Monday, 8 September 2025

डैडी में डॉन अरुण गवली बने थे अर्जुन रामपाल



अभिनेता अर्जुन रामपाल ने, निर्माता के रूप में केवल एक फिल्म डैडी का निर्माण किया था। इस फिल्म की कहानी के सह लेखक भी अर्जुन रामपाल थे।  अशीम अहलूवालिया निर्देशित इस फिल्म में अर्जुन रामपाल के अतिरिक्त ऐश्वर्या राजेश, निशिकांत कामत, आनंद इंग्ले, राजेश श्रृंगारपोरे, पूर्णानंद वांडेकर, अनुप्रिया गोयनका, श्रुति बापना, उषा नाइक, श्रीकांत यादव, और दीपक दामले ने अभिनय किया था। यह फिल्म आज के दिन ८ सितम्बर २०१७ को प्रदर्शित हुई थी। 

 

 यह फिल्म बनने से पहले ही विवादों में आ गई। कहा जाता है कि इस फिल्म के फिल्मांकन से पहले, अभिनेता अर्जुन रामपाल फिल्म की स्क्रिप्ट लेकर अस्पताल में भर्ती अरुण गवली से मिलने गए थे । उस समय अरुण गवली जे जे अस्पताल में भर्ती थे। इसके लिए अर्जुन रामपाल की कड़ी आलोचना हुई थी। 

 

राजनीतिक पृष्ठभूमि में बनी फिल्म डैडी राजनीतिक थ्रिलर फिल्म थी। इस फिल्म में अर्जुन रामपाल ने गैंगस्टर से राजनेता बने अरुण गवली का रियल लाइफ चरित्र किया था।  फिल्म में अपने चरित्र को स्वाभाविक रखने के लिए अर्जुन रामपाल उस दगडी चॉल में गए और उनके निवासियों से बातचीत की, जहाँ अरुण गवली आजीवन रहे।

 

फिल्म का शीर्षक गवली या अरुण द डॉन रखने के स्थान पर डैडी रखे जाने का कारण भी रोचक है। फिल्म को डैडी शीर्षक इसलिए दिया गया कि अरुण गवली के साथी और प्रशंसक उन्हें डैडी नाम से सम्बोधित करते थे। अरुण गवली भी स्वयं को डैडी कहलाना पसंद करते थे। इस फिल्म को प्रशंसा अवश्य मिली। किन्तु, फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल रही।

 

तमिल फिल्म अभिनेत्री ऐश्वर्या राजेश ने इस फिल्म में अरुण गवली की पत्नी जुबैदा मुजावर उर्फ़ आशा गवली की भूमिका की थी। यह फिल्म ऐश्वर्या की पहली हिंदी फिल्म थी।

 

फिल्म में फरहान अख्तर ने दाऊद इब्राहिम के  चरित्र को परदे पर किया था। किन्तु, फिल्म में उनके चरित्र को मकसूद नाम दिया गया था। भाग मिल्खा भाग (२०१३) में ओलिंपिक धावक मिल्खा सिंह के चरित्र के बाद फरहान अख्तर ने दूसरा वास्तविक चरित्र परदे पर किया था। डैडी में फरहान अख्तर की भूमिका के बारे में फिल्म के प्रदर्शन से पहले गुप्त रखा गया था।

 

फिल्म के निर्माता अर्जुन रामपाल ने फिल्म में 80 के दशक का एहसास लाने के लिए "डांस डांस 1987" का गाना "ज़िंदगी मेरी डांस डांस" चुना। "ज़िंदगी मेरी डांस डांस" गाने की शूटिंग के दौरान अर्जुन रामपाल ने नताशा स्टेनकोविक की तुलना जीनत अमान और परवीन बॉबी से की थी।

 

फिल्म डैडी में, वरिष्ठ मराठी फिल्म अभिनेत्री उषा नाइक ने अरुण गवली की माँ की भूमिका की थी।  इस प्रकार से वह, फिल्म में अर्जुन रामपाल की माँ बनी थी। हिंदी फिल्म दर्शको ने उषा नाइक को, वी शांताराम की मराठी हिंदी फिल्म पिंजरा (१९७२) में एक डांसर की भूमिका में पहली बार देखा था।  इस प्रकार से, वह ४५ साल बाद हिंदी दर्शकों के सामने आई थी।  प्रारम्भ में, उषा को फिल्म में केवल बूढी माँ की भूमिका के लिए ही चुना गया था। किन्तु, बाद में उन्हें युवा भूमिका भी सौंप दी गई। 

 

डैडी, मराठी फिल्म अभिनेता नितिन बोडरे की पहली और इकलौती हिंदी फिल्म थी।  वह मराठी कॉमेडी दगडी चॉल और दगडी चॉल २ से प्रसिद्द अभिनेता थे।  उन्होंने कुल मिलाकर ग्यारह फिल्मे और टीवी शो किये।  एक अन्य मराठी फिल्म अभिनेता विद्याधर जोशी की भी यह पहली हिंदी फिल्म थी।

 

फिल्म डैडी को २१ जुलाई २०१७ को प्रदर्शित किया जाना था।  किन्तु, अरुण गवली की बेटी गीता गवली ने फिल्म को ८ सितम्बर को प्रदर्शित करने का अनुरोध किया।  क्योंकि, उस समय अरुण गवली जेल में थे। उनकी पैरोल के लिए अनुरोध किया गया था। अब यह बात दूसरी है कि अरुण गवली को संजय दत्त के कारण पैरोल नहीं मिल सकी। उस समय संजय दत्त को बार बार पैरोल स्वीकार किये जाने पर सवाल उठाये जा रहे थे।  

आज के दिन मिस्टर कबड्डी, समीर, द रैली, डैडी और पोस्टर बॉयज !



आज से आठ साल पहले, अर्थात  ८ सितम्बर २०१७  को बॉलीवुड की कुल पांच फिल्मे प्रदर्शित हुई थी।  यह फ़िल्में व्यंग्यात्मक, हास्यपूर्ण, ड्रामा, थ्रिलर और राजनीतिक फ़िल्में थी। इनमे से केवल एक फिल्म औसत गई। शेष फिल्मे बॉक्स ऑफिस पर बेरौनक रही।





व्यंग्यपूर्ण हास्य फिल्म मिस्टर कबाड़ी का कथानक एक कबाड़ी की थी, जो अचानक ही अमीर हो जाता है। पैसा आता ही वह अपनी जीवन शैली बिलकुल बदल लेता है। वह न केवल आधुनिक पोशाके पहनता है, बल्कि अपना उच्चारण भी बदल लेता है।  इस फिल्म के निर्माता अनूप जलोटा थे और निर्देशकओमपुरी की पत्नी सीमा कपूर थी। इस असफल फिल्म में सीमा कपूर ने अपने तत्कालीन पति ओमपुरी को अनु कपूर, सारिका, विनय पाठक, बृजेन्द्र काला, उल्का गुप्ता, राजवीर सिंह, कशिश वोरा सतीश कौशिक जैसे सशक्त कलाकारों को निर्देशित किया था।   





मोहम्मद ज़ीशान अयूब,अंजलि पाटिल, सुब्रत दत्ता और सीमा बिस्वास अभिनीत निर्देशक दक्षिण छारा की ड्रामा फिल्म समीर  का कथानक आतंकवाद पर था।  इसमें पुलिस एक आतंकवादी की गिरफ़्तारी के बजाय एक मासूम व्यक्ति को पकड़ लेती है।  किन्तु, वास्तविकता का ज्ञान हो जाने पर, वह उसे छोड़ने के स्थान पर उनके लिए काम कर आतंकवादी को पकड़वाने की शर्त रखते है। 





निर्देशक दीपक आनंद की मिर्ज़ा और अरशीं मेहता अभिनीत ड्रामा फिल्म  द रैली में एक युवक के हिमालय कार रैली में भाग लेने की यात्रा पर केंद्रित थी।  इसके लिए वह अपनी प्रेमिका को भी धोखा देने में नहीं हिचकता।  





अशीम अहलूवालिया निर्देशित और अर्जुन रामपाल की राजनीतिक थ्रिलर फिल्म डैडी डॉन अरुण गवली के चरित्र  पर आधारित फिल्म थी।  इस फिल्म में अर्जुन ने डॉन की भूमिका की थी। 





श्रेयस तलपड़े अभिनीत और निर्देशित हास्य फिल्म पोस्टर बॉयज  में सनी देओल, बॉबी देओल, सोनाली कुलकर्णी, रणधीर राय, लारा दत्ता, उर्वशी रौतेला, आदि की प्रमुख भूमिका थी।  यह फिल्म निर्माता के रूप में श्रेयस की मराठी फिल्म पोश्टर बॉयज (२०१३) की हिंदी रीमेक थी। यह फिल्म  बॉक्स ऑफिस पर औसत कारोबार ही कर सकी थी।  

Sunday, 7 September 2025

राष्ट्रीय सहारा 7 सितंबर 2025

 


Saturday, 6 September 2025

बॉलीवुड के #Baaghi4 पर भारी हॉलीवुड की #TheConjuringLastRites



इस शुक्रवार, भारत के बॉक्स ऑफिस पर हिंदी की दो फ़िल्में बागी ४ और द बंगाल फाइल्स प्रदर्शित हुई। इन फिल्मों के साथ, दक्षिण से तेलुगु फिल्म घाटी और तमिल फिल्म मद्रासी प्रदर्शित हुई है। शुक्रवार को, मलयालम हॉरर फिल्म लोका पार्ट १ चंद्रा का नौंवा दिन, हिंदी फिल्म परम सुंदरी का आठवां दिन था।  इन फिल्मों ने शुक्रवार को कैसा  व्यवसाय किया, डालते हैं बॉक्स ऑफिस आंकड़ों आप एक दृष्टि।   






