Friday, 31 October 2014

'सुपर' तो नहीं ही है यह 'नानी'

इंद्र कुमार ने कभी दिल, बेटा, राजा, इश्क़, मन और रिश्ते जैसी मनोरंजक और परिवार से जुडी फिल्मों का निर्माण किया था।  यह फ़िल्में हिट हुई. सभी श्रेणी के दर्शकों द्वारा पसंद की गयी।  फिर वह मस्ती पर उतर  आये।  मस्ती जैसे सेक्स कॉमेडी बना डाली।  फिल्म हिट हो गयी तो प्यारे मोहन, धमाल, डबल धमाल और ग्रैंड मस्ती जैसी फ़िल्में बना डालीं।  इसके साथ ही परिवार उनका सरोकार  छूटता चला गया।  अब जबकि वह ग्रैंड मस्ती जैसी सौ करोडिया सेक्स कॉमेडी फिल्म के बाद सुपर  नानी से परदे पर रेखा को लेकर आये हैं तो लगता है जैसे वह फिल्म बनाना भूल गए हैं. उन्होंने रेखा जैसी बहुमुखी प्रतिभा वाली अभिनेत्री को नानी बनाया , लेकिन कहानी घिसी पिटी ले बैठे।  रेखा नानी बनी है, जिसका उसके घर में उसका पति और बच्चे अपमान और उपेक्षा करते हैं।  तभी आता है नाती शरमन जोशी।  वह यह सब देख कर अपनी नानी को सुपर नानी बनाने की कोशिश करता है।
जब तक रेखा नानी होती हैं, आकर्षित करती हैं. वह बेहतरीन अभिनय करती थीं , कर सकती हैं और आगे भी  लेंगी, फिल्म से साबित करती हैं।  लेकिन, जैसे ही वह सुपर नानी का चोला पहनती हैं, बिलकुल बेजान हो जाती हैं. यह इंद्र कुमार की असफलता है कि  वह पूरी फिल्म में रेखा की उपयोगिता नहीं कर सके।  इंद्र कुमार का रेखा को मॉडल बना कर सुपर नानी बनाने का विचार ही, अस्वाभाविक है।  वह किसी दूसरे एंगल से रेखा को सुपर नानी साबित कर सकते थे।  जैसे वह फिल्म में रेखा के बेटे से उधार लेनी आये गुंडे खुद के लिए रेखा की ममता देख कर वापस चले जाते  हैं.
फिल्म को इंद्र कुमार के लिए नहीं रेखा और शरमन जोशी की जोड़ी के कारण देखा जा सकता है।  यह जोड़ी जब भी परदे  पर आती  है,  छा  जाती है।  शरमन जोशी बेहद सजीव अभिनय करते हैं।  पता नहीं क्यों फिल्मकार उनका उपयोग घटिया कॉमेडी करवाने के लिए ही क्यों करते हैं।  इंद्र कुमार की बिटिया श्वेता के 'इंद्र कुमार की बिटिया' टैग से उबरने की जुगत फिल्म में नज़र नहीं आती।  रणधीर कपूर को न पहले एक्टिंग आती थी, न इस फिल्म में वह कुछ कर पाये हैं।  अनुपम खेर ने यह फिल्म निश्चित ही पैसों के लिए ही की होगी।  बाकी, दूसरों को जिक्र करने से कोई फायदा नहीं है।

