Monday, 1 September 2025

चुम्बन, बिकिनी और कैबरे की त्रिवेणी थी राजकपूर की 'संगम' !

 

आग, बरसात, आवारा और श्री ४२० जैसी फिल्मों के बाद, संगम पांचवी फिल्म थी, जिसके लिए राजकपूर नौ साल बाद, निर्देशक की कुर्सी पर बैठे थे। यह फिल्म इकसठ साल पहले १८ जून १९६४ को प्रदर्शित हुई थी। फिल्म ने, एक बार फिर राजकपूर की सुपरहिट फिल्मों की श्रृंखला बना सकने वाला निर्देशक बना दिया था। यह फिल्म, हिंदी फिल्मों में कुछ नए प्रारम्भ करने वाली फिल्म थी। इस फिल्म के बाद, बॉलीवुड फिल्मों का चेहरा और चलन बदलने लगा।





 

संगम, राजकपूर की अब तक की, सबसे महंगी फिल्म थी। इस फिल्म की विदेशी शूटिंग पर राजकपूर ने उस समय डेढ़ करोड़ रुपये खर्च किये थे, जो आज की दृष्टि से एक सौ करोड़ पर बैठते है। ऐसा स्वाभाविक भी था। राजकपूर ने संगम की अधिकतर शूटिंग विदेशी धरती पर की थी। फिल्म की शूटिंग लंदन, पेरिस और स्विट्ज़रलैंड की सुन्दर दृश्यावलियों में शूट की गई थी। फिल्म की इंडोर शूटिंग मेहबूब स्टूडियो और फिल्मिस्तान में हुई थी। 





संगम इसके अतिरिक्त भी महत्वपूर्ण फिल्म थी। इस फिल्म में राजकपूर, वैजयंतीमाला और राजेंद्र कुमार ने अपने अभिनय जीवन का श्रेष्ठ अभिनय किया था। फिल्म को लेखक इन्दर राज आनंद ने जितना रोमांटिक लिखा था, राजकपूर ने उसे उतना ही रोमांटिक फिल्माया भी था। फिल्म में शंकर जयकिशन का संगीत प्रेम की रागिनियों को छेड़ने वाला भावप्रद था। इस पर सोने पर सुहागा थे शैलेन्द्र और हसरत जयपुरी के बोल। 




 

फिल्म के एक गीत हर दिल जो प्यार करेगा के सन्दर्भ में कहा जाता है कि इस गीत को परदे पर राजकपूर, वैजयंतीमाला और राजेंद्र कुमार  पर फिल्माया गया था।  संगम में, राजेंद्र कुमार के गीत ये मेरा प्रेम पत्र पढ़ कर को मोहम्मद रफ़ी ने गाया था।  इसलिए स्वाभाविक रूप से हर दिल जो प्यार करेगा की राजेंद्र कुमार की पंक्तियाँ मोहम्मद रफ़ी गाते।  ऐसा हुआ भी।  बाद में, राजकपूर ने इन बोलों को महेंद्र कपूर की आवाज में रिकॉर्ड करवाया।  इसे सुनने के बाद महेंद्र कपूर की आवाज ही रखी गई। कहा जाता है कि राजकपूर को लगा कि इस गीत में मोहम्मद रफ़ी की आवाज मुकेश पर भारी पड़ेगी। ऐसा राजकपूर बिलकुल नहीं चाहते थे। कुछ का कहना है कि मोहम्मद रफ़ी की आवाज में रोमांस तो था। किन्तु, वह करुणा नहीं थी, जो राजकपूर चाहते थे। एक तीसरा तर्क यह है कि इस समय तक लता और रफ़ी में तनाव हो गया था।  लता मोहम्मद रफ़ी के साथ गाना नहीं चाहती थी। 





 संगम, बॉलीवुड की उस समय की सबसे अधिक लम्बाई वाली फिल्म थी। इस फिल्म की अवधि ३ घंटा ५८ मिनट थी। उस समय तक इतनी लम्बी फिल्मों का चलन नहीं था। इसलिए राजकपूर ने फिल्म में दो मध्यांतर रखे थे। उस समय छविगृहों में केवल तीन शो चलाये जाते थे।  इसके बाद भी संगम ने सभी को मालामाल कर दिया।  





