क्या आप जानते हैं कि तमिल फिल्म अभिनेत्री और तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता ने हिंदी फिल्म डेब्यू किया था ? क्या आप जानते हैं कि उन्होंने नायिका के रूप में मात्र एक फिल्म में ही अभिनय किया? नहीं जानते तो इस बारे में बताते हैं।
यहाँ बताते चलें कि दक्षिण की, हिंदी फिल्म करने वाली अभिनेत्रियों में जयललिता पहली अभिनेत्री नहीं थी। उनसे काफी पहले दक्षिण की अभिनेत्रियां हिंदी दर्शकों को अपनी प्रतिभा से परिचित करा चुकी थी। अब यह बात दूसरी है कि इनमे कोई सफल हुई, कोई असफल।
वैजयंतीमाला, दक्षिण की पहली ऎसी अभिनेत्री थी, जिनका परिचय हिंदी दर्शकों से हुआ। उनका यह परिचय दक्षिण की एक फिल्म निर्माण बैनर एवीएम ने १९५१ में प्रदर्शित फिल्म बहार से कराया था। इस फिल्म के नायक करण दीवान थे। निर्देशक एमवी रामन थे।
वैजयंतीमाला के बाद, १९५५ में, अंजलि देवी हिंदी दर्शकों के समक्ष फिल्म लड़की में कामिनी की भूमिका से सामने आई। इस फिल्म के निर्माता और निर्देशक दोनों ही एवीएम और एमवी रामन थे। लड़की में वैजयंतीमाला भी अभिनय कर रही थी। इन दोनों को भारत भूषण और किशोर कुमार की नायिका बनाने का अवसर मिला।
अंजलि देवी के बाद, प्रतिभाशाली तमिल फिल्म अभिनेत्री सावित्री गणेशन ने १९५५ में प्रदर्शित फिल्म बहुत दिन हुए से हिंदी दर्शको को प्रभावित करने का प्रयास किया । बहुत दिन हुए का निर्माण जैमिनी स्टूडियोज ने किया था। फिल्म के निर्देशक एसएस वासन थे। फिल्म में मधुबाला और रतन कुमार मुख्य भूमिका में थे। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल हुई थी।
यद्यपि, दक्षिण की फिल्म अभिनेत्री वैजयंतीमाला को हिंदी फिल्मों में बड़ी सफलता मिली। वह हिंदी की सबसे बड़ी अभिनेत्री बनी। उन्होंने हिंदी फिल्मो के सभी बड़े सितारों के साथ अभिनय किया। किन्तु, अंजलि देवी और सावित्री को सफलता नहीं मिल सकी। यद्यपि यह दोनों अभिनेत्रियां अच्छी नृत्यांगना और अभिनयशील थी।
इस कड़ी में, जे जयललिता पर तो बहुत बुरी बीती। वह वैजयंतीमाला के हिंदी फिल्मों में प्रवेश के १७ साल बाद, फिल्म इज़्ज़त से हिंदी दर्शकों के सामने आई। दक्षिण के फिल्म निर्देशक टी प्रकाश राव निर्देशित फिल्म इज़्ज़त (१९६८) में धर्मेंद्र की दोहरी भूमिका थी। एक भूमिका में वह काले मेकअप में थे। तनूजा फिल्म की एक अन्य नायिका थी। इज़्ज़त में जयललिता ने एक आदिवासी लड़की झुमकी की भूमिका की थी।
ठाकुर, ठाकुर की लम्पटता और आदिवासी लड़की को गर्भवती करने के बाद शादी न करने के कथानक वाली इस घिसी पिटी फिल्म को असफलता मिली थी। यद्यपि, फिल्म का गीत संगीत काफी अच्छा और लोकप्रिय हुआ था। विशेष रूप से क्या मिलिए ऐसे लोगों से जिनकी फितरत छुपी रहे और तुम बिन दिल लगता नहीं क्या करें दर्शकों में लोकप्रिय हुए। फिल्म के संगीतकार लक्ष्मीकांत प्यारेलाल थे। गीत साहिर लुधियानवी ने लिखे थे।
यहाँ, रोचक तथ्य यह है कई फिल्म के अधिकतर गीत जयललिता पर फिल्माए गए थे। लता मंगेशकर के गए गीत जागी बदन में ज्वाला सैया तूने क्या कर डाला में जयललिता ने अपनी सेक्स अपील से हिंदी दर्शको को लुभाने का प्रयास किया था। उन पर दो अन्य गीत रुक जा ज़रा किधर को चला और सर पर लम्बा टोप लेके आएगा का फिल्मांकन भी किया गया था। फिल्म की अन्य नायिका तनूजा को केवल एक गीत तुम बिन जी लगता नहीं ही मिला था। अब यह बात दूसरी है कि एक फिल्म के तीन तीन गीत पाने के बाद भी, जयललिता हिंदी फिल्म दर्शकों को प्रभावित नहीं कर सकी। इज़्ज़त उनकी इकलौती और अंतिम फिल्म बन गई, जिसमे वह नायिका बनी थी।
यहाँ बता दें कि यद्यपि इज़्ज़त जयललिता की नायिका के रूप में इकलौती फिल्म थी। किन्तु, यह उनके हिंदी फिल्म जीवन की दूसरी फिल्म थी। उन्होंने किशोर कुमार और साधना की हिंदी फिल्म मन मौजी में एक नृत्य नाटिका की थी, जिसमे वह कृष्ण बनी थी। इन नृत्य नाटिका की राधा बॉलीवुड अभिनेत्री नाज थी।

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