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Sunday, 21 September 2025

#Mohanlal को २०२३ का दादा साहब फाल्के पुरस्कार



सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने आज २० सितंबर २०२५ को घोषणा की कि मलयालम फिल्म  अभिनेता मोहनलाल विश्वनाथन नायर (उर्फ़ मोहनलाल) को २०२३ का भारत का सर्वोच्च फिल्म सम्मान, दादा साहब फाल्के पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।





यह पुरस्कार विभिन्न भाषाओं में उनकी ३४० से अधिक फिल्मों में, उनके चार दशक के श्रेष्ट  फिल्म जीवन को मान्यता देने वाला है। इस पर अभिनेता को, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अतिरिक्त मलयालम फिल्म अभिनेता ममूटी और बॉलीवुड  फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार जैसी उद्योग जगत की हस्तियों ने उनकी बहुमुखी प्रतिभा और सांस्कृतिक प्रभाव के लिए बधाई दी।





यह पुरस्कार २३ सितंबर को ७१ वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में प्रदान किया जाएगा। इसके बाद, मोहनलाल निर्देशक अदूर गोपालकृष्णन के बाद यह पुरस्कार प्राप्त करने वाले दूसरे मलयाली फिल्म व्यक्तित्व  बन जाएँगे।





मोहनलाल को, दादा साहब फाल्के पुरस्कार दिए जाने की घोषणा के साथ ही, मोहनलाल को सभी ओर से बधाइयों का ताँता लग गया। तेलुगु फिल्म अभिनेता चिरंजीवी ने मोहनलाल के साथ अपने चित्र को लगते हुए लिखा- मेरे प्यारे लालेत्तन (मोहनलाल को इस सम्बोधन  से भी बुलाया जाता है), प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित होने पर हार्दिक बधाई। आपकी उल्लेखनीय यात्रा और उत्कृष्ट अभिनय ने भारतीय सिनेमा को समृद्ध किया है। सचमुच, यह एक सराहनीय सम्मान है।





तेलुगु फिल्म अभिनेता जूनियर एनटीआर ने लिखा- महान कलाकार मोहनलाल सर को प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित होने पर हार्दिक बधाई। भारतीय सिनेमा के एक सच्चे प्रतीक, वे इस सम्मान के पूर्णतः हकदार हैं।





मलयालम फिल्मों के एक अन्य प्रतिष्ठित अभिनेता माम्मूटी ने लिखा- एक सहकर्मी, एक भाई और एक कलाकार से कहीं बढ़कर, जिसने दशकों से इस अद्भुत सिनेमाई यात्रा पर कदम रखा है। दादा साहब फाल्के पुरस्कार सिर्फ़ एक अभिनेता के लिए नहीं, बल्कि एक सच्चे कलाकार के लिए है जिसने सिनेमा को जिया और साँस ली है। लाल, मुझे आप पर बहुत खुशी और गर्व है। आप सचमुच इस ताज के हक़दार हैं।




मलयालम फिल्म अभिनेता दुलकर सलमान ने लिखा- हमारे अपने लालेत्तन मोहनलाल को दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित होने पर बधाई! मलयाली और भारतीय सिनेमा के लिए यह सचमुच गर्व का क्षण है! 




फिल्म निर्देशक प्रियदर्शन ने लिखा - मेरे प्रिय मित्र लाल को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित होने पर हार्दिक बधाई। इस सम्मान का इससे बड़ा हकदार अन्य कोई नहीं है। देश को आपकी असाधारण प्रतिभा का जश्न मनाते देखकर गर्व महसूस हो रहा है। एक अत्यंत योग्य दिग्गज को पहचानने और सम्मानित करने के लिए जूरी का आभारी हूँ।





अक्षय कुमार ने लिखा - हार्दिक बधाई, मोहनलाल सर, दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित होने पर। जब भी मुझे आपसे मिलने या आपका काम देखने का मौका मिला, मुझे ऐसा लगा जैसे मैं अब तक के सबसे महान अभिनय विद्यालय की अग्रिम पंक्ति में बैठा हूँ। यह सम्मान पूरी तरह से आपका अधिकार है। सम्मान और प्यार। 





बॉलीवुड अभिनेता रितेश देशमुख ने लिखा - मोहनलाल सर को सिनेमाई उत्कृष्टता के लिए प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित होने पर हार्दिक बधाई! आपके सूक्ष्म, भावपूर्ण अभिनय ने पीढ़ियों को प्रेरित किया है। एक सच्चे दिग्गज, भारत के प्रिय प्रतीक के रूप में आपकी विरासत सदैव चमकती रहेगी!





