा साल की शूटिंग के दौरान। हॉलीवुड फिल्म इट हैप्पेन्स वन नाईट की नक़ल पर बनी फिल्म सोलहवा साल एक युवती के शादी के ठीक पहले अपने प्रेमी के साथ भाग निकलने के एक रात के कथानक पर थी। फिल्म मुख्य रूप से वहीदा रहमान, उनके प्रेमी जगदेव और रिपोर्टर देवानंद पर केंद्रित थी।

 

 

 

 

 

 

इस फिल्म के एक दृश्य में नायिका वहीदा रहमान, भारी बारिश में भीग जाती है। एक घर में उन्हें शरण मिलती है। वहां वहीदा रहमान अपने कपडे बदलती है। राज खोसला इस दृश्य में चाहते थे कि नायिका को उनके साइज और पसंद के कपडे नहीं मिलने के कारण थोड़ी खुली ड्रेस पहननी पड़ती है। किन्तु, यहाँ भी वहीदा रहमान ने ऎसी ड्रेस न पहनने की का निर्णय लिया।

 

 

 

 

 

 

 

इस पर, निर्देशक राज खोसला के साथ वहीदा रहमान की गर्मागर्म बहस हुई। क्रुद्ध राज खोसला ने, फिल्म की शूटिंग रद्द कर दी।  यहाँ भी देवानंद बीच में पड़े। उन्होंने वहीदा रहमान का पक्ष लेते हुए, राज खोसला को उनकी पसंद की ड्रेस पहनने के लिए मना लिया। किन्तु, इस घटना के बाद, वहीदा रहमान ने, फिर कभी राज खोसला के साथ फिल्म करने से मना कर दिया।

 

 

 

 

 

 

 

वहीदा रहमान की, राज खोसला के साथ मनमुटाव का परिणाम था कि राज खोसला के हाथ से, गाइड के हिंदी संस्करण के निर्देशन का अवसर निकल गया। जैसे ही वहीदा रहमान को गाइड के निर्देशक के रूप में राज खोसला के नाम का पता चला, उन्होंने देवानंद को साफ कर दिया कि यदि गाइड का निर्देशन राज खोसला करते हैं तो वह फिल्म नहीं करेंगी। ऐसे में वहीदा रहमान पर मोहित देवानंद ने  गाइड के निर्देशन की कमान राज खोसला से लेकर अपने भाई विजय आनंद को सौंप दी।

 

 

 

 

 

 

 

वहीदा रहमान ने, राज खोसला के साथ अपने मतभेद भुलाते हुए, २६ साल बाद फिल्म सनी करने पर सहमति दी थी। इस फिल्म के नायक सनी देओल थे। नायिका अमृता सिंह और शर्मीला टैगोर के साथ, वहीदा रहमान ने फिल्म सनी में एक नकारात्मक चरित्र किया था।  इस फिल्म में धर्मेंद्र का कैमिया हुआ था। किन्तु, यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो सकी।  इस प्रकार से, वहीदा रहमान की राज खोसला के साथ २६ साल बाद तीसरी फिल्म असफल हुई।  

#WakeUpDeadMan के डिटेक्टिव #DanielCraig #Netflix पर भी





बेनॉइट ब्लैंक  का नया युग, पूरी दुनिया के चुनिंदा छविगृहों में २६ नवंबर से और नेटफ्लिक्स पर १२ दिसंबर से प्रारम्भ होने जा रहा है। यह फिल्म ग्लास अनियन (२०२२) की  स्वतंत्र सीक्वल और नाइव्स आउट फ़िल्म श्रृंखला की तीसरी किस्त है।






वेक अप डेड मैन : अ नाइव्स आउट मिस्ट्री का जासूस बेनॉइट ब्लैंक एक नया मामला हाथ में लेता है।  इस मामले को सुलझाने में उसे एक करिश्माई पादरी मोनसिग्नोर जेफरसन विक्स और उसकी धर्मपरायण मण्डली के संदेह के घेरे में आ जाती है। जब एक रहस्यमयी मृत्यु होती है, तो ब्लैंक को सच्चाई का पता लगाने के लिए रहस्यों के एक जटिल जाल और समुदाय के भीतर पनपते तनावों से निपटना पड़ता है ।






अमेरिकी मिस्ट्री फ़िल्म वेक अप डेड मैन का लेखन और निर्देशन रियान जॉनसन ने किया है। फिल्म वेक अप डेड मैन जासूस बेनॉइट ब्लैंक की भूमिका डैनियल क्रेग मुख्य भूमिका में हैं। इस मास्टर जासूस बेनोइट ब्लैंक की भूमिका को डेनियल क्रैग ने पहली बार, २७ नवंबर २०१९ को प्रदर्शित फिल्म नाइव्स आउट में किया था। 







फिल्म के अन्य  कलाकारों में जॉश ओ'कोनोर, ग्लेन क्लोज, जॉश ब्रोलिन, मिला कुनिस, जेरेमी रेनर, केरी वाशिंगटन, एंड्रू स्कॉट, कैली स्पैनी, डेरिल मैककर्मक और थॉमस हेडेन चर्च के नाम सम्मिलित है। 
नाइव्स आउट की तीनों फिल्मों के लेखक, निर्माता और निर्देशक  रिआन जॉनसन थे और सह निर्माता रैम बेर्गमन। नाइव्स आउट सीरीज की तीनों फिल्मों का बजट १२० करोड़ है। पहली दो फ़िल्में अब तक ३२७.८९८ का ग्रॉस कर चुकी है। 