बॉक्स ऑफिस पर 'रोर' टाइगर्स ऑफ़ द सुंदरबन्स



विक्टोरिया नंबर २०३, चोरी मेरा काम, यह रात फिर न आएगी, प्रोफ़ेसर प्यारेलाल, जैसे फिल्मों के निर्देशक ब्रिज  सडाना और पुरानी स्टंट फिल्मों की नायिका सईदा  खान के बेटे कमल सडाना ने लम्बे समय तक अजय गोयल और सुखवंत ढड्डा का निर्देशक असिस्टेंट रहने के बाद  कमल ने फिल्म बेखुदी से काजोल के साथ फिल्म डेब्यू किया।  बेखुदी को बॉक्स ऑफिस पर दर्शकों की बेरुखी मिली। लेकिन, काजोल चल निकली, कमल सडाना पीछे रह गए।  उन्होंने रंग और बाली उम्र को सलाम जैसी फ्लॉप फ़िल्में करने के बाद अपने हीरो को सलाम कर दिया और कर्कश फिल्म का निर्देशन किया।  फिल्म ज़्यादातर फेस्टिवल्स में देखि जा सकी।  अपने पिता की फिल्म विक्टोरिया नंबर २०३ का रीमेक बनाने के बाद वह तकनीकी प्रक्षिक्षण के लिए विदेश चले गए।  उन्होंने स्पेशल  इफेक्ट्स में ख़ास तौर पर वीएफएक्स में, रूचि दिखलायी।  इसी का नतीजा है इस शुक्रवार रिलीज़ फिल्म रोर टाइगर्स ऑफ़ द  सुंदरबन्स।  कमल सडाना ने रोर को लिखा और निर्देशित किया है।  फिल्म के संवाद और पटकथा आनंद गोराडिया ने लिखी है। 
फिल्म की कहानी सिर्फ इतनी है कि पंडित का भाई सुंदरबन के जंगलों में वाइल्ड फोटोग्राफी करने आता है।  वह  जंगल में शिकारियों द्वारा लगाए गए ट्रैप से एक सफ़ेद शेर के बच्चे को बचा कर अपने कमरे में ले आता है।  फारेस्ट अफसर उस बच्चे को अपने साथ ले जाती है।  शेर के बच्चे के मुंह में लगे खून को जिस तौलिये से पोंछा जाता है, वह जंगल के कमरे में ही रखा है।  शेरनी उसे सूंघते हुए आती है और पंडित के भाई को मार डालती है। शेरनी से अपने भाई की मौत का बदला लेने के लिए पंडित अपने फौजी साथियों के साथ जंगल आता है।  वह फारेस्ट अफसर के मना करने बावजूद शेरनी को मारने के लिए जंगल में पानी के रास्ते घुसता है। फिर सब कैसे एक एक कर मारे जाते हैं? क्या पंडित शेरनी को मार पाता  है? क्या होता है यह जानना देखने के लिहाज से ज़बरदस्त है।  
हिमार्षा
फिल्म की कहानी बेकार है।  अगर, इस फिल्म की कहानी केवल जंगल की घटनाओं को लेकर बनायीं जाती तो कुछ बात बनती।  क्योंकि, शेरनी बदला लेने की थ्योरी तो पहली ही नज़र खारिज हो जाती है।  इसे रोमांचक घटनों से गूंथा जा सकता था।  स्क्रिप्ट और  स्क्रीन प्ले के द्वारा इसे बखूबी किया गया है।  वीएफएक्स के द्वारा ऐसे ऐसे रोमांचक दृश्य फिल्माएं गए हैं, जो अभूतपूर्व हैं।  सिनेमाघर में बैठे दर्शक जंगल का रोमांच महसूस करते हैं।  इस फिल्म की खासियत यह है कि  यह कहानी चलने के साथ साथ सुंदरबन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां भी देती जाती हैं।  जानवरों और साँपों के व्यवहार का भी दर्शकों से परिचय कराती जाती है। इन्ही सब कारणों से फिल्म रोर टाइगर्स ऑफ़ द  सुंदरबन्स ख़ास बन जाती है।  निर्देशन के लिहाज़ से कमल सडाना अच्छा काम कर ले जाते हैं। रोमांच फिल्मों में संगीत (बैक ग्राउंड) और  फोटोग्राफी का ख़ास महत्त्व होता है।  जॉन स्टीवर्ट और माइकल वाटसन इस क्षेत्र में अपना काम ज़बरदस्त करते हैं।  उनके कारण फिल्म साधारण से असाधारण बन जाती है।  कमल सडाना के साथ मुजम्मिल नासिर ने अपने संपादन से फिल्म को सुस्त नहीं पड़ने दिया है।  एक के बाद एक रोमांचक दृश्य दर्शकों को चौंकाते जाते है।  जब फिल्म ख़त्म होती है तो वह तालियां बजाने से खुद को रोक नहीं पाता।  यही कमल सडाना और उनके साथियों की सफलता है।
नोरा फतेही
फिल्म में पंडित की मुख्य भूमिका में टीवी एक्टर अभिनव शुक्ल है।  उनका काम अच्छा है।  सुब्रता दत्त को भीरा की खल  भूमिका दी है।  पर लिखते समय भीरा को ख़ास तवज़्ज़ो नहीं दी गयी है।  इसलिए वह उभरने नहीं पाते। फिल्म की तमाम स्टारकास्ट काम पहचानी या नयी है। आरन चौधरी ने सूफी, प्रणय दीक्षित ने मधु, वीरेंदर सिंह घूमन ने सीजे, अचिंत कौर ने फारेस्ट अफसर, पुलकित ने उदय और अली क़ुली ने हीरो की भूमिका की है।  यह सब अपनी भूमिकाओं के उपयुक्त है।  यहाँ  जिक्र करना होगा दो अभिनेत्रियों का।  सीजे की भूमिका में नोरा फतेही और झुम्पा की भूमिका में हिमर्षा फिल्म को ख़ास बनाती है।  हालाँकि, यह दोनों अभिनेत्रियां अभिनय के लिहाज़ से कमज़ोर हैं, लेकिन अपनी सेक्स अपील से दर्शकों को बहला ले जाती हैं।  नोरा फतेही तो एक्शन भी खूब करती हैं।  जंगल में शेरों  से बच कर भाग सीजे दर्शकों को तालियां बजाने  को मज़बूर कर देती हैं।  


अगर आप जंगल की वास्तविकता देखना चाहते हैं, जंगल और उसके प्राणियों को समझना चाहते हैं, अगर आप रोमांच के दीवाने हैं, तो रोर टाइगर्स ऑफ़ द  सुंदरबन्स आपके लिए ही बनी है।  ज़रूर देखिएगा।  कमल सडाना से आगे भी कुछ अच्छी फिल्मे देखने को मिल सकती हैं।   
































ऋचा चड्ढा का 'मसान' में स्वच्छ भारत अभियान


भारतीय प्रधान मंत्री  के स्वच्छ भारत मन्त्र का असर बॉलीवुड पर काफी हुआ है। बॉलीवुड सेलिब्रिटी की ऐसी प्रभावित कलाकारों की श्रंखला में ऋचा चड्ढा भी शामिल हो गयी हैं. ऋचा चड्ढा को दर्शकों ने फुकरे और गैंग्स ऑफ़ वासेपुर जैसी फिल्मों में लीक से हट कर भूमिकाएं करते देखा हैं। काम बजट की फिल्मों में उनके किरदार यादगार बन जाते हैं।  आजकल ऋचा वाराणसी यानि प्राचीन बनारस में नीरज घैवन  की फिल्म मसान की शूटिंग कर  रही हैं  । उन्होंने यह निर्णय लिया कि वह सेट पर गन्दगी न तो खुद फैलाएंगी न किसी को फैलाने देंगी।  उन्होंने यूनिट के सभी लोगों से अनुरोध किया कि  वह लोग शूटिंग के   दौरान प्लास्टिक बैग, कप और प्लेट का उपयोग नहीं करें।  अगर कोई ऎसी चीज है भी तो उसे कूड़ेदान में डालें   या किसी नियत स्थान पर पहुंचा दें।  ख़ास तौर पर बनारस के घाटों को शूटिंग के बाद रोज ही बिलकुल साफ़ कर दें।  वह कहती हैं, "पवित्र गंगा को स्वच्छ रखने के लिहाज़ से स्वच्छ भारत अभियान बहुत पॉजिटिव है। हम केवल बोलते हैं, गंगा को साफ़ करने के लिए करते कुछ नहीं।  हमारा यह छोटा योगदान है। हो सकता है इससे कुछ दूसरे भी प्रेरित हों।" इसमे कोई शक नहीं कि  ऋचा चड्ढा को यह छोटा योगदान महत्वपूर्ण है, क्योंकि, फिल्म वालों का सन्देश निचले स्तर  तक आसानी से पहुँच जाता है।

शुरू होगा प्रेम रतन धन पायो से नया ट्रेंड !

