Sunday, 15 December 2019

हिट फ्लॉप फिल्मों के Ajay Devgan



२०१० के दशक की फ़िल्में अजय देवगन को बॉक्स ऑफिस पर ज़बरदस्त पकड़ रखने वाले अभिनेता के तौर पर स्थापित करती थी। वह एक ऐसे अभिनेता माने जाते हैं, जो बिना किसी इमेज में बंधे फ़िल्में भी हिट करा सकता है । यानि उन्हें स्टार एक्टर की संज्ञा दी जा सकती है । अजय देवगन के इस दशक की शुरुआत ७ फिल्मों में देख और सुन कर हुई। यानि २०१० में अजय देवगन की रिलीज़ फिल्मों में तीन पत्ती में उनका कैमिया था, जबकि टूनपुर का सुपर हीरो में वॉइसओवर। उनकी बाकी की फिल्मों में अतिथि तुम कब जाओगेराजनीति, वन्स अपॉन अ टाइम इन मुंबई और गोलमाल ३ हिट साबित हुई। आक्रोश और तीन पत्ती को असफलता का मुंह देखने को मिला। २०११ में अजय देवगन की फिल्म दिल तो बच्चा है जी, रेडी, सिंघम और रास्कल्स में रेडी और सिंघम बड़ी हिट फिल्मों में शामिल हैं। अजय देवगन की २०१२ में प्रदर्शित फिल्म तेज़ असफल हुई तो बोल बच्चन और सन ऑफ़ सरदार हिट हुई। अजय देवगन के लिए २०१३, हिम्मतवाला और सत्याग्रह जैसी फ्लॉप फ़िल्में देने वाला साबित हुआ।  अजय देवगन के करियर में २०१४ से बदलाव साफ़ नज़र आता है, जब उनकी प्रदर्शित तमाम फिल्मे हिट और लीक से हट कर थी। उनकी हिट फिल्मों में सिंघम रिटर्न्स, दृश्यम, शिवाय, गोलमाल अगेन, रेड, टोटल धमाल और दे दे प्यार दे शामिल हैं। लेकिन, एक्शन जैक्सन, फितूर और बादशाहो को असफलता का मुंह देखना पड़ा। 


सुपरडुपर हिट Akshay Kumar



अक्षय कुमार के लिए इस दशक की शुरुआत मिश्रित रही। अक्षय कुमार की २०१० में चार फ़िल्में रिलीज़ हुई। हाउसफुल को बड़ी सफलता मिली। लेकिन, उनकी बाकी की तीन फ़िल्में खट्टा मीठा, एक्शन रीप्ले और तीस मार खान फ्लॉप हुई। अक्षय कुमार की २०११ में तीन फ़िल्में पटियाला हाउस, थैंक यू और देसी बॉयज रिलीज़ हुई।  इनमे देसी बॉयज हिट हुई।  हाउसफुल २, राउडी राठौर, जोकर, ओएमजी-ओह माय गॉड और खिलाड़ी ७८६ में से जोकर छोड़ कर, अक्षय कुमार की २०१२ में प्रदर्शित सभी फ़िल्में हिट या सुपरहिट हुई। २०१३ में, अक्षय कुमार स्पेशल २६, वंस अपॉन अ टाइम इन मुंबई दोबारा और बॉस रिलीज़ हुई। लेकिन, क्लीन हिट स्पेशल २६ ही साबित हुई।  अक्षय कुमार की २०१४ में रिलीज़ हॉलिडे, एंटरटेनमेंट और द शौकीन्स में सिर्फ हॉलिडे क्लीन हिट थी। २०१५ में अक्षय कुमार की फिल्म बेबी को सफलता मिली। लेकिन, गब्बर इज बैक, ब्रदर्स और सिंह इज ब्लिंग सफल फिल्मों में अपना नाम नहीं दर्ज करा पाई। अक्षय कुमार के करियर में २०१६ से २०१९ तक के चार सालों का बड़ा महत्व है। इन चार सालों में अक्षय कुमार, बॉलीवुड एक्टरों में सबसे ज्यादा विश्वसनीय और बॉक्स ऑफिस पर सफल अभिनेता बन गए इन सालों में प्रदर्शित उनकी एयरलिफ्ट, हाउसफुल ३, रुस्तम, जॉली एलएलबी २, टॉयलेट एक प्रेम कथा, पैड मैन, गोल्ड, २.०, केसरी, मिशन मंगल और हाउसफुल ४ फिल्मों को सुपरडुपर हिट सफलता मिली। उम्मीद की जा रही है कि गुड न्यूज़ के बाद, अक्षय कुमार भी सलमान खान और आमिर खान की तरह एक साल में १००० करोड़ का कारोबार करने वाली फिल्मों के अभिनेता बन जायेंगे

वीर से Salman Khan की फ्लॉप शुरुआत



आज बॉक्स ऑफिस पर धूम मचा रहे सलमान खान की इस दशक की शुरुआत फ्लॉप फिल्म से हुई थी। सलमान खान के दशक की शुरुआत २०१० में रिलीज़ फिल्म वीर हुई थी। इस फिल्म का निर्देशन, ग़दर एक प्रेम कथा के निर्देशक अनिल शर्मा ने किया था। सलमान खान को इस फिल्म से काफी उम्मीदें थी। वीर से ज़रीन खान के हिंदी फिल्म करियर की भी शुरुआत हो रही थी। लेकिन, फिल्म वीर बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह से असफल हुई थी। हालाँकि,  दबंग की सफलता के बाद, सलमान खान का सिक्का चल निकला। लेकिन, ज़रीन खान के करियर की यह हालत हो गई कि उन्हें हेट स्टोरी ३ जैसी इरोटिक थ्रिलर फिल्म में कामुकता का प्रदर्शन करना पडा । वीर की बड़ी असफलता के बाद सलमान खान ने रेडी, बॉडीगार्ड, एक था टाइगर, दबंग २, जय हो, किक, बजरंगी भाईजान, प्रेम रतन धन पायो, सुल्तान, ट्यूबलाइट, टाइगर ज़िंदा है, रेस ३ और भारत जैसी १०० करोड़ क्लब में जगह बनाने वाली फ़िल्में की। सलमान खान की ३०० करोड़ क्लब में शामिल फ़िल्में टाइगर ज़िंदा है, बजरंगी भाईजान और सुल्तान हैं। उनकी दो फ़िल्में प्रेम रतन धन पायो और भारत २०० करोड़ क्लब में शामिल हैं। इसके बाद, वह बॉलीवुड के सबसे विश्वसनीय अभिनेता मान लिए गए । उन्हें लेकर महँगी फिल्मों का ऐलान होने लगा । कभी, ७० करोड़ का पारिश्रमिक लेने वाले सलमान खान, आज अपनी फिल्मों के फायदे में हिस्सा माँगने लगे हैं । यह उनके विश्वास का नतीजा है । इससे, सलमान खान की फिल्मों के लागत कम होगी । फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर फायदा कमाने में आसानी होगी । इस स्थिति में सलमान खान फायदे मे १०० करोड़ भी पा सकते हैं और १५० करोड़ भी । इससे कम से कम, उन्हें अपने वितरकों को हुए नुकसान की भरपाई की जिल्लत नहीं झेलनी होगी !

Hrithik Roshan के दशक की फ्लॉप शुरुआत

हृथिक रोशन के करियर की शुरुआत २००० के दशक में हुई थी, जब उनकी डेब्यू फिल्म अमीषा पटेल के साथ कहो न प्यार है सुपरहिट हो गई । लेकिन, २०१० के दशक में उनकी शुरुआत फ्लॉप फिल्मों से हुई । हृथिक रोशन की २०१० में दो फ़िल्में काइट्स और गुज़ारिश रिलीज़ हुई और बड़ी फ्लॉप फिल्मों में शुमार हुई। इतनी बड़ी असफलता किसी भी अभिनेता के करियर को डांवाडोल कर देने के लिए काफी थी । मगर, इस असफलता के बावजूद हृथिक रोशन अपनी काबिलियत के बदौलत दर्शकों के पसंदीदा बने रहे । अलबत्ता, उन्होंने प्रयोगात्मक फिल्मों से परहेज रखा, जो उनके व्यक्तित्व और इमेज के अनुरूप नहीं थी । नतीजे के तौर पर हृथिक रोशन की ज़िन्दगी न मिलेगी दोबारा (२०११), अग्निपथ (२०१२), कृष ३ (२०१३), बैंग बैंग (२०१४) और काबिल (२०१७) जैसी फ़िल्में हिट हुई। लेकिन, मोहनजोदड़ो जैसी बड़ी असफलता ने हृथिक रोशन को सहमा दिया। २०१८ में उनकी कोई भी फिल्म प्रदर्शित नहीं हो सकी । इसके बावजूद, हृथिक रोशन ने खुद पर प्रयोग करने का फैसला किया । उन्होंने, पटना के एक गणितज्ञ आनंद कुमार पर बायोपिक फिल्म सुपर ३० का नायक बनना मंजूर किया । यह एक बड़ा ख़तरा था । हृथिक के इस फैसले पर सवाल भी उठाये गए । सुपर ३० की असफलता का ऐलान, फिल्म रिलीज़ होने से पहले ही कर दिया गया । सुपर ३० की शुरुआत धीमी हुई थी । इससे ऐसा लगाने लगा कि हृथिक का दांव इस बार भी गलत पडा । लेकिन, बाद में सुपर ३० ने रफ़्तार पकड़ी । यह फिल्म १०० करोड़ क्लब में शामिल हो गई । २०१९ में  सुपर ३० की सफलता के बाद, हृथिक रोशन की एक्शन फिल्म वॉर रिलीज़ हुई । इस फिल्म में बॉलीवुड के युवा एक्शन हीरो टाइगर श्रॉफ भी थे । लेकिन, फिल्म मे हृथिक रोशन की मौजूदगी ज़बरदस्त मानी गई । यह फिल्म हृथिक रोशन और टाइगर श्रॉफ की ३०० करोड़ क्लब मे शामिल होने वाली पहली फिल्म बन गई । सुपर ३ और वॉर की सफलता के बाद हृथिक रोशन ने खुद को सुपरस्टार पर काबिज़ कर दिया। 

दशक में ५०+ का कारोबार करने वाली हॉलीवुड की २४ फ़िल्में


हिंदी फिल्मों की तरह, हॉलीवुड की फिल्मों के लिहाज़ से २०१०-२०१९ का दशक शानदार रहा।  इस दशक में हॉलीवुड की हिंदी में डब २४ फिल्मों ने ५०+ का कारोबार किया। यह सभी फ़िल्में हॉलीवुड की भारतीय बॉक्स ऑफिस पर श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली फ़िल्में हैं। इस साल प्रदर्शित हॉलीवुड की सुपरहीरो फिल्म अवेंजर्स एन्डगेम ने अब तक सबसे ज़्यादा कारोबार कर, हिंदी फिल्मों को भी पछाड़ रखा है। अवेंजर्स एन्डगेम ने ३७३.२२ करोड़ का कारोबार किया है। दूसरे स्थान पर, अवेंजर्स सीरीज की इंफिनिटी वॉर है।  इस फिल्म का लाइफटाइम २२७.४३ करोड़ है। लाइव एनीमेशन फिल्म द जंगल बुक ने १८८ करोड़ का कारोबार कर तीसरा स्थान प्राप्त किया है। भारत में १०० करोड़ क्लब में प्रवेश पाने वाली तीन फ़िल्में द लायन किंग (१५८.७१ करोड़), फ़ास्ट एंड फ्यूरियस ७ (१०८ करोड़) और जुरैसिक वर्ल्ड (१०१ करोड़) हैं। पचास करोड़ से ज़्यादा का कारोबार करने वाली फिल्मों में फ़ास्ट एंड फ्यूरियस ८ (८६.२३ करोड़), स्पाइडर-मैन: फार फ्रॉम होम (८६.११ करोड़), कैप्टेन मार्वेल (८४.३६ करोड़), जुरैसिक वर्ल्ड: फालेन किंगडम (८२.६०), मिशन इम्पॉसिबल-फॉलआउट (८०.२० करोड़), अवेंजर्स: एज ऑफ़ उल्ट्रॉन (८० करोड़), फ़ास्ट एंड फ्यूरियस प्रेजेंट्स हॉब्स एंड शॉ (७५.८५ करोड़), जोकर (६७.९५ करोड़), २०१२ (६३.७५ करोड़), द कंजूरिंग २ (६१.७८ करोड़), स्पाइडर-मैन होमकमिंग (५९.९६ करोड़), कैप्टेन अमेरिका : सिविल वॉर (५९.५० करोड़), थॉर: रग्नारॉक (५८.७३ करोड़), डेडपूल २ (५८.०८ करोड़), अलादीन (५५.७३ करोड़), एक्वामैन (५४.६० करोड़), ब्लैक पैंथर (५२.५३ करोड़) और जुमान्जी: वेलकम टू द जंगल (५१.९० करोड़) के नाम शामिल हैं। एनाबेली; क्रिएशन सिर्फ ५० लाख की कमी के कारन ५० करोड़ क्लब में शामिल होने से वंचित रह गई।

सबसे अधिक ग्रॉस करने वाली ५० फ़िल्में


बीत रहे दशक की टॉप ग्रॉसर फिल्मों पर नज़र डालना दिलचस्प होगा। हर साल, टॉप पर रहने वाली पांच फिल्मों में, बॉलीवुड के स्थापित सितारों की फ़िल्में ही नज़र आती हैं। बहुत कम ऐसा हुआ कि कोई सरप्राइज हिट या स्लीपर हिट फिल्म टॉप ५ में शामिल हुई हो और उस फिल्म का नायक टॉप ५ में शामिल हुआ हो।  

खान, कपूर, देवगन और कुमार का २०१०
२०१० में टॉप की ५ फिल्मों में शाहरुख़ खान की माय नेम इज खान, सलमान खान की दबंग, अजय देवगन की गोलमाल ३, अक्षय कुमार की हाउसफुल और रणबीर कपूर और अजय देवगन की राजनीति शामिल हैं। टॉप की ग्रॉस करने वाली फिल्म शाहरुख़ खान की माय नेम इज खान थी। चूंकि, राजनीति में अजय देवगन भी थे, इसलिए २०१० में अजय देवगन की दो फ़िल्में टॉप ५ में शामिल नज़र आती हैं।

खान अभिनेताओं का २०११
२०११ की टॉप ५ ग्रॉसर फिल्मों में चार फ़िल्में खान अभिनेताओं की है। टॉप ५ में शामिल गैर खान अभिनेता की फिल्म में हृथिक रोशन की फिल्म ज़िन्दगी न मिलेगी दोबारा है। हालाँकि, शीर्ष की चार फिल्मों में शामिल शाहरुख खान की फिल्म रा.वन टॉप ग्रॉस करने वाली फिल्म होने के बावजूद भारी बजट के बोझ तले दब गई। शाहरुख़ खान दूसरी फिल्म डॉन २ तीसरे नंबर की हिट फिल्म में शामिल हुई। सलमान खान की टॉप ग्रॉस करने वाली बॉडीगार्ड के अलावा फिल्म रेडी है।

फिर खान अभिनेताओं की तीन फिल्मों का २०१२
२०१२ की टॉप ग्रॉसर फिल्मों में तीन फ़िल्में खान अभिनेताओं की थी। सलमान खान की दो फ़िल्में  एक था टाइगर और दबंग २ टॉप २ पर थी। तीसरे नंबर पर शाहरुख़ खान की जब तक है जान थी। अक्षय कुमार राऊडी राठोर और हृथिक रोशन की अग्निपथ टॉप ५ में शामिल थी।

हृथिक रोशन का २०१३
२०१३ में टॉप ५ में दो फ़िल्में धूम ३ और कृष ३ हृथिक रोशन की थी और एक एक फिल्म शाहरुख़ खान की चेन्नई एक्सप्रेस, रणबीर कपूर की यह जवानी है दीवानी और रणवीर सिंह की राम-लीला थी। यानि इस साल सिर्फ एक ही खान यानि शाहरुख खान चेन्नई एक्सप्रेस से टॉप पर काबिज़ था। राम-लीला से रणवीर सिंह ने टॉप की ओर कदम बढ़ा दिए थे। उनके साथ, फिल्म ये जवानी है दीवानी का सहारा लेकर दीपिका पादुकोण भी थी।

२०१४ में हृथिक की बैंग बैंग, सलमान खान की किक
आमिर खान, सलमान खान और शाहरुख खान ! इन तीन खान सितारों की फ़िल्में पीके, किक और हैप्पी न्यू इयर इसी क्रम में टॉप ५ पर काबिज़ नज़र आती हैं। हृथिक रोशन की, हॉलीवुड की फिल्म नाइट एंड डे की ऑफिसियल रीमेक फिल्म बैंग बैंग तथा अजय देवगन की सिंघम रिटर्न्स टॉप ५ में शामिल फ़िल्में थी।

कंगना रानौत का २०१५
दशक में पहली बार कोई नायिका प्रधान फिल्म टॉप ५ में शामिल थी। इसका श्रेय जाता है ज़बरदस्त प्रतिभा की धनी अभिनेत्री कंगना रानौत को। उनकी सीक्वल फिल्म तनु वेड्स मनु रिटर्न्स टॉप ५ में पांचवे स्थान पर रही। टॉप ५ में पहले दो स्थानों पर सलमान खान की फिल्म बजरंगी भाईजान और प्रेम रतन धन पायो थी। शाहरुख़ खान की बजट के लिहाज़ से फ्लॉप फिल्म दिलवाले बढ़िया ग्रॉस के कारण तीसरे स्थान की फिल्म बनी। रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण की बाजीराव मस्तानी ने चौथा स्थान पाया।

कुश्ती और क्रिकेट का २०१६
ऐसा लगता है कि सबसे अधिक कारोबार करने वाली फिल्म देने वाले एक्टर के तौर पर खान अभिनेता अपनी पकड़ खो रहे थे। २०१६ में आमिर खान की दंगल और सलमान खान की सुल्तान ही दो ऎसी फ़िल्में थी, जो टॉप पर थी। बाकी की तीन टॉप ग्रॉसर फिल्मों में रणबीर कपूर की ऐ दिल है मुश्किल, अक्षय कुमार की रुस्तम और सुशांत सिंह राजपूत की एमएस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी थी।

इरफ़ान खान का २०१७
एक बार फिर पुष्टि हुई कि अब बॉक्स ऑफिस को किसी दूसरे खान या सुपरस्टार की ज़रुरत है। विदेशी बाज़ार में कारोबार की वजह से, आमिर खान की कैमिया भूमिका वाली फिल्म सीक्रेट सुपरस्टार टॉप पर रही। टाइगर जिंदा है  की बदौलत सलमान खान ने लगातार दूसरे साल टॉप ग्रॉस करने वाली फिल्मों में दूसरा स्थान प्राप्त किया। इस साल एक नया खान टॉप पर पहुँचा। यह थे इरफ़ान खान और फिल्म थी हिंदी मीडियम। अक्षय कुमार ने एक बार फिर टॉयलेट एक प्रेम कथा से दर्शकों को प्रभावित कर टॉप ५ फिल्मों में स्थान पाया।

रणबीर कपूर और रणवीर सिंह का २०१८ भी
अगर दिवाली न होती, फिल्म में आमिर खान और अमिताभ बच्चन न होते तो निर्देशक विजय कृष्ण आचार्य की पीरियड ड्रामा फिल्म ठग्स ऑफ़ हिंदुस्तान का कलेक्शन इतना न होता कि बॉक्स ऑफिस के टॉप ५ ग्रॉस में स्थान बना पाती। यह फिल्म टॉप ५ ग्रॉसर फिल्मों में पांचवे स्थान पर थी। टॉप पर थे रणबीर कपूर, संजय दत्त पर बायोपिक फिल्म संजू से। रणवीर सिंह ने दीपिका पादुकोण और शाहिद कपूर के साथ पद्मावत से अपनी एंट्री टॉप ५ मे की। लगातार दूसरे साल बिलकुल नया सितारा टॉप ५ में चमका। यह थे आयुष्मान खुराना और फिल्म थी अंधाधुन। रणवीर सिंह ने साल ख़त्म होते होते अपनी दूसरी फिल्म सिम्बा टॉप ५ पर पहुंचा दी।

२०१९ में टॉप पर हृथिक रोशन
अगर, २० दिसम्बर २०१९ को प्रदर्शित होने जा रही सलमान खान की फिल्म दबंग ३ बड़ी हिट हो गई तो गणित बदल सकती है। अन्यथा, आज की स्थिति में टॉप ५ के शीर्ष पर वॉर फिल्म के साथ हृथिक रोशन और टाइगर श्रॉफ हैं। शाहिद कपूर, खुद के बूते पर फिल्म कबीर सिंह को इतना सफल बना सके हैं कि टॉप २ की पोजीशन पर हैं। कबीर सिंह और उरी द सर्जिकल स्ट्राइक दो ऎसी फ़िल्में हैं, जो अपनी कम लागत के कारण अपने निर्माताओं के लिए भारी भरकम मुनाफ़ा कमाने का जरिया बन चुकी है। उरी के कारण, संजू के बाद विक्की कौशल की दूसरी फिल्म टॉप ५ में पहुंची है। सलमान खान की फिल्म भारत और अक्षय कुमार की फिल्म मिशन मंगल भी टॉप ५ में हैं। 

सुपर डुपर हिट फिल्मों और परिवर्तन का दशक


२०१० के दशक को ख़त्म होने में, आज के बाद सिर्फ १६ दिन और दो शुक्रवार बाकी हैं। ट्रेड पंडितों ने, २०१० से २०१९ के बीच प्रदर्शित फिल्मों का लेखाजोखा बांचना शुरू कर दिया है। हिसाब किताब लगाया जा रहा है कि पिछले १० सालों में कितनी फ़िल्में रिलीज़ हुई ? कितनी फिल्में सफल हुई ? इनमे कितनी हिट और सुपर हिट या ब्लॉकबस्टर हिट साबित हुई ? इंडस्ट्री ने कितना खोया, कितना पाया ? ऐसे में यह जानना दिलचस्प होगा कि २०१० से शुरू इस दशक में बॉलीवुड में कितना और कैसा बदलाव हुआ ! कैसी फ़िल्में बनी ? क्या लीक पीटता रहा बॉलीवुड या कुछ नए प्रयोग हुए ?

वीकेंड का चलन 
हिंदी फिल्मो के बॉक्स ऑफिस पर प्रदर्शन की बात करें तो इस दशक को बेहद उपजाऊ दशक कहना उपयुक्त होगा। बड़ी फ़िल्में रिलीज़ हुई। हॉलिडे वीकेंड का चलन बना। गणतंत्र दिवस वीकेंड, स्वतंत्र दिवस वीकेंड, गाँधी जयंती वीकेंड, होली वीकेंड, ईद वीकेंड, दिवाली वीकेंड, क्रिसमस वीकेंड, पोंगल और किसी भी राष्ट्रीय अवकाश के वीकेंड पर कब्ज़ा जमाने का चलन शुरू हो गया। हालाँकि, हॉलिडे वीकेंड की शुरुआत आमिर खान की फिल्म गजिनी (२००७) से शुरू हो चुकी थी, जब उनकी फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर १०० करोड़ क्लब की स्थापना की। इस कब्ज़े मे सबसे आगे रही बड़े सितारों की फ़िल्में. यह बॉलीवुड के सुपर सितारों का खोखला स्टारडम कहें या असफलता का भय, हॉलिडे वीकेंड पर इन्ही सितारों की फ़िल्में प्रदर्शित हुई। अब यह बात दीगर है कि इसके बावजूद फ़िल्में असफल हुई। यह असफलता इन सितारों की फिल्मों के बड़े बजट का परिणाम थी। इस बड़े बजट में बड़ा हिस्सा इन्ही सितारों के पारिश्रमिक का था। इस लिहाज़ से, अक्षय कुमार एक ऐसे एक्टर साबित हुए, जिन्होंने खुद फिल्म निर्माण में कदम रख कर, अपनी फिल्मों की लागत काफी कम कर दी। वैसे भी अक्षय कुमार का पारिश्रमिक उचित होता है। इतना बड़ा नहीं कि फिल्म औंधे मुंह गिर जाए तो निर्माता बर्बाद हो जाए।

दिलचस्प आंकड़े 
एक वेब साईट द्वारा संकलित आंकड़ों से पता चलता है कि अब तक ८६ हिंदी फ़िल्में १०० करोड़ या इससे अधिक का कारोबार कर चुकी हैं। इनमे से एक फिल्म बाहुबली द कांक्लुजन दक्षिण से आई और हिंदी में डब है। इस फिल्म के ५१०.९० करोड़ के कारोबार को कोई भी हिंदी फिल्म अब तक छू तक नहीं सकी है। बाहुबली २ के अलावा ८ हिंदी फ़िल्में ऎसी हैं, जिन्होंने ३०० करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है। उपरोक्त फिल्मों के अलावा १४ फ़िल्में २०० के पार मगर, ३०० करोड़ से नीचे रह गई है। इस प्रकार से लगभग ८६ फ़िल्में १०० करोड़ क्लब में शामिल हैं। यहाँ दिलचस्प तथ्य यह है कि इन ८६ फिल्मों में सिर्फ २ फ़िल्में ३ इडियट्स (२००९) और गजिनी (२००७) ही ऐसी हैं, जो २००० के दशक में प्रदर्शित हुई थी। बाक़ी ८४ फ़िल्में २०१० के दशक की देन हैं। इससे पता लगता है कि हिंदी फिल्मों को, इस दशक में, कितनी ज़बरदस्त सफलता मिली है।

५०० करोड़ ही बाहुबली 
बॉक्स ऑफिस पर ५०० करोड़ से ज्यादा का कारोबार करने वाली फिल्म बाहुबली द कांक्लुजन के अलावा ३०० करोड़ से ज्यादा का कारोबार करने वाली फिल्मों में दंगल, संजू, टाइगर जिंदा है, बजरंगी भाईजान, वॉर, पद्मावत, सुल्तान, धूम ३ के नाम शामिल हैं। दो सौ करोड़ क्लब की फिल्मों में कबीर सिंह, उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक, सिम्बा, कृष ३, किक, चेन्नई एक्सप्रेस, प्रेम रतन धन पायो, भारत, गोलमाल अगेन, मिशन मंगल, हाउसफुल ४ और हैप्पी न्यू इयर के नाम शामिल हैं। एक सौ करोड़ क्लब वाली फिल्मों में एक था टाइगर, २.० (डब), बाजीराव मस्तानी, यह जवानी है दीवानी, रेस ३, बैंग बैंग, बागी २, दबंग २, केसरी, टोटल धमाल, छिछोरे, ठग्स ऑफ़ हिंदुस्तान, तनु वेड्स मनु रिटर्न्स, साहो, बॉडीगार्ड, दिलवाले, सुपर ३०, दबंग, सिंघम रिटर्न्स, ड्रीम गर्ल, गली बॉय, जुड़वाँ २, बधाई हो, रईस, राऊडी राठोर, टॉयलेट एक प्रेम कथा, एम्एस धोनी- द अनटोल्ड स्टोरी, स्त्री, एयरलिफ्ट, रुस्तम, राज़ी, अग्निपथ, रेडी, जब तक है जान, ट्यूबलाइट, रा.वन, जॉली एलएलबी २, बाहुबली द बेगिनिंग, बद्रीनाथ की दुल्हनिया, राम-लीला, जय हो, ऐ दिल है मुश्किल, हाउसफुल २, हॉलिडे, बर्फी, डॉन २, गोल्ड, भा मिल्खा भाग, हाउसफुल ३, सोनू के टीटू की स्वीटी, एबीसीडी २, गोलमाल ३, सन ऑफ़ सरदार, काबिल, २ स्टेट्स, रेड, एक विलेन, दे दे प्यार दे, रेस २, बोल बच्चन, शिवाय, सिंघम और बाला के नाम शामिल हैं। अभी इस लिस्ट में दबंग ३ और गुड न्यूज़ जैसी फ़िल्में भी शामिल हो सकती हैं।

सीक्वल और रीमेक फिल्मों का जलवा 
चालू दशक में रीमेक और सीक्वल फिल्मों का बोलबाला रहा। ऐसी ज्यादातर फ़िल्में सफल हुई। इन फिल्मों ने अपनी पिछली फिल्मों से ज्यादा कारोबार किया। मसलन, हाउसफुल और एबीसीडी फिल्मों की सीक्वल फिल्मों को पहले की फिल्म से ज्यादा सफलता मिली। प्रयोगात्मक फिल्मों का सिलसिला चालू हुआ. स्वतंत्र फिल्म निर्माताओं और विदेशी स्टूडियोज के आने से इस सिलसिले ने जोर पकड़ा। नायिका प्रधान फिल्मों को सफलता मिली। फिल्मों में श्रेष्ठ तकनीक का उपयोग किया जाने लगा। विदेशी तकनीशियनों के कारण हिंदी दर्शकों को साहो और वॉर जैसी फ़िल्में देखने को मिली। ऐतिहासिक और पीरियड फिल्मों का निर्माण हुआ। द ताशकंद फाइल्स, द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर, आदि राजनीतिक फिल्मों का निर्माण भी हुआ।

स्टारडम का दशक 
जहाँ तक स्टारडम की बात है तो वह २०१० के दशक में भी बना रहा। हालाँकि, इस पूरे दशक में खान अभिनेता यानि सलमान खान, शाहरुख़ खान और आमिर खान की फ़िल्में सफल होती रही। बॉक्स ऑफिस पर इनका दबदबा कायम रहा। लेकिन, नए सितारों के उभर ने इन खान अभिनेताओं की रोशनी को मलिन कर दिया। विक्की कौशल, टाइगर श्रॉफ, आयुष्मान खुराना, आदि एक्टरों ने बॉक्स ऑफिस पर खुद की विश्वसनीयता साबित कर दिखाई। संभव है कि २०२० के दशक में इन्ही सितारों का वर्चस्व कायम हो। नए सितारों का भी उदय हो सकता है। विद्या बालन और अलिया भट्ट ने महिला प्रधान फिल्मों को सहारा दिया। इन्हें नायक प्रधान फिल्मों के बराबर खड़ा करने की कोशिश की। 

दक्षिण के सितारों ने बोली हिंदी जुबान


हालाँकि, दक्षिण की हिंदी में डब फिल्मों का जलवा रोजा और बॉम्बे से ही नज़र आने लगा था। अरविंद स्वामी के साथ, निर्देशक मणिरत्नम की इन दोनों फिल्मों को बड़ी सफलता मिली थी। लेकिनइस ट्रेंड ने जोर पकड़ा बाहुबली द बिगिनिंग और बाहुबली २ द कांक्लुजन की बड़ी सफलता के बाद। हालाँकि, इससे काफी पहले रजनीकांत के विज्ञान फंतासी तमिल फिल्म के हिंदी डब संस्करण रोबोट (२०१०) को बड़ी सफलता मिली थी। इसके बाद रजनीकांत की अक्षय कुमार के साथ  फिल्म २.० को भी बड़ी सफलता मिली। रजनीकांत की रोबोट के बाद उनकी तमाम तमिल फ़िल्में कबाली, लिंगा और काला को भी हिंदी में डब कर रिलीज़ किया गया। इसी साल, २०१९ में, उनकी तमिल फिल्म पेट्टा हिंदी में डब कर रिलीज़ की गई। रजनीकांत की अगले साल रिलीज़ होने जा रही तमिल फिल्म दरबार भी हिंदी में रिलीज़ की जायेगी। कन्नड़ फिल्म केजीएफ़ चैप्टर १ ने शाहरुख़ खान की फिल्म जीरो तक को पानी पिला दिया। वहीँ कमल हासन की तमिल फिल्म विश्वरूपम के हिंदी डब संस्करण विश्वरूप को भी सफलता मिली। अब उनकी फिल्म इंडियन २ भी हिंदी में रिलीज़ की जायेगी। २०१९ में, सुदीप की कन्नड़ फिल्म पहलवान और चिरंजीवी की तेलुगु फिल्म सये रा नरसिम्हा रेड्डी हिंदी में डब कर प्रदर्शित की गई। ऐसा ही ट्रेंड हिंदी फिल्मों का भी देखा गया। इस तर्ज़ पर रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण की फिल्म पद्मावत और अमिताभ बच्चन और आमिर खान की फिल्म ठग्स ऑफ़ हिंदुस्तान को तमिल और तेलुगु में डब कर रिलीज़ किया गया। सलमान खान की फिल्म दबंग ३ को भी दक्षिण की भाषाओं में डब कर रिलीज़ किया जाएगा। चालू दशक में हिंदी में डब कर प्रदर्शित फिल्मों में आइ, ईगा (मक्खी), पुली, रुद्रमादेवी, वीआईपी २, द हाउस नेक्स्ट डोर, आदि फ़िल्में हिंदी में भी रिलीज़ हुई। टीवी चैनलों पर तो दक्षिण की हिंदी में डब फ़िल्में बड़ी सफलता पाती है। 

दशक (२०१०- २०१९) की श्रेष्ठ फ़िल्में


विचारणीय दशक मेंकाफी ऐसी फ़िल्में बनी, जिन्होंने बॉक्स ऑफिस पर सफलता पाई हो या न पाई हो, कथ्य की विशेषता और भिन्नता दिखाई दी।  इन फिल्मों ने दर्शकों की सोच में बदलाव किया। फिल्मकारों को नए कथानक वाली फ़िल्में बनाने के लिए प्रेरित किया।  आइये जानते हैं दशक के हरेक साल की कुछ ऐसी ही  फिल्मों के बारे में-

२०१० में इश्क़िया- विशाल भरद्वाज ने, जब अभिषेक चौबे को निर्देशन की कमान सौंप कर इश्क़िया का निर्माण किया तो फिल्म के प्रति उत्सुकता तो पैदा हो चुकी थी।  लेकिन, विद्या बालन, नसीरुद्दीन शाह और अरशद वारसी की लम्पट अपराधी तिकड़ी में अनोखापन नज़र आया। इस फिल्म ने, महिला प्रधान फिल्मों के लिए रास्ता बना दिया।  अमिताभ बच्चन जैसे सुपरस्टार की फिल्म को मात दी।

२०१० में लव सेक्स और धोखा- निर्माता एकता कपूर ने ऑनर किलिंग, एमएमएस स्कैंडल और स्टिंग ऑपरेशन पर आधारित तीन कहानियों के निर्देशन का जिम्मा दिबाकर बनर्जी को सौंपा था।  स्टारकास्ट  में उस समय बिलकुल नए अंशुमान झा, राजकुमार राव, नुसरत भरुचा, आदि को शामिल किया गया था। इस फिल्म ने निर्माताओं के सामने छोटे बजट में बड़ी कमाई करने का रास्ता खोल दिया।

२०१० में काइट्स - निर्माता राकेश रोशन की अनुराग बासु निर्देशित फिल्म काइट्स ऎसी बड़ी फिल्म थी, जिसमे विदेशी नायिका थी। फिल्म में हृथिक रोशन और कंगना रनौत के साथ स्पेनिश एक्ट्रेस बारबरा मोरी नायिका की भूमिका में थी।  इस फिल्म को इंग्लिश और स्पेनिश भाषा में भी प्रदर्शित किया गया। काइट्स बॉक्स ऑफिस पर बड़ी फ्लॉप फिल्म साबित हुई।

२०१० में पीपली लाइव - निर्माता आमिर खान की अनुषा रिज़वी निर्देशित इस फिल्म में गाँव की दशा, न्यूज़ चैनलों की ब्रेकिंग न्यूज़ और नेताओं की कैमरापरस्ती पर व्यंग्य किया गया था। ओमकार दास मानकपूरी, नसीरुद्दीन शाह, राजपाल यादव और नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी के साथ इस फिल्म को भी सफलता मिली।

२०१० में कालो- निर्देशक विल्सन लुइस को श्रेय  जाता है कि उन्होंने भारत की पहली डेलाइट क्रीचर हॉरर फिल्म कालो का  निर्माण किया।  इस फिल्म को साउथ अफ्रीकन हॉरर फेस्टिवल २०१० में श्रेष्ठ फिल्म और छायांकन की श्रेणी में पुरस्कृत किया गया।

२०११ में नो वन किल्ड जेसिका- दिल्ली मशहूर बारबाला जेसिका लाल हत्याकांड पर, राजकुमार गुप्ता ने फिल्म नो वन किल्ड जेसिका का निर्माण किया था।  इस फिल्म को विद्या बालन और रानी मुख़र्जी  के दमदार अभिनय के कारण सराहा भी गया और बॉक्स ऑफिस पर सफलता भी मिली।  इस फिल्म ने यह साबित किया कि अगर फिल्म दमदार हो तो बॉलीवुड की कुख्यात फर्स्ट फ्राइडे जिंक्स कोई मायने नहीं रखती।

२०११ में तनु वेड्स मनु- कंगना रनौत के ज़बरदस्त अभिनय और माधवन के सपोर्टिंग अभिनय वाली कानपूर की लड़की और लंदन के दूल्हे के बीच धीरे धीरे पनपे रोमांस की फिल्म तनु वेड्स मनु को  दर्शकों ने खूब पसंद किया।  उस समय तक स्ट्रेंजरस और थोड़ी लाइफ थोड़ा मैजिक जैसी फ्लॉप फिल्मों के निर्देशक माने जाने वाले आनंद एल राय यकायक बड़े निर्देशक बन गए।  इस फिल्म को जर्मन भाषा में डब किया गया और कई भारतीय भाषाओं में रीमेक किया गया।

२०११ में रा.वन- अभिनेता शाहरुख़ खान को इसका श्रेय तो दिया ही जाना चाहिए कि उन्होंने भारत की पहली सुपरहीरो फिल्म बनाने में १३० करोड़ झोंक दिए।  लेकिन, अगर वह एक अच्छी कथा-पटकथा लिखवा कर फिल्म बनाते तो दर्शकों को अवेंजर्स फिल्मों का इंतज़ार न करना पड़ता।  अनुभव सिन्हा की कचरा कहानी और कल्पनाहीन निर्देशन ने फिल्म को ऊबाऊ बना दिया।

२०११ में द डर्टी पिक्चर- साउथ की एक सी ग्रेड पोर्न एक्ट्रेस सिल्क स्मिता पर मिलन लुथरिया की फिल्म द डर्टी पिक्चर ने पूरे देश के दर्शकों को अपील किया।  इश्क़िया और नो वन किल्ड जेसिका के बाद विद्या बालन ने खुद को ऐसी एक्ट्रेस साबित कर दिया, जो अपने कन्धों पर फिल्म सम्हाल सकती है।

२०१२ में विक्की डोनर- शूजित सरकार निर्देशित फिल्म विक्की डोनर ने जॉन अब्राहम को बतौर निर्माता और आयुष्मान खुराना को बतौर एक्टर बॉलीवुड में स्थापित कर दिया।  स्पर्म डोनर की इस कथानक का अनूठापन दर्शकों को भा गया। फिल्म निर्माताओं को भी समाज के अंदर से इस प्रकार के विषय ढूंढ कर फिल्म बनाने के लिए प्रेरित किया।

२०१२ में गैंग्स ऑफ़ वासेपुर- निर्देशक अनुराग कश्यप की क्राइम थ्रिलर फिल्म गैंग्स ऑफ़ वासेपुर पूर्वांचल के अपराधियों की कहानी की श्रंखला थी।  इस फिल्म से मनोज बाजपेई और पियूष मिश्रा जैसे सशक्त अभिनेताओं के सामने नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी, ऋचा चड्डा, हुमा कुरैशी, आदि को चमकने का मौका मिला।

२०१२ में बर्फी- निर्देशक अनुराग बासु की रोमांस कॉमेडी फिल्म बर्फी के गूंगे बहरे बर्फी, एक खूबसूरत लड़की और ऑटिस्टिक दोस्त की अनोखी प्रेम कहानी को रणबीर कपूर, इलीना डिक्रूज़ और प्रियंका चोपड़ा के ज़रिये कुछ इतनी खूबसूरती से कहा गया था कि दर्शक सुधबुध खो बैठे। यह फिल्म ऑस्कर पुरस्कारों में भारतीय प्रविष्टि के तौर पर भेजी गई थी।

२०१२ में ओएमजी ओह माय गॉड- गुजराती नाटक पर आधारित उमेश शुक्ल निर्देशित फिल्म ओएमजी ओह माय गॉड में धर्म के पाखण्ड पर चोट तो की गई थी, लेकिन ईश्वर के अस्तित्व को नकारा नहीं गया था।  अक्षय कुमार, मिथुन चक्रवर्ती और परेश रावल के सशक्त अभिनय से  सजी इस फिल्म ने दूसरे निर्माताओं को ऐसे विषय पर फिल्म बनाने के लिए प्रेरित किया। 

२०१२ में इंग्लिस विंग्लिश- एक गृहणी के अपने इंग्लिश न जानने की कमजोरी के बावजूद विदेश में तमाम कठिनाइयों का दिलचस्प चित्रण श्रीदेवी के अभिनय के कारण इंग्लिश विंग्लिश को दर्शकों की पसंदीदा फिल्म बना गया।

२०१३ में जॉली एलएलबी- कोर्ट-कचहरी, न्याय व्यस्त और बड़े वकीलों की दबंगई पर सुभाष कपूर का व्यंग्य जॉली एलएलबी दर्शकों को भा गया।  अरशद वारसी की यह सोलो फिल्म ज़बरदस्त हिट हुई।

२०१३ में रांझना- कोई सामान्य सी प्रेम कथा, ज़बरदस्त अभिनय के बलबूते बॉक्स ऑफिस पर हिट होती ही है, एक साधारण शक्लसूरत के एक्टर को बॉलीवुड  दर्शकों का पसंदीदा हीरो भी बना देती है। आनंद एल राय निर्देशित, साउथ के सुपरस्टार धनुष की फिल्म रांझणा  इसका प्रमाण थी।

२०१३ में एबीसीडी- फालतू फिल्म से डेब्यू करने वाले निर्देशक रेमो डिसूज़ा की इस डांस फिल्म ने नई स्टारकास्ट के बावजूद कहानी और नृत्य के बल पर दर्शकों को प्रभावित किया था। इस फिल्म में प्रभुदेवा और केके मेनन केंद्रीय भूमिका में थे।

२०१४ में हाईवे- इम्तियाज़ अली की रोड मूवी हाईवे में एक  लड़की को ट्रक ड्राइवर द्वारा अपहरण किये जाने के बाद ज़िन्दगी और स्वतंत्र का मतलब समझ में आता है।  इस फिल्म में आलिया भट्ट ने बेहतरीन  अभिनय किया था।

२०१४ में क्वीन- कंगना रनौत और राजकुमार राव की मुख्य भूमिका वाली फिल्म क्वीन की कहानी  अनोखी थी।  एक लड़की, ऐन शादी के मौके पर प्रेमी द्वारा इंकार किये जाने के बाद अकेले हनीमून मनाने के लिए निकल पड़ती है।  विकास बहल के इस अनोखे हनीमून ने कंगना रनौत को श्रेष्ठ अभिनेत्री और फिल्म को श्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार दिलवा दिया था।

२०१४ में मैरी कॉम- ओमंग कुमार के निर्देशन और प्रियंका चोपड़ा के क्लास अभिनय के फलस्वरूप मणिपुर की बॉक्सर मैरी कॉम  के जीवन को पूरे देश से परिचित करा दिया।  इस फिल्म के बाद फीमेल सेंट्रिक स्पोर्ट्स  फिल्मों का सिलसिला बन गया।

२०१५ में पीकू - शूजित सरकार ने साबित कर दिया कि वह टैक्सी पर सफर कर रहे एक बाप, बेटी और टैक्सी ड्राइवर के बीच की आपसी नोकझोंक के बूते मनोरंजक फिल्म में बदल सकते हैं।  इस फिल्म के लिए अमिताभ बच्चन को  राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था।

२०१५ में मांझी द माउंटेनमैन- गया बिहार के एक गांव के माउंटेनमैन के नाम से मशहूर दशरथ मांझी की अकेले बूते पर पहाड़ काट कर रास्ता बनाने की कहानी को केतन मेहता के निर्देशन में नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी के बेहतरीन अभिनय ने पूरी दुनिया में मशहूर कर दिया।

२०१६ में नीरजा - १९८६ में आतंकवादियों द्वारा एक जहाज का अपहरण किये जाने और उस जहाज एयरहोस्टेस नीरजा भनोट के ३५९ यात्रियों की जान बचाने की साहसिक कहानी का चित्रण निर्देशक राम माधवानी की फिल्म नीरजा में हुआ था।  इस फिल्म में मुख्य  करने वाले एक्ट्रेस सोनम कपूर का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में विशेष उल्लेख किया गया था।

२०१६ में पिंक- निर्देशक अनिरुद्ध रॉय चौधरी की फिल्म पिंक यह स्थापित करती थी कि अगर लड़की की मर्जी नहीं है तो उस पर किसी काम को करने  के लिए दबाव नहीं डाला जा सकता।  यानि न तो न ! इस फिल्म में अमिताभ बच्चन और तापसी पन्नू की जोड़ी  उभर कर आई थी।

२०१७ में हिंदी मीडियम - साकेत चौधरी की इस फिल्म में मध्यम वर्ग में अपने बच्चों को इंग्लिश मीडियम के स्कूल में पढ़ाने के लिए सभी हथकंडे अपनाने का बढ़िया चित्रण हुआ था।  इस फिल्म में इरफ़ान खान के साथ पाकिस्तान की अभिनेत्री सबा कमर ने सधा हुआ अभिनय किया था।

२०१७ में जग्गा जासूस- रणबीर कपूर और कैटरीना कैफ अभिनीत तथा अनुराग बासु निर्देशित फिल्म जग्गा जासूस फ्लॉप हुई थी। लेकिन, यह फिल्म बच्चों के मनोरंजन कर पाने में सफल होती थी।

२०१७ में तुम्हारी सुलु-  एक गृहणी स्वावलम्बन के लिए रेडियो जॉकी का काम करने लगती है।  लेकिन, इस पेशे के कारण पैदा हुई जटिलताओं से वह किस प्रकार से अपने पति और परिवार के सहारे पार करती है, इसका बढ़िया चित्रण फिल्म तुम्हारी सुलु में हुआ था।  विद्या बालन ने एक बार फिर साबित कर दिया था कि नायिका प्रधान फिल्मों के लिए उनसे बढ़िया कोई एक्ट्रेस नहीं।

२०१८ में रेड- राज कुमार गुप्ता और अजय देवगन की जोड़ी बेहद प्रभावशाली साबित होती थी, सूखे विषय एक इनकम टैक्स रेड पर केंद्रित फिल्म रेड में। फिल्म निर्देशक, लेखक और अभिनेता की सफलता थी।  सभी एक्टरों ने अच्छा अभिनय किया था।

२०१८ में सुई धागा- शरत कटारिया ने एक दरजी (वरुण धवन) और एक कढ़ाई-बुनाई करने वाली (अनुष्का शर्मा) के परस्पर प्रेम, विश्वास और समर्पण के जरिये उनके आत्मनिर्भर होने की कहानी का बढ़िया चित्रण सुई धागा से किया था।

२०१८ में बधाई हो - निर्देशक अमित रविंद्रनाथ शर्मा की फिल्म बधाई हो मध्यम वर्गीय लोगों के बीच एक अधेड़ महिला के यकायक माँ बनने की खबर से पैदा सनसनी का हास्यास्पद चित्रण करती थी। इस फिल्म में आयुष्मान खुराना ने इस जोड़े के जवान बेटे की भूमिका की थी।  फिल्म की जान नीना गुप्ता और गजराज राव की जोड़ी थी।

२०१९ में उरी द सर्जिकल स्ट्राइक- युद्ध के विषय पर देशभक्तिपूर्ण फिल्म बनाई जाए तो दर्शक ज़रूर मिलेंगे।  विक्की कौशल की फिल्म उरी की बड़ी सफलता इसे प्रमाणित करती थी। 

२०१९ में द ताशकंद फाइल्स- भारत के द्वितीय प्रधान मंत्री लाल बहादुर शास्त्री की ताशकंद में आकस्मिक और रहस्यपूर्ण मौत की पड़ताल करती विवेक अग्निहोत्री की  फिल्म द ताशकंद फाइल्स गहरी रिसर्च, ईमानदार कोशिश और उपयुक्त चरित्र चित्रण के कारण दर्शकों की पसंदीदा फिल्म साबित हुई।  यह फिल्म २०१९ की स्लीपर हिट फिल्मों में शुमार है।

२०१९ में सुपर ३०- बिहार के गणितज्ञ आनंद कुमार पर विकास बहल की बायोपिक फिल्म सुपर ३० अभिनेता हृथिक रोशन के उत्कृष्ट अभिनय की बदौलत दर्शकों की पसंदीदा बन गई।

राष्ट्रीय सहारा १५ दिसम्बर २०१९ (बॉलीवुड राउंडअप २०१०-२०१९)





Saturday, 14 December 2019

विनीत कुमार से प्रेरित हुई उनकी बहन, जीता गोल्ड मेडल



अभिनेता विनीत कुमार के अभिनय का जुनून ही था कि उन्होंने डॉक्टर की नौकरी छोड़कर एक अभिनेता बनने के अपने सपने को पूरा करने का फैसला लिया। मुक्काबाज़ से उन्हें बॉलीवुड में पहला बड़ा ब्रेक मिला। इस फिल्म मुक्केबाज़ में उनके काल्पनिक बॉक्सर किरदार और असल ज़िन्दगी के सफर से हज़ारो युवा प्रेरित हुए। 

लेकिन उन्हें इस बात का अंदाज़ा ही नहीं था कि वह खुद उनकी बहन को प्रेरित कर रहे हैं। विनीत की बहन तृप्ति सिंह ने हाल ही में मलेशिया में हुए एशिया मास्टर्स एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में भारत की तरफ से १०० मीटर बाधा दौड़ में गोल्ड मेडल जीता है। 

अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए विनीत ने तृप्ति की तस्वीर शेयर की और ट्वीट करते हुए लिखा, "उसने मुक्काबाज़ देखा और मुझसे कहा, "भईया आप कर सकते हैं तो मैं भी कर सकती हूं।"

तृप्ति, शादी और अपनी बेटी के जन्मने के बाद मैदान पर उतरी। एक दशक से अधिक समय लगा और और तृप्ति ने मलेशिया में मास्टर्स एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में भारत की तरफ से 100 मीटर बाधा दौड़ में गोल्ड मेडल जीत लिया।