Thursday, 25 September 2025

मानो या न मानो, क्या कोई १४ हजार साल से जीवित रह सकता है ?



निर्माता विजय एम् जैन की योगेश वी पगारे निर्देशित फिल्म मानो या न मानो ७ नवंबर २०२५ को प्रदर्शित होगी। हिंदी फिल्म मानो या न मानो, हॉलीवुड की २००७ में प्रदर्शित क्लासिक विज्ञानं फंतासी ड्रामा फिल्म द मैन फ्रॉम अर्थ की आधिकारिक रीमेक फिल्म है।





रिचर्ड शेंकमैन निर्देशित फिल्म द मैन फ्रॉम अर्थ की पटकथा अपनी काल्पनिक कथा पर पटकथा जेरोम बिग्बी ने अपनी मृत्यु शैय्या पर अप्रैल १९९८ में लिखी थी। फिल्म का कथानक एक विश्ववविद्यालय के प्रोफेसर पर केंद्रित था, जो अपने मित्रों के समक्ष रहस्योद्घाटन करता है कि उसकी आयु वास्तव में ४० साल के बाद से, बढ़नी समाप्त हो गई थी। वह विगत १४ हजार साल से धरती पर रह रहा है।





हिंदी फिल्म मानो या न मानो में हितेन तेजवानी के साथ राजीव ठाकुर, शिखा मल्होत्रा, निहार  ठक्कर, पूर्णिमा नवानी, हांसी श्रीवास्तव, सजीव शुभा श्रीकर प्रमुख भूमिका में है। हॉलीवुड फिल्म का कथानक इतिहास के एक प्रोफेसर की विदाई के लिए उसके घर पहुंचे दोस्तों के वार्तालाप के साथ आगे बढ़ता जाता है। 





हॉलीवुड फिल्म इसीलिए क्लासिक मानी गई, क्योंकि यह फिल्म ड्राइंग रूम में बैठे लोगों के मध्य प्रोफेसर के रहस्योद्घाटन को लेकर प्रोफेसर और उसके साथियों के मध्य बौद्धिक वार्तालाप के साथ आगे बढ़ता जाता है। इसी वार्तालाप में कई सनसनीखेज खुलासे भी होते जाते है। इन्ही से फिल्म में दर्शकों की उत्सुकता बढ़ती चली जाती थी। यही कारण था कि फिल्म द मैन फ्रॉम अर्थ ने दुनिया भर में कई पुरस्कार जीते थे। २०१७ में इस फिल्म का सीक्वल द मैन फ्रॉम अर्थ होलोसने प्रदर्शित हुई।  





फिल्म मानो या न मानो के निर्देशक योगेश पगारे का दावा है कि उन्होंने हॉलीवुड के कथानक को हिंदी सिनेमा के अनुरूप लिखा है।  यह जानना रोमांचक होगा कि क्या वास्तव में कोई व्यक्ति १४ हजार साल से जीवित रह सकता है?  किन्तु, प्रश्न यह है कि संवादों पर आधारित इस फिल्म की रोचकता कितनी बन पाएगी तथा हिंदी दर्शक इस संवाद कथा से प्रभावित होंगे? अब इसका उत्तर तो ७ नवंबर को ही मिल पायेगा। 

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