Thursday, 23 October 2025

#SandeepReddyVanga का कॉप एक्शन यूनिवर्स होगी #Prabhas की #Spirit

 


निर्देशक संदीप रेड्डी वांगा के स्तर से नवीनतम स्पिरिट समाचार यह है कि प्रभास के साथ संदीप की प्रथम फिल्म स्पिरिट की शूटिंग अगले साल से प्रारम्भ हो रही है। संदीप इस फिल्म को कॉप एक्शन यूनिवर्स के रूप में फ्रैंचाइज़ी फिल्म बनाना चाहते है।  तदनुसार ही फिल्म की शूटिंग प्रारम्भ भी की जाएगी। 




संदीप रेड्डी वंगा निर्देशित फिल्म स्पिरिट मे प्रभास एक कठोर कर्तव्यनिष्ठ पुलिस अधिकारी का चरित्र कर रहे है। पूरी फ्रैंचाइज़ी फिल्म इसी चरित्र के इर्द-गिर्द एक नया सिनेमाई ब्रह्मांड विकसित करेगी। इस फिल्म में प्रभास के साथ तृप्ति डिमरी को लिया गया  हैं।





सूत्र बताते हैं कि फिल्म का निर्माण फरवरी २०२६ से प्रारम्भ होगा। पहला कार्यक्रम मुंबई में रखा गया है, जिसमें एक फ्लैशबैक सीक्वेंस का फिल्मांकन किया जायेगा।  यह प्रभास के अतीत पर केंद्रित होगा।  इसमें  में अभिनेता प्रभास  दो अलग-अलग लुक में नज़र आएंगे, जिसमें मुंबई का फ्लैशबैक भी शामिल है।  




मुंबई शिड्यूल के बाद फिल्म की शूटिंग मैक्सिको, थाईलैंड और इंडोनेशिया में होगी। यह प्रभास के चरित्र का वर्तमान समेटे होगी।  बताते हैं कि स्क्रिप्ट के सीक्वल  के लिए कथानक का विकास इसी फिल्म से होगा। इसलिए फिल्म का अंत क्लिफहैंगर वाला और उत्सुकतापूर्ण होगा।  दर्शकों में उत्सुकता होगी कि शेष भागों में क्या क्या होगा। 




मुंबई, मैक्सिको, थाईलैंड और इंडोनेशिया में फिल्म स्पिरिट की शूटिंग फिल्म के वैश्विक विस्तार वाले कथानक की ओर इंगित करने वाली है ,इससे ऐसा प्रतीत होता है कि फिल्म के कथानक में अंतर्राष्ट्रीय अपराध, महाद्वीपों के पार पीछा, या एक ऐसा मिशन शामिल है जो पुलिसवाले नायक को भारतीय सीमाओं से परे ले जाता है। 





हर फिल्म के बाद, कथानक एक महत्वपूर्ण अनसुलझे घटनाक्रम या मोड़ की ओर बढ़ेगा, जो सीक्वल के लिए मंच तैयार करेगा। इस क्लिफहैंगर का उद्देश्य दर्शकों को अगले अध्याय के लिए उत्सुक बनाए रखना होता है। सामान्य रूप से, मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स (MCU) या डीसी एक्सटेंडेड यूनिवर्स (DCEU) जैसी सफल फ्रैंचाइज़ी की रणनीति के समान है।




 रणबीर कपूर के साथ सुपरहिट फिल्म एनिमल के बाद, संदीप रेड्डी वंगा की स्पिरिट में प्रभास के साथ दीपिका पादुकोण को लिया गया था।  किन्तु, उनके नखरों के बाद, फिल्म से उन्हें बाहर कर दिया गया है।  संदीप ने, एनिमल में छोटी किन्तु कामुक भूमिका करने वाली अभिनेत्री तृप्ति डिमरी को संदीप ने प्रमोशन देते हुए स्पिरिट में प्रभास की नायिका बना दिया है।  





संदीप रेड्डी वांगा, जिन्हें अर्जुन रेड्डी और एनिमल जैसी फिल्मों में अपनी गहन और भावनात्मक रूप से प्रखर कहानियों के लिए जाना जाता है, अपनी फ़िल्म स्पिरिट में एक्शन, ड्रामा और साहसिक चरित्रों के अपने विशिष्ट मिश्रण का तड़का लगा सकते हैं। फ़िल्म में यथार्थवाद, सशक्त संवाद और नायक की मनोवैज्ञानिक यात्रा पर केंद्रित कहानी संभावित है, संभवतः नैतिक रूप से अस्पष्ट पहलू के साथ। 

अनिल कपूर नहीं बन सके 'बस कंडक्टर'


 

इसे किसका दुर्भाग्य कहा जाये - सतीश कौशिक का, अनिल कपूर का या श्रीदेवी का कि यह लोग बस कंडक्टर नहीं बन सके ? कदाचित इसे, अनिल कपूर का दुर्भाग्य कहना ठीक रहेगा।

 




बस कंडक्टर की घोषणा अनिल कपूर और श्रीदेवी अभिनीत फिल्म लाडला की सफलता के पश्चात् की गई थी। लाडला रिलीज़ से पहले अनिल-श्रीदेवी की जोड़ी की लगातार तीन फ़िल्में गुरुदेव, रूप की रानी चोरों का राजा और हीर राँझा फ्लॉप रही थीं।




 

लाडला की अप्रत्याशित सफलता के बाद, निर्माता नितिन मनमोहन  ने एक मज़दूर वर्ग का एक उच्च समाज की लड़की के प्यार में पड़ने की थीम को जोड़कर उसी सफलता को दोहराने की कोशिश का परिणाम थी इस फिल्म की घोषणा। इस फिल्म का शीर्षक बस कंडक्टर था। इस बस के कंडक्टर अनिल कपूर थे और श्रीदेवी को उनकी बस पर सवार होना था। किन्तुफिल्म की शूटिंग प्री-प्रोडक्शन चरण और प्रिंट मीडिया के लिए किए गए एक ट्रायल शूट से आगे कभी नहीं हो  पाई।

 




श्रीदेवी ने अपने लुक के लिए शॉर्ट-क्रॉप विग को ट्राई किया। १९९० के दशक की शुरुआत में वह कूल दिखती थी, लेकिन तब तक सिनेमा बदल रहा था। जो पहले कामयाब रहा था, वह अब दिलचस्पी नहीं जगा रहा था। शायद इसीलिए, नितिन मनमोहन ने इस प्रोजेक्ट को रोक दिया। 

 




पुनः १९९७ में तब्बू को मुख्य भूमिका में लेकर इस फ़िल्म को फिर से प्रारम्भ  करने की अफ़वाहें मीडिया में फैल रही थीं, लेकिन कुछ नहीं हुआ।

 




बाद में, नब्बे के दशक में ही इस फिल्म को फिर बनाने की कोशिश की गई। इस बार भी बस कंडक्टर अनिल कपूर थे।  मगर उनकी बस में तब्बू को सवार होना था।  लेकिन, यह फिल्म भी बंद करनी पड़ी। इसके बाद से अब तक किसी ने भी बस कंडक्टर बनाने या बनने की कोशिश नहीं की।

 



वैसे बताते चलें कि १९५९ मे निर्देशक द्वारका खोसला ने प्रेम नाथ को बस कंडक्टर बना कर, उनकी बस में श्यामा और मारुती को सवार करवाया था।  २००५ में माम्मूटी की बस कंडक्टर की भूमिका वाली मलयालम फिल्म बस कंडक्टर का निर्माण किया गया था।

प्रारंभ हो रहा है #StarPlus #JioHotstar #WAVESOTT पर #MahabharatEkDharmyudh



अब एआई  का युग आ गया है। एआई अर्थात कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सक्षम तकनीक से इतिहास रचने जा रहा है।  यह इतिहास हिन्दू पौराणिक कथानक महाभारत के माध्यम से रचा जाएगा।  यह एक ऐतिहासिक परियोजना है जो विश्वस्तरीय तकनीक और उत्साही कहानीकारों की दूरदर्शिता का उपयोग करके इस कालातीत महाकाव्य को पुनः प्रस्तुत कर रही है।





एआई जनित कई वीडियो, लघु फिल्मे और सीरीज सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर दिखाई दे रहे है। ऐसे में महापुराण महाभारत कैसे अछूती रहे! जिओ हॉटस्टार और स्टार प्लस ने इस दिशा में पहला पग धर दिया है। 





चैनल की सूचना के अनुसार महाभारत के चरित्रों ने, एआई के संसार में प्रवेश कर लिया है। अब महाभारत के तमाम चरित्र एआई द्वारा रचित श्रृंखलाबद्ध दर्शकों के समक्ष होंगे।  





जिओ हॉटस्टार और स्टार प्लस पर महाभारत एक धर्मयुद्ध का प्रसारण आगामी सप्ताह से, अर्थात २५ अक्टूबर से होने लगेगा।  यह पौराणिक महाश्रृंखला २५ अक्टूबर से जिओ हॉटस्टार पर स्ट्रीम होने लगेगी। अगले दिन, अर्थात २६ अक्टूबर से इस महागाथा को स्टार प्लस के दर्शक सांय ७.३० पर देख सकेंगे। 





इस महायुद्ध का प्रसारण  डीडी नेशनल पर २ नवंबर से होने लगेगा।  इससे पूर्व प्रसार भारती का ओवर द टॉप प्लेटफार्म वेव्स इसे २५ अक्टूबर से प्रसारित करने लगेगा।  





महाभारत एक धर्मयुद्ध का निर्माण जिओ स्टार और कलेक्टिव मीडिया नेटवर्क के सहकर से किया जा रहा है।  इस धर्मयुद्ध को दर्शक १०० कड़ियों में देख सकेंगे।  प्रत्येक कड़ी ३० मिनट की होगी।  





हिन्दू पौराणिक कथानक छाने जा रहे है।  नेटफ्लिक्स, १० अक्टूबर से, कुरुक्षेत्र के युद्ध पर १८ कड़ियों में, महाभारत के युद्ध के १८ दिनों और महाभारत के १८ योद्धाओं पर केंद्रित श्रृंखला प्रारम्भ कर चुका है।  अब जिओ हॉटस्टार पर पूरी महाभारत ही कृत्रिम बौद्धिक क्षमता के माध्यम से प्रसारित होने जा रही है। देखने वाली बात होगी कि दो चैनलों का यह धर्मयुद्ध क्या रंग लाता है। 

Tuesday, 21 October 2025

नहीं रहे शोले के अंग्रेजो के जमाने के जेलर #Asrani !



'शोले' और 'चुपके चुपके' सहित 350 से अधिक फिल्मों में अपनी हास्य भूमिकाओं के लिए पहचाने जाने वाले अभिनेता गोवर्धन असरानी का सांस की लंबी बीमारी के बाद २० अक्टूबर  २०२५ को मुंबई में निधन हो गया। वह ८४ साल के थे। 





गुजराती फिल्मों से, अपने फिल्म जीवन का प्रारम्भ करने वाले गोवर्धन असरानी ने खोटा पैसा, उजाला, हम कहाँ जा रहे है और हरे कांच की चूड़ियां में छोटी भूमिकाओं के बाद, उन्हें हृषिकेश मुख़र्जी का संरक्षण मिला।  मुख़र्जी की फिल्म सत्यकाम के बाद, गुड्डी फिल्म से उन्हें पहचान मिली। असरानी ने हृषिकेश मुख़र्जी की अधिकतर फिल्मों में अभिनय करने का अवसर मिला।  उनकी उल्लेखनीय फिल्मों में मेरे अपने, बन फूल, पिया का घर, बावर्ची, परिचय, सीता और गीता, कोशिश, शोर, अनहोनी, अनामिका, अभिमान, नमक हराम, अचानक, आदि जैसी लगभग ३५० हिंदी, गुजराती और बांगला फिल्मों में उन्होंने अभिनय किया। 





असरानी ने एक फिल्म हम नहीं सुधरेंगे और टीवी सीरीज कश्मकश द डाइलेमा का निर्माण किया था।  उन्होंने सात फिल्मों चला मुरारी हीरो बनने, सलाम मेमसाब, हम नहीं सुधरेंगे, दिल ही तो है और उड़ान के अतिरिक्त गुजराती फिल्म अमदावाद नो रिक्शावाला का निर्देशन किया था। 





असरानी को, इन सब भूमिकाओं से अलग पहचान मिली शोले की जेलर की भूमिका से।  हम अंग्रेजो के ज़माने के जेलर है संवाद ने असरानी को आमजान का नायक बना दिया। उनके इस चरित्र की नक़ल कर कई कलाकारों ने अपनी रोजी रोटी जमाई।  पचास साल पहले प्रदर्शित शोले के जेलर चरित्र की याद कर, गायक अभिनेता अदनान सामी ने श्रद्धांजलि देते हुए लिखा -  शोले का उनका अंग्रेजों के ज़माने के जेलर हमेशा याद रखा जाएगा! मुझे उनके साथ काम करने और समय बिताने का सौभाग्य मिला, जब मैंने उनसे अपने संगीत वीडियो 'लिफ्ट करादे' में आने का अनुरोध किया और मैं चाहता था कि वे अपने प्रसिद्ध जेलर किरदार को फिर से निभाएँ, जिसके लिए उन्होंने सहर्ष हामी भर दी। वे इतने समर्पित थे कि उन्होंने सुनिश्चित किया कि उनके पहनावे का हर पहलू शोले फिल्म के मूल निर्माण से मेल खाए, यानी विग, मूंछें और वर्दी। अपने काम के प्रति उनका उत्साह और जुनून हम सभी के लिए सीखने लायक एक मिसाल था।





उन्होंने श्रद्धांजलि देते हुए  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें एक प्रतिभाशाली मनोरंजनकर्ता बताया।  अक्षय कुमार ने असरानी के साथ फिल्म भागम भाग, दे धना धन और वेलकम से लेकर अभी रिलीज़ होने वाली फिल्म भूत बंगला और हैवान में अभिनय किया है। उन्होंने असरानी को, विभिन्न पीढ़ियों का मनोरंजन करने वाले अभिनेता बताते हुए, उनके निधन को फिल्म उद्योग की बड़ी क्षति बताया।

मणि रत्नम और कमल हासन की तमिल 'नायकन' की फ्लॉप हिंदी 'दयावान' !



प्रसिद्द फिल्म निर्देशक मणिरत्नम की कमल हासन के साथ क्राइम ड्रामा फिल्म नायकन (Nayagan) २१ अक्टूबर १९८७ को प्रदर्शित हुई थी।  यह फिल्म हॉलीवुड की, १९७२ में प्रदर्शित गैंगस्टर फिल्म द गॉडफादर और बॉम्बे के अंडरवर्ल्ड के सरगना वरदराज मुदालियर के चरित्र से प्रेरित फिल्म थी।  नायकन को बड़ी सफलता प्राप्त हुई। इस फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर दर्शकों ने ही नहीं पसंद किया, बल्कि समीक्षकों ने भी सराहना की। 





द गॉडफादर के लिए, अभिनेता मार्लोन ब्रांडो को ऑस्कर पुरस्कारों में श्रेष्ठ अभिनेता चुना गया था। किन्तु, पुरस्कारों को महत्त्व न देने वाले ब्रांडो, न तो ऑस्कर पुरस्कारों में गए, न ही उन्होंने इस पुरस्कार को स्वीकार ही किया।  किन्तु, ब्रांडो की फिल्म से प्रेरित नायकन को, भारत के सर्वोच्च ऑस्कर पुरस्कारों में तीन पुरस्कार मिले। इनमे से एक कमल हासन को श्रेष्ट अभिनेता का पुरस्कार भी था।  कमल हासन की फिल्म को १९८७ के ऑस्कर पुरस्कारों में भेजा गया था। किन्तु, यह फिल्म नामित नहीं हो सकी। 





नायकन ने बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता प्राप्त की थी। यह तमिल फिल्म २१४ दिनों तक चलती रही थी।  इस फिल्म ने तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में कई छविगृहों में रजत जयंती सफलता प्राप्त की।  टाइम पत्रिका ने इस फिल्म को अपनी आल टाइम १०० बेस्ट फिल्म में सम्मिलित किया था।





किन्तु, ३८ साल बाद, जब मणिरत्नम ने, कमल हासन के नायकन के चरित्र शक्तिवेल को लेकर फिल्म ठग लाइफ का निर्माण किया तो यह फिल्म बुरी तरह से असफल हो गई।  इस फिल्म में दिल्ली के गैंगस्टर चरित्रों का चित्रण किया गया था।  इस फिल्म में तमिल फिल्म उद्योग से सीलाम्बरासन, तृषा कृष्णा, ऐश्वर्या लक्ष्मी, अशोक सेलवन, अभिरामी और नासर जैसे सशक्त कलाकार सम्मिलित किये गए थे। फिल्म एक बड़ी खर्चीली फिल्म थी। इस पर ३०० करोड़ के आसपास व्यय किये गये थे। किन्तु, इतने अधिक बजट के बाद भी, यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर दर्शकों को आकर्षित नहीं कर सकी और मात्र २०० करोड़ का व्यवसाय ही कर सकी। 





नायकन का रीमेक भी असफल हुआ।  इस फिल्म पर हिंदी रीमेक अधिकार अभिनेता फ़िरोज़ खान ने १० लाख में क्रय कर लिए थे।  फिल्म दयावान का निर्देशन स्वयं फ़िरोज़ खान ने किया था। किन्तु, इस फिल्म के शक्तिवेलु उर्फ़ दयावान फ़िरोज़ खान नहीं, विनोद खन्ना थे।  फिल्म में फ़िरोज़ खान ने उनके मित्र की भूमिका की थी।  फिल्म में विनोद खन्ना की रोमांटिक जोड़ी माधुरी दीक्षित बना रही थी।





दयावान पर फ़िरोज़ खान ने २ करोड़ २५ लाख का व्यय किया था। फिल्म को सफल बनाने का माधुरी दीक्षित ने प्रत्येक प्रयत्न किया था। उन्होंने, फिल्म में अपनी सेक्स अपील का जमकर उपयोग किया।  उनके और विनोद खन्ना के बीच गरमगरम चुम्बन दृश्य स्मूचिंग तक जा पहुंचा था।  इस चुम्बन का पर्याप्त प्रचार भी किया गया था।  इसके पश्चात भी फिल्म ७ करोड़ का ग्रॉस ही कर सकी। 





बताते हैं कि दयावान के शक्तिवेलु स्वयं फ़िरोज़ खान ही करना चाहते थे। किन्तु, माधुरी दीक्षित के साथ अंतरंग दृश्यों में असहज अनुभव करने के कारण उन्होने अपने प्रिय मित्र विनोद खन्ना को यह भूमिका सौंप दी थी।





दयावान को, फ़िरोज़ खान की द गॉडफादर से प्रेरित दूसरी फिल्म बताया जाता है। उनकी  गॉडफादर प्रेरित पहली फिल्म धर्मात्मा थी। इस फिल्म में फ़िरोज़ खान केंद्रीय भूमिका में थे। फिल्म में उनका साथ हेमा मालिनी और रेखा के अतिरिक्त प्रेमनाथ, डैनी, रंजीत, सुधीर आदि थी। यह फिल्म बड़ी हिट हुई थी। 

हिट 'सौतन' की फ्लॉप बेटी और बंद सौतन

 


निर्माता, निर्देशक और गीतकार सावन कुमार टाक ने, निर्माता के रूप में संजीव कुमार, बलराज साहनी, इन्द्राणी मुख़र्जी, हरींद्र नाथ चट्टोपाध्याय, जगदीप और असित सेन के साथ बाल कलाकार बबलू पर केंद्रित फिल्म नौनिहाल का निर्माण कर अपनी फिल्म यात्रा प्रारम्भ की थी। उन्होंने अपनी निर्माता में रूप में दूसरी और निर्देशक के रूप में पहली फिल्म गोमती के किनारे में मीना कुमारी को निर्देशित किया था। इस फिल्म में, रहमान, आई एस जोहर, आगा, आदि बड़े सितारे थे। 





नूतन, राजेंद्र कुमार, रेखा, विनोद मेहरा और सुरेश ओबेरॉय के साथ साजन की सहेली और नूतन, राजेंद्र कुमार, विनोद मेहरा, पद्मिनी कोल्हापुरे के साथ साजन बिना सुहागन जैसी सफल फ़िल्में बनाने के बाद, सावन कुमार ने तब के सुपरस्टार राजेश खन्ना, सेक्सी टीना मुनीम (अब अम्बानी) और पद्मिनी कोल्हापुरे के साथ तीन फ़िल्में बनाने का निर्णय लिया। 




सावन कुमार इस लोकप्रिय तिकड़ी के साथ सौतन त्रयी बनाना चाहते थे।  उन्होंने अपनी पहली फिल्म का शीर्षक सौतन रखा था। इन्ही कलाकारों के साथ दूसरी फिल्म सौतन की बेटी और तीसरी फिल्म का शीर्षक सौतन की सौतन रखा गया था।  





सौतन पहली ऎसी फिल्म थी, जिसमे राजेश खन्ना, टीना मुनीम और पद्मिनी कोल्हापुरे की तिकड़ी एक साथ थी। इस फिल्म के लेखक कमलेश्वर और विजय कौल थे। अन्य भूमिकों में प्रेम चोपड़ा, शशिकला, श्रीराम लागू, प्राण और विजय अरोड़ा थे।  फिल्म का संगीत उनकी पत्नी उषा खन्ना ने दिया था। फिल्म का संपादन डेविड धवन ने किया था।  सौतन पहली फिल्म थी, जिसकी शूटिंग मॉरिशस में हुई थी।  सावन कुमार ने मॉरिशस की सुन्दर दृश्यावली को कैमरा बंद किया था। कदाचित, यही उन पर भारी पड़ा।  





राजेश खन्ना एक दिलफेंक अभिनेता थे। उन्हें फ़्लर्ट करना अच्छा लगता था। यद्यपि, टीना मुनीम उस समय तक बड़ी अभिनेत्री बन चुकी थी। देवानंद की फिल्म देस परदेस से अपने फिल्म जीवन का सफल प्रारम्भ करने वाली टीना मुनीम ने बातों बातों में, कर्ज, लूटमार, मनपसंद, आदि आधा दर्जन से अधिक सुपरहिट फिल्म दे दी थी। इसके बाद भी, टीना मुनीम ने हिट फिफ्टी फिफ्टी के अपने नायक को, डिंपल कपाड़िया से विवाहित होने के बाद भी आगे बढ़ने से नहीं रोका।





मॉरिशस से इन दोनों के गर्मागर्म रोमांस के किस्से बॉम्बे से प्रकाशित होने वाली पत्रिकाओं में खूब छपे।  सौतन की शूटिंग के दौरान, बताते हैं कि डिंपल भी मॉरिशस में ही थे। उन्होंने राजेश खन्ना और टीना मुनीम के रोमांस को निकट से देखा था। यह देखने के बाद डिंपल कभी भी राजेश खन्ना के पास वापस नहीं लौटी।  इस फिल्म में, टीना मुनीम और राजेश खन्ना  खन्ना के विवाह का दृश्य था। सावन कुमार ने इसे बॉम्बे की पत्रिकाओं में छपवा दिया।  इससे इन दोनों के  विवाह कर लेने की अफवाहें फैली। परिणामस्वरूप, सौतन के बड़ी हिट फिल्म साबित हुई।





राजेश खन्ना की, सौतन के अतिरिक्त रामावतार और अगर तुम न होते जैसी फिल्मे भी सुपरहिट हुई थी।  उधर टीना मुनीम की भी अमिताभ बच्चन, ज़ीनत अमान और रणधीर कपूर के साथ फिल्म पुकार और सुपरहिट कर्ज के नायक ऋषि कपूर के साथ फिल्म बड़े दिल वाला प्रदर्शित हुई थी।  अर्थात, जितना  राजेश खन्ना सफल हुए थे, उतनी ही टीना मुनीम भी सफल हुई थी।  स्पष्ट रूप से, डिम्पल के करियर के ऊंचान पर उनसे विवाह कर फ़िल्में छुड़वा देने वाले  राजेश खन्ना को टीना की सफलता कैसे सहन होती !





सावन कुमार ने, सौतन की सीक्वल फिल्म सौतन की बेटी से पद्मिनी कोल्हापुरे को हटा दिया था। किन्तु, फिल्म में राजेश खन्ना और टीना मुनीम की जोड़ी जयाप्रदा के साथ थी। किन्तु, इस फिल्म की शूटिंग के दौरान राजेश खन्ना और टीना मुनीम में अलगाव पैदा हो गया। इससे सावन कुमार को फिल्म की शूटिंग रोकनी पड़ी। बाद में यह फिल्म १९८९ में जीतेन्द्र, रेखा और जयाप्रदा के साथ प्रारम्भ हुई।  यह उस समय की हिट तिकड़ी थी। 





किन्तु,  कदाचित, जो बात राजेश खन्ना, टीना मुनीम और पद्मिनी कोल्हापुरे की  सौतन तिकड़ी में थी, वह बात दर्शकों को जीतेन्द्र, रेखा और जयाप्रदा की हिट तिकड़ी में भी दिखाई नहीं दी। इसके अतिरिक्त, सावन कुमार सौतन की बेटी को सौतन से आगे की कहानी बनाना चाहते थे। किंत,कास्ट में  बदलाव के बाद, उन्होंने कहानी में भी बदलाव किया।  इसका परिणाम यह हुआ कि सौतन की बेटी को अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। 





तथापि, सावन कुमार टाक ने, सौतन त्रयी की तीसरी फिल्म सौतन की सौतन के निर्माण का असफल प्रयास दो बार किया। इसके बाद, सावन कुमार ने तीसरी फिल्म बनाने का विचार त्याग दिया। 

Sunday, 19 October 2025

जाट के बाद #SunnyDeol बनेंगे #Gabru

 

सनी देओल आज अपना ६९वां जन्मदिन मना रहे है।  इस अवसर पर उन्होंने एक ३५  सेकंड का टीज़र एक्स पर जारी किया है।  यह वीडियो उनकी आगामी फिल्म गबरू के १३ मार्च २०२६ को प्रदर्शित किये जाने की घोषणा करता है।  




पूरे वीडियो में  देओल के बेहद करीबी दृश्य दिखाए गए हैं।  इन दृश्यों के साथ आगे चलकर टैग लाइन  शक्ति वह नहीं है जो आप दिखाते हैं, बल्कि वह है जो आप करते हैं से कथानक काफी कुछ स्पष्ट हो जाता है। यह शीर्षक और टैग लाइन यह भी स्पष्ट करती है कि शक्ति दिखाने की बात नहीं, बल्कि वह है जो आप करते हो। 





सनी देओल के साथ सिमरन बग्गा और प्रीत कमनी की फिल्म गबरू के निर्देशक  मराठी फिल्म निर्देशक शशांक उदापुरकर हैं।  उन की १४ फरवरी २०२० को प्रदर्शित मराठी फिल्म प्रवास की समीक्षकों ने प्रशंसा की थी तथा दर्शकों ने इस फिल्म को देखने में अपनी रूचि दिखाई थी। 






 प्रवास की कहानी प्रेरक है। यह फिल्म एक प्रौढ़ जोड़े की है, जो सोचते हैं कि जो आया है वह एक दिन जायेगा। किन्तु,  बात यह है कि आपने अपनी जिंदगी में दूसरों के लिए किया किया। यह सोच कर वह लोग दूसरे लोगों की सहायता करते हैं।  इसमें वह  असीम आनंद प्राप्त करते है। इस फिल्म में मुख्य भूमिका अशोक सराफ और पद्मिनी कोल्हापुरे ने की थी।




बताया जा रहा है कि गबरू इसी मराठी फिल्म की रीमेक फिल्म है।  फिल्म का निर्देशन  शशांक उदापुरकर  ही कर रहे है।  गबरू में, सनी देओल का साथ सिमरन बग्गा और प्रीत कमनी दे रहे है। कदाचित, फिल्म में सिमरन सनी की पत्नी बनी है और प्रीत इन दोनों के पुत्र है।  प्रीत कमनी मस्का, जर्सी और मिडिल-क्लास लव जैसी उल्लेखनीय फ़िल्में कर चुके है। 





गबरू फिल्म के निर्माता एचेलोन एंटरटेनमेंट और वितरक पीवीआर पिक्चर्स है। फिल्म का संगीत मिथुन और सतिंदर सरताज ने दिया है।  गीत सईद कादरी ने लिखे है।  





समाचार यह भी है कि पहले फिल्म के निर्माता इस फिल्म को सीधे ओटीटी पर   प्रदर्शित करना चाहते थे।  किन्तु, सनी देओल की विगत दो फिल्मों ग़दर २ और जाट की सफलता के बाद, फिल्म को छविगृहों मे प्रदर्शित करने का निर्णय लिया गया है।   

बॉलीवुड के प्रिंस प्रदीप कुमार- जहांगीर भी, शाहजहाँ भी!

 


वह, अनारकली और नूरजहाँ के प्रिंस सलीम थे। ताजमहल के शहजादा खुर्रम भी।  वह शीरीं के फरहाद थे तो हीर के रांझा भी।  वह अलीबाबा अलादीन के सिंदबाद भी थे। वह महाभारत के धनुर्धर अर्जुन भी थे। जी हाँ, आप ठीक  समझे।  ऐतिहासिक धार्मिक भूमिकाये समान क्षमता से कर पाने वाले, हिंदी फिल्मों के प्रिंस कहे जाने वाले अभिनेता प्रदीप कुमार थे।





 

अपनी फिल्म यात्रा बंगला फिल्मों से प्रारम्भ करने वाले अभिनेता प्रदीप कुमार का हिंदी दर्शकों से प्रथम परिचय बंकिम चंद्र चटर्जी के उपन्यास आनंद मठ पर इसी शीर्षक वाली फिल्म आनंद मठ से हुआ।  हेमेन गुप्ता की इस फिल्म में प्रदीप कुमार ने पृथ्वीराज कपूर, गीता बाली और भारत भूषण के साथ एक साधु जीवानंद की सह भूमिका की थी।





 

इस सह भूमिका से उन्होंने हिंदी फिल्म निर्माताओं का ध्यान आकर्षित किया। आगामी फिल्म  अनारकली में वह  बीनाराय की अनारकली के प्रिंस सलीम बने थे। इस भूमिका और उनकी खूबसूरती ने उन्हें हिंदी फिल्मों का प्रिंस बना दिया।

 




प्रदीप कुमार की सफलता अद्भुत थी। वह अनारकली के बाद, फिल्म  नागिन में वैजयंतीमाला के सनातन बन गये। उन्होंने उस समय की सभी बड़ी अभिनेत्रियों वैजयंतीमाला (नागिन, सितारा, दो दिलों के दास्ताँ), गीताबाली के साथ (आनंद मठ के अतिरिक्त अलबेली), मीना कुमारी (अद्ल ए जहांगीर, आरती, चित्रलेखा, भीगी रात, बहू बेगम, नूरजहां)  मधुबाला (राजहठ, शीरीं फरहाद, गेट वे ऑफ़ इंडिया, यहूदी की लड़की, पासपोर्ट), बीना राय (अनारकली, ताजमहल, घूँघट), नरगिस (अदालत, रात और दिन), माला सिन्हा (हैमलेट, बादशाह) के साथ फ़िल्में की।





 

पदीप कुमार, सचमुच हिंदी सिनेमा के प्रिंस थे।  उनकी कई कॉस्ट्यूम ड्रामा फिल्मे इसका प्रमाण है। प्रदीप कुमार ने, हेलमेट, बादशाह, अद्ल ए जहांगीर, हूर ए अरब, राजहठ, पटरानी,दुर्गेश नंदिनी, अरब का सौदागर, यहूदी की लड़की, पटरानी, आदि उल्लेखनीय नाम है।





 

प्रदीप कुमार ने, घूंघट, मॉडर्न गर्ल, संजोग, तू नहीं और सही, मेरी सूरत तेरी आंखे, मिटटी में सोना, तू नहीं और सही, दुनिया न माने, नया संसार, अदालत, आरती, फैशन, नया जमाना, आदि फ़िल्में सामाजिक और संदेशात्मक फिल्मे थी। 





 

प्रदीप कुमार ने निर्माता और निर्देशक की भूमिका भी निभाई। उन्होंने निर्माता के रूप में चार फ़िल्में एक शोला, पुलिस, दो दिलों की दास्तान और न भूलें हैं न भूलेंगे फिल्मों का निर्माण किया।  इनमे से बाद की दो फिल्मों का निर्देशन भी प्रदीप कुमार ने किया था। प्रदीप कुमार ने, निर्माता निर्देशक के रूप में फिल्म कल की बेटी का निर्माण  प्रारम्भ किया था। किन्तु, नवीन निश्छल और सारिका के साथ प्रारम्भ यह फिल्म शीघ्र ही डब्बा बंद हो गई। 




 

प्रदीप कुमार के नाम कई डब्बा बंद फिल्मे दर्ज है। उनकी राजू मेरा नाम, रास्ते अपने अपने, जादू ही जादू, अत्याचारी,  लाल बदन, नीलम, आदि फ़िल्में कुछ रील बनने या घोषणा होने बाद ही बंद कर दी गई।

Friday, 17 October 2025

#Jatadhara का ट्रेलर जारी !


 

#Jatadhara के खजाने की रक्षा धन पिशाची #SonakshiSinha करती है !



सुपरस्टार महेश बाबू ने आज दोपहर ३ बजे,  हैदराबाद के एएए सिनेमाघर में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में अलौकिक थ्रिलर जटाधारा का ट्रेलर लॉन्च किया। सुधीर बाबू और सोनाक्षी सिन्हा अभिनीत तथा वेंकट कल्याण और अभिषेक जैसवाल की जोड़ी द्वारा निर्देशित यह फिल्म केरल के अनंत पद्मनाभ स्वामी मंदिर के रहस्यों पर आधारित है।





यह फिल्म आगामी माह ७ नवंबर, २०२५ को हिंदी और तेलुगु में रिलीज़ होगी। ज़ी स्टूडियोज़ और प्रेरणा अरोड़ा द्वारा निर्मित, इस फिल्म में दिव्या खोसला और शिल्पा शिरोडकर जैसे कलाकार भी शामिल हैं।





ज़ी स्टूडियोज़ साउथ की प्रचारात्मक पोस्ट फिल्म के अलौकिक विषय को नवरात्रि के अष्टमी उत्सव से जोड़ती है। इसी माह १ अक्टूबर को धन पिसाची गीत की रिलीज़ से  यह स्पष्ट होता है कि यह फिल्म बुराई पर भलाई की जीत का कथानक है।





यह फिल्म अनंत पद्मनाभ स्वामी मंदिर के रहस्यों को वीएफएक्स दृश्यों में दिखाती है। मंदिर से जुड़ी चमत्कारी घटनाओं के कई वृत्तांत हैं, जैसे संकट के समय में देवता का हस्तक्षेप, शहर को प्राकृतिक आपदाओं से बचाना और इच्छाओं की पूर्ति करना।




विगत दिवस जारी फिल्म के पोस्टर में सोनाक्षी सिन्हा को सोने के बर्तन और रत्नों जैसे रहस्यमय तत्वों के बीच अलंकृत पारंपरिक पोशाक में दिखाया गया है, जो धन और राक्षसी आकर्षण का प्रतीक है। एक पोस्ट में एक उग्र महिला पात्र संभवतः सोनाक्षी सिन्हा, एक देवी जैसी भूमिका में, आग की लपटों और भीड़ के बीच नृत्य करती दिखाई दे रही हैं। पोस्ट के साथ ऊपर लिखा गया पाठ, रहस्य पैदा करने के लिए अंधेरे पर  इस चरित्र की पकड़ पर ज़ोर देता है। 





यद्यपि, मंदिर के रहस्य मंदिर की उत्पति और अवतार पर है।  किन्तु, जटाधरा का कथानक मंदिर के छुपे हुए रहस्यमय खजाने, उसकी खोज और उसकी रक्षा में लगी शक्तियों पर केंद्रित प्रतीत होता है। बताते हैं कि मंदिर के तहखाने को एक श्राप के कारण खोला नहीं जा सका है।  कहते हैं कि इस खजाने की रक्षा सर्प करते है।  ऐसा कथानक दर्शकों को आकर्षित करने वाला भी है। 

#Nagarjun की #King100 में #Tabu या #AnushkaShetty ?

 


तेलुगु फिल्म अभिनेता नागार्जुन की #किंग शीर्षक के साथ निर्मित की जा रही बहुप्रतीक्षित फिल्म का संभावित शीर्षक लॉटरी किंग हो सकता है। चूंकि,नागार्जुन को, तेलुगु फिल्म उद्योग में, किंग के संबोधन से भी बुलाया जाता है, इसलिए नागार्जुन के फिल्म जीवन की १००वी फिल्म का शीर्षक किंग१०० रखा गया है. यह फिल्म एक राजनीतिक ड्रामा बताई जा रही है जिसमें नागार्जुन दोहरी भूमिका में होंगे ।





वर्तमान में समाचार है कि फिल्म में नागार्जुन की नायिका की भूमिका के लिए चुनी गई अभिनेत्री तब्बू स्वास्थ्य कारणों से फिल्म से बाहर हो गई है । उनके स्थान पर नयनतारा को संम्मिलित कर लिया गया है। किन्तु, यह अपुष्ट समाचार है। कहा जा रहा है कि तब्बू का किंग१०० का हिस्सा होना मात्र गप थी । फिल्म में पूर्व से ही तब्बू को अनुबंधित नहीं किया गया था ।  





मान लिया जाए कि किंग १०० में तब्बू नहीं थी । तब उनके स्वास्थ्य कारणों से फिल्म से निकल जाने की अफवाह क्यों उडी ? क्या तब्बू सचमुच अस्वस्थ है ? इस अफवाह का कारण, तब्बू के पूर्व में भी अस्वस्थ होने के समाचार निकलते रहे है।





लगभग १२ साल पूर्व हिंदुस्तान टाइम्स की एक विश्वसनीय रिपोर्ट में बताया गया था कि तब्बू को हैदर के सेट पर धुएँ के कारण साँस लेने में तकलीफ़ होने के कारण तीन घंटे तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा था। यद्यपि, उन्हें उसी दिन छुट्टी दे दी गई और वे काम पर लौट आईं । इससे पता चलता है कि यह घटना सामान्य सी थी और जल्दी ही सुलझ गई। संभव है कि इस घटना ने वर्तमान अटकलों को हवा दी हो ।





ऐसा प्रतीत होता है कि स्वास्थ्य के आधार पर तब्बू का नागार्जुन की फिल्म से निकल जाना फिल्म की सेहत के लिए है। इस प्रकार से फिल्म को प्रचार मिलता है। यह भी हो सकता है कि तब्बू के साथ प्रोडक्शन सम्बन्धी समस्याओं के कारण उनके स्थान पर नयनतारा को ले लिया गया हो। किन्तु यह सब भी पीआर सक्रियता का परिणाम ही लगती है ।






तब्बू की स्वास्थ्य संबंधी अफवाह फिल्म की संभावित कास्टिंग में बदलाव के लिए एक सुविधाजनक व्याख्या प्रतीत होती है, जो संभवतः तब्बू की भलाई के बजाय प्रोडक्शन के फैसलों, शेड्यूलिंग संघर्षों या रचनात्मक मतभेदों से प्रेरित है। भारतीय सिनेमा में अक्सर प्री-प्रोडक्शन के दौरान ऐसी अटकलें लगाई जाती हैं, खासकर नागार्जुन की मील का पत्थर फिल्म जैसी हाई-प्रोफाइल परियोजनाओं के लिए।





नागार्जुन की 100वीं फिल्म की नायिका पर अभी अटकलें ही लगी जा रही है क्योंकि, अब फिल्म में एक अन्य तेलुगु फिल्म अभिनेत्री अनुष्का शेट्टी के फिल्म में नागार्जुन की नायिका बनाए जाने का समाचार है। नागार्जुन की दोहरी भूमिका को देखते हुए, यह भी संभव है कि फिल्म में दो नायिकाएं हों । यह दो नायिकाएं तब्बू, नयनतारा और अनुष्का शेट्टी में कौन हो सकता है, इसमें संदेह की गुंजाईश है । 





तब्बू ने, नागार्जुन के साथ १९९६ में प्रदर्शित रोमांटिक पारिवारिक ड्रामा फिल्म निन्ने पेल्लादाता (मैं तुमसे ही शादी करूंगा) १९९६ में अभिनय किया था। उनका नागार्जुन के साथ किंग १०० करना पुनर्मिलन जैसा होगा ।





किंग १०० में तब्बू हो या नयनतारा या फिर अनुष्का शेट्टी, फिल्म की नायिका की भूमिका महत्वपूर्ण प्रतीत होती है । यह, नायिका केंद्रीय पात्र या संभवतः एक सशक्त महिला प्रधान या एक प्रमुख भावनात्मक एंकर हो । ऎसी ही भूमिका इन प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों की अभिनय क्षमता का उपयोग भी कर सकती है ।





चर्चा यह भी है कि फिल्म में नागार्जुन के बेटों, नाग चैतन्य और अखिल अक्किनेनी कैमियो में दिखाई दें । इससे यह फिल्म एकाधिक पीढ़ी वाले परिवार पर केन्द्रित कथानक वाली हो सकती है। 

अब #PrimeVideo पर #ConjuringLastRites



असाधारण अन्वेषक एड और लोरेन वॉरेन रहस्यमयी प्राणियों से जुड़ी एक अंतिम भयावह घटना की जाँच करते हैं जिनका उन्हें इन रहस्यमय प्राणियों का सामना करना होगा।





उपरोक्त कथा सार, एड और लोरेन वॉरेन के साथ कॉन्ज्यूरिंग सीरीज़ की अंतिम बताई जा रही फिल्म कॉन्ज्यूरिंग लास्ट राइट्स का  है। यह द कॉन्ज्यूरिंग: द डेविल मेड मी डू इट (२०२१) का सीधा सीक्वल।





कॉन्ज्यूरिंग लास्ट राइट्स ने, अपने शुरुआती सप्ताहांत में दुनिया भर में १९४ मिलियन डॉलर  की कमाई की, जो किसी भी हॉरर फिल्म की सबसे बड़ी ओपनिंग थी। इस ने १९० मिलियन डॉलर की कमाई करने वाली फिल्म इट (२०१७) को पीछे छोड़ दिया । यह फ्रैंचाइज़ी की सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली फिल्म द नन (२०१८) को भी पीछे छोड़ चुकी है ।




दो घंटे १५ मिनट की अवधि के साथ, यह फिल्म द कॉन्ज्यूरिंग जगत की सबसे लंबी फिल्म बन गई है।





द कॉन्ज्यूरिंग: लास्टराइट्स प्राइमवीडियो, यूट्यूब इंडिया और गूगल टीवी पर किराए पर उपलब्ध है। 

क्या सफल हो पाएगी #Thamma के सामने #EkDeewaneKiDeewaniyat ?



प्रश्न पूछा जा रहा है और पूछा भी जाना चाहिए।  क्या एक दीवाने की दीवानियत बॉक्स ऑफिस पर हिट होगी ? क्या सैयारा के बाद रोमांस के फूल बॉक्स ऑफिस पर खिलेंगे ? क्या थम्मा के हॉररकॉम को भेद पाएगी यह रोमांस फिल्म ? 





सामान्य रूप से, बॉलीवुड से फ़िल्में  शुक्रवार को प्रदर्शित होती है।  यदि विस्तारित सप्ताहांत का लाभ उठाना हो तो फ़िल्में किसी दूसरे वार अर्थात गुरुवार या बुद्धवार को भी प्रदर्शित की जाती है। इसी महीने, यशराज फिल्म्स की, हृथिक रोशन, जूनियर एनटीआर और किआरा अडवाणी अभिनीत फिल्म वॉर २ शुक्रवार के स्थान पर, गाँधी जयंती के अवकाश का लाभ उठाने के लिए गुरुवार को प्रदर्शित हुई थी।  





किन्तु, हर्षवर्द्धन राणे और सोनम बाजवा की रोमांस ड्रामा फिल्म एक दीवाने की दीवानियत मंगलवार २१ अक्टूबर २०२५ को प्रदर्शित की जा रही है।  २१ अक्टूबर को महालक्ष्मी पूजा के बाद का दिन है।  किन्तु, सामान्यतय पूरे भारत में अवकाश रहता है। दिवाली के त्यौहार का चलन बताता है कि लक्ष्मी पूजा के दूसरे दिन, लोग घर से निकलते है। इस दिन सामान्य से अधिक भीड़ बाहर होती है।  




 

विगत वर्ष २०२४ में, दिवाली ३१ अक्टूबर को मनाई गई थी। बॉलीवुड से दो फ़िल्में भूल भुलैया ३ और सिंघम अगेन १ नवंबर २०२५ को प्रदर्शित हुई थी। इस दिन गोवर्द्धन पूजा या जमघट का त्यौहार मनाया जाता है।  एक दीवाने की दीवानियत भी जमघट को ही प्रदर्शित होने जा रही है। किन्तु, यह एक पेंच है।  भूल भुलैया ३ और सिंघम अगेन विस्तारित सप्ताहांत का लाभ उठाने के लिए गुरुवार १ नवंबर जमघट के दिन प्रदर्शित हुई थी। इससे पहले सलमान खान की फिल्म टाइगर ३ दिवाली के दिन प्रदर्शित हुई थी।  कदाचित इसी लिए एक दीवाने की दीवानियत को भी दिवाली के दूसरे दिन प्रदर्शित किया जा रहा है। 





किन्तु, यहाँ विस्तारित सप्ताहांत नहीं पड़ रहा है।  अलबत्ता, यदि फिल्म दर्शकों को आकर्षित कर पाई तो कम से कम ६ नवंबर तक कोई अन्य फिल्म मुकाबले में नहीं है। पर थम्मा का क्या !





निर्माता दिनेश विजन की, आदित्य सरपोतदार निर्देशित हॉररकॉम फिल्म थम्मा भी २१ अक्टूबर से प्रदर्शित हो रही है। इस फिल्म में हर्षवर्द्धन राणे और सोनम बाजवा के मुकाबले  आयुष्मान खुराना और रश्मिका मंदाना जैसे सितारे है।  यह सितारे तुलनात्मक  रूप से एक दीवाने की दिवानीयत के सितारों से काफी बड़े है। क्या अपेक्षाकृत बड़े सितारे और हॉररकॉमय. रोमांस ड्रामा पर भारी नहीं पड़ेगा ? 

Thursday, 16 October 2025

#AdahSharma की क्राइम थ्रिलर फिल्म #Haatak

 


 थोड़ी देर पहले, बॉलीवुड फिल्म अभिनेत्री अदा शर्मा ने अपनी २०२६ में प्रदर्शित होने वाली सच्ची घटनाओं पर आधारित क्राइम थ्रिलर डकैती फिल्म हाटक में अपनी मुख्य भूमिका की घोषणा की। फिल्म का निर्देशन नवोदित अजय के. शर्मा ने किया है और निर्माता ८ पिक्चर्स है। इस घोषणा के अनुसार फिल्म की अधिकतर शूटिंग राजस्थान और उत्तर भारत में होगी।





२०२३ में दुनिया भर में ३०३ करोड़ की कमाई करने वाली  फिल्म द केरल स्टोरी से की नायिका अदा शर्मा  जबरदस्त डकैती कथानक वाली फिल्म में शिवरंजनी आचार्य की भूमिका निभा रही हैं। यह फिल्म भी नायिका प्रधान है, जो यह स्थापित करती है कि अदा शर्मा को नायिका प्रधान फिल्मों में अभिनय करना सुहाता है। 





पोस्ट के साथ जारी मोशन पोस्टर वीडियो में शर्मा का अपराध करने वाले  लुक में ट्रेंच कोट, फेडोरा और बंदूक थामे रेगिस्तानी पृष्ठभूमि में दिखाई देती है। यह पोस्टर २८ अगस्त २०२५  को रिलीज़ हुआ था । फिल्म की टैग लाइन वन हेयस्ट नो मर्सी से स्पष्ट है कि  यह एक डकैती फिल्म है।  





फिल्म हाटक  में अदा शर्मा शिवरंजनी आचार्य  की भूमिका कर रही  है।  यह फिल्म सच्ची घटनाओं से प्रेरित, एक ज़बरदस्त डकैती कथानक पर आधारित है।  क्या यह शिवरंजनी चरित्र पुलिस है या कोई किलर का ? इसका स्पष्टीकरण नहीं किया गया है।  





हातक से निर्देशन यात्रा का प्रारम्भ कर रहे अजय शर्मा की पृष्ठभूमि लाइन प्रोडक्शन में बनी थी। उन्होंने २००५ में अमोल पालेकर द्वारा निर्देशित फ़िल्म पहेली से एक लाइन प्रोड्यूसर के रूप में अपना करियर शुरू किया। यहीं से बॉलीवुड निर्माणों में उनकी व्यापक भागीदारी की शुरुआत हुई। अजय के. शर्मा ने कई बॉलीवुड फ़िल्में, जिनमें एकलव्य, द्रोण, वीर, नन्हे जैसलमेर, बद्रीनाथ की दुल्हनिया, धड़क, टोटल धमाल, केसरी, मर्दानी २, भूल भुलैया २  और रॉकी ​​रानी की प्रेम कहानी के नाम उल्लेखनीय  हैं।   

बड़े मिया छोटे मिया को टकरा कर कुछ कुछ होता है !



 

इस साल, दिवाली सप्ताहांत पर बॉक्स ऑफिस पर दो हिंदी फ़िल्में थम्मा और एक दीवाने की दिवानीयत २१ अक्टूबर को प्रदर्शित होने जा रही है।  बजट की दृष्टि से यह फ़िल्में क्रमश १०० करोड़ और ८० करोड़ में बनी बताई जा रही है। किन्तु, स्टार कास्ट की दृष्टि से यह फ़िल्में बड़े टकराव वाली नहीं कही जा सकती है।





 

किन्तु, आज से ३७ साल पहले, दिवाली सप्ताहांत में दो बड़े बजट और बड़े सितारों वाली फिल्में प्रदर्शित हुई थी।  यह बॉलीवुड के इतिहास का पहला ऐसा बड़ा टकराव था। यद्यपि उस समय तक दिवाली को इतनी उपजाऊ नहीं माना जाता था। क्योंकि, सामान्य रूप से हिन्दू आबादी घरों की साफ़ सफाई और पूजा पाठ में लगी रहती है।





 

यह फ़िल्में थी निर्माता यश जोहर के धर्मा प्रोडक्शंस की कुछ कुछ होता है और निर्माता वसु भगनानी के पूजा एंटरटेनमेंट की बड़े मिया छोटे मिया।  कुछ कुछ होता है में बाजीगर, करण अर्जुन और दिल वाले दुल्हनिया ले जायेंगे की सुपरहिट जोड़ी शाहरुख़ खान और काजोल  रोमांस कर रहे थे। इस रोमांस को त्रिकोण दे रही थी, काजोल की चचेरी बहन रानी मुख़र्जी।  यह रानी की पहली फिल्म थी।  इस फिल्म का बजट दस करोड़ था।





 

निर्माता वसु भगनानी ने इस बड़ी फिल्म के सामने अपनी फिल्म बड़े मिया छोटे मिया को प्रदर्शित करने का निर्णय लिया था।  उनके शुभ चिंतकों ने उन्हें समझाया भी कि इतनी बड़ी जोड़ी की रोमांटिक फिल्म के सामने कॉमेडी एक्शन फिल्म को प्रदर्शित करना उचित नहीं होगा।  किन्तु, वासु को अपनी फिल्म की अमिताभ बच्चन और गोविंदा की हास्य जोड़ी पर पूरा विश्वास था।  फिल्म में रोमांस के लिए रवीना टंडन और राम्या कृष्णन को लिया गया था। फिल्म के निर्देशक डेविड धवन थे।  फिल्म का बजट १२ करोड़ था। 





 

दिवाली के सप्ताहांत में, १६ अक्टूबर को रोमांस और हास्य का टकराव हुआ।  बजट के लिहाज से बड़ा यह टकराव बड़े सितारों का टकराव भी था। दो भिन्न फिल्म शैलियों का टकराव भी था। इससे इन दोनों ही फिल्मो को बड़ा प्रचार मिला।  दर्शक दिवाली की छुट्टी पर घर से निकल पड़े। 





 

परिणामस्वरुप दोनों ही फिल्मे सुपरहिट हो गई। पहले दिन, कुछ कुछ होता है पर बड़े मिया छोटे मिया कुछ भारी पड़ी। कुछ कुछ होता है ने जहाँ ८४ लाख की कमाई की, वही बड़े मिया छोटे मिया ने १ करोड़ ८ लाख पीट डाले। बाद में, बड़े मिया से कुछ कुछ होता है आगे निकल गई।  इन दोनों फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर, बड़े मिया छोटे मिया ने ३५ करोड़ और कुछ कुछ होता है ने १०५ करोड़ का ग्रॉस किया।





 

इसके बाद से, दिवाली सप्ताहांत में सामान्य रूप से बड़ी बजट या सितारों वाली फिल्मों के प्रदर्शन का प्रारम्भ हो गया।  थम्मा और एक दीवाने की दीवानीयत इसी का परिणाम है।

संजय दत्त की हिट वास्तव की फ्लॉप सीक्वल हथियार !



निर्देशक महेश मांजरेकर की संजय दत्त को पहला फिल्मफेयर पुरस्कार दिलाने वाले फिल्म वास्तव द रियलिटी (१९९९) की सीक्वल फिल्म हथियार फेस टू फेस विथ रियलिटी तीन साल बाद, २००२ में प्रदर्शित हुई थी।  इस फिल्म में संजय दत्त रघु (वास्तव के गैंगस्टर) और रोहित (रघु के बेटे की दोहरी भूमिका की थी।  जहाँ, वास्तव को बड़ी सफलता मिली थी, वहीँ हथियार बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हुई थी। 





हथियार दिखाती थी कि गैंगस्टर रघु का बेटा रोहित, बचपन से ही पिता के गैंगस्टर होने का ताना झेलते हुए स्वयं भी गैंगस्टर बन जाता है। वह एक बड़ा गैंगस्टर तो बन जाता है, किन्तु, इसके बाद उसका व्यक्तिगत जीवन तनाव से भर जाता है। 






फिल्म वास्तव द रियलिटी में जहाँ संजय दत्त की नायिका नम्रता शिरोड़कर थी। वही सह भूमिकाओं में संजय नार्वेकर, शिवजी साटम, रीमा लागू, दीपक तिजोरी, मोहनीश बहल, आदि कलाकार सह भूमिकाओं थे।  वही हथियार फेस टू फेस विथ रियलिटी में रोहित की नायिका शिल्पा शेट्टी बन चुकी थी।  शरद कपूर, शक्ति कपूर, सचिन खेरडेकर, गुलशन ग्रोवर, आदि के नए चरित्र सम्मिलित हो चुके थे। 





यहाँ रोचक तथ्य यह है कि तीन साल पहले निर्मित फिल्म वास्तव के ७.५ लाख के बजट में तीन साल बाद ५० हजार की कमी हुई थी। इसके बाद भी, जहाँ वास्तव ने बॉक्स ऑफिस पर ७.५० लाख के बदले निर्माता को २०.७५ लाख का ग्रॉस दिया था। वही, ७ लाख में बनी हथियार फेस टू फेस विथ रियलिटी का ग्रॉस मात्र ९ लाख ६३  हजार ही हुआ था। इस प्रकार से हिट फिल्म का सीक्वल निर्माता के लिए फ्लॉप साबित हुआ।  






हथियार की असफलता का कारण कदाचित यह था कि दर्शकों को कथानक दोहराव वाला लगा था। गैंगस्टर के बेटे के भी गैंगस्टर बनना उन्हें रास नहीं आया था। पिता का परिणाम देख कर वह सीख ले सकता था।  दूसरी बात, फिल्म अपना नयापन तो खो ही चुकी थी, निर्देशक संजय मांजरेकर भी चुके हुए लग रहे थे।  






इस फिल्म की असफलता का अनुमान इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि हथियार १८ अक्टूबर २००२ को प्रदर्शित हुई थी। इसके एक सप्ताह बाद, निर्देशक अनीस बज्मी की साइकोलॉजिकल थ्रिलर फिल्म दीवानगी २५ अक्टूबर को प्रदर्शित हुई थी। अजय देवगन अक्षय खन्ना और उर्मिला मातोंडकर की मुख्य भूमिका वाली फिल्म इतनी सफल  हुई और हथियार इतनी बड़ी असफल हुई कि छविगृहों से हथियार को उतार कर दीवानगी को लगाया गया। 





हथियार (२००२) की असफलता का एक कारण और भी है। इस फिल्म से १३ साल पूर्व निर्देशक जीपी दत्ता की एक्शन अपराध फिल्म हथियार प्रदर्शित हुई थी।  इस फिल्म में, धर्मेंद्र, ऋषि कपूर, अमृता सिंह, संगीता बिजलानी, आशा पारेख, परेश रावल और कुलभूषण खरबंदा के साथ संजय दत्त भी थे।  यह फिल्म गॉड फादर से प्रेरित फिल्म थी। फिल्म में डॉन धर्मेंद्र बने थे तथा संजय दत्त भी परिस्थितियोंवश गैंग में शामिल जाते है। इस फिल्म को बड़ी सफलता मिली थी तथा संजय दत्त का अभिनय भी पसंद किया गया था। 





जैसा कि हिंदी फिल्मों के साथ होता रहता है, हथियार फेस टू फेस विथ रियलिटी में भी बदलाव हुए थे। पहले  फिल्म का  नाम प्रतिबिंब था। बाद में इसे बदल कर हथियार हथियार फेस टू फेस विथ रियलिटी कर दिया गया। पहले करीना कपूर को मुख्य भूमिका का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन उन्होंने यह भूमिका अस्वीकार कर दी।  इसके बाद, दीया मिर्ज़ा भी बहुत अधिक फीस के कारण फिल्म की नायिका नहीं बन सकी। इस के बाद, सोनाली बेंद्रे मुख्य भूमिका के लिए चुनी गई थीं। किन्तु, अंततः शिल्पा शेट्टी फिल्म में संजय दत्त की नायिका बना दी गई।





एक रोचक तथ्य और।  शिल्पा शेट्टी की पहली फिल्म बाजीगर थी। इस फिल्म में शिल्पा की सहेली रेशम टिपनिस बनी थी। रेशम टिपनिस इस फिल्म हथियार में भी  शिल्पा  शेट्टी की सहेली बनी थी।  






जान की बाज़ी १९८५ और मेरा हक़ १९८६  के बाद संजय दत्त ने हथियार में भी दोहरी भूमिका की थी । संजय दत्त इस फ़िल्म में रघु और रोहित की दोहरी भूमिकाओं में नज़र तो आते हैं, लेकिन दोनों के साथ कोई दृश्य नहीं था । ऐसा स्वभाविक था।  क्योंकि,  रघु तो रोहित के जन्म से पूर्व ही मर  चुका था। 






कुछ लोगों का तर्क है कि हथियार के प्रदर्शन से पहले ही चैनल ज़ी सिनेमा ने फिल्म के अपने चैनल से प्रसारित होने की घोषणा की थी।  ऐसे में, यदि कोई फिल्म टीवी पर प्रदर्शित होनी होती है तो स्वभाविक उसके दर्शक घट हो जायेगे और बॉक्स ऑफिस पर इसका प्रभाव पड़ेगा। किन्तु, इसे भी नकारा नहीं जा सकता कि हथियार वास्तव में कमजोर फिल्म थी, जिसे अंततः असफल ही होना था। 





यह महेश मांजरेकर ने गैंगस्टर श्रृंखला में त्रयी अर्थात तीन गैंगस्टर फ़िल्में बनाने की योजना बनाई थी ।  इन फिल्मों के नाम वास्तव द रियलिटी, हथियार फेस टू फेस विथ रियलिटी और प्रतिबिम्ब द फाइनल ट्रुथ रखा गया था। वास्तव और हथियार के बाद, प्रतिबिम्ब का निर्माण संजय दत्त (तिहरी भूमिका में) के साथ प्रीति जिंटा,  जॉन अब्राहम, नाना पाटेकर, अर्जुन रामपाल, रितेश देशमुख, जावेद जाफरी, डैनी डेन्जोंगपा, राहुल देव, इरफान, राकेश बापट, ट्यूलिप जोशी और स्वयं महेश मांजरेकर को लिया गया था। किन्तु, यह फिल्म बंद कर दी गई। 





प्रतिबिम्ब के बंद कर दिए जाने के बाद, महेश मांजरेकर ने, सलमान खान के लिए आयुष शर्मा की गैंगस्टर भूमिका वाली फिल्म अंतिम में द फाइनल ट्रुथ टैग लाइन को सम्मिलित किया था। अब यह बात दूसरी है कि सलमान खान की उपस्थिति में भी अंतिम द फाइनल ट्रुथ बॉक्स ऑफिस पर खेत रही।