Sunday, 28 September 2025

फराह, रोहन कपूर और यश चोपड़ा की विनाशक फिल्म फासले !

 


आज यहाँ चर्चा, यश चोपड़ा निर्देशित फिल्म फासले (१९८५) की। इस फिल्म में दो नए युवा चेहरों के साथ बॉलीवुड के कई बड़े सितारों की भीड़ जुटी हुई थी। फिल्म में रोहन कपूर कर फराह नाज़ की युवा जोड़ी के साथ सुनील दत्त, रेखा, फारूक शेख, दीप्ति नवल, राज किरण, सुषमा सेठ और अलोक नाथ जैसे हिंदी दर्शकों के मध्य लोकप्रिय अभिनेता अभिनेत्रियां लिए गए थे। 





इस फिल्म को नेपो किड्स फिल्म कहा जा सकता है। क्योंकि, रोहन कपूर, यशराज बैनर के प्रिय गायक महेंद्र कपूर के बेटे थे। उनके साथ फराह नाज़ भी इस दृष्टि से नेपो किड्स की श्रेणी में थी कि वह शबाना आज़मी की भतीजी थी। इस प्रकार से, फिल्म फासले को, यश चोपड़ा की पहली नेपो किड्स फिल्म कहा जा सकता है। 





फिल्म का संगीत शिव -हरी ने दिया था।  इस फिल्म को उस समय के लोकप्रिय लेखक शहरयार ने लिखा था।  किन्तु, समीक्षकों द्वारा इस फिल्म की सबसे अधिक आलोचना ख़राब कथानक और संपादन के लिए हुई थी।




फिल्म की युवा जोड़ी को लिए जाने के भी रोचक कथानक है।  इस फिल्म से पहले, फराह नाज  अपनी बहन तब्बू के साथ, देवानंद की फिल्म हम नौजवान के ऑडिशन के लिए गई थी। फराह अभिनेत्री बनना चाहती थी। किन्तु, ऑडिशन के समय देवानंद को फराह तो नहीं, उनकी छोटी बहन तब्बू पसंद आ गई।  इस प्रकार से बड़ी बहन बाहर और छोटी बहन हम नौजवान की नायिका बन गई।





किन्तु, देवानंद की फिल्म हम नौजवान के ऑडिशन में जाने का लाभ फराह को मिला।  क्योंकि, जब यश चोपड़ा ने अपनी फिल्म फासले के लिए किसी नए चेहरे की तलाश की बात की तो देवानंद ने उन्हें फराह का नाम सुझा दिया।  कुछ जद्दोजहद के बाद, फराह फिल्म फासले में रोहन कपूर की नायिका बन गई। 




 फासले को विनाशक फिल्म होना ही था। फासले से पूर्व, यश चोपड़ा बड़े सितारों के साथ काला पत्थर, सिलसिला और मशाल जैसी फ़िल्में बना कर अपने हाथ जला चुके थे। इससे व्यथित यशराज नई स्टार कास्ट को लेकर फिल्म बनाना चाहते थे। 




किन्तु, फासले के लिए, रोहन कपूर उनकी पहली पसंद नहीं थे। वह इस फिल्म के नायक के रूप में अनिल कपूर को चाहते थे। किन्तु, उस समय अनिल कपूर की आवश्यक तारीखें फ़िरोज़ खान की फिल्म जांबाज़ के लिए बुक हो चुकी थी।  इसलिए फिल्म की शूटिंग प्रारम्भ होने के बीस दिन पहले रोहन कपूर को नायक बना दिया गया। 





चर्चा हुई थी कि सुनील दत्त ने, इस फिल्म में अंतिम बार रोमांटिक भूमिका की थी। क्योंकि, उन्हें उस समय पत्नी की चिकित्सा के लिए पैसों की आवश्यकता थी।  सुनील दत्त, फिल्म वक़्त के बाद, पहली बार यश चोपड़ा के निर्देशन में कोई फिल्म कर रहे थे।  





वास्तविकता तो यह है कि सुनील दत्त को फिल्म फासले की स्क्रिप्ट बहुत पसंद आई थी। अब यह बात दूसरी है कि जब उन्होंने फिल्म परदे पर देखी तो उन्हें बहुत निराशा हुई। सुनील दत्त को ऐसा ही अनुभव फिल्म परंपरा से भी हुआ। परंपरा को यश चोपड़ा ने निर्देशित किया था तथा फिल्म को हनी ईरानी के साथ उनके पुत्र आदित्य चोपड़ा ने लिखा था।  परंपरा की असफलता के बाद, सुनील दत्त ने यश चोपड़ा की किसी फिल्म में काम नहीं किया।  





फासले में सुनील दत्त का रोमांस रेखा थी। कहते हैं कि सुनील दत्त प्याज बहुत खाते थे। इसलिए, जब वह रेखा के साथ कैमरा के सामने होते तो बहुत सावधानी बरतते थे। इसके लिए वह सीन देने से पहले अपने मुंह को अच्छी तरह से साफ कर इलाइची, आदि सुगन्धित वस्तु खा लेते थे। यह सुनील दत्त की अपनी पत्नी की मृत्यु के बाद की पहली और अंतिम रोमांस फिल्म थी। 





 

 फराह बड़ी रोमांटिक अभिनेत्री थी। लेकिन, उनके अपने  रील रोमांस रोहन कपूर के साथ फासले बने रहे।  दोनों में झगड़े फिल्म की डबिंग के बाद भी जारी रहे।  किन्तु, फराह की रोमांस की आदत के कारण ही उन्हें यश चोपड़ा की नाराजगी भी मिली।  क्योंकि, फराह फिल्म के सहायक निर्देशक राजेश सेठी से प्रेम की पींगे बढ़ाने लगी थी। कहते हैं कि फराह की नज़दीकियां यश चोपड़ा से भी काफी बढ़ गई थी। यह बात एक अन्य सह निर्देशक दीपक सरीन ने, यश चोपड़ा की पत्नी पैम चोपड़ा को बताई थी। कुछ लोग आरोप लगते हैं कि दीपक सरीन, फराह द्वारा उनके शादी के प्रस्ताव को ठुकरा दिए जाने के कारण रुष्ट हो गए थे। स्टूडियो के साथ तनाव का परिणाम था कि तब्बू को फासले के ट्रायल शो में नहीं बुलाया गया था।  

No comments: