Tuesday, 4 April 2017

अपने किरदारों में बॉलीवुड एक्टर

आम तौर पर बॉलीवुड के सितारे अपनी भूमिकाओं से पहचाने जाते हैं।  कोई भूमिका उन्हें ऎसी पहचान देती है कि दर्शक सालों साल उन्हें उसी भूमिका से पहचानते हैं। कभी ऐसा समय भी आता है, जब उनकी कोई दूसरी भूमिका उनकी पहचान बनाती है।  ऐसे तमाम उदाहरण है।  लेकिन, ऐसी कुछ आगामी फिल्मों के कलाकारों को भी अपनी पहले की भूमिकाओं से इतर पहचान बनाने का मौका मिलेगा! प्रस्तुत लेख इसी बात तथ्य पर है - 
बिगड़ैल रईसजादी से स्कूल प्रिंसिपल तक अमृता सिंह
आपातकाल में संजय गांधी की कुख्यात सहयोगिनी रुखसाना सुल्तान की बेटी अमृता सिंह ने १९८३ में सनी देओल के साथ फिल्म बेताब से डेब्यू किया था।  इस फिल्म में अमृता सिंह ने एक बददिमाग रईसजादी रोमा का किरदार किया था।  रोमा के किरदार से शुरुआत करने वाली अमृता सिंह ने ३४ साल लंबा अभिनय का सफर पूरा कर लिया है।  उन्होंने इस दौरान चमेली (चमेली की शादी) जैसा कॉमिक करैक्टर किया तो एक गैंगस्टर माया डोलास की माई (शूटआउट ऐट लोखंडवाला) जैसा बेबस किरदार भी किया।  वह 'ए फ्लाइंग जट' में टाइगर श्रॉफ की मां के किरदार में नजर आई।  अब अमृता सिंह फिल्म 'हिन्दी मीडियम' में स्कूल की प्रिंसिपल की भूमिका में नजर आएंगी। बच्चों के भविष्य का फैसला करने वाली प्रिंसिपल का उनका रोल काफी महत्वपूर्ण है। इस रोल के लिए उनकी साड़ियों का चुनाव बहुत ही ध्यान से किया गया है। ख़ास बात यह है कि इस फिल्म की शूटिंग दिल्ली के उसी मॉर्डन स्कूल में की गई है, जहां अमृता सिंह बचपन में पढ़ती थी। 
बेशरम से बेगम जान तक पल्लवी शारदा

हिंदी फिल्मों में गीता, राधिका, सिया और गायत्री जैसे किरदार कर चुकी पल्लवी शारदा की शुरूआती पांच फ़िल्में बुरी तरह से असफल हुई थी।  इसके बावजूद, जब उन्हें अभिनव कश्यप के निर्देशन में फिल्म बेशरम (२०१३) में रणबीर कपूर की नायिका बनाया गया तो लगा कि पल्लवी शारदा का करियर बन जायेगा।  क्योंकि, अभिनव कश्यप तीन साल पहले दबंग (२०१०) जैसे सुपर हिट फिल्म का निर्देशन कर चुके थे।  लेकिन, बेशरम बॉक्स ऑफिस पर पानी तक नहीं मांग सकी।  अब एक बार फिर पल्लवी  शारदा को अपने निर्देशक पर ही भरोसा है।  वह श्रिजित मुखर्जी की फिल्म बेगम जान में एक वैश्या गुलाबो का किरदार कर रही हैं।  विद्या बालन की केंद्रीय भूमिका वाली फिल्म बेगम जान में दूसरे महिला किरदार भी है।  लेकिन, पल्लवी को उम्मीद है कि फिल्म में उनकी गुलाबो दर्शकों का ध्यान आकृष्ट कर पाएगी।  
आरा की अनारकली स्वरा भास्कर
संजय लीला भंसाली की फिल्म गुज़ारिश में हृथिक रोशन और ऐश्वर्या राय बच्चन के साथ किरदार करने के बाद स्वरा भास्कर ने अमूमन सह भूमिकाएं ही की।  हालाँकि, इन फिल्मों तनु वेड्स मनु, चिल्लर पार्टी, रांझणा, तनु वेड्स मनु रिटर्न्स और प्रेम रतन धन पायो में अपनी भूमिकाओं से स्वरा भास्कर ने अपनी पहचान बना ली।  इसके बावजूद इनमे कोई ऎसी फिल्म नहीं थी, जिसके केंद्र में उनकी भूमिका हो।  निल बटे सन्नाटा की वह नायिका थी।  लेकिन, फिल्म को विदेशी प्रशंसा ही ज़्यादा मिली।  इस पर उनकी उम्मीदें अनारकली ऑफ़ आरा पर टिकी थी।  लेकिन, बॉक्स ऑफिस पर  अनुष्का शर्मा की फिल्म फिल्लौरी से टकराव के कारण अनारकली ऑफ़ आरा एक करोड़ की ओपनिंग ले पाने में भी असफल रही।  अब वह शशांक घोष निर्देशित फिल्म वीरे दी वेडिंग में सोनम कपूर और करीना कपूर खान के साथ स्क्रीन शेयर कर ही कोई उम्मीद बाँध सकती हैं।  
सत्ता से मातृ तक रवीना टंडन 

रवीना टंडन ने सलमान खान के साथ फिल्म पत्थर के फूल में एक वेश्या की लड़की किरण खन्ना के किरदार से अपने फिल्म करियर की शुरुआत की। सेक्सी ग्लैमरस रवीना टंडन को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला दमन फिल्म में  पारिवारिक हिंसा की शिकार महिला दुर्गा सैकिया के किरदार के लिए।  मधुर भंडारकर की फिल्म सत्ता में एक महत्वकांक्षी महिला अनुराधा के किरदार से उन्हें प्रशंसा मिली।  अब वह अश्तर सईद की फिल्म मातृ द मदर में वर्किंग वुमन विद्या चौहान की भूमिका में घरेलु हिंसा की शिकार औरतों का प्रतिनिधित्व कर रही होंगी ।  
चंदू से रॉय तक विवेक ओबेरॉय
 रामगोपाल वर्मा की फिल्म कंपनी (२००२) में चंदू का  किरदार करने के साथ ही विवेक ओबेरॉय फिल्म इंडस्ट्री में छा गए थे।  इस फिल्म के बाद विवेक ने रानी मुख़र्जी (साथिया) और करीना कपूर (युवा) से लेकर ऐश्वर्य राय (क्यों....हो गया न) तक इंडस्ट्री की तमाम ग्लैमरस अभिनेत्रियों के साथ रोमांटिक भूमिकाएं की, लेकिन वह स्वीकार किये गए गैंगस्टर की भूमिका में ही।  कंपनी के चंदू के बाद विवेक ओमकारा के केशु उपाध्याय और शूट आउट ऐट लोखंडवाला में माया डोलास के गैंगस्टर किरदारों में ही चमके।  रक्त चरित्र, ज़िला गाज़ियाबाद और कृष ३ में अपनी नेगेटिव भूमिकाओं में विवेक ओबेरॉय दर्शकों को पसंद आये।  उन्हें रामगोपाल वर्मा ने रॉय में भी एक गैंगस्टर रॉय की भूमिका दी है।   
कस्तूरबा से रुक्कू बाई तक रोहिणी हटटंगड़ी

अपने समय की कई समान्तर फिल्मों की नायिका बनने वाली अभिनेत्री रोहिणी हत्तंगड़ी को रिचर्ड एटनबरो की फिल्म गांधी से पूरी दुनिया में कस्तूरबा गांधी के बतौर पहचान मिली। इस फिल्म के बाद रोहिणी ने भावना, पार्टी, आधात, ठिकाना, अग्निपथ, शेरदिल, शिवा, आदि दसियों फिल्मों में छोटी बड़ी भूमिकाएं की।  लेकिन, उन्हें गांधी की कस्तूरबा वाली पहचान किसी दूसरी फिल्म में नहीं मिल सकी।  अब वह रामगोपाल वर्मा की फिल्म सरकार ३ में एक महत्वकांक्षी राजनीतिक रुक्कू बाई के किरदार में अमिताभ बच्चन के सरकार से टकरा रही हैं।  ज़ाहिर है कि सरकार के केन्द्रीय किरदार से टकराव के कारण रुक्कू बाई रोहिणी हत्तंगड़ी के लिए कस्तूरबा जैसा किरदार बन गया है।   
शूल से सरकार 3 तक मनोज बाजपेई
रामगोपाल  वर्मा की फिल्म सत्या में भीकू म्हात्रे के किरदार से गैंगस्टर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने वाले मनोज बाजपेई को वर्मा की फिल्म शूल में पुलिस ऑफिसर समर प्रताप सिंह के किरदार से सुपर स्टार माना जाने लगा था।  अब यह बात दूसरी है कि मनोज बाजपेई यह सफलता बरकरार नहीं रख सके।  हालाँकि, इस बीच उन्होंने फ़िज़ा, ज़ुबैदा, अक्स, पिंजर, वीर-ज़ारा, फरेब, १९७१, आरक्षण, आदि फिल्मों में उन्होंने सशक्त भूमिकाएं की। गैंग्स ऑफ़ वासेपुर में सरदार खान के उनके किरदार को ज़बरदस्त सफलता मिली।  अब वह नाम शबाना के बाद सरकार ३ में नए आयाम स्थापित करने जा रहे हैं।  सरकार ३ में मनोज बाजपेई ने सरकार के दाहिने हाथ गोविन्द देशपांडे का किरदार कर रहे हैं।  यह किरदार छोटा मगर बेहद सशक्त बताया जा रहा है।  
मानवाधिकार के वकील से लेकर आतंकवादी तक राजकुमार राव 

लव सेक्स और धोखा (एलएसडी) और रागिनी एमएमएस से करियर की शुरुआत करने वाले राजकुमार राव को हंसल मेहता की फिल्म शाहिद में मानवाधिकार की वकालत करने वाले वकील शाहिद आज़मी की भूमिका के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।  क्वीन, सिटीलाइट्स, हमारी अधूरी कहानी, अलीगढ और ट्रैप्ड जैसी फिल्मों में सशक्त भूमिकाओं से खुद को बार बार साबित करने वाले राजकुमार राव आतंकवादी की भूमिका करने जा रहे हैं।  हंसल मेहता की फिल्म ओमरता में वह आंतकवादी ओमर शेख का किरदार कर रहे हैं।  चूंकि, यह फिल्म हंसल मेहता की है। इसलिए, इस फिल्म का आतंकवादी भी सहानुभूति बटोर पाने में सफल होगा। 











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