यह फिल्म इजराइल में भी आवारा, श्री ४२०, अमर अकबर अन्थोनी, नसीब, शोले, सत्ते पे सत्ता, कस्मे वादे, जानवर और फूल और पत्थर की तरह लोकप्रिय थी। इस फिल्म के पोस्टर हिब्रू भाषा में भी बनाये गए थे। 





संगम ने बॉलीवुड में पहली बार चुम्बन का प्रारम्भ किया। फिल्म के एक दृश्य में एफिल टावर पर राजकपूर वैजयंतीमाला से रोमांस करना चाहते है। किन्तु, वैजयंतीमाला मना करती है तो वह चुम्बनरत एक विदेशी जोड़े को दिखाते है। उस समय तक फिल्मों में चुम्बन निषेध था।  किन्तु, बताते हैं कि राजकपूर ने इस दृश्य को यह कह कर पारित करावा लिया कि चुम्बन विदेशी धरती पर विदेशी जोड़े पर फिल्माए जाने के कारण स्वाभाविक था। 





हिंदी फिल्मों में बिकिनी का प्रारम्भ भी संगम से हुआ।  फिल्म में बोल राधा बोल संगम होगा कि नहीं में नदी पर नहाती वैजयंतीमाला को बिकिनी में दिखाया था। यह गीत पेड़ पर चढ़े राजकपूर द्वारा माला के कपडे उठा लेने के बाद, दिखाया गया था।  इस फिल्म ने फिल्मों में बहुत बाद में ही सही बिकिनी का चलन  बना दिया।  





बॉलीवुड फिल्मों में कैबरे की शुरुआत भी संगम से हुई थी। गीत मैं क्या करूँ राम मुझे बुड्ढा मिल गया में वैजयंतीमाला कैबरे डांस की पोशाक पहन कर कैबरेनुमा डांस करती थी। वैजयंतीमाला ने पहली बार नायिका से कैबरे करवा दिया था। यद्यपि, कैबरे डांस अधिकतर खलनायिका पर फिल्माए गए।




  

इधर यह अफवाह थी कि संजय लीला भंसाली की रणबीर कपूर, आलिया भट्ट और विक्की कौशल अभिनीत निर्माणाधीन फिल्म लव एंड वॉर, संगम का प्रेम त्रिकोण है। किन्तु, भंसाली ने इसका खंडन किया है।





यद्यपि, भंसाली ने खंडन कर दिया है। किन्तु, यह सत्य है कि १९८८ में प्रदर्शित, निर्देशक सुनील हिंगोरानी की फिल्म राम -अवतार, १९६४ की राजकपूर की फिल्म संगम की रीमेक थी।  इस फिल्म में एक्शन अभिनेता सनी देओल ने राजेंद्र कुमार वाली भूमिका की थी। अनिल कपूर  ने  राजकपूर और श्रीदेवी ने वैजयंतीमाला की भूमिका की थी।  





अंत में एक दुखद घटनाक्रम।  संगम के प्रदर्शन के ठीक पहले रात में राजकपूर ने डिनर रखा था।  इस डिनर में फिल्म संगम के सभी कलाकार, संगीतकार, गीतकार तथा अन्य निर्माता निर्देशक उपस्थित थे।  इस पार्टी में, किसी बात पर राजकपूर और इन्दर राज आनंद के बीच बहस छिड़ गई। यह बात इतनी बढ़ी कि इन्दर राज आनंद ने राजकपूर के झापड़ मार दिया।  यह देख कर पार्टी में सन्नाटा छा गया। यद्यपि, इन्दर राज आनंद ने माफ़ी मांग ली।  किन्तु, उस समय तक नुकसान हो चुका था। पार्टी में उपस्थित हर व्यक्ति और उसके मित्रों ने लेखक इन्दर राज आनंद का बहिष्कार कर दिया।  इन्दर को एक ही रात में १८ फिल्मों से निकाल दिया गया।  इसका दुष्प्रभाव इन्दर राज आनंद के फिल्म जीवन पर पड़ा।  वह बीमार पड़ गए।  

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