अपने शीर्षक से, मद्रास के किसी व्यक्ति के कथानक वाली फिल्म लगने वाली फिल्म मद्रासी आजकल गलत कारण से चर्चा में है। यह फिल्म ५ सितम्बर को प्रदर्शित होने जा रही है। कहा जा रहा है कि ५ सितम्बर को प्रदर्शित होने जा रही फिल्म की ऎसी अग्रिम बुकिंग उत्साहजनक नहीं है। इसलिए ट्रेड में कुछ पंडित अनुमान लगा रहे है कि फिल्म को प्रारम्भ में कम दर्शक ही मिलेंगे।
ऐसा सोचे जाने के कारण भी है। एक तो यह फिल्म धीना, रमन्ना, गजिनी, स्टालिन, थुप्पक्की, कठ्ठी, स्पाईडर, सरकार और दरबार जैसी फिल्मों के लेखक और निर्देशक एआर मुरुगादॉस की फिल्म है। दूसरी बात यह है कि फिल्म के नायक वह शिवकार्तिकेयन हैं, जिन्होंने विगत अक्टूबर २०२४ में प्रदर्शित युद्ध फिल्म अमरन जैसी सफल फिल्म दी है। अमरन की सफलता का लाभ मद्रासी को होना चाहिए था।
मद्रासी, एक साइकोलॉजिकल थ्रिलर फिल्म है। ऎसी फिल्मों के दर्शक पर्याप्त संख्या में है। दूसरी बात फिल्म के नायक शिवकार्तिकेयन की कहानी एक ऐसे जासूस की है, जिसकी शादीशुदा जिंदगी बर्बाद हो चुकी है। ऐसे समय में उसे तमिलनाडु में हथियारों के वितरण को रोकने के मिशन पर जाना पड़ता है। एक दुर्घटना में वह अपनी स्मृति खो बैठता है। यह एक्शन और इमोशन से सनी फिल्म है। शिवकार्तिकेयन, इस प्रकार की भूमिका के सर्वथा उपयुक्त लगते है।
शिवकार्तिकेयन के कारण फिल्म को अच्छे दर्शक मिलने चाहिए। किन्तु, अग्रिम बुकिंग में दर्शकों की उदासीनता निर्देशक एआर मुरुगादॉस के कारण प्रतीत होती है। मुरुगादॉस ने, दरबार के पांच साल बाद, सलमान खान के साथ सिकंदर जैसी बड़ी फ्लॉप फिल्म दी है। इससे दर्शकों को लगता होगा कि मुरुगादॉस की दर्शकों की नब्ज पर पकड़ छूट चुकी है। किन्तु, मुरुगादॉस की विगत सफलताओं को देखते हुए, ऐसा कहना उचित प्रतीत नहीं होता।
मद्रासी के सन्दर्भ में एक विशेष बात। मद्रासी के निर्माण की घोषणा सितम्बर २०२३ में हुई थी। मुरुगादॉस ने मद्रासी को शाहरुख़ खान के लिए लिखा था। किन्तु, उस समय, कोरोना के बाद, बॉलीवुड लगातार असफलताओं का शिकार हो रहा था। इसलिए, मुरुगादॉस ने फिल्म को बॉलीवुड में बनाने के स्थान पर तमिल में बनाने का निर्णय लिया। उन्होंने अब मद्रासी का मद्रासी शिवकार्तिकेयन को बना दिया।

No comments:
Post a Comment