२०२६ के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के पूर्व प्रदर्शित करने के लिए बनाई गई, दलपति विजय की तमिल फिल्म जन नायकन, प्रदर्शन से पूर्व ही लफड़े में फंस गई . तमिलनाडु की राजनीति में सक्रीय भूमिका करने के इच्छुक विजय की इस फिल्म को केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड की गंभीर आपत्तियों का ऐसा सामना पड़ा कि फिल्म अभी तक प्रदर्शित नहीं हो पा रही है।
सेंसर बोर्ड के सदस्यों तथा अन्य की आपत्ति फिल्म की सामग्री पर है, जो राष्ट्रीय और धार्मिक हितों के विरुद्ध होने के कारण अति सवेदनशील है। फ़िल्म में आपत्तिजनक माने गए मुख्य तत्व निम्न प्रकार थे -
सशस्त्र बलों का चित्रण: सेंसर ने फ़िल्म पर भारतीय सशस्त्र बलों को गलत रोशनी में या अनुचित तरीके से दिखाने का आरोप लगा। कुछ विशिष्ट प्रसंगो में बिना 'उचित अनुमति' या 'विशेषज्ञता' के सैन्य प्रतीकों के गलत उपयोग किया गया। फ़िल्म में एक विशिष्ट रक्षा प्रतीक का इस्तेमाल किया गया था, जिसके लिए न तो किसी विशेषज्ञ की समीक्षा ली गई थी और न ही कोई आधिकारिक अनुमति ली गई थी। इससे फ़िल्म में गलत जानकारी या गलत चित्रण को लेकर चिंताएँ पैदा हो गईं।
धार्मिक भावनाएँ: बोर्ड की जाँच समिति के एक सदस्य ने औपचारिक शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि फ़िल्म के कुछ दृश्य 'धार्मिक रूप से आपत्तिजनक' हैं और इनसे जनता की भावनाएँ आहत हो सकती हैं। कुछ खास संवादों का ज़िक्र किया गया, जिनके बारे में माना गया कि वे किसी अल्पसंख्यक समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचा सकते हैं। फिल्म में ब्राह्मण समुदाय को लगातार अपमानजनक तरीके से दिखाए जाने का आरोप भी लगा।
विदेशी हस्तक्षेप: मद्रास हाई कोर्ट ने उन दृश्यों से जुड़ी शिकायतों पर गौर किया, जिनमें विदेशी ताकतों को भारत के भीतर अशांति फैलाते हुए दिखाया गया था। उन दृश्यों पर आपत्तियां उठाई गईं जिनमें कथित तौर पर यह दिखाया गया था कि विदेशी ताकतें भारत के भीतर धार्मिक अशांति फैलाकर आंतरिक अराजकता पैदा कर रही हैं।
राजनीतिक संकेत: विजय के अपनी पार्टी 'तमिलगा वेट्री कज़गम' के साथ पूर्णकालिक राजनीति में उतरने को देखते हुए, फ़िल्म के शीर्षक (जिसका अर्थ है "जनता का नेता") और फिल्म में भ्रष्ट राजनेताओं की आलोचना ने इस आरोप को जन्म दिया कि यह महज़ मनोरंजन का साधन न होकर एक राजनीतिक हथियार है।
कटौती की माँग: फ़िल्म निर्माताओं द्वारा समिति द्वारा सुझाए गए शुरुआती २७ कटों पर सहमति जताने के बावजूद, आंतरिक शिकायत के चलते मामला और उलझ गया और इसे एक 'रिविज़िंग कमेटी' (पुनरीक्षण समिति) के पास भेज दिया गया।
सेंसर बोर्ड द्वारा फिल्म पर आपत्ति लगाने और उसके बाद, उस यूए प्रमाणपत्र देने से प्रकरण और जटिल हो गया। परिणामस्वरुप यह मामला मद्रास उच्चन्यायालय तक गया। न्यायलय ने समस्त तर्कों को सुनने के पश्चात् फिल्म के प्रमाणपत्र को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने इन गंभीर आरोपों और फ़िल्म के कंटेंट की गहन समीक्षा की आवश्यकता पर बल दिया। ध्यान रहे कि फिल्म को यूए प्रमाणपत्र भी मद्रास उच्च न्यायलय की एकल पीठ के आदेश के बाद सेंसर बोर्ड द्वारा दिया गया था।
कुछ अन्य आपत्तियां: फिल्म में बार-बार और लगातार हिंसा दिखाई गई है, जिसमें गोलीबारी, धमाके और हथौड़े व कुल्हाड़ी जैसे हथियारों से वार करना शामिल है। इन दृश्यों को अक्सर स्लो मोशन में और बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए प्रभावों के साथ पेश किया गया है। कुछ खौफनाक दृश्यों, जैसे सिर काटना और शरीर के अंगों को काटना, को १६ साल से कम उम्र के दर्शकों के लिए अनुपयुक्त माना गया। ध्यान रहे कि इस फिल्म को अपने अभिभावकों के साथ बच्चे देख सकते हैं, का प्रमाण पत्र दिया गया है। इसके अतरिक्त संवेदनशील सामाजिक मुद्दे भी आपत्ति में आये। फिल्म तेलुगू फिल्म 'भगवंत केसरी' की रीमेक होने के नाते, इसमें बाल शोषण और यौन शोषण से जुड़े कुछ गंभीर दृश्य शामिल हैं; इन दृश्यों को प्रभावशाली तो माना गया, लेकिन इनके चित्रण में बेहद सावधानी बरतने की ज़रूरत थी।
फिलहाल के लिए तो जन नायकन फिल्म लटक गई लगती है। किन्तु, फिल्म को एक बड़ा झटका १० अप्रैल २०२६ को लगा, जब फिल्म का पूरा संस्करण सोशल मीडिया और अवैध प्लेटफॉर्म के ज़रिए ऑनलाइन लीक हो गया है। निर्माताओं ने इस मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से इन लिंक्स को हटाने का अनुरोध किया है।
एच. विनोद द्वारा निर्देशित और केवीएन प्रोडक्शंस द्वारा निर्मित यह फिल्म, दलपति विजय की अंतिम फिल्म मानी जा रही है; इसके बाद वह अपने राजनीतिक दल तमिलगा वेट्री कज़गम के साथ पूरी तरह से राजनीति में कदम रखेंगे। इस फिल्म में, विजय ने भारतीय पुलिस सेवा के एक अधिकारी वेत्री कोंडन की है। बॉलीवुड अभिनेता बॉबी देओल मुख्य दुष्ट चरित्र है। अन्य भूमिकाओं में पूजा हेगड़े, ममिता बैजू, प्रकाश राज, गौतम वासुदेव मेनन और प्रियमणि है। एक अफवाह यह भी है कि फिल्म दक्षिण के तीन बड़े निर्देशक एटली, लोकेश कनगराज और नेल्सन दिलीपकुमार विशिष्ट भूमिकाओं में दिखाई देंगे। यह तीनों ही विजय की फिल्में निर्देशित कर चुके है।
जन नायकन के प्रति दर्शकों में उत्सुकता है। इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि ३ जनवरी २०२६ को अनावृत फिल्म के ट्रेलर को २४ घंटों में ८ करोड़ ३० लाख दर्शकों ने देख लिया था। फिल्म में दर्शकों को आकर्षित करने वाले ज़बरदस्त एक्शन और गहरे राजनीतिक रंग देखने को मिलते हैं।
No comments:
Post a Comment