आज बॉलीवुड में सलमान खान, शाहरुख़ खान और हृथिक रोशन एजेंट बने यूनिवर्स बना रहे है। इन्हे बड़े प्रोडक्शन हाउस का संरक्षण मिला है। सेट्स, लोकेशंस और प्रचार में पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है।
किन्तु, बॉलीवुड के एजेंट अविनाश उर्फ़ टाइगर, पठान और कबीर बड़े परदे के पहले एजेंट नही, न ही इनकी फिल्मो से बना स्पाई यूनिवर्स पहला है। इनसे दशकों पहले स्पाई या एजेंट फिल्मे बनी है। सीक्वल भी बने है। वह भी तब, जब बड़े फिल्म निर्माता इस प्रकार विषयों को बी ग्रेड की फिल्मों का विषय मानते थे।
ऎसी एक फिल्म थी सुरक्षा। यह फिल्म २२ जून १९७९ को प्रदर्शित हुई थी। इस फिल्म में मिथुन चक्रवर्ती एजेंट गोपी उर्फ़ जी ९ बने थे। उनकी नायिका रंजीता थी। उस समय रंजीता से मिथुन का रोमांस सुर्खियां पा रहा था। यह फिल्म तेज सप्रू की पहली बॉलीवुड फिल्म थी। अन्य भूमिकाओं में जगदीप, प्रेमा नारायण, अरुणा ईरानी, माला जग्गी, सुरेश ओबेरॉय और इफ़्तेख़ार प्रमुख भूमिकाओं में थे।
सुरक्षा को, राजवंश और रमेश पंत ने लिखा था। फिल्म के निर्देशक रवि नगाइच थे। रवि कांत नगाइच ने, जीतेन्द्र को लेकर पहली स्पाई फिल्म फ़र्ज़ (१९६७) निर्देशित की थी। उन्होंने राजेश खन्ना के साथ द ट्रेन और मेरे जीवन साथी तथा धर्मेंद्र के साथ एक और स्पाई फिल्म कीमत निर्मित की थी।
सुरक्षा का कथानक एजेंट गोपी, जो जी ९ के रूप में प्रसिद्द था, के साहसिक अभियान की थी। जिसमे वह सीबीआई के एक अन्य एजेंट की गुमशुदगी का पता लगाता है। अपने इस अभियान में उसे खतरनाक महिलाओं, सांप और बिच्छुओं और ह्यूमन रोबोट का सामना करना पड़ता है। इसमें प्रेमा नारायण और माला जग्गी अंग प्रदर्शन कर गोपी को अपने जाल में फंसना चाहती थी।
कहने का तात्पर्य यह कि फिल्म विशुद्ध मसाला थी। मिथुन चक्रवर्ती एजेंट होते हुए भी कमर मटका मटका कर डिस्को कर रहे थे। एक्शन भरपूर थे। अंग प्रदर्शक गीत प्रस्तुत करती महिलाएं थी। जीवन जैसे खतरनाक खलनायक भी थे। चकाचौंध करने वाले सेट्स थे। यही कारण था कि फिल्म को बहुत सफलता मिली।
इस फिल्म पर फिल्म के निर्माता बी सुभाष और रवि नगाइच ने फिल्म के निर्माण में ९० लाख रुपये व्यय किये थे। फिल्म ने पहले दिन तीन लाख का व्यवसाय किया था। फिल्म का पहला सप्ताह १८ लाख का हुआ था। फिल्म के भारतीय बॉक्स ऑफिस पर एक करोड़ ७५ लाख का व्यवसाय किया। इसका पूरे विश्व के बॉक्स ऑफिस पर व्यवसाय २ करोड़ ६० लाख का था।
मिथुन चक्रवर्ती की इस एजेंट फिल्म का महत्त्व इस दृष्टि से है कि फिल्म उस साल प्रदर्शित हुई थी, जिस साल अमिताभ बच्चन की सुहाग, काला पत्थर और मिस्टर नटवरलाल, ऋषि कपूर की सरगम, अमोल पालेकर की गोलमाल, सितारों की भरमार वाली फिल्म जानी दुश्मन, आदि प्रदर्शित हुई थी। इसके बाद भी सुरक्षा ने १९७९ की १० सबसे सफल फिल्मों में ९वे स्थान पर रहने में सफलता प्राप्त की थी।
सुरक्षा की सफलता के बाद, रवि नगाइच ने एक अन्य जी ९ फिल्म वारदात का निर्माण किया था। यह फिल्म १९८१ में प्रदर्शित हुई थी।

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