Sunday, 31 August 2025

'गोविंदा' गीत को बॉलीवुड में लोकप्रिय बनाने वाली ब्लफ मास्टर



फिल्म निर्माता और निर्देशक मनमोहन देसाई, एक ऐसे निर्देशक थे, जिन्होंने बिछुड़ने मिलने के विषय को बॉलीवुड फिल्मों में लोकप्रिय बनाया।  उन्होंने स्वयं भी भाइयों के अपने परिवार से बिछुड़ने के कथानक को एक के बाद एक कई फिल्मों में भुनाया।  बाद में, इस प्रकार का कथानक दूसरे फिल्मकारों ने भी अपनाया और कई अभिनेताओं ने इससे बॉलीवुड में अपने पैर जमाये। 






निर्देशक के रूप में, मनमोहन देसाई की तीसरी फिल्म थी ब्लफ मास्टर।  यह फिल्म बिछुड़े भाइयों या परिवार पर नहीं थी। क्योंकि, बिछुड़े भाइयों का फार्मूला तो नौ साल बाद रामपुर का लक्ष्मण में आजमाया गया। किन्तु, ब्लफ मास्टर से मनमोहन देसाई ने एक नया ट्रेंड स्थापित कर दिया।  यह ट्रेंड था गोविंदा गीत का।





मनमोहन देसाई और उनके भाई सुभाष देसाई, इस फिल्म ब्लफ मास्टर को कम बजट से बनाना चाहते थे। तभी तो उन्होंने फिल्म को श्वेत श्याम रंगों में बनाया।  किन्तु, ब्लफ मास्टर का बजट समय के साथ बढ़ता ही चला गया। ऐसा दिलीप कुमार के, फिल्म की नायिका सायरा बानू को लेकर फिल्म पर निगाह रखने, शूटिंग में बाधा डालने और डिमांड करते रहने के कारण बढ़ता चला गया। 





ब्लफ़ मास्टर, एक बेकार और धोखेबाज युवा अशोक की थी। वह एक सुन्दर युवती के प्रेम में फंस जाता है। किन्तु, वह बेकार है।  इसलिए वह धोखाधड़ी कर पैसे कमाना चाहता है। किन्तु, शीघ्र ही से मालूम हो जाता है कि वह गलत रास्ते पर है। 





इसी फिल्म के एक घटनाक्रम में गोविंदा आला रे गीत फिल्म में आया था।  इस गीत का संगीतबद्ध किया था और राजेंद्र कृष्ण ने  लिखा था।  इस गीत को गोविंदा की टोली के साथ शम्मी कपूर के साथ फिल्माया गया था।  गीत के गायक मोहम्मद रफ़ी थे।  उन्होंने इस गीत को पूरी मस्ती के साथ गाया था।  दिलचस्प तथ्य यह था कि गोविंदा आला की कोरियोग्राफी नहीं की गये थी।  इसे सजीव फिल्माया गया था। शम्मी कपूर की विशेषता थी कि वह अपने पर फिल्माए जाने वाले गीत के स्टेप्स शूटिंग के समय ही तय करते थे।  यह गीत गिरगांव चौपाटी पर फिल्माया गया था।  





इस फिल्म के बनने की कहानी भी काफी दिलचस्प है।  शम्मी कपूर, जंगली के बाद, सुबोध मुख़र्जी के साथ ब्लफ मास्टर शीर्षक के साथ एक फिल्नना चाहते थे। किन्तु, जंगली के भुगतान को लेकर दोनों में विवाद काफी बढ़ गया। इस पर क्रोधित शम्मी कपूर ब्लफ मास्टर शीर्षक लेकर बाहर निकल गए और यह शीर्षक मनमोहन देसाई को सौंप दिया।  जब मनमोहन देसाई ने फिल्म बनाने की सोची तब शम्मी कपूर को बुला कर फिल्म में काम करने के लिए कहा।






ब्लफ मास्टर, नायक और नायिका के रूप में शम्मी कपूर और सायरा बानू की अंतिम फिल्म थी। वास्तविकता तो यह थी कि इन दोनों ने केवल दो फिल्मे की।  जंगली के दौरान शम्मी कपूर द्वारा लोगों के सामने डाँट देने का सायरा ने इतना बुरा माना कि उन्होंने फिर शम्मी कपूर के साथ फिल्म करने से मना कर दिया।  बाद में, ३३ साल बाद यह दोनों फिल्म जमीर में दिखाई दिए।  पर अवतार बदल चुके थे। शम्मी कपूर पिता और सायरा बानू उनकी बेटी बनी थी।  

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