खबर है कि निर्देशक सूरज बडजात्या की फिल्म प्रेम रतन धन पायो से नया ट्रेंड शुरू हो सकता है. उल्लेखनीय है कि राजश्री प्रोडक्शंस का अपनी फिल्मो के वितरण का अपने आप में अनोखा तरीका है. यह बैनर अपनी फ़िल्में हजारों प्रिंट में एक साथ रिलीज़ कर वीकेंड में १०० करोड़ कमाने में विश्वास नहीं करता. राजश्री प्रोडकशन्स ने हम आपके हैं कौन के सेटेलाइट और वीडियो के अधिकार बेचे नहीं थे. बाद की फिल्मों को पहले सीमित प्रिंट्स में रिलीज़ करने के बाद धीरे धीरे प्रिंटों की संख्या में इज़ाफ़ा किया. अब यह बात दीगर है कि कभी यह दांव उल्टा पड़ा. लेकिन, राजश्री प्रोडक्शन ने अपना तरीका नहीं बदला. अब पता चला है कि राजश्री प्रोडक्शंस फिल्म प्रेम रतन धन पायो को रिलीज़ करने के लिए किसी डिस्ट्रीब्यूटर का सहारा नहीं लेगा. राजश्री प्रोडक्शन का अपना डिस्ट्रीब्यूशन ऑफिस पूरे देश में है. पूरे भारत के प्रदर्शकों ने राजश्री प्रोडक्शन से संपर्क करके प्रेम रतन धन पायो की रिलीज़ के लिए अपने सिनेमाघरों का प्रस्ताव पेश किया है. वह अपना थिएटर बुक कराने के लिए कुछ धनराशि का भुगतान करने तक के लिए तैयार है. ध्यान रहे कि सलमान खान की दोहरी भूमिका वाली फिल्म प्रेम रतन धन पायो दिवाली २०१५ वीकेंड में रिलीज़ होगी. अगर, राजश्री का यह प्लान टारगेट पर लगता है तो कोई शक नहीं कि जल्द ही डिस्ट्रीब्यूटर नाम का जीव फिल्म निर्माता और सिनेमाघर मालिकों के बीच से गायब हो जाए.

मैं डायरेक्शन एन्जॉय करता हूँ - आदित्य ओम

आदित्य ओम को एक्टर या डायरेक्टर या दोनों ही कहा जा सकता है।  वह बन्दूक  और शूद्र जैसी चर्चित और विवादित फिल्मों के हीरो थे।  उनकी फिल्म फन फ्रीक्ड  फेसबुक रिलीज़ होने वाली है। इस फिल्म, उनकी पहले की फिल्मों, एक्टिंग या डायरेक्शन के उनके शौक, आदि पर उनसे हुई बातचीत के कुछ अंश-
फन  फ्रीक्ड फेसबुक क्या है ? यह किसके लिए है ? इससे आप क्या बताना चाहते हैं? क्या फेसबुक खतरनाक है? या सावधानी बरतनी चाहिए ?
'फन फ्रीक्ड  फेसबुक' सबके लिये है । यह एक शुद्ध कमर्शियल फिल्म है,  जिसका उद्देश्य मनोरंजन करना है, हाँ इसमें सोशल मीडिया एडिक्शन और उसके ख़तरों से जुड़े पहलुओं को भी छुआ गया है । इंटरनेट  एक अजीबोग़रीब दुनिया है, जहाँ  इनफार्मेशन और नॉलेज के अलावा समाज की हर बुराई भी आसानी से उपलब्ध है । इंटरनेट पर आप किसी भी तरह की झूठी पहचान बना के किसी से भी बात कर सकते है  यह वाक़ई एक वर्चुअल वर्ल्ड है ।
 आजकल मोबाइल या एसएमएस को हॉरर का जरिया बना लिया गया है. क्या इलेक्ट्रॉनिक्स गैजेट्स डराने वाले हैं ?  
टेक्नोलॉजी हमेशा उपयोग करने वाले के ऊपर होती है कि  वह  उसका सही ग़लत कैसा भी इस्तेमाल कर सकता है । एक पारदर्शी माध्यम न होने के कारण फेसबुक या एसएमएस या ट्वीटर पर उलटी सीधी बात करने वालों को एक निर्भीकता एक सुरक्षा मिल जाती है । इलेक्ट्रॉनिक्स गैजेट ने जीवन को आसान बनाया है,  लेकिन इंटरनेट ने हर व्यक्ति को ड्यूल आइडेंटिटी दी है- एक रियल और एक वर्चुअल जिसके मनोवैज्ञानिक असर दूरगामी और भयावह है ।
आपने पहले अपने एक्टिंग करियर की  शुरुआत साउथ की मूवीज से की।  आपको हिंदी फिल्मों में आने में १२ साल क्यों लगे? इस बीच आपकी एक फिल्म मिस्टर लोनली  रिलीज़ हुई। 
मैंने कोई भी चीज़ किसी प्लानिंग या टाईमटेबल के तहत नहीं की, क्योंकि जीवन ऐसे चलता नहीं है । जो काम हाथ में आया वो अपनी क्षमताओं के अनुसार निभाया । कुछ ग़लतियाँ भी हुई लेकिन हर क़दम पर मेरा एक ही प्रयास था कि किस तरीक़े से अपनी कला को और निखारू हाउ टू  बिकम अ टोटल सिनेमा पर्सन, जिसे सिनेमा  के हर पहलू की पकड़ हो, समझ हो  । बॉलीवुड आज एक बंद दुनिया हैै, जहाँ  कनेक्शंस, नेटवर्किंग, फैमिली नाम और अथाह पैसे के बग़ैर आप मेनस्ट्रीम में मुख्य अभिनेता या एवं फिल्म डायरेक्टर के तौर पे सर्वाइव  नहीं कर पायेंगे । इन सारी कसौटियों पर मैं खरा नहीं उतरता था।  फिर भी मैंने हार नहीं मानी है और प्रयत्नशील हूँ ।
मिस्टर लोनलीकिस प्रकार की फिल्म थी ?
मिस्टर लोनली एक बग़ैर किसी संवाद वाली एक्सपेरिमेंटल फिल्म थी,  जो शायद मैं और अच्छी बना सकता था।
आपकी फ़िल्में बन्दूक और शूद्र  चर्चित भी हुई और  विवादित भी, लेकिन यह फ़िल्में बॉक्स ऑफिस पर नहीं चल सकीं। आप अपनी इस असफलता के लिए किसे दोषी मानते है ?
आजकल फिल्म्स का बॉक्स ऑफिस सिर्फ़ उसकी मार्केटिंग निश्चित करती है। ये तथ्य हर कोई जानता है । दो सौ करोड़ और डेढ़ सौ करोड़ कमाने वाली फिल्मों की क्वालिटी की सच्चाई हर कोई जानता है । बंदूक़ और शूद्र (इसका निर्देशन मेरे मित्र  संजीव जैस्वाल ने किया था) दोनो अपने दायरे में अच्छी फ़िल्में थी, जिन्हें समीक्षकों का भरपूर प्रेम मिला लेकिन बॉक्स ऑफिस पर कुछ ख़ास नहीं हो पाया । हम लोग अपनी मार्केटिंग में फेल हुये लेकिन बहुत कम लोग इस बात को समझते हैं कि इन फिल्मों की इतनी बड़ी रिलीज़ होना ही बहुत बड़ी बात है ।
दो हिंदी फिल्मों की असफलता से आपने क्या सबक लिया ?
अपने काम पर और अपनी मेहनत अौर आत्मविशलेशण तथा कमर्शियल पहलू को ध्यान में रखना । प्रोडक्ट ऐसा हो जिसकी मार्केटिंग युथ और कंस्यूमर सेगमेंट में हो सके ।
क्या आप हमेशा अपनी फ़िल्में डायरेक्ट करते हैं ? क्या इस प्रकार से आप पर एक्स्ट्रा प्रेशर नहीं रहता ? यह किस  किस प्रकार से फायदेमंद लगता है आपको ?
सिनेमा विज़न का खेल है . अगर कल किसी दूसरे डायरेक्टर ने अच्छे विज़न के साथ एप्रोच किया और हमारे बजट मे़ काम करने को तैयार है तो क्यों नही । ऐसा कोई भी नियम मैंने अपने ऊपर नहीं लगाया है । जहाँ तक रही प्रेशर की बात तो जिस काम को आप एन्जॉय करते है़ं उसमें प्रेशर कैसा ।
फेसबुक के पोस्टर में छह अधनंगी लड़कियां दिखायी गयीं हैं।  इस पोस्टर से आप क्या बताना चाहते हैं ?
जी ये  फीमेल सेंट्रिक फिल्म है । इसके किरदारों की पृष्ठभूमि हाई सोसाइटी की है  उसी के हिसाब से उनका पहनावा है ।  मेरी पिछली फ़िल्मों में भी किरदारों के बैकग्राउंड के अनुसार ही पहनावा था ।
माया मोबाइल के बारे में बताएं ?
माया मोबाइल मेरी बहुचर्चित शार्ट फिल्म है,  जिसमें मोबाइल फोन मिलने के बाद एक गाँव के पुजारी का जीवन किस प्रकार बदल जाता है, दिखाया गया है । माया मोबाइल को इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल्स में बहुत अवार्ड्स भी मिले। मैंने शार्ट फिल्म विधा में काफ़ी काम किया है   मेरी एक और शार्ट फिल्म 'फॉर माय मदर' भी काफ़ी सराही गई ।
आपको डायरेक्शन पसंद है या एक्टिंग? अगर डायरेक्शन  पसंदीदा एक्टर है, जिसे आप डायरेक्ट करना चाहेंगे और एज ऐन एक्टर किस के डायरेक्शन में काम करना चाहेंगे ?
जो अभिनेता मेरी कहानी पर फिट हो, उसी के साथ काम करने की मेरी इच्छा रहती है । किसी ख़ास एक्टर के हिसाब से मैंने आजतक किसी फिल्म को नहीं बनाया । बतौर एक्टर अगर मुझे हॉलीवुड के कुछ डायरेक्टर्स जैसे कि डैनी  बॉयल, टारनटिनो,  मार्टिन स्कोर्सेस, ओलिवर स्टोन की फिल्मों में खड़ा होने का भी मौक़ा मिले तो यह मेरा सौभाग्य होगा । ऑफ़ कोर्स मैं किल्म डायरेक्शन ज़्यादा एन्जॉय करता हूँ, क्योंकि इसमें सारी मानवीय कलाओं का समागम है । इट  इज़  द हाईएस्ट इवॉल्वड आर्ट फॉर्म व्हिच इन्वोल्वेस इंटीग्रेशन ऑफ़ द  विसुअल, साउंड एंड इन्ट्यूसन। 


आवाज़ बदल रहा है बाजीराव रणवीर सिंह !

रणवीर सिंह के बारे में कहा जाता है कि  वह अपने किरदारों में डूब जाने वाले अभिनेता हैं।  अब तक उन्होंने जितनी फ़िल्में की हैं, उनसे वह अपनी रोमियो टाइप इमेज बनाते नज़र आते हैं।  ऎसी भूमिकाएं उनकी ऑफ स्क्रीन इमेज के साथ मेल खाती हैं।  अब उन्होंने खुद को भूमिकाओं के अनुरूप ढालने का प्रयास भी शुरू कर दिया है।  संजयलीला भंसाली की फिल्म गोलियों की रास लीला -राम-लीला में उनकी भूमिका उनकी इमेज के अनुरूप आधुनिक गुजराती रोमियो टाइप थी।  परन्तु राम की भूमिका के लिए उन्होंने अपने बाल लम्बे रखे और मूछों के साथ ठेठ गुजराती पोशाकों में नज़र आये।  अब बाजीराव मस्तानी में उन्होंने परफेक्शन की  दिशा में अगला कदम रखा है।  फिल्म के लिए उन्होंने अपने सर के बाल मुंडवा दिए हैं।  वह क्लीन शेव, एक मराठी पेशवा जैसे चेहरे  मोहरे के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।  लेकिन, रणवीर सिंह यहीं नहीं रुक रहे।  उन्होंने एक पेशवा का राजसी बाना ही नहीं पहना है, उन्होंने अपनी आवाज़ में भी बदलाव किया है।  उन्होंने अपनी आवाज़ में उतार चढ़ाव के जरिये गहराई और भारीपन लाने का प्रयास किया है।  एक ऐसा ही प्रयास अमिताभ बच्चन ने १९९० में रिलीज़ फिल्म अग्निपथ में विजय दीनानाथ की आवाज़ के लिए किया था।  इस प्रकार से, रणवीर सिंह अमिताभ बच्चन का अनुसरण करते लगते हैं।  अब देखने वाली बात होगी कि पत्नी काशीबाई और नर्तकी प्रेमिका मस्तानी के प्रेम में उलझे रणवीर सिंह खुद को कितना प्रभावशाली साबित कर पाते हैं।




दीपिका पादुकोण के ऑफ स्क्रीन प्रेमियों का स्क्रीन टकराव !

अभी तक की धमाकेदार खबर यह है कि क्रिसमस २०१५ किसी खान का नहीं होगा।  अगले साल की २५ दिसंबर को संजयलीला भंसाली और इम्तियाज़ अली ने सुरक्षित करा लिया है।  इस दिन शुक्रवार है।  यानि परफेक्ट वीकेंड।  एक्सटेंडेड वीकेंड का कोई टंटा नहीं। इसलिए, संजयलीला भंसाली ने अपनी निर्देशित फिल्म बाजीराव मस्तानी और इम्तियाज़ अली ने भी अपनी निर्देशित फिल्म तमाशा की रिलीज़ की तारीख २५ दिसंबर तय कर दी है।  संजय की फिल्म में रणवीर सिंह, दीपिका पादुकोण और प्रियंका चोपड़ा मुख्य भूमिका में हैं।  इम्तियाज़ अली की फिल्म में इम्तियाज़ के प्रिय अभिनेता रणबीर कपूर दीपिका पादुकोण के साथ तमाशा दिखा रहे हैं। इस प्रकार से दीपिका पादुकोण अपनी  मुख्य भूमिका वाली फिल्म बाजीराव मस्तानी के सामने तमाशा लेकर आ खडी हुई हैं।  दिलचस्पी यहीं ख़त्म नहीं होती।  यह दीपिका के प्रेमियों का स्क्रीन टकराव भी है।  रणवीर सिंह के साथ दीपिका रोमांस सुर्ख होता रहता है।  बात तो यहाँ तक है कि  दोनों शादी करने जा रहे हैं।  कुछ ऎसी ही सुर्खियां दीपका के रणबीर के साथ रोमांस को भी मिलती थीं। उन दिनों कहा गया कि  दीपिका रणबीर के घर के लोगों से भी मिल चुकी हैं।  लेकिन, बाद में सब कुछ कैटरीना  कैफ हो गया ।  अब जबकि दीपिका के जीवन में रणवीर सिंह और रणबीर कपूर के जीवन में कैटरीना कैफ आ गयी हैं, यह देखना दिलचस्प हो जाता है कि  अपनी दो फिल्मों से अपने दो प्रेमियों (बेशक एक पूर्व और दूसरा वर्तमान) को आमने सामने ला चुकी, दीपिका पादुकोण की इन फिल्मों को २५ दिसंबर का बॉक्स ऑफिस कैसा रिस्पांस देता है ? क्या ऐतिहासिक ड्रामा जीतेगा या आधुनिक तमाशा ! दर्शक, दीपिका पादुकोण की किस फिल्म को तरजीह देंगे ! वर्तमान प्रेमी  रणवीर सिंह के साथ बाजीराव मस्तानी को या पूर्व प्रेमी रणबीर कपूर के साथ तमाशा को ! देख तमाशा देख !!!

अनोखी स्टार कास्ट वाली फिल्म पीकू

सुजीत सरकार की फिल्म पीकू अब तक की बड़ी और अनोखी कास्ट वाली फिल्म होगी।   पीकू में सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के साथ बेहतरीन दीपिका पादुकोण और इरफ़ान खान जैसे बेहतरीन एक्टर पहली बार एक साथ अभिनय करते हुए दिखेंगे । इस फिल्म का दूसरा शेडूल नवंबर २०१४ से कलकत्ता में शुरू होगा।   फिल्म का पहला शेडूल इस साल अगस्त से सितम्बर के बीच मुंबई में पूरा किया जा चुका है । सोनी एंटरटेनमेंट नेटवर्क डिवीज़न तथा स्वरस्वती एनटरटेन्मेंट क्रिएशन लिमिटेड और राइजिंग सन फिल्म के संयुक्त सहयोग से बनायी जा रही फिल्म पीकू २०१५ की सबसे चर्चित फिल्म मानी जा रही है।  फिल्म के निर्देशक सुजीत सरकार  इस से पहले विकी डोनर और मद्रास कैफे जैसी चर्चित फिल्मो का निर्देशन कर चुके है । पीकू  एक रोलरकोस्टर की सवारी जैसी  उत्साही पिता और पुत्री की कहानी है ।  पिता और पुत्री के किरदार में अमिताभ बच्चन और दीपका होगे । पीकू के बारे में सुजीत सरकार कहते है, " पीकू  एक ऐसी  कहानी है,  जो  आपके दिल को छू जायेगी । ​ मेरे लिए काफी सम्मान की  बात है कि अमिताभ जी , दीपिका और इरफ़ान खान जैसे पावर हाउस परफॉर्मर्स के साथ काम कर हूँ। " इस फिल्म में अमिताभ बच्चन किस प्रकार के नज़र आएंगे, उसकी एक झलक सोशल मीडिया के लिए जारी हुई है. इसमे अमिताभ बढ़ी तोंद के साथ थके हुए नज़र आ रहे हैं। अमिताभ बच्चन कहते है "फिल्म की कहानी बड़ी रोचक है ।  इस साल मैं कई प्रोजेक्ट्स  कर रहा हूँ।  उनमे से पीकू मेरे लिए खास है ।" पीकू अगले साल अप्रैल में रिलीज़ होगी।

प्रकाश झा की फ़िल्में ०६ पोस्टर १०











दिल्ली में फिल्म 'द शौकीन्स' के सितारे.










