Saturday, 30 August 2025

मीना कुमारी नहीं, सुरैया थी देवानंद की 'सनम'



निर्माता और निर्देशक नन्दलाल जसवंत लाल की १९५१ में प्रदर्शित फिल्म सनम एक रोमांटिक हास्य फिल्म बताई जाती है।  यह हिंदी फिल्मों में हास्य के प्रवेश का प्रमाण थी। इस फिल्म में देवानंद और सुरैया की जोड़ी के साथ मीना कुमार, गोप, केे एन सिंह, प्रतिमा देवी और जिल्लो प्रमुख भूमिका में थे।  इस फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर औसत सफलता मिली थी।





सनम, शीर्षक के अनुरूप रोमांस फिल्म थी।  उस समय की लोकप्रिय देवानंद और सुरैया की जोड़ी फिल्म में एक दूसरे से प्रेम करने वाले योगेन और साधना बने थे।  योगेन बेकार किन्तु पढ़ा लिखा ईमानदार युवा है।  वह एक दुर्घटना के कारण एक व्यक्ति की मृत्यु का उत्तरदाई ठहरा दिया जाता है। सरकारी वकील उसे सजा दिलवा देता है। सरकारी वकील साधना का पिता है।  स्पष्ट है कि पिता पुत्री के मध्य टकराव होगा ही। किन्तु, अंत में सब ठीक हो जाता है।





फिल्म में एक अन्य रोमांटिक जोड़ी थी। यह जोड़ी गोप और मीना कुमारी की थी।  रसिकलाल रानी से प्रेम करता है।  किन्तु रानी को यह नहीं मालूम।  क्योंकि वह भी योगेन को एकतरफा प्रेम करती है। अब चूंकि, फिल्म को सुखांत होना है, इसलिए फिल्म में रानी और रसिकलाल मिल जाते है। उस समय इस सुखांत को, आधुनिक अंत बताया गया था। 





सनम का संगीत विशिष्ट था।  इस फिल्म का संगीत हुस्नलाल भगतराम ने दिया था। फिल्म में नौ गीत थे।  इन गीतों को शमशाद बेगम, बातिश, लता मंगेशकर और मोहम्मद रफ़ी ने गाया था।  फिल्म में गायिका अभिनेत्री सुरैया ने भी आठ गीत गाये थे।  किन्तु, यह समय नई गायिकाओं के आ जाने के बाद सुरैया के गीतों के उतार का समय था। 





सनम, गायिका अभिनेत्री सुरैया की गायिकी का ही नहीं, उनके नायिका के रूप में उतार का भी समय था।  उस समय मधुबाला और नरगिस का सिक्का जमाना शुरू हो गया था। मीना कुमारी तो उनके साथ सह भूमिका में थी ही। यद्यपि, सनम के पश्चात् भी सुरैया फिल्मे करती रही। किन्तु, अब वह दर्शक खोती जा रही थी। देवानंद भी मधुबाला, मीना कुमार, उषा किरण, कल्पना कार्तिक, गीता बाली, नलिनी जयवंत, बीना राय, वहीदा रहमान, सुचित्रा सेन,  आदि के साथ हिट फ़िल्में दे रहे थे। १९६३ में प्रदर्शित फिल्म रुस्तम सोहराब के बाद सुरैया ने फिल्म उद्योग को छोड़ दिया। 





हुस्नलाल भगतराम,  वास्तव में दो भाई हुस्नलाल और भगत राम थे।  उनके एक चचेरे बड़े भाई अमरनाथ भी फिल्म संगीत दिया करते थे।  अमरनाथ, हुस्नलाल और भगत राम ने फिल्म मिर्ज़ा साहिबा, पंजाब के मिर्ज़ा और साहिबान की प्रेम कहानी पर आधारित थी।  इस फिल्म में ११ गीत थे।





हुस्न्लाल भगतराम की जोड़ी ने कुल २१ फिल्मों में ३३८ धुनें तैयार की थी। वह ऐसे संगीतकारों में से थे, जिन्होंने गायक- अभिनेता अभिनेत्री के दौर से पार्श्व गायन तक के दौर की, फिल्मों में संगीत दिया। इनकी अंतिम फिल्म अप्सरा १९६१ में प्रदर्शित हुई थी। 





सनम की देवानंद और सुरैया की जोड़ी पहली बार १९४८ में प्रदर्शित फिल्म विद्या में बनी थी।  इस फिल्म के बाद इन दोनों ने, जीत, शायर, अफसर, नीली, सनम, दो सितारे और सनम सहित सात  फिल्मों में अभिनय किया था। यह सातों फिल्में बॉक्स ऑफिस पर बड़ी हिट साबित हुई थी।  कैसी विडम्बना थी कि देवानंद से सम्बन्ध टूटने के बाद, सुरैया की फिल्मे बॉक्स ऑफिस पर असफल होने लगी। 

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