बेताब फिल्म से बॉलीवुड में प्रवेश करने वाले अभिनेता सनी देओल, हिट और फ्लॉप के दंश से जूझते रहे है। १९८३ में, बेताब बड़ी हिट फिल्म साबित हुई। लेकिन, उनकी १९८४ में प्रदर्शित सोहनी महिवाल, सनी और मंजिल मंजिल फ्लॉप हो गई। १९८५ में राहुल रवैल की फिल्म अर्जुन ने सनी देओल का सिक्का जमाया। किन्तु, इसके बाद ज़बरदस्त, सवेरे वाली गाड़ी, सल्तनत और समंदर फ्लॉप हो गई।
सनी के साथ हिट और फ्लॉप फिल्मों का सिलसिला चलता रहा। २००१ में तो अभूतपूर्व हुआ था। सनी देओल की १५ जून २००१ को प्रदर्शित फिल्म ग़दर एक प्रेम कथा, आमिर खान की फिल्म लगान को बुरी तरह से पछाड़ कर आल टाइम हिट फिल्म साबित हुई थी। किन्तु, इसके बाद सब कुछ नकारात्मक ही हुआ। उनकी यह रास्ते हैं प्यार के और इंडियन, ग़दर के हैंगओवर में बह गई। किन्तु, उनके लिए दुःस्वप्न साबित हुई फिल्म कसम। इस डाकू फिल्म की असफलता को सनी देओल आज याद भी नहीं करना चाहते।
वास्तव में कसम फिल्म अजीबोगरीब पेंच में फंसती निकलती रही। यह फिल्म पहले तो शीर्षक बदलाव में फसी रही। फिल्म का निर्माण पत्थर और पायल शीर्षक के साथ हुआ था। इस बीच, सनी देओल के पिता धर्मेंद्र की डाकू फिल्म पत्थर और पायल प्रदर्शित हो गई। अब फिल्म का शीर्षक बदला जाना बहुत आवश्यक हो गया था। फिल्म का नाम बदल कर काल करम और विधाता रखा गया। यह नाम जमा नहीं तो इसे बदल कर काली शंकर कर दिया गया। अंत में फिल्म कसम शीर्षक के साथ प्रदर्शित हुई।
बिंदिया और बन्दूक जैसी सुपरहिट फिल्म निर्देशित कर अपने फिल्म जीवन का प्रारम्भ करने वाले शिबू मित्र ने, खून की कीमत, ज़ोरो, शंकर दादा, आखिरी गोली, राखी की सौगंध, पांच कैदी, इंसाफ मैं करूंगा, दुर्गा, माँ कसम, सीतापुर की गीता, इलज़ाम, आग ही आग, पाप की दुनिया, कसम वर्दी की, आखिरी गुलाम, वीरता, आदि बड़ी हिट फिल्मे बनाई थी। किन्तु, कसम की बुरी असफलता ने उन्हें निर्देशन से संन्यास लेने के लिए विवश कर दिया।
कसम के संगीतकार कल्याणजी आनंदजी थे। किन्तु, उनके फिल्म को छोड़ देने के बाद इसका संगीत कल्याणजी के बेटे विजय शाह उर्फ़ विजु शाह ने दिया।
कसम ने सोनू वालिया और नीलम का करियर भी समाप्त कर दिया। नीलम की यह अंतिम फिल्म थी। सोनू वालिया को २००८ में प्रदर्शित जय संतोषी माँ में देखा गया था। नीलम की अंतिम फिल्म वास्तव में हम साथ साथ है (१९९९) थी. किन्तु, कसम के विलम्ब से प्रदर्शित होने के कारण यह फिल्म नीलम की अंतिम फिल्म नहीं बन सकी।
शिबू मित्रा ने, १९८७ में सनी देओल, चंकी पांडेय और नीलम के साथ पाप की दुनिया जैसी बड़ी हिट फिल्म बनाई थी। किन्तु, वह इसी तिकड़ी के साथ कसम में बुरी तरह से असफल हुए। यहाँ दिलचस्प तथ्य यह है कि फिल्म पाप की दुनिया के क्लाइमेक्स में चंकी पांडेय की मौत हो जाती है, जबकि कसम में सनी देओल गोली का शिकार हो जाते है। कदाचित सनी का यो मारा जाना दर्शकों को पसंद नहीं आया था।
कसम को भिन्न शीर्षक के साथ १९९० में प्रारम्भ किया गया था। इस फिल्म में सनी देओल को मेहमान भूमिका ही करनी थी। समय और शीर्षक बदलने के साथ साथ फिल्म में सनी देओल की भूमिका की लम्बाई बढ़ती गई। अंत में फिल्म सनी देओल की कसम के रूप में प्रदर्शित हुई।
इस फिल्म को बंगलादेश में बांगला भाषा में सहयोगी सितारों के बदलाव के साथ फूल और पत्थर शीर्षक से प्रदर्शित किया गया था। इस फिल्म को यू ट्यूब पर देखा जा सकता है। दिलचस्प तथ्य यह है कि जहाँ हिंदी कसम बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हुई थी, बांगला में डब फूल और पत्थर हिट साबित हुई।

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