Thursday, 20 November 2025

#Nayanthara की #NandamuriBalakrishna के साथ चौथी फिल्म #NBK111



दक्षिण की लोकप्रिय फिल्म अभिनेत्री नयनतारा का ४१वां जन्मदिन, उनके प्रशंसकों को चौंकाने वाला और गदगद कर देने वाला था। इस अवसर पर स्वयं नयनतारा और फिल्म के निर्माताओं ने यह घोषणा की कि आगामी ऐतिहासिक एक्शन ड्रामा फिल्म अस्थाई शीर्षक    NBK111 में कर लिया गया है ।





इस प्रकार से, तेलुगु दर्शकों में लेडी सुपरस्टार के रूप में प्रसिद्ध नयनतारा, तेलुगु दर्शकों के भगवान नंदमुरी बालकृष्ण के साथ अभिनय करने जा रही है। इस फिल्म में नयनतारा के सम्मिलित होने की घोषणा के प्रभावशाली मोशन पोस्टर के माध्यम से की गई। इसमें नयनतारा को एक रानी के  राजसी और प्रचंड अवतार में दिखाया गया है। इस पोस्टर में वह एक अभेद्य किले के सामने युद्ध भूमि में घोड़े पर सवार हैं।





इस पोस्टर की टैगलाइन द क्वीन एंटर्स द एम्पायर द्विअर्थी है। इसका पहला अर्थ तो यह है कि वह इस फिल्म में एक रानी की भूमिका कर रही है। दूसरा अर्थ फिल्म के सन्दर्भ में है कि लेडी सुपरस्टार नयनतारा फिल्म एनबीके १११ के साम्राज्य में प्रवेश कर रही है। स्पष्ट रूप से यह नयनतारा के लिए एक विशाल मंच बनाने जैसा है।  





 एनबीके १११, नयनतारा और बालकृष्ण के लिए पुनर्मिनल जैसा है।  यह इन दोनों प्रतिष्ठित कलाकारों की एक साथ चौथी फिल्म होगी।  इस फिल्म से पूर्व, इन दोनों का सफल सहकार एक्शन ड्रामा फिल्म  सिम्हा (२०१०), भक्ति फ़िल्म श्री राम राज्यम (२०११), और जय सिम्हा (२०१८) में एक दूसरे की प्रतिभा का आंकलन किया था । उनकी ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री दर्शकों को लगातार अट्रैक्ट करती रही है। यही कारण है कि एनबीके १११ दर्शकों के लिए तेलुगु सिनेमा की बहुप्रतीक्षित फिल्मों में से एक बन गई है।





एनबीके १११ का निर्देशन  गोपीचंद मालिनेनी कर रहे हैं। यह उनका बालकृष्ण के साथ दूसरा सहकार है। २०२३ की ब्लॉकबस्टर फिल्म वीरा सिम्हा रेड्डी में बालकृष्ण ने गोपीचंद मालिनेनी के निर्देशन में पहली बार अभिनय किया था।  गोपीचंद ने, सनी देओल की फिल्म जाट का लेखन और निर्देशन किया था।  यह गोपी की पहली हिंदी फिल्म थी। 






रोचक तथ्य यह है कि इस फिल्म से गोपीचंद मालिनेनी पहले बार कोई ऐतिहासिक ड्रामा फिल्म का निर्देशन कर रहे है।  वह अभी तक आम दर्शकों को पसंद आने वाली मसाला एक्शन फिल्मों का ही निर्देशन करते रहे है।  बताया जा रहा है कि यह फ़िल्म इतिहास के एक स्वर्णिम पृष्ठ का प्रारम्भ करेगी। इस फिल्म में एक्शन के साथ साथ संवेदनायुक्त पात्र होंगे, फिल्म लार्जर-दैन-लाइफ़ एक्शन तो होगी ही ।





एनबीके १११ का निर्माण वेंकट सतीश किलारू वृद्धि सिनेमाज़ के बैनर तले निर्मित कर रहे हैं। यद्यपि अभी शेष स्टार कास्ट और क्रू की घोषणा नहीं हुई है, किन्तु, यह निश्चित हो गया है कि प्रसिद्ध संगीकार एस. थमन फिल्म का संगीत देंगे।  फिल्म को २६ नवंबर को आधिकारिक रूप से प्रारम्भ कर दिया जाएगा। तब तक संभव है कि अन्य विवरण भी मिल जाये। 

Wednesday, 19 November 2025

#SamyukthaMenon की पहली हिंदी फिल्म #Maharagni:QueenofQueens



पलक्कड़, केरल में ११ सितम्बर १९९५ को जन्मी संयुक्ता मेनन का कैमरा से पहला परिचय मलयालम फिल्म पॉपकॉर्न (२०१६) से हुआ था। उन्हें २०१८ में प्रदर्शित फिल्म तीवंडी में  अपनी देवी की भूमिका से प्रसिद्धि मिली ।






संयुक्ता अब तक, २३ मलयालम, तेलुगु और तमिल फिल्मों में अभिनय कर चुकी है। उनकी लिल्ली, कल्कि, वेलम, वुल्फ, एरिडा, भीमला नायक, कडुवा, बिम्बिसार, वाती, विरुपाक्ष, डेविल के नाम उल्लेखनीय है। उनकी इस साल फिल्म अखण्डा २ प्रदर्शित होने जा रही है। 





