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Friday, 20 March 2026

#Dhurandhar2 की #SaraArjun बनाम #Pathan की #DeepikaPadukone


 

इस समय सोशल मीडिया पर, सारा अर्जुन बनाम दीपिका पादुकोण चल रहा है।  फिल्म धुरंधर २ में सारा अर्जुन के चरित्र की तुलना पठान की दीपिका पादुकोण से की जा रही है। क्या है यह तुलना ?





धुरंधर २ को पठान के सामने रखना या सारा अर्जुन की दीपिका पादुकोण से तुलना करना, उन का काम है, जो यह समझते हैं कि धुरंधर २ एक प्रोपगैंडा अर्थात प्रचारात्मक फिल्म है।  ऐसे लोगों का मानना है कि धुरंधर २ में मुसलमानों की नकरात्मक छवि प्रस्तुत की है।





इसी कारण से, सारा अर्जुन का दीपिका पादुकोण से मुकाबला हो जाता है।  फिल्म पठान में दीपिका पादुकोण एक पाकिस्तानी थी तथा फिल्म  धुरंधर २ में सारा अर्जुन भी पाकिस्तानी है। यह दोनों ही, भारतीय जासूस की सहायता कर आतंकवादी मन्सूबों को नाकाम करती है।





धुरंधर २ को प्रचारात्मक फिल्म मानने वालों का कहना है कि फिल्म पठान में एक पाकिस्तानी रुबीना भारतीय एजेंट की मदद करती है।  धुरंधर २ में भी एक पाकिस्तानी एलिना जमाली रॉ एजेंट की मदद करती है। किन्तु, पठान को प्रचारात्मक फिल्म बताया गया तथा धुरंधर २ को गहराई वाला सिनेमा बताया जा रहा है।





दोनों ही तथ्यों में सच्चाई है। पठान और धुरंधर २ में पाकिस्तानी लड़की भारतीय एजेंट की मदद करती है। किन्तु, एक बड़ा फर्क है।  पठान को इसलिए प्रोपेगंडा फिल्म बताया गया कि यह फिल्म पाकिस्तानियों के भारत प्रेमी होने का प्रचार किया गया।  जो आईएस भारत में आतंकवाद फैलाती है, उसकी एक एजेंट को मददगार बता कर, आईएस की छवि निर्मल बनाए का प्रयास किया गया था। इसलिए इस फिल्म को प्रचारात्मक बताया गया।  इस फिल्म में आतंकवादी एक हिन्दू और पूर्व रॉ एजेंट था।  इस प्रकार से यह फिल्म हिन्दुओं  की छवि धूमिल कर मुसलमानों की छवि चमकाने का भद्दा प्रयास करने के कारण प्रचारात्मक बताई गई।  





इस दृष्टि से, धुरंधर २ की एलिना एक सामान्य मुस्लिम महिला है, जो एक बलोच युवक से प्रेम करती है। यह युवक, भारत में आतंक फैलाने वाले स्थानीय गैंग को मारता है।  एलिना नहीं जानती कि जिस युवक हमजा से वह  प्रेम करती है, वह कोई भारतीय एजेंट जसकीरत सिंह रंगी है। 





स्पष्ट है  कि मुस्लिम होते हुए भी पठान और धुरंधर २ के मुस्लिम चरित्रों में अंतर है।  पठान की रुबीना एक आईएस एजेंट है।  वह पहले से जानती है कि पठान भी रॉ एजेंट है। उसका जानते बूझते मदद करना आईएस की छवि निखारने का प्रयास ही है।  जबकि, एलिना अनजाने में उसकी मदद करती है।  यह स्वाभाविक है। शायद इसीलिए धुरंधर २ को प्रोपेगंडा फिल्म बताया जा रहा है।





यही कारण है कि सारा अर्जुन छोटी अभिनेत्री होते हुए भी दीपिका पादुकोण के बराबर खड़ी दिखाई देती है।  

पहले भी जारी हुए हैं फतवे !



बॉलीवुड में पिछले कुछ सालों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जब मुस्लिम मौलवियों या धार्मिक संस्थाओं ने अभिनेताओं, संगीतकारों, फिल्मों या उनकी  सामग्री  के विरुद्ध फतवे (गैर-बाध्यकारी धार्मिक आदेश) जारी किए हैं।





ये फतवे अक्सर इस्लामी शिक्षाओं के कथित उल्लंघन के कारण जारी किए जाते हैं, जैसे अश्लीलता को बढ़ावा देना, मूर्ति पूजा करना, समुदाय की नकारात्मक छवि दिखाना, या ऐसी गतिविधियों में शामिल होना जिन्हें 'हराम' (वर्जित) माना जाता है।






यहाँ कुछ ऐसे ही या मिलते-जुलते खास मामले दिए गए हैं प्यार  का पंचनामा और ड्रीम गर्ल की अभिनेत्री नुसरत भरूचा  के विरुद्ध ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन राजवी बालेवी ने एक फतवा जारी किया। इसमें उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर की यात्रा के दौरान उनके द्वारा हिंदू रीति-रिवाजों में शामिल होने को एक गंभीर पाप बताया गया और उनसे नमाज़ पढ़ने तथा अल्लाह से माफी मांगने की अपील की गई। इस घटना ने व्यक्तिगत आस्था, स्वतंत्रता और धार्मिक सीमाओं को लेकर नई बहस छेड़ दी।





२००७ में  एक फतवे में सलमान खान और उनके परिवार को गैर-मुस्लिम घोषित कर दिया गया था। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उन्हें घर पर एक हिंदू देवता (गणेश) की पूजा करते हुए दिखाया गया था।  इसके बाद उन्हें अपनी आस्था की पुष्टि करने के लिए 'शहादा' पढ़ने का आदेश दिया गया।





सलमान खान के विरुद्ध २००८ में, एक अन्य फतवा उनके  द्वारा मैडम तुसाद संग्रहालय में अपनी मोम की प्रतिमा (वैक्स स्टैच्यू) लगाने की अनुमति देने के लिए निशाना बनाया गया।  फतवे में शरीयत के उन नियमों का हवाला दिया गया था, जिनके तहत जीवित प्राणियों की प्रतिमा बनाना वर्जित है।





शाहरुख खान के विरुद्ध भी अतीत में कई फतवे जारी किए जा चुके हैं। इनमें २०१३ का एक मामला भी शामिल है, जब मेरठ के एक मौलवी ने बच्चों का नाम उनके (और सलमान खान के) नाम पर रखने पर आपत्ति जताई थी। मौलवी का मानना ​​था कि यह गैर-धार्मिक हस्तियों की अनुचित नकल करने जैसा है।





 मुंबई स्थित रज़ा अकादमी  ने. २०१५ में ऑस्कर विजेता संगीतकार ए.आर. रहमान के खिलाफ एक फतवा जारी किया। यह फतवा ईरानी फिल्म 'मुहम्मद: मैसेंजर ऑफ गॉड' (निर्देशक: माजिद मजीदी) के लिए संगीत तैयार करने के कारण जारी किया गया था। अकादमी का तर्क था कि इस फिल्म में ऐसे दृश्यों को दिखाया गया है, जिन्हें इस्लाम की कुछ व्याख्याओं के अनुसार वर्जित माना जाता है।





विभिन्न मौलवियों ने ऐसी फिल्मों को भी निशाना बनाया है, जिन पर मुसलमानों की नकारात्मक छवि दिखाने का आरोप लगा है। उदाहरण के लिए, कुछ दक्षिण भारतीय फिल्में यथा  कमल हासन की फिल्म विश्वरूपम उल्लेखनीय है।  हालाँकि, विश्वरूपम पर औपचारिक फतवों की तुलना में समुदाय के विरोध प्रदर्शनों के कारण ज़्यादा प्रतिबंध लगे थे।





२०१९ में, मध्य प्रदेश के धर्मगुरुओं ने फतवे जारी कर मुसलमानों से फ़िल्म 'राम जन्मभूमि' का बहिष्कार करने और उसकी मुख्य अभिनेत्री से दूर रहने की अपील की थी, क्योंकि इस फ़िल्म में अयोध्या से जुड़े विषयों को फिर से उठाया गया था।






ये फतवे आम तौर पर स्थानीय या किसी खास संस्थाओं (जैसे उत्तर प्रदेश या मध्य प्रदेश जैसी जगहों पर दारुल इफ़्ता या जमातों) द्वारा जारी किए जाते हैं। भारत में इन फतवों की कोई कानूनी मान्यता नहीं होती, लेकिन ये सामाजिक दबाव, बहिष्कार या सार्वजनिक चर्चा को प्रभावित कर सकते हैं।





ये फतवे अक्सर तब सामने आते हैं जब कोई बड़ा विवाद चल रहा हो, जिसमें सांस्कृतिक संवेदनशीलता, कलात्मक स्वतंत्रता बनाम धार्मिक भावनाएं, या मनोरंजन में अश्लीलता/अभद्रता का आरोप शामिल हो। नोरा फतेही का मामला भी इसी तरह की आपत्तियों के दायरे में आता है, जिसमें गानों या डांस सीक्वेंस में अश्लील या कामुक सामग्री पर एतराज़ जताया गया है। यह बॉलीवुड में 'आइटम नंबर' या 'आइटम सॉन्ग' की समय-समय पर होने वाली आलोचनाओं जैसा ही है। हालांकि, इतिहास में मूर्ति पूजा, किसी समुदाय के चित्रण या धार्मिक दृश्यों पर जारी होने वाले फतवों की तुलना में, इस तरह की सामग्री पर सीधे फतवे जारी होना कम ही देखने को मिलता है।





पटकथा लेखक सलीम खान ने सार्वजनिक रूप से ऐसे फतवों के चुनिंदा (selective) रवैये पर सवाल उठाया है। उन्होंने पूछा है कि ये फतवे सिर्फ़ फ़िल्म बनाने वालों या अभिनेताओं को ही निशाना क्यों बनाते हैं, दर्शकों को क्यों नहीं?

क्या बुरी फंसी #NoraFatehi ?



नोरा फतेही के खिलाफ विवादित गाने सरके चुनर तेरी सरके को लेकर एक फतवा जारी किया गया है। इस गाने में संजय दत्त भी नज़र आ रहे हैं। यह आगामी कन्नड़ फिल्म केडी द डेविल का हिस्सा है। इसी गीत पर अलीगढ़ की धार्मिक संस्था, मुस्लिम पर्सनल दारुल इफ्ता ने नोरा के खिलाफ यह फतवा तब जारी किया, जब गाने के बोल को लेकर ऑनलाइन इसकी आलोचना होने लगी। धार्मिक संस्था के अनुसार, इस गाने में ऐसी सामग्री है जिसे वे आपत्तिजनक और इस्लामी शिक्षाओं के खिलाफ मानते हैं।






इस विवाद की वजह से केंद्र सरकार ने इस ट्रैक पर बैन लगा दिया है। सोशल मीडिया पर प्रारंभिक आक्रोश अब रेगुलेटरी एक्शन में बदल गया है।  भारतीय सिनेमा में कलाकार की अभिव्यक्ति के नाम पर बड़ी बहस के कारण फिल्म की रिलीज़ में देरी हो सकती है।





इस गीत को लेकर राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी अपना क्रोध व्यक्त करते हुए, इससे जुड़े लोगों के विरुद्ध सम्मान जारी कर उन्हें आयोग के सामने २४ मार्च को उपस्थित होने के आदेश दिया है। 





नोरा फतेही ने कन्नड़ फिल्म केडी: द डेविल के सरके चुनर तेरी सरके को लेकर हुए विवाद पर अपना पक्ष इंस्टाग्राम पर विस्तृत वीडियो के माध्यम से आम जन से शेयर किया है, जिसमे मुख्य रूप से गाने के बोल और विज़ुअल्स को अश्लील या आपत्तिजनक माने जाने पर हो रहे बड़े विरोध अपना पक्ष रखा है। चूंकि, यह वीडियो पूर्व में जारी किया गया है, इसलिए इसे अलीगढ़ में मुस्लिम पर्सनल दारुल इफ्ता द्वारा जारी किए गए खास फतवे को लेकर जारी नहीं कहा जा सकता। अपने वीडियो मैसेज में उन्होंने बताया कि उन्होंने यह गाना लगभग तीन साल पहले शूट किया था, और इसके लिए इसलिए राज़ी हुईं क्योंकि यह एक बड़े प्रोजेक्ट का हिस्सा था और इसमें संजय दत्त के साथ काम करना शामिल था, जिन्हें उन्होंने एक आइकॉन बताया था। उस समय, उन्हें लगा कि यह एक आइकॉनिक ट्रैक (नायक नहीं खलनायक हूँ मैं) से प्रेरित रीमेक है। मेकर्स ने उन्हें इसका मतलब समझाया, और उस ट्रांसलेशन के आधार पर कुछ भी गलत या अश्लील नहीं लगा।





चूंकि, वह कन्नड़ (फिल्म की मूल भाषा) नहीं समझतीं, इसलिए उन्होंने टीम के बताये अर्थ पर भरोसा किया। हिंदी वर्शन ("सरके चुनर तेरी सरके") देखने के बाद, उन्हें एहसास हुआ कि इसकी बुराई होगी, उन्होंने डायरेक्टर को चेतावनी दी कि यह ठीक नहीं है, और खुद को प्रोजेक्ट और हिंदी अडैप्टेशन से दूर कर लिया। वह, यह भी दावा करती हैं कि मेकर्स ने हिंदी लिरिक्स के लिए उनकी इजाज़त नहीं ली और शायद बिना इजाज़त के AI या दूसरे बदलाव किए)।उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि वह अश्लीलता का समर्थन नहीं करतीं और फिल्ममेकर्स/प्रोड्यूसर्स से कहा कि वे ऐसे कंटेंट के लिए ज़िम्मेदार हों, न कि सिर्फ़ कलाकारों के नाम का इस्तेमाल करें। उन्होंने प्रशंसकों सहित अन्य से अपील की कि वे ट्रैक को शेयर या सर्कुलेट करना बंद कर दें ताकि इसे और ज़्यादा प्लेटफ़ॉर्म न मिले। 





किन्तु, यह विवाद लगातार बढ़ता ही जा रहा लगता है। कथित अश्लीलता को लेकर राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा नोरा फतेही, इस गीत में नोरा के सह कलाकार संजय दत्त, गीतकार रकीब आलम, निर्माता वेंकट के नारायण, निर्देशक किरण कुमार को समन भेजा गया है ।  उन्हें २४ मार्च २०२६ को अपरान्ह १२.३० पर उपस्थित होने को कहा है। 

Sunday, 23 November 2025

बंद हो गई सलमान खान और अलिया भट्ट की जोडी वाली इंशाअल्लाह !



जैसे ही मार्च २०१९ में, सलमान खान की फिल्म इंशाअल्लाह की घोषणा हुई, सलमान खान के प्रंशक दर्शक उन्हें ईद २०२० में ईदी देने के लिए तैयार हो गए। फिल्म में, सलमान खान के ४० साल के व्यवसाई की २० साल की फिल्म अभिनेत्री (आलिया भट्ट) से प्रेम की कहानी थी। इस फिल्म को ईद २०२० को प्रदर्शित होना था। मुसलमानों का यह त्यौहार खान अभिनेताओं के लिए ईदी पाने वाला जैसा होता है।





किन्तु, फिल्म अभी प्रारम्भ नहीं हुई थी। किन्तु, सलमान खान, अपने प्रिय निर्देशक संजय लीला भंसाली के साथ फिल्म करने के लिए अत्यंत उत्सुक थे। सलमान खान ने, २००७ में प्रदर्शित और बॉक्स ऑफिस पर मुंह के बल गिरने वाली फिल्म सांवरिया में एक छोटी किन्तु महत्वपूर्ण भूमिका की थी। सांवरिया की असफलता के बाद, सलमान खान ने संजय लीला भंसाली के साथ कोई फिल्म नहीं की थी।





संजय लीला भंसाली ने, सलमान खान के साथ फिल्म ख़ामोशी द म्यूजिकल और हम दिल चुके सनम जैसी फ़िल्में की थी। हम दिल दे चुके सनम को, न केवल बॉक्स ऑफिस पर सफलता मिली थी, बल्कि फिल्म में सलमान खान के अभिनय की प्रशंसा हुई थी। इसलिए, स्वाभाविक था कि सलमान खान, भंसाली जैसे निर्देशक की फिल्म करने का इच्छुक हो। किन्तु, रुकावट !





मार्च में, इंशाअल्लाह की घोषणा के पश्चात् फिल्म की शूटिंग को लेकर कोई समाचार नहीं मिला। यद्यपि, आलिया भट्ट के ट्रेनिंग सेशन करने के समाचार आ रहे थे। यकायक, अगस्त २०१९ को समाचार पत्रों में यह समाचार था कि सलमान खान की फिल्म इंशाअल्लाह अब ईद २०२० पर प्रदर्शित नहीं होगी। किन्तु, यह अवश्य सूचित किया गया कि अब यह फिल्म ईद २०२१ पर प्रदर्शित होगी।





सलमान खान और संजय लीला भंसाली की फिल्म इंशाअल्लाह का जीवन दो घोषणाओं से अधिक जीवित नहीं रह सका। इस फिल्म को छह महीने के अंदर, सितम्बर २०१९ को बंद कर दिए जाने की घोषणा कर दी गई। कारण यह बताया गया कि सलमान खान और संजय लीला भंसाली के मध्य क्रिएटिव डिफरेंस पैदा हो जाने के कारण बंद कर दी गई है। इस प्रकार से आलिया भट्ट के हाथों से सलमान खान की नायिका बनने का अवसर निकल गया।





इंशाअल्लाह के बंद हो जाने का सबसे अधिक दुःख आलिया भट्ट को हुआ। बताते हैं कि इंशाअल्लाह के बंद हो जाने के समाचार से आलिया भट्ट बहुत रोई चिल्लाई थी। तब संजय लीला भन्साली ने उन्हें गंगूबाई काठियावाड़ी की लॉली पॉप थमा कर उन्हें बहला दिया था। अब यह बात दूसरी है कि आलिया भट्ट आज भी इस उम्मीद में है कि संजय सर एक दिन, सलमान खान के साथ या उनके बिना इंशाअल्लाह का निर्माण करेंगे।





इंशाल्लाह बनेगी या नहीं, कहा नहीं जा सकता है। क्योंकि, इंशाअल्लाह के बाद से, संजय लीला भंसाली रणवीर सिंह के साथ दीपिका पादुकोण की जोड़ी बना कर गोलियाँ की रास लीला रामलीला, बाजीराव मस्तानी और पद्मावत बना चुके है। उन्होंने आलिया को भी गंगूबाई काठियावाड़ी की गंगूबाई बना कर, राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दिलवा दिया है।





इस समय, संजय लीला भंसाली फिल्म लव एंड वॉर के निर्माण में व्यस्त है। यह फिल्म आलिया भट्ट के लिए घरेलु परियोजना जैसी है। क्योंकि, फिल्म में आलिया भट्ट के एक नायक उनके पति रणबीर कपूर है। उनके दूसरे नायक विक्की कौशल है। संजय ने, विक्की कौशल को फिल्म पद्मावत में दीपिका पादुकोण की पद्मावती के पति की भूमिका दी थी। किन्तु, दीपिका की आपत्ति के बाद, विक्की के स्थान पर शाहिद कपूर को ले लिया गया था।

Wednesday, 28 May 2025

#DeepikaPadukone की अपील : सुपरहिट क्यों नहीं हुई #Fighter और #SinghamAgain ?



इस समय, सबसे अधिक चर्चा में हैं तृप्ति डिमरी और उनका पारिश्रमिक।  बताया जा रहा है कि तृप्ति ने स्पिरिट के लिए केवल चार करोड़ लिए है। अर्थात दीपिका पादुकोण के पारिश्रमिक से १६ करोड़ कम और फिल्म की कमाई से हिस्सा भी नहीं।  इस प्रकार से फिल्म के निर्माता को फिल्म की एक रील बनने से पहले ही १६ करोड़ का विशुद्ध लाभ हो गया।

 



दीपिका पादुकोण के समर्थक तर्क दे रहे हैं कि तृप्ति डिमरी ने १६ करोड़ कम लिए तो क्या हुआ ! फिल्म ने दीपिका पादुकोण की वजह से बॉक्स ऑफिस पर प्रभाव खो दिया है। तृप्ति डिमरी तो एनिमल में कामुकता से हिट हुई अभिनेत्री है।  उनकी दीपिका पादुकोण के बराबर बॉक्स ऑफिस अपील नहीं।  वह बॉक्स ऑफिस फिल्म को शून्य योगदान देंगी।

 



किन्तु, ऐसा कहने वाले भूल जाते हैं कि एनिमल के लिए रणबीर कपूर के बाद तृप्ति डिमरी की सबसे अधिक चर्चा हुई।  उनके सेक्सी दृश्यों के कारण एनिमल को अतिरिक्त दर्शक मिले।  वैसे भी बॉलीवुड या टॉलीवूड की एक्शन फिल्मों में नायिका के करने के लिए होता ही क्या है, सिवाय अंग प्रदर्शन और कामुकता दिखाने के।  शाहरुख़ खान की फिल्म पठान में दीपिका पादुकोण ने किया ही क्या था?

 




यदि मान लिया जाए कि दीपिका पादुकोण की बॉक्स ऑफिस पर अपील है।  उन्होंने २०२३ में पठान और जवान जैसी हजार करोडिया फ़िल्में की है।  किन्तु, इससे क्या ? यदि, कल्कि २८९८ एडी सचमुच दीपिका पादुकोण के कारण बॉलीवुड में अतिरिक्त दर्शक बटोर सकी तो वह फिल्म की नायिका होते हुए भी हृथिक रोशन की फिल्म फाइटर और अजय देवगन की फिल्म सिंघम अगेन को सुपरडुपर हिट क्यों नहीं बना सकी ?




कहने का तात्पर्य यह कि फिल्म के स्पिरिट के बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन पर तृप्ति डिमरी के आ जाने का बावजूद उतनी ही अंतर पड़ेगा, जितना दीपिका पादुकोण के फिल्म में होने से पड़ता।  अर्थात, बॉलीवुड बॉक्स ऑफिस पर दीपिका पादुकोण की अपील एक छपाक जितनी है।