Thursday, 30 October 2014

प्रकाश झा की पांच फ़िल्में

बुद्धवार को प्रकाश झा ने मुंबई के पांचतारा  होटल नोवाटेल  में अपनी पांच फिल्मों का ऐलान किया ।   इस मौके पर प्रकाश झा के पसंदीदा और लकी एक्टर अजय देवगन उनके साथ मौजूद थे ।   उल्लेखनीय है कि प्रकाश झा ने अजय देवगन के साथ गंगाजल, अपहरण, सत्याग्रह, राजनीती, आदि हिट फ़िल्में बनायी हैं ।   प्रकाश झा की पहली फिल्म फ्रॉड सैय्याँ का निर्देशन सौरभ श्रीवास्तव करेंगे और इसके फ्रॉड सैय्याँ अरशद वारसी होंगे ।  सौरभ शुक्ल की भी महत्वपूर्ण भूमिका है ।   दो फ़िल्में प्रकाश झा की पूर्व की फिल्मों गंगाजल और राजनीति  का सीक्वल होंगी ।   प्रकाश झा की चौथी फिल्म वी आर कक्कड़ फैमिली का निर्देशन रितेश मेनन करेंगे ।  पांचवी फिल्म का नाम लिपस्टिक वाले सपने है ।   इस फिल्म के निर्देशन की कमान टर्निंग ३० की डायरेक्टर अलकंकृता श्रीवास्तव के हाथो में है । 

कल बॉक्स ऑफिस पर होगी 'रोर' और 'सुपर नानी' !

इस शुक्रवार दो फ़िल्में सुपर नानी और रोर : टाइगर्स ऑफ़ द  सुंदरबन्स ख़ास हैं।  दो अन्य फिल्मों में 'फायरफ्लाइज' से एक्टर विनोद खन्ना के एक्टर बेटे राहुल खन्ना वापसी कर रहे हैं. दो दुश्मन भाइयों वाली इस कहानी में मोनिका डोगरा भी नज़र आएंगी।  मुंबई कांट डांस साला में प्रशांत नारायण, शक्ति कपूर और आदित्य पंचोली को देखना ख़ास होगा। इन दो फिल्मों के अलावा जो दो अन्य फ़िल्में रिलीज़ हो रही हैं, उनमे एक सुपर नानी  का ख़ास आकर्षण अभिनेत्री रेखा हैं. वह  इस फिल्म में नानी का किरदार कर रही हैं।  फिल्म में उनके नाती शरमन जोशी बने हैं।  रेखा की सुपर नानी की भूमिका उनकी उम्र के अनुरूप है।  पूरी फिल्म रेखा की स्टार पावर पर निर्भर करती है।  इस फिल्म से, फिल्म के निर्देशक इंद्र कुमार  की बेटी श्वेता कुमार एक बार फिर अपना भाग्य आजमा रही हैं।  देखने वाली बात होगी कि सुपर नानी रेखा और श्वेता के फिल्म करियर को कितना संवार पाती है।  रोर : टाइगर्स ऑफ़ द  सुंदरबन्स सेव टाइगर्स का मैसेज देने वाली फिल्म है।  इस फिल्म के स्पेशल इफेक्ट्स बिलकुल देशी हैं।  जंगल के दृश्य काफी रोमांचक बन पड़े हैं. ख़ास तौर पर शिकारियों द्वारा शेर का पीछा  करने और शेर द्वारा पलटवार करने के दृश्य सिहरा देने वाले हैं।
बॉलीवुड ने इस हफ्ते चार कम  बजट वाली फ़िल्में इसी वजह से रिलीज़ की थीं, क्योंकि शाहरुख खान की  फिल्म हैप्पी न्यू  ईयर के केवल एक हफ्ते पहले रिलीज़ होने के  कारण बड़ी फ़िल्में पर्याप्त स्क्रीन न मिल पाने और  खान की फिल्म से टकराव टालने के कारण  रिलीज़ नहीं हुई थीं। खुद सुपर नानी भी टकराव टालने के लिए एक हफ्ते बाद प्रदर्शित हुई।  परन्तु, हैप्पी न्यू  ईयर के वीकेंड के बाद बिलकुल लुढक जाने से मुंबई कांट  डांस साला, फायर फ्लाइज, सुपर नानी और रोर :  टाइगर्स ऑफ़ द सुंदरबन्स की लाटरी लग गयी।  लेकिन, इस चौकोणीय मुकाबले में सबसे ज़्यादा  फायदा सुपर नानी और रोर को ही होगा.

Wednesday, 29 October 2014

डांस बसंती नाच श्रद्धा

आशिकी २ से अपने सफल करियर की शुरुआत करने वाली श्रद्धा कपूर ने एक विलेन  और हैदर से साबित कर दिया कि  वह खूबसूरत ही नहीं प्रतिभाशाली भी हैं।  अब वह खुद को सेक्सी भी साबित करने जा रही हैं।  धर्मा प्रोडक्शंस की फिल्म उंगली में श्रद्धा कपूर अभिनेता इमरान हाशमी के साथ एक आइटम सांग डांस बसंती कर रही हैं।  दो दिन पहले इस आइटम सांग का वीडियो सोशल साइट्स पर जारी हुआ।  दर्शकों ने इसे हिटम हिट कर दिया।  इस गीत में श्रद्धा कपूर बेहद उत्तेजक लग रही हैं। श्रद्धा कपूर को ऊँगली में बतौर आइटम डांसर लेना, निर्माता करण जौहर का सही निर्णय है। याद कीजिये करण  जौहर ने अपने धर्मा प्रोडक्शंस के अंतर्गत बनी फिल्म अग्निपथ में प्रियंका चोपड़ा के बावजूद कैटरीना  कैफ का आइटम चिकनी चमेली रखा था, जिसे फिल्म रिलीज़ होने से काफी पहले ही ज़बरदस्त लोकप्रियता मिल चुकी थी।  इसलिए जब अग्निपथ रिलीज़ हुई थी, तब इस फिल्म को कैटरीना  के काफी प्रशंसक दर्शक अतिरिक्त मिले थे।  फिल्म को ज़बरदस्त सफलता मिली थी। स्वाभाविक है कि  जब कोई अभिनेत्री खुद को स्थापित कर लेती है, अपने ग्लैमरस लुक से दर्शकों को प्रभावित कर लेती  है,तब उसका आइटम कुछ ख़ास हो जाता है। अभी तक श्रद्धा कपूर को एक सीधी सादी पर प्रगतिशील लड़की की भूमिका में देख चुके दर्शकों के लिए श्रद्धा कपूर का आइटम गर्ल वाला रूप उत्सुकता पैदा करने वाला हो सकता था।  ऐसा ही हुआ भी है। अब  रेंसिल डिसिल्वा निर्देशित और इमरान हाशमी  रणदीप हुड्डा, नेहा धूपिया, अंगद बेदी और नील भूपलम की मुख्य भूमिका वाली उंगली को अतिरिक्त दर्शक मिल सकते हैं, जो श्रद्धा के ग्लैमर पर श्रद्धा रखते हैं । अपने पहले आइटम सांग को लेकर उत्साहित नज़र आ रही श्रद्धा कपूर कहती हैं, "डांस बसंती काफी मज़ेदार और मोहक डांस है।"