संयुक्ता का हिंदी फिल्म दर्शकों से प्रथम परिचय फिल्म महाराज्ञी क्वीन ऑफ़ क्वींस से होने जा रहा है। इस फिल्म में वह मोहिनी की भूमिका कर रही है।  निर्देशक चरण तेज उप्पलपति की इस एक्शन थ्रिलर अपराध फिल्म की महारानी काजोल है।  संयुक्ता, काजोल की माया की पुत्री की भूमिका कर रही है। 





महाराज्ञी की पूरी शूटिंग हिंदी में हुई है।  किन्तु, यह फिल्म हिंदी के अतिरिक्त तेलुगु, तमिल, कन्नड़ और मलयालम में भी प्रदर्शित की जाएगी।  इस फिल्म में काजोल के अतिरिक्त  हिंदी फिल्म फिल्म दर्शकों के परिचित प्रभुदेवा,नसीरुद्दीन शाह,  जिशुआ सेनगुप्ता और आदित्य सील के चेहरे दिखाई देंगे। 

निराशाजनक समाज पर वेश्या को अपनाने वाला नायक था 'प्यासा' का विजय !



भारत की स्वतंत्रता के समय, २२ साल के वसंत कुमार शिवशंकर पादुकोण के नेत्रों में, सामान्य युवा की तरह कुछ सपने थे।  यह सपने समय के साथ धूमिल पड़ते गए। उनमे निराशा की धूल ज़मने लगी। ऐसे समय में, वसंत कुमार के मस्तिष्क में एक कहानी कश्मकश का जन्म हुआ।  इस कथानक में, वसंत के प्रारंभिक संघर्ष की छाप थी। 




 

जब वसंत कुमार शिवशंकर पादुकोण ने, गुरुदत्त बन कर फिल्म बनाने का निर्णय लिया तो उनके मस्तिष्क में इसी कहानी का विचार था।  इस कथानक में गीतकार साहिर लुधियानवी के लेखिका अमृता प्रीतम के साथ असफल प्रेम का मिश्रण किया गया।  इसके साथ ही गुरुदत्त के निर्देशन में बनी सातवीं फिल्म प्यासा का जन्म हुआ।  





गुरुदत्त अपने मन में  चार साल से चल रहे विषय पर ही फिल्म प्यासा को अपनी पहली निर्देशित फिल्म बनाना चाहते थे।  किन्तु, उनके मित्रों ने सलाह दी कि इस प्रयोगात्मक फिल्म से पूर्व कुछ ऎसी फिल्मे बना लो, जो उस समय दर्शकों की पसंदगी के अनुरूप हों तथा जिनसे पैसा कमाया जा सके।





गुरुदत्त ने, अपने मित्रों की बात मानी।  इस निर्णय का परिणाम, गुरुदत्त के निर्देशन में बनी बाज़ी (१९५१), जाल (१९५२), बाज़ (१९५३), आर पार (१९५४) और मिस्टर एंड मिसेज ५५ (१९५५) जैसी मनोरंजक और उतनी ही सकरात्मक फिल्मे हिंदी दर्शकों को देखने को मिली। यह सभी फ़िल्में बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट हुई।  






इन फिल्मों के पश्चात, जब गुरुदत्त ने अपने सह  निर्देशक राज खोसला को अपराध फिल्म सीआईडी की कमान सौंप कर, स्वयं प्यासा पर काम करना प्रारम्भ कर दिया। इसका अर्थ यह नहीं था कि १९५१ से निरंतर प्रत्येक वर्ष हिट फिल्मे दे रहे गुरुदत्त ने १९५६ में को फिल्म निर्देशित नहीं की! उनके द्वारा निर्देशित अभी भट्टाचार्य, गीता बाली और स्मृति विश्वास के साथ फिल्म सैलाब प्रदर्शित हुई थी।






प्यासा २२ फरवरी १९५७ को प्रदर्शित हुई थी।  इस फिल्म में गुरुदत्त, वहीदा रहमान, माला सिन्हा, रहमान और जॉनी वाकर अभिनय कर रहे थे। किन्तु, यह स्टारकास्ट प्रारम्भ में नहीं थी। स्वयं गुरुदत्त को स्वयं पर विश्वास नहीं था कि वह हल्कीफुल्की करते हुए, इतनी गंभीर और दुखांत भूमिका कर सकते थे। इसलिए उन्होंने इस फिल्म के लिए दिलीप  कुमार, मधुबाला और नरगिस को लिया जाना तय किया था। किन्तु, किसी न किसी कारण से, यह सितारे एक के बाद एक फिल्म से बाहर होते चले गए। 





प्यासा में दिलीप कुमार की चाहती अभिनेत्रियां नरगिस और मधुबाला थी।  किन्तु, बताया जाता है कि किन्ही कारणोंवश दिलीप कुमार शूटिग के पहले दिन सेट पर नहीं पहुंचे, इसलिए गुरुदत्त ने इस भूमिका को स्वयं करने का निर्णय लिया।  कुछ का कहना है कि दिलीप कुमार दुखांत भूमिकाएं करते करते  मानसिक रूप से अस्वस्थ हो गए थे। उन्हें डॉक्टर ने सलाह दी कि अब वह दुखांत भूमिकाये न करे। कुछ का कहना है कि दिलीप कुमार को प्यासा का कथानक अपने द्वारा अभिनीत फिल्म   देवदास जैसा लगा था। 





नरगिस और मधुबाला के निकलने के कारण भी भिन्न है।  कहा जाता है कि शीर्ष की यह दोनों अभिनेत्रियां यह तय नहीं कर पा रही थी कि वह कौन सी भूमिका करें।  इस अनिर्णय की स्थिति में, गुरुदत्त ने मधुबाला के स्थान पर १९५४ में हिंदी फिल्मों में प्रवेश करने वाली अभिनेत्री माला सिन्हा को ले लिया और नरगिस वाली भूमिका अपनी खोज वहीदा रहमान को दे दी।  





वहीदा रहमान वेश्या गुलाबों फिल्म के लेखक के वास्तविक जीवन के एक चरित्र पर आधारित था।  बताते हैं कि जब अबरार अल्वी अपने दोस्तों के साथ मुंबई गए, तो वे रेड लाइट एरिया भी गए, जहाँ उनकी मुलाकात एक युवा वेश्या से हुई जिसका नाम गुलाबो था। लड़की ने दावा किया कि उसे ज़िंदगी में पहली बार गालियों के बजाय इतना सम्मान मिला था। लेखक अबरार अल्वी ने उन बातों को अपनी फिल्मों में रखा ही, वहीदा रहमान के चरित्र को नाम भी गुलाबो ही दिया ।





फिल्म के अंत को लेकर भी लेखक अबरार अल्वी और गुरु दत्त के बीच मतभेद था। लेखक का मानना ​​था कि गुरुदत्त के चरित्र विजय को उस समाज को छोड़ना नहीं चाहिए। बल्कि, उसे समाज की बुराइयों से लड़ना चाहिए। यद्यपि,  गुरु दत्त अपनी बात पर अड़े रहे और अंततः अबरार को झुकना पड़ा। 





मूल क्लाइमेक्स में विजय के चरित्र को अकेला दिखाया जाना था। लेकिन वितरकों ने गुरुदत्त से कहा कि वह विजय को अकेला नहीं दिखाए। वितरकों के इस अनुरोध पर गुरु दत्त ने अंत में विजय और गुलाबों को साथ जाते दिखाया था । इस अंत पर भी, गुरु दत्त और अबरार अल्वी के बीच बहस हुई क्योंकि अबरार अल्वी मूल अंत चाहते थे। 






प्यासा को प्रारम्भ में बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रसाद नहीं मिला था।  किन्तु बाद में फिल्म ने गति पकड़ ली और १९५७ की दस सबसे अधिक कमाई करने वाली फिल्मों में सम्मिलित हो गई।  यह बात अलग है कि फिल्म को तत्कालीन पत्रकारों ने बहुत नापसंद किया था। उनका कहना था कि विजय कैसा समाज विरोधी चरित्र था, जो समाज पर एक वेश्या को महत्त्व देता था।  इस चरित्र को निराशाजनक भी माना गया। यहाँ तक कि फिल्म कंपेनियन द्वारा २०२३ किए गए सर्वेक्षण में, १५० फिल्म समालोचकों, निर्देशकों और उद्योग के विशेषज्ञों ने सत्यजीत रे की पाथेर पांचाली और गुरुदत्त की प्यासा से आगे, शोले को सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ भारतीय फिल्म चुना। जबकि, इस फिल्म को टाइम मैगज़ीन की २०वीं सदी की शीर्ष १०० फ़िल्मों की सूची में सत्यजीत रे की अपू त्रयी के साथ सम्मिलित किया गया ।  





गुरुदत्त की निर्देशक के रूप में प्यासा अंतिम सफल फिल्म थी। प्यासा के बाद उन्होंने कागज़ के फूल का निर्देशन किया, जो उनकी आखिरी निर्देशित फिल्म थी। यह फिल्म बड़ी फ्लॉप हुई थी।  

Tuesday, 18 November 2025

क्या #ArjunRampal #AkshayeKhanna और #SanjayDutt के सामने #Dhurandhar साबित होंगे #RanveerSingh ?



पाकिस्तान में, एसएसपी चौधरी असलम, रहमान डाकू, बाबा लाडला, फहीम कमांडो, उजैर बलूच आदि ऐसे कुख्यात किरदार हैं जिनकी कहानियाँ सुनाई जाती हैं। किन्तु, किसी पाकिस्तानी फिल्म  निर्माता द्वारा दिखाई नहीं जाती। भारत में आतंकवादी गतिविधियों के लिए उत्तरदाई इन नामों का सन्दर्भ पाकिस्तान की किसी फिल्म में नहीं मिलता। किन्तु,  बॉलीवुड के फिल्म निर्माता इनमे से कुछ का परिचय भारतीय दर्शकों से कराने जा रहे है। 





उरी के निर्देशक आदित्य धर द्वारा निर्मित, लिखित और निर्देशित फिल्म धुरंधर का ट्रेलर आज कुछ देर पहले जारी हुआ है। इस ट्रेलर में रणवीर सिंह बिलकुल भिन्न शैली में है।  उनका संवाद कि यदि तुम्हारे पटाखे ख़त्म हो गए हों तो मैं धमाका शुरू करूँ, दर्शकों का उत्साह बढ़ाने वाला है। 





किन्तु, चार मिनट ७ सेकंड लम्बे इस टीज़र का बड़ा भाग पाकिस्तान के विलेन लूट ले गए है। प्रारम्भ में, अर्जुन रामपाल के मेजर इक़बाल को मौत का फरिश्ता बताया गया है। आईएसआई का यह अधिकारी एक व्यक्ति के साथ क्रूरता करता दिखाया गया है। उसके बारे में यह विवरण दिया गया है कि उसकी जिस पर कृपा हो जाएँ, उसका भविष्य बदल जाता है तथा यह भी कि  उसकी मर्जी के बिना पाकिस्तान की  राजनीती का एक पत्ता भी नहीं हिलता।  






