सनी देओल के लिए १९८६ का साल बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण रहा था। इस साल उनकी तीन फ़िल्में प्रदर्शित हुई थी और तीनों ही बॉक्स ऑफिस पर असफल हुई थी। बेताब के बाद अर्जुन से स्वयं को स्थापित कर चुके सनी देओल के लिए यह बड़ा झटका था। उनकी सल्तनत, सवेरे वाली गाडी और समंदर जैसी बड़ी फ़िल्में प्रदर्शित हुई और बॉक्स ऑफिस पर मुंह के बल गिरी।
इनमे, सनी देओल की १९८६ मे प्रदर्शित होने वाली पहली फिल्म सल्तनत की असफलता उनके दुश्मनों को भी चौंकाने वाली थी। यह एक पीरियड एक्शन ड्रामा फिल्म थी। सल्तनत का निर्माण २.९० करोड़ रुपये की लागत से हुआ था। फिल्म में आज के बड़े बड़े सितारे अभिनय कर कर रहे थे। किन्तु, सल्तनत देश में कुल १.२८ करोड़ का विशुद्ध व्यवसाय ही कर सकी और विनाशकारी फिल्म साबित हुई।
सल्तनत की सफलता सुनिश्चित मानी जा रही थी। ऐसा सोचा जाना स्वाभाविक था। इस फिल्म में धर्मेंद्र और सनी देओल की पिता पुत्र जोड़ी, पहली बार एक साथ थी। यद्यपि, इन दोनों ने इस से पहले फिल्म सनी की थी। किन्तु, सनी में सनी देओल अपने पिता के साथ किसी फ्रेम में नहीं थे। सल्तनत में यह दोनों एक दूसरे के विरुद्ध थे।
यह फिल्म निर्देशक अर्जुन हिंगोरानी की,धर्मेंद्र के साथ आठवीं फिल्म थी। अर्जुन हिंगोरानी ने कुल दस फिल्मों का निर्माण किया था। इन सभी में धर्मेंद्र नायक थे। धर्मेंद्र को बॉलीवुड में संरक्षण और पहला ब्रेक देने वाले अर्जुन हिंगोरानी ही थे। धर्मेंद्र की पहले फिल्म दिल भी तेरा हम भी तेरे के निर्देशक अर्जुन हिंगोरानी ही थे।
जो लोग, अर्जुन हिंगोरानी की फिल्मों से परिचित हैं, वह जानते हैं कि अर्जुन की फिल्मों के शीर्षक में तीन के हुआ करते थे। उदाहरण के लिए कब क्यों और कहाँ, कहानी किस्मत की, खेल खिलाडी का, कातिलों के कातिल और करिश्मा कुदरत का। यह सभी फ़िल्में बॉक्स ऑफिस पर सफल हुई थी। इसलिए, अर्जुन हिंगोरानी इस फिल्म का शीर्षक भी तीन के से रखना चाहते थे। किन्तु, निर्देशक मुकुल एस आनंद को इस प्रकार के शीर्षक फब नहीं रहे थे। वह फिल्म का शीर्षक सल्तनत ही रखना चाहते थे। इस पर अर्जुन हिंगोरानी ने फिल्म को सल्तनत कारनामे कमाल के टैग लाइन के साथ प्रदर्शित करने की सोची। यह कुछ जमा नहीं। इसलिए फिल्म को सल्तनत शीर्षक के साथ ही प्रदर्शित किया गया। अब यह बात दूसरी है कि बिना के टोटके वाली सल्तनत बॉक्स ऑफिस पर ढह गई।
सल्तनत फिल्म अभिनेत्री जूही चावला और शशि कपूर के बेटे करण कपूर की पहली फिल्म थी। इस फिल्म की असफलता के बाद, करण का करियर समाप्त सा हो गया। किन्तु, आमिर खान के साथ रोमांस फिल्म क़यामत तक की नायिका बनने के बाद जूही चावला बॉलीवुड की बड़ी अभिनेत्री बन गई। इस फिल्म में करण के संवाद उनके भाई कुणाल कपूर ने बोले थे। क्योंकि, करण की हिंदी बहुत ख़राब थी।
जैसा कि सभी जानते हैं कि जूही चावला ने फिल्म में जरीना की भूमिका की थी। किन्तु, जूही चावला इस भूमिका के लिए अर्जुन हिंगोरानी की पहली पसंद नहीं थी। उन्होंने जरीना के लिए अभिनेत्री अनीता राज को लिया था। किन्तु, बाद में उन्हें हटा कर जूही चावला को ब्रेक दे दिया गया। अनीता राज ने बाद में अर्जुन हिंगोरानी के बेटे सुनील हिंगोरानी के साथ विवाह किया था।
सल्तनत में, अभिनेत्री श्रीदेवी ने राजकुमारी यास्मीन की भूमिका की थी। इस फिल्म में श्रीदेवी के संवाद डब करवाए गए थे। सल्तनत, श्रीदेवी की फिल्म के निर्देशक मुकुल एस आनंद के साथ पहली फिल्म थी। इस फिल्म के बाद, श्रीदेवी ने मुकुल की फिल्म खुदा गवाह में ही अभिनय किया था। विडम्बना कि यह फिल्म भी असफल हुई। यह दोनों फिल्म सीआईडी भी करना चाहते थे। किन्तु, बाद में यह फिल्म बंद कर दी गई।
मुकुल आनंद ने सल्तनत की स्क्रिप्ट १९८१ में लिखी थी। वह इस फिल्म को अमिताभ बच्चन के साथ बनाना चाहते थे। किन्तु, अमिताभ बच्चन इस पटकथा को किसी स्थापित निर्देशक के साथ बनवाना चाहते थे। किन्तु, मुकुल ने फिल्म की पटकथा अमिताभ बच्चन को नहीं दी। पांच साल बाद, इसे सनी देओल के साथ बनाया गया। उल्लेखनीय है कि अमिताभ बच्चन ने, मुकुल आनंद की हम और अग्निपथ जैसी बड़ी हिट फिल्में की।
अर्जुन हिंगोरानी ने फिल्म के प्रदर्शन से पहले यह दावा किया था कि फिल्म प्रमुख टेरिटरी में २ करोड़ का कारोबार करेगी। क्योंकि, इस फिल्म को ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त है। ऐसी फ़िल्में दशकों में एक बारे बनाई जाती है।

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