Tuesday, 28 October 2014

रोर टाइगर्स ऑफ़ द सुंदरबन्स दर्शकों को स्तब्ध कर देगी - सुब्रत दत्ता

आगामी फिल्म रोर- टाइगर्स ऑफ़ द  सुंदरबन्स में मुख्य खलनायक की  भूमिका कर रहे सुब्रत दत्ता दो बेस्ट एक्टर अवार्ड्स जीत चुके हैं।  उनके खाते में भूतनाथ रिटर्न्स, तलाश, मंगल पाण्डेय, रक्तचरित्र, आदि बड़ी फ़िल्में दर्ज हैं, जिनमे उन्हें अमिताभ बच्चन और आमिर खान जैसे बड़े सितारों के साथ अभिनय करने का मौका मिला।  वह अर्जुन कपूर और सोनाक्षी सिन्हा के साथ फिल्म तेवर में एक संस्कारी किरदार कर रहे हैं।  इंटेंस रोल की तलाश में रहने वाले सुब्रत हर प्रकार के रोल करना चाहते हैं।  पेश है उनसे हुई बातचीत के अंश-
- ट्रेलर से रोर- टाइगर्स ऑफ़ द  सुंदरबन्स अलग तरह की फिल्म लग रही है।
यह एक विज़ुअल  एंटरटेनिंग फिल्म है।  इसमे एक्शन, थ्रिलर और ड्रामा…सारे मसालें तो हैं ही, साथ में है टाइगर, क्रोकोडाइल, सांप, मधुमक्खियां भी…मतलब आप थिएटर में बैठ कर पूरे सुंदरबन का मज़ा ले सकते हों।  सबसे ऊपर इसके वीएफएक्स ओरिजिनल हैं, इन्हे किसी हॉलीवुड की फिल्म से कॉपी नहीं किया गया है।  डायरेक्टर ने स्तब्ध कर देने वाले, साँसों को रोक देने वाले दृश्य  शूट किये हैं।
- फिल्म में आपका क्या रोल है?   
मैं इसमे शिकारी भीरा का किरदार कर रहा हूँ, जो पूरी कमांड टीम को भ्रमित कर मौत के मुंह में ले जाता है।  इसमे वह अपना फायदा  देखता है।  क्योंकि, टाइगर को मार के उसके बॉडी पार्ट्स को बेचना इस शिकारी का पेशा है।  ऐसे शिकारी हमारे देश में भी बहुत हैं।  आप कह सकते हैं कि  फिल्म का एक ही विलन है, जिसका रोल मैंने किया है।
- क्या फिल्म 'सेव टाइगर'  प्रोग्राम के लिए है ?
हाँ, पूरी फिल्म एक इमोशनल स्टोरी है।  निश्चित रूप से फिल्म देखने के बाद दर्शकों को  प्यार हो जायेगा, न केवल टाइगर्स से बल्कि प्रकृति से भी।  फिल्म में सुंदरबन को जिस प्रकार से कैमरा में उतार है, वह मोह लेने वाला है।  इसमें मैसेज सीधा नहीं…यह डक्यूमेंट्री भी नहीं।  लेकिन, हाँ.…जब फिल्म ख़त्म होती है तो यह सन्देश पहुंचता है - सेव द  टाइगर्स।
- आपने भूतनाथ रिटर्न्स और तलाश में अमिताभ बच्चन, आमिर खान,  करीना कपूर और रानी मुख़र्जी जैसे इंडस्ट्री के बड़े नामों के साथ काम किया है।  कैसा रहा अनुभव?
बहुत ही बढ़िया अनुभव रहा।  हालाँकि, एनएसडी का ट्रेन्ड  एक्टर होने  के नाते मैं हमेशा अपने करैक्टर पर कंसन्ट्रेट करता हूँ, न की दूसरे करैक्टर पर।  लेकिन हाँ, बड़े स्टार के साथ काम करने का मतलब फिल्म एक बड़े ऑडियंस तक पहुंचती है, जो कि  सचमुच बड़ा अच्छा लगता है।   क्योंकि, फिल्म तो हम दर्शकों के लिए ही बनातें हैं या उसका हिस्सा बनाते हैं ।  
- फिल्म तेवर में अर्जुन कपूर और सोनाक्साही सिन्हा हैं।  मनोज बाजपेई मुख्य विलन हैं।  आप फिल्म में किस प्रकार के तेवर दिखा रहे हैं ?
मैं इसमे एक बहुत संस्कारी रोल निभा रहा हूँ।  जो मनोज जी के साथ साये की तरह तो है, लेकिन इस किरदार को कहानी में ऐसे मोड़ पर ले जा के खड़ा कर दिया गया है…जो कि  ऑडियंस के लिए एक थ्रिलिंग एलिमेंट बन जाता है।  यह क्या है…वह तो फिल्म देखने के बाद ही पता चलेगा. लेकिन, इसे देखने में भरपूर मज़ा आएगा.
- द  शौक़ीनस में ख़ास क्या है ?
इस फिल्म में मैंने पहली बार एक कॉमिक रोल किया है।  सामान्य तौर पर मैं सीरियस रोल ही करता आ रहा हूँ।  मैंने एक डायरेक्टर का रोल किया है, जिसे अक्षय कुमार जी बुलाते हैं, (बता दूँ की इस फिल्म में अक्षय जी खुद का रोल निभा रहे हैं) एक्टिंग सीखने के लिए।  अब वह कितना सीखते हैं.…या नहीं वह फिल्म में देखें। 
- आप किस प्रकार के चरित्र आसानी से कर ले जाते हैं? किस शैली में आप काम करना चाहते हैं ? 
मैं इंटेंस रोल करता हूँ।  चाहे वह किसी भी या कोई भी शैली में हो। थिएटर एक्टर होने के नाते मैं हर रोल में भिन्न रहने की कोशिश करता हूँ- अब चाहे वह बॉडी लैंग्वेज हो, मेकअप हो या संवाद अदायगी हो। पोशाकें तो हैं ही।  मेरी फ़िल्में देखने के बाद बंगाल के एक पत्रकार ने मुझे गिरगिट बताया था।  
 - क्या अपने कभी मुख्य भूमिका करने की कोशिश की? 
मैंने इंडिपेंडेंट फिल्म में या बांगला फिल्म में लीड या सो कॉल्ड हीरो किया है।  एक हिंदी फिल्म माधोलाल कीप वाकिंग में मैंने माधोलाल का रोल किया है।  इस फिल्म के लिए मुझे २००९ में कैरो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट एक्टर का अवार्ड मिला।  
- आपका रोल सेलेक्ट करने का क्राइटेरिया क्या है? 
सबसे पहले मैं स्क्रिप्ट देखता हूँ।  फिर डायरेक्टर और सबसे बाद में तारीखें और फिल्म का बजट।  
 - आपने अब तक जिन फिल्म निर्देशकों के साथ काम क्या है, उनमे से किसके साथ फिर कोई फिल्म करना चाहते हैं ?
रोहित शेट्टी के साथ।  मैंने उनके साथ ज़मीन की थी।  आमिर खान के साथ, उनके साथ मंगल पाण्डेय और तलाश की थी और कमल सडाना  के साथ जिनके साथ रोर की है।  हाँ, अमित मिश्रा भी हैं, जिनकी फिल्म तेवर कर रहा हूँ।  

प्रियंका चोपड़ा की बहन बार्बी की मनारा बनने की ज़िद!

प्रियंका चोपड़ा की  तीसरी बहन भी अब हिंदी फिल्मों में आ रही है।  प्रियंका चोपड़ा के बाद कजिन परिणीति चोपड़ा ने यशराज बैनर की फिल्मों से बॉलीवुड में कदम रखा था। एक दूसरी कजिन मीरा चोपड़ा पहले से ही दक्षिण की फिल्मों में काम कर रही थी।  सतीश कौशिक की फिल्म गैंग ऑफ़ घोस्ट्स से उनका भी हिंदी फिल्मों में प्रवेश हुआ।  वह कुछ अन्य फ़िल्में भी कर रही हैं।  अब चोपड़ा बहनों का यह बॉलीवुड तिगड्डा, चौकड़ी बनने जा रहा है. इसे चौकड़ी बना रहे हैं निर्माता अनुभव सिन्हा। अभी उनकी फिल्म ज़िद का एक न्यूड  पोस्टर सोशल साइट्स पर जारी हुआ है।  इस पोस्टर की न्यूड  बॉडी प्रियंका चोपड़ा की चौथी बहन की ही है।  उनका नाम वैसे तो बार्बी हांडा है।  लेकिन, अनुभव सिन्हा को यह नाम बच्चो जैसा लगा।  जब बड़ों जैसे हॉट काम करने हो तो बच्चों जैसा नाम रास नहीं आता।  इसलिए अनुभव सिन्हा ने बार्बी को मनारा नाम दे दिया है।  मनारा एक ग्रीक नाम है, जिसका अर्थ रोशन करना होता है।  मनारा ने फैशन डिज़ाइन और बिज़नेस एडमिनिस्ट्रेशन की डिग्री हासिल कर रखी है। हालाँकि, मनारा के नाम के साथ प्रियंका चोपड़ा का नाम जुड़ना अपने आप में मददगार होता है. इसके बावजूद मनारा को ज़िद के लिए ऑडिशन के पांच राउंड पार करने पड़े।  अपनी पहली ही फिल्म के पोस्टर में न्यूड  बॉडी में नज़र आने को लेकर मनारा कहती हैं, "हम २०१४ में जी रहे है।  मैं घूंघट ओढ़ कर  नहीं रह सकती।  अगर शरीर पूरा ढकना ही था तो मैं  सांस बहु के सीरियल्स करती । मेरे पास हॉट बॉडी है और मुझे इसे दिखाने से कोई परहेज नहीं है ।" यानि इस चोपड़ा बहन ने गरमी फैलाने की पूरी तैयारी कर ली है।

कहाँ हैं अन्नू कपूर

बदलापुर बॉयज पुकार पुकार कर पूछ रहे हैं कि अभिनेता अन्नू कपूर आजकल कहाँ है  ?  नवम्बर  को उनकी फिल्म "बदलापुर बॉयज" रिलीज़  हो रही है ।  मगर अन्नू कपूर अपनी इस  फिल्म के प्रोमोशन में कहीं नज़र नही   रहे हैं  क्या "बदलापुर बॉयज" टीम के कोच अनु कपूर अपनी टीम से नाराज़  हैं या उनकी टीम उनसे नाराज़ है  या अन्नू को लगता है कि इस फिल्म के प्रोमोशन के लिए क्या टाइम निकालना ! फिल्म के प्रोमोशन में अन्नू के गायब होने  के बारें में फिल्म के निर्माता  सतीश पिल्लंगवाड़ कहते है, "पिछले दिनों हमने धर्म जी से फिल्म का म्यूजिक रिलीज़ करवाया था। तब मैं खुद उन्हें निमंत्रण देने गया था लेकिन वो नही आये शायद अपनी दूसरी फिल्म में व्यस्त हैं " दरअसल, नवम्बर को अन्नू कपूर की  दो फ़िल्में एक साथ रिलीज़ हो रही है, जिसमें से एक "शौक़ीन " की रीमेक " शौकीन्स " भी है।  इस फिल्म में अन्नू ने के रसिया बुड्ढे का किरदार किया है। ज़ाहिर है कि कबड्डी के लोकप्रिय खेल पर बदलापुर बॉयज छोटी फिल्म है  इसलिए अन्नू कपूर बदलापुर के बजाय द  शौकीन्स पर ज़्यादा ध्यान दे रहे हों।