Friday, 12 September 2014

बिपाशा बासु और विक्रम भट्ट की सफल क्रीचर ३ डी

बॉलीवुड की सेक्सी ब्यूटी बिपाशा बासु और हॉरर फिल्मों के माहिर निर्देशक विक्रम भट्ट।  बिपाशा बासु और विक्रम भट्ट की जोड़ी पहली बार २००२ में रिलीज़ फिल्म राज से बनी। यह एक थ्रिलर हॉरर फिल्म थी. फिल्म हिट हुई. राज ने बिपाशा बासु को बॉलीवुड में स्थापित कर दिया. बिपाशा बासु बॉलीवुड की  सबसे सेक्सी और उत्तेजनापूर्ण अभिनेत्री साबित हो गयीं. विक्रम भट्ट ने हॉरर फिल्मों में अपनी पकड़ बना ली।  बिपाशा बासु के साथ विक्रम भट्ट की फिल्म राज ३ डी  भी सुपर हिट गयी।  इसीलिए जब इन दोनों की एक साथ फिल्म क्रीचर ३ डी का ऐलान हुआ तो दर्शकों को इस जोड़ी से काफी अपेक्षाएं थी. इसमे कोई  शक नहीं कि एक बार फिर बिपाशा बासु और विक्रम भट्ट सफल साबित होते हैं.  विक्रम भट्ट की हॉरर की अपनी परिकल्पना है।  इस बार उनकी कल्पना में क्रीचर है- एक मॉन्स्टर (ब्रह्मराक्षस). विक्रम भट्ट ने सुखमनी सडाना के साथ इस क्रीचर के इर्द गिर्द अच्छी कहानी लिखी है. पटकथा चुस्त दुरुस्त है और फिल्म की रफ़्तार तेज़ रखी गयी है. पूरे १३४ मिनट तक दर्शकों को अपनी सीट के किनारे पर बैठे रहना पङता है। विक्रम भट्ट ने क्रीचर के ट्रक पर और बिपाशा बासु के होटल पर हमला करने के दृश्यों में कल्पनाशीलता दिखाई है. गुफा पर क्रीचर पर हमले  का सीक्वेंस सांस रोक देने वाला है।  ऐसे दृश्यों से दर्शकों की उत्सुकता, उत्तेजना और रूचि बनी रहती है. फिल्म हिमाचल प्रदेश में एक होटल खोलने आयी अहाना की है. उसका अपना दुखद अतीत है।  वह मुंबई छोड़ कर दूर पहाड़ी इलाके में इसीलिए आयी है कि कड़वी यादों से निजात पा सके और बुरे लोगों से बच सके।  पर यहाँ भी क्रीचर उसे चैन से नहीं रहने देता।  प्रेमी की बेवफाई भी उसे तोड़ देती है. वह आत्महत्या करना चाहती है।  पर अंत में उस राक्षस का अंत करने का निर्णय लेती है. बिपाशा बासु कैसे कर पाती है ब्रह्म राक्षस का अंत! यही फिल्म का मज़ा है।
बिपाशा बासु को ऐसे किरदारों को करने में महारत  हासिल है।  वह राज ३ डी  के बाद, एक बार फिर अच्छा काम कर ले जाती हैं. उनके नायक पाकिस्तान के इमरान अब्बास कमज़ोर अभिनेता तो हैं ही, बिपाशा बासु से उम्र में काफी छोटे लगते हैं. बिपाशा बासु पर अब उम्र भारी पड़ने लगी है. शायद इसीलिए उन्होने इमरान के साथ गर्मागर्म रोमांस नहीं किया।  इससे दर्शकों को थोड़ी निराशा ज़रूर  होती है।  पर फिल्म का मज़ा काम नहीं होता।  अन्य भूमिकाओं में दीपराज राणा, मुकुल देव, बिक्रमजीत सिंह, शेख समीर, शिरीष शर्मा, आदि ठीक ही हैं.
फिल्म का संगीत ख़ास नहीं।  गीत न भी होते तो भी चलता।  प्रवीण भट्ट ने क्रीचर के भय को उभरने लिए बड़ी चतुराई से फिल्म को कैमरा में उतार है।  अब्बास अली मुग़ल के स्टंट फिल्म के थ्रिल के अनुरूप हैं।   राजू राव का बैकग्राउंड म्यूजिक फिल्म में थ्रिल पैदा करने में सक्षम है।
विक्रम भट्ट की यह फिल्म दर्शकों को निराश नहीं करेगी. क्योंकि, उन्होंने पूरा ख्याल रखा है कि उनकी फिल्म में महिला शकित का प्रदर्शन हो. कहा जा सकता है कि बिपाशा बासु और विक्रम भट्ट की जोड़ी एक और सफल फिल्म देने जा रही है। 
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