Wednesday, 30 September 2015

'एक रुका हुआ फैसला' सुनाने बैठे '१२ एंग्री मेन'

रेगीनाल्ड रोज ने एक ड्रामा लिखा था ट्वेल्व एंग्री मेन।  इस ड्रामे को १९५४ में टेलीप्ले के रूप में स्टूडियो वन द्वारा टेलीकास्ट किया गया था।  अगले ही साल इसे फीचर फिल्म के रूप में लिखा गया और १९५७ में इस पर एक फिल्म '१२ एंग्री मेन' बनाई गई।  इस फिल्म का डायरेक्शन सिडनी लूमेट ने किया था।  हेनरी फोंडा मुख्य भूमिका में थे।  '१२ एंग्री मेन' ऑस्कर पुरस्कारों की बेस्ट डायरेक्टर, बेस्ट पिक्चर और बेस्ट राइटिंग ऑफ़ अडाप्टेड स्क्रीनप्ले की केटेगरी में नॉमिनेट की गई।   फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर भी अच्छी सफलता मिली।  ३.४० लाख डॉलर में बनी इस फिल्म ने दस लाख डॉलर का बिज़नेस किया।  इस फिल्म की खासियत थी इसकी कहानी और एक कमरे में फिल्मांकन।  ९६ मिनट लम्बी इस फिल्म के केवल तीन मिनट के सीन ही कमरे के बाहर से थे।  इनमे से एक सीन कोर्ट रूम के बाहर का, एक जज का रिटायरिंग रूम और तीसरा ट्रायल रूम से सटे वाशरूम का था।  फिल्म में १२ सदस्यों की जूरी को एक मत से यह फैसला करना है कि अपराधी दोषी है या निर्दोष है।  इस फिल्म में किसी करैक्टर का भी नाम नहीं लिया गया था।  जर्मन टेलीविज़न चैनल जेडडीएफ ने इसका रूपांतरण प्रसारित किया।  एमजीएम ने १९९७ से इसी टाइटल के साथ फिल्म का टेलीविज़न रीमेक किया। '१३ एंग्री मेन' को कई भाषाओँ में अनुवादित कर, कई माध्यमों से प्रसारित किया गया।  इस फिल्म को रशियन और लेबनानी फिल्मकारों द्वारा भी फिल्म और डॉक्यूमेंट्री के रूप में दिखाया गया।   १२ एंग्री मेन का भारतीय सिनेमा के लिहाज़ से महत्व इस लिए है कि इस फिल्म पर बासु चटर्जी ने एक कोर्ट रूम ड्रामा फिल्म 'एक रुका हुआ फैसला' का निर्माण किया।  फिल्म की पटकथा रंजित कपूर के साथ खुद बासु चटर्जी ने लिखी थी।  'एक रुका हुआ फैसला' में जूरी मेंबर के रूप में दीपक क़ाज़िर, अमिताभ श्रीवास्तव, पंकज कपूर, एस एम ज़हीर, सुभाष उद्गाता, हेमंत मिश्रा, एम के रैना, के के रैना, अन्नू कपूर, सुबिराज, शैलेन्द्र गोयल और अज़ीज़ कुरैशी जैसे रंगमंच के सशक्त अभिनेता थे।  हिंदी रीमेक ११७ मिनट का था।  लेकिन, दर्शक एक कमरे में बैठे इन जूरी सदस्यों की भावनाओ,  वाद-विवाद, उत्तेजना को सांस रोक कर देख रहे थे। एक रुका हुआ फैसला को इतना प्रभावशाली इसके सक्षम एक्टरों ने बनाया ही था, बासु चटर्जी की लेखनी और कल्पनाशील निर्देशन ने भी फिल्म को उकताऊ होने से बचाया था।  पंकज कपूर इस फिल्म की जान थे।  फिल्म को इतना प्रभावशाली बनाने में इसके एडिटर कमल ए सहगल की धारदार कैंची की सराहना करनी चाहिए।  उन्होंने इस फिल्म की गति को शिथिल होने ही नहीं दिया था।  यहाँ एक बात।  '१२ एंग्री मेन' अमेरिका के जुडिशल सिस्टम में जूरी सिस्टम पर थी।  लेकिन, भारत में ऐसा कोई जूरी सिस्टम नहीं था।  इसके बावजूद एक रुका हुआ फैसला दर्शको को जूरी का फैसला सुनाने देखने के लिए मज़बूर करती थी।  


क्या बॉलीवुड का कोई 'खान' है विन डीजल जितना ताक़तवर !

क्या विन डीजल 'फ़ास्ट एंड फ्यूरियस' सीरीज की फिल्मों के बिग डैडी हैं ! विन डीजल से पूछिए तो वह इस सीरीज की कास्ट एंड क्रू को अपने परिवार जैसा बताते हैं।  लेकिन, एक दिन जब वह खुद कह दें कि वह इस फ्रैंचाइज़ी के बिग डैडी हैं तो मानना ही पड़ेगा।  आम तौर पर विन डीजल 'फ़ास्ट एंड फ्यूरियस' सीरीज की फिल्मों की शूटिंग में दखल देते नहीं पाये जाते। २००१ में शुरू इस सीरीज की पहली फिल्म 'द फ़ास्ट एंड द फ्यूरियस' करने के बाद विन डीजल इसके सीक्वल '२ फास्ट २  फ्यूरियस' से बाहर निकल गए।  'द फ़ास्ट एंड द फ्यूरियस: टोक्यो ड्रिफ्ट' में उनका कैमिया था। इसके बाद चौथी फ़ास्ट एंड फ्यूरियस फिल्म से वह इस सीरीज की फिल्मों के स्थाई सदस्य बन गए।  फ़ास्ट एंड फ्यूरियस सीरीज की चौथी फिल्म के लिए विन डीजल को बुलाना यूनिवर्सल स्टूडियो की मज़बूरी भी थी और विन डीजल की भी।  विन डीजल और डायरेक्टर डेविड ट्वह्य यूनिवर्सल से 'द क्रॉनिकल्स ऑफ़ रिडिक' के अधिकार खरीदना चाहते थी।  इसीलिए, विन डीजल आखिरी मौके पर टोक्यो ड्रिफ्ट में शामिल हुए और कैमिया किया।  चौथी फ़ास्ट एंड फ्यूरियस फिल्म से विन डीजल इस सीरीज के स्थाई सदस्य बन गए।  इसी के साथ ही विन डीजल पर सीरीज की फिल्मों के निर्माण के दौरान हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया जाने लगा।  एक मैगज़ीन ने तो यहाँ तक आरोप लगाया कि फुयूरियस ७ की शूट के दौरान विन डीजल डायरेक्टर जेम्स वान के लिए सर दर्द बने रहे। वह फिल्म के छोटे छोटे डिटेल देखते।  किसी सीन पर देर रात को डायरेक्टर जेम्स वान से डिस्कशन करने लगते।  पॉल वॉकर की कार क्रैश में मौत हो जाने के बाद फ्यूरियस ७ की शूटिंग कुछ समय तक रुकी रही।  इसी दौरान जेम्स वान ने तय कर लिया कि वह सीरीज की आठवी फिल्म डायरेक्ट नहीं करेंगे।  हालाँकि, वान को मोटा पारिश्रमिक देने का लालच दिया गया, लेकिन वान ने फ्यूरियस ७ की शूटिंग के दौरान उनके स्वास्थ्य को हुए नुक्सान का हवाला देते हुए फ़ास्ट ८ डायरेक्ट करने से मना कर दिया। विन डीजल ने मैगज़ीन के आरोपों पर कोई सीधा जवाब नहीं दिया। फ्यूरियस ७ की अप्रत्याशित और अभूतपूर्व सफलता के बाद विन डीजल यूनिवर्सल स्टूडियोज के लिए अपरिहार्य हैं। फ्यूरियस ७ ने वर्ल्डवाइड १.५ बिलियन डॉलर कमा लिए हैं। फ्यूरियस ७ की बड़ी सफलता विन डीजल के ज़रुरत से ज़्यादा इन्वॉल्वमेंट को सही ठहरा रही थी। यही कारण था कि फ़ास्ट ८ के लिए सबसे पहले विन डीजल के नाम का ही ऐलान हुआ।  विन डीजल ने ही सोशल साइट्स पर आठवी फिल्म के टाइटल का ऐलान किया।  विन डीजल पर लगे आरोपों पर प्रवक्ता द्वारा इतनी सफाई ज़रूर दी गई कि विन डीजल 'फ़ास्ट ८' के डायरेक्टर की खोज में जुटे हुए हैं।   संभव है कि डायरेक्टर की कुर्सी पर विन डीजल बैठ कर खुद के अलावा जैसन स्टेथम, ड्वेन जॉनसन, कोडी वॉकर (पॉल वॉकर का भाई, जिसने पॉल के मरने के बाद शेष फिल्म पूरी करवाई), आदि को निर्देशित करते नज़र आये।  फ़ास्ट ८ की रिलीज़ अप्रैल २०१७ के लिए तय कर दी गई है।  ऐसे में यूनिवर्सल स्टूडियोज के लिए विन डीजल की बात मानना मज़बूरी भी होगी।  क्या बॉलीवुड में कोई खान है विन डीजल जितना 'बिग डैडी' !







म्यूजिक वीडियो में गुलशन कुमार की बेटी

म्यूजिक लेबल टी-सीरीज के संस्थापक गुलशन कुमार की दो बेटियों में बड़ी तुलसी कुमार प्लेबैक सिंगर हैं। उनकी छोटी बेटी खुशाली कुमार फैशन डिजाइनिंग के क्षेत्र में गई।  अपना अलग लेबल बनाया।  अब वह एक बिलकुल नए अवतार में नज़र आने जा रही हैं।  वह १९९१ में रिलीज़ आमिर खान की फिल्म 'दिल है कि मानता नहीं' के गुलशन कुमार को प्रिय गीत 'मैनु इश्क़ दा लाग्या रोग' के म्यूजिक वीडियो में बिलकुल ग्लैमरस अंदाज़ में नज़र आएंगी।  म्यूजिक वीडियो में काम करने का आईडिया खुशाली के भाई और टी-सीरीज के मालिक भूषण कुमार का था।  भूषण कुमार आजकल गुलशन कुमार को प्रिय कई गीतों को नए अंदाज़ और धुन में समेत कर म्यूजिक वीडियो के साथ पेश कर रहे हैं। पिछले दिनों, गुलशन कुमार की याद में उनका एक अन्य पसंदीदा गीत 'धीरे धीरे से मेरी ज़िंदगी में आना' यो यो हनी सिंह द्वारा रीक्रिएट कर ह्रितिक रोशन और सोनम कपूर पर फिल्माया गया था।  'मैनु इश्क़ दा लाग्या रोग' इसी की कड़ी में हैं।  इस गीत का वीडियो खुशाली ने ही डिज़ाइन किया है।  खुशाली पर फिल्माए जाने वाले इस गीत को बड़ी बहन तुलसी कुमार ने गाया है।  इस वीडियो की शूटिंग लगभग पूरी हो चुकी है।

यादें : वर्ल्ड'स फर्स्ट वन-एक्टर मूवी

१९६४ में रिलीज़ फिल्म 'यादें' का नाम गिनेस बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड्स में सबसे कम एक्टरों वाली फिल्म के रूप में दर्ज़ है।  इस फिल्म का निर्माण सुनील दत्त की फिल्म निर्माण कंपनी अजंता आर्ट्स के अंतर्गत किया गया था।  इस फिल्म का एक मात्र करैक्टर अनिल सुनील दत्त का ही था।  इस ११३ मिनट लम्बी फिल्म का निर्देशन सुनील दत्त ने ही किया था।  'यादें' सुनील दत्त की बतौर निर्देशक पहली फिल्म थी।  इस फिल्म के बाद सुनील दत्त ने बतौर निर्माता निर्देशक मुझे जीने दो, ये रास्ते हैं प्यार के, रेशमा और शेरा, मन का मीत, रॉकी, नहले पे दहला, दर्द का रिश्ता और ये आग कब बुझेगी बनाई।  मुझे जीने दो डाकू समस्या पर फिल्म थी।  ये रास्ते हैं
प्यार के मशहूर नानावटी कांड पर फिल्म थी।  सुनील दत्त ने अपने भाई सोम दत्त को हीरो बनाने के लिए मन का मीत और बेटे संजय दत्त को हीरो बनाने के लिए 'रॉकी' का निर्माण किया।  मुझे जीने दो, रेशमा और शेरा और ये रास्ते  है प्यार के जैसी फिल्मों ने उन्हें जो नुक्सान दिया था, उसकी भरपाई के लिए ही उन्होंने मन का मीत जैसी फिल्म का निर्माण किया।  इस फिल्म में नायिका लीना चंद्रावरकर ने अंग प्रदर्शन के तमाम कीर्तिमान तोड़ दिए थे।  इसीलिए फिल्म समीक्षकों ने  इस फिल्म को 'मैन का मीट' बताया।  अब यह बात दीगर है कि सुनील दत्त ने बाद में समीक्षकों की इन आलोचनाओ का जवाब  कैंसर पर फिल्म दर्द का रिश्ता और दहेज़ हत्या पर ये आग कब बुझेगी बना कर दिया ।  लेकिन, सुनील दत्त आज भी अद्वितीय हैं अपनी एकल एक्टर फिल्म 'यादें' के कारण।  यादें पूरी तरह से प्रयोगात्मक फिल्म थी।  सुनील दत्त ने कमर्शियल फिल्मों के दौर में ऐसा जोखिम उठाने का साहस किया।  यादें वर्णनात्मक फिल्म थी। फिल्म को संवादों और संगीत के ज़रिये आगे बढ़ाया गया था। फिल्म का एकल किरदार अनिल देर रात घर आता है।  वह घर में सन्नाटा पाता है। वह अपने बड़े से घर के हर कमरे, रसोई, डाइनिंग हॉल, आदि में देखता है। उसकी पत्नी और बच्चा घर में नहीं है।  उसे लगता है कि उन्होंने (पत्नी और बच्चे ने) उसे छोड़ दिया।  क्योंकि, रात की पार्टी के बाद, सुबह ही किसी बात पर अनिल का अपनी पत्नी से बड़ा झगड़ा हुआ था।  शायद बीवी छोड़ गई थी अनिल को।  यह सोच कर अनिल कुर्सी पर पसर जाता है।  अब घेर लेती हों उसे यादें।  कैसे, कब क्या हुआ था ! वह एक एक
कर सोचता जाता है।  कभी वह खुद से बडबडाता है, घटनाओं को याद करते हुए उसके चहरे पर ख़ुशी, दुःख, क्रोध, निराशा के भाव आते जाते हैं।  उसे याद आता है पत्नी से आज का झगड़ा।  वह महसूस करता है कि इसमे उसी की गलती थी।  वह खुद को नुक्सान पहुंचाने के लिए तैयार हो जाता है।  तभी बाहर से बीवी की आवाज़ आती है, जो उसे ऐसा करने से रोकती है ।  अनिल बाहर की रोशनी से खिड़की के परदे पर गिर रही पत्नी और बच्चे की परछाई को देखता है ।  वह खुश हो जाता  है।  पत्नी और बच्चा वापस आ गए।  इसी के साथ फिल्म ख़त्म हो जाती है।  फिल्म में निर्देशक सुनील दत्त ने अपनी बात कहने के लिए संवादों, ध्वनि और प्रकाश का बढ़िया उपयोग किया था। अख्तर उल ईमान के संवाद, वसंत देसाई का संगीत (खास तौर पर लता मंगेशकर का गाया 'देखा है सपना कोई' गीत) तथा एस रामचन्द्र का छायांकन और एस्सा एम सुरतवाला की साउंड मिक्सिंग फिल्म की जान थी।  सुनील दत्त ने बेहतरीन अभिनय किया था। पूरी  फिल्म में सुनील दत्त के अलावा फिल्म के अंत में दो परछाइयाँ ही पत्नी और बेटे की मौजूदगी का एहसास कराती थी। यह परछाइयाँ सुनील दत्त की रियल लाइफ में पत्नी नर्गिस और बेटे संजय दत्त की थी।  संजय दत्त उस समय केवल पांच साल के थे।
कुछ लोगों का कहना था कि यादें परिवार के होते हुए भी सुनील दत्त के एकाकी  जीवन का परिणाम थी।  सुनील दत्त की नर्गिस से शादी १९५८ में फिल्म 'मदर इंडिया' की रिलीज़ के ठीक बाद ही हो गई थी। लेकिन, सुनील दत्त के मुकाबले नर्गिस बड़ी एक्ट्रेस थी।  हालाँकि, नर्गिस ने शादी के बाद फिल्मों में काम करना छोड़ दिया।  लेकिन, वह सोशल वर्क करती थी।  उनका राजनीतिक जीवन भी था। भारत के प्रथम प्रधान मंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू से उनकी नज़दीकियां थी। शायद इसी वजह से सुनील दत्त ने एकाकीपन महसूस किया हो। बताते हैं कि सुनील दत्त एक बार अपने एकाकीपन से ऊब कर अपनी पत्नी, बेटे संजय और बेटियों नम्रता और
प्रिया को साथ लेकर कही घूमने गए थे। वापस लौटते समय उनके दिमाग में यादें की कहानी उभर आई। श्वेत-श्याम फिल्म 'यादें' को विदेशों में 'मेमोरीज' टाइटल से रिलीज़ किया गया था। यादें के लिए एस रामचन्द्र को बेस्ट सिनेमैटोग्राफर और एस्सा एम सुरतवाला को बेस्ट साउंड रिकार्डिस्ट का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला।  लेकिन, तत्कालीन दर्शकों को सुनील दत्त का यह वर्ल्ड में पहला और इकलौता प्रयास पसंद नहीं आया।  फिल्म बॉक्स  ऑफिस पर बुरी तरह से असफल हुई। सुनील दत्त की श्रेष्ठ कल्पनाशीलता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने एक पार्टी सीक्वेंस बैलून्स के सहारे क्रिएट कर दिया था। बच्चे के खिलौने और पत्नी की पेंटिंग के सहारे वह कहानी कह रहे थे। सुनील दत्त जानते थे कि वह क्या करने जा रहे हैं।  इसीलिए  फिल्म के क्रेडिट में गर्व के साथ लिखा गया था- वर्ल्ड'स फर्स्ट वन-एक्टर मूवी। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि फिल्म को वन-एक्टर मूवी नहीं कहा जा सकता, क्योंकि फिल्म के लिए नर्गिस और संजय दत्त की परछाई और आवाज़ का इस्तेमाल किया गया था।



जब न्यू ज़ीलैण्ड ने पावर रेंजर्स पर रोक लगाई

१९९४ में न्यूजीलैंड ब्राडकास्टिंग स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ने माइटी मॉर्फिन पावर रेंजर्स पर रोक लगाने का निर्णय लिया।  यह निर्णय उस शिकायत पर लिया गया, जिसमे कहा गया था कि पावर रेंजर्स उनके बच्चों को सीखा रहे हैं कि किसी भी समस्या का समाधान हिंसा ही है।  अभिभावकों को लगता था कि इस शो को देखते हुए बच्चों के स्वभाव आक्रामकता बढ़ रही है।  जिस समय यह निर्णय लिया गया उस समय तक पावर रेंजर्स का एक पूरा सीजन हो चुका था तथा दूसरा सीजन का मध्य चल रहा था।  टीवी स्टेशनों को इस शो को बीच में ही रोक देना पड़ा। इसके बाद लम्बे समय तक पावर रेंजर डीवीडी और वीडियो के द्वारा देखे गए।  यहाँ एक मज़ेदार तथ्य यह है कि पावर रेंजर्स के दो सीजन, 'पावर रेंजर्स: मिस्टिक फ़ोर्स' और 'पावर रेंजर्स : जंगल फरी' की शूटिंग न्यूजीलैंड में ही हुई थी। न्यूजीलैंड के टीवी पर पावर रेंजर पूरे १७ साल तक गायब रहे।  इसके बाद, २०११ में 'पावर रेंजर्स समुराई' के प्रसारण के साथ ही पावर रेंजर्स को टीवी पर फिर जगह मिल गई।


Tuesday, 29 September 2015

क्या चौथी बार सफल होंगे अक्षय कुमार !

साल २००२ का आखिरी तिमाही आ गई है।  २ अक्टूबर को अक्षय कुमार की एक्शन कॉमेडी फिल्म 'सिंह इज़ ब्लिंग' रिलीज़ हो रही है। फिल्म में अक्षय कुमार के को-स्टार एमी जैक्सन, के के मेनन, प्रदीप रावत, अनिल मांगे, अरफी लाम्बा, रति अग्निहोत्री कुणाल कपूर और मुरली शर्मा हैं। फिल्म में, क्रिकेटर युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह अक्षय कुमार के करैक्टर रफ़्तार सिंह के पिता का  रोल कर रहे हैं।  इस फिल्म में सनी लियॉन का कैमिया भी बताया जा रहा है। ख़ास बात यह है कि २००३ में अक्षय कुमार के साथ फिल्म 'अंदाज़' में अपने फिल्म करियर की शुरुआत करने वाली अभिनेत्री लारा दत्ता पिछली फिल्म डेविड के दो साल बाद हिंदी फिल्मों में वापसी कर रही है। अक्षय कुमार और लारा दत्ता ने लगभग एक दर्जन फ़िल्में साथ की हैं। फिल्म में शशि कपूर के बेटे कुणाल कपूर फिल्म की नायिका एमी जैक्सन के पिता के किरदार में हैं। फिल्म की तमाम शूटिंग भारत के अलावा साउथ अफ्रीका और रोमानिया में हुई है।  फिल्म का क्लाइमेक्स रोमानिया में फिल्माया गया है। सिंह इज़ ब्लिंग के निर्देशक प्रभुदेवा है, जिनके साथ अक्षय कुमारं ने राउडी राठौर जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्म दी है। क्या यह जोड़ी एक बार फिर एक ब्लॉकबस्टर फिल्म देने जा रही है ? अगर ऐसा होता है तो अक्षय कुमार की इस साल की यह चौथी सफलता होगी।  अक्षय कुमार एक ऐसा अभिनेता हैं, जो खानों की तरह साल में एक या दो फिल्मों की कसम नहीं खाते।  उनकी साल में तीन या चार फ़िल्में रिलीज़ होती रहती हैं।  इस साल भी अक्षय कुमार की तीन फ़िल्में बेबी, गब्बर इज़ बैक और ब्रदर्स रिलीज़ हो चुकी हैं।  गब्बर इज़ बैक को मामूली सफलता मिली।  बेबी और ब्रदर्स ने ८०+ करोड़ की कमाई की।  ज़ाहिर है कि अक्षय कुमार बॉक्स ऑफिस पर विश्वसनीय हैं।  उनकी फ़िल्में अपने निर्माता को नुक्सान नहीं देती।  इसीलिए वह निर्माताओं के प्रिय भी हैं।  एक्शन उनकी ताकत है।  कॉमेडी लाजवाब है।  उनकी एक्शन कॉमेडी फ़िल्में सुपर हिट होती हैं।  लेकिन, अक्षय कुमार हमेशा ही लीक से हट कर फ़िल्में देने में विश्वास करते हैं। स्पेशल २६, हॉलिडे, बेबी, गब्बर इज़ बैक और ब्रदर्स इसका प्रमाण हैं।  सिंह इज़ ब्लिंग एक्शन कॉमेडी  फिल्म है।  यह उनकी २००७ की सुपर हिट फिल्म 'सिंह इज़ किंग' की सीक्वल फिल्म नहीं। लेकिन, इस फिल्म में अक्षय कुमार फिर सिख किरदार में हैं।  अक्षय कुमार की सिख किरदार में फिल्म सिंह इज़ किंग सुपर हिट हुई थी।  क्या सिंह इज़ ब्लिंग भी बड़ी हिट फिल्म साबित होगी।  तब तो अक्षय कुमार तीन सौ करोड़ के अभिनेता तो यो ही बन जाते हैं।  

जेम्स बांड की स्पूफ थी 'ऑस्टिन पावर्स' सीरीज की फ़िल्में

अमेरिकी एक्शन-कॉमेडी फिल्म सीरीज 'ऑस्टिन पावर्स' की फ़िल्में हॉलीवुड के जासूसों जेम्स बांड, डेरेक फ्लिंट, जैसन किंग और मैट हेल्म फिल्मों की पैरोडी हुआ करती थी। इस  सीरीज में तीन फ़िल्में 'ऑस्टिन पावर्स: इंटरनेशनल मैन ऑफ़ मिस्ट्री', 'ऑस्टिन पावर्स: द स्पाई हु शैग्ड मी' और 'ऑस्टिन पावर्स इन गोल्ड मेंबर' बनाई गई। क्रमशः १९९७, १९९९ और २००२ में रिलीज़ यह फ़िल्में चिढ़ाने वाली और अपमानजनक कथानक वाली फ़िल्में थी।  इनमे सेक्स की ओवरडोज़ हुआ करती थी। इन फिल्मों का जासूस जेम्स बांड की तरह आकर्षक और खूबसूरत नहीं था। 'ऑस्टिन पावर्स' सीरीज की फिल्मों की कहानी विलेन डॉक्टर ईविल के सरकार या अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं को ब्लैकमेल कर मोटी रकम की उगाही करने के इरादों के इर्दगिर्द घूमती थी, जिन्हे पावर्स नाकाम कर देती थी। इन फिल्मों के निर्माता, लेखक और एक्टर माइक मायर्स थे। तीनों फिल्मों में मुख्य किरदार कभी नहीं बदले।  आंद्रेआना विथ ने वेरियस डांसर्स, सेठ ग्रीन ने स्कॉट ईविलमिंडी स्टर्लिंग ने फ्राउ फर्बिसिना, रॉबर्ट वैगनर ने नंबर २ और माइकल यॉर्क ने बेसिल एक्सपोसिशन भूमिका की थी।  फिल्म के निर्माता और लेखक माइक मायर्स ने हीरो ऑस्टिन पावर्स और मुख्य विलेन डॉक्टर ईविल, दोनों की ही भूमिका की थी।  माइक मायर्स के दोनों ही भूमिकाएं करने की कहानी दिलचस्प है।  यह तो पहले ही तय था कि फिल्म के हीरो यानि जासूस ऑस्टिन पावर्स माइक मायर्स ही होंगे।  डॉक्टर ईविल का किरदार के लिए जिम कैर्री को साइन किया गया था।  उस दौरान जिम कैर्री 'लिएर् लिएर्' कर रहे थे।  इस फिल्म की रीशेड्यूलिंग हो गयी। जिम को 'ऑस्टिन पावर्स' की पहली फिल्म 'इंटरनेशनल मैन ऑफ़ मिस्ट्री' छोड़नी पड़ी।  जिम के जाने के बाद निर्माता माइक मायर्स ने फिल्म की रीकास्ट  करने के बजाय खुद विग लगा कर नायक और खलनायक को अंजाम दिया।  पहली फिल्म 'ऑस्टिन पावर्स: इंटरनेशनल मैन ऑफ़ मिस्ट्री' के निर्माण में १६.५ मिलियन डॉलर खर्च हुए थे।  यह फिल्म २ मई १९९७ को रिलीज़ हुई।  फिल्म ने वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस पर ६७.६८ मिलियन डॉलर का कलेक्शन किया।  दूसरी फिल्म 'ऑस्टिन पावर्स: द स्पाई हु शैग्ड मी' ११ जून १९९९ को रिलीज़ हुई।  ३३ मिलियन डॉलर के बजट में बनी फिल्म ने वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस पर ३१२ मिलियन डॉलर का बिज़नेस किया।  आखिरी फिल्म 'ऑस्टिन पावर्स इन गोल्ड मेंबर' का बजट बढ़ कर लगभग दोगुना यानि ६६ मिलियन डॉलर हो गया था।  २६ जुलाई २००२ को रिलीज़ इस फिल्म ने वर्ल्डवाइड २९६.६५ मिलियन डॉलर का कलेक्शन किया।   



रॉबर्ट ज़ेमेकिस के प्रशंसक सर बेन किंग्सले

ब्रिटेन-भारतीय सहयोग से १९८२ में बनी रिचर्ड एटनबरो की फिल्म 'गांधी' में महात्मा गांधी की भूमिका से सर बेन किंग्सले भारतीय दर्शकों द्वारा पहचाने जाने लगे। इस महान नेता के किरदार को बेहद संजीदा तरह से जीने  के लिए उन्हें ऑस्कर पुरूस्कार भी मिला था। इसके बाद बेन किंग्सले कई हॉलीवुड फिल्मों में नज़र आये। एचबीओ की फ़िल्म 'मर्डर अमंग अस' (१९८९)  में नाजी शिकारी साइमन विज़ंथल का उनका किरदार भी काफी लोकप्रिय हुआ। अब बेन किंग्सले रोबर्ट ज़ेमेकिस की महाकाव्य जैसी नयी 3डी फ़िल्म 'द वाक' में रुडोल्फ ओमनकोव्स्की उर्फ़ पापा रूडी का किरदार निभाते दिखेंगे । रूडी वह व्यक्ति है, जिसने फ्रेंच कलाकार फिल्लिप पेटिट को ऊँचे तारों पर चलना सिखाया था। फिलिप ने १९७४ में ट्विन टावर्स के बीच खींचे तार पर चल कर हैरतअंगेज कारनामा कर दिखाया । सर बेन किंग्सले ने अपने हाल ही के साक्षात्कार में अपने  इस फिल्म से जुड़ने के बारे में बताया,"मुझे इस किरदार को निभाने के लिए रोबर्ट ज़ेमेकिस ने आमंत्रण दिया था । उनका काम करने का एक अलग ही तरीका है। वह मुझे बहुत पसंद है। मैं हमेशा से ही उनका प्रशंसक था, लेकिन कभी उनके साथ काम करने का अवसर प्राप्त नहीं कर पाया था । जब मैंने इस फ़िल्म की स्क्रिप्ट पढ़ी तो मुझे लगा कि वाकई यह बेहद मजबूत तरीके से लिखी एक दमदार स्क्रिप्ट है । मैं महान पेटिट से पहले भी मिल चुका था, जब मैंने उनकी 'मैन ऑन वायर' देखी थी।" यहाँ बताते चले कि मैन ऑन वायर जॉन मार्श द्वारा २००८ में बनायीं गयी डॉक्यूमेंट्री है। जिसे २००९ में बेस्ट डाक्यूमेंट्री के लिए ऑस्कर भी मिला था । 'द वायर' सोनी पिक्चर्स इंडिया द्वारा ९ अक्टूबर को भारत में रिलीज की जा रही है। 

आशा भोंसले के बेटे का निधन

मशहूर गायिका आशा भोंसले के पुत्र हेमंत भोसले (६६ साल) रविवार की देर रात कैंसर से अपनी लम्बी लड़ाई हार गए।  इसके साथ ही ८२ साल की आशा भोंसले को ज़बरदस्त झटका लगा।  कुछ साल पहले ही उनकी बेटी वर्षा ने खुद को गोली मार कर आत्महत्या कर ली थी।  निश्चित रूप से हेमंत के यो चले जाने से बॉलीवुड को ख़ास फर्क नहीं पड़ा होगा। क्योंकि, पिछले १८ सालों से वह गुमनामी की ज़िन्दगी जीते हुए कैंसर और घरेलु परेशानियों से लड़ रहे थे।  आज जबकि हेमंत नहीं रहे, ऐसे समय में याद आती हैं, हेमंत भोंसले द्वारा संगीतबद्ध फ़िल्में।  हेमंत के संगीत से सजी अमोल पालेकर और ज़ाहिरा की मुख्य भूमिका वाली फिल्म 'टैक्सी टैक्सी' रिलीज़ हुई थी।  इस फिल्म में उनके गीतों 'हमें तो आज इस बात पर', 'लाई कहाँ हैं ज़िन्दगी' और 'जीवन में हमसफ़र' जैसे गीत लोकप्रिय हुए थे।  इन सभी गीतों को उनकी माँ आशा भोंसले और किशोर कुमार ने गाया था। लाइ कहाँ ज़िन्दगी में लता मंगेशकर और आशा भोंसले एक साथ गा रहे थे। हेमंत का करियर जमाने के लिए आशा भोंसले ने हरचंद कोशिश की थी।  लेकिन, उस दौर में राहुल देव बर्मन यानि पंचमदा के संगीत का नशा बॉलीवुड पर छाया हुआ था।  हेमंत भोंसले २ टीवी फिल्मों तेरी मेरी कहानी और धरती आकाश तथा हिंदी की ११ फिल्मों टैक्सी टैक्सी के अलावा दामाद, अनपढ़, नज़राना प्यार का, श्रद्धांजलि, बैरिस्टर, राजा जोगी, बच्चों का खेल, बंधन कच्चे धागों का, धरम शत्रु और आखिरी संघर्ष का संगीत देने के बाद इंडस्ट्री से बाहर हो गए।  आशा भोंसले की ज़िंदगी की यह त्रासदी है कि जब २०१२ में वह सिंगापुर में शो कर रही थी, तब उन्हें अपनी बेटी वर्षा के आत्महत्या कर लेने की खबर मिली थी। हेमंत की मौत की खबर भी उन्हें सिंगापुर के शो के दौरान ही मिली।

बॉक्स ऑफिस पर क्यों 'जवानी फिर नहीं आनी' !

आइये याद करते हैं २६ अगस्त २००५ को रिलीज़ अनीस बज़्मी निर्देशित फिल्म 'नो एंट्री' की। दो दोस्त किशन (अनिल कपूर) और शेखर (फरदीन खान) ।  किशन की बीवी काजल (लारा दत्ता) शक्की मिज़ाज़ है। वह हमेशा शक करती रहती है कि उसका पति बेवफा है।  जबकि किशन उसके प्रति ईमानदार है।  शेखर  एक खोजी पत्रकार संजना (सेलिना जेटली) से प्रेम करने लगता है। उधर इन दोनों का दोस्त है प्रेम यानि सलमान खान । वह पूजा (एषा देओल) से शादी शुदा है।  परन्तु यहाँ मामला उल्टा है।  प्रेम औरतबाज़ है।  जबकि पूजा उसे ईमानदार समझती है।  प्रेम किशन  को बेवफाई सिखाना चाहता है।  वह एक कॉल गर्ल बॉबी (बिपाशा बासु) को किशन को लुभाने के लिए तैयार करता है।  प्रेम देखना चाहता है कि किशन अपनी यह रिलेशनशिप छुपा सकता है या नहीं।  इस फिल्म में किरदारों की हेरफेर ने दर्शकों को खूब हंसाया था।
आइये इस कहानी में थोड़ा हेरफेर कर देते हैं।  दोस्त तीन नहीं चार हो जाते हैं। अपनी अपनी बीवियों से परेशान और डरे सैफ, शेख और परवेज़ तथा उनका तलाक़शुदा वकील दोस्त शेरी। शेरी से अपने दोस्तों की दशा देखीं नहीं जाती।  यह उन्हें ज़िंदगी का मज़ा दिलवाने के लिए बैंकाक ले जाता है।  मस्ती, ग्रैंड मस्ती, नो एंट्री, आदि न जाने कितनी हिंदी फिल्मों की घालमेल है इस कहानी में।  यह कहानी है एक पाकिस्तानी एडवेंचर कॉमेडी फिल्म 'यह जवानी फिर नहीं आनी' की। इस फिल्म को नदीम बेग ने निर्देशित किया है।  फिल्म के एक निर्माता हुमायु सईद फिल्म में सलमान खान वाला शेरी का किरदार कर रहे हैं। हम्ज़ा अली अब्बासी, वसै चौधरी और अहमद अली बट तीन दोस्तों की भूमिका में हैं।  इस फिल्म ने पाकिस्तान बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा रखा है। जवानी फिर नहीं आनी ईद वीकेंड में रिलीज़ हुई थी।  इस फिल्म ने पाकिस्तान बॉक्स ऑफिस पर हॉलीवुड-बॉलीवुड फिल्मों के रिकॉर्ड को ध्वस्त कर डाला है।  हिंदुस्तानी बॉक्स ऑफिस के लिहाज़ से जवानी फिर नहीं आनी की सोमवार तक ९.८३ करोड़ की कमाई  जीरे जैसी लग सकती है।  लेकिन, इस कमाई से जवानी फिर नही आनी ने पाकिस्तान में फ्यूरियस ७, धूम ३, वेलकम बैक, आदि को पीछे धकेल दिया है। सबसे ज़्यादा बड़े वीकेंड का रिकॉर्ड फ्यूरियस ७ के नाम था, जिसने ७.५ करोड़ का वीकेंड कलेक्शन किया था। पाकिस्तानी की ऑन लाइन  ट्रेड मैगज़ीन बॉक्स ऑफिस डिटेल के अनुसार जवानी फिर नहीं आनी ने ७.८३ करोड़ का वीकेंड कलेक्शन करके फ्यूरियस ७ से टॉप की जगह छीन ली है।  दिलचस्प तथ्य यह है कि सोमवार को भी इस फिल्म ने दो करोड़ के लगभग कलेक्शन किया था।  इस प्रकार से यह फिल्म लगातार चार दिन २ करोड़ का आंकड़ा छूने वाली फिल्म बन गई है।  इस फिल्म के सोमवार के कलेक्शन को देख कर अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि फिल्म में लॉन्ग रन की क्षमता है।  अब केवल देखने वाली बात यही है कि क्या जवानी फिर नहीं आनी २५.०५ करोड़ का लाइफ टाइम कलेक्शन कर पाएगी! जी हाँ, पाकिस्तान की सरजमीं पर सबसे ज़्यादा कमाई करने का रिकॉर्ड फ्यूरियस ७ के खाते में ही दर्ज़ है।  

Monday, 28 September 2015

फिल्म 31st अक्टूबर में सोहा में नज़र आई शर्मीला टैगोर की झलक

निर्देशक  शिवाजी लोटन  पाटिल की आगामी फिल्म 31st  अक्टूबर जो १९८४ में  दो अंगरक्षकों द्वारा  इंदिरा गांधी की हत्या पर आधारित है , जिसने पूरी तरह से देश के राजनीतिक परिदृश्य को हिलाकर रख दिया है और जिसके  कारन   एक विशेष समुदाय के प्रति  हमेशा के लिए लोगो का नजरिया बदल कर रख दिया था इस फिल्म में  सोहा अली खान और  वीरदास अहम किरदार में नज़र आएंगे।
इस फिल्म में सोहा एक अलग अवतार में नज़र आएँगी ,  लोगो  को   सोहा  में उनकी  माँ शर्मीला टैगोर की भी झलक देखने मिलेगी। इस फिल्म में सोहा एक पंजाबी हाउस वाइफ का किरदार निभा रही है, इस फिल्म में सोहा रियल लाइफ किरदार को निभा रही है, दिलचस्प बात तो यह है की सोहा ने खुद अपने किरदार को स्टाइल किया है, सोहा चाहती थी की फिल्म में उनका लुक पूरी तरह वास्तविक दिखे , इसीलिए उन्होंने अपने लुक पर पूरी बारीकी से काम किया है.   
सूत्रों का कहना है की " जब सोहा को फिल्म की कहानी सुनाई गयी थी उसी समय उन्हें बताया गया था की इस फिल्म में उनका लुक बहुत ही साधारण होगा और न ही मेकअप का इस्तेमाल किया जायेगा, जिस गाव में सोहा फिल्म की शूटिं कर रही थी वह को लोग उन्हें साड़ी में देखना चाहते थे , लोग जो उन्हें डेक रहे थे उन्हें सोहा में उनकी माँ शर्मीला टैगोर की झलक दिखाई  दे रही थी."

'बाहुबली' से ज़्यादा हैरतअंगेज है 'पुलि' के दृश्य !

इंडियन ऑडियंस के लिए, ख़ास तौर पर हिंदी फिल्म दर्शकों के लिए अक्टूबर में सिनेमाघरों में हिंदी में संवेदित की गई तमिल फिल्म 'पुलि' को देखना अभूलनीय प्रदर्शन होगा।  इस फिल्म में ख़ास हो गए पुलि में फंतासी एडवेंचर दिखाने के लिए इस्तेमाल की गई वीएफएक्स तकनीक। पुलि के वीएफएक्स कमलाकन्नन ने तैयार किये हैं।  कमलाकन्नन ने ही एसएस राजामौली की दो उत्कृष्ट तकनीक वाली फिल्मों 'मगधीरा' और 'ईगा' यानि हिंदी 'मक्खी' के वीएफएक्स तैयार किये थे।   'पुलि' की तकनीकी उत्कृष्टता साबित करने के लिए तीन फिल्मों के वीएफएक्स का ज़िक्र करना ठीक होगा।  एसएस राजामौली की फिल्म 'मक्खी' में १२०० वीएफएक्स शॉट्स थे।  मगधीरा में १६०० तक।  लेकिन, इस साल रिलीज़ और पूरी दुनिया में तहलका मचा ने वाली फिल्म 'बाहुबली' में २००० वीएफएक्स शॉट्स लिए गए थे।  'वीएफएक्स  दृश्यों के लिहाज़ से 'बाहुबली' श्रेष्ठतम फिल्म कही जा सकती है। लेकिन,  'पुलि' वीएफएक्स श्रेष्ठता के झंडे गाड़ने जा रही है।  इस फिल्म में २४०० वीएफएक्स शॉट्स का इस्तेमाल किया गया है।  'पुलि' के वीएफएक्स भारत के अलावा रूस में सेंट पीटर्सबर्ग, यूक्रेन एंड अर्मेनिआ के विभिन्न ८ स्टूडियोज में तैयार किये गए।  फिल्म के कुछ एक आँख वाला राक्षस, भीमकाय कछुआ, काला तेंदुआ और ऐसे ही कई दिलचस्प चरित्र केवल वीएफएक्स द्वारा ही क्रिएट किये गए हैं। इन चरित्रों को देखना दर्शकों के लिए नया अनुभव होगा।  'पुलि' के वीएफएक्स निर्देशक कमलाकन्नन कहते हैं, "शुरू में  हम लोगों का इरादा २६०० वीएफएक्स सीन तैयार करने का था।  परन्तु बाद में कुछ बाधाओं के कारण इन्हे कम करके २४०० कर दिया गया।  फिर भी यह बाहुबली से ज़्यादा ही हैं।"  


शहीद भगत सिंह को कुछ ऐसे श्रद्धांजलि दी सिंह इज़ ब्लिंग की टीम ने (फोटोज)














तमिल मांज रही है जैक्विलिन फर्नांडीज़

श्रीलंकाई सुंदरी जैक्विलिन फर्नांडीज़ आजकल तमिल शिक्षक से तमिल उच्चारण सीखती नज़र आ रही हैं। सभी जानते हैं कि जैक्विलिन श्रीलंका से हैं।  श्रीलंका में तमिल भाषियों की संख्या बहुत ज़्यादा है।  भारत की तरह श्रीलंका के तमिल भी जैक्विलिन को पसंद करते हैं।  जैक्विलिन को भी तमिल भाषा की थोड़ी बहुत जानकारी है।  लेकिन, इतनी जानकारी एक फिल्म के तमिल संवाद बोलने के लिए काफी नहीं।  इसलिए जैक्विलिन अपना तमिल उच्चारण मांज रही हैं।  जैक्विलिन फर्नांडीज़ को भारत में मिली सफलता की खुशबू श्रीलंका के निर्माताओं तक पहुंची।  उनके ग्लैमर का फायदा उठाने के लिए इस साल की शुरुआत में एक फिल्म 'अकॉर्डिंग टू मैथ्यू' की शूटिंग शुरू हुई थी।  चंद्रन रत्नम निर्देशित इस फिल्म की कहानी रियल लाइफ है।  एक पादरी अपनी वाइफ और अपनी सेक्रेटरी के पति का क़त्ल कर देता है। फिल्म में पादरी की भूमिका अल्स्टन कॉच कर रहे हैं।  चूंकि, 'अकॉर्डिंग टू मैथ्यू' को तमिल में भी रिलीज़ किया जाना है, इसलिए जैक्विलिन को अपने तमिल उच्चारण पर ध्यान देना पड़ रहा है।  जैक्विलिन इस समय हिंदी फिल्म 'हाउसफूल ३' के अलावा हॉलीवुड फिल्म 'डेफिनिशन ऑफ़ फियर' में व्यस्त हैं।

जावेद अली ने लांच किया रोमांटिक ट्रैक 'उड़ने लगा'

जावेद अली अपने सूफ़ियाना अंदाज के लिए जाने जाते हैं। उनके रोमांटिक गानों  को भी बहुत पसंद किया जाता है। इन दिनों  जावेद अली अपने नवीनतम गाने उड़ने लगा के लिए सुर्ख़ियो में है।  अभिनेता दिलजान वाडिया की आनेवाली फिल्म 'फोर पिलर्स ऑफ बेसमेंट' के  रोमांटिक सांग उड़ने लगा को पिछले दिनों बिग ऍफ़ऍम के मुंबई स्थित स्टूडियो में लांच किया गया। इस अवसर पर गायक जावेद अली, अभिनेता दिलजान वाडिया , अभिनेत्री आलिया सिंहसंगीतकार अनुराग मोहन और  निर्माता गौतम बाफना मौजूद थे ।  उड़ने लगा को गोवा , वड़ोदरा और मुंबई केखूबसूरत प्राकृतिक लोकेशंस पर फिल्ममाया गया है।  इस गाने में दिलजान वाडिया और आलिया सिंह की गज़ब कैमेस्ट्री नजर आती है।  फिल्म में  दिलज़ान वाडिया  समीर का  किरदार निभा रहे हैं जो एक मॉल का सिक्यॉरिटी गार्ड हैं। वह  मॉल में नौकरी करने वाली रिया  (आलिया सिंह) से प्रेम करने लगता है। कहानी और घटनाक्रम में रिया एक रात इस मॉल के बेसमेंट में फंस जाती है। उस रात रिया को बचाने के लिए एक के बाद एक आये कई लोग फँसते चले जाते है। फिल्म में अन्य प्रमुख किरदारों में  जाकिर हुसैन, शाहवर अली खान, अनंत जोग, रवि गुदारिया भी नजर आएंगे। निर्माता गौतम बाफना और प्रवीण चुडासमा की  फिल्म फोर पिलर्स ऑफ बेसमेंट को गिरीश नायकके ने निर्देशित किया हैं। फिल्म का संगीत जी म्यूज़िक कंपनी ने जारी किया हैं। 


Ishq Ne Krazy Kiya Re Official Trailer | Mughda Godse | Nishant Malkhani

'रईस ' में नवाज़ुद्दीन का दबंग अंदाज़

बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान के साथ लगातार दो हिट फिल्म करने के बाद नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी जल्द ही बॉलीवुड के बादशाह यानि शाहरुख़ खान के साथ स्क्रीन स्पेस शेयर करते नज़र आएंगे। शाहरुख़ खान की अगली फिल्म 'रईस' में नवाज़ुद्दीन एक पुलिस वाले का किरदार निभा रहे हैं । हालांकि फिल्म 'रईस' की सारी जानकारी गोपनीय रखी गयी है।  इस के बावजूद फिल्म की शूटिंग के दौरान नवाज़ की एक तस्वीर लीक हो गई है। तस्वीर में नवाज़ शर्ट पैंट में आँखों पर काला चश्मा लगाए नज़र हैं। इस गेटअप में नवाज़ एक दमदार पुलिस अफसर होने एहसास कराते हैं। इसी बीच कई फिल्म निर्माताओं ने नवाज़ को अपनी फिल्म का हिस्सा बता बताते हुए अपनी फिल्म की घोषणा कर दी थी।  इन सभी को अफवाह बताते हुए नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी कहते है, 'अभी तक मै सिर्फ दो फ़िल्में ही कर रहा हूँ।  एक फिल्म 'रईस' और दूसरी अनुराग कश्यप की फिल्म। इन दो फिल्मों के अलावा मै और कोई फिल्म नहीं कर रहा। अगर इनके
अलावा कोई और फ़िल्में मेरे पास होगी तो मै ख़ुशी से उसकी घोषणा करूँगा।'
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क्या सलमान खान का 'प्रेम' चोला सफल होगा ?

कोई साढ़े चार साल बाद सलमान खान के प्रेम की वापसी हो रही है. सलमान खान की सूरज बडजात्या के निर्देशन में फिल्म 'प्रेम रतन धन पायो' दीवाली वीकेंड पर १२ नवम्बर को रिलीज़ हो रही है. इस फिल्म में सलमान खान के एक करैक्टर का नाम प्रेम है. सलमान खान ने पिछली बार २०११ में रिलीज़ अनीस बज्मी की फिल्म 'रेडी' में प्रेम का रोल दिया था. लेकिन, प्रेम रतन धन पायो सलमान खान के प्रेम की घर वापसी भी होगी. सलमान खान को ऑन स्क्रीन प्रेम नाम सूरज बडजात्या ने ही अपने निर्देशन की पहली फिल्म 'मैंने प्यार किया' में दिया था. इस फिल्म के बाद सलमान खान प्रेम करैक्टर में हिट हो गए. उन्होंने 'मैंने प्यार किया' के बाद अंदाज़ अपना अपना, हम आपके हैं कौन, जुड़वां, दीवाना मस्ताना, बीवी नंबर वन, सिर्फ तुम, हम साथ साथ हैं, चल मेरे भाई, कहीं प्यार न हो जाये, नो एंट्री, पार्टनर, मारीगोल्ड: अन एडवेंचर इन इंडिया में भी प्रेम नाम वाले किरदार किये. प्रेम नाम सलमान खान की स्क्रीन इमेज पर फबता है, भोला, सीधा सादा, प्रेम करने वाला प्रेम. सलमान खान पर राजा, राजू और राज नाम भी फबते हैं. आकाश और समीर भी उन्ही के किरदार हैं. जुड़वाँ में उनके प्रेम और राजा नाम थे. सूरज बडजात्या के साथ उन्होंने आखिरी बार १९९९ में फिल्म हम साथ साथ हैं में प्रेम किरदार किया था. सूरज बडजात्या सलमान खान के साथ प्रेम किरदार लेकर कितना सफल रहे, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मैं प्रेम की दीवानी हूँ में हृथिक रोशन और अभिषेक बच्चन के प्रेम भी फिल्म को हिट नहीं बना पाए. राजश्री की फिल्म विवाह में प्रेम का किरदार तो सफल हो गया, लेकिन एक विवाह ऐसा भी में यह बिलकुल फ्लॉप साबित हुआ.
क्या उम्मीद की जा सकती है कि सलमान खान का प्रेम सूरज बडजात्या के साथ मिल कर फिल्म 'प्रेम रतन धन पायो' को बड़ी हिट बना पायेगा !


Saturday, 26 September 2015

भिन्न संस्कृतियों का टकराव है 'लव एक्सचेंज'

बॉलीवुड की रोमांटिक कॉमेडी फिल्मों की परम्परा में निर्माता नाडिया की राज वी शेट्टी निर्देशित फिल्म 'लव एक्सचेंज' भी है  ।  यह कहानी हैं एक ही दफ़्तर में काम करने वाले युवा सिड और शानू की। दोनों एक  दूसरे को  बेहद प्यार करते हैं और शादी करना चाहते हैं।  लेकिन, इसमे आड़े आती है उन दोनों की भिन्न संस्कृतियाँ।  सिड साठे परिवार से और शानू कपूर है। दोनों की शादी न हो, इसलिए  कपूर और साठे परिवार उनके सामने शर्त रखता है कि सिड पंजाबी कपूर परिवार में और शानू महाराष्ट्रियन साठे परिवार में तीन महीने तक रहेंगे ।  इसके बाद इस शादी के बारे में तय किया जायेगा।  क्या यह शादी होती है ! यही उत्सुकता दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींच कर लाती है।  लेकिन, हिंदी फिल्मों का क्लाइमेक्स तो एक जैसा होता है।  पर दर्शक 'लव एक्सचेंज' देखने आएंगे यह देखने के लिए कि यह कैसे होता है।  इस फिल्म की रोमांटिक भूमिका में मोहित मदन और ज्योति शर्मा हैं।  सपोर्टिंग रोल में मनोज पाहवा, नीलू कोहली, शमा देशपांडे और राजू खेर हैं।  पिछले दिनों इस फिल्म का पोस्टर  अँधेरी के गणेश  पंडाल में रिलीज़ हुआ।  जब इस फिल्म की यूएसपी के बारे में निर्देशक राज शेट्टी से पूछा गया तो उन्होंने कहा, "प्यार तूफ़ान भी होता है और ठंडी  हवा का झोंका भी।"



आदित्य चोपड़ा की अगली फिल्म का नाम होगा 'बेफ़िक्रे'

'रब ने बना दी जोड़ी' के सात साल बाद निर्देशक आदित्य चोपड़ा किसी फिल्म का निर्देशन करने जा रहे हैं।  इस फिल्म को खुद आदित्य चोपड़ा ने लिखा है।  इस फिल्म का नाम 'बेफ़िक्रे' होगा।  इस बात का ऐलान आज रात ठीक बारह बजे उस समय किया, जब घडी की सुइयों ने आदित्य चोपड़ा के पिता यश चोपड़ा की ८३ वी वर्षगाँठ का ऐलान किया।  फिल्म का ऐलान आदित्य चोपड़ा के लिखित बयान के द्वारा हुआ, जो सोशल साइट्स पर 12AM पर जारी किया गया ।  इस बयान को आदित्य ने अपने पिता के साथ वार्तालाप के रूप में लिखा है।  इसमे वह अपने पिता को फिल्म के लिखने, उसे किसी दूसरे डायरेक्टर को देने के बजाय खुद डायरेक्ट करने के कारणों का खुलासा करते हुए उनसे राय माँगते है और यश चोपड़ा उन्हें फिल्म शुरू करने के लिए कहते हैं । फिलहाल, फिल्म का अन्य विवरण घोषित नहीं हुआ हैं।

Friday, 25 September 2015

यह बॉलीवुड स्टाइल फ्लर्टिंग है

बॉलीवुड को रील लाइफ में भी फ्लर्टिंग रास आती है। थ्रिलर फिल्मों के फन में उस्ताद अब्बास-मुस्तान की जोड़ी इस बार फ्लर्टिंग में हाथ आजमा रही है।  इस जोड़ी की फिल्म 'किस किस को प्यार करू' कहानी है चार नाम शिव, राम, किशन और कुमार वाले एक ही व्यक्ति की है, जिसकी एक ही अपार्टमेंट में रहने वाली तीन बीवियां है। अब होता क्या है कि वह तीन औरतों के  होते हुए भी चौथी से फ़्लर्ट करने लगता है।  यह बॉलीवुड स्टाइल की फ्लर्टिंग है कि एक ही आदमी चार चार औरतों से फ़्लर्ट करता है। 
फ्लर्टिंग कर बुरे फंसे 
बॉलीवुड फिल्मों में फ्लर्टिंग के रूप अनेक है।  कॉमेडी के लिहाज़ से एक आदमी दो या तीन औरते और इन दो या तीन औरतों के बीच फंसे आदमी की बेचारगी, दर्शकों को हंसा हंसा कर लोट पोट कर देती है।  स्टैंडअप कॉमेडियन कपिल शर्मा की फिल्म 'किस किस को प्यार करू' के केंद्र में भी हास्य है।  ऎसी फिल्में इस प्रकार के अनैतिक संबंधों को हंसने हंसाने के लिए मान्यता देती हैं। कॉमेडी फिल्मों के बादशाह गोविंदा साजन चले ससुराल और सैंडविच में दो बीवियों के बीच फंसे पति बने थे।  दर्शक उनकी बेचारगी पर हँसता है। लेकिन, अंत में उनकी दोनों रील लाइफ बीवियां उनकी शादियों को मंज़ूरी दे देती हैं।  लेकिन, क्योंकि, मैं झूठ नहीं बोलता और डू नॉट डिस्टर्ब में गोविंदा उस  समय बुरे फंसते हैं, जब वह बीवी को छोड़ कर दूसरी औरत से रोमांस करने लगते हैं और रंगे हाथों पकड़े जाते हैं ।  आखिर में उन्हें अच्छे पति की तरह अपने रोमांस से तौबा करनी पड़ती है।  रियल लाइफ में उनके अच्छे दोस्त सलमान खान भी बीवी नंबर १ में बीवी करीना कपूर को छोड़ कर सुष्मिता सेन से प्रेम की पींगे मारने लगते हैं।  अब यह बात दीगर है कि गोविंदा की तरह उन्हें भी अपनी रील लाइफ प्रेमिका से तौबा करनी पड़ती है।  साजन चले ससुराल के गोविंदा की कहानी की तरह घरवाली बाहरवाली के अनिल कपूर की भी थी। नेपाल घूमने गए अनिल कपूर को रम्भा से शादी करनी पड़ती है।  दो बीवियों वाले हीरो की फ़िल्में नायक की हास्यास्पद स्थिति को दर्शाने वाली विशुद्ध कॉमेडी फ़िल्में हैं।  
बिरयानी  खाने की चाहत 
लेकिन, मुसीबत तब होती है जब घरवाली-बाहरवाली फ्लर्टिंग घर की दाल रोटी छोड़ कर बिरयानी का मज़ा लेना बन जाती है। तीन दोस्त विवेक ओबेरॉय, रितेश देशमुख और आफताब शिवदासानी अपनी पत्नियों से ऊबे हुए हैं।  आफताब की बीवी तारा शर्मा तो धार्मिक पृवृति की होने के कारण सेक्स के प्रति उदासीन है।  इस पर तीनों बहार की बिरयानी का मज़ा लेने निकल पड़ते हैं।  इंद्रकुमार की फिल्म मस्ती के यह तीनों लम्पट किरदारों को एक लड़की के कथित मर्डर के अपराध में फंसने के कारण बिरयानी खाने से तौबा करनी पड़ती है। अब यह बात दीगर है कि ग्रैंड मस्ती में यह तीनों किरदार के बार फिर बिरयानी खाने निकल पड़ते हैं।  बीवियों के होते हुए फ्लर्टिंग का एक ऐसा ही मसाला नो एंट्री में भी अनीस बज़्मी ने दिखाया था। बाहर की बिरयानी के शौक वाली थीम दर्शकों में हिट हुई।  
पति पत्नी और वह 
जब पति और पत्नी के बीच दूसरी औरत आती है तो कभी हंसी आती है तो कभी रोना भी।  डू नॉट डिस्टर्ब में अनिल कपूर और पति पत्नी और वह में संजीव कुमार कभी खुद को बीमार तो कभी पत्नी को बीमार बता कर दूसरी औरत से सहानुभूति बटोरते हैं।  उनका  यह प्रयास विशुद्ध रूप से दर्शकों को हंसाता है।  लेकिन, इस नायक को उस समय रोना पड़ता है, जब फिल्म की थीम गंभीर हो जाती है।  यश चोपड़ा की फिल्म 'दाग' में राजेश खन्ना अपनी दो बीवियों राखी और शर्मीला टैगोर के चक्रव्यूह में फंस जाते हैं।  मासूम में तो नसीरुद्दीन शाह का पहली बीवी से एक बच्चा भी है।  पति पत्नी और तवायफ में पति और पत्नी के बीच तवायफ आ जाती है तो बड़ा ड्रामा  खड़ा हो जाता है। सिलसिला में पति अपने पहले प्यार में लट्टू हो जाता है।  इसी प्रकार की कभी कभी, तमाम फ़िल्में किसी न किसी सन्देश के साथ भावाभिनय के लिए देखी जाने वाली फ़िल्में बन गई थी।  
जब बन जाती है दूसरी औरत 
महेश भट्ट ने फिल्म अर्थ में दूसरी औरत के जरिये महिला अधिकारों की वकालत की थी।  जब पति अपनी पत्नी को छोड़ कर दूसरी औरत के पास चला जाता है तो औरत टूट सी जाती है।  लेकिन, अर्थ में महेश भट्ट पत्नी को अपने पैरों पर खड़े होने की सलाह देते हैं।  'आखिर क्यों' की नायिका स्मिता पाटिल भी अपने पति के अवैध सम्बन्धो पर सवाल उठाती है कि पति कैसे अवैध सम्बन्ध रख सकता है, जबकि औरत के लिए यह टैबू है।  गुलजार की फिल्म 'इजाज़त' का पति अपनी पूर्व महिला मित्र को  भूल नहीं पाता और उससे सम्बन्ध रखता है।  इस थीम पर दूसरी बहुत सी फ़िल्में बनी हैं। इन फिल्मों को इनके एक्टर्स का अभिनय मील का पत्थर साबित होता है।  
फिसल जाती है औरत ! 
हिंदी  फिल्मों ने औरत को भी फिसलते दिखाया है।  यह वह समय था, जब वीमेन लिब का  नारा पूरे संसार में गूँज रहा था। इसी दौर में हिंदी फिल्मों की नायिका भी फिसली।  एक बार फिर की फिल्म एक्टर सुरेश ओबेरॉय की बीवी दीप्ति नवल पति की उपेक्षा और लम्पटपन के कारण एक पेंटर में अपना सुख ढूढती है।  एक पल की शबाना आज़मी का पति फारूख शेख अपने काम में बहुत ज़्यादा व्यस्त रहता है।  ऐसी समय में शबाना आज़मी के जीवन में उसका पुरुष मित्र नसीरुद्दीन शाह आता है।  दोनों के सम्बन्ध हो जाते हैं।  माया मेमसाहब में भी दीपा शाही का डॉक्टर पति अपनी क्लिनिक में बिजी रहता है।  माया अपनी निजी ज़िंदगी  की बोरियत मिटाने के लिए कम उम्र के शाहरुख़ खान से सम्बन्ध बनाती है।  अस्तित्व की तब्बू एक बरसाती रात में अपने संगीत टीचर की  बाहों में आ समाती है।  इस सम्बन्ध से उनके एक लड़का होता है।  काफी साल बाद यह राज खुलता है तो उसका अवैध संबंधों से पैदा बेटा भी उसे निकाल देता है।  मर्डर की मल्लिका शेरावत भी पति को धोखा देकर अपने दोस्त से सेक्सुअल रिलेशन बनाती हैं।  जिस्म में एक बूढ़े आदमी की औरत बिपाशा बासु एक युवा वकील को अपने शारीरिक जाल में फंसा  कर पति की हत्या करवाती है।  यह सभी फ़िल्में बोल्ड कथानक, नायिका के सेक्स दृश्यों और चुम्बनों, आदि के कारण चर्चित हुई।  
बॉलीवुड में अडल्ट्री थीम पर फिल्मों की भरमार है।  बोलडनेस के लिहाज़ से ऐसा कथानक सभी को रास आता है।  यह कारण है कि लाइफ इन अ मेट्रो, चितकबरे, ज़हर, सलाम ए  इश्क़,  हैदर, साहब बीवी और गुलाम, बस एक पल, डार्लिंग,  हवस, आदि ढेरों फिल्मों में अवैध सम्बन्ध रखने वाले किरदार नज़र आते हैं।  दिलचस्प तथ्य यह कि ज़्यादातर फ़िल्में चर्चित हो जाती हैं और हिट भी।