फिल्म निर्देशक रामगोपाल वर्मा की टिप्पणी अजीबोगरीब थी।  उन्होने X  पर लिखा- मुझे दादा साहेब फाल्के के बारे में ज़्यादा कुछ नहीं पता, सिवाय इसके कि उन्होंने पहली फ़िल्म बनाई थी, जिसे मैंने नहीं देखा और न ही मैं किसी ऐसे व्यक्ति से मिला जिसने इसे देखा हो, लेकिन मैंने जो देखा और जाना है, उसके आधार पर मुझे लगता है कि दादासाहेब फाल्के को मोहनलाल पुरस्कार दिया जाना चाहिए।




मोहनलाल ने प्रधानमंत्री को धन्यवाद् देते हुए लिखा - दादा साहब फाल्के पुरस्कार पाकर मैं बेहद विनम्र और गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ। माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के स्नेहपूर्ण शब्दों और आशीर्वाद के लिए मैं उनका हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ, जिन्होंने मुझे प्रोत्साहन और आनंद से भर दिया है। मैं सिनेमा की कला और उन सभी लोगों का सदैव ऋणी रहूँगा जिनकी प्रेरणा और सहयोग ने मेरे सफ़र को रोशन किया। 

Tuesday, 3 May 2016

रेस्टोरेंट के किचन में मिली थी राजा हरिश्चंद्र की तारामती

यह वाक़या कोई १०३ साल पहले का है।  मुंबई के कोरोनेशन थिएटर के बाहर लोगों की भीड़ जमा थी।  उन्हें इंतज़ार था ३७०० फिट लम्बी ४० मिनट की फिल्म का, जो भारत की पहली चलती फिरती तस्वीर साबित होने जा रही थी।   यह वही चलती फिरती तस्वीरें थी, जिन्होंने १८९५ में लुमियरे बंधुओं की फिल्म लंदन से पूरे यूरोप में सनसनी फैला दी थी ।  जुलाई १८९६ में लुमियरे बंधुओं ने भारत में भी अपनी लघु फिल्मों का प्रदर्शन किया। पहली भारतीय लघु फिल्म फ्लावर ऑफ़ पर्शिया १८९८ में रिलीज़ हुई।  इस फिल्म का निर्देशन हीरालाल सेन ने किया था।   लेकिन, ३ मई १९१३ को भारतीय  द्वारा, भारत में, भारतीय तकनीक से बनी फिल्म रिलीज़ हो रही थी।  इस फिल्म को फाल्के ने छह महीनों में बनाया था।  यह देसी फ़िल्म का पहला व्यवसायिक प्रदर्शन था।   क्योंकि,राजा हरिश्चन्द्र को कुछ चुनिंदा लोगों,  अख़बारों के सम्पादकों को ओलम्पिया थिएटर ग्रांट रोड में २१ अप्रैल २०१३ को ही प्रीमियर प्रीव्यू में दिखाया  जा चूका था।  बॉम्बे में कोरोनेशन थिएटर के बाहर जमे दर्शकों में अपनी देसी फिल्म देखने की उत्तेजना थी।  जैसे ही मूक फिल्म राजा हरिश्चन्द्र का पहला शो ख़त्म हुआ, एक इतिहास बन गया। यह फिल्म २३ दिन चली।  इसके बाद तो भारतीय सिनेमा लोकप्रियता की कई सीढ़ियां चढ़ता चला गया।  हालाँकि,राजा हरिश्चन्द्र आज भी विवादित  है, क्योंकि लोगों का मानना हैं कि बाबासाहेब तोरणे की १८ मई २०१२ को रिलीज़ फिल्म श्री पुंडलीक पहली भारतीय फिल्म थी।  परन्तु, तोरणे का दावा इस बिना पर खारिज हो जाता है कि इस फिल्म को विदेशी सहयोग से  बनाया गया था। अब इसे इत्तेफ़ाक़ ही कहा जायेगा कि  १०३ साल बाद ६ मई को दो दूसरी हिंदी फिल्मों के साथ विक्रम भट्ट की हॉरर फिल्म १९२०- लंदन के टाइटल के साथ भी लंदन है।  राजा हरिश्चन्द्र को  मराठी,हिंदी और इंग्लिश सबटाइटल के साथ रिलीज़ किया गया था।  इस फिल्म को पहले एक ही प्रिंट तैयार कर रिलीज़ किया गया।   लेकिन, जैसे ही राजा हरिश्चन्द्र को दर्शकों की पसंदगी मिली,  फालके ने इसके कई प्रिंट तैयार करवाए।  इस फिल्म में दत्तात्रेय दामोदर डाबके ने राजा हरिश्चन्द्र का किरदार किया था।   चूंकि, दादासाहेब को तारामती की भूमिका के लिए कोई महिला नहीं मिल रही  थी, इसलिए खूबसूरत चेहरे वाले  अन्ना सालुंके ने तारामती को धोती पहन  कर किया था। फाल्के को अपनी फिल्म की तारामती यानि सालुंके एक रेस्टोरेंट के किचन में मिले  थे,जहां वह रसोइये का काम करते थे।  दादासाहेब के बड़े बेटे बालचंद्र डी फालके रोहितास बने थे।  इस फिल्म की ओपनिंग राजा रवि वर्मा की राजा हरिश्चन्द्र और उनकी  पत्नी तारामती की पेंटिंग के साथ होती थी।  इस फिल्म के प्रमोशन में कहा जाता था - ५७ हजार फोटोग्राफ्स और दो मील लम्बी फिल्म का प्रदर्शन सिर्फ ३ आना में।