अर्जुन रामपाल के मेजर इक़बाल के बाद, अक्षय खन्ना का रहमान डकैत सामने आता है।  अक्षय  खन्ना अपनी ही शैली में इस चरित्र को क्रूर बताते हुए कहते हैं कि रहमान डकैत की दी हुई मौत बड़ी कसाईनुमा होती है। वह पत्थर  से किसी का सर कुचलते दिखाए जाते है।  





इसके बाद, रणवीर  सिंह के चरित्र से एक व्यक्ति बताता है कि एक बार एक शैतान और जिन्न के बीच सेक्स हुआ। नौ महीने बाद जो पैदा हुआ, उसका नाम पड़ा चौधरी असलम। तब सामने  हैं बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त।  उनका असलम भी जिन्न बताया गया है।  वह स्वचालित बन्दूक थामे अनियंत्रित गोलियां बरसा रहे है। 





इन तीन चरित्रों के मध्य इकलौते रणवीर सिंह पाकिस्तान में घुसे दिखाए गए है। पाकिस्तान के मेजर  इक़बाल, रहमान डकैत और चौधरी असलम के चरित्रों का इतना विस्तार से दिखाया जाना और विवरण दिया जाना, यह जताता है कि फिल्मकार,  रणवीर सिंह के भारतीय एजेंट को मानवेत्तर यानि  सुपर ह्यूमन दिखाना चाहते है।  किन्तु, यह भारी भी पड़  सकता है।  





निस्संदेह, हिंदी फिल्मों का गणित है कि खलनायक जितने खतरनाक होंगे, हीरो उतना ही बहादुर समझा जायेगा। दर्शकों के सामने ऐसे नायक का कद बढ़ जाता है। किन्तु, यह तभी हो पायेगा, जबकि वह अभिनेता अपने इस हीरो को इतनी  ऊंचाई  तक ले जा सकें, जहाँ से खलनायक बौने लगे। 






क्या भारतीय एजेंट बने रणवीर सिंह, अर्जुन रामपाल, अक्षय खन्ना और संजय दत्त जैसे अभिनेताओं द्वारा खेले गए विलेन चरित्रों के सामने अपने एजेंट को उस  ऊंचाई तक ले जा पाएंगे ?  यही रणवीर सिंह के अभिनेता की परीक्षा होगी।  क्योंकि, वह अभी तक एक्शन करते हुए भी कॉमेडी मिक्स हो जाया करते रहे है। 

#RamMadhvani की #spiritual #action #thriller फिल्म में #TigerShroff



बॉक्स ऑफिस पर औसत फिल्म बागी ३ तथा हीरोपंथी ३, गणपत, बड़े मिया छोटे मिया और बागी ४ की ऐतिहासिक असफलता के बाद, इन फिल्मों के नायक अभिनेता टाइगर श्रॉफ को कुछ साहसिक निर्णय लेने के लिए विवश कर दिया है।

 

 

 

 

 

समाचार हैं कि वह निर्देशक राम माधवानी के निर्देशन में एक आध्यात्मिक एक्शन थ्रिलर फिल्म करने जा रहे है। विशुद्ध एक्शन फिल्मों के अभिनेता टाइगर श्रॉफ का यह निर्णय साहसिक प्रतीत होता है।  इस फिल्म में टाइगर श्रॉफ के भिन्न एक्शन तो होंगे ही, आध्यात्मिक चिंतन भी होगा।  ठीक द मैट्रिक्स की तरह का। 

 

 

 

 

राम माधवानी ने, सोनम कपूर के साथ थ्रिलर फिल्म नीरजा से राष्ट्रव्यापी सफलता और प्रशंसा प्राप्त की थी। उनकी फिल्म धमाका और वेब सीरीज आर्या एक दूसरी से भिन्न शैली वाली थी। इसी के अनुरूप टाइगर श्रॉफ के साथ वाली फिल्म भी अभूतपूर्व शैली वाली है।

 

 

 

 

राम माधवानी की अनाम फिल्म की शूटिंग २०२६ के मध्य में प्रारम्भ होगी।  इससे पूर्व, टाइगर श्रॉफ को निर्देशक सचिन रवि की निर्माता मुराद खेतानी की अनाम फिल्म तथा पापा जैकी श्रॉफ के साथ जाह्नवी कपूर और तब्बू की राज  मेहता निर्देशित फिल्म लग जा गले की शूटिंग पूरी करनी है।  अभी राम माधवानी की फिल्म की शूटिंग प्रारम्भ करने से पूर्व कई निर्माण और तकनीक सम्बन्धी तैयारियां की जानी है, जिनमे समय लगना स्वभाविक है। 

 

 

 

 

 प्राप्त सूचनाओं के अनुसार राम माधवानी की फिल्म में टाइगर श्रॉफ का अभूतपूर्व अवतार होगा। क्योंकि, आध्यात्मिक और एक्शन शैली की कोई भी हिंदी फिल्म नही बनाई गई है।  इस फिल्म को हॉलीवुड की द मैट्रिक्स श्रृंखला फिल्मों के समकक्ष रखा जा रहा है।  इस फिल्म की तैयारी, भारतीय ही नहीं, वैश्विक दर्शकों को ध्यान में रख कर डिज़ाइन की जा रही है।


 

 

 

फिल्म की शूटिंग को लेकर चर्चा है कि फिल्म का अधिकतम भाग जापान में शूट किया जायेगा।  इस प्रकार से, टाइगर श्रॉफ की फिल्म, आधुनिक बॉलीवुड की जापान में इस स्तर तक शूट की जाने वाली पहली फिल्म होगी।  यह फिल्म २०२६ की दूसरी तिमाही में प्रारम्भ हो जाएगी। टाइगर  श्रॉफ भी फिल्म के स्तर के अनुरूप कड़ी मेहनत कर रहे है ताकि इस फिल्म के योग्य उनका व्यक्तित्व प्रतीत हो।

