संघर्ष एक ऐसा शब्द है, जिस पर फिल्म उद्योगों ने कई फ़िल्में बनाई है। यह फ़िल्में केवल संघर्ष या दूसरे शब्दों के साथ संघर्ष शब्द जोड़ कर बनाई गई। जैसे जीवन एक संघर्ष। किन्तु, संघर्ष शीर्षक के साथ भिन्न भाषाओं में अवश्य बनी है। उदाहरणस्वरूप, खेसारी लाल यादव और काजल राघवानी अभिनीत २०१८ और २०२३ में प्रदर्शित भोजपुरी फिल्म संघर्ष और संघर्ष २, सुलभा आर्य और अश्रुबा की मराठी फिल्म संघर्ष (२०१४), रंजीत मल्लिक की बँगला फिल्म संघर्ष, प्रेम नज़ीर, बालन के नायर और सुकुमारन अभिनीत मलयालम फिल्म संघर्षं उल्लेखनीय है। हिंदी में दो फ़िल्में विशुद्ध संघर्ष शीर्षक के साथ बनाई गईं। प्रीटी ज़िंटा और अक्षय कुमार की १९९९ में प्रदर्शित फिल्म संघर्ष से ३१ साल पहले प्रदर्शित दिलीप कुमार, वैजयंतीमाला, बलराज साहनी, संजीव कुमार और जयंत की फिल्म संघर्ष (१९६८) उल्लेखनीय है। आज इसी फिल्म के विषय में।
हरनाम सिंह रवैल द्वारा निर्देशित और १८ अक्टूबर १९६८ को प्रदर्शित फिल्म संघर्ष विनाशक फिल्म थी। यह फिल्म निरंतर सफल फिल्म दे रहे बॉलीवुड के ट्रेजेडी किंग दिलीप कुमार की पहली असफल फिल्म थी। यद्यपि, संघर्ष की असफलता के बाद भी दिलीप कुमार ने कई हिट फिल्मे दी। किन्तु, यह उनके लिए बड़ा झटका थी। वास्तविकता तो यह है कि संघर्ष की असफलता दिलीप कुमार के अपने सह अभिनेताओं के साथ संघर्ष का ही परिणाम है।
निर्माता निर्देशक एच एस रवैल ने, महाश्वेता देवी की बांग्ला भाषा में लघु कथा लायली आस्मानेर आयना पर आधारित फिल्म संघर्ष बनाने का निर्णय लिया था। संघर्ष का कथानक बनारस की पृष्ठभूमि पर बनारस के घाटों पर घूमते ठगों पर आधारित था, जो भक्तों से लूटपाट करते थे और मार भी देते थे। यह फिल्म इसी कहानी पर वैचारिक संघर्ष और एक वैश्या से रोमांस की कहानी कहती थी।
यह फिल्म प्रदर्शन से पहले ही काफी विवादों में रही। विशेष रूप से बनारस के पंडों ने इसे अपनी छवि को कलंकित करने वाला बताया। पूरे देश में भी इस फिल्म का विरोध हुआ। किन्तु, इसके बाद भी फिल्म को सेंसर बोर्ड द्वारा अवयस्कों के लिए देखने योग्य फिल्म का यू प्रमाण पत्र दिया गया। अब यह बात दूसरी ही है कि फिल्म फिर भी असफल हो गई।
संघर्ष में, अपने समय के शीर्ष पर सशक्त कलाकारों को लिया गया था। फिल्म में दिलीप कुमार, वैजयंतीमाला, बलराज साहनी, जयंत, उल्हास, दुर्गा खोटे जैसे सशक्त कलाकारों के साथ नवोदित संजीव कुमार को भी लिया गया था। फिल्म का संगीत नौशाद ने दिया था और गीतकार शकील बदायुनी थी। यह फिल्म नौशाद और शकील बदायुनी की दर्द फिल्म से बनी जोड़ी की अंतिम फिल्म साबित हुई।
दिलीप कुमार का पहला संघर्ष, राजकुमार से हुआ। फिल्म में राजकुमार को दिलीप कुमार के सामने अधिक सशक्त भूमिका में लिया गया था। राजकुमार ने, १९५९ में प्रदर्शित फिल्म पैगाम में कम अनुभवी होने के बाद भी दिलीप कुमार को टक्कर दी। राजकुमार और दिलीप कुमार के बीच के दृश्यों के लिए राजकुमार को सराहना मिली। इस प्रशंसा से उखड़े दिलीप कुमार को जब लगा कि राजकुमार को उनके चरित्र के साथ संघर्ष करने वाले चरित्र के लिए राजकुमार को लिया गया है, तो उन्होंने राजकुमार को बाहर का रास्ता दिखा दिया। राजकुमार का स्थान संजीव कुमार ने लिया। अब यह बात दूसरी हैं कि संजीव कुमार के द्वारका प्रसाद ने दिलीप कुमार के कुंदन से अधिक प्रशंसा बटोरी। दिलीप कुमार को इसकी आशा नहीं थी कि एक कम अनुभवी अभिनेता उन्हें ऎसी टक्कर देगा। इसके बाद, दिलीप कुमार ने १९८२ में प्रदर्शित फिल्म विधाता और राजकुमार के साथ १९९१ में प्रदर्शित फिल्म सौदागर ही की।
दिलीप कुमार का वैजयंतीमाला के साथ भी मनमुटाव था। दोनों में आपस में बातचीत तक नहीं होती थी। ऐसा समाचार था कि वैजयंतीमाला फिल्म को बीच में ही छोड़ देंगी और उनके स्थान पर वहीदा रहमान आ जाएंगी। क्योंकि, वहीदा रहमान ने दिलीप कुमार की फिल्म राम और श्याम में वैजयंतीमाला को हटाया था। किन्तु, वैजन्तीमाला ने फिल्म पूरी की।
संघर्ष एक ऎसी फिल्म थी, जिसमे निर्देशक एच एस रवैल ने दिलीप कुमार के साथ पहली और अंतिम बार काम किया था। वैजयंतीमाला की भी दिलीप कुमार के साथ अंतिम फिल्म संघर्ष ही थी। इस फिल्म के बाद दिलीप कुमार कभी भी रवैल और वैजयंतीमाला के साथ नहीं दिखाई दिए। दिलीप कुमार का लेखक अबरार अल्वी से भी झगड़ा हुआ था। इससे क्रोधित हो कर अबरार ने दिलीप कुमार की फिल्म वैराग बीच में ही छोड़ दी थी।
फिल्म में वैजयंतीमाला को लिए जाने की कहानी बड़ी दिलचस्प है। संघर्ष से पहले रवैल ने अशोक कुमार, राजेंद्र कुमार, निम्मी और साधना के साथ फिल्म मेरे मेहबूब बनाई थी। यह बड़ी सफल फिल्म थी। इस फिल्म के बाद जब रवैल ने संघर्ष की योजना बनाई तो उन्होंने साधना को फिल्म की वैश्या की भूमिका के लिए चुना था। किन्तु, उस समय साधना थयरॉइड की समस्या से जूझ रही थी। उन्होंने रवैल से किसी अन्य अभिनेत्री के साथ फिल्म बनाने का सुझाव दिया। किन्तु, रवैल ने कहा कि मैं उनके स्वस्थ होने की प्रतीक्षा करूंगा। किन्तु, एक प्रमोशन के दौरान साधना को मालूम पड़ा कि रवैल ने, उनके स्थान पर वैजयंतीमाला को ले लिया है। इससे साधना बहुत चोटिल हुई और उन्होंने फिर कभी रवैल से बात नहीं की।
संघर्ष में दिलीप कुमार के बचपन की भूमिका के लिए मेहबूब खान की खोज साजिद को लिया गया था। किन्तु, हॉलीवुड की फिल्म के लिए साजिद ने फिल्म बीच में ही छोड़ दी। उनके स्थान पर बाल कलाकार दिलीप धवन को लिया गया था। इस फिल्म के बाद, दिलीप धवन को दिलीप कुमार के साथ फिल्म करने का दूसरा अवसर फिल्म इज़्ज़तदार में मिला। बताते यह भी हैं कि एक अन्य बाल भूमिका के लिए डिंपल कपाडिया के नाम पर भी विचार हुआ था। किन्तु, वह परदे पर दिलीप धवन से बड़ी दिखाई दे रही थी। इसलिए उन्हें हटा दिया गया। उनकी जगह जूनियर मेहमूद आ गए।

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