निर्देशक कृष की तेलुगु एक्शन क्राइम ड्रामा फिल्म घाटी ने पहले दिन बॉक्स ऑफिस पर २ करोड़ का विशुद्ध कारोबार किया है। यह फिल्म अनुष्का शेट्टी की मुख्य भूमिका वाली महिला प्रधान फिल्म है।  यह फिल्म तेलुगु और तमिल में प्रदर्शित की गई थी।  






नोआखली बंगाल में, १९४६  मे, पाकिस्तान बनवाने के लिए दबाव बनाने के लिए मुसलमानों द्वारा हिन्दुओ के कत्लेआम पर फिल्म द बंगाल फाइल्स ने पहले दिन १.७५ करोड़ का विशुद्ध व्यवसाय किया। यद्यपि यह द कश्मीर फाइल्स के पहले दिन के व्यवसाय से काफी कम है। फिर भी विवेक अग्निहोत्री की यह फिल्म दर्शको को झिंझोड़ने में सफल लगती है। इस फिल्म में मिथुन चक्रवर्ती का चरित्र दर्शकों को आकृष्ट कर रहा है।





 

एआर मुरुगादॉस निर्देशित तमिल फिल्म मद्रासी ने पहले दिन बॉक्स ऑफिस पर १३. १ करोड़ का विशुद्ध व्यवसाय किया।  इस साइकोलॉजिकल एक्शन थ्रिलर के नायक शिवकार्तिकेयन हैं और उनकी नायिका रुक्मिणी वसंत है। 






हॉलीवुड की हॉरर फिल्म द कंजूरिंग लास्ट रइट्स ने १७.५ करोड़ का व्यवसाय किया। इस फिल्म ने सबसे अधिक दस करोड़ अंग्रेजी संस्करण से और उसके बाद हिंदी संस्करण से ६,३५ करोड़ का व्यवसाय किया।  यह फिल्म हॉलीवुड की सुपरनैचरल हॉरर कंजूरिंग फिल्म सीरीज की नौंवी फिल्म है। 





निर्माता साजिद नाडियाडवाला की बागी सीरीज में चौथी फिल्म बागी ४ ने बॉक्स ऑफिस पर १२ करोड़ का विशुद्ध व्यवसाय किया है। इस फिल्म के निर्देशक कन्नड़ फिल्मों के निर्देशक ए हर्षा है। इस फिल्म में टाइगर श्रॉफ के साथ संजय दत्त, सोनम बाजवा और हरनाज़ संधू सह भूमिकाओं में है। 





इससे स्पष्ट है कि शुक्रवार को बॉक्स ऑफिस पर भारतीय फिल्मों पर हॉलीवुड की फिल्म भारी पड़ी है।  शनिवार को भी द कंजूरिंग लास्ट रइट्स भारी पड़ती लग रही है। 





इस बार शुक्रवार ५ अगस्त को, जान्हवी कपूर की हिंदी फिल्म परम सुंदरी का आठवां दिन था। फिल्म ने आठवे दिन १.७५ करोड़ जुटाए।  अर्थात इसका आठवे दिन का व्यवसाय द बंगाल फाइल्स के बराबर रहा।  शुक्रवार को मलयालम हॉरर फिल्म लोका पार्ट १ चंद्रा का नौंवा दिन था।  फिल्म ने अपने मलायलम, तेलुगु और तमिल संस्करणों से कुल ७.८५ करोड़ का व्यवसाय किया।  दूसरे सप्ताह में अब तक परम सुंदरी ४१.५ करोड़ और लोका पार्ट १ चंद्रा ६२.५५ करोड़ का व्यवसाय कर चुकी है। 

'धमाल' फिल्मों का बॉक्स ऑफिस पर कॉमेडी #Dhamaal4 !



नवीनतम समाचार यह है कि निर्देशक इंद्रकुमार की धमाल फ्रैंचाइज़ी की चौथी फिल्म धमाल ४ की शूटिंग पूरी हो चुकी है ।  यह कॉमेडी फिल्म सीरीज ईद पर २० मार्च २०२६ को प्रदर्शित की जाएगी।  इस फिल्म में अजय देवगन के अतिरिक्त रितेश देशमुख, अरशद वारसी, जावेद जाफरी, संजय मिश्रा, एशा गुप्ता, संजीदा शैख़, अंजलि आनंद, विजय पाटकर, उपेंद्र लिमये और रवि किसन की हास्यास्पद भूमिकाएं है। 





यहाँ रोचक तथ्य यह है कि मित्र जोड़ी इंद्रकुमार और अशोक ठाकरिया द्वारा २००७ में प्रारम्भ धमाल की पहली दो फिल्मों में, इन दोनों के परम मित्र अभिनेता अजय देवगन नहीं थे। किन्तु, तीसरी और चौथी धमाल में अजय देवगन तो हैं, किन्तु इन तीनों के परम मित्र संजय दत्त इन दोनों फिल्मों में नहीं थे। यद्यपि, संजय दत्त पहली और दूसरी धमाल में सम्मिलित थे। 





पहली धमाल ७ सितम्बर २००७ को, सीक्वल डबल धमाल २४ जून २०११ को, टोटल धमाल २२ फरवरी २०१९ को तथा चौथी धमाल २० मार्च २०२६ को प्रदर्शित होने जा रही है। इस प्रकार से पहले धमाल के चार साल बाद, इसके आठ साल बाद तीसरी धमाल और चौथी धमाल सात साल बाद प्रदर्शित होने जा रही है। पहली तीन धमाल फिल्मों के निर्माण में १३९ करोड़ खर्च हुए थे और इन तीन फिल्मो ने ३४९.५४ करोड़ का कारोबार किया।





इंद्रकुमार की कॉमेडी श्रृंखला धमाल, डबल धामा, टोटल धमाल और धमाल ४ के अतिरिक्त भी कुछ धमाल शीर्षक शामिल फिल्मों का निर्माण हुआ है। वास्तविकता तो यह है कि धमाल शीर्षक इंद्रकुमार का मौलिक शीर्षक नहीं है।  १९८७ में एक टीवी सीरीज धमाल प्रसारित हुई थी।  इस सीरीज में गुजरे ज़माने की फिल्मों में मेहमूद की जोड़ीदार शुभा खोटे की बेटी भावना बलसावर, मोनीष बहल और सुदेश भोंसले की इस हास्य सीरीज छोटी नाट्य श्रंखला थी, जिसमे बड़े संजय दत्त, गोविंदा, अनिल कपूर, सतीश शाह,  नीलम मेहरा, राजेन्द्रनाथ आदि बॉलीवुड के कलाकार मेहमान के रूप में आते थे। 





हमाल दे धमाल १९८९ में प्रदर्शित मराठी हास्य फिल्म थी। इस फिल्म में लक्ष्मीकांत बेर्डे और वर्षा उषगांवकर प्रमुख भूमिका में थे।  यह फिल्म अनिल कपूर की इकलौती मराठी फिल्म थी।  





मराठी ड्रामा फिल्म धूम २ धमाल (२०११) में हास्य प्रसंग दिलचस्प थे। अशोक सर्राफ, सचिन गोस्वामी और सुशांत सेलार अभिनीत यह फिल्म दो युवाओं की कहानी है, जो आत्महत्या करना चाहते हैं।  किन्तु, फंस जाते हैं एक अंडरवर्ल्ड  डॉन के चंगुल में।  वह इससे तभी छुटकारा पा सकते है, जब वह डॉन की बेटी को दूसरे गिरोह से सुरक्षित रखे। इस फिल्म के निर्देशक सचिन गोस्वामी थे। 





प्रियदर्शन की ड्रामा शीर्षक वाली कॉमेडी ड्रामा फिल्म कमाल धमाल मालामाल २८ सितम्बर २०१२ को प्रदर्शित हुई थी।  इस फिल्म में, नाना पाटेकर, श्रेयस तलपड़े, ओमपुरी और परेश रावल हास्य चरित्र कर रहे थे। इस फिल्म में नाना पाटेकर से मुश्किल से तीन महीना छोटे ओमपुरी ने उनके पिता की भूमिका की थी। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हुई थी। 





एक फिल्म निर्देशक और एक फिल्म लेखक मित्र अपनी अगली फिल्म के लिए फिनांसर जुटाने के लिए हास्यप्रद संघर्ष करते है।  इस फिल्म में इरशाद खान के निर्देशन में अनु कपूर, मनोज जोशी, राजपाल यादव, प्रियांशु चटर्जी की भूमिकाएं थी। यह फिल्म १८ अगस्त २०२३ को प्रदर्शित हुई थी। 





स्मीप कंग निर्देशित जसविंदर भल्ला, सुनील ग्रोवर और जिमी शेरगिल अभिनीत कॉमेडी फिल्म अजब गजब धमाल २६ जनवरी २०२४ को प्रदर्शित हुई थी। इस फिल्म की कहानी दो कैदियों के जेल से भाग निकल लेने पर केंद्रित थी।  उस पर उस समय बिजली गिरती है कि बैसाखी के दिन जेल मंत्री उनकी रिहाई का आदेश करने वाले थे। 





उपरोक्त धमाल फिल्मों के अतिरिक्त कुछ अन्य धमाल फिल्मों ने भी बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाने की कोशिश की।  इनके गुजराती में फ़ेकबुक धमाल (२०१९), महेश कोठारे निर्देशित फुल ३ धमाल (२००८), बेर्डे पति पत्नी लक्ष्मीकांत बेर्डे और प्रिया की फिल्म धमाल जोड़ी (१९९५), गुजराती फिल्म बाप धमाल डिक्रा कमाल २०१७ में प्रदर्शित हुई थी। 

दिलीप कुमार के सह कलाकारों के साथ तनावपूर्ण संघर्ष की फिल्म 'संघर्ष'



संघर्ष एक ऐसा शब्द है, जिस पर फिल्म उद्योगों ने कई फ़िल्में बनाई है।  यह फ़िल्में केवल संघर्ष  या दूसरे शब्दों के साथ संघर्ष शब्द जोड़ कर बनाई गई। जैसे जीवन एक संघर्ष।  किन्तु, संघर्ष शीर्षक के साथ भिन्न भाषाओं में अवश्य बनी है। उदाहरणस्वरूप, खेसारी लाल यादव और काजल राघवानी अभिनीत २०१८ और २०२३ में प्रदर्शित भोजपुरी फिल्म संघर्ष और संघर्ष २, सुलभा आर्य और अश्रुबा की मराठी फिल्म संघर्ष (२०१४), रंजीत मल्लिक की बँगला फिल्म संघर्ष, प्रेम नज़ीर, बालन के नायर और सुकुमारन अभिनीत मलयालम फिल्म संघर्षं उल्लेखनीय है। हिंदी में दो फ़िल्में विशुद्ध संघर्ष शीर्षक के साथ बनाई गईं। प्रीटी ज़िंटा और अक्षय कुमार की १९९९ में प्रदर्शित फिल्म संघर्ष से ३१ साल पहले प्रदर्शित दिलीप कुमार, वैजयंतीमाला, बलराज साहनी, संजीव कुमार और जयंत की फिल्म संघर्ष (१९६८) उल्लेखनीय है।  आज इसी फिल्म के विषय में। 





हरनाम सिंह रवैल द्वारा निर्देशित और १८ अक्टूबर १९६८ को प्रदर्शित फिल्म संघर्ष  विनाशक फिल्म थी।  यह फिल्म निरंतर सफल फिल्म दे रहे बॉलीवुड के ट्रेजेडी किंग दिलीप कुमार की पहली असफल फिल्म थी। यद्यपि, संघर्ष की असफलता के बाद भी दिलीप कुमार ने कई हिट फिल्मे दी।  किन्तु, यह उनके लिए बड़ा झटका थी। वास्तविकता तो यह है कि संघर्ष की असफलता दिलीप कुमार के अपने सह अभिनेताओं के साथ संघर्ष का ही परिणाम है।  





निर्माता निर्देशक एच एस रवैल ने, महाश्वेता देवी की बांग्ला भाषा में  लघु कथा लायली आस्मानेर आयना पर आधारित फिल्म संघर्ष बनाने का निर्णय लिया था।  संघर्ष का कथानक बनारस की पृष्ठभूमि पर बनारस के घाटों पर घूमते ठगों पर आधारित था, जो भक्तों से लूटपाट करते थे और मार भी देते थे। यह फिल्म इसी कहानी पर वैचारिक संघर्ष और एक वैश्या से रोमांस की कहानी कहती थी। 





यह फिल्म प्रदर्शन से पहले ही काफी विवादों में रही।  विशेष रूप से बनारस के पंडों ने इसे अपनी छवि को कलंकित करने वाला बताया।  पूरे देश में भी इस फिल्म का विरोध हुआ।  किन्तु, इसके बाद भी फिल्म को सेंसर बोर्ड द्वारा अवयस्कों के लिए देखने योग्य फिल्म का यू प्रमाण पत्र दिया गया।  अब यह बात दूसरी ही है कि फिल्म फिर भी असफल हो गई।





संघर्ष में, अपने समय के शीर्ष पर सशक्त कलाकारों को लिया गया था।  फिल्म में दिलीप कुमार, वैजयंतीमाला, बलराज साहनी, जयंत, उल्हास, दुर्गा खोटे जैसे सशक्त कलाकारों के साथ नवोदित संजीव कुमार को भी लिया गया था।  फिल्म का संगीत नौशाद ने दिया था और गीतकार शकील बदायुनी थी। यह फिल्म नौशाद और शकील बदायुनी की दर्द फिल्म से बनी जोड़ी की अंतिम फिल्म साबित हुई। 





दिलीप कुमार का पहला संघर्ष, राजकुमार से हुआ।  फिल्म में राजकुमार को दिलीप कुमार के सामने अधिक सशक्त भूमिका में लिया गया था। राजकुमार ने, १९५९ में प्रदर्शित फिल्म पैगाम में कम अनुभवी होने के बाद भी दिलीप कुमार को टक्कर दी। राजकुमार और दिलीप कुमार के बीच के दृश्यों के लिए राजकुमार को सराहना मिली।  इस प्रशंसा से उखड़े दिलीप कुमार को जब लगा कि राजकुमार को उनके चरित्र के साथ संघर्ष करने वाले चरित्र के लिए राजकुमार को लिया गया है, तो उन्होंने राजकुमार को बाहर का रास्ता दिखा दिया।  राजकुमार का स्थान संजीव कुमार ने लिया।  अब यह बात दूसरी हैं कि संजीव कुमार के द्वारका प्रसाद ने दिलीप कुमार के कुंदन से अधिक प्रशंसा बटोरी।  दिलीप कुमार को इसकी आशा नहीं थी कि एक कम अनुभवी अभिनेता उन्हें ऎसी टक्कर देगा। इसके बाद, दिलीप कुमार ने १९८२ में प्रदर्शित फिल्म विधाता और राजकुमार के साथ १९९१ में प्रदर्शित फिल्म सौदागर ही की। 





दिलीप कुमार का वैजयंतीमाला के साथ भी मनमुटाव था।  दोनों में आपस में बातचीत तक नहीं होती थी। ऐसा समाचार था कि वैजयंतीमाला फिल्म को बीच में ही छोड़ देंगी और उनके स्थान पर वहीदा रहमान आ जाएंगी।  क्योंकि, वहीदा रहमान ने दिलीप कुमार की फिल्म राम और श्याम में वैजयंतीमाला को हटाया था। किन्तु, वैजन्तीमाला ने फिल्म पूरी की। 





संघर्ष एक ऎसी फिल्म थी, जिसमे निर्देशक एच एस रवैल ने दिलीप कुमार के साथ पहली और अंतिम बार काम किया था।  वैजयंतीमाला की भी दिलीप कुमार के साथ अंतिम फिल्म संघर्ष ही थी। इस फिल्म के बाद दिलीप कुमार कभी भी रवैल और वैजयंतीमाला के साथ नहीं दिखाई दिए। दिलीप कुमार का लेखक अबरार अल्वी से भी झगड़ा हुआ था।  इससे क्रोधित हो कर अबरार ने दिलीप कुमार की फिल्म वैराग बीच में ही छोड़ दी थी। 





फिल्म में वैजयंतीमाला को लिए जाने की कहानी बड़ी दिलचस्प है।  संघर्ष से पहले रवैल ने अशोक कुमार, राजेंद्र कुमार, निम्मी और साधना के साथ फिल्म मेरे मेहबूब बनाई थी।  यह बड़ी सफल फिल्म थी।  इस फिल्म के बाद जब रवैल ने संघर्ष की योजना बनाई तो उन्होंने साधना को फिल्म की वैश्या की भूमिका के लिए चुना था। किन्तु, उस समय साधना थयरॉइड की समस्या से जूझ रही थी।  उन्होंने रवैल से किसी अन्य अभिनेत्री के साथ फिल्म बनाने का सुझाव दिया।  किन्तु, रवैल ने कहा कि मैं उनके स्वस्थ होने की प्रतीक्षा करूंगा। किन्तु, एक प्रमोशन के दौरान साधना को मालूम पड़ा कि रवैल ने, उनके स्थान पर वैजयंतीमाला को ले लिया है। इससे साधना बहुत चोटिल हुई और उन्होंने फिर कभी रवैल से बात नहीं की। 






संघर्ष में दिलीप कुमार के बचपन की भूमिका के लिए मेहबूब खान की खोज साजिद को लिया गया था। किन्तु, हॉलीवुड की फिल्म  के लिए साजिद ने फिल्म बीच में ही छोड़ दी।  उनके स्थान पर बाल कलाकार दिलीप धवन को लिया  गया था।  इस फिल्म के बाद, दिलीप धवन को दिलीप कुमार के साथ फिल्म करने का दूसरा अवसर फिल्म इज़्ज़तदार में मिला।  बताते यह भी हैं कि एक अन्य बाल भूमिका के लिए डिंपल कपाडिया के नाम पर भी विचार हुआ था। किन्तु, वह परदे पर दिलीप धवन से बड़ी दिखाई दे रही थी। इसलिए उन्हें हटा दिया गया।  उनकी जगह जूनियर मेहमूद आ गए।  

Friday, 5 September 2025

विनोद खन्ना के ‘हिमालय पुत्र’ अक्षय खन्ना



हिमालय पुत्र, १९९७ में प्रदर्शित रोमांस फिल्म थी।  इस फिल्म का निर्देशन पंकज पराशर ने किया था। पंकज, उस समय तक, नसीरुद्दीन शाह और अर्चना पूरण सिंह के साथ एक्शन फिल्म जलवा को सफल बना कर बॉलीवुड में अपना जलवा बिखेर रहे थे। यही कारण था कि श्रीदेवी, सनी देओल और रजनीकांत ने, श्रीदेवी की दोहरी भूमिका वाली कॉमेडी फिल्म चालबाज़ को स्वीकार किया था।  पराशर ने अनिल कपूर और माधुरी दीक्षित के साथ कॉस्ट्यूम ड्रामा फिल्म राजकुमार भी बना रहे थे ।





स्पष्ट हैं कि पंकज पराशर काफी मशहूर हो चुके थे।  इसलिए, जब अभिनेता विनोद खन्ना ने अपने बेटे अक्षय कुमार को नायक बनाने के लिए फिल्म बनाने का निर्णय लिया, तब उनके दिमाग में निर्देशक के रूप में पंकज पराशर ही पहला नाम थे। इस प्रकार से, विनोद खन्ना ने क्रिसमस १९९४ के दिन एक तड़क भड़क वाले समारोह में अपने बेटे को पंकज पराशर के निर्देशन में नायक बनाने की घोषणा कर दी। 





विनोद खन्ना ने, हिमालय पुत्र के लिए पंकज पराशर को अनुबंधित करने से पहले शर्त रखी थी कि फिल्म रोमांस होगी तथा इस की स्क्रिप्ट हनी ईरानी लिखेंगी। फिल्म का संगीत अनु मलिक देंगे।  विनोद खन्ना ने, पंकज पराशर से अक्षय खन्ना को मिलवाया भी।  किन्तु, जब फिल्म शुरू हुई तो विनोद खन्ना ने सुझाव देने के अतिरिक्त फिल्म निर्माण में पंकज पराशर को खुली छूट दे दी।  




विनोद खन्ना अपनी फिल्म के शीर्षक में हिमालय शब्द अवश्य रखना चाहते थे। क्योंकि, उनकी फिल्म का कथानक पर्वतारोहण पर था।  इसके लिए उन्होंने  हिमालय की गोद में और शिखर जैसे शीर्षक सोच रखे थे। उसी दौरान, सिल्वेस्टर स्टैलोन की पर्वतारोहण पर हॉलीवुड  क्लिफहैंगर प्रदर्शित हुई थी।  इस फिल्म को भारत में हिंदी में शिखर पुत्र शीर्षक के साथ प्रदर्शित किया गया था। इसके बाद, अक्षय खन्ना की पहली फिल्म का नाम हिमालय पुत्र रख दिया गया। 




हिमालय पुत्र इकलौती ऎसी फिल्म थी, जिसमे पिता विनोद खन्ना ने बेटे अक्षय खन्ना के साथ अभिनय किया था।  इस फिल्म के बाद, यह दोनों अभिनेता फिर एक साथ नहीं दिखाई दिए। 





हिमालय पुत्र से, केवल अक्षय खन्ना ही नहीं दो अभिनेत्रियों अंजला ज़वेरी और शज़िआ मालिक का भी डेब्यू हुआ था। किन्तु, यह दोनों फिल्म के लिए पहला चुनाव नहीं थी। विनोद खन्ना फिल्म के लिए बिपाशा बासु और रिंकी खन्ना को लेना चाहते थे। विनोद खन्ना ने, बिपाशा बॉस कोई एक सौंदर्य प्रतियोगिता में फ्लोरिडा  में देखा था। उन्होंने हिमालय पुत्र के लिए बिपाशा बासु को प्रस्तावित किया। किन्तु, बिपाशा बासु को लगा कि वह अभी बहुत छोटी है. इसलिए मना कर दिया ।





विनोद खन्ना अपने मित्र राजेश खन्ना और डिंपल की बेटी रिंकी खन्ना को फिल्म में लेना चाहते थे। किन्तु, वह पढ़ाई में व्यस्त थी। इसके बाद फिल्म में अंजला ज़वेरी को ले लिया गया। श्वेता मेनन के इंकार करने के बाद फिल्म में शज़िआ मालिक आ गई । 





यद्यपि, विनोद खन्ना ने, अपनी फिल्मों में जया प्रदा और हेमा मालिनी के साथ काम किया था।  किन्तु, वह अक्षय खन्ना की माँ की भूमिका के लिए जयाप्रदा को लेना चाहते थे। जयाप्रदा के मना करने के बाद फिल्म में हेमा मालिनी आ गई। 





१९८० में प्रदर्शित रोमांटिक एक्शन थ्रिलर फिल्म क़ुरबानी दो दोस्तों की कहानी थी। यह दोस्त निर्माता निर्देशक फ़िरोज़ खान और विनोद खन्ना थे।  इसी फिल्म में एक खुशदिल पुलिस वाले की भूमिका अमजद खान ने की थी। क़ुरबानी की शूटिंग के दौरान विनोद खन्ना और अमजद खान में अच्छी दोस्ती हो गई। १९९२ में अमजद खान की असामयिक मृत्यु हो गई। किन्तु, जब विनोद खन्ना ने हिमालय पुत्र लांच की तब अपने मित्र के बेटे शादाब को फिल्म के विलेन की भूमिका के  लिए ले लिया। यद्यपि, शादाब से पहले मामिक उपयुक्त समझे गए थे।





फिल्म की शूटिंग के दौरान, शादाब खान को लगा कि विनोद खन्ना अपने बेटे पर अधिक ध्यान दे रहे है। इसके अतिरिक्त फिल्म पूरी तरह से अक्षय खन्ना पर ही केंद्रित है।  यह सोच कर शादाब खान फिल्म से बाहर निकल गए।  उनकी जगह विनोद खन्ना ने रॉकी ग्रोवर को ले लिया।  






फिल्म हिमालय पुत्र में भगवान् शिव की एक प्रतिमा दिखाई देती है। इस ४० फुट ऊंची प्रतिमा का निर्माण कला निर्देशक नितिन देसाई ने फाइबर का उपयोग कर किया था। इस काम में ७२ तकनीशियन उनके साथ थे। इसे बनाने में १२ दिन लगे।  इस प्रतिमा को बॉम्बे से ढो कर कश्मीर में डलहौज़ी में ले जाया गया, जहाँ हिमालय पुत्र की शूटिंग चल रही थी। 





अक्षय खन्ना ने, जब हिमालय पुत्र की, तब वह मात्र १९ साल के थे। वह स्वभाविक अभिनेता थे।  किन्तु, उनकी हिंदी अच्छी नही थी।  इसलिए उन्हें हिंदी बोलने में कठिनाई होती थी।  वह अपने संवाद अंग्रेजी में याद कर सोचते थे।  उसके बाद कैमरा के सामने संवाद बोलते  थे। पंकज पराशर भी उन्हें स्वभाविक अभिनेता मानते थे।  उनमें अभिनय क्षमता ही थी कि फ्लॉप हिमालय पुत्र के बाद भी अक्षय खन्ना आज तक फिल्म इंडस्ट्री में टिके हुए हैं। जबकि, अंजला ज़वेरी, शादाब खान, रॉकी ग्रोवर और शज़िआ मलिक का कोई अतापता नहीं है। 

Thursday, 4 September 2025

ग्यारह बड़े सितारों वाली रीना रॉय की 'नागिन'



आज से लगभग पचास साल पहले प्रदर्शित हुई फिल्म नागिन बॉलीवुड फिल्मों के लिए मील का पत्थर साबित होती थी। इस फिल्म में बॉलीवुड के ११ बड़े सितारे थे। इसके बाद भी फिल्म के निर्माण में १ करोड़ ४० लाख खर्च हुए थे।   किन्तु,बॉक्स ऑफिस पर इस फिल्म ने सात करोड़ का व्यवसाय कर तहलका मचा दिया था।  इसके बाद, सितारा बहुल फिल्मों की परंपरा चल निकली।





 

नागिन का निर्माण शंकर मूवीज के बैनर तले राजकुमार कोहली ने किया था। वह ही फिल्म के निर्देशक भी थे। इस फिल्म को राजेंद्र सिंह की कहानी पर जग्गीराम पॉल और चरणदास शोख ने लिखा था। संवाद इन्दर राज आनंद ने लिखे थे। फिल्म के गीत वर्मा मलिक ने  संगीतकार लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की धुनों पर लिखे थे।







नागिन १९ जनवरी १९७६ को प्रदर्शित हुई थी।  इस फिल्म में सुनील दत्त, रीना रॉय, जीतेन्द्र, फ़िरोज़ खान, संजय खान, विनोद महरा, कबीर बेदी, रेखा, योगिता बाली और मुमताज जैसे बड़े कलाकार रोचक चरित्र कर रहे थे।  अन्य सह कलाकारों में अनिल धवन, प्रेमा नारायण, नीलम मेहरा, प्रेमनाथ, अरुणा ईरानी, रंजीत, हिना कौसर, रुपेश कुमार, सुलोचना, कोमिल्ला विर्क, मारुती, गुलशन अरोड़ा, टुनटुन, आदि के नाम उल्लेखनीय है। 






फिल्म का कथानक के अनुसार प्रोफेसर विजय  को एक शोध के दौरान मालूम पड़ता है कि एक उम्र के बाद नाग नागिन इच्छाधारी हो जाते है। वह मानव स्वरुप में आ सकते है। उनके मित्र राज (फ़िरोज़ खान), उदय (कबीर बेदी),  किरण (अनिल धवन) और सूरज (संजय खान) इस पर विश्वास नहीं करते।  एक दिन वह लोग जंगल में शिकार के लिए जाते है। जंगल में एक पेड़ के नीचे वह दो नागों को मणि के प्रकाश में नृत्य करते देखते है। (इस नृत्य पर फिल्माया गया गीत तेरे संग प्यार में पूरी फिल्म में कई बार पार्श्व में बजता है।) इसी समय किरण गोली चला देता है, जिसमे नाग (जीतेन्द्र) की मृत्यु हो जाती है। नाग की मृत्यु से दुखी नागिन (रीना रॉय), नाग की आँखों में झांक कर हमलावरों की पहचान करती है और उन्हें एक एक कर मारती है। 





नागिन की सफलता के बाद, फिल्म को तेलुगु में देवतालरा दीविनचाँदी (१९७७) शीर्षक के साथ रीमेक किया गया था।  इस फिल्म में नागिन की भूमिका जयमालिनी ने की थी।  तमिल फिल्म नीया में नागिन  भूमिका श्रीप्रिया ने की थी।  वैसे यह फिल्म दो विदेशी फिल्मों निर्देशक फ्रांकोइस त्रूफो की फ्रेंच भाषा में फिल्म द ब्राइड वोर ब्लैक और जर्मन स्पेनिश फिल्म शी किल्ड इन एक्सटेसी की रीमेक थी।  






नागिन की सफलता के बाद, निर्माता निर्देशक राजकुमार कोहली ने फिल्म की सीक्वल लौट आई नागिन बनाने की योजना बनाई थी। सीक्वल फिल्म में रीना राय के अतिरिक्त पुरानी नागिन के कोई भी कलाकार नहीं थे।  कोहली ने, फिल्म की भूमिकाओं के लिए शत्रुघ्न सिन्हा, ऋषि कपूर, राकेश रोशन, कुमार गौरव और रंजीता को लिया था।  किन्तु, यह फिल्म बाद में बंद कर दी गई। यहाँ बताते चलें कि कोहली ने राकेश रोशन को ही कबीर बेदी की भूमिका देनी चाही थी। किन्तु, उन्होंने मना कर दिया। 






रीना रॉय ने, ज़रुरत, मिलाप, जंगल में मंगल जैसी फिल्मों से अपने फिल्म जीवन का प्रारम्भ किया था। इसके बाद भी उन्हें कुछ छोटे बजट की फिल्मों में देखा गया। किन्तु, नागिन में इच्छाधारी नागिन की भूमिका  बॉलीवुड की ए श्रेणी की फिल्मों की नायिका बन गई।  कहा जाता है कि सुनील दत्त और जीतेन्द्र ने राजकुमार कोहली से रीना रॉय को नागिन बनाने का सुझाव दिया था। क्योंकि, उस समय तक रीना रॉय जीतेन्द्र के साथ जैसे को तैसा और सुनील दत्त के साथ जख्मी जैसी फिल्मे कर चुकी थी। नागिन की सफलता के बाद रीना रॉय, राजकुमार कोहली की फिल्मों की स्थाई सदस्य बन गई। 






बताते हैं कि प्रारम्भ में रीना रॉय को पांच बड़े खलनायकों से बदला लेना था। किन्तु, बाद में आपना विचार बदलते हुए कोहली ने पांच नायकों के साथ बदला लेते दिखा दिया। 





रीना रॉय को, नागिन की नागिन बनने का अवसर ऐसे ही नहीं मिल गया।  राजकुमार कोहली अपनी फिल्म की नागिन रेखा को बनाना चाहते थे। किन्तु, रेखा चाहती थी कि वह फिल्म के नागिन से इकलौते बच जाने वाले सुनील दत्त की नायिका बनना चाहती थी। कहते हैं कि नागिन की सफलता के बाद रेखा को अपने निर्णय पर बहुत दुःख हुआ।  रेखा से भी पहले यह भूमिका सायरा बानू को प्रस्तावित की गई थी।  किन्तु, सायरा बानू नकारात्मक चरित्र नहीं करना चाहती थी। 

कल ५ सितम्बर से प्रदर्शित हो रही है @MsAnushkaShetty ⁩ की फिल्म #Ghaati


 

संक्रांति २०२६ में प्रदर्शित होगी #NandamuriBalakrishna की पौराणिक महागाथा #Akhanda2Tandavam



नंदमुरी बालकृष्ण द्वारा साझा की गई पोस्ट में दी गई तस्वीर, बोयापति श्रीनु द्वारा निर्देशित तेलुगु फिल्म के सीक्वल अखंड 2 का प्रचार करती है, जिसमें हिंदू पौराणिक कथाओं से जुड़ा एक आकर्षक त्रिशूल चिन्ह है, जो आईएमडीबी और विकिपीडिया के उद्योग अनुमानों के अनुसार, ₹100 करोड़ से अधिक की वैश्विक कमाई के साथ मूल 2021 की फिल्म की सफलता को दर्शाता है।





 

तेलुगु फिल्म अभिनेता नान्दीमुरि बालाकृष्णा की फिल्म अखण्डा २ अब दशहरा पर प्रदर्शित होने के स्थान पर संक्रांति २०२६ में प्रदर्शित होगी। इस तथ्य की घोषणा फिल्म के नायक नान्दीमुरि बालकृष्ण ने अपने सोशल मीडिया पर दी।  





अखण्डा २, बलैया से सम्बोधित अभिनेता की यह फिल्म उनकी २ दिसंबर २०२१ को प्रदर्शित फंतासी एक्शन ड्रामा तेलुगु फिल्म अखण्डा की सीक्वल फिल्म है। बोयापति श्रीनू निर्देशित अखण्डा का निर्माण ६० करोड़ के बजट से हुआ था। फिल्म ने वर्ल्डवाइड १५० करोड़ का व्यवसाय किया। इस सफलता का परिणाम अखण्डा २ है। 





२०२१ की फिल्म में, नन्दीमुरि बालकृष्ण ने अखण्डा और मुरली कृष्णा की दोहरी भूमिका की थी।  यह फिल्म के कथानक के अनुसार जब दुष्ट वरदराजुलू मुरली कृष्ण को हानि पहुंचाने का प्रयास करता है, तब मुरली कृष्ण कोई भी उपाय नहीं छोड़ना चाहता। यह फिल्म प्रकृति में ईश्वर को मानने और उसकी रक्षा करने का सन्देश देती थी।





विगत दिनों, अखण्डा २ ताण्डवम का टीज़र दर्शकों के लिए जारी किया गया।  इस टीज़र से फिल्म में नान्दीमुरि बालकृष्ण प्रचंड दिव्य अवतार में दिखाई देते है। टीज़र में नंदी पर सवार भगवान् शिव त्रिशूल धारण किये हुए प्रचंड मुद्रा में फिल्म में भक्ति का रस घोलते है। 





फिल्म में शिव का त्रिशूल प्रतीकात्मक है। शिव संहारक और परिवर्तन के प्रतीक है। उनका त्रिशूल प्रकृति के तीन गुण सत्व तम और राजस का प्रतीक है। यह भूत वर्तमान और भविष्य है। इससे स्पष्ट है कि अखण्डा २ तांडवम में एक्शन और आध्यात्मिकता का मिश्रण होगा।  नान्दीमुरि बालकृष्ण इसे पूरी निष्ठां से कर सकते है। फिल्म का पहले दशहरा और अब संक्रांति में प्रदर्शित करने का उद्देश्य भी फिल्म की धार्मिक शुचिता को स्थापित करता है।





अखण्डा २ तांडवम का बॉलीवुड से सम्बन्ध भी है। क्योंकि, फिल्म में जननी के महत्वपूर्ण चरित्र को सलमान खान की फिल्म बजरंगी भाईजान की मुन्नी की बालकलाकार हर्षाली मल्होत्रा कर रही है। 





अखण्डा तांडवम के संदर्भ में दो महत्वपूर्ण तथ्य। इस फिल्म के कुछ महत्वपूर्ण दृश्यों को जॉर्जिया की बर्फीली वादियों में फिल्माया गया है।  इस फिल्म की शूटिंग प्रयागराज के महाकुम्भ में भी की गई है।





फिल्म में, अखण्डा, जिस युवति को दुष्ट व्यक्ति से बचाने का प्रयास करते हैं, उसकी भूमिका संयुक्ता ने की है तथा दुष्ट चरित्र आदि पिनिशेट्टी ने की है। 

Wednesday, 3 September 2025

बॉक्स ऑफिस पर ढह गई धर्मेन्द्र और सनी देओल की सल्तनत !



सनी देओल के लिए १९८६ का साल बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण रहा था।  इस साल उनकी तीन फ़िल्में प्रदर्शित हुई थी और तीनों ही बॉक्स ऑफिस पर असफल हुई थी।  बेताब के बाद अर्जुन से स्वयं को स्थापित कर चुके सनी देओल के लिए यह बड़ा झटका था। उनकी सल्तनत, सवेरे वाली गाडी और समंदर जैसी बड़ी फ़िल्में प्रदर्शित हुई और बॉक्स ऑफिस पर मुंह के बल गिरी। 










इनमे, सनी देओल की १९८६ मे प्रदर्शित होने वाली पहली फिल्म सल्तनत की असफलता उनके दुश्मनों को भी चौंकाने वाली थी। यह एक पीरियड एक्शन ड्रामा फिल्म थी।  सल्तनत का निर्माण २.९० करोड़ रुपये की लागत से हुआ था।  फिल्म में आज के बड़े बड़े सितारे अभिनय कर कर रहे थे।  किन्तु, सल्तनत देश में कुल १.२८ करोड़  का विशुद्ध व्यवसाय ही कर सकी और विनाशकारी फिल्म साबित हुई। 





सल्तनत की सफलता सुनिश्चित मानी जा रही थी। ऐसा सोचा जाना स्वाभाविक था।  इस फिल्म में धर्मेंद्र और सनी देओल की पिता पुत्र जोड़ी, पहली बार एक साथ थी।  यद्यपि, इन दोनों ने इस से पहले फिल्म सनी की थी। किन्तु, सनी में सनी देओल अपने पिता के साथ किसी फ्रेम में नहीं थे।  सल्तनत में यह दोनों  एक दूसरे के विरुद्ध थे। 





यह फिल्म निर्देशक अर्जुन हिंगोरानी की,धर्मेंद्र के साथ आठवीं फिल्म थी। अर्जुन हिंगोरानी ने कुल दस फिल्मों का निर्माण किया था।  इन सभी में धर्मेंद्र नायक थे।  धर्मेंद्र को बॉलीवुड में संरक्षण और पहला ब्रेक देने वाले अर्जुन हिंगोरानी ही थे। धर्मेंद्र की पहले फिल्म दिल भी तेरा हम भी तेरे के निर्देशक अर्जुन हिंगोरानी ही थे।





जो लोग, अर्जुन हिंगोरानी की फिल्मों से परिचित हैं, वह जानते हैं कि अर्जुन की फिल्मों के शीर्षक में तीन के हुआ करते थे। उदाहरण के लिए कब क्यों और कहाँ, कहानी किस्मत की, खेल  खिलाडी का, कातिलों के कातिल और करिश्मा कुदरत का। यह सभी फ़िल्में बॉक्स ऑफिस पर सफल हुई थी। इसलिए, अर्जुन हिंगोरानी इस फिल्म का शीर्षक भी तीन के से रखना चाहते थे।  किन्तु, निर्देशक मुकुल एस आनंद को इस प्रकार के शीर्षक फब नहीं रहे थे।  वह फिल्म का शीर्षक सल्तनत ही रखना चाहते थे।  इस पर अर्जुन हिंगोरानी ने फिल्म को सल्तनत कारनामे कमाल के टैग लाइन के साथ प्रदर्शित करने की सोची।  यह कुछ जमा नहीं। इसलिए फिल्म को सल्तनत शीर्षक के साथ ही प्रदर्शित किया गया। अब यह बात दूसरी है कि बिना के टोटके वाली सल्तनत बॉक्स ऑफिस पर ढह गई। 





सल्तनत फिल्म अभिनेत्री जूही चावला और शशि कपूर के बेटे करण कपूर की पहली फिल्म थी। इस फिल्म की असफलता के बाद, करण का करियर समाप्त सा हो गया।  किन्तु, आमिर खान के साथ रोमांस फिल्म क़यामत  तक की नायिका बनने के बाद जूही चावला बॉलीवुड की बड़ी अभिनेत्री बन गई। इस फिल्म में करण के संवाद उनके भाई कुणाल कपूर ने बोले थे। क्योंकि, करण की हिंदी बहुत ख़राब थी। 





जैसा कि सभी जानते हैं कि जूही चावला ने फिल्म में  जरीना की भूमिका की थी। किन्तु, जूही चावला इस भूमिका के लिए अर्जुन हिंगोरानी की पहली पसंद नहीं थी। उन्होंने जरीना के लिए अभिनेत्री अनीता राज को लिया था। किन्तु, बाद में उन्हें हटा कर जूही चावला को ब्रेक दे दिया गया। अनीता राज ने बाद में अर्जुन हिंगोरानी के बेटे सुनील हिंगोरानी के साथ विवाह किया था।





सल्तनत में, अभिनेत्री श्रीदेवी ने राजकुमारी यास्मीन की भूमिका की थी। इस फिल्म में श्रीदेवी के संवाद डब करवाए गए थे। सल्तनत, श्रीदेवी की फिल्म के निर्देशक मुकुल एस आनंद के साथ पहली फिल्म थी। इस फिल्म के बाद, श्रीदेवी ने मुकुल की फिल्म खुदा गवाह में ही अभिनय किया था।  विडम्बना  कि यह फिल्म भी असफल हुई। यह दोनों फिल्म सीआईडी भी करना चाहते थे। किन्तु, बाद में यह फिल्म बंद कर दी गई। 





मुकुल आनंद ने सल्तनत की स्क्रिप्ट १९८१ में लिखी थी। वह इस फिल्म को अमिताभ बच्चन के साथ बनाना चाहते थे। किन्तु, अमिताभ बच्चन इस पटकथा को किसी स्थापित निर्देशक के साथ बनवाना चाहते थे। किन्तु, मुकुल ने फिल्म की पटकथा अमिताभ बच्चन को नहीं दी। पांच साल बाद, इसे सनी देओल के साथ बनाया गया। उल्लेखनीय है कि अमिताभ बच्चन ने, मुकुल आनंद की हम और अग्निपथ जैसी बड़ी हिट फिल्में की। 





अर्जुन हिंगोरानी ने फिल्म के प्रदर्शन से पहले यह दावा किया था कि फिल्म प्रमुख टेरिटरी में २ करोड़ का कारोबार करेगी। क्योंकि, इस फिल्म को ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त है।  ऐसी फ़िल्में दशकों में एक बारे बनाई जाती है। 

#RamGopalVarma #ManojBajpayee और #GeneliaD’Souza पहली बार #PoliceStationMeinBhoot में



सत्या (१९९८)  के २७ साल बाद, निर्देशक रामगोपाल वर्मा और अभिनेता मनोज बाजपेई एक साथ नई फिल्म करने जा रहे है।  इस हौन्टिंग हॉरर कॉमेडी फिल्म का शीर्षक पुलिस स्टेशन में भूत दिलचस्प है। यद्यपि, २०२१ में, सैफ अली खान, अर्जुन कपूर, जैक्वेलिन फर्नॅंडेज़ और यामी गौतम की हॉरर कॉमेडी फिल्म भूत पुलिस प्रदर्शित हो चुकी है। ऐसे में प्रश्न पूछा जाना स्वाभाविक है कि रामगोपाल वर्मा और मनोज बाजपेई की फिल्म में नया क्या है ? 





इस फिल्म के कथानक को स्पष्ट करते हुए रामगोपाल वर्मा बताते हैं कि डर उस समय खौफनाक हो जाता है, जब वह सत्ता को चुनौती देता है।  पुलिस स्टेशन इस शक्ति का अंतिम प्रतीक है।  वह इसे अधिक स्पष्ट करते हुए बताते हैं कि जब हम डरते हैं तो पुलिस स्टेशन की ओर भागते हैं।  किन्तु, जब पुलिस डर जाए तो लोग कहाँ जाए। 





रामगोपाल वर्मा जिस प्रकार से सत्ता को निशाने में रखते है, यह फिल्म सत्ता के डर का चित्रण करने वाले लगती है।  जब सत्ता के भय से पुलिस आम आदमी की रक्षा नहीं कर पाती तो लोग कहाँ जाए। वर्मा इसे फिल्म में जेनेलिआ डिसूज़ा के चरित्र के माधयम से दर्शकों को बता रहे है। वह सत्ता के इस भय को जेनेलिआ के चरित्र से उजागर कर रहे हैं कि भय ही सत्ता है और सत्ता ही भय है। 






यहाँ स्पष्ट करते चलें कि फिल्म पुलिस स्टेशन में भूत जेनेलिआ की मनोज बाजपेई और रामगोपाल वर्मा के साथ पहली फिल्म है।  यद्यपि मनोज बाजपेई और रामगोपाल वर्मा सत्या के बाद एक थ्रिलर फिल्म कौन में अभिनय कर चुके है। फिल्म पुलिस स्टेशन में भूत में मनोज बाजपेई एक पुलिस अधिकारी की भूमिका करते प्रतीत होते है।  इस फिल्म की शूटिंग पूरी हो चुकी है।  फिल्म कब प्रदर्शित होगी, अभी स्पष्ट नहीं है।

Tuesday, 2 September 2025

#Baaghi4 में #HarnaazSandhu की कामुकता का #YehMeraHusn



बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की, २०१६ में प्रारम्भ बागी फ्रैंचाइज़ी की चौथी फिल्म बागी ४ केवल तीन दिनों बाद, ५ सितम्बर को प्रदर्शित होने जा रही है। फिल्म के जारी ट्रेलर से बागी ४ रणबीर कपूर की फिल्म एनिमल की नक़ल प्रतीत होती थी।  इससे टाइगर श्रॉफ के प्रशंसक दर्शक थोड़ा हताश थे।  कदाचित इसीलिए आज फिल्म का एक गीत यह मेरा हुस्न जारी किया गया है। 






बागी ४ में, टाइगर श्रॉफ बॉलीवुड के दो कड़क हुस्न के बीच है।  फिल्म में सोनम बाजवा और हरनाज़ संधू नायिका अभिनेत्रियां है।  संजय दत्त की महत्वपूर्ण भूमिका है। फिल्म के आज जारी गीत में सोनम बाजवा नहीं, हरनाज़ संधू अपने हुस्न का प्रदर्शन कर रही है।  इस गीत में वह कामुकता जगाने वाली डिज़ाइन की टू पीस पोशाक में, हरनाज़ संधू अपनी २०२१ में मिस यूनिवर्स का खिताब दिलाने वाली काया को बेतहाशा हिला रही है।





इसमें को शक नहीं कि निर्माता साजिद नाडियाडवाला का यह प्रयास बागी ४ की ठंडी ओपनिंग को गर्म करना है।  दर्शकों को टिकट खिड़की तक लाने के लिए नई छोरी का गर्म गोश्त सदैव सफल होता है। साजिद इस गीत के वीडियो से भी यही प्रयास करते लगते है।  क्या वह इस प्रयास में सफल होते है ?





यह मेरा हुस्न का वीडियो देखने के बाद, जो प्रतिक्रिया मिलती है , वह बहुत उत्साहवर्धक नहीं है।  हरनाज कामुक हावभाव प्रदर्शित करती है। किन्तु, दर्शक फिल्म पठान के बेशर्म रंग की धुन से यह मेरा हुस्न की झलक पाते है।  इतना ही नहीं, हरनाज के डांस स्टेप्स भी बेशर्म रंग में दीपिका पादुकोण के स्टेप्स की नक़ल प्रतीत होते है।  यद्यपि, कामुक हावभाव दोनों में ही है। 





ऐसे में, जबकि फिल्म पठान में दीपिका पादुकोण तथा बागी ४ में हरनाज ने समान रूप कामुक नृत्य किये है, दीपिका आगे क्यों दिखाई देती है ? वास्तव में, पठान में दीपिका पादुकोण की कामुकता दर्शकों को अधिक आकर्षित करती थी। यह इसलिए कि दीपिका एक बड़ी और स्थापित अभिनेत्री होने के बाद भी कामुक नृत्य कर रही थी, वही हरनाज का कामुक नृत्य उनकी स्वयं को बॉलीवुड में स्थापित करने की विवशता सा लगता है।





कुछ भी हो, यह मेरा हुस्न का रंग जम रहा है।  दर्शक ५ सितम्बर को टाइगर को कम इस कामुक अदाकारा को देखने अधिक जायेंगे।  निर्माता साजिद नाडियाडवाला की ऐसा करना विवशता है। बागी ४ के कथानक में कोई नई बात नहीं।  बेतहाशा खून खराबा दर्शकों को कुछ नया नहीं दे रहा।  साजिद चाहते हैं कि बागी ४ ऐसी फ्रैंचाइज़ी बने जिसकी चार फ़िल्में बॉक्स ऑफिस पर ५०० करोड़ का ग्रॉस करने वाली कहलाये।





बागी शृंखला की पहली फिल्म के निर्देशक शब्बीर खान थे।  बागी २ और बागी ३ का निर्देशन अहमद खान ने किया था।  बागी ४ के निर्देशक कन्नड़ फिल्मों के निर्देशक ए हर्षा है।  पहली और तीसरी बागी में टाइगर की नायिका दिशा पाटनी थी। इस चौथी बागी ४ में हरनाज संधू और सोनम बाजवा हैं।  

सिंस : चर्च के फादर की पाप कथा !



एक बार फिर, यह नज़दीकियां, एक नया रिश्ता और सच जैसी बोल्ड फिल्मों से विवादित निर्देशक लेखक विनोद पांडेय की २५ फरवरी २००५ को प्रदर्शित फिल्म सिंस (SINS) अर्थात पाप कहीं अधिक विवादित फिल्म थी । विनोद पांडेय की यह पाप कथा इसलिए विवादित हुई कि यह एक चर्च के पादरी की पाप कथा थी। 





१९८८ में केरल के एक चर्च के फादर को एक युवती का यौन शोषण करने के बाद हत्या कर देने के आरोप में फांसी की सजा सुनाई गई थी। इस घटना को विनोद पांडेय ने अख़बारों में पढ़ा था।  उसी समय उन्होंने  निर्णय लिया था कि वह केरल के चर्च की घटना को सेलुलॉइड पर उतारेंगे।  इसी सोच का परिणाम थी विनोद पांडेय की लिखी कहानी और उस पर फिल्म सिंस।  





विनोद पांडेय ने फिल्म का नाम सोच समझ कर रखा था।  क्योंकि, वह एक धर्मस्थल के पादरी के कुकर्म को पाप से कम नहीं कहना चाहते थे। अलबत्ता, उन्होंने इस फिल्म को विवादित कर दिया फिल्म के पोस्टरों के माध्यम से।  इन पोस्टरों में पादरी की गोद में लेती युवा स्त्री और उसके खुली पीठ और स्तनों वाले पोस्टर।  इससे कैथोलिक चर्च पर विश्वास करने वाली ईसाई आबादी आंदोलित हो उठी।  वह अदालत तक गए किन्तु, अदालत ने फिल्म को रोकने से इंकार कर दिया।  इस पर फिल्म के छविगृहों के बाहर ईसाई समाज ने धरना प्रदर्शन भी किया। 





विनोद पांडेय ने सिंस कोई १ करोड़ के बजट में बनाया था।  इस फिल्म में फादर विलियम की भूमिका शाइनी आहूजा कर रहे थे। फादर के यौन  शोषण की शिकार रोजमैरी की भूमिका कुवैत में जन्मी और १५ साल की उम्र से अमेरिका में पली बढ़ी अभिनेत्री सीमा रहमानी ने की थी।  सीमा ने फिल्म के सेक्सी दृश्यों के लिए जम कर कामुक दृश्य दिए थे।  इस फिल्म में कामुक दृश्यों की इतनी कहरचा थी कि अधिकतर दर्शक इन्ही दृश्यों के कारण फिल्म देखने गए।  किन्तु, जब उन्हें फिल्म में अपेक्षाकृत वैसा कुछ नहीं मिला तो उन्हें घोर निराशा हुई।  परिणामस्वरूप सिंस बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप घोषित की गई।





यद्यपि, विनोद पांडेय ने फिल्म सिंस की कहानी लिख ली थी तथा सितारे और बजट भी तय कर लिए थे। किन्तु, उन्हें  थोड़ा संदेह था।  इसलिए वह इस फिल्म की स्क्रिप्ट के साथ यश चोपड़ा के पास गए।  यश चोपड़ा ने फिल्म की स्क्रिप्ट अपने पास रख ली। दस दिनों बाद, यश चोपड़ा ने विनोद पांडेय को बताया कि फिल्म की पटकथा उनके बेटे आदित्य को बहुत पसंद आई है।  उन्होंने विनोद को आश्वासन दिया कि वह फिल्म को पूरी  दुनिया में प्रदर्शित करेंगे।





विनोद पांडेय ने, सिंस को अंग्रेजी में बनाया था। क्योंकि, वह फिल्म को विश्व के दर्शकों के लिए प्रदर्शित करना चाहते थे।  क्योंकि, वह जानते थे कि गैर अंग्रेजी भाषी इस फिल्म को बोल्ड फिल्म बता देगा।





विनोद पांडेय को इस फिल्म को प्रमाण पत्र दिलाने के लिए अपीलेट ट्रिब्यूनल के पास जाना पड़ा।  क्योंकि, उन्हें नहीं लगता था कि फिल्म में कोई नग्नता है।  आश्चर्य की बात यह थी कि सीमा रहमानी की खुली पीठ से आंदोलित पुरुषों के बीच दो महिला जूरी ने फिल्म के पक्ष में वोट किया था।  

#ARMurugadoss के साथ #Sivakarthikeyan की #Madharaasi ५ सितम्बर से



अपने शीर्षक से, मद्रास के किसी व्यक्ति के कथानक वाली फिल्म लगने वाली फिल्म मद्रासी आजकल गलत कारण से चर्चा में है। यह फिल्म ५ सितम्बर को प्रदर्शित होने जा रही है। कहा जा रहा है कि ५ सितम्बर को प्रदर्शित होने जा रही फिल्म की ऎसी अग्रिम बुकिंग उत्साहजनक नहीं है। इसलिए ट्रेड में कुछ पंडित अनुमान लगा रहे है कि फिल्म को प्रारम्भ में कम दर्शक ही मिलेंगे। 





ऐसा सोचे जाने के कारण भी है।  एक तो यह फिल्म धीना, रमन्ना, गजिनी, स्टालिन, थुप्पक्की, कठ्ठी, स्पाईडर, सरकार और दरबार  जैसी फिल्मों के लेखक और निर्देशक एआर मुरुगादॉस की फिल्म है।  दूसरी बात यह है कि फिल्म के नायक वह शिवकार्तिकेयन हैं, जिन्होंने विगत अक्टूबर २०२४ में प्रदर्शित युद्ध फिल्म अमरन जैसी सफल फिल्म दी है।  अमरन की सफलता का लाभ मद्रासी को होना चाहिए था। 





मद्रासी, एक साइकोलॉजिकल थ्रिलर फिल्म है। ऎसी फिल्मों के दर्शक पर्याप्त संख्या में है।  दूसरी बात फिल्म के नायक शिवकार्तिकेयन की कहानी एक ऐसे जासूस की है, जिसकी शादीशुदा जिंदगी बर्बाद हो चुकी है। ऐसे समय में उसे तमिलनाडु में हथियारों के वितरण को रोकने के मिशन पर जाना पड़ता है। एक दुर्घटना में वह अपनी स्मृति खो बैठता है। यह एक्शन और इमोशन से सनी फिल्म है। शिवकार्तिकेयन, इस प्रकार की भूमिका के सर्वथा उपयुक्त लगते है। 





शिवकार्तिकेयन के कारण फिल्म को अच्छे दर्शक मिलने चाहिए। किन्तु, अग्रिम बुकिंग में दर्शकों की उदासीनता निर्देशक एआर मुरुगादॉस के कारण प्रतीत होती है। मुरुगादॉस ने, दरबार के पांच साल बाद, सलमान खान के साथ सिकंदर जैसी बड़ी फ्लॉप फिल्म दी है।  इससे दर्शकों को लगता होगा कि मुरुगादॉस की दर्शकों की नब्ज पर पकड़ छूट चुकी है।  किन्तु, मुरुगादॉस की विगत सफलताओं को देखते हुए, ऐसा कहना उचित प्रतीत नहीं होता।





मद्रासी के सन्दर्भ में एक विशेष बात। मद्रासी के निर्माण की घोषणा सितम्बर २०२३ में हुई थी।  मुरुगादॉस ने मद्रासी को शाहरुख़ खान के लिए लिखा था। किन्तु, उस समय, कोरोना के बाद, बॉलीवुड लगातार असफलताओं का शिकार हो रहा था।  इसलिए, मुरुगादॉस ने फिल्म को बॉलीवुड में बनाने के स्थान पर तमिल में बनाने का निर्णय लिया। उन्होंने अब मद्रासी का मद्रासी शिवकार्तिकेयन को बना दिया। 

Monday, 1 September 2025

नाग और ज़ोंबी बनेंगे #KartikAryan



विगत  वर्ष  फिल्म भूल भुलैया ३ की सफलता के बाद भी, कार्तिक आर्यन की इस साल अभी तक कोई भी फिल्म प्रदर्शित नहीं हुई है। यद्यपि, वह फिल्मों की शूटिंग कर रहे है और नई फिल्मों के लिए भी अनुबंधित हो रहे है। 





कार्तिक आर्यन की फिल्मों के विषय में नवीनतम समाचार यह है कि वह शेरशाह के निर्देशक विष्णुवर्द्धन की फिल्म में काम करने के लिए सहमत हो गए है। उन्हें फिल्म का, विष्णुवर्द्धन द्वारा सुनाया गया विवरण बहुत पसंद आया।  भूल भुलैया ३ के रूह बाबा के लिए ऐसा संभव भी है। विष्णुवर्द्धन की अभी अनाम फिल्म ज़ोम्बी फिल्म है। इस फिल्म में कार्तिक आर्यन ज़ोम्बी बने हैं या ज़ोंबी हंटर, स्पष्ट नहीं है।  इस फिल्म की शूटिंग जुलाई २०२६ से प्रारम्भ होगी। 





वर्तमान में, कार्तिक आर्यन कुछ विशेष फ़िल्में कर रहे है। यह फ़िल्में उनकी रोमांटिक और चॉकलेटी छवि से अलग भी होंगी। कार्तिक ने अभी अभी समीर विध्वांस की फिल्म तू मेरी मैं तेरा, मैं तेरा तू मेरी और अनुराग बासु के निर्देशन में एक अनाम फिल्म पूरी की है। कुछ समाचारों के अनुसार इस फिल्म का शीर्षक आशिकी ३ है। समीर की फिल्म में कार्तिक की  नायिका अनन्य पाण्डेय है। कार्तिक अनन्या की एक साथ दूसरी फिल्म है।





अनुराग बासु की फिल्म की नायिका श्रीलीला है। यह फिल्म क्रिसमस पर प्रदर्शित होगी। यह दोनों फिल्मे रोमांस शैली की फ़िल्में है। स्पष्ट हैं कि कार्तिक इन फिल्मों में अपनी नायिका के साथ रोमांस कर रहे होंगे।




 

किन्तु, विशिष्ट होगी मृगदीप सिंह लाम्बा की अंतरिक्ष से आये प्राणी के साथ हास्य फिल्म। यह समाचार है कि नागजिला शीर्षक वाली इस फिल्म में कार्तिक आर्यन नाग की भूमिका कर रहे होंगे। निर्माता करण जोहर की योजना इस फिल्म को नाग पंचमी १४ अगस्त २०२६ को प्रदर्शित करने की है। 





कार्तिक आर्यन की एक अन्य फिल्म एक्शन से भरपूर होगी। इस फिल्म के निर्देशक तमिल फिल्म अमरन के निर्देशक राजकुमार पेरियास्वामी होंगे। इस फिल्म को एनिमल से भी अधिक रक्तरंजित और क्रूर होगी। फिल्म में कार्तिक आर्यन का अक्षय खन्ना के विरुद्ध रक्तरंजित एक्शन होगा। इस फिल्म को टी सीरीज द्वारा बनाए जाने का समाचार है। 

चुम्बन, बिकिनी और कैबरे की त्रिवेणी थी राजकपूर की 'संगम' !

 

आग, बरसात, आवारा और श्री ४२० जैसी फिल्मों के बाद, संगम पांचवी फिल्म थी, जिसके लिए राजकपूर नौ साल बाद, निर्देशक की कुर्सी पर बैठे थे। यह फिल्म इकसठ साल पहले १८ जून १९६४ को प्रदर्शित हुई थी। फिल्म ने, एक बार फिर राजकपूर की सुपरहिट फिल्मों की श्रृंखला बना सकने वाला निर्देशक बना दिया था। यह फिल्म, हिंदी फिल्मों में कुछ नए प्रारम्भ करने वाली फिल्म थी। इस फिल्म के बाद, बॉलीवुड फिल्मों का चेहरा और चलन बदलने लगा।





 

संगम, राजकपूर की अब तक की, सबसे महंगी फिल्म थी। इस फिल्म की विदेशी शूटिंग पर राजकपूर ने उस समय डेढ़ करोड़ रुपये खर्च किये थे, जो आज की दृष्टि से एक सौ करोड़ पर बैठते है। ऐसा स्वाभाविक भी था। राजकपूर ने संगम की अधिकतर शूटिंग विदेशी धरती पर की थी। फिल्म की शूटिंग लंदन, पेरिस और स्विट्ज़रलैंड की सुन्दर दृश्यावलियों में शूट की गई थी। फिल्म की इंडोर शूटिंग मेहबूब स्टूडियो और फिल्मिस्तान में हुई थी। 





संगम इसके अतिरिक्त भी महत्वपूर्ण फिल्म थी। इस फिल्म में राजकपूर, वैजयंतीमाला और राजेंद्र कुमार ने अपने अभिनय जीवन का श्रेष्ठ अभिनय किया था। फिल्म को लेखक इन्दर राज आनंद ने जितना रोमांटिक लिखा था, राजकपूर ने उसे उतना ही रोमांटिक फिल्माया भी था। फिल्म में शंकर जयकिशन का संगीत प्रेम की रागिनियों को छेड़ने वाला भावप्रद था। इस पर सोने पर सुहागा थे शैलेन्द्र और हसरत जयपुरी के बोल। 




 

फिल्म के एक गीत हर दिल जो प्यार करेगा के सन्दर्भ में कहा जाता है कि इस गीत को परदे पर राजकपूर, वैजयंतीमाला और राजेंद्र कुमार  पर फिल्माया गया था।  संगम में, राजेंद्र कुमार के गीत ये मेरा प्रेम पत्र पढ़ कर को मोहम्मद रफ़ी ने गाया था।  इसलिए स्वाभाविक रूप से हर दिल जो प्यार करेगा की राजेंद्र कुमार की पंक्तियाँ मोहम्मद रफ़ी गाते।  ऐसा हुआ भी।  बाद में, राजकपूर ने इन बोलों को महेंद्र कपूर की आवाज में रिकॉर्ड करवाया।  इसे सुनने के बाद महेंद्र कपूर की आवाज ही रखी गई। कहा जाता है कि राजकपूर को लगा कि इस गीत में मोहम्मद रफ़ी की आवाज मुकेश पर भारी पड़ेगी। ऐसा राजकपूर बिलकुल नहीं चाहते थे। कुछ का कहना है कि मोहम्मद रफ़ी की आवाज में रोमांस तो था। किन्तु, वह करुणा नहीं थी, जो राजकपूर चाहते थे। एक तीसरा तर्क यह है कि इस समय तक लता और रफ़ी में तनाव हो गया था।  लता मोहम्मद रफ़ी के साथ गाना नहीं चाहती थी। 





 संगम, बॉलीवुड की उस समय की सबसे अधिक लम्बाई वाली फिल्म थी। इस फिल्म की अवधि ३ घंटा ५८ मिनट थी। उस समय तक इतनी लम्बी फिल्मों का चलन नहीं था। इसलिए राजकपूर ने फिल्म में दो मध्यांतर रखे थे। उस समय छविगृहों में केवल तीन शो चलाये जाते थे।  इसके बाद भी संगम ने सभी को मालामाल कर दिया।  





यह फिल्म इजराइल में भी आवारा, श्री ४२०, अमर अकबर अन्थोनी, नसीब, शोले, सत्ते पे सत्ता, कस्मे वादे, जानवर और फूल और पत्थर की तरह लोकप्रिय थी। इस फिल्म के पोस्टर हिब्रू भाषा में भी बनाये गए थे। 





संगम ने बॉलीवुड में पहली बार चुम्बन का प्रारम्भ किया। फिल्म के एक दृश्य में एफिल टावर पर राजकपूर वैजयंतीमाला से रोमांस करना चाहते है। किन्तु, वैजयंतीमाला मना करती है तो वह चुम्बनरत एक विदेशी जोड़े को दिखाते है। उस समय तक फिल्मों में चुम्बन निषेध था।  किन्तु, बताते हैं कि राजकपूर ने इस दृश्य को यह कह कर पारित करावा लिया कि चुम्बन विदेशी धरती पर विदेशी जोड़े पर फिल्माए जाने के कारण स्वाभाविक था। 





हिंदी फिल्मों में बिकिनी का प्रारम्भ भी संगम से हुआ।  फिल्म में बोल राधा बोल संगम होगा कि नहीं में नदी पर नहाती वैजयंतीमाला को बिकिनी में दिखाया था। यह गीत पेड़ पर चढ़े राजकपूर द्वारा माला के कपडे उठा लेने के बाद, दिखाया गया था।  इस फिल्म ने फिल्मों में बहुत बाद में ही सही बिकिनी का चलन  बना दिया।  





बॉलीवुड फिल्मों में कैबरे की शुरुआत भी संगम से हुई थी। गीत मैं क्या करूँ राम मुझे बुड्ढा मिल गया में वैजयंतीमाला कैबरे डांस की पोशाक पहन कर कैबरेनुमा डांस करती थी। वैजयंतीमाला ने पहली बार नायिका से कैबरे करवा दिया था। यद्यपि, कैबरे डांस अधिकतर खलनायिका पर फिल्माए गए।




  

इधर यह अफवाह थी कि संजय लीला भंसाली की रणबीर कपूर, आलिया भट्ट और विक्की कौशल अभिनीत निर्माणाधीन फिल्म लव एंड वॉर, संगम का प्रेम त्रिकोण है। किन्तु, भंसाली ने इसका खंडन किया है।





यद्यपि, भंसाली ने खंडन कर दिया है। किन्तु, यह सत्य है कि १९८८ में प्रदर्शित, निर्देशक सुनील हिंगोरानी की फिल्म राम -अवतार, १९६४ की राजकपूर की फिल्म संगम की रीमेक थी।  इस फिल्म में एक्शन अभिनेता सनी देओल ने राजेंद्र कुमार वाली भूमिका की थी। अनिल कपूर  ने  राजकपूर और श्रीदेवी ने वैजयंतीमाला की भूमिका की थी।  





अंत में एक दुखद घटनाक्रम।  संगम के प्रदर्शन के ठीक पहले रात में राजकपूर ने डिनर रखा था।  इस डिनर में फिल्म संगम के सभी कलाकार, संगीतकार, गीतकार तथा अन्य निर्माता निर्देशक उपस्थित थे।  इस पार्टी में, किसी बात पर राजकपूर और इन्दर राज आनंद के बीच बहस छिड़ गई। यह बात इतनी बढ़ी कि इन्दर राज आनंद ने राजकपूर के झापड़ मार दिया।  यह देख कर पार्टी में सन्नाटा छा गया। यद्यपि, इन्दर राज आनंद ने माफ़ी मांग ली।  किन्तु, उस समय तक नुकसान हो चुका था। पार्टी में उपस्थित हर व्यक्ति और उसके मित्रों ने लेखक इन्दर राज आनंद का बहिष्कार कर दिया।  इन्दर को एक ही रात में १८ फिल्मों से निकाल दिया गया।  इसका दुष्प्रभाव इन्दर राज आनंद के फिल्म जीवन पर पड़ा।  वह बीमार पड़ गए।