 


 

फिल्म निर्माताओं द्वारा अभी टाइगर  श्रॉफ के नाम का ही उल्लेख किया है। फिल्म की मुख्य अभिनेत्री और मुख्य खलनायक के नामों पर विचार किया जा रहा है। फिल्म और टाइगर के चरित्र के अनुरूप एक सशक्त प्रतिपक्षी की भूमिका के लिए योग्य अभिनेता का चयन सरल भी नहीं है। संभव है कि जब निर्माताओं द्वारा फिल्म की जानकारी देने वाली पहली झलक में इन नामों का भी खुलासा हो।   

#JioStudios और #AdityaDhar के #Dhurandhar #RanveerSingh, #SanjayDutt, #AkshayeKhanna, #RMadhavan, #ArjunRampal


 

Monday, 17 November 2025

टकराव पोंगल पर #Sivakarthikeyan #ThalapathyVijay का !



आज के समय में किसी फिल्म का श्वेत श्याम पोस्टर ! अब रंगों का युग है। किन्तु, कथानक पर काफी निर्भर करता है।  यदि फिल्म किसी पुरानी राजनीतिक घटना पर केंद्रित हो तो यह आवश्यक हो जाता है। 





शिवकार्तिकेयन ने अपनी राजनीतिक ड्रामा फिल्म 'पराशक्ति' का एक काला-सफ़ेद पोस्टर इसका परिणाम है। इस पोस्टर में वह एक पुराने रेलवे ट्रैक पर खड़े दिखाई दे रहे हैं। ऐसे पोस्टर, तमिलनाडु में प्रमुख स्थानों पर लगे दिखाई दे रहे है।  





आर माधवन के साथ चर्चित फिल्म इरुधि सुतरु/साला खड़ूस और सूर्या को श्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जिताने वाली फिल्म सुरराई पोत्तरु की निर्देशक  सुधा कोंगारा द्वारा निर्देशित फिल्म पराशक्ति का कथानक द्रविड़ दलों द्वारा तमिलनाडु में १९६५ में चलाये गए हिंदी विरोधी आंदोलन से प्रेरित है।






आज इस फिल्म को पोंगल २०२६ को प्रदर्शित किये जाने की घोषणा की गई। इससे रेड जायंट मूवीज़ और सारेगामा जैसे वितरकों का समर्थन प्राप्त पराशक्ति की पोंगल के दिन तमिल फिल्म सुपरस्टार दलपति विजय की राजनीतिक ड्रॉमा फिल्म जन नायकन से बॉक्स ऑफिस पर सीधी टक्कर की स्थिति उत्पन्न हो गई है ।






जन नायकन, विजय की राजनीतिक फिल्म होने के नाते महत्वपूर्ण है। क्योंकि, विजय ने तमिलनाडु के २०२६ के विधानसभा चुनाव में उतरने का निर्णय ले लिया है। उनकी एच विनोद निर्देशित पोलिटिकल एक्शन थ्रिलर फिल्म  जन नायकन ९ जनवरी २०२६ को प्रदर्शित हो रही है।  इस प्रकार से, पांच दिन बाद विजय की फिल्म का शिवकार्तिकेयन की फिल्म पराशक्ति से टकराव सुनिश्चित है।






इस टकराव ने, तमिल फिल्म दर्शकों में चर्चा गर्म कर दी है। आज याद किया जा रहा है विजय के एक अन्य तमिल फिल्म अभिनेता अजित कुमार से टकराव को। दलपति विजय की पारिवारिक एक्शन फिल्म वरिसु और अजित की फिल्म थुनिवु डकैती ड्रामा थ्रिलर फिल्म थुनीवु से, ११ जनवरी २०२३ सीधा टकराई थी।  यद्यपि, अजित कुमार की फिल्म थुनीवु ने पहले दिन २३ करोड़ कमा कर अपना दबदबा स्थापित करने का प्रयास किया था। किन्तु, बाद में विजय की फिल्म ने तमिलनाडु के छविगृहों में पाना दबदबा स्थापित कर लिया।  






जब यह दोनों फिल्मे  छविगृहों से उतरी तो शतक जमा चुकी थी। किन्तु, अंतिम रूप से, विजय सेतुपति की कमाई अजित कुमार की फिल्म से अधिक थी।  जहाँ अजित कुमार की फिल्म थुनीवु ने १२० करोड़ की  कमाई की, वही वरिसु ने कुल १४५ करोड़ का कारोबार कर लिया था। बताते हैं कि जहाँ विश्वव्यापी बॉक्स ऑफिस पर वरिसु ने ३०० करोड़ का आंकड़ा पार किया, थुनीवु २५० करोड़ पर सिमट कर रह गई।  

#MaheshBabu के भतीजे #JayaKrishnaGhattamaneni के साथ #RashaThadani

 


अभिनेत्री रवीना टंडन की बेटी राशा थडानी के सन्दर्भ में दक्षिण से अच्छा समाचार है।  वह निर्देशक अजय भूपति के निर्देशन में बनाई जाने वाली फिल्म एबी४ में, महेश बाबू के भतीजे जया कृष्ण घट्टामनेनी के साथ तेलुगु फिल्म उद्योग को अपना पहला परिचय देने जा रही है। यह एक वास्तविक यथार्थवाद पर आधारित गहन प्रेम कहानी है। इसका निर्माण चंदामामा कथालू पिक्चर्स के तहत जेमिनी किरण द्वारा किया जा रहा है और अश्विनी दत्त द्वारा प्रस्तुत है। इसकी शूटिंग इसी महीने के अंत में प्राकृतिक परिवेश में शुरू होगी।






राशा थडानी का, इसी साल सेलुलॉइड की दुनिया में पहला प्रवेश, अजय देवगन के भांजे के साथ फिल्म आज़ाद से हुआ था। इस फिल्म का निर्देशन अभिषेक कपूर ने किया था। अपने भांजे को सहारा देने के लिए अजय देवगन ने भी फिल्म में अभिनय किया था। फिल्म में, राशा थडानी के गर्मागर्म उई अम्मा गीत के बाद भी दर्शक छविगृहों के ओर नहीं आये। इस फिल्म के निर्माण में ८० करोड़ व्यय हुए थे। किन्तु, फिल्म कुल ८ करोड़ का ग्रॉस ही कर सकी। 





आज़ाद की बुरी असफलता का परिणाम था कि फिल्म के नायक अमन देवगन गाँधी को दूसरी फिल्म तो नहीं मिल सकी, किन्तु फिल्म की उई अम्मा गर्ल राशा थडानी को, सौरभ गुप्ता के निर्देशन में मुँज्या अभिनेता अभय वर्मा के साथ फिल्म लइके लइका अवश्य मिल गयी।  इस फिल्म की शूटिंग जारी है। इस प्रकार से, राशा की तेलुगु फिल्म उनके फिल्म जीवन की तीसरी फिल्म है।   






सोशल मीडिया पर, फिल्म की घोषणा से संलग्न पोस्टर में राशा एक विशाल परिदृश्य के सामने मोटरसाइकिल की आकर्षक मुद्रा में दिखाई दे रही हैं, जो फिल्म की भावनात्मक गहराई और वैजयंती फिल्म्स जैसे बैनरों के उच्च निर्माण मूल्यों को उजागर करता है।





फिल्म के निर्देशक अजय भूपति की यह चौथी तेलुगु फिल्म होगी। इस लिए फिल्म का कार्यकारी शीर्षक एबी ४ रखा गया है। वह इससे पूर्व आरएक्स १००, महासमुद्रम और मंगलावरम जैसी फिल्मों में अपनी सशक्त और भावनात्मक रूप से आवेशित कहानियों के लिए जाने जाते हैं। एबी ४ इसी कड़ी में रुक्ष, संभवतः ग्रामीण पृष्ठभूमि पर आधारित एक नाटकीय रोमांस फिल्म प्रतीत होती है, जिसमें गहरे भावनात्मक पहलू और यथार्थवादी चरित्र चित्रण हैं।





फ़िल्म की शूटिंग इसी महीने नवंबर के अंत में शुरू होने वाली है। फिल्म २०२६ में प्रदर्शित होगी। 

  

Sunday, 16 November 2025

५ दिसम्बर को #3D में रिलीज़ होगी #NandamuriBalakrishna की #Akhanda2Thaandavam



नंदामुरी बालकृष्ण की फिल्म अखंड २: ताण्डवं के निर्माताओं ने हैदराबाद के प्रसाद मल्टीप्लेक्स में आयोजित एक कार्यक्रम में फिल्म के एक आश्चर्यजनक त्रिआयामी प्रारूप में रिलीज़ करने की घोषणा की।





इसके साथ ही यह भी पुष्टि की गई कि फिल्म ५ दिसंबर, २०२५ को २डी और ३डी दोनों ही प्रारूपों में दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी।






अखंड २, निर्देशक बोयापति श्रीनु और अभिनेता बालकृष्ण के साथ उनका चौथा सहयोग है। इस सीक्वल में बालकृष्ण दिव्य योद्धा अघोरा की भूमिका में हैं, जो प्रतिपक्षी आदि पिनिशेट्टी का सामना करते हैं।





थमन एस ने हिट सिंगल द थांडवम सॉन्ग सहित अन्य गीतों का संगीत दिया है। मूल फिल्म अखंड की दो सौ करोड़ की सफलता के बाद,  सीक्वल फिल्म के प्रमुख एक्शन दृश्यों के लिए बेहतर त्रिआयामी दृश्यों के अतिरिक्त निर्माता विशाखापत्तनम, कर्नाटक, चेन्नई, काशी और अमेरिका में फिल्म के प्रचार की योजना बना रहे हैं।

अद्भुत है राजामौली की #Varanasi !



निर्देशक एस.एस. राजामौली ने १५ नवंबर को हैदराबाद के रामोजी फिल्म सिटी में अपनी ऐतिहासिक फिल्म वाराणसी का पहला लुक और टीज़र पचास हजार प्रशंसकों की उपस्थिति में जारी किया।





इस फिल्म में महेश बाबू रुद्र के रूप में, प्रियंका चोपड़ा जोनास मंदाकिनी के रूप में, और पृथ्वीराज सुकुमारन खलनायक कुंभा के रूप में हैं। फिल्म वाराणसी की कहानी प्राचीन काल से लेकर वर्तमान तक फैली हुई है और रामायण से प्रेरित है।





यद्यपि, इस कार्यक्रम में एक भाषण के दौरान राजामौली द्वारा अपने नास्तिक होने पर की गई टिप्पणियों ने फिल्म के पौराणिक विषयों के बीच ऑनलाइन तीखी प्रतिक्रिया को जन्म दे  दिया है ।  किन्तु,वाराणसी में रुद्र के रूप में तेलुगु फिल्म अभिनेता महेश बाबू का पहला लुक वाकई धमाकेदार है! फिल्म से विशेषकर वह दृश्य जहाँ वानर सेना भगवान राम को उठाती है, रोंगटे खड़े कर देने वाला है... वाकई अद्भुत है। 






वाराणसी का कोई आधिकारिक कथानक स्पष्ट नहीं किया गया है। किन्तु, छन  छन कर आती जानकारियां और सूत्र बताते हैं कि वाराणसी राजामौली के पिछले महाकाव्यों जैसे बाहुबली और आरआरआर के समान एक बहुस्तरीय कथा  है। इस फिल्म का आधार रुद्र (महेश बाबू), एक पौराणिक युग का योद्धा, राम का पुनर्जन्म या समय से विस्थापित संस्करण हो सकता है, जिसे एक दिव्य मिशन सौंपा गया है। एक समय-यात्रा उपकरण या रहस्यमय घटना उसे एक आधुनिक या वैकल्पिक समयरेखा में धकेल सकती है, जहाँ उसका सामना  मंदाकिनी (प्रियंका चोपड़ा) से होता है, जो अपने स्वयं की चुनौतियों से जूझने वाली एक समकालीन चरित्र है और कुंभा (पृथ्वीराज) एक कालातीत विरोधी है।





संघर्ष: कथानक रुद्र की एक भविष्यवाणी को पूरा करने या कुंभा को हराने की खोज के इर्द-गिर्द घूम सकता है भावनात्मक सार: जैसा कि श्रीनु वैतला ने कहा है, यह फिल्म दिवंगत सुपरस्टार कृष्णा के अपने बेटे महेश बाबू को श्री राम के रूप में देखने के सपने को पूरा करती है, जो एक बड़े महाकाव्य में बुने गए व्यक्तिगत या पारिवारिक मोचन चाप का सुझाव देती है।





संक्षेप में, वाराणसी समय-यात्रा और रामायण से प्रेरित पौराणिक कथाओं के एक अभूतपूर्व मिश्रण का प्रदर्शन करने वाली फिल्म लगती है, जिसके केंद्र में महेश बाबू का रुद्रा है, जिसे गतिशील कलाकारों और राजामौली की दूरदर्शी कहानी का साथ मिला है। आशा है कि भविष्य में फिल्म की शूटिंग के साथ साथ फिल्म सम्बन्धी बहुत सी अन्य जानकारियां मिलेगी।

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बनते ही बंद हो गया धर्मेन्द्र, तनूजा और दुलाल गुहा का प्रोडक्शन हाउस !



निर्देशक दुलाल गुहा ने,  कुल  फिल्मों का निर्देशन किया था।  इसमें से छह फिल्मे धर्मेंद्र  के साथ थी।  इन फिल्मों में मेरा करम मेरा धरम, दो दिशाएं, दिल का हीरा, प्रतिज्ञा, दोस्त, चांद और सूरज के नाम उल्लेखनीय है। दुलाल ने,धर्मेंद्र की फिल्म इज्जत की कहानी भी लिखी थी। उन्हें धर्मेंद्र की फिल्म चांद और सूरज की कथा और पटकथा भी लिखी थी। 





उपरोक्त चित्र, निर्देशक दुलाल गुहा की धर्मेंद्र के साथ पहली फिल्म चाँद और सूरज के सेट से है। चाँद और सूरज (१९६५) में बनी फ़िल्म है, जिसका निर्माण गंगा चित्रा के अंतर्गत    हुआ था। इस फ़िल्म में धर्मेंद्र, अशोक कुमार, तनुजा, निरूपा रॉय और असित सेन ने अभिनय किया था। फ़िल्म का संगीत सलिल चौधरी ने दिया था। इस फ़िल्म का तमिल में अन्नाविन आसई (१८६६) नाम से पुनर्निर्माण किया गया था।





उपरोक्त चित्र दुलाल गुहा की दूसरी निर्देशित फिल्म चाँद और सूरज का है।  इस फिल्म से पहले दुलाल गुहा ने, गायक तलत महमूद के साथ उनकी एकमात्र अभिनय वाली फिल्म एक गाँव की कहानी थी। इस फिल्म में माला सिन्हा और आईएस जोहर ने भी अभिनय किया था। चाँद और सूरज दुलाल गुहा की दूसरी निर्देशित फिल्म थी। इस फिल्म की शूटिंग के समय दोनों में अच्छी दोस्ती हो गई।  इस चित्र को इंस्टाग्राम पर लगाते हुए धर्मेंद्र यादें साझा करते हुए लिखते है - 





दुलाल गुहा, एक प्यारे भाई। एक प्रतिभाशाली निर्देशक। ….मैं ….तनु (तनूजा) और दुलाल दा हमेशा एक खुशमिजाज कंपनी थे। एक दिन, अचानक हमने एक साथ फिल्म निर्माण की योजना बनाई… अपनी कंपनी का नाम तय करते समय…हमने सोचा…डी दुलाल दा के लिए…डी धर्मेंद्र के लिए और टी तनुजा के लिए…इतना सुंदर लिखा हुआ नाम…निकला…डीडीटी प्रोडक्शन।  फिर अचानक हमें एहसास हुआ… डीडीटी तो जर्म्स को मारने के लिए कुछ है। इसलिए हम हंसते रहे और हंसते रहे और फिल्म निर्माण का विचार ठंडे बस्ते में चला